रि-एडमिशन के बिना नहीं होता दूसरे क्लास में नामांकन
- रि-एडमिशन के नाम पर हर स्टूडेंट्स से ली जाती है तीन से चार हजार रुपये
- 10वीं बोर्ड देने के बाद 11वीं में करवाना पड़ता है अपने ही स्कूल में नामांकन
संवाददाता, पटना
क्लास वन से टू में जाने की बात हो या क्लास थ्री से क्लास फोर में जाना हो, बिना एडमिशन के दूसरे क्लास में पढ़ने की अनुमति स्टूडेंट्स को नहीं होती है. एक क्लास से दूसरे क्लास में जाने के लिए बिना फी दिये काम नहीं चलता है. कहीं पर रि-एडमिशन के नाम तो कहीं पर रि-एडमिशन को पीछे रख कर डेवलपमेंट के नाम पर मोटी रकम स्कूल वाले लेते है. कई ऐसे भी स्कूल है जहां पर रि-एडमिशन और डेवलपमेंट के नाम पर भी पैसे लिये जाते हैं. कहा जायें तो पटना के अधिकांश स्कूलों में रि-एडमिशन का खेल चलता है. रि-एडमिशन के नाम पर मोटी रकम स्कूल वाले लेते ही है, इसके अलावा तीन और छह महीने पर भी डेवलपमेंट के नाम पर दुबारा चार्ज लिया जाता हैं. इतना ही नहीं बल्कि क्लास वन से दसवीं तक के क्लास में रि-एडमिशन के चार्ज बढ़ता जाता है. हर साल रि-एडमिशन के चार्ज भी बढ़ाये जाते है.
- प्रायमरी से सीनियर क्लास में जाने पर देना होता है फी
कई स्कूल में रि-एडमिशन के नाम पर नर्सरी, प्रायमरी और सीनियर क्लास का ख्याल रखा जाता है. नर्सरी में तीन साल पढ़ाई करने के बाद जब स्टूडेंट्स प्रायमरी क्लास में जाते है, तो रि-एडमिशन करवाना पड़ता है. वहीं प्रायमरी क्लास के बाद सीनियर क्लास में जाने पर रि-एडमिशन लेना होता है. पटना में मिशनरी स्कूलों में हर साल क्लास बदलने पर रि-एडमिशन की फी नहीं ली जाती है. लोयेला हाई स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार नर्सरी में दो साल की पढ़ाई होती है. नर्सरी के बाद जब स्टूडेंट्स प्रायमरी क्लास में जाते हैं तो उन्हें रि-एडमिशन करवाना होता हैं. ऐसा ही हाल सेंट माइकल हाई स्कूल और नॉट्रेडम एकेडमी में भी होता है. वहीं कई स्कूलों में तीन महीने और छह महीने पर डेवलपमेंट के नाम पर फी ली जाती है.
- डेवलपमेंट के नाम पर भी लेते है पैसे
कई स्कूल रि-एडमिशन के नाम पर सीधे तौर पर पैसे की वसूली नहीं करते है. उन्हें डर होता है कि कहीं सीबीएसइ के पकड़ में ना आ जायें. ऐसे में स्कूल अभिभावकों से डेवलपमेंट के नाम पर एनुअल चार्ज लेता है. इस दौरान स्कूल यह कहता है कि रि-एडमिशन के नाम पर कोई चार्ज नहीं लिया जाता है. बस डेलवपमेंट के नाम पर चार्ज लिया जाता है. लेकिन डेवलपमेंट के नाम पर मोटी रकम स्कूल वाले वसूलते है. अभिभावक मनीष ने बताया कि
- सीबीएसइ के अनुसार एक बार ही होगा नामांकन
सीबीएसइ के नियमानुसार कोई भी सीबीएसइ स्कूल एक बार ही किसी बच्चे से नामांकन फी ले सकता है. जब स्टूडेंट किसी स्कूल में नामांकन लेते है तो उनसे नामांकन के नाम पर फी लिया जाता हैं. लेकिन उसके बाद किसी दूसरे क्लास में जाने के लिए स्कूल किसी तरह का फी नहीं लेगा. लेकिन पटना में ऐसा नहीं है. अप्रैल में नया सेशन शुरू होने के पहले स्टूडेंट्स को दूसरे क्लास में नामांकन की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है. सीबीएसइ के अनुसार अगर कोई स्टूडेंट्स किसी क्लास में एक बार नामांकन ले लेता है तो वो दूसरी क्लास में अपने-आप जायेगा. स्टूडेंट्स से स्कूल किसी दूसरे क्लास में जाने के लिए किसी तरह का चार्ज नहीं लेगा.
- 10वीं में पास करने और 11वीं में नामांकन लेने में भी देना होता है चार्ज
अधिकांश स्कूलों में 10वीं बोर्ड पास करने के बाद अगर स्टूडेंट्स उसी स्कूल में रहना चाहते हैं तो उन्हें दुबारा स्कूल द्वारा लिया जाने वाले एंट्रांस टेस्ट में शामिल होना होता है. एंट्रांस टेस्ट में पास करने के बाद फिर 11वीं में नामांकन के लिए स्टूडेंट्स 60 से 80 हजार रुपये देने होते है. यह हाल कोई एक स्कूल का नहीं बल्कि पटना के अधिकांश स्कूलों में 11वीं में नामांकन की यही प्रक्रिया अपनायी जाती है. कोई भी स्टूडेंट्स 10वीं बोर्ड देने के बाद उसी स्कूल में नामांकन लेना चाहता है तो उसे दुबारा टेस्ट देकर मोटी रकम देने के बाद ही नामांकन मिलता है.
रि-एडमिशन के नाम पर लिये जाने वाले चार्ज
क्लास वन से टू तक रि-एडमिशन चार्ज - 1000 रुपया
क्लास टू से थ्री के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 1000 रुपया
क्लास थ्री से फोर के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 1500 रुपया
क्लास फोर से पांचवी के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 1500 रुपया
क्लास पांचवी से सिक्स के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 1500 रुपया
क्लास सिक्स से सातवीं के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 2000 रुपया
क्लास सातवीं से आठवीं के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 2000 रुपया
क्लास आठवीं से नवमीं के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 2500 रुपया
नोट - यह चार्ज पटना के अधिकांश स्कूलों में रि-एडमिशन के नाम पर लिया जाता है. अगर स्कूल डेवलपमेंट चार्ज लेता है तो इसके बाद वो चार्ज जुड़ता है.
अभिभावकों से बातचीत
मैने अपने बेटे का नामांकन करवाया था तो 50 हजार रुपये लगे थे. क्लास वन के बाद जब अगले साल क्लास टू में गया तो फिर 20 हजार रुपये देने पड़े. स्कूल से जब इसकी पैसे के लेने की वजह पूछी गयी तो पता चला कि रि-एडमिशन करवाना पड़ता हैं. बिना रि-एडमिशन के किसी भी दूसरे क्लास में बच्चे का ट्रांसफर नहीं हो सकता है. हम क्या कर सकते है. हमें हर साल मार्च में यह पैसे स्कूल को देना होता हैं.
प्रज्ञा राय, अभिभावक
रि-एडमिशन के नाम पर हर साल 10 हजार रुपये स्कूल को देते है. कई बार सोचा दूसरे स्कूल में नामांकन करवा ले. लेकिन हर स्कूलों का यहीं हाल है. कहीं डेलवपमेंट के नाम पर तो कहीं रि-एडमिशन के नाम पर मोटी रकम स्कूल वाले वसूलते हैं.
मृत्युजंय कुमार, अभिभावक
कोट
कई स्कूल में रि-एडमिशन के नाम पर मोटी रकम ली जाती हैं. अभिभावक शिकायत करते है तो बच्चे को स्कूल से निकाल दिया जाता है. इस साल तो रि-एडमिशन के नाम पर कई स्कूलों ने 2 हजार तक स्टूडेंट्स से पैसे लेते हैं.
नीरज कुमार, अध्यक्ष, छात्र अभिभावक संघर्ष मोर्चा
- रि-एडमिशन के नाम पर हर स्टूडेंट्स से ली जाती है तीन से चार हजार रुपये
- 10वीं बोर्ड देने के बाद 11वीं में करवाना पड़ता है अपने ही स्कूल में नामांकन
संवाददाता, पटना
क्लास वन से टू में जाने की बात हो या क्लास थ्री से क्लास फोर में जाना हो, बिना एडमिशन के दूसरे क्लास में पढ़ने की अनुमति स्टूडेंट्स को नहीं होती है. एक क्लास से दूसरे क्लास में जाने के लिए बिना फी दिये काम नहीं चलता है. कहीं पर रि-एडमिशन के नाम तो कहीं पर रि-एडमिशन को पीछे रख कर डेवलपमेंट के नाम पर मोटी रकम स्कूल वाले लेते है. कई ऐसे भी स्कूल है जहां पर रि-एडमिशन और डेवलपमेंट के नाम पर भी पैसे लिये जाते हैं. कहा जायें तो पटना के अधिकांश स्कूलों में रि-एडमिशन का खेल चलता है. रि-एडमिशन के नाम पर मोटी रकम स्कूल वाले लेते ही है, इसके अलावा तीन और छह महीने पर भी डेवलपमेंट के नाम पर दुबारा चार्ज लिया जाता हैं. इतना ही नहीं बल्कि क्लास वन से दसवीं तक के क्लास में रि-एडमिशन के चार्ज बढ़ता जाता है. हर साल रि-एडमिशन के चार्ज भी बढ़ाये जाते है.
- प्रायमरी से सीनियर क्लास में जाने पर देना होता है फी
कई स्कूल में रि-एडमिशन के नाम पर नर्सरी, प्रायमरी और सीनियर क्लास का ख्याल रखा जाता है. नर्सरी में तीन साल पढ़ाई करने के बाद जब स्टूडेंट्स प्रायमरी क्लास में जाते है, तो रि-एडमिशन करवाना पड़ता है. वहीं प्रायमरी क्लास के बाद सीनियर क्लास में जाने पर रि-एडमिशन लेना होता है. पटना में मिशनरी स्कूलों में हर साल क्लास बदलने पर रि-एडमिशन की फी नहीं ली जाती है. लोयेला हाई स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार नर्सरी में दो साल की पढ़ाई होती है. नर्सरी के बाद जब स्टूडेंट्स प्रायमरी क्लास में जाते हैं तो उन्हें रि-एडमिशन करवाना होता हैं. ऐसा ही हाल सेंट माइकल हाई स्कूल और नॉट्रेडम एकेडमी में भी होता है. वहीं कई स्कूलों में तीन महीने और छह महीने पर डेवलपमेंट के नाम पर फी ली जाती है.
- डेवलपमेंट के नाम पर भी लेते है पैसे
कई स्कूल रि-एडमिशन के नाम पर सीधे तौर पर पैसे की वसूली नहीं करते है. उन्हें डर होता है कि कहीं सीबीएसइ के पकड़ में ना आ जायें. ऐसे में स्कूल अभिभावकों से डेवलपमेंट के नाम पर एनुअल चार्ज लेता है. इस दौरान स्कूल यह कहता है कि रि-एडमिशन के नाम पर कोई चार्ज नहीं लिया जाता है. बस डेलवपमेंट के नाम पर चार्ज लिया जाता है. लेकिन डेवलपमेंट के नाम पर मोटी रकम स्कूल वाले वसूलते है. अभिभावक मनीष ने बताया कि
- सीबीएसइ के अनुसार एक बार ही होगा नामांकन
सीबीएसइ के नियमानुसार कोई भी सीबीएसइ स्कूल एक बार ही किसी बच्चे से नामांकन फी ले सकता है. जब स्टूडेंट किसी स्कूल में नामांकन लेते है तो उनसे नामांकन के नाम पर फी लिया जाता हैं. लेकिन उसके बाद किसी दूसरे क्लास में जाने के लिए स्कूल किसी तरह का फी नहीं लेगा. लेकिन पटना में ऐसा नहीं है. अप्रैल में नया सेशन शुरू होने के पहले स्टूडेंट्स को दूसरे क्लास में नामांकन की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है. सीबीएसइ के अनुसार अगर कोई स्टूडेंट्स किसी क्लास में एक बार नामांकन ले लेता है तो वो दूसरी क्लास में अपने-आप जायेगा. स्टूडेंट्स से स्कूल किसी दूसरे क्लास में जाने के लिए किसी तरह का चार्ज नहीं लेगा.
- 10वीं में पास करने और 11वीं में नामांकन लेने में भी देना होता है चार्ज
अधिकांश स्कूलों में 10वीं बोर्ड पास करने के बाद अगर स्टूडेंट्स उसी स्कूल में रहना चाहते हैं तो उन्हें दुबारा स्कूल द्वारा लिया जाने वाले एंट्रांस टेस्ट में शामिल होना होता है. एंट्रांस टेस्ट में पास करने के बाद फिर 11वीं में नामांकन के लिए स्टूडेंट्स 60 से 80 हजार रुपये देने होते है. यह हाल कोई एक स्कूल का नहीं बल्कि पटना के अधिकांश स्कूलों में 11वीं में नामांकन की यही प्रक्रिया अपनायी जाती है. कोई भी स्टूडेंट्स 10वीं बोर्ड देने के बाद उसी स्कूल में नामांकन लेना चाहता है तो उसे दुबारा टेस्ट देकर मोटी रकम देने के बाद ही नामांकन मिलता है.
रि-एडमिशन के नाम पर लिये जाने वाले चार्ज
क्लास वन से टू तक रि-एडमिशन चार्ज - 1000 रुपया
क्लास टू से थ्री के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 1000 रुपया
क्लास थ्री से फोर के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 1500 रुपया
क्लास फोर से पांचवी के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 1500 रुपया
क्लास पांचवी से सिक्स के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 1500 रुपया
क्लास सिक्स से सातवीं के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 2000 रुपया
क्लास सातवीं से आठवीं के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 2000 रुपया
क्लास आठवीं से नवमीं के लिए रि-एडमिशन चार्ज - 2500 रुपया
नोट - यह चार्ज पटना के अधिकांश स्कूलों में रि-एडमिशन के नाम पर लिया जाता है. अगर स्कूल डेवलपमेंट चार्ज लेता है तो इसके बाद वो चार्ज जुड़ता है.
अभिभावकों से बातचीत
मैने अपने बेटे का नामांकन करवाया था तो 50 हजार रुपये लगे थे. क्लास वन के बाद जब अगले साल क्लास टू में गया तो फिर 20 हजार रुपये देने पड़े. स्कूल से जब इसकी पैसे के लेने की वजह पूछी गयी तो पता चला कि रि-एडमिशन करवाना पड़ता हैं. बिना रि-एडमिशन के किसी भी दूसरे क्लास में बच्चे का ट्रांसफर नहीं हो सकता है. हम क्या कर सकते है. हमें हर साल मार्च में यह पैसे स्कूल को देना होता हैं.
प्रज्ञा राय, अभिभावक
रि-एडमिशन के नाम पर हर साल 10 हजार रुपये स्कूल को देते है. कई बार सोचा दूसरे स्कूल में नामांकन करवा ले. लेकिन हर स्कूलों का यहीं हाल है. कहीं डेलवपमेंट के नाम पर तो कहीं रि-एडमिशन के नाम पर मोटी रकम स्कूल वाले वसूलते हैं.
मृत्युजंय कुमार, अभिभावक
कोट
कई स्कूल में रि-एडमिशन के नाम पर मोटी रकम ली जाती हैं. अभिभावक शिकायत करते है तो बच्चे को स्कूल से निकाल दिया जाता है. इस साल तो रि-एडमिशन के नाम पर कई स्कूलों ने 2 हजार तक स्टूडेंट्स से पैसे लेते हैं.
नीरज कुमार, अध्यक्ष, छात्र अभिभावक संघर्ष मोर्चा
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