हिंदी बोलने पर स्कूलों में लगता है फाइन
- पटना के कई स्कूलों में हिंदी बोलने की मिलती हैं सजा
- अभिभावकों को भी बच्चों के साथ इंगलिश में बात करने का दिया जाता हैं प्रेशर
संवाददाता, पटना
केस वन - पूजा क्लास 6ठीं की छात्र है. एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ रही है. हर हफ्ते पूजा को 10 से 12 रुपया फाइन के रूप में देना होता है. पूजा को यह फाइन कोई स्कूल के डिसिप्लीन तोड़ने के लिए नहीं देना होता है. बल्कि स्कूल में रहते हुए राष्ट्रभाषा हिंदी बोलने पर देना होता है. हिंदी का लाइन बोलने पर एक रुपये का फाइन देना होता है. इतना हीं नहीं पूजा को हिंदी बोलने पर दूसरे क्लास रूम में भी घुमाया जाता है. साथ में दूसरे स्टूडेंट को बताया जाता है कि इस स्टूडेंट को इंगलिश बोलने में परेशानी हो रही है.
केस टू - साक्षी एक प्रतिष्ठित स्कूल में क्लास 5वीं की छात्र हैं. एक दिन उसे पूरे जूनियर सेक्शन में घुमाया गया. क्योंकि उसने एक हिंदी वर्ड बोला था और उसके जूते में पॉलिश नहीं था. क्लास रूम में घुमाने के अलावा साक्षी को दो रुपये का फाइन भी देना पड़ा. इससे साक्षी काफी डिप्रेस्ड हो गयी है. स्कूल में सारे स्टूडेंट उसे चिढ़ाते हैं. ऐसे में साक्षी के अभिभावक ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास अपनी बात रखी हैं
- 15 से 20 रुपये होते है खर्च
स्कूल में ट्यूशन फी देने के अलावा अभिभावकों को फाइन पर भी खर्च हर हफ्ते करना होता है. प्राइवेट और मिशनरी स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को हर दिन ऐसे फाइन से दो चार होना पड़ता है. कभी होमवर्क नहीं करने को लेकर फाइन जमा करना पड़ता है तो कभी मोबाइल पकड़े जाने पर फाइन अदा करना पड़ता हैं. स्कूल प्रशासन के अनुसार स्कूल के डिसिप्लीन को मेंटेन करने के लिए ऐसा किया जाता है. पर, अभिभावकों के उपर हर हफ्ते पड़ने वाले यह बोझ बड़ा ही भारी हैं. अगर स्टूडेंट्स फी जमा करने में एक दिन की भी देरी करते है तो इसके लिए उन्हें 5 रुपये प्रति दिन के हिसाब से फाइन लगता है. कई बार ऐसा होता हैं कि पैरेंट्स टाइम पर फी जमा नहीं कर पाते है. ऐसे में उन्हें फाइन के साथ फी देना पड़ता है. अभिभावक पियुष गोयल ने बताया कि मै कई बार इस लेट फाइन का शिकार हो चुका हूं. रिक्वेस्ट करने पर भी इसमें कोई नहीं सुनता है.
- अभिभावकों को भी मिलती है नोटिस
कई स्कूलों स्टूडेंटस के साथ अभिभावकों को भी नहीं छोड़ते है. जूनियर क्लास में पढ़ रहे अभिभावकों को स्कूल की ओर से नोटिस दिया जाता है. इस नोटिस के अनुसार अभिभावकों को बच्चों के साथ घर में भी इंगलिश में बात करने की सलाह दी जाती है. ऐसा नहीं करने पर बच्चे को स्कूल से निकाल दिये जाने की भी धमकी स्कूल की ओर से दिया जाता है. अभिभावक मनीष कुमार ने बताया कि उनकी बेटी मॉटेसरी थ्री की स्टूडेंट हैं. घर में बच्चे के साथ हिंदी में ही हम बातें करते है. एक दिन स्कूल से हमारे पास नोटिस आया कि आपके बच्चे के इंगलिश में हिंदी मिक्स होती है. चुकी आपका बच्च घर में पूरी तरह से हिंदी बोलता है. इस कारण उसकी इंगलिश सही नहीं है. आप इंगलिश में ही बच्चे के साथ बातें करें. अगर एक महीने में आपके बच्चे की इंगलिश भाषा सही नहीं हुई तो मजबूरी में उसे स्कूल से निकाल दिया जायेगा.
- गाली देने पर फाइन होता दुगुना
स्कूलों में अगर कोई स्टूडेंटस आपस में बोलचाल में गाली आदि का उपयोग करते है और इसकी जानकारी स्कूल प्रशासन को मिल जाती है तो इसके लिए 5 रुपये का फाइन स्टूडेंट्स को देना पड़ता है. अगर फिर भी स्टूडेंट में सुधार नहीं होता है और गाली वो रिपीट करते हैं तो फाइन का प्राइस दुगुना होता जाता है. ऐसे में स्कूल स्टूडेंट्स पर पूरी नजर रखता है. इसकी रिपोर्ट क्लास के मॉनिटर से ली जाती है. इसके अलावा स्टूडेंट अगर एक सेकेंड के लिए भी स्कूल लेट पहुंचता है तो इसके लिए उसे 3 रुपये का फाइन देना होता है. अगर लगातार तीन दिनों तक कोई स्टूडेंट लेट आता है तो चौथे दिन फाइन के अलावा स्कूल में एबसेंट लगा दिया जाता हैं.
- हिंदी क्लास में ही बोले ¨हंदी
स्कूलों में हिंदी क्लास में ही हिंदी बोलने की सलाह दी जाती है. स्टूडेंट्स से कहा जाता है कि स्कूल में रहते हुए सिर्फ हिंदी क्लास में ही हिंदी बोला जायें. दूसरे हर विषय के क्लास में बस इंगलिश में ही आपस में बातें स्टूडेंट्स करें. अगर कोई स्टूडेंट हिंदी क्लास छोड़ कर दूसरे किसी भी क्लास में पढ़ाई के अलावा आपस में बातचीत भी हिंदी में करते है तो इसके लिए फाइन देना होता हैं.
इन गलतियों पर स्कूलों में लगता है फाइन
हिंदी बोलने पर - 1 रुपया
स्कूल लेट आने पर - 3 रुपया
प्रोजेक्ट वर्क में गलती होने पर - 4 रुपया
होमवर्क नहीं करने पर - 2 रुपया
फी लेट देने पर - 5 रुपया प्रति दिन
गंदा यूनिफार्म पहन कर आने पर - 3 रुपया
जूते पॉलिश नहीं होने पर - 1 रुपया
नाखून कटा नहीं होने पर - 1 रुपया
मोबाइल पकड़े जाने पर - 5 रुपया
गाली देने पर - 5 रुपया
कोट
सीबीएसइ की ओर से इस तरह के फाइन लेने का कोई प्रोविजन नहीं हैं. यह स्कूल का अपनी मरजी से लिया जाने वाला फाइन हैं. ऐसे में सीबीएसइ का इसके लिए कोई नियम नहीं है. अगर किसी स्कूल में हिंदी बोलने पर फाइन लेने की बात हैं तो अभिभावकों को बोर्ड को इसकी जानकारी देनी चाहिए.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ
- पटना के कई स्कूलों में हिंदी बोलने की मिलती हैं सजा
- अभिभावकों को भी बच्चों के साथ इंगलिश में बात करने का दिया जाता हैं प्रेशर
संवाददाता, पटना
केस वन - पूजा क्लास 6ठीं की छात्र है. एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ रही है. हर हफ्ते पूजा को 10 से 12 रुपया फाइन के रूप में देना होता है. पूजा को यह फाइन कोई स्कूल के डिसिप्लीन तोड़ने के लिए नहीं देना होता है. बल्कि स्कूल में रहते हुए राष्ट्रभाषा हिंदी बोलने पर देना होता है. हिंदी का लाइन बोलने पर एक रुपये का फाइन देना होता है. इतना हीं नहीं पूजा को हिंदी बोलने पर दूसरे क्लास रूम में भी घुमाया जाता है. साथ में दूसरे स्टूडेंट को बताया जाता है कि इस स्टूडेंट को इंगलिश बोलने में परेशानी हो रही है.
केस टू - साक्षी एक प्रतिष्ठित स्कूल में क्लास 5वीं की छात्र हैं. एक दिन उसे पूरे जूनियर सेक्शन में घुमाया गया. क्योंकि उसने एक हिंदी वर्ड बोला था और उसके जूते में पॉलिश नहीं था. क्लास रूम में घुमाने के अलावा साक्षी को दो रुपये का फाइन भी देना पड़ा. इससे साक्षी काफी डिप्रेस्ड हो गयी है. स्कूल में सारे स्टूडेंट उसे चिढ़ाते हैं. ऐसे में साक्षी के अभिभावक ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास अपनी बात रखी हैं
- 15 से 20 रुपये होते है खर्च
स्कूल में ट्यूशन फी देने के अलावा अभिभावकों को फाइन पर भी खर्च हर हफ्ते करना होता है. प्राइवेट और मिशनरी स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को हर दिन ऐसे फाइन से दो चार होना पड़ता है. कभी होमवर्क नहीं करने को लेकर फाइन जमा करना पड़ता है तो कभी मोबाइल पकड़े जाने पर फाइन अदा करना पड़ता हैं. स्कूल प्रशासन के अनुसार स्कूल के डिसिप्लीन को मेंटेन करने के लिए ऐसा किया जाता है. पर, अभिभावकों के उपर हर हफ्ते पड़ने वाले यह बोझ बड़ा ही भारी हैं. अगर स्टूडेंट्स फी जमा करने में एक दिन की भी देरी करते है तो इसके लिए उन्हें 5 रुपये प्रति दिन के हिसाब से फाइन लगता है. कई बार ऐसा होता हैं कि पैरेंट्स टाइम पर फी जमा नहीं कर पाते है. ऐसे में उन्हें फाइन के साथ फी देना पड़ता है. अभिभावक पियुष गोयल ने बताया कि मै कई बार इस लेट फाइन का शिकार हो चुका हूं. रिक्वेस्ट करने पर भी इसमें कोई नहीं सुनता है.
- अभिभावकों को भी मिलती है नोटिस
कई स्कूलों स्टूडेंटस के साथ अभिभावकों को भी नहीं छोड़ते है. जूनियर क्लास में पढ़ रहे अभिभावकों को स्कूल की ओर से नोटिस दिया जाता है. इस नोटिस के अनुसार अभिभावकों को बच्चों के साथ घर में भी इंगलिश में बात करने की सलाह दी जाती है. ऐसा नहीं करने पर बच्चे को स्कूल से निकाल दिये जाने की भी धमकी स्कूल की ओर से दिया जाता है. अभिभावक मनीष कुमार ने बताया कि उनकी बेटी मॉटेसरी थ्री की स्टूडेंट हैं. घर में बच्चे के साथ हिंदी में ही हम बातें करते है. एक दिन स्कूल से हमारे पास नोटिस आया कि आपके बच्चे के इंगलिश में हिंदी मिक्स होती है. चुकी आपका बच्च घर में पूरी तरह से हिंदी बोलता है. इस कारण उसकी इंगलिश सही नहीं है. आप इंगलिश में ही बच्चे के साथ बातें करें. अगर एक महीने में आपके बच्चे की इंगलिश भाषा सही नहीं हुई तो मजबूरी में उसे स्कूल से निकाल दिया जायेगा.
- गाली देने पर फाइन होता दुगुना
स्कूलों में अगर कोई स्टूडेंटस आपस में बोलचाल में गाली आदि का उपयोग करते है और इसकी जानकारी स्कूल प्रशासन को मिल जाती है तो इसके लिए 5 रुपये का फाइन स्टूडेंट्स को देना पड़ता है. अगर फिर भी स्टूडेंट में सुधार नहीं होता है और गाली वो रिपीट करते हैं तो फाइन का प्राइस दुगुना होता जाता है. ऐसे में स्कूल स्टूडेंट्स पर पूरी नजर रखता है. इसकी रिपोर्ट क्लास के मॉनिटर से ली जाती है. इसके अलावा स्टूडेंट अगर एक सेकेंड के लिए भी स्कूल लेट पहुंचता है तो इसके लिए उसे 3 रुपये का फाइन देना होता है. अगर लगातार तीन दिनों तक कोई स्टूडेंट लेट आता है तो चौथे दिन फाइन के अलावा स्कूल में एबसेंट लगा दिया जाता हैं.
- हिंदी क्लास में ही बोले ¨हंदी
स्कूलों में हिंदी क्लास में ही हिंदी बोलने की सलाह दी जाती है. स्टूडेंट्स से कहा जाता है कि स्कूल में रहते हुए सिर्फ हिंदी क्लास में ही हिंदी बोला जायें. दूसरे हर विषय के क्लास में बस इंगलिश में ही आपस में बातें स्टूडेंट्स करें. अगर कोई स्टूडेंट हिंदी क्लास छोड़ कर दूसरे किसी भी क्लास में पढ़ाई के अलावा आपस में बातचीत भी हिंदी में करते है तो इसके लिए फाइन देना होता हैं.
इन गलतियों पर स्कूलों में लगता है फाइन
हिंदी बोलने पर - 1 रुपया
स्कूल लेट आने पर - 3 रुपया
प्रोजेक्ट वर्क में गलती होने पर - 4 रुपया
होमवर्क नहीं करने पर - 2 रुपया
फी लेट देने पर - 5 रुपया प्रति दिन
गंदा यूनिफार्म पहन कर आने पर - 3 रुपया
जूते पॉलिश नहीं होने पर - 1 रुपया
नाखून कटा नहीं होने पर - 1 रुपया
मोबाइल पकड़े जाने पर - 5 रुपया
गाली देने पर - 5 रुपया
कोट
सीबीएसइ की ओर से इस तरह के फाइन लेने का कोई प्रोविजन नहीं हैं. यह स्कूल का अपनी मरजी से लिया जाने वाला फाइन हैं. ऐसे में सीबीएसइ का इसके लिए कोई नियम नहीं है. अगर किसी स्कूल में हिंदी बोलने पर फाइन लेने की बात हैं तो अभिभावकों को बोर्ड को इसकी जानकारी देनी चाहिए.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ
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