Friday, May 15, 2015

डेटा को पढ़ा जाता तो भूकंप के आने से पहले मिल जाती भूकंप की जानकारी

 डेटा को पढ़ा जाता तो भूकंप के आने से पहले मिल जाती भूकंप की जानकारी

- पटना मौसम विभाग में लगा है भूकंप का जीपीएस
- चार महीने पहले लगे इस जीपीएस सिस्टम के डेटा को पढ़ने वाला कोई नहीं
संवाददाता, पटना
बिहार में भूकंप के झटके आयेंगे. लगातार कई दिनों तक भूकंप के झटकों का सामना करना पड़ सकता है. पृथ्वी के नेपाल और बिहार के भूगर्भ में ऐसी हलचल चल रही है जिसका अनुमान जीओलॉजी के साइंटिस्ट को कई महीनों पहले ही लग गया था. भूकंप की जानकारी समय से मिल जायें. पृथ्वी में अंदर जो भी हलचल होगी. इससे तुरंत अपडेट होना संभव हो जाये. हमारे भूगर्भ में अभी किस तरह से काम हो रहा है. भविष्य में इसका प्रभाव कहां पर और कैसे पड़ने जा रहा है. नेपाल और बिहार के आसपास भूकंप के इस आशंका को ध्यान में रख कर भारत सरकार और केंद्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के सहयोग से पटना मौसम विभाग में एक जीपीएस सिस्टम लगाया गया था. यह सिस्टम सीधे सेटेलाइट से जुड़ा हैं. पटना मौसम विज्ञान केंद्र की माने तो इस जीपीएस सिस्टम को पृथ्वी के भूगर्भ से कनेक्ट किया गया है. इससे पृथ्वी के अंदर जो भी कुछ एक्टिविटी होगी, इसे आसानी से पढ़ा जा सकेगा.
-  डेटा तैयार कर रहा हर दिन जीपीएस सिस्टम
 यह जीपीएस सिस्टम नेविगेशन फाइल और डेटा फाइल तैयार करता है. हर दिन पृथ्वी के अंदर होने वाले हलचल के बारे में जीपीएस सिस्टम में जानकारी भी आ रही है. 24 घंटे काम करता इस जीपीएस सिस्टम में डेटा तो हर दस मिनट पर आता है, लेकिन इसे पढ़ पाना और इसकी जानकारी पर एनैलाइसिस करने में पटना मौसम विभाग सक्षम नहीं है. मौसम विज्ञान केंद्र की माने तो इस सिस्टम के डेटा फाइल और नेविगेशन फाइल को पढ़ने के लिए एक कोड नंबर की जरूरत होती है. यह कोड नंबर होगा तभी डेटा फाइल मौसम विभाग को उपलब्ध होगा. यह डेटा फाइल को पढ़ने के लिए जो कोड चाहिए वो डा. डी रॉय के पास ही उपलब्ध है. अगर कोड नंबर पता होता तो इस डेटा फाइल को पढ़ने के बाद भूकंप का पूर्वानुमान मौसम विभाग द्वारा लगाया जा सकता था. यह जीपीएस सिस्टम के डेटा को मौसम विभाग को भी जानकारी मिले, इसके लिए मौसम विभाग की ओर से डा. डी रॉय से संपर्क करने की भी कोशिश की गयी है. लेकिन अभी तक डा. डी रॉय ने कोई जवाब नहीं दिया है.
- भूकंप के आशंका से ही लगाया गया था जीपीएस सिस्टम
पटना में भूकंप की संभावना बन रही है. भूकंप वाले चिहिन्त स्थान में ही पटना भी आता है. ऐसे में अगर कोई सिस्टम लगाया जायें जिसकी मदद से कुछ देर पहले भूकंप की जानकारी मिल जायेगी. भारत सरकार और केंद्रीय मौसम विभाग की मदद से पटना के मौसम विभाग में एक जीपीएस सिस्टम लगाया गया. आइएसएम धनबाद के जूओलॉजी के प्रोफेसर डा. डी रॉय को यह जिम्मेवारी दी गयी. डा. डी रॉय ने पटना एयरपोर्ट स्थित मौसम विज्ञान केंद्र में इस जीपीएस सिस्टम को लगाया. इस प्रोजेक्ट को लगाने में लगभग एक महीने का समय लगा. इस प्रोजेक्ट को डा. डी रॉय ने स्टैबलिस तो कर दिया. लेकिन इसके डेटा आदि को कैसे पढ़ा जायें या इसकी जानकारी कैसे पब्लिक तक पहुंचेगी, इसके बारे में पटना मौसम विज्ञान केंद्र को कुछ नहीं बताया.

कोट
चार महीने पहले इसे लगाया गया था. पृथ्वी के अंदर प्लेटों के हलचल और खिसकने की जानकारी इस जीपीएस सिस्टम से मिलती है. पृथ्वी के अंदर स्थिति प्लेट किस तरफ जा रही है. क्या हो सकता है. भूकंप की संभावना आने वाले दिनों में कितना बन रहा है. ये तमाम जानकारी इससे मिल सकती है. लेकिन हमें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं होता है. यह जीपीएस सिस्टम जो डेटा फाइल तैयार करता है. उसकी जानकारी हमें नहीं मिल पा रही है.  अगर हमें डेटा फाइल उपलब्ध हो जायें तो हम भूकंप आदि के बारे में पहले जानकारी ले पायेंगे.
एके गिरी, साइंटिस्ट, पटना मौसम विज्ञान केंद्र

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