Sunday, May 17, 2015

मेंटल हेरेसमेंट दिया तो स्कूल पर चलेगा आइपीसी की धारा 506

मेंटल हेरेसमेंट दिया तो स्कूल पर चलेगा आइपीसी की धारा 506

- स्कूलों में बढ़ रहे मेंटल हेरेसमेंट के मामले
- सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने स्कूलों को किया आगाह
संवाददाता, पटना
केस वन  - डीएवी की छात्र रजनी गुप्ता (बदला हुआ नाम) बीमार होने के कारण एक सप्ताह तक स्कूल नही गयी. जब स्कूल जाना शुरू किया तो टीचर ने उसे इगAोर करने लगे. रजनी गुप्ता को पढ़ाई और कई दूसरी चीजों से मेंटल हेरेसमेंट भी किया जाने लगा. अंत में परेशान हो कर रजनी गुप्ता से अपने गाजिर्यन से यह शिकायत की. मामला बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक भी पहुंचा. इसके बाद रजनी गुप्ता ने लिखित शिकायत सीबीएसइ से भी किया.
केस टू  - सेंट माइकल हाई स्कूल का 11वीं का स्टूडेंट अनिकेत शादी फंक्शन को एटेंड करने के लिए स्कूल से चार दिनों की छुट्टी लिया. लेकिन बाद में बीमार हो जाने के कारण कई और दिन वो स्कूल नहीं जा पाया. मेडिकल सर्टिफिकेट देने के बावजूद अनिकेत को स्कूल वाले टॉचर करते रहे. अनिकेत को लगातार किसी ना किसी वजह से मेंटल हेरेसमेंट स्कूल के टीचर देते रहे. अंत में 12वीं बोर्ड देने पर जब अनिकेत को रोक लगा दिया गया तो फिर अनिकेत बाद अधिकार संरक्षण आयोग और हाई कोट पहुंचा.

- हर पांच बच्चे पर एक बच्च होता है स्कूल में मेंटल हेरेसमेंट का शिकार
यह हाल कोई रजनी गुप्ता या अनिकेत की नहीं बल्कि अधिकांश स्टूडेंट्स को मेंटल टॉचर से स्कूल में गुजरना पड़ता है. किसी भी बात का विरोध करने पर स्कूल के टीचर और स्कूल प्रशासन उस स्टूडेंट्स के पीछे पड़ जाते है. ऐसे में टीचर स्टूडेंट्स के एकेडेमिक कैरियर को भी खत्म करने से बाज नहीं आता है. स्कूलों में स्टूडेंट्स के उपर मेंटल हेरेसमेंट को लेकर तैयार किये गये सीबीएसइ की रिपोर्ट के अनुसार देश भर के स्कूलों में स्टूडेंट्स के साथ मेंटल हेरेसमेट किया जाता है. इसकी वजह से कई बार स्टूडेंट्स सुसाइड आदि भी करने की कोशिश करते है या कर भी लेते है. कई बार स्टूडेंट्स का एकेडेमिक कॅरियर भी खत्म हो जाता है. इस रिपोर्ट को सीबीएसइ ने देश भर के स्कूलों में किये गये सर्वे करने के बाद जारी किया है. सीबीएसइ के अनुसार वर्तमान में मेंटल हेरेसमेंट से हर पांच बच्चे में एक बच्च शिकार हो रहा है. इसका असर बहुत ही बुरा हो रहा हैं.
- फिजिकल हेरेसमेंट खत्म होने के बाद बढ़ गया मेंटल हेरेसमेंट
आइसीएसइ बोर्ड द्वारा किया गया सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 2009 में शिक्षा के अधिकार कानून के खत्म हो जाने के बाद फिजिकल हेरेसमेंट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया हैं. बच्चे को मारने और पीटने की घटनाएं बंद कर दी गयी. इसके बाद स्कूलों की ओर से बच्चों को मेंटल हेरेसमेंट देना शुरू किया गया. रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक दूसरे स्टूडेंट्स के सामने बेइज्जती करने का मेंटल हेरेसमेंट स्टूडेंट्स को दिया जाता है. इसका बहुत ही बुरा असर बच्चों के कैरियर पर पड़ता हैं. बच्चे स्कूल जाना बंद कर देते है. उन्हें बेइज्जती महसूस होती है. शिक्षा के अधिकार कानून के अनुसार किसी भी स्टूडेंट्स को फिजिकल के साथ मेंटल हेरेसमेंट भी नहीं दिया जा सकता है.
- स्कूलों को बोर्ड ने किया अगाह
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने तमाम स्कूलों को आगाह किया है कि अगर किसी भी स्कूल में स्टूडेंट के साथ मेंटल हेरेसमेंट किया जायेगा तो उस स्कूल प्रशासन और स्कूल के टीचर के उपर आइपीसी (इंडियन पैनल कोड) की धारा के तहत मुकदमा चलेगा. इसमें स्कूल प्रशासन और वो टीचर भी फंसेंगे जो इस तरह के काम को अंजाम देते है. स्टूडेंट्स के उपर किसी भी तरह के मेंटल टॉचर नहीं किया जा सकता है. उन्हें स्कूल मोरल सपोर्ट दे. बोर्ड ने कहा है कि ऐसे कई मामले बोर्ड के पास मौजूद है जिसमें किसी ना किसी कारण को लेकर स्टूडेंट्स के उपर टॉचर किया जाता है.

यह चलेगा स्कूलों पर मुकदमा
सेक्शन 305  -  अगर स्टूडेंट मेंटल हेरेसमेंट से तंग आकर सुसाइड आदि करने की कोशिश करता है तो स्कूल पर इस सेक्शन के तहत आरोप लगेगा
सेक्शन  323  -  अगर किसी स्टूडेंट को जानबूझ कर बेइज्जती या चोट पहुंचाया जाता है तो स्कूल पर इस सेक्शन के तहत आरोप लगेगा
सेक्शन  325  -  अगर किसी स्टूडेंट को टीचर सरेआम बेइज्जती करते हैं और वो इससे काफी हर्ट होता है.
सेक्शन 326  -  टीचर के द्वारा जानबूझ कर स्टूडेंट को हर्ट किया जाता है. इससे स्टूडेंट्स कोई डेजरस कदम उठा लेता हैं
सेक्शन 352  -  टीचर द्वारा स्टूडेंटस को मेंटल टॉचर करते हुए किसी गलत काम के लिए प्रोवोक किया जाता है
सेक्शन 354  - गर्ल स्टूडेंट्स के साथ रैंगिंग या मजाक उड़ाने पर
सेक्शन 506  -  टीचर द्वारा स्टूडेंट को आपराधिक धमकी देने पर

कोट
सीबीएसइ का यह कदम काफी सराहनीय है. स्कूलों में मेंटल हेरेसमेंट सही में काफी बढ़ गया है. इससे पढ़ाई के प्रति स्टूडेंट्स का रूझान खत्म हो जाता है. कभी-कभी मेंटल हेरेसमेंट इतना गंभीर होता है कि स्टूडेंट्स एकेडेमिक कैरियर भी खत्म कर लेते है. लेकिन दुबारा स्कूल नहीं जाना चाहते हैं. ऐसे में स्कूल के उपर कार्रवाई होने से इस तरह की घटनाएं कम होगी.
सीबी सिंह, सचिव, सीबीएसइ पाटलिपुत्र सहोदया

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