Saturday, May 16, 2015

जेइइ एडवांस में घटे स्टूडेंट्स की संख्या, 1.24 लाख स्टूडेंट्स ने ही किया रजिस्ट्रेशन

जेइइ एडवांस में घटे स्टूडेंट्स की संख्या, 1.24 लाख स्टूडेंट्स ने ही किया रजिस्ट्रेशन

- आइआइटी छोड़ दूसरी संस्थाओं की तैयारियों को वेटेज दे रहे स्टूडेंट्स
- अपनी पसंद के आइआइटी नहीं मिलने के कारण नहीं देना चाहते है जेइइ एडवांस
रिंकू झा, पटना
ज्वाइंट एट्रेंस एक्जाम (जेइइ) एडवांस 2015 की परीक्षा में वहीं स्टूडेंट्स शामिल होते है जिन्हें जेइइ मेन की परीक्षा में अच्छे रैंक आया हो. देश भर के जेइइ मेन के 1.5 लाख स्टूडेंट्स को ही जेइइ एडवांस में रजिस्ट्रेशन करवाने की अनुमति मिलती हैं. इस बार भी पिछली बार की तरह 1.5 लाख स्टूडेंट्स को ही रजिस्टर्ड होना था, लेकिन इस साल यह ग्राफ इसके नीचे चला गया है. जेइइ एडवांस के लिए सिर्फ 1.24 लाख स्टूडेंट्स ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है. क्वालिफाइ होने के बावजूद कैंडिडेंट्स एडवांस में शामिल नहीं हो रहे हैं. एक्सपर्ट की माने तो स्टूडेंट्स का च्वाइस बेस्ट आइआइटी में जाना होता है. ऐसे में कम रैंक वाले स्टूडेंट्स जेइइ एडवांस की तैयारी से अच्छा एनआइटी जैसी संस्थाओं की ओर बढ़ रहे है. स्टूडेंट्स अपनी तैयारी के स्तर को समझते हुए जेइइ एडवांस टेस्ट से आइआइटी में एडमिशन लेने की उम्मीद करने की बजाय एनआइटी में एडमिशन लेना बेहतर समझ रहे हैं.
जेइइ मेन के कम रैंक वाले को मिलता है अच्छा एनआइटी कॉलेज
जेइइ मेन का कटऑफ इस बार 105 पर गया है. अब जिन स्टूडेंट्स को जेइइ मेन में कम रैंक मिला है, वो जेइइ एडवांस नहीं देना चाहते है. जेइइ एडवांस के बदले ऐसे स्टूडेंट्स एनआइटी, दूसरे इंजीनियरिंग कॉलेज या फिर प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लेकर अपना कैरियर संभालना चाहते है. पटना के रोहित शर्मा को जेइइ मेन में 120 रैंक मिला है. रोहित शर्मा बताते है कि जेइइ मेन के लिए 12वीं का रिजल्ट का 40 फीसदी वेटेज और  जेइइ मेन का 60 फीसदी वेटेज लेकर ऑल इंडिया रैंक तैयार किया जाता है. ऐसे में जेइइ मेन में कम रैक मिलने से एडवांस में सफल होना कठिन होता हैं. इस कारण जेइइ एडवांस की तैयारी में समय देने से अच्छा है कि दूसरे इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन मिल जायें. वहीं जेइइ मेन में 115 रैंक प्राप्त अमित कपूर ने बताया कि जो रैंक हमें मिला है उसमें अच्छे एनआइटी में नामांकन हो जायेगा.
पांच हजार से कम रैंक पर ही मिलता है अच्छा आइआइटी
जेइइ मेन की परीक्षा जहां आब्जेक्टिव टाइप लिये जाते है. वहीं जेइइ एडवांस की परीक्षा पूरी तरह से सब्जेक्टिव बेस्ड होता है. ऐसे में स्टूडेंट्स को जेइइ एडवांस की तैयारी के लिए मात्र एक महीने का समय मिलता है. इस बीच जो भी प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में एंट्रास परीक्षाएं ली जाती है वो सारा आब्जेक्टिव होता है. ऐसे में  स्टूडेंट्स अपना मूल्यांकन खुद कर लेते है कि वे एडवांस क्रैक कर पायेंगे या नहीं. एनआइटी को लेकर कई स्टूडेंट्स आश्वस्त रहते हैं. इसके अलावा कई बड़े निजी संस्थान भी स्टूडेंट्स की च्वाइस में है. जिनकी वे प्रिपरेशन करते हैं. 168 रैंक प्राप्त किये राहुल रॉय ने बताया कि जेनरल केटेगरी के स्टूडेंट्स को कम रैंक मिलने पर अच्छा आइआइटी कॉलेज नहीं मिल पाता है. ऐसे में हम इस रैंक पर अच्छे एनआइटी में नामांकन ले लेंगे. एक्सपर्ट संजय कुमार की माने तो स्टूडेंट्स दो केटेगरी में बंटते जा रहे है. कुछ स्टूडेंट्स जेइइ मेन को, तो कुछ जेइइ एडवांस को टरगेट करके चलते है. जेइइ मेन के लिए 12वीं का रिजल्ट आने के बाद उसका 40 फीसदी वेटेजे और जेइइ मेन का 60 फीसदी वेटेज लेकर रैंक तय होती है.
इंतजार है ऑल इंडिया रैंक का
जेइइ मेन में सफल अधिकांश स्टूडेंट्स सीबीएसइ द्वारा जारी करने वाले ऑल इंडिया रैंक का इंतजार कर रहे हैं. 7 जुलाई को जारी ऑल इंडिया रैंक से स्टूडेंट्स को कॉलेज में नामांकन के बारे में जानकारी मिल जायेगी. इसमें उन स्टूडेंटस के रैंक को अधिक वेटेज दिया जायेगा जो जेइइ मेन के 1.5 लाख स्टूडेंट्स के केटेगरी में आये है . ऑल इंडिया रैंक मिलने के बाद ही अन्य कॉलेजों में नामांकन की प्रक्रिया शुरू होती है. ऐसे में स्टूडेंट्स को इसकी जानकारी आसानी से मिल जाती है जो रैंक उन्हें मिला है उसके तहत उन्हें किस इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन मिल जायेगा.

जेइइ एडवांस संबंधित जानकारी
जेइइ एडवांस    24 मई
एडमिट कार्ड डाउनलोड   16 मई से लेकर  23 मई तक
चार नयी आइआइटी कॉलेज में सीट्स की संख्या  -  11000
30 एनआइटी कॉलेज में सीट्स की संख्या   - 15485

एक्सपर्ट व्यू
आज के स्टूडेंट्स पहले से अपना लक्ष्य तय करके चलते है. यही वजह है कि अपनी पूरी एनर्जी एडवांस में लगाने की बजायें वे इंजीनियरिंग के दूसरे कांम्पीटिशन की भी तैयारी करते है. अब 16 आइआइटी के अलावा चार नयी आइआइटी के आने के बाद सीट्स बढ़कर 11000 तक हो गयी है. लेकिन सामान्य वर्ग को रैंक पांच हजार तक ही मिल पाती है. इसलिए स्टूडेंट्स विकल्प चुनकर रखते हैं.
एसके ठाकुर, एक्सपर्ट, सेंट माइकल हाई स्कूल

आइआइटी में सामान्य स्टूडेंट्स को अच्छा रैंक मिलना कठिन होता हैं. जेइइ एडवांस का कटऑफ काफी हाई जाता है. ऐसे में सामान्य स्टूडेंट्स पिछड़ जाते है. 12वीं बोर्ड के 40 फीसदी मार्क्‍स का वेटेज और 60 फीसदी जेइइ मेन के मार्क्‍स का वेटेज लाने में भी स्टूूडेंट्स पिछड़ जाते है. अगर 12वी ं में कम रैंक मिला तो स्टूडेंट्स को अच्छे आइआइटी में नामांकन लेना कठिन हो जायेगा. इस कारण अब इस ओर से स्टूडेंट्स का पलायन होने लगा है.
संजय कुमार, एक्सपर्ट, लोयेला हाई स्कूल 

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