क्यूं ना हो फेल पास का खेल, जब स्कूल ही नहीं है मान्यता प्राप्त
- बिहार में आठ हजार निजी विद्यालयों में मात्र 667 स्कूलों को ही मान्यता प्राप्त
- 8 हजार में अधिकांश स्कूलों में चलता है पास फेल का खेल
संवाददाता, पटना
स्कूल में नामांकन हो जाता है. आठ सालों तक पढ़ाई भी चलती है. लेकिन जब दसवीं बोर्ड देने की बात आती है तो हजारों की संख्या में स्टूडेंट्स सड़क पर आ जाते है. उन्हें उस समय पता चलता है कि वो जिस स्कूल में आठ सालों तक पढ़ायी किया है, वो सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं है और अब वो बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो पायेंगे. यह हाल किसी एक स्टूडेंट्स का नहीं है बल्कि पटना के अलावा पूरे बिहार के हजारों ऐसे स्टूडेंटस हैं जो हर साल इस समस्या से जूझते है. ज्ञात हो कि पूरे बिहार में आठ हजार स्कूलों की संख्या है. लेकिन इसमें मात्र 667 स्कूल को सीबीएसइ ने मान्यता दिया हुआ है. वहीं आइसीएसइ बोर्ड के 20 स्कूल है जिसे बोर्ड की मान्यता प्राप्त हैं. बांकी जो भी स्कूल है वो सारे के सारे नॉन एफिलिएयेटेड हैं. ऐसे में नॉन एफिलियेटेड स्कूल एफिलियेटेड स्कूलों को मोटी रकम देकर अपने स्कूल के स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन उस स्कूल से करवाते है.
- अधिकांश बच्चे पढ़ते है नॉन एफिलियेटेड स्कूल में
बिहार के अधिकांश स्कूलों नॉन एफिलियेटेड हैं. लेकिन अभिभावकों और स्टूडेंट्स को ठगने के लिए सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड का लोगो और बैनर का इस्तेमाल करते है. इस बैनर और लोगो की गलत फहमी में अभिभावक ठगे जाते है. क्लास वन से आठवीं तक तो परेशानी नहीं होती है. लेकिन जब 9वीं में बोर्ड के रजिस्ट्रेशन करवाने का मामला सामने आता है तो अभिभावकों को पता चलता हैं कि उनके बच्चे जिस स्कूल में पढ़ रहे है वो मान्यता प्राप्त नहीं है. अभिभावक राहुल राय ने बताया कि एस रजा हाई स्कूल में उनका बेटा पढ़ता हैं. लेकिन एक साल पहले जब 9वीं में रजिस्ट्रेशन करवाने की बात आयी तो पता चला कि बच्चे का रजिस्ट्रेशन दूसरे स्कूल से करवाया जायेगा. उसी स्कूल के माध्यम से बोर्ड परीक्षा में स्टूडेंट शामिल होंगे. बिहार के किसी छोटे शहर के किसी स्कूल से रजिस्ट्रेशन करवाया गया. इस बीच 10वीं की पूरी पढ़ाई सारे बच्चों ने अपने ही स्कूल में किया. लेकिन बोर्ड परीक्षा दूसरे स्कूल से दिलवाया गया. लेकिन रिजल्ट के समय मामला फंस गया. सारे स्टूडेंट्स का रिजल्ट पेंडिंग हो गया.
- 9वीं के बाद फंसता है मामला
बिहार के किसी भी सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड में 8वीं तक किसी भी स्टूडेंट्स को दिक्कतें नहीं होती है. लेकिन जब स्टूडेंट्स 9वीं क्लास में जाते हैं तो बोर्ड से रजिस्ट्रेशन के मामला सामने आता है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के अनुसार 9वीं और 11वीं में रजिस्ट्रेशन होने वाले स्टूडेंटस की बोर्ड परीक्षा में शामिल होते है. ऐसे में जो स्कूल मान्यता प्राप्त नहीं होता है, वो स्कूल दूसरे स्कूलों में मोटी रकम देकर अपने स्कूल के स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन करवा लेते है. स्टूडेंट पढ़ते है किसी और स्कूल में और जब बोर्ड परीक्षा देने का समय आता है तो किसी और स्कूल का स्टूडेंट बन कर परीक्षा में शामिल होते है. कई बार स्कूलों का यह धंधा बोर्ड की नजर पर आता है. इसकी जांच भी हुई हैं.
- किसी भी क्लास में निकाल दिये जाते है स्टूडेंटस
पटना के अधिकांश स्कूलों में किसी भी क्लास में स्टूडेंट्स को स्कूल से निकाल दिया जाता है. स्कूल प्रशासन स्टूडेंट्स के उपर कोई भी आरोप लगा कर उन्हें स्कूल के बाहर कर देता है. ऐसे कई मामले बिहार राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास आते रहते है. आयोग के पास आयें कई मामले में स्टूडेंट को छोटी से गलती बता कर 9वीं और 11वीं क्लास के बाद भी निकाल दिया गया है. ऐसे में कई बार कानून लड़ाई के बाद ही स्टूडेंट्स 12वीं बोर्ड दे पाने में सफल हो पाया है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुसार 2011 सत्र में 11वीं क्लास के एक स्टूडेंट आदित्य राय को सेंट माइकल हाई स्कूल में इस बेसिस पर निकाल दिया गया था कि आदित्य ने 10 दिन की छुट्टी लेकर स्कूल नहीं आया था. मेडिकल सर्टिफिकेट देने के बाद भी आदित्य को 12वीं बोर्ड देने से स्कूल रोक रहा था. लेकिन बाद में हाई कोट और आयोग के सहयोग से आदित्य राय बोर्ड परीक्षा देने में सफल हो पाया.
स्कूल संबंधित कुछ जानकारी
बिहार में कुल स्कूलों की संख्या - 8 हजार (लगभग)
सीबीएसइ के मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या - 667
आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या - 20
8 हजार में वैसे स्कूल जहां पर 9वीं की पढ़ाई करवायी जाती है - 4 हजार 89
8 हजार में वैसे स्कूल जहां पर 9वीं और 11वीं की पढ़ाई करवायी जाती है - 2 हजार
कोट
सीबीएसइ का एफिलिएशन बाइलॉज काफी कठिन हो गया है. पहले आसानी से एफिलिएशन मिल जाता था. लेकिन शिक्षा के अधिकार कानून और एफिलिएशन बाइलॉज पर स्कूलों की लापरवाही के कारण अब एफिलिएशन लेना कठिन हो गया है. ऐसे में आने वाले दिनों में एफिलिएटेड स्कूलों की संख्या और भी कम हो जायेगी. ऐसे में अभिभावकों को सोच समझ कर नामांकन करवाना चाहिए.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ पटना
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के स्कूलों की संख्या बिहार में बहुत ही कम है. ऐसे में अधिकांश स्टूडेंट्स स्कूल से ठगे जाते है. स्कूल अपने तरीके से मनमाने ढंग से फी भी स्कूलों से वसूलता है. कोई लगाम भी नहीं है. ऐसे में अगर मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या अधिक होगी तो इस तरह स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी.
डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार राज्य पैरेंट्स चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन
बिहार में हजारों की संख्या में स्कूल है. अभिभावक शुरुआत में तो स्कूलों में नामांकन करवा लेते है, लेकिन 9वीं में जाने के बाद रजिस्ट्रेशन का मामला फंस जाता है. ऐसे में अभिभावकों के पास मजबूरी होती है. स्कूल इसका फायदा उठा लेता है. बिहार सरकार से रजिस्टड्र स्कूलों की भी संख्या अभी काफी कम है.
शमायल अहमद, अध्यक्ष, बिहार राज्य प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन
- बिहार में आठ हजार निजी विद्यालयों में मात्र 667 स्कूलों को ही मान्यता प्राप्त
- 8 हजार में अधिकांश स्कूलों में चलता है पास फेल का खेल
संवाददाता, पटना
स्कूल में नामांकन हो जाता है. आठ सालों तक पढ़ाई भी चलती है. लेकिन जब दसवीं बोर्ड देने की बात आती है तो हजारों की संख्या में स्टूडेंट्स सड़क पर आ जाते है. उन्हें उस समय पता चलता है कि वो जिस स्कूल में आठ सालों तक पढ़ायी किया है, वो सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं है और अब वो बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो पायेंगे. यह हाल किसी एक स्टूडेंट्स का नहीं है बल्कि पटना के अलावा पूरे बिहार के हजारों ऐसे स्टूडेंटस हैं जो हर साल इस समस्या से जूझते है. ज्ञात हो कि पूरे बिहार में आठ हजार स्कूलों की संख्या है. लेकिन इसमें मात्र 667 स्कूल को सीबीएसइ ने मान्यता दिया हुआ है. वहीं आइसीएसइ बोर्ड के 20 स्कूल है जिसे बोर्ड की मान्यता प्राप्त हैं. बांकी जो भी स्कूल है वो सारे के सारे नॉन एफिलिएयेटेड हैं. ऐसे में नॉन एफिलियेटेड स्कूल एफिलियेटेड स्कूलों को मोटी रकम देकर अपने स्कूल के स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन उस स्कूल से करवाते है.
- अधिकांश बच्चे पढ़ते है नॉन एफिलियेटेड स्कूल में
बिहार के अधिकांश स्कूलों नॉन एफिलियेटेड हैं. लेकिन अभिभावकों और स्टूडेंट्स को ठगने के लिए सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड का लोगो और बैनर का इस्तेमाल करते है. इस बैनर और लोगो की गलत फहमी में अभिभावक ठगे जाते है. क्लास वन से आठवीं तक तो परेशानी नहीं होती है. लेकिन जब 9वीं में बोर्ड के रजिस्ट्रेशन करवाने का मामला सामने आता है तो अभिभावकों को पता चलता हैं कि उनके बच्चे जिस स्कूल में पढ़ रहे है वो मान्यता प्राप्त नहीं है. अभिभावक राहुल राय ने बताया कि एस रजा हाई स्कूल में उनका बेटा पढ़ता हैं. लेकिन एक साल पहले जब 9वीं में रजिस्ट्रेशन करवाने की बात आयी तो पता चला कि बच्चे का रजिस्ट्रेशन दूसरे स्कूल से करवाया जायेगा. उसी स्कूल के माध्यम से बोर्ड परीक्षा में स्टूडेंट शामिल होंगे. बिहार के किसी छोटे शहर के किसी स्कूल से रजिस्ट्रेशन करवाया गया. इस बीच 10वीं की पूरी पढ़ाई सारे बच्चों ने अपने ही स्कूल में किया. लेकिन बोर्ड परीक्षा दूसरे स्कूल से दिलवाया गया. लेकिन रिजल्ट के समय मामला फंस गया. सारे स्टूडेंट्स का रिजल्ट पेंडिंग हो गया.
- 9वीं के बाद फंसता है मामला
बिहार के किसी भी सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड में 8वीं तक किसी भी स्टूडेंट्स को दिक्कतें नहीं होती है. लेकिन जब स्टूडेंट्स 9वीं क्लास में जाते हैं तो बोर्ड से रजिस्ट्रेशन के मामला सामने आता है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के अनुसार 9वीं और 11वीं में रजिस्ट्रेशन होने वाले स्टूडेंटस की बोर्ड परीक्षा में शामिल होते है. ऐसे में जो स्कूल मान्यता प्राप्त नहीं होता है, वो स्कूल दूसरे स्कूलों में मोटी रकम देकर अपने स्कूल के स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन करवा लेते है. स्टूडेंट पढ़ते है किसी और स्कूल में और जब बोर्ड परीक्षा देने का समय आता है तो किसी और स्कूल का स्टूडेंट बन कर परीक्षा में शामिल होते है. कई बार स्कूलों का यह धंधा बोर्ड की नजर पर आता है. इसकी जांच भी हुई हैं.
- किसी भी क्लास में निकाल दिये जाते है स्टूडेंटस
पटना के अधिकांश स्कूलों में किसी भी क्लास में स्टूडेंट्स को स्कूल से निकाल दिया जाता है. स्कूल प्रशासन स्टूडेंट्स के उपर कोई भी आरोप लगा कर उन्हें स्कूल के बाहर कर देता है. ऐसे कई मामले बिहार राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास आते रहते है. आयोग के पास आयें कई मामले में स्टूडेंट को छोटी से गलती बता कर 9वीं और 11वीं क्लास के बाद भी निकाल दिया गया है. ऐसे में कई बार कानून लड़ाई के बाद ही स्टूडेंट्स 12वीं बोर्ड दे पाने में सफल हो पाया है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुसार 2011 सत्र में 11वीं क्लास के एक स्टूडेंट आदित्य राय को सेंट माइकल हाई स्कूल में इस बेसिस पर निकाल दिया गया था कि आदित्य ने 10 दिन की छुट्टी लेकर स्कूल नहीं आया था. मेडिकल सर्टिफिकेट देने के बाद भी आदित्य को 12वीं बोर्ड देने से स्कूल रोक रहा था. लेकिन बाद में हाई कोट और आयोग के सहयोग से आदित्य राय बोर्ड परीक्षा देने में सफल हो पाया.
स्कूल संबंधित कुछ जानकारी
बिहार में कुल स्कूलों की संख्या - 8 हजार (लगभग)
सीबीएसइ के मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या - 667
आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या - 20
8 हजार में वैसे स्कूल जहां पर 9वीं की पढ़ाई करवायी जाती है - 4 हजार 89
8 हजार में वैसे स्कूल जहां पर 9वीं और 11वीं की पढ़ाई करवायी जाती है - 2 हजार
कोट
सीबीएसइ का एफिलिएशन बाइलॉज काफी कठिन हो गया है. पहले आसानी से एफिलिएशन मिल जाता था. लेकिन शिक्षा के अधिकार कानून और एफिलिएशन बाइलॉज पर स्कूलों की लापरवाही के कारण अब एफिलिएशन लेना कठिन हो गया है. ऐसे में आने वाले दिनों में एफिलिएटेड स्कूलों की संख्या और भी कम हो जायेगी. ऐसे में अभिभावकों को सोच समझ कर नामांकन करवाना चाहिए.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ पटना
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के स्कूलों की संख्या बिहार में बहुत ही कम है. ऐसे में अधिकांश स्टूडेंट्स स्कूल से ठगे जाते है. स्कूल अपने तरीके से मनमाने ढंग से फी भी स्कूलों से वसूलता है. कोई लगाम भी नहीं है. ऐसे में अगर मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या अधिक होगी तो इस तरह स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी.
डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार राज्य पैरेंट्स चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन
बिहार में हजारों की संख्या में स्कूल है. अभिभावक शुरुआत में तो स्कूलों में नामांकन करवा लेते है, लेकिन 9वीं में जाने के बाद रजिस्ट्रेशन का मामला फंस जाता है. ऐसे में अभिभावकों के पास मजबूरी होती है. स्कूल इसका फायदा उठा लेता है. बिहार सरकार से रजिस्टड्र स्कूलों की भी संख्या अभी काफी कम है.
शमायल अहमद, अध्यक्ष, बिहार राज्य प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन
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