Tuesday, May 26, 2015

इंप्रूवमेट के लिए दिया दुबारा एग्जाम, रिजल्ट हीं नहीं मिला

इंप्रूवमेट के लिए दिया दुबारा एग्जाम, रिजल्ट हीं नहीं मिला

- इंटर काउंसिल में इंप्रूवमेंट देने वाले स्टूडेंट्स भटक रहे
- 2014 के 40 छात्रों ने इंप्रूवमेंट के लिए दुबारा भरा था इंटर का फार्म
संवाददाता, पटना
केस वन - राकेश कुमार (रौल नंबर    रौल कोड) ने 2014 सत्र में इंटर की परीक्षा दी.  287 अंक से पास भी हुआ. कम मार्क्‍स आने के कारण के कारण राकेश कुमार ने इंप्रूवमेट देने का आदेश काउंसिल से लिया. 2015 मार्च में इंटर परीक्षा के साथ इंप्रूवमेट की परीक्षा भी दिया. लेकिन मार्क्‍स बढ़ने के बदले सारे मार्क्‍स ही गायब हो गये. अरवल का रहने वाला राकेश कुमार ने बताया कि उसे केरला के कोचिंग यूनिवर्सिटी में नामांकन लेना है. इसके लिए 60 परसेंट मार्क्‍स जरूरी है. लेकिन सेकेंड डिवीजन होने के कारण इंप्रूवमेंट की परीक्षा लिया कि अंक बढ़ जायेंगे. लेकिन मार्क्‍स सीट पर मार्क्‍स ही नहीं दिया गया है. समिति आया हूं, कोई कुछ नहीं बता रहा है.
केस टू  - रवि रंजन (रौल नंबर 40004 रौल कोड 43028) को भी 2014 में इंटर साइंस में 287 अंक आयें थे. इस कारण रवि रंजन ने इंप्रूवमेंट देकर मार्क्‍स बढ़ाने की सोची. आवेदन दिया, इंटर की परीक्षा भी दिया. लेकिन मार्क्‍स नहीं मिला. परीक्षा देने के बावजूद रवि रंजन के मार्क्‍स सीट में एक भी विषय के अंक नहीं है. रवि रंजन ओबीसी केटेगरी में जेइइ मेन की परीक्षा में सफल भी हुआ है. 24 मई को उसे जेइइ एडवांस भी देना है. उसके बाद उसे अपना मार्क्‍स सीट सीबीएसइ को भेजना भी है. लेकिन रवि रंजन के पास अभी तक मार्क्‍स सीट नहीं हैं.
- इंप्रूवमेंट का रिजल्ट हैं लंबित
इंटर का रिजल्ट तो निकल गया. लेकिन अधिकांश इंप्रूवमेंट देने वाले छात्र को मार्क्‍स सीट सही नहीं मिल पा रहा है. 2014 में भारी संख्या में इंटर साइंस का रिजल्ट खराब हो गया था. इसके कारण लगभग 40 हजार परीक्षार्थी ने मार्क्‍स को लेकर आपत्ति जतायी थी. जिन छात्रों को मार्क्‍स उम्मीद से कम आयें, बाद में उन्होंने इंप्रूवमेंट के लिए आवेदन दिया. परीक्षा भी दिया. लेकिन काफी संख्या में इन दिनों इंप्रूवमेंट वाले छात्र इंटर काउंसिल में घूम रहे हैं. उन्हें मार्क्‍स सीट सही से नहीं मिला है. इस कारण वो कहीं पर नामांकन नहीं ले पा रहे है. इस संबंध में एक छात्र रूपम कुमार (रौल नंबर 40015 रौल कोड 11017) ने बताया कि इंप्रूवमेंट के लिए परीक्षा दिया. लेकिन नेट पर उसके मार्क्‍स सीट नहीं हैं. रौल कोड और रॉल नंबर डालने पर मार्क्‍स सीट नॉट एबलेबल बताया है.
- लंबी लाइन और जमा हो रहे है स्क्रूटनी के लिए आवेदन
इंटर काउंसिल में इन दिनों सुबह से ही छात्रों की लंबी लाइन लगी रहती है. स्क्रूटनी के लिए सैकड़ों छात्र हर दिन आवेदन दे रहे है. समिति से मिली जानकारी के अनुसार स्क्रूटनी के लिए अभी तक दो हजार के लगभग आवेदन जमा हो चुके है. ज्ञात हो कि लंबित रिजल्ट की संख्या भले चार हजार के लगभग हो, लेकिन रिजल्ट की गड़बड़ी बहुत ज्यादा की संख्या में होने के कारण छात्र काफी परेशान है. इंटर साइंस में पास तो कर गये, लेकिन उन्हें सही मार्क्‍स सीट नहीं मिला है. ऐसे छात्र भी इंटर काउंसिल में रिजल्ट सुधार को लेकर आवेदन कर रहे है.
- रविवार को भी खुला रहेगा इंटर काउंसिल
छात्रो को स्क्रूटनी के लिए आवेदन देने के कारण शनिवार को इंटर काउंसिल सुबह से ही खुला रहा. खुद अध्यक्ष इसकी मॉनिटरिंग इंटर काउंसिल में करते रहे. अध्यक्ष के आदेश पर इंटर काउंसिल रविवार को भी खुला रहेगा. हर दिन सैकड़ों की संख्या में छात्र इंटर काउंसिल अपने रिजल्ट की समस्याओं को लेकर आ रहे है. ऐसे में रविवार को छात्रों को लौटना नहीं पड़ जायें. इस कारण रविवार को भी इंटर काउंसिल खुला रहेगा. स्क्रूटनी का आवेदन जमा होगा.

ये सारी गड़बड़ियां पायी जा रही है छात्रों के मार्क्‍स सीट पर
- मार्क्‍स सीट में सही अंकों का निर्धारण नहीं हुआ हैं
- थ्योरी में मार्क्‍स तो है लेकिन प्रैक्टिकल में काट लिया गया है
- फिजिक्स और केमेस्ट्री के अंकों में अधिक गड़बड़ियां पायी जा रही हैं
- जिस विषय में परीक्षा दिया, उसमें मार्क्‍स नहीं मिला. दूसरे विषय में मार्क्‍स मिल गया
- मार्क्‍स सीट में कई विषयों के अंक ही नहीं दिया गया है
- कुल अंक तो हैं. पास भी कर गये, लेकिन फेल का रिजल्ट प्राप्त हुआ है
- एक मार्क्‍स सीट पर हर विषय के एक जैसे अंक होना

कोट
हमारे पास जो भी आवेदन हो रहे है. उसके अंक को सही करने की कोशिश की जायेगी. सारे छात्रों को न्याय मिलेगा. बस थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा. हम जल्द से जल्द उनके सही अंक उन्हें उपलब्ध करवा देंगे.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति 

पास तो कर गये, लेकन अंक लाने में पिछड़ गये

पास तो कर गये, लेकन अंक लाने में पिछड़ गये

- इंटर काउंसिल में लंबित रिजल्ट से अधिक कम अंक लाने वाले छात्रों की लगी है भीड़
- कम अंक में सुधार के लिए छात्र कर रहे स्क्रूटनी के लिए अप्लाई
संवाददाता, पटना
प्रैक्टिकल में पास कर गये, लेकिन थ्योरी में फेल कर गये. इंटर साइंस के रिजल्ट में अधिकांश छात्र अपने रिजल्ट को देख कर खुद ही परेशान है. छात्रों का मानना है कि अगर हम प्रैक्टिकल में पास कर रहे है तो थ्योरी में इतने तो अंक मिलने ही चाहिए कि हम पास कर जायें. हमें फेल कर दिया गया है. इंटर साइंस का रिजल्ट निकल चुका है. लेकिन छात्रों का विवाद खत्म नहीं हुआ है.  इस बार पूरे प्रदेश से 88.97 फीसदी विद्यार्थी इंटर साइंस में सफल हुए हो, लेकिन काफी संख्या में विद्यार्थी को फिजिक्स और केमेस्ट्री में काफी कम अंक आयें. ऐसे में अब छात्र अपना रिजल्ट में सुधार के लिए इंटर काउंसिल पहुंच रहे है. अंक बढ़ाने के लिए वो काउंसिल के पास आवेदन भी दे रहे है.
- सबसे अधिक खराब हुआ फिजिक्स का रिजल्ट
इंटर साइंस में भले 4414 छात्रों के रिजल्ट ही पेंडिंग हुए हो, लेकिन विषय वार कम अंक मिलने की समस्या वाले छात्रों की संख्या सबसे अधिक हैं. नवादा से आयें छात्र रोहित ने बताया कि मैथ में उसे 75 अंक और फिजिक्स में मात्र 30 अंक आयें है. फिजिक्स प्रैक्टिकल में उसे 27 अंक दिये गये है. ऐसे में वो पास तो कर गया हैं, लेकिन उसे थ्योरी में कम अंक आयें है जिससे उसे नामांकन लेने में दिक्कतें आ सकती है. कुछ ऐसा ही हाल पटना फुलवारी सरीफ से आये पंकज कुमार का है. पंकज ने बताया कि प्रैक्टिकल में 25 अंक आयें है लेकिन थ्योरी पेपर में 32 अंक हैं. ओएमआर सीट के सारे उत्तर उसके सही थे.
- मॉडल पेपर से पूछे गये थे 70 फीसदी प्रश्न
इस बार इंटर साइंस की परीक्षा के पहले मॉडल पेपर निकाला गया था. इस मॉडल पेपर से लगभग 70 से 80 फीसदी प्रश्न पूछे गये थे. 100 अंक के फिजिक्स और केमेस्ट्री में 28 अंक का ओएमआर टाइप प्रश्न थे, 42 अंक के थ्योरी और 30 अंक के प्रैक्टिकल प्रश्न पूछे गये थे. परीक्षा में मॉडल पेपर का काफी फायदा छात्रों को मिला था. प्रश्न भी काफी आसान थे. फिजिक्स के एक्सपर्ट विपुल कुमार ने बताया कि ओएमआर और थ्योरी के अंकों को मिला दिया जायें तो भी अच्छे अंक प्राप्त किये जा सकते थे. स्क्रूटनी में जांच होने के बाद ही पता चलेगा कि कहां पर गड़बड़ी पायी गयी है.
- 5 जून से शुरू होगा स्क्रूटनी का काम
इंटर साइंस के छात्रों से स्क्रूटनी के लिए अभी आवेदन लिये जा रहे हैं. रविवार तक लगभग दो हजार आवेदन जमा कर लिये गये हैं. आवेदन लेने के बाद स्क्रूटनी का काम 5 जून से इंटर काउंसिल में शुरू किया जायेगा. बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि 5 जून से स्क्रूटनी काम शुरू हो जायेगा. अभी आवेदन के अनुसार छात्रों के उत्तर पुस्तिका को निकाला जा रहा है. उसके बाद स्क्रूटनी का काम शुरू होगा. एक्सपर्ट के तौर पर लगभग 150 शिक्षकों को अलग-अलग विषयों से लगायें जायेंगे. इसमें प्लस टू और कॉलेजों के शिक्षकों को चुना जा रहा है.
- रविवार को भी खुला रहा इंटर काउंसिल
स्क्रूटनी के आवेदन के लिए रविवार को भी इंटर काउंसिल खुला रहा. रविवार को लगभग 800 आवेदन जमा लिये गये. अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद खुद इसमें लगे रहे. अध्यक्ष छात्रों से भी मिले और उनकी समस्याओ को देखा और सुना. खासकर जेइइ मेन में पास होने वाले छात्रों के रिजल्ट को जल्द से जल्द देने की कोशिश में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति लगी हुई है.

इवैल्यूशन में हुई है गड़बड़ी
इंटर साइंस के रिजल्ट को तैयार करने में इवैल्यूशन स्तर पर ही गड़बड़ी हुई है. क्योंकि अगर किसी छात्र को प्रैक्टिकल में अच्छे अंक आ रहे है. तो थ्योरी में उसे अच्छे अंक आने ही चाहिए. प्रैक्टिकल में 90 फीसदी अंक लाने वाले को थ्योरी में कम अंक नही मिल सकते है. ऐसे में थ्योरी कॉपी की जांच पर ही सवाल है. एक तो स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती है. वहीं शिक्षकों ने भी आधी अधूरी कॉपी की जांच की है.
प्रो, शंकर प्रसाद, फिजिक्स एक्सपर्ट

कोट
सबसे अधिक फिजिक्स में रिजल्ट खराब हुआ है. काफी संख्या में छात्र जो आवेदन कर रहे है, उनके रिजल्ट में फिजिक्स विषय में काफी कम अंक आयें है. उसके बाद केमेस्ट्री विषय में कम अंक छात्रो को आये है. अभी स्क्रूटनी होगा तो इवैल्यूशन की सही जानकारी मिल पायेगी.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति 

बीपीएसइ के सिलेबस से गायब हो जायेगा पटना म्यूजियम

बीपीएसइ के सिलेबस से गायब हो जायेगा पटना म्यूजियम

- 1764 के बाद के सारे एतिहासिक धरोहरों को रखा जायेगा बिहार म्यूजियम में
- यक्षिणी की मूर्ति के अलावा कई पीरियड के धरोहर भी जायेगा बिहार म्यूजियम
संवाददाता, पटना
विश्व में किस म्यूजियम में बुद्ध का अस्थि कलश रखा हुआ है. देश का कौन म्यूजियम है जहां पर गंधार से लायी गयी मूर्ति को रखी हुई  है. राहुल सांस्कृतायन द्वारा लाये गये पांडुलिपि को किस म्यूजियम के पास धरोहर के रूप में रखा गया हैं.  बीपीएसइ और बिहार लेवल सचिवालय आदि की प्रतियोगी परीक्षा में पूछे जाने वाले इन सवालों का जवाब अभी तक पटना म्यूजियम में मिल जाता था.  मगर जुलाई के बाद ये सवाल तो वहीं रहेगें लेकिन जवाब पटना म्यूजियम की जगह बिहार म्यूजियम से मिलेगा. क्योंकि पटना म्यूजियम में रखी ऐसी बेशकीमती समान यहां से हटा कर बिहार म्यूजियम में रख दिया जायेगा. यह काम जुलाई तक पूरा हो जायेगा. म्यूजियम के सीनियर समेत तमाम एक्सपर्ट की टीम इसमें लगी हुई है. एक्सपर्ट की टीम को समानों की लिस्ट दे दी गयी है. इस लिस्ट के आधार पर ही पटना म्यूजियम से समानों को हटाने की तैयारी शुरू हो चुकी है. लिस्ट के आधार पर पटना म्यूजियम में रखी 1764 से पहले का सामान बिहार म्यूजियम में शिफ्ट कर दिया जायेगा. बांकी बचे 1764 के बाद का सामान पटना म्यूजियम में छोड़ दिया जायेगा.
- खत्म हो जायेगा जादू घर का जादू
पटना म्यूजियम को लोग जादू घर के नाम से अधिक जानते है. यह म्यूजियम अपने अंदर कई इतिहास संजोये है. इस म्यूजियम का इतिहास काफी पुराना है. म्यूजियम में अशोक काल से लेकर कई ऐसे कालों की एतिहासिक चीजें रखी हुई है जो वर्तमान में देश या विश्व के दूसरे म्यूजियम के पास उपलब्ध नहीं है. हर दिन सैकड़ों की संख्या में देश के साथ विदेशी पर्यटक भी इस म्यूजियम को देखने और जानने को आते है. अब जब इस म्यूजियम के खाली हो जाने की बात हो रही है तो विजिटर्स के साथ यहां पर काम करने वाले कर्मचारी और सीनियर ऑफिसर भी काफी निराश हो रहे है. कुछ सीनियर ऑफिसर ने तो दबी जुबान से लोग यह भी कहते है कि पटना म्यूजियम की साख पर खतरा हैं. जिस चीजों के लिए पटना म्यूजियम को जाना जाता है. अब जब वहीं यहां नहीं रहेगा तो पटना म्यूजियम लोग क्यूें आयेंगे.
कई दुर्भभ एतिहासिक चीजों का जगह बदल जायेगा
दस लाख से अधिक विजिटर ने जिस इतिहास को पटना म्यूजियम में देखा है, उन्हें फिर से इतिहास को दो तरीके से याद रखना होगा. जुलाई के बाद से ऐसे दोनों जगहों पर रखी दुर्लीा चीजों की अलग-अलग जानकारी रखनी होगी. पटना म्यूजियम में रखे ंसामन को दोनों जगह अलग-अलग कर दिया जायेगा. म्यूजियम के सीनियर ऑफिसर ने कहा कि इसके बाद म्यूजियम में बच्चो के लिए ज्येालॉजिकल पार्क के अलावा राजेंद्र प्रसाद से जुड़ी कुछ एतिहासिक चीजों ही देखने को मिलेगी. साथ ही म्यूजियम के अंदर जगह भी काफी खाली हो जायेगा. लेकिन अब तक गवर्नमेंट की ओर से इन खाली जगहों के यूज पर कोई बात नहीं बन पायी है.
- किया जाता रहा रिसर्च वर्क
पटना म्यूजियम की सूत्रो की माने तो सरकार प्लान तय नहीं कर पा रही है. लेकिन अब तमाम एतिहासिक धरोहर यहां से चले जायेंगे तो फिर यहां पर रिसर्च वर्क के अलावा कुछ और नहीं हो सकता है. जानकारी हो कि म्यूजियम में रखे समान और दुलर्भ पांडुलिपि को ट्रीट करने को लेकर काम पहले से चल रहा है. रिसर्च वर्क तो चलेगा लेकिन उन रिसर्चर के लिए मुश्किल हो जायेगी जो पटना म्यूजियम अपने रिसर्च वर्क को पूरा करने के लिए आया करते है. पटना विवि के अलावा देश के कई विवि के इतिहास के छात्र अपना रिसर्च वर्क पूरा करने के लिए पटना म्यूजियम में आते रहते है. कई विवि के छात्र तो हर साल अपना प्रोजेक्ट वर्क आदि भी पूरा करने के लिए पटना म्यूजियम आते रहते है.
- बुद्ध अस्थि कलश है पटना म्यूजियम की पहचान
एक तरफ पटना म्यूजियम से दुलर्भ एतिहासिक चीजें बिहार म्यूजियम में शिफ्ट कर दिया जायेगा. वहीं बुद्ध अस्थि कलश के लिए फेमस पटना म्यूजियम से बुद्ध अस्थि कलश भी वैशाली म्यूजियम में भेज दिया जायेगा. ज्ञात हो हर महीने सैकड़ों लोग बुद्ध अस्थि कलश को देखने के लिए पटना म्यूजियम आते है. इससे पटना म्यूजियम को अच्छा खासा रेवेन्यू भी प्राप्त हो जाता है.
- 1917 से है पटना म्यूजियम
पटना म्यूजियम देश के उन म्यूजियमों में से एक है जिसकी स्थापना अंगेज के समय में ही किया गया था. पटना म्यूजियम का स्थापना 1917 में किया गया था. यहां रखें दुलर्भ एतिहासिक चीजों को देखने के लिए देश और विदेश से भी लोग आते है. इस म्यूजियम में लगभग एक लाख दुलर्भ चीजें रखी हुई हैं.

ये सारी चीजें चला जायेगा बिहार म्यूजियम
- दीदारगंज की यक्षिणी की मूर्ति
- अफगानिस्तान स्थिति गंधार की मूर्ति
- बुलंदी बाग से मिली कांस्य की मूर्ति
- शुंग काल की मूर्तियां
- पाल वंश, नव पाषाण काल आदि काल के अलग-अलग जगहों से मिलने वाली अद्भुत कलाकृतियां और एतिहासिक चीजें
- अशोक काल की कई चीजों
- बुद्ध  और महावीर काल से रिलेटेड कई दुलर्भ चीजें
- राहुल सांस्कृतायन की पांडुलिपि जो तिब्बत से पटना लाया गया था और उसे पटना म्यूजियम में रखा गया था
- दो हजार साल पुराना पेड़ जो पटना म्यूजियम में कई सालों पहले लाया गया था
- चौसा बक्सर से मिली कांस्य मूर्ति

कोट
सरकार के पास से हमें समानों की लिस्ट तैयार करने को कहा गया हैं. यह लिस्ट हमे जुलाई तक तैयार करनी है. पटना म्यूजियम से काफी संख्या में समान बिहार म्यूजियम शिफ्ट हो जायेगा. 1964 से पहले के समानों की लिस्ट मांगी गयी हैं.
जय प्रकाश नारायण, डायरेक्टर, पटना म्यूजियम


फिजिक्स ने गिरा दिया पास परसेंटेज, 96.76 परसेंट ही हुए पास

फिजिक्स ने गिरा दिया पास परसेंटेज, 96.76 परसेंट ही हुए पास

- फिजिक्स ने बिगाड़ दिया पटना जोन का रिजल्ट
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ 12वीं के रिजल्ट में इस बार फिजिक्स ने रिजल्ट का फिगर गड़बड़ कर दिया. यहीं कारण है कि पटना में पास परसेंटेज 74.80 परसेंट पर आकर रूक गया. फिजिक्स विषय में  96.76 परसेंट स्टूडेंट्स की पास कर पायें. बांकी लगभग चार परसेंट स्टूडेंट्स फिजिक्स में फेल कर गये. बिहार के साइंस टॉपर की बात करें तो आशीष राज को भी सबसे कम मार्क्‍स फिजिक्स (95 मार्क्‍स) में ही आया है. इसके अलावा सेंकेंड और थर्ड टॉपर का भी अंक फिजिक्स में 95 और 94 के बीच ही सिमट कर रह गया. पटना जोन के रिजल्ट में फिजिक्स में पास परसेंटेज पिछले साल 2014 की तुलना में मात्र दो परसेंट कम हैं.
मैथेमेटिक्स में सबसे अधिक स्टूडेंट्स हुई पास
इस बार सीबीएसइ के रिजल्ट में मैथेमेटिक्स का रिजल्ट सबसे बढ़िया रहा. अधिकांश स्टूडेंट्स को मैथेमेटिक्स विषय में सबसे अच्छे मार्क्‍स आये. बोर्ड की माने तो 2014 में जहां केमेस्ट्री विषय में सबसे अधिक 97.67 परसेंट स्टूडेट्स पटना रिजन से पास किये थे. वहीं इस बार मैथेमेटिक्स विषय में सबसे अधिक 98.68 परसेंट स्टूडेंट्स को सफलता मिली हैं.

12वीं के कुछ विषयों के पास परसेंटेज
इंगलिश   -  96.67 परसेंट
हिंदी      -    97.78 परसेंट
इकोनॉमिक्स  -  96.7 परसेंट
कॉमर्स    -   95.42 परसेंट
एकाउंटस   -  98.45 परसेंट
मैथेमेटिक्स  -  98.68 परसेंट
फिजिक्स  -  96.76 परसेंट
केमेस्ट्री   -   97.67 परसेंट
बायोलॉजी  -  98. 65 परसेंट
कम्यूटर साइंस  -  97.87 परसेंट 

किसी को मैथ ने तो किसी को एकाउंटेंसी ने बना दिया टॉपर

किसी को मैथ ने तो किसी को एकाउंटेंसी ने बना दिया टॉपर

- एक दो अंक के अंतर पर एक दूसरे को पीछे कर दिये टॉपरों ने
- टॉपर बनने में उनके चुने गये सब्जेक्ट का रहा विशेष योगदान
संवाददाता, पटना
किसी को मैथ ने उपर कर दिया तो किसी एकाउंटेंसी ने तो कोई हिस्ट्री विषय के कारण टॉपर लिस्ट में शामिल हो गया. टॉपर के सब्जेक्ट ने ही टॉपर को टॉपर बना दिया. सीबीएसइ के 12वीं के रिजल्ट में कुछ ऐसा ही देखने को मिला. साइंस स्ट्रीम का बिहार टॉपर आशीष राज अपने टॉपर होने के पीछे मैथ विषय का विशेष योगदान मानता है. आशीष राज ने बताया कि मैथ में उसे 99 मार्क्‍स आयें हैं. इसके अलावा कम्प्यूटर में 100 मार्क्‍स ने उसे टॉपर बना दिया. इन दोनों विषय में कम अंक आते तो टॉपर बनना मुश्किल हो जाता. वहीं साइंस का सेंकेड टॉपर उद्धव राज ने बताया कि इंगलिश में 99 और कम्प्यूटर में 100 मार्क्‍स ने उसे टॉपर लिस्ट मे शामिल किया. उद्धव राज ने बताया कि केमेस्ट्री में 95 से तीन अंक और आ जाते तो टॉपर बनना आसान हो जाता.
- एक्स्ट्रा सब्जेक्ट ने अमृत प्रभा को बना दिया आर्ट्स टॉपर
साइंस विषय में जहां टॉपरों के बीच मैथ और इंगलिश विषय में एक दो अंक का अंतर रहा वहीं आर्ट्स में एक्स्ट्रा सब्जेक्ट ने अमृत प्रभा को टॉपर बना दिया. आर्ट्स की टॉपर अमृत प्रभा और श्रेया चौधरी के सब्जेक्ट वाइज मार्क्‍स में बहुत कम का अंतर है. लेकिन अमृत प्रभा ने फिजिकल एजुकेशन विषय के रूप में लिया था. फिजिकल एजुकेशन में अमृत प्रभा को 100 अंक प्राप्त हुए और इसी ने अमृत प्रभा को टॉपर बना लिया. वहीं श्रेया चौधरी सेकेंड टॉपर रही. इसके लिए श्रेया चौधरी कम्प्यूटर और हिस्टी को क्रेडिट देती है. श्रेया चौधरी को कम्प्यूटर में 99 और हिस्ट्री में 95 मार्क्‍स प्राप्त हुए हैं.
 - एकाउंटेंसी ने बना दिया टॉपर
कॉमर्स सट्रीम के टॉपरों के बीच भी अंकों का काफी कम अंतर रहा. कॉमर्स की टॉपर स्नेहा अग्रवाल को एकाउंटेंसी में 100 अंक प्राप्त हुए. वहीं बिजनेस स्टडीज में 99 मार्क्‍स प्राप्त हुए. स्नेहा अग्रवाल के अनुसार एकाउंटेंसी और बिजनेस स्टडीज ने टॉपर बनने में सहयोग दिया. वहीं कॉमर्स की थर्ड टॉपर नवनीत कौर को एकाउंटेंसी में 99 और इंगलिश में 95 मार्क्‍स प्राप्त हुए है. नवनीत कौर ने बताया कि एकाउंटेंसी ने टॉपर लिस्ट में शामिल कर दिया.
- सही सब्जेक्ट का चुनाव दिलाता है टॉपर लिस्ट में
11वीं में सही सब्जेक्ट लेने से मार्क्‍स में बढ़ोतरी होती है और वो टॉपर लिस्ट में शामिल हो जाता है. सीबीएसइ के अनुसार स्टूडेंट्स को 11वीं में सब्जेक्ट चुन कर लेना चाहिए. कुछ विषय ऐसे होते है जिसका स्कोरिंग काफी अच्छा जाता है. कॉमर्स एक्सपर्ट बीपी राय ने बताया कि कॉमर्स में मैथ का सिलेबस साइंस मैथ की तरह ही होता है. ऐसे में मैथ लेने वाले स्टूडेट्स को कॉमर्स में मार्क्‍स कम आते है. इस कारण इकोनॉमिक्स आदि विषय ही कॉमर्स स्ट्रीम वाले स्टूडेंट्स को लेना चाहिए.

कोट
जब भी स्टूडेट्स को 11वीं में सब्जेक्ट का चुनाव करना हो तो उन्हें सोच समझ कर करना चाहिए. क्योंकि अब आइआइटी में नामांकन के लिए 12वीं के 40 फीसदी मार्क्‍स का वेटेज होने लगा है. ऐसे में 12वीं में स्कोरिंग का काफी महत्व हो गया हैं. इस कारण ऐसे विषय को स्टूडेंट्स को लेना चाहिए जिसमें उन्हें अधिक से अधिक से मार्क्‍स आयें.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ 

स्टूडेंट्स कहीं और से, नाम कमाता कोई और स्कूल

स्टूडेंट्स कहीं और से, नाम कमाता कोई और स्कूल

- सीबीएसइ 12वीं के टॉपर लिस्ट में शामिल अधिकांश स्टूडेंट्स ने 10वीं किया किसी और स्कूल से
- अधिकांश स्टूडेंट आइसीएसइ बोर्ड से
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ 12वीं के रिजल्ट की घोषणा कर दी गयी है. अगर हम साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स स्ट्रीम की बात करें तो अधिकांश टॉपर सेंट माइकल और नॉटड्रेम एकेडमी के ही शामिल है. लेकिन इन टॉपरों के सक्सेस के पीछे देखा जायें तो अधिकांश टॉपर इन स्कूलों में नये हैं. इन्होंने 10वीं कहीं और से और 11वीं में इन स्कूलों में नामांकन लिया था. सेंट माइकल हाई स्कूल के साइंस टॉपर की बात करें तो आशीष राज साइंस का टॉपर रहा है. आशीष राज को 97.8 फीसदी मार्क्‍स प्राप्त हुई हैं. आशीष राज ने बताया कि 11वीं में सेंट माइकल हाई स्कूल में नामांकन लिया था. इससे पहले आशीष राज ज्योथल मेमोरियल हाई स्कूल, दाजिर्लिंग से 10वी बोर्ड की परीक्षा पास की थी. आइसीएसइ बोर्ड के इस स्कूल में आशीष राज को 97 परसेंट मार्क्‍स आयें थे. आशीष राज का नामांकन सेंट माइकल हाई स्कूल में डायरेक्ट हुआ था. वहीं साइंस का सेंकेंड टॉपर लिस्ट में एक नाम उद्धव राज का भी है. 97.2 परसेंट मार्क्‍स के साथ उद्धव राज ने 10वीं तक की पढ़ाई सेंट कैरेंस हाई स्कूल से किया था. उद्धव राज को सेंट कैरेंस हाई स्कूल, गोला रोड में 10वीं में 95.4 परसेंट मार्क्‍स आयें थे.
- स्नेहा अग्रवाल ने रचा इतिहास
नॉटड्रेम एकेडमी की स्नेहा अग्रवाल बिहार स्टेट की टॉपर हुई हैं. लेकिन स्नेहा अग्रवाल के इस सफलता के पीछे उनका बेसिक एजुकेशन देने वाला स्कूल स्कॉलर एवोर्ड का रहा है. स्नेहा बताती है कि 10 सीजीपीए के साथ स्कॉलर एवोर्ड से उन्होंने 10वीं की पढ़ाई पूरी किया. उसके इसके बाद एट्रांस देकर नॉटड्रेम एकेडमी में नामांकन लिया. वहीं कॉमर्स स्ट्रीम में थर्ड टॉपर रही नवनीत कौर कॉर्मेल जूनियर कॉलेज, जमशेदपुर से 10वीं की पढ़ाई की हैं. नवनीत कौर ने बताया कि आइसीएसइ बोर्ड से सीबीएसइ में आना चाहते थ. पटना में नॉट्रेडम एकेडमी मे एंट्रांस देकर नामांकन लिया था. नवनीत कौर को 10वी में 95 परसेंट मार्क्‍स आये थे.
- आइसीएसइ बोर्ड के स्टूडेंट का रहा दबदबा
सीबीएसइ के 12वीं के रिजल्ट में आइसीएसइ बोर्ड के स्टूडेंट्स का दबदबा रहा. 12वीं के टॉपर लिस्ट में अधिकांश स्टूडेंट्स आइसीएसइ बोर्ड के स्टूडेंट्स ही शामिल है. सेंट कैरेंस हाई स्कूल, गोला रोड से 10वीं बोर्ड कर सीबीएसइ से 12वीं बोर्ड का सेकेंड टॉपर बना उद्धव राज ने बताया कि आइसीएसइ बोर्ड से सीबीएसइ बोर्ड काफी आसान है. ऐसे में सीबीएसइ में कई ऐसी चीजों के बारे में हमें बेसिक जानकारी 10वीं तक में ही दे दिया जाता है. वहीं सेट माइकल हाई स्कूल से ही सेंकेंड टॉपर लिस्ट में रही मानसी खेमका सेंट जोसफ कांवेंट हाई स्कूल से सीबीएसइ स्कूल मे ंनामांकन लिया था. मानसी खेमका के अनुसार भी बेसिक एजुकेशन आइसीएसइ बोर्ड का काफी अच्छा है. इस कारण टॉपर लिस्ट में शामिल हो पायी. 

सीबीएसइ 12वीं का रिजल्ट घोषित, लड़कों को पीेछे छोड़ लड़कियां हुई आगे

सीबीएसइ 12वीं का रिजल्ट घोषित, लड़कों को पीेछे छोड़ लड़कियां हुई आगे

- सीबीएसइ 12वीं में लड़कों के टोटल रिजल्ट से 10.4 फीसदी आगे रहा लड़कियों का रिजल्ट
- पटना जोन से 74.80 फीसदी स्टूडेंट्स हुए पास
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेण्ड्री एजूकेशन के पटना जोन के 12वीं के रिजल्ट की घोषणा सोमवार को कर दिया गया. पिछले साल की तरह इस बार भी लड़कियों का रिजल्ट लड़कों से अच्छा रहा. पटना जोन से भले 12वीं में शामिल होने वाले परीक्षार्थी में छात्रों की संख्या ज्यादा रही, लेकिन रिजल्ट में लड़कियों ने लड़कों को पीछे कर दिया. यह बात की जानकारी पटना रीजनल ऑफिस में संवाददाता सम्मेलन के दौरान पटना रीजनल ऑफिसर (आरओ) और ज्वाइंट सेक्रेटरी रश्मि त्रिपाठी ने दिया. आरओ श्रीमति त्रिपाठी ने बताया कि इस बार पटना जोन से कुल 74.80 परसेंट छात्र को  सफलता मिली है. जो पिछले साल की तुलना में 1.27 परसेंट रिजल्ट कम हुआ है. पटना जोन के 536 स्कूलों में कुल 82071 छात्र परीक्षा में रजिस्टर्ड हुए. इसमें 71736 छात्र 12वीं की परीक्षा में शामिल हुए. इसमें 53686 (74.80 परसेंट) स्टूडेंटस पास किये. इसमें पास करने वाले छात्रों की संख्या 32796 (71.1 फीसदी) वहीं पास करने वाली छात्रओं की संख्या 20890 (81.5 फीसदी) रहीं. इस बार 12वीं की परीक्षा में कुल 76089 स्टूडेंट्स शामिल हुए. इसमें 49805 लड़कों की संख्या थी वहीं लड़कियों की संख्या 26284 थीं.
- 12.71 फीसदी छात्र हो गये फेल
सीबीएसइ 12वीं का पटना जोन का रिजल्ट बांकी जोन से खराब रहा है. पटना जोन में 74.80 फीसदी छात्र पास किये तो वहीं 12.71 फीसदी छात्र को असफलता मिली है. असफल छात्रों की संख्या में भी लड़कों का प्रतिशत ज्यादा है. लड़कियों जहां 6.68 फीसदी ही असफल रही वहीं असफल लड़कों की संख्या 15.77 फीसदी रही है. इस बार पटना जोन में 7793 लड़कें 12वी में इस बार फेल कर गये. वहीं असफल लड़कियों की संख्या 2748 रही. अगर हम बात चेन्नई और त्रिवेंद्रम जोन की करें तो पटना जोन का रिजल्ट काफी पीछे है. चेन्नई जोन का रिजल्ट 93.63 फीसदी रहा वहीं त्रिवेंद्रम जोन का रिजल्ट 94.26 फीसदी रहा.
- लिंक फेल होने से रिजल्ट निकालने में स्कूलों को हुई परेशानी
सीबीएसइ 12वीं के रिजल्ट की घोषणा दिन के 12 बजे कर दिया गया था. लेकिन सीबीएसइ का लिंक फेल होने के कारण रिजल्ट निकालने में स्कूलों का अच्छा खासा परेशानी का सामना करना पड़ा. केंद्रीय विद्यालय बेली रोड की माने तो 12 बजे रिजल्ट बोर्ड के वेबसाइट पर डाल दिया गया था. लेकिन रिजल्ट पूरी तरह से निकालने में तीन बज गये. कुछ ऐसा ही हाल हर स्कूलों का रहा. तीन से चार घंटे स्कूलों को रिजल्ट को निकालने में लग गये. सीबीएसइ की माने तो इस बार कई प्राइवेट एजेंसी ने सीबीएसइ के लिंक से खुद को जोड़ लिया था. इस कारण थोड़ी देर के लिए लिंक को फेल रखा गया. जिससे प्राइवेट एजेंसी रिजल्ट की कॉपी ना कर सकें.

पटना जोन का रिजल्ट
कुल स्कूल  -  536
कुल रजिस्टर्ड परीक्षार्थी की संख्या  -  82071
रेगुलर परीक्षार्थी की संख्या  - 70089
प्राइवेट परीक्षार्थी की संख्या  - 11982
कुल शामिल परीक्षार्थी  - 76676
एबसेंट परीक्षार्थी की संख्या  - 5395
सफल परीक्षार्थी की संख्या  - 53686 (74.80)
कंपार्टमेंटल में शामिल परीक्षार्थी की संख्या  - 10187 (13.68)
कुल असफल परीक्षार्थी की संख्या  - 9466 (12.71)

छात्रों का रिजल्ट
कुल रजिस्टर्ड छात्र की संख्या   -  54918
परीक्षा में शामिल कुछ छात्र की संख्या  - 76676
एबसेंट छात्रों की संख्या  - 2357
कुल सफल छात्र की संख्या  - 32796 (71.1)
फेल छात्र की संख्या   - 7693 (15.77)
कंपालमेंटल में शामिल कुल छात्र  - 7479 (15.13)

छात्रओं का रिजल्ट
छात्रओं की कुल संख्या  - 26284
परीक्षा में शामिल कुल छात्रओं की संख्या  - 25036
एबसेंट छात्रों की संख्या  - 391
कुल सफल छात्रओं की संख्या  - 20890 (81.5)
फेल छात्र की संख्या   - 1673 (6.68)
कंपालमेंटल में शामिल कुल छात्रएं  - 2708 (10.82)

पिछले तीन सालों में इस तरह बढ़ा पटना जोन का रिजल्ट परसेंटेज
वर्ष          -    ओवर ऑल पास परसेंटेज
2013       -       73.53 परसेंटेज (पिछले साल 2012 की तुलना में 1.12 परसेंटेज अधिक)
2014       -        73.95 परसेंटे  (पिछले साल 2013 की तुलना में 1.47 परसेंट अधिक)
2015       -      74.80 परसेंट  (पिछले साल 2013 की तुलना में  1.27 परसेंटेज अधिक)

देश में सबसे नीचे रहा पटना जोन का रिजल्ट
 रीजन       -     पास परसेंट
चेन्नई        -     93.63 परसेंट
त्रिवेंद्रम    -       94.26 परसें
अजमेर    -       87.22 परसेंट
पंचकुला   -      85.85 परसेंट
गुवाहाटी   -       75.79 परसेंट
इलाहाबाद   -   75.14 परसेंट
भूवनेश्वर    -    86.24 परसेंट
पटना        -   74.80 परसेंट

Tuesday, May 19, 2015

93 से 98 परसेंट के बीच आइसीएसइ बोर्ड के रिजल्ट में हुआ अंकों की बरसात

93 से 98 परसेंट के बीच आइसीएसइ बोर्ड के रिजल्ट में हुआ अंकों की बरसात

- आइसीएसइ बोर्ड के 10वीं और 12वीं का निकला रिजल्ट
- इस्टर्न रिजन से 96.91 परसेंट स्टूडेंट्स हुए पास. पटना रिजन 98.49 परसेंट
संवाददाता, पटना
काउंसिल फॉर दी इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (आइसीएसइ) और इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट (आइएससी) 2015 के रिजल्ट की घोषणा सोमवार को कर दी गयी है. बोर्ड के अनुसार इस बार साउथ रिजन का रिजल्ट सबसे बढ़िया हुआ है. वहीं इस्टर्न रिजन (बिहार व झारखंड) का रिजल्ट देश भर में सबसे खराब रहा है. लेकिन पिछले साल 2014 की बात करें तो इस बार इस्टर्न रिजन के रिजल्ट में 5.67 फीसदी सुधार हुआ है. साउथ रिजन में जहां पास परसेंटेज 98.32 रहा. वहीं इस्टर्न रिजन में 96.91 परसेंट पर ही रिजल्ट सिमट कर रह गया है. इस बार आइसीएसइ बोर्ड में जहां पटना से 98.49 परसेंट स्टूडेंट्स पास किये है. वहीं आइएससी में 96.28 परसेंट स्टूडेंट्स को सफलता मिली है. पटना रिजन में इस बार बोर्ड के रिजल्ट में अंकों की खूब बरसात हुई है. अधिकांश स्टूडेंट्स को 93 से लेकर 98 परसेंट तक मार्क्‍स आये हैं. स्टूडेंट्स के मार्क्‍स आपस मे प्वाइंट परसेंटेज का ही अंतर आया हैं.
11.30 बजे जारी हुआ रिजल्ट
आइसीएसइ 10वीं और आइएससी 12वीं का रिजल्ट सुबह 11.30 बजे बोर्ड के वेबसाइट पर जारी कर दिया गया था. इस बार पिछले साल की तरह ही स्टूडेंट्स को एसएमएस से भी रिजल्ट मिलने की सुविधा दी गयी थी. पटना में जहां 10वीं के रिजल्ट में लड़कों का दबदबा रहा वहीं 12वीं में फस्र्ट, सेंकेड और थर्ड पोजिशन पर लड़कियों का कब्जा रहा. इस्टर्न रिजन के स्कूलों के लगभग 25 हजार स्टूडेंट्स 10वीं और 12वीं की परीक्षा में शामिल हुए थे. इसमें पटना के 17 स्कूल भी शामिल हैं. 17 स्कूलों में लगभग साढ़े पांच हजार स्टूडेंट्स ने 10वीं बोर्ड और लगभग साढ़े तीन हजार स्टूडेंट्स 12वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल हुए. ज्ञात हो कि 27 फरवरी से 29 मार्च तक आइसीएसइ बोर्ड की परीक्षा आयोजित की गयी थी.
10वीं में अक्षत सिन्हा तो 12वीं में दिव्या बनी स्टेट टॉपर
इस बार आइसीएसइ और आइएससी का रिजल्ट एक साथ घोषित किया गया है. आइसीएसइ 10वीं में सेंट पॉल्स हाई स्कूल के अक्षत सिन्हा स्टेट टॉपर बने है. अक्षत सिन्हा को 98.2 परसेंट मार्क्‍स आया है. वहीं 10वीं में सेकेंड टॉपर बनने का श्रेय दो स्टूडेंट्स को मिला. डॉन बास्को एकेडमी का राहुल चंद्रा और सेंट पॉल्स हाई स्कूल के स्टूडेंट हर्ष राज सेंकेंड टॉपर बने है. वहीं थर्ड टॉपर इंटरनेशनल स्कूल का स्टूडेंट जैन जफर और सेंट पॉल्स हाई स्कूल का सुभव कुमार बने हैं. वहीं 12वीं में इस बार स्टेट टॉपर दिव्या तिवरीबाल बनी है. सेंट जोसफ कांवेंट हाई स्कूल की कॉमर्स की टॉपर दिव्या तिवरीबाल को 98.5 परसेंट मार्क्‍स प्राप्त हुए हैं. वहीं सेंट जोसफ कांवेंट हाई स्कूल की आर्ट्स की टॉपर याशिका कंठ सेंकेंड स्टेट टॉपर बनी हैं.
मैथेमेटिक्स में सबसे अधिक स्टूडेंट्स हुई पास
इस बार आइएससी के रिजल्ट में मैथेमेटिक्स का रिजल्ट सबसे बढ़िया रहा. अधिकांश स्टूडेंट्स को मैथेमेटिक्स विषय में सबसे अच्छे मार्क्‍स आये. बोर्ड की माने तो 2014 में जहां केमेस्ट्री विषय में सबसे अधिक 98.67 परसेंट स्टूडेट्स पटना रिजन से पास किये थे. वहीं इस बार मैथेमेटिक्स विषय में सबसे अधिक 98.68 परसेंट स्टूडेंट्स को सफलता मिली हैं.

12वीं के कुछ विषयों के पास परसेंटेज
इंगलिश   -  95.60 परसेंट
हिंदी      -    94.48 परसेंट
इकोनॉमिक्स  -  90.72 परसेंट
कॉमर्स    -   92.42 परसेंट
एकाउंटस   -  90.45 परसेंट
मैथेमेटिक्स  -  98.68 परसेंट
फिजिक्स  -  98.60 परसेंट
केमेस्ट्री   -   98.67 परसेंट
बायोलॉजी  -  98. 65 परसेंट
कम्यूटर साइंस  -  97.87 परसेंट

आइसीएसइ (10वीं) में टोटल पास परसेंटेज  -  98.49 परसेंट
आइएसी (12वीं) में टोटल पास परसेंटेज  -  96.28 परसेंट
10वीं का रिजन वाइज रिजल्ट
साउथ रिजन का रिजल्ट  - 99.08 परसेंट
वेस्टर्न रिजन का रिजल्ट   - 99.46 परसेंट
इस्टर्न रिजन का रिजल्ट  -  96.91 परसेंट
नार्थ रिजन का रिजल्ट  -   97.30 परसेंट
12वीं का रिजन वाइज रिजल्ट
साउथ रिजन का रिजल्ट  - 98.08 परसेंट
वेस्टर्न रिजन का रिजल्ट   - 97.46 परसेंट
इस्टर्न रिजन का रिजल्ट  -  96.89 परसेंट
नार्थ रिजन का रिजल्ट  -   98.30 परसेंट 

हिंदी बोलने पर स्कूलों में लगता है फाइन

हिंदी बोलने पर स्कूलों में लगता है फाइन

- पटना के कई स्कूलों में हिंदी बोलने की मिलती हैं सजा
- अभिभावकों को भी बच्चों के साथ इंगलिश में बात करने का दिया जाता हैं प्रेशर
संवाददाता, पटना
केस वन  - पूजा क्लास 6ठीं की छात्र है. एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ रही है. हर हफ्ते पूजा को 10 से 12 रुपया फाइन के रूप में देना होता है. पूजा को यह फाइन कोई स्कूल के डिसिप्लीन तोड़ने के लिए नहीं देना होता है. बल्कि स्कूल में रहते हुए राष्ट्रभाषा हिंदी बोलने पर देना होता है. हिंदी का लाइन बोलने पर एक रुपये का फाइन देना होता है. इतना हीं नहीं पूजा को हिंदी बोलने पर दूसरे क्लास रूम में भी घुमाया जाता है. साथ में दूसरे स्टूडेंट को बताया जाता है कि इस स्टूडेंट को इंगलिश बोलने में परेशानी हो रही है.
केस टू  -  साक्षी एक प्रतिष्ठित स्कूल में क्लास 5वीं की छात्र हैं. एक दिन उसे पूरे जूनियर सेक्शन में घुमाया गया. क्योंकि उसने एक हिंदी वर्ड बोला था और उसके जूते में पॉलिश नहीं था. क्लास रूम में घुमाने के अलावा साक्षी को दो रुपये का फाइन भी देना पड़ा. इससे साक्षी काफी डिप्रेस्ड हो गयी है. स्कूल में सारे स्टूडेंट उसे चिढ़ाते हैं. ऐसे में साक्षी के अभिभावक ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास अपनी बात रखी हैं

- 15 से 20 रुपये होते है खर्च
स्कूल में ट्यूशन फी देने के अलावा अभिभावकों को फाइन पर भी खर्च हर हफ्ते करना होता है. प्राइवेट और मिशनरी स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को हर दिन ऐसे फाइन से दो चार होना पड़ता है. कभी होमवर्क नहीं करने को लेकर फाइन जमा करना पड़ता है तो कभी मोबाइल पकड़े जाने पर फाइन अदा करना पड़ता हैं. स्कूल प्रशासन के अनुसार स्कूल के डिसिप्लीन को मेंटेन करने के लिए ऐसा किया जाता है. पर, अभिभावकों के उपर हर हफ्ते पड़ने वाले यह बोझ बड़ा ही भारी हैं. अगर स्टूडेंट्स फी जमा करने में एक दिन की भी देरी करते है तो इसके लिए उन्हें 5 रुपये प्रति दिन के हिसाब से फाइन लगता है. कई बार ऐसा होता हैं कि पैरेंट्स टाइम पर फी जमा नहीं कर पाते है. ऐसे में उन्हें फाइन के साथ फी देना पड़ता है. अभिभावक पियुष गोयल ने बताया कि मै कई बार इस लेट फाइन का शिकार हो चुका हूं. रिक्वेस्ट करने पर भी इसमें कोई नहीं सुनता है.
- अभिभावकों को भी मिलती है नोटिस
कई स्कूलों स्टूडेंटस के साथ अभिभावकों को भी नहीं छोड़ते है. जूनियर क्लास में पढ़ रहे अभिभावकों को स्कूल की ओर से नोटिस दिया जाता है. इस नोटिस के अनुसार अभिभावकों को बच्चों के साथ घर में भी इंगलिश में बात करने की सलाह दी जाती है. ऐसा नहीं करने पर बच्चे को स्कूल से निकाल दिये जाने की भी धमकी स्कूल की ओर से दिया जाता है. अभिभावक मनीष कुमार ने बताया कि उनकी बेटी मॉटेसरी थ्री की स्टूडेंट हैं. घर में बच्चे के साथ हिंदी में ही हम बातें करते है. एक दिन स्कूल से हमारे पास नोटिस आया कि आपके बच्चे के इंगलिश में हिंदी मिक्स होती है. चुकी आपका बच्च घर में पूरी तरह से हिंदी बोलता है. इस कारण उसकी इंगलिश सही नहीं है. आप इंगलिश में ही बच्चे के साथ बातें करें. अगर एक महीने में आपके बच्चे की इंगलिश भाषा सही नहीं हुई तो मजबूरी में उसे स्कूल से निकाल दिया जायेगा.
- गाली देने पर फाइन होता दुगुना
स्कूलों में अगर कोई स्टूडेंटस आपस में बोलचाल में गाली आदि का उपयोग करते है और इसकी जानकारी स्कूल प्रशासन को मिल जाती है तो इसके लिए 5 रुपये का फाइन स्टूडेंट्स को देना पड़ता है. अगर फिर भी स्टूडेंट में सुधार नहीं होता है और गाली वो रिपीट करते हैं तो फाइन का प्राइस दुगुना होता जाता है. ऐसे में स्कूल स्टूडेंट्स पर पूरी नजर रखता है. इसकी रिपोर्ट क्लास के मॉनिटर से ली जाती है. इसके अलावा स्टूडेंट अगर एक सेकेंड के लिए भी स्कूल लेट पहुंचता है तो इसके लिए उसे 3 रुपये का फाइन देना होता है. अगर लगातार तीन दिनों तक कोई स्टूडेंट लेट आता है तो चौथे दिन फाइन के अलावा स्कूल में एबसेंट लगा दिया जाता हैं.
- हिंदी क्लास में ही बोले ¨हंदी
स्कूलों में हिंदी क्लास में ही हिंदी बोलने की सलाह दी जाती है. स्टूडेंट्स से कहा जाता है कि स्कूल में रहते हुए सिर्फ हिंदी क्लास में ही हिंदी बोला जायें. दूसरे हर विषय के क्लास में बस इंगलिश में ही आपस में बातें स्टूडेंट्स करें. अगर कोई स्टूडेंट हिंदी क्लास छोड़ कर दूसरे किसी भी क्लास में पढ़ाई के अलावा आपस में बातचीत भी हिंदी में करते है तो इसके लिए फाइन देना होता हैं.

इन गलतियों पर स्कूलों में लगता है फाइन
हिंदी बोलने पर  - 1 रुपया
स्कूल लेट आने पर  - 3 रुपया
प्रोजेक्ट वर्क में गलती होने पर  -  4 रुपया
होमवर्क नहीं करने पर  -  2 रुपया
फी लेट देने पर  -  5 रुपया प्रति दिन
गंदा यूनिफार्म पहन कर आने पर -  3 रुपया
जूते पॉलिश नहीं होने पर  - 1 रुपया
नाखून कटा नहीं होने पर  - 1 रुपया
मोबाइल पकड़े जाने पर  -  5 रुपया
गाली देने पर  - 5 रुपया

कोट
सीबीएसइ की ओर से इस तरह के फाइन लेने का कोई प्रोविजन नहीं हैं. यह स्कूल का अपनी मरजी से लिया जाने वाला फाइन हैं. ऐसे में सीबीएसइ का इसके लिए कोई नियम नहीं है. अगर किसी स्कूल में हिंदी बोलने पर फाइन लेने की बात हैं तो अभिभावकों को बोर्ड को इसकी जानकारी देनी चाहिए.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ



Sunday, May 17, 2015

रि-एडमिशन के बिना नहीं होता दूसरे क्लास में नामांकन

रि-एडमिशन के बिना नहीं होता दूसरे क्लास में नामांकन

- रि-एडमिशन के नाम पर हर स्टूडेंट्स से ली जाती है तीन से चार हजार रुपये
- 10वीं बोर्ड देने के बाद 11वीं में करवाना पड़ता है अपने ही स्कूल में नामांकन
संवाददाता, पटना
क्लास वन से टू में जाने की बात हो या क्लास थ्री से क्लास फोर में जाना हो, बिना एडमिशन के दूसरे क्लास में पढ़ने की अनुमति स्टूडेंट्स को नहीं होती है. एक क्लास से दूसरे क्लास में जाने के लिए बिना फी दिये काम नहीं चलता है. कहीं पर रि-एडमिशन के नाम तो कहीं पर रि-एडमिशन को पीछे रख कर डेवलपमेंट के नाम पर मोटी रकम स्कूल वाले लेते है. कई ऐसे भी स्कूल है जहां पर रि-एडमिशन और डेवलपमेंट के नाम पर भी पैसे लिये जाते हैं. कहा जायें तो पटना के अधिकांश स्कूलों में रि-एडमिशन का खेल चलता है. रि-एडमिशन के नाम पर मोटी रकम स्कूल वाले लेते ही है, इसके अलावा तीन और छह महीने पर भी डेवलपमेंट के नाम पर दुबारा चार्ज लिया जाता हैं. इतना ही नहीं बल्कि क्लास वन से दसवीं तक के क्लास में रि-एडमिशन के चार्ज  बढ़ता जाता है. हर साल रि-एडमिशन के चार्ज भी बढ़ाये जाते है.
- प्रायमरी से सीनियर क्लास में जाने पर देना होता है फी
कई स्कूल में रि-एडमिशन के नाम पर नर्सरी, प्रायमरी और सीनियर क्लास का ख्याल रखा जाता है. नर्सरी में तीन साल पढ़ाई करने के बाद जब स्टूडेंट्स प्रायमरी क्लास में जाते है, तो रि-एडमिशन करवाना पड़ता है. वहीं प्रायमरी क्लास के बाद सीनियर क्लास में जाने पर रि-एडमिशन लेना होता है. पटना में मिशनरी स्कूलों में हर साल क्लास बदलने पर रि-एडमिशन की फी नहीं ली जाती है. लोयेला हाई स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार नर्सरी में दो साल की पढ़ाई होती है. नर्सरी के बाद जब स्टूडेंट्स प्रायमरी क्लास में जाते हैं तो उन्हें रि-एडमिशन करवाना होता हैं. ऐसा ही हाल सेंट माइकल हाई स्कूल और नॉट्रेडम एकेडमी में भी होता है. वहीं कई स्कूलों में तीन महीने और छह महीने पर डेवलपमेंट के नाम पर फी ली जाती है.
- डेवलपमेंट के नाम पर भी लेते है पैसे
कई स्कूल रि-एडमिशन के नाम पर सीधे तौर पर पैसे की वसूली नहीं करते है. उन्हें डर होता है कि कहीं सीबीएसइ के पकड़ में ना आ जायें. ऐसे में स्कूल अभिभावकों से डेवलपमेंट के नाम पर एनुअल चार्ज लेता है. इस दौरान स्कूल यह कहता है कि रि-एडमिशन के नाम पर कोई चार्ज नहीं लिया जाता है. बस डेलवपमेंट के नाम पर चार्ज लिया जाता है. लेकिन डेवलपमेंट के नाम पर मोटी रकम स्कूल वाले वसूलते है. अभिभावक मनीष ने बताया कि
- सीबीएसइ के अनुसार एक बार ही होगा नामांकन
सीबीएसइ के नियमानुसार कोई भी सीबीएसइ स्कूल एक बार ही किसी बच्चे से नामांकन फी ले सकता है. जब स्टूडेंट किसी स्कूल में नामांकन लेते है तो उनसे नामांकन के नाम पर फी लिया जाता हैं. लेकिन उसके बाद किसी दूसरे क्लास में जाने के लिए स्कूल किसी तरह का फी नहीं लेगा. लेकिन पटना में ऐसा नहीं है. अप्रैल में नया सेशन शुरू होने के पहले स्टूडेंट्स को दूसरे क्लास में नामांकन की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है. सीबीएसइ के अनुसार अगर कोई स्टूडेंट्स किसी क्लास में एक बार नामांकन ले लेता है तो वो दूसरी क्लास में अपने-आप जायेगा. स्टूडेंट्स से स्कूल किसी दूसरे क्लास में जाने के लिए किसी तरह का चार्ज नहीं लेगा.
- 10वीं में पास करने और 11वीं में नामांकन लेने में भी देना होता है चार्ज
अधिकांश स्कूलों में 10वीं बोर्ड पास करने के बाद अगर स्टूडेंट्स उसी स्कूल में रहना चाहते हैं तो उन्हें दुबारा स्कूल द्वारा लिया जाने वाले एंट्रांस टेस्ट में शामिल होना होता है. एंट्रांस टेस्ट में पास करने के बाद फिर 11वीं में नामांकन के लिए स्टूडेंट्स 60 से 80 हजार रुपये देने होते है. यह हाल कोई एक स्कूल का नहीं बल्कि पटना के अधिकांश स्कूलों में 11वीं में नामांकन की यही प्रक्रिया अपनायी जाती है. कोई भी स्टूडेंट्स 10वीं बोर्ड देने के बाद उसी स्कूल में नामांकन लेना चाहता है तो उसे दुबारा टेस्ट देकर मोटी रकम देने के बाद ही नामांकन मिलता है.

रि-एडमिशन के नाम पर लिये जाने वाले चार्ज
क्लास वन से टू तक रि-एडमिशन चार्ज   -  1000 रुपया
क्लास टू से थ्री के लिए रि-एडमिशन चार्ज  - 1000 रुपया
क्लास थ्री से फोर के लिए रि-एडमिशन चार्ज  - 1500 रुपया
क्लास फोर से पांचवी के लिए रि-एडमिशन चार्ज -  1500 रुपया
क्लास पांचवी से सिक्स के लिए रि-एडमिशन चार्ज  - 1500 रुपया
क्लास सिक्स से सातवीं के लिए रि-एडमिशन चार्ज  -  2000 रुपया
क्लास सातवीं से आठवीं के लिए रि-एडमिशन चार्ज  -  2000 रुपया
क्लास आठवीं से नवमीं के लिए रि-एडमिशन चार्ज  -   2500 रुपया
नोट - यह चार्ज पटना के अधिकांश स्कूलों में रि-एडमिशन के नाम पर लिया जाता है. अगर स्कूल डेवलपमेंट चार्ज लेता है तो इसके बाद वो चार्ज जुड़ता है.

अभिभावकों से बातचीत
मैने अपने बेटे का नामांकन करवाया था तो 50 हजार रुपये लगे थे. क्लास वन के बाद जब अगले साल क्लास टू में गया तो फिर 20 हजार रुपये देने पड़े. स्कूल से जब इसकी पैसे के लेने की वजह पूछी गयी तो पता चला कि रि-एडमिशन करवाना पड़ता हैं. बिना रि-एडमिशन के किसी भी दूसरे क्लास में बच्चे का ट्रांसफर नहीं हो सकता है. हम क्या कर सकते है. हमें हर साल मार्च में यह पैसे स्कूल को देना होता हैं.
प्रज्ञा राय, अभिभावक

रि-एडमिशन के नाम पर हर साल 10 हजार रुपये स्कूल को देते है. कई बार सोचा दूसरे स्कूल में नामांकन करवा ले. लेकिन हर स्कूलों का यहीं हाल है. कहीं डेलवपमेंट के नाम पर तो कहीं रि-एडमिशन के नाम पर मोटी रकम स्कूल वाले वसूलते हैं.
मृत्युजंय कुमार, अभिभावक

कोट
कई स्कूल में रि-एडमिशन के नाम पर मोटी रकम ली जाती हैं. अभिभावक शिकायत करते है तो बच्चे को स्कूल से निकाल दिया जाता है. इस साल तो रि-एडमिशन के नाम पर कई स्कूलों ने 2 हजार तक स्टूडेंट्स से पैसे लेते हैं.
नीरज कुमार, अध्यक्ष, छात्र अभिभावक संघर्ष मोर्चा 

मेंटल हेरेसमेंट दिया तो स्कूल पर चलेगा आइपीसी की धारा 506

मेंटल हेरेसमेंट दिया तो स्कूल पर चलेगा आइपीसी की धारा 506

- स्कूलों में बढ़ रहे मेंटल हेरेसमेंट के मामले
- सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने स्कूलों को किया आगाह
संवाददाता, पटना
केस वन  - डीएवी की छात्र रजनी गुप्ता (बदला हुआ नाम) बीमार होने के कारण एक सप्ताह तक स्कूल नही गयी. जब स्कूल जाना शुरू किया तो टीचर ने उसे इगAोर करने लगे. रजनी गुप्ता को पढ़ाई और कई दूसरी चीजों से मेंटल हेरेसमेंट भी किया जाने लगा. अंत में परेशान हो कर रजनी गुप्ता से अपने गाजिर्यन से यह शिकायत की. मामला बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक भी पहुंचा. इसके बाद रजनी गुप्ता ने लिखित शिकायत सीबीएसइ से भी किया.
केस टू  - सेंट माइकल हाई स्कूल का 11वीं का स्टूडेंट अनिकेत शादी फंक्शन को एटेंड करने के लिए स्कूल से चार दिनों की छुट्टी लिया. लेकिन बाद में बीमार हो जाने के कारण कई और दिन वो स्कूल नहीं जा पाया. मेडिकल सर्टिफिकेट देने के बावजूद अनिकेत को स्कूल वाले टॉचर करते रहे. अनिकेत को लगातार किसी ना किसी वजह से मेंटल हेरेसमेंट स्कूल के टीचर देते रहे. अंत में 12वीं बोर्ड देने पर जब अनिकेत को रोक लगा दिया गया तो फिर अनिकेत बाद अधिकार संरक्षण आयोग और हाई कोट पहुंचा.

- हर पांच बच्चे पर एक बच्च होता है स्कूल में मेंटल हेरेसमेंट का शिकार
यह हाल कोई रजनी गुप्ता या अनिकेत की नहीं बल्कि अधिकांश स्टूडेंट्स को मेंटल टॉचर से स्कूल में गुजरना पड़ता है. किसी भी बात का विरोध करने पर स्कूल के टीचर और स्कूल प्रशासन उस स्टूडेंट्स के पीछे पड़ जाते है. ऐसे में टीचर स्टूडेंट्स के एकेडेमिक कैरियर को भी खत्म करने से बाज नहीं आता है. स्कूलों में स्टूडेंट्स के उपर मेंटल हेरेसमेंट को लेकर तैयार किये गये सीबीएसइ की रिपोर्ट के अनुसार देश भर के स्कूलों में स्टूडेंट्स के साथ मेंटल हेरेसमेट किया जाता है. इसकी वजह से कई बार स्टूडेंट्स सुसाइड आदि भी करने की कोशिश करते है या कर भी लेते है. कई बार स्टूडेंट्स का एकेडेमिक कॅरियर भी खत्म हो जाता है. इस रिपोर्ट को सीबीएसइ ने देश भर के स्कूलों में किये गये सर्वे करने के बाद जारी किया है. सीबीएसइ के अनुसार वर्तमान में मेंटल हेरेसमेंट से हर पांच बच्चे में एक बच्च शिकार हो रहा है. इसका असर बहुत ही बुरा हो रहा हैं.
- फिजिकल हेरेसमेंट खत्म होने के बाद बढ़ गया मेंटल हेरेसमेंट
आइसीएसइ बोर्ड द्वारा किया गया सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 2009 में शिक्षा के अधिकार कानून के खत्म हो जाने के बाद फिजिकल हेरेसमेंट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया हैं. बच्चे को मारने और पीटने की घटनाएं बंद कर दी गयी. इसके बाद स्कूलों की ओर से बच्चों को मेंटल हेरेसमेंट देना शुरू किया गया. रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक दूसरे स्टूडेंट्स के सामने बेइज्जती करने का मेंटल हेरेसमेंट स्टूडेंट्स को दिया जाता है. इसका बहुत ही बुरा असर बच्चों के कैरियर पर पड़ता हैं. बच्चे स्कूल जाना बंद कर देते है. उन्हें बेइज्जती महसूस होती है. शिक्षा के अधिकार कानून के अनुसार किसी भी स्टूडेंट्स को फिजिकल के साथ मेंटल हेरेसमेंट भी नहीं दिया जा सकता है.
- स्कूलों को बोर्ड ने किया अगाह
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने तमाम स्कूलों को आगाह किया है कि अगर किसी भी स्कूल में स्टूडेंट के साथ मेंटल हेरेसमेंट किया जायेगा तो उस स्कूल प्रशासन और स्कूल के टीचर के उपर आइपीसी (इंडियन पैनल कोड) की धारा के तहत मुकदमा चलेगा. इसमें स्कूल प्रशासन और वो टीचर भी फंसेंगे जो इस तरह के काम को अंजाम देते है. स्टूडेंट्स के उपर किसी भी तरह के मेंटल टॉचर नहीं किया जा सकता है. उन्हें स्कूल मोरल सपोर्ट दे. बोर्ड ने कहा है कि ऐसे कई मामले बोर्ड के पास मौजूद है जिसमें किसी ना किसी कारण को लेकर स्टूडेंट्स के उपर टॉचर किया जाता है.

यह चलेगा स्कूलों पर मुकदमा
सेक्शन 305  -  अगर स्टूडेंट मेंटल हेरेसमेंट से तंग आकर सुसाइड आदि करने की कोशिश करता है तो स्कूल पर इस सेक्शन के तहत आरोप लगेगा
सेक्शन  323  -  अगर किसी स्टूडेंट को जानबूझ कर बेइज्जती या चोट पहुंचाया जाता है तो स्कूल पर इस सेक्शन के तहत आरोप लगेगा
सेक्शन  325  -  अगर किसी स्टूडेंट को टीचर सरेआम बेइज्जती करते हैं और वो इससे काफी हर्ट होता है.
सेक्शन 326  -  टीचर के द्वारा जानबूझ कर स्टूडेंट को हर्ट किया जाता है. इससे स्टूडेंट्स कोई डेजरस कदम उठा लेता हैं
सेक्शन 352  -  टीचर द्वारा स्टूडेंटस को मेंटल टॉचर करते हुए किसी गलत काम के लिए प्रोवोक किया जाता है
सेक्शन 354  - गर्ल स्टूडेंट्स के साथ रैंगिंग या मजाक उड़ाने पर
सेक्शन 506  -  टीचर द्वारा स्टूडेंट को आपराधिक धमकी देने पर

कोट
सीबीएसइ का यह कदम काफी सराहनीय है. स्कूलों में मेंटल हेरेसमेंट सही में काफी बढ़ गया है. इससे पढ़ाई के प्रति स्टूडेंट्स का रूझान खत्म हो जाता है. कभी-कभी मेंटल हेरेसमेंट इतना गंभीर होता है कि स्टूडेंट्स एकेडेमिक कैरियर भी खत्म कर लेते है. लेकिन दुबारा स्कूल नहीं जाना चाहते हैं. ऐसे में स्कूल के उपर कार्रवाई होने से इस तरह की घटनाएं कम होगी.
सीबी सिंह, सचिव, सीबीएसइ पाटलिपुत्र सहोदया

अल्ट्रा वायलेट किरण से बचना मुश्किल, मौसम विभाग ने किया आगाह

अल्ट्रा वायलेट किरण से बचना मुश्किल, मौसम विभाग ने किया आगाह

- पटना में सूर्य की किरण में पाया जाने लगा अल्ट्रा वायलेट किरण
- पिछले दस दिनों में पांच दिन रिकार्ड किये गये अल्ट्रा वायलेट किरण
संवाददाता, पटना
अभी तक अमेरिका और दूसरे बड़े देश और शहरों में ही अल्ट्रा वायलेट रे सूर्य की किरण में पाये जाने की बातें सूनने को मिलती थी. लेकिन अब यह अल्ट्रा वायलेट रे पटना में भी सूर्य की किरण में मौजूद होने की बातें सामने आयी हैं. पटना मौसम विभाग की माने तो अब पटना में अल्ट्रा वायलेट किरण की मौजूदगी होने लगी है. इससे यह कहा जा सकता है कि पटना में भी सूर्य की किरण में अल्ट्रा वायलेट रे मौजूद है और अब इससे आम पब्लिक को बचना होगा. खासकर स्कीन डिजीज वाले आम लोगों को तीखी धूप से बचना आवश्यक होगा. मौसम विभाग की माने तो जिस दिन धूप अधिक होती है उस दिन सूर्य की किरण में अल्ट्रा वायलेट की मौजूदगी पायी गयी हैं. मौसम विभाग की माने तो ओजोन लेयर कमजोर होता जा रहा हैं. इससे अल्ट्रा वायलेट किरण अब पटना के पृथ्वी पर भी आने लगा है.
- एयरपोर्ट परिसर में लगाया गया है यूबी रेडियो मीटर
पटना एयरपोर्ट स्थिति मौसम विभाग के परिसर में यूवी रेडियो मीटर केंद्रीय मौसम विभाग की ओर से लगाया गया हैं. केंद्रीय मौसम विभाग की माने तो पटना में पिछले दो सालों से काफी तीखी धूप हो रही है. ऐसे में सूर्य की किरण में अल्ट्रा वायलेट रे का शक मौसम वैज्ञानिकों ने जताई. इसके बाद केंद्रीय मौसम विभाग के सहयोग से यूवी रेडियो मीटर लगाया गया. पिछले छह महीने से मौसम विभाग यूवी रेडियो मशीन से अल्ट्रा वायलेट की रिकार्डिग कर रहा हैं. जो आंकड़े सामने आ रहे है उसे मौसम विभाग के शक को सही साबित कर दिया है.
- नॉर्मल रेंज से पांच प्वाइंट तक आगे बढ़ जाता है यूवी रेज
पिछले छह महीने से मौसम विभाग की ओर से पटना के वातावरण से सूर्य की किरणों में अल्ट्रा वायलेट रे की रिकार्डिग की जा रही हैं. ऐसे में कई दिन आयें हैं जब सूर्य की किरण में अल्ट्रा वायलेट रे पाया गया है. अगर हम एक मई से दस मई तक के आंकड़े की बात करें तो यह आंकड़ा बताते है किस तरह से यूवी किरण अपने नॉर्मल लेवल से पांच प्वाइंट अधिक पाया गया है. मौसम विभाग की माने तो 1 मई से दस मई के बीच में कई दिन यूवी किरण नॉर्मल से अधिक पाया गया है. दो मई तो यह लेवल छह प्वाइंट, तीन मई को सात प्वाइंट, चार मई को पांच प्वाइंट, पांच मई को तीन प्वाइंट, नौ मई को एक प्वाइंट बढ़ा हुआ रिकार्ड किया गया हैं. मौसम विभाग का मानना है कि बढ़ रही गर्मी में अब सिर्फ सन वर्न का ही खतरा नहीं है. बल्कि यूवी रेज की चपेट में आ गये तो फिर कई के क्रानिक स्कीन डिजीज का खतरा का भी चांस रहता हैं. इसलिए तेज धूप में निकलने से बचने की जरूरत है. अगर फिर भी निकलना है तो पूरी बॉडी को ढक कर ही घर से निकल वरना खतरा बना रहेगा.
- तीन स्तर पर होती है जांच
अल्ट्रा वायलेट रे की रिकार्डिंग मौसम विभाग तीन स्तर पर करता है. ए, बी और सी में बी की रिकार्डिग पूरी तरह से अल्ट्रा वायलेट रे को लेकर होता है. 24 घंटे हो रहे इस रिकार्डिग में मौसम विभाग सुबह 5 बजे से शाम के 5 बजे तक की रिकार्डिंग करता है. मौसम विभाग की माने तो यूवी किरण बी का नॉर्मल लेवल 20 से 21 मेगा जू प्रति सेंटीमीटर एक्वायर होता है. लेकिन कई दिन ऐसा देखा जाता है कि यह नॉर्मल से अधिक हो जाता है.

1 मई से दस मई के बीच अल्ट्रा वायलेट (यूवी) रे की रिकार्डिग
1 मई    -   17.41 मिली वॉट
2 मई    -   26.26 मिली वॉट
3 मई    -   27.02 मिली वॉट
4 मई   -   25. 86 मिली वॉट
5 मई   -  23.88 मिली वॉट
6 मई   -  21.62 मिली वॉट
7 मई   -  16. 26 मिली वॉट
8 मई   -  20.82 मिली वॉट
9 मई   -  22.21 मिली वॉट
10 मई  -  19. 52 मिली वॉट
नोट  - मौसम विभाग के अनुसार  इसमें जो भी रिकार्डिेंग 20 और 21 मिली वॉट से अधिक है उसका मतलब उस दिन पटना के सूर्य की किरण में अल्ट्रा वायलेट मौजूद हैं.

कोट
अल्ट्रा वायलेट की रिकार्डिग यूवी रेडियो मीटर के द्वारा किया जाता है. हर दिन इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है. आगे भविष्य में यह और बढ़ेगा. कई दिन इसका लेवल बढ़ा हुआ मिला है. जो एक चिंता का विषय है.  इसकी मॉनिटरिंग और स्टडी पूना से किया जाता है. फिर जिस तरह से वहां से जानकारी मिलती है, उसके हिसाब से काम किया जाता है.
एके गिरी, साइंटिस्ट, पटना मौसम विभाग 

Saturday, May 16, 2015

केंद्रीय विद्यालय में आर्ट पर दो और योगा पर चलेगा एक क्लास

केंद्रीय विद्यालय में आर्ट पर दो और योगा पर चलेगा एक क्लास

- केंद्रीय विद्यालय के टाइम टेबुल में किया गया चेंज
- जुलाई से होगा लागू
संवाददाता, पटना
केंद्रीय विद्यालय में 2015-16 सेशन से एक्स्ट्रा कॉलिकुलम पर विशेष फोकस किया जायेगा. इसको लेकर केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से टाइम टेबुल में परिवर्तन किया गया है. इसमें कई विषय के पीरियड को बढ़ाया गया है तो वहीं कई विषयों के पीरियड में परिवर्तन किया गया है. टाइम टेबुल में परिवर्तन करने के पहले केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से प्रायमरी क्लास के लिए पांच दिनों का स्कूल और सेकेण्ड्री क्लास के लिए छह दिनों का स्कूल चलाने का निर्णय लिया गया था. प्रायमरी और सेकेण्ड्री स्कूल के अनुसार ही संगठन ने क्लास की संख्या भी तय करके स्कूलों को भेजा है. अब इसी टाइम टेबुल के अनुसार स्कूल चलायें जायेंगे. हर दिन के पढ़ाई के रूटीन में अब केंद्रीय विद्यालय में आर्ट एजुकेशन पर दो और योगा हर पर एक क्लास को मस्ट कर दिया है. इसे हर स्कूल के  चलाना होगा. पांच दिनों के प्रायमरी सेक्शन की शुरुआत 2014 से ही किया गया था. लेकिन इस बार से अब इस पांच दिनों के अनुसार टाइम टेबुल में परिवर्तन किया गया हैं.
- सीसीए पर फोकस करें स्कूल
संगठन की ओर से तमाम केंद्रीय विद्यालय को यह निर्देश दिया गया है कि सीसीए (को-कॉलिकुलर एक्टिविटी) पर फोकस किया जायें. इसके अंतर्गत स्कूल एनसीसी आदि पर नये सिरे से प्रोग्राम बना कर स्टूडेंट्स को जानकारी दे. इसके लिए रेगूलर क्लास भी शुरू किया जायें. इसके अलावा आर्ट एजुकेशन को बढ़ावा देते हुए संगठन ने एक क्लास हर दिन म्यूजिक, डांस, पेंटिंग, ड्रामा आदि पर फोकस करने को कहा है. केवीएस की ओर से तमाम केंद्रीय विद्यालय को निर्देश दिया गया है कि एक्स्ट्रा कॉलिकुलम पर अधिक से अधिक फोकस किया जायें. इससे स्टूडेंट्स में ओवरऑल डेवलपमेंट होता है.

क्लास 1 से 5वीं तक
टोटल पीरियड   - 40
पांच दिनों तक हर दिन 8 पीरियड की होगी पढ़ाई
विषय      -         क्लास की संख्या
इंगलिश,हिंदी, मैथ, इंवायरमेंटल स्टडीज  - 6-6  पीरियड
वर्क एजुकेशन, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लिट्रेसरी, सीसीए (को-कॉलिकुलम एक्टिविटी)    -   2-2 पीरियड
आर्ट एजुकेशन (म्यूजिक, डांस आदि), फिजिकल एंड हेल्थ एजुकेशन  -   4-4

क्लास 6ठीं से 8वीं तक
टोटल पीरियड  -  48
छह दिनों तक  हर दिन 8 पीरियड की होगी पढ़ाई
विषय        -    पीरियड की संख्या
इंगलिश, हिंदी,साइंस, सोशल साइंस   -  6-6 पीरियड
लैंग्वेज, फिजिकल एंड हेल्थ एजुकेशन   -   3-3 पीरियड
सीसीए, कंप्यूटर लिट्रेसी, वर्क एजुकेशन   - 2-2 पीरियड
मैथेमेटिक्स    - 7 पीरियड
लाइब्रेरी   -   1 पीरियड

क्लास 9वीं और 10वीं के लिए
टोटल पीरियड  -  48
छह दिनों तक  हर दिन 8 पीरियड की होगी पढ़ाई
विषय             - पीरियड की संख्या
इंगलिश, हिंदी, संस्कृत, मैथेमेटिक्स, साइंस, सोशल साइंस  -  7-7 पीरियड
वर्क एजुकेशन, सीसीए, कंप्यूटर लिट्रेसी    -  2-2 पीरियड
आर्ट एजुकेशन, फिजिकल एंड हेल्थ एजुकेशन   - 3-3 पीरियड
लाइब्रेरी   -  1 पीरियड

क्लास 11वीं और 12वीं के लिए
टोटल पीरियड  -  48
छह दिनों तक  हर दिन 8 पीरियड की होगी पढ़ाई
विषय       -    पीरियड की संख्या
इंगलिश, हिंदी   -   6
साइंस   -          थ्योरी के 5-5 और प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट के 4-4 पीरियड
आर्ट्स    -   थ्योरी के 7-7 और प्रोजेक्ट के 2-2 पीरियड
कॉमर्स   -   थ्योरी के 7-7 और प्रोजेक्ट के 2-2 पीरियड
फिजिकल एंड हेल्थ एजुकेशन (गेम और योगा)  -  1 पीरियड
सीसीए    -    2 पीरियड








जेइइ एडवांस में घटे स्टूडेंट्स की संख्या, 1.24 लाख स्टूडेंट्स ने ही किया रजिस्ट्रेशन

जेइइ एडवांस में घटे स्टूडेंट्स की संख्या, 1.24 लाख स्टूडेंट्स ने ही किया रजिस्ट्रेशन

- आइआइटी छोड़ दूसरी संस्थाओं की तैयारियों को वेटेज दे रहे स्टूडेंट्स
- अपनी पसंद के आइआइटी नहीं मिलने के कारण नहीं देना चाहते है जेइइ एडवांस
रिंकू झा, पटना
ज्वाइंट एट्रेंस एक्जाम (जेइइ) एडवांस 2015 की परीक्षा में वहीं स्टूडेंट्स शामिल होते है जिन्हें जेइइ मेन की परीक्षा में अच्छे रैंक आया हो. देश भर के जेइइ मेन के 1.5 लाख स्टूडेंट्स को ही जेइइ एडवांस में रजिस्ट्रेशन करवाने की अनुमति मिलती हैं. इस बार भी पिछली बार की तरह 1.5 लाख स्टूडेंट्स को ही रजिस्टर्ड होना था, लेकिन इस साल यह ग्राफ इसके नीचे चला गया है. जेइइ एडवांस के लिए सिर्फ 1.24 लाख स्टूडेंट्स ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है. क्वालिफाइ होने के बावजूद कैंडिडेंट्स एडवांस में शामिल नहीं हो रहे हैं. एक्सपर्ट की माने तो स्टूडेंट्स का च्वाइस बेस्ट आइआइटी में जाना होता है. ऐसे में कम रैंक वाले स्टूडेंट्स जेइइ एडवांस की तैयारी से अच्छा एनआइटी जैसी संस्थाओं की ओर बढ़ रहे है. स्टूडेंट्स अपनी तैयारी के स्तर को समझते हुए जेइइ एडवांस टेस्ट से आइआइटी में एडमिशन लेने की उम्मीद करने की बजाय एनआइटी में एडमिशन लेना बेहतर समझ रहे हैं.
जेइइ मेन के कम रैंक वाले को मिलता है अच्छा एनआइटी कॉलेज
जेइइ मेन का कटऑफ इस बार 105 पर गया है. अब जिन स्टूडेंट्स को जेइइ मेन में कम रैंक मिला है, वो जेइइ एडवांस नहीं देना चाहते है. जेइइ एडवांस के बदले ऐसे स्टूडेंट्स एनआइटी, दूसरे इंजीनियरिंग कॉलेज या फिर प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लेकर अपना कैरियर संभालना चाहते है. पटना के रोहित शर्मा को जेइइ मेन में 120 रैंक मिला है. रोहित शर्मा बताते है कि जेइइ मेन के लिए 12वीं का रिजल्ट का 40 फीसदी वेटेज और  जेइइ मेन का 60 फीसदी वेटेज लेकर ऑल इंडिया रैंक तैयार किया जाता है. ऐसे में जेइइ मेन में कम रैक मिलने से एडवांस में सफल होना कठिन होता हैं. इस कारण जेइइ एडवांस की तैयारी में समय देने से अच्छा है कि दूसरे इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन मिल जायें. वहीं जेइइ मेन में 115 रैंक प्राप्त अमित कपूर ने बताया कि जो रैंक हमें मिला है उसमें अच्छे एनआइटी में नामांकन हो जायेगा.
पांच हजार से कम रैंक पर ही मिलता है अच्छा आइआइटी
जेइइ मेन की परीक्षा जहां आब्जेक्टिव टाइप लिये जाते है. वहीं जेइइ एडवांस की परीक्षा पूरी तरह से सब्जेक्टिव बेस्ड होता है. ऐसे में स्टूडेंट्स को जेइइ एडवांस की तैयारी के लिए मात्र एक महीने का समय मिलता है. इस बीच जो भी प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में एंट्रास परीक्षाएं ली जाती है वो सारा आब्जेक्टिव होता है. ऐसे में  स्टूडेंट्स अपना मूल्यांकन खुद कर लेते है कि वे एडवांस क्रैक कर पायेंगे या नहीं. एनआइटी को लेकर कई स्टूडेंट्स आश्वस्त रहते हैं. इसके अलावा कई बड़े निजी संस्थान भी स्टूडेंट्स की च्वाइस में है. जिनकी वे प्रिपरेशन करते हैं. 168 रैंक प्राप्त किये राहुल रॉय ने बताया कि जेनरल केटेगरी के स्टूडेंट्स को कम रैंक मिलने पर अच्छा आइआइटी कॉलेज नहीं मिल पाता है. ऐसे में हम इस रैंक पर अच्छे एनआइटी में नामांकन ले लेंगे. एक्सपर्ट संजय कुमार की माने तो स्टूडेंट्स दो केटेगरी में बंटते जा रहे है. कुछ स्टूडेंट्स जेइइ मेन को, तो कुछ जेइइ एडवांस को टरगेट करके चलते है. जेइइ मेन के लिए 12वीं का रिजल्ट आने के बाद उसका 40 फीसदी वेटेजे और जेइइ मेन का 60 फीसदी वेटेज लेकर रैंक तय होती है.
इंतजार है ऑल इंडिया रैंक का
जेइइ मेन में सफल अधिकांश स्टूडेंट्स सीबीएसइ द्वारा जारी करने वाले ऑल इंडिया रैंक का इंतजार कर रहे हैं. 7 जुलाई को जारी ऑल इंडिया रैंक से स्टूडेंट्स को कॉलेज में नामांकन के बारे में जानकारी मिल जायेगी. इसमें उन स्टूडेंटस के रैंक को अधिक वेटेज दिया जायेगा जो जेइइ मेन के 1.5 लाख स्टूडेंट्स के केटेगरी में आये है . ऑल इंडिया रैंक मिलने के बाद ही अन्य कॉलेजों में नामांकन की प्रक्रिया शुरू होती है. ऐसे में स्टूडेंट्स को इसकी जानकारी आसानी से मिल जाती है जो रैंक उन्हें मिला है उसके तहत उन्हें किस इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन मिल जायेगा.

जेइइ एडवांस संबंधित जानकारी
जेइइ एडवांस    24 मई
एडमिट कार्ड डाउनलोड   16 मई से लेकर  23 मई तक
चार नयी आइआइटी कॉलेज में सीट्स की संख्या  -  11000
30 एनआइटी कॉलेज में सीट्स की संख्या   - 15485

एक्सपर्ट व्यू
आज के स्टूडेंट्स पहले से अपना लक्ष्य तय करके चलते है. यही वजह है कि अपनी पूरी एनर्जी एडवांस में लगाने की बजायें वे इंजीनियरिंग के दूसरे कांम्पीटिशन की भी तैयारी करते है. अब 16 आइआइटी के अलावा चार नयी आइआइटी के आने के बाद सीट्स बढ़कर 11000 तक हो गयी है. लेकिन सामान्य वर्ग को रैंक पांच हजार तक ही मिल पाती है. इसलिए स्टूडेंट्स विकल्प चुनकर रखते हैं.
एसके ठाकुर, एक्सपर्ट, सेंट माइकल हाई स्कूल

आइआइटी में सामान्य स्टूडेंट्स को अच्छा रैंक मिलना कठिन होता हैं. जेइइ एडवांस का कटऑफ काफी हाई जाता है. ऐसे में सामान्य स्टूडेंट्स पिछड़ जाते है. 12वीं बोर्ड के 40 फीसदी मार्क्‍स का वेटेज और 60 फीसदी जेइइ मेन के मार्क्‍स का वेटेज लाने में भी स्टूूडेंट्स पिछड़ जाते है. अगर 12वी ं में कम रैंक मिला तो स्टूडेंट्स को अच्छे आइआइटी में नामांकन लेना कठिन हो जायेगा. इस कारण अब इस ओर से स्टूडेंट्स का पलायन होने लगा है.
संजय कुमार, एक्सपर्ट, लोयेला हाई स्कूल 

Friday, May 15, 2015

क्यूं ना हो फेल पास का खेल, जब स्कूल ही नहीं है मान्यता प्राप्त

क्यूं ना हो फेल पास का खेल, जब स्कूल ही नहीं है मान्यता प्राप्त

- बिहार में आठ हजार निजी विद्यालयों में मात्र 667 स्कूलों को ही मान्यता प्राप्त
- 8 हजार में अधिकांश स्कूलों में चलता है पास फेल का खेल
संवाददाता, पटना
स्कूल में नामांकन हो जाता है. आठ सालों तक पढ़ाई भी चलती है. लेकिन जब दसवीं बोर्ड देने की बात आती है तो हजारों की संख्या में स्टूडेंट्स सड़क पर आ जाते है. उन्हें उस समय पता चलता है कि वो जिस स्कूल में आठ सालों तक पढ़ायी किया है, वो सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं है और अब वो बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो पायेंगे. यह हाल किसी एक स्टूडेंट्स का नहीं है बल्कि पटना के अलावा पूरे बिहार के हजारों ऐसे स्टूडेंटस हैं जो हर साल इस समस्या से जूझते है. ज्ञात हो कि पूरे बिहार में आठ हजार स्कूलों की संख्या है. लेकिन इसमें मात्र 667 स्कूल को सीबीएसइ ने मान्यता दिया हुआ है. वहीं आइसीएसइ बोर्ड के 20 स्कूल है जिसे बोर्ड की मान्यता प्राप्त हैं. बांकी जो भी स्कूल है वो सारे के सारे नॉन एफिलिएयेटेड हैं. ऐसे में नॉन एफिलियेटेड स्कूल एफिलियेटेड स्कूलों को मोटी रकम देकर अपने स्कूल के स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन उस स्कूल से करवाते है.
- अधिकांश बच्चे पढ़ते है नॉन एफिलियेटेड स्कूल में
बिहार के अधिकांश स्कूलों नॉन एफिलियेटेड हैं. लेकिन अभिभावकों और स्टूडेंट्स को ठगने के लिए सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड का लोगो और बैनर का इस्तेमाल करते है. इस बैनर और लोगो की गलत फहमी में अभिभावक ठगे जाते है. क्लास वन से आठवीं तक तो परेशानी नहीं होती है. लेकिन जब 9वीं में बोर्ड के रजिस्ट्रेशन करवाने का मामला सामने आता है तो अभिभावकों को पता चलता हैं कि उनके बच्चे जिस स्कूल में पढ़ रहे है वो मान्यता प्राप्त नहीं है. अभिभावक राहुल राय ने बताया कि एस रजा हाई स्कूल में उनका बेटा पढ़ता हैं. लेकिन एक साल पहले जब 9वीं में रजिस्ट्रेशन करवाने की बात आयी तो पता चला कि बच्चे का रजिस्ट्रेशन दूसरे स्कूल से करवाया जायेगा. उसी स्कूल के माध्यम से बोर्ड परीक्षा में स्टूडेंट शामिल होंगे. बिहार के किसी छोटे शहर के किसी स्कूल से रजिस्ट्रेशन करवाया गया. इस बीच 10वीं की पूरी पढ़ाई सारे बच्चों ने अपने ही स्कूल में किया. लेकिन बोर्ड परीक्षा दूसरे स्कूल से दिलवाया गया. लेकिन रिजल्ट के समय मामला फंस गया. सारे स्टूडेंट्स का रिजल्ट पेंडिंग हो गया.
- 9वीं के बाद फंसता है मामला
बिहार के किसी भी सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड में 8वीं तक किसी भी स्टूडेंट्स को दिक्कतें नहीं होती है. लेकिन जब स्टूडेंट्स 9वीं क्लास में जाते हैं तो बोर्ड से रजिस्ट्रेशन के मामला सामने आता है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के अनुसार 9वीं और 11वीं में रजिस्ट्रेशन होने वाले स्टूडेंटस की बोर्ड परीक्षा में शामिल होते है. ऐसे में जो स्कूल मान्यता प्राप्त नहीं होता है, वो स्कूल दूसरे स्कूलों में मोटी रकम देकर अपने स्कूल के स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन करवा लेते है. स्टूडेंट पढ़ते है किसी और स्कूल में और जब बोर्ड परीक्षा देने का समय आता है तो किसी और स्कूल का स्टूडेंट बन कर परीक्षा में शामिल होते है. कई बार स्कूलों का यह धंधा बोर्ड की नजर पर आता है. इसकी जांच भी हुई हैं.
- किसी भी क्लास में निकाल दिये जाते है स्टूडेंटस
पटना के अधिकांश स्कूलों में किसी भी क्लास में स्टूडेंट्स को स्कूल से निकाल दिया जाता है. स्कूल प्रशासन स्टूडेंट्स के उपर कोई भी आरोप लगा कर उन्हें स्कूल के बाहर कर देता है. ऐसे कई मामले बिहार राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास आते रहते है. आयोग के पास आयें कई मामले में स्टूडेंट को छोटी से गलती बता कर 9वीं और 11वीं क्लास के बाद भी निकाल दिया गया है. ऐसे में कई बार कानून लड़ाई के बाद ही स्टूडेंट्स 12वीं बोर्ड दे पाने में सफल हो पाया है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुसार 2011 सत्र में 11वीं क्लास के एक स्टूडेंट आदित्य राय को सेंट माइकल हाई स्कूल में इस बेसिस पर निकाल दिया गया था कि आदित्य ने 10 दिन की छुट्टी लेकर स्कूल नहीं आया था. मेडिकल सर्टिफिकेट देने के बाद भी आदित्य को 12वीं बोर्ड देने से स्कूल रोक रहा था. लेकिन बाद में हाई कोट और आयोग के सहयोग से आदित्य राय बोर्ड परीक्षा देने में सफल हो पाया.

स्कूल संबंधित कुछ जानकारी
बिहार में कुल स्कूलों की संख्या  - 8 हजार (लगभग)
सीबीएसइ के मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या  -  667
आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या  - 20
8 हजार में वैसे स्कूल जहां पर 9वीं की पढ़ाई करवायी जाती है  -  4 हजार 89
8 हजार में वैसे स्कूल जहां पर 9वीं और 11वीं की पढ़ाई करवायी जाती है  - 2 हजार  

कोट
सीबीएसइ का एफिलिएशन बाइलॉज काफी कठिन हो गया है. पहले आसानी से एफिलिएशन मिल जाता था. लेकिन शिक्षा के अधिकार कानून और एफिलिएशन बाइलॉज पर स्कूलों की लापरवाही के कारण अब एफिलिएशन लेना कठिन हो गया है. ऐसे में आने वाले दिनों में एफिलिएटेड स्कूलों की संख्या और भी कम हो जायेगी. ऐसे में अभिभावकों को सोच समझ कर नामांकन करवाना चाहिए.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ पटना

सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के स्कूलों की संख्या बिहार में बहुत ही कम है. ऐसे में अधिकांश स्टूडेंट्स स्कूल से ठगे जाते है. स्कूल अपने तरीके से मनमाने ढंग से फी भी स्कूलों से वसूलता है. कोई लगाम भी नहीं है. ऐसे में अगर मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या अधिक होगी तो इस तरह स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी.
डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार राज्य पैरेंट्स चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन

बिहार में हजारों की संख्या में स्कूल है. अभिभावक शुरुआत में तो स्कूलों में नामांकन करवा लेते है, लेकिन 9वीं में जाने के बाद रजिस्ट्रेशन का मामला फंस जाता है. ऐसे में अभिभावकों के पास मजबूरी होती है. स्कूल इसका फायदा उठा लेता है. बिहार सरकार से रजिस्टड्र स्कूलों की भी संख्या अभी काफी कम है.
शमायल अहमद, अध्यक्ष, बिहार राज्य प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन 

डेटा को पढ़ा जाता तो भूकंप के आने से पहले मिल जाती भूकंप की जानकारी

 डेटा को पढ़ा जाता तो भूकंप के आने से पहले मिल जाती भूकंप की जानकारी

- पटना मौसम विभाग में लगा है भूकंप का जीपीएस
- चार महीने पहले लगे इस जीपीएस सिस्टम के डेटा को पढ़ने वाला कोई नहीं
संवाददाता, पटना
बिहार में भूकंप के झटके आयेंगे. लगातार कई दिनों तक भूकंप के झटकों का सामना करना पड़ सकता है. पृथ्वी के नेपाल और बिहार के भूगर्भ में ऐसी हलचल चल रही है जिसका अनुमान जीओलॉजी के साइंटिस्ट को कई महीनों पहले ही लग गया था. भूकंप की जानकारी समय से मिल जायें. पृथ्वी में अंदर जो भी हलचल होगी. इससे तुरंत अपडेट होना संभव हो जाये. हमारे भूगर्भ में अभी किस तरह से काम हो रहा है. भविष्य में इसका प्रभाव कहां पर और कैसे पड़ने जा रहा है. नेपाल और बिहार के आसपास भूकंप के इस आशंका को ध्यान में रख कर भारत सरकार और केंद्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के सहयोग से पटना मौसम विभाग में एक जीपीएस सिस्टम लगाया गया था. यह सिस्टम सीधे सेटेलाइट से जुड़ा हैं. पटना मौसम विज्ञान केंद्र की माने तो इस जीपीएस सिस्टम को पृथ्वी के भूगर्भ से कनेक्ट किया गया है. इससे पृथ्वी के अंदर जो भी कुछ एक्टिविटी होगी, इसे आसानी से पढ़ा जा सकेगा.
-  डेटा तैयार कर रहा हर दिन जीपीएस सिस्टम
 यह जीपीएस सिस्टम नेविगेशन फाइल और डेटा फाइल तैयार करता है. हर दिन पृथ्वी के अंदर होने वाले हलचल के बारे में जीपीएस सिस्टम में जानकारी भी आ रही है. 24 घंटे काम करता इस जीपीएस सिस्टम में डेटा तो हर दस मिनट पर आता है, लेकिन इसे पढ़ पाना और इसकी जानकारी पर एनैलाइसिस करने में पटना मौसम विभाग सक्षम नहीं है. मौसम विज्ञान केंद्र की माने तो इस सिस्टम के डेटा फाइल और नेविगेशन फाइल को पढ़ने के लिए एक कोड नंबर की जरूरत होती है. यह कोड नंबर होगा तभी डेटा फाइल मौसम विभाग को उपलब्ध होगा. यह डेटा फाइल को पढ़ने के लिए जो कोड चाहिए वो डा. डी रॉय के पास ही उपलब्ध है. अगर कोड नंबर पता होता तो इस डेटा फाइल को पढ़ने के बाद भूकंप का पूर्वानुमान मौसम विभाग द्वारा लगाया जा सकता था. यह जीपीएस सिस्टम के डेटा को मौसम विभाग को भी जानकारी मिले, इसके लिए मौसम विभाग की ओर से डा. डी रॉय से संपर्क करने की भी कोशिश की गयी है. लेकिन अभी तक डा. डी रॉय ने कोई जवाब नहीं दिया है.
- भूकंप के आशंका से ही लगाया गया था जीपीएस सिस्टम
पटना में भूकंप की संभावना बन रही है. भूकंप वाले चिहिन्त स्थान में ही पटना भी आता है. ऐसे में अगर कोई सिस्टम लगाया जायें जिसकी मदद से कुछ देर पहले भूकंप की जानकारी मिल जायेगी. भारत सरकार और केंद्रीय मौसम विभाग की मदद से पटना के मौसम विभाग में एक जीपीएस सिस्टम लगाया गया. आइएसएम धनबाद के जूओलॉजी के प्रोफेसर डा. डी रॉय को यह जिम्मेवारी दी गयी. डा. डी रॉय ने पटना एयरपोर्ट स्थित मौसम विज्ञान केंद्र में इस जीपीएस सिस्टम को लगाया. इस प्रोजेक्ट को लगाने में लगभग एक महीने का समय लगा. इस प्रोजेक्ट को डा. डी रॉय ने स्टैबलिस तो कर दिया. लेकिन इसके डेटा आदि को कैसे पढ़ा जायें या इसकी जानकारी कैसे पब्लिक तक पहुंचेगी, इसके बारे में पटना मौसम विज्ञान केंद्र को कुछ नहीं बताया.

कोट
चार महीने पहले इसे लगाया गया था. पृथ्वी के अंदर प्लेटों के हलचल और खिसकने की जानकारी इस जीपीएस सिस्टम से मिलती है. पृथ्वी के अंदर स्थिति प्लेट किस तरफ जा रही है. क्या हो सकता है. भूकंप की संभावना आने वाले दिनों में कितना बन रहा है. ये तमाम जानकारी इससे मिल सकती है. लेकिन हमें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं होता है. यह जीपीएस सिस्टम जो डेटा फाइल तैयार करता है. उसकी जानकारी हमें नहीं मिल पा रही है.  अगर हमें डेटा फाइल उपलब्ध हो जायें तो हम भूकंप आदि के बारे में पहले जानकारी ले पायेंगे.
एके गिरी, साइंटिस्ट, पटना मौसम विज्ञान केंद्र

Thursday, May 14, 2015

खत्म होगा इंतजार, इस हफ्ते से निकलने लगेगा रिजल्ट

खत्म होगा इंतजार, इस हफ्ते से निकलने लगेगा रिजल्ट

- इस बार रिजल्ट निकलने की शुरुआत बिहार बोर्ड से
संवाददाता, पटना
बोर्ड के रिजल्ट का इंतजार अब खत्म होने वाला हैं. इस हफ्ते से रिजल्ट निकलने का दौर शुरू होने जा रहा है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के साथ बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने भी इसकी तैयारी शुरू कर दी हैं. इस बार सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड से पहले बिहार विद्यालय परीक्षा समिति रिजल्ट की घोषणा पहले करने जा रही है. समिति की माने तो इंटरमीडिएट साइंस स्ट्रीम का रिजल्ट 15 मई को घोषित की जायेगी. इसके एक सप्ताह के बाद आर्ट्स और कॉमर्स का रिजल्ट निकाला जायेगा. कहा जायें तो 15 मई से 30 मई के बीच तमाम बोर्ड अपने रिजल्ट की घोषणा कर देगी. इसके बाद स्टूडेंट्स नामांकन की प्रक्रिया शुरू कर पायेगे.
- ऑन स्क्रीन मूल्यांकन और परीक्षा प्रक्रिया से सीबीएसइ का रिजल्ट भी जल्दी
इस बार सीबीएसइ का रिजल्ट भी जल्दी निकलेगा. प्लस टू का रिजल्ट 22 मई तक और 10वीं बोर्ड का का रिजल्ट 25 और 26 मई को निकलने की उम्मीद की जा रही है. सीबीएसइ दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार इस बार परीक्षा लेने के पैटर्न और मूल्यांकन प्रक्रिया में परिवर्तन किया गया था. परीक्षा पैटर्न में इस बार उन विषयों की परीक्षा पहले ली गयी थी जिसमें स्टूडेंट्स की संख्या अधिक थी. वहीं 12वीं और 10वीं के मूल्यांकन में ऑन स्क्रीन प्रक्रिया अपनायी गयी थी. इससे मूल्यांकन कार्य काफी जल्दी समाप्त हो गया था. ज्ञात हो कि 2014 में सीबीएसइ 10वीं और 12वीं के रिजल्ट में देरी हो गयी थी. सीबीएसइ 12वीं का रिजल्ट 25 मई तक निकला था तो वहीं 10वीं बोर्ड का रिजल्ट जून के प्रथम सप्ताह में आया था.

इस बार परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या
सीबीएसइ
10वीं  में शामिल कुल छात्र   - 1 लाख 43 हजार  51
12वीं में शामिल कुल छात्र    -  81 हजार 973
10वीं रिजल्ट   -   20 या 22 मई
12वीं रिजल्ट   -   26 या 27 मई

आइसीएसइ बोर्ड
10वीं में शामिल कुल छात्र   -  45 हजार  711
12वीं में शामिल कुल छात्र   -  20 हजार  800
10वीं और 12वीं रिजल्ट  -   18 मई

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
10वीं में शामिल कुल छात्र   -  14 लाख 26 हजार 209
12वीं में शामिल कुल छात्र   - 12,16,419
12वीं साइंस रिजल्ट   - 18 से 20 मई
12वीं आर्ट्स और कॉमर्स रिजल्ट  - 25 मई

कोट
इस बार अभी तक के रिजल्ट में सबसे पहले निकाला जा रहा है. पहले साइंस का रिजल्ट दिया जायेगा. इसके बाद आर्ट्स और कॉमर्स का रिजल्ट निकाला जायेगा. साइंस के छात्रों को इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में नामांकन लेना होता हैं. इस कारण 15 मई को इंटर साइंस का रिजल्ट दे दिया जायेगा. 24 मई को जेइइ एडवांस की परीक्षा के पहले सारा रिजल्ट दे दिया जायेगा.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति

सीबीएसइ का रिजल्ट इस बार जल्दी निकल जायेगा. प्लस टू का रिजल्ट जहां 20 से 22 मई के बीच निकल सकता है. वहीं 10वीं बोर्ड का रिजल्ट भी इस बार 25 मई के आसपास निकल जायेगा. पिछले साल रिजल्ट निकलने में देरी हुई थी. इस कारण स्टूडेंट्स को काफी परेशानी हुई थी. इसको देखते हुए सीबीएसइ ने इस बार रिजल्ट जल्दी निकालने की सोची है.
सीबी सिंह, सचिव, सीबीएसइ पाटलिपुत्र सहोदया

आइसीएसइ बोर्ड के 10वीं और 12वीं बोर्ड का रिजल्ट 20 मई तक आ जायेगा. रिजल्ट निकलने की तैयारी शुरू हो चुकी है. स्कूलों को अभी तक जानकारी नहीं दी गयी हैं. लेकिन 19 और 20 मई को बोर्ड रिजल्ट निकालने की तैयारी कर रहा है.
डीजे रोजेरियो, सिटी को-ऑडिनेटर, आइसीएसइ बोर्ड 

Wednesday, May 13, 2015

स्टूडेंट्स से परेशान हो कर टीचर्स पहुंच रही बाल संरक्षण आयोग

स्टूडेंट्स से परेशान हो कर टीचर्स पहुंच रही बाल संरक्षण आयोग

- स्टूडेंट्स को सजेशन देना टीचर्स को पड़ रहा भारी
- लेडी टीचर्स को हो रही अधिक परेशानी
संवाददाता, पटना
केस वन  - टीचर पुष्पा सिन्हा क्लास 9वीं और 10वीं के स्टूडेंट्स को इंगलिश का ट्यूशन देतीं हैं. एक बार किसी प्रश्न के गलत उत्तर देने और ट्यूशन से गायब रहने को लेकर टीचर ने एक स्टूडेंट को डांटा. फिर क्या था. उस स्टूडेंट ने मोबाइल पर मैसेज करना शुरू किया. टीचर को पूरे ट्यूशन के सामने डांटने पर अपनी नाराजगी बतायी. कई तरह की धमकियां भी दे डाली. ऐसे में तंग आकर टीचर पुष्पा सिन्हा ने बाल अधिकार सरंक्षण आयोग में जाकर मामला दर्ज करवाया है. यह हाल कोई एक शिक्षक की नहीं हैं बल्कि पटना के कई फेसम स्कूलों के टीचर्स स्टूडेंट्स के इस तरह बिहेवियर से परेशान है. हर स्टूडेंट्स सही रास्ते पर चलें, उसे सही गाइडेंस मिले, टीचर्स का फोकस यही होता हैं. टीचर्स स्टूडेंट्स को निगेटिविटी से निकाल कर पॉजिटिव अप्रोच रखने में मदद की कोशिश करते हैं. लेकिन ये सारी कोशिशें टीचर्स पर भारी पड़ने लगती है जब स्टूडेंट्स ही टीचर्स को परेशान करने लगे है. स्टूडेंट्स की इन्हीं हरकतों से परेशान होकर अब कई टीचर्स ने बाल अधिकार सरंक्षण आयोग में शिकायत दर्ज करवायी है. अब आयोग इसकी इंवेस्टीगेशन करने में लगा हुआ है.
पुरानी डांट का लेते है बदला
कई मामले में टीचर्स की डांट या पनिशमेंट का बदला लेने पर स्टूडेंट्स उतारू हो जाते है. आयोग में आई शिकायतों में कई मामले ऐसे है जिसमें महीनों पहले हुए इंसीडेंट को लेकर भी स्टूडेंट्स बदला लेने की कोशिश करते है. इस संबंध में सेंट जोसफ कांवेंट की मैथ की टीचर श्वेता प्रियदर्शी ने बताया कि लड़कों को हमने तो ट्यूशन देना ही बंद कर दिया है. आयें दिन किसी ना किसी तरह से वो गलत कमेंट करते है. कमेंट भी ऐसे कि किसी दूसरे को बता भी नहीं सकते हैं. ऐसे में अब बस लड़कियों को ही ट्यूशन दिया जाता है.
दोस्तों से भी दिलवा रहे धमकी
बोर्ड और फाइनल एग्जाम के समय सीबीएसइ के निर्देश पर सोशल साइट्स से जुड़ कर स्टूडेंट्स को गाइड करने को कहा जाता हैं. कई टीचर्स ऐसा करते भी हैं. लोयेला हाई स्कूल के मैथ के टीचर संजय कुमार ने बताया कि एग्जाम की तैयारी के समय बोर्ड के निर्देश पर स्टूडेंट्स से सोशल साइट्स से हम जुड़ते है. लेकिन इस दौरान भी स्टूडेंट्स बाज नहीं आते है. कुछ स्टूडेंट्स गलत कमेंट करने से भी परहेज नहीं करते. कई बार हम स्टूडेंट्स को समझाते भी हैं.  लेकिन कई बार यह उल्टा हो जाता हैं.  वहीं डीपीएस की साइंस टीचर अंजू शर्मा बताती है कि कई बार स्टूडेंट्स अपने किसी दोस्त से धमकी दिलवाते हैं.
- कई ग्रुप कर हरे टीचर्स को परेशान
अभी तक तो स्टूडेंट्स ही स्कूल और टीचर्स के खिलाफ बाल अधिकार संरक्षण आयोग में कंप्लेन करते थे. लेकिन हाल में टीचर्स ने आयोग में जाकर स्टूडेंट्स के खिलाफ शिकायतें की है. इसको लेकर आयोग की ओर से स्टूडेंट्स को बुला कर उनकी काउंसेलिंग भी की गयी है.

ये सारे कमेंट का सामना करना पड़ता हैं टीचर्स को
- आपको तो कुछ आता नहीं है. हमें सजेशन ना दिया करें
- आपकी हिम्मत कैसे हुई पूरे क्लास के सामने मुङो डांटने की
- मैम, आप तो बहुत ही सेक्सी लगती है
- .. आपकी स्माइल तो दिल तक पहुंच जाती है
- आपने मेरी गर्ल फ्रेंड के बारे में कैसे किसी दूसरे को बता सकती है
- आप जींस पहनती है तो ऐश्वर्या राय की तरह लगती है
- क्या आप मेरे साथ फिल्ड देखने चलेगी
- सर आप मेरी गर्ल फ्रेंड को कैसे डांट दिया, आगे से ऐसा कीजिऐसा तो आपके अफेसर के बारे में सबको बता दूंगा
- बोर्ड एग्जाम के कॉपी को सही से चेक कीजिएगा. अगर मार्क्‍स कम आयें तो बहुत ही बुरा होगा

जेइइ मेन के मेरिट लिस्ट में 12वीं के साथ 11वीं के अंक भी होंगे शामिल

जेइइ मेन के मेरिट लिस्ट में 12वीं के साथ 11वीं के अंक भी होंगे शामिल

- सीबीएसइ ने दिया तमाम स्टेट बोर्ड को सुविधा
- अब 11वीं और 12वीं के अंकों को मिला कर मान्य होगा 40 परसेंट का वेटेज
संवाददाता, पटना
जेइइ मेन के मेरिट लिस्ट तक पहुंचने के लिए अब 11वीं और 12वीं दोनों के परीक्षा के अंक को जोड़ कर 40 परसेंट का वेटेज मार्क्‍स तैयार किया जायेगा. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेण्ड्री एजूकेशन (सीबीएसइ) की ओर से यह फैसला लिया गया है. किसी भी छात्र के इंटरमीडिएट के पहले और दूसरे साल के अंकों को मिलाकर रिजल्ट निकाला जायेगा और फिर उसके अनुसार जेइइ मेन के मेरिट लिस्ट के रैंक में 40 परसेंट का वेटेज निकाला जायेगा. सीबीएसइ के अनुसार जेइइ मेन के मेरिट लिस्ट में जेइइ मेन का 60 परसेंट और प्लस टू के रिजल्ट का 40 परसेंट वेटेज होता है. इसी के आधार पर जेइइ मेन का मेरिट लिस्ट तैयार किया जाता है. सीबीएसइ ने यह फैसला 2014 में ही लिया था. लेकिन तब तक प्लस टू के रिजल्ट की घोषणा हो चुकी थी. लेकिन इस बार सीबीएसइ ने अभी ही तमाम बोर्ड को प्लस टू के रिजल्ट में 11वीं के भी मार्क्‍स जोड़ने का आप्सन दिया है.
-  12वीं की परीक्षा से निकलता था बोर्ड का रिजल्ट
अभी तक तमाम बोर्ड 12वीं के परीक्षा के आधार पर ही इंटरमीडिएट का रिजल्ट घोषित करते रहे है. दो साल के इंटर की पढ़ाई में 11वीं की परीक्षा और रिजल्ट दोनों की स्कूल स्तर पर तैयार किया जाता है. अब 11वीं के अंक को स्कूल द्वारा बोर्ड के पास भेजा जाता है. 11वीं के रिजल्ट के आधार पर स्टूडेंट्स 12वीं का एग्जामिनेशन फार्म भरते है. इसके अलावा 11वीं के रिजल्ट का कोई दूसरा महत्व इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए नहीं होता है.
- हर बोर्ड अपने यहां कर सकता है लागू
12वीं के साथ 11वीं के भी अंक अब टोटल मार्क्‍स में जुड़ेंगे. और उसी के आधार पर बोर्ड द्वारा रिजल्ट तैयार किया जायेगा. सीबीएसइ द्वारा यह व्यवस्था हर बोर्ड में लागू होगा. हर बोर्ड अपने यहां इंटर के 11वीं और 12वीं के रिजल्ट को एक साथ तैयार कर 40 परसेंट का वेटेज मार्क्‍स निकाल सकते है. सीबीएसइ के अनुसार 11वीं और 12वीं के दोनों के परीक्षा के बाद एक साथ मार्क्‍स सीट तैयार किया जायेगा. दोंनों के रिजल्ट का 40 परसेंट वेटेज अब कोई भी बोर्ड कर सकता है.

एक्सपर्ट व्यू
बोर्ड की ओर से यह फैसला स्टूडेंट्स के लिए काफी अच्छा रहेगा. इसके साथ परीक्षा के पैटर्न को चेंज करना पड़ेगा. अभी तक बस 12वीं की परीक्षा बोर्ड की ओर से लिया जाता रहा है. 11वीं की परीक्षा स्कूल अपने स्तर से लेता रहा है. लेकिन इस नियम के होने से 11वीं की परीक्षा को चेंज करना पड़ेगा.
एसके ठाकुर, टीचर, सेंट माइकल हाई स्कूल

कोट
सीबीएसइ द्वारा ऐसा किया गया है. हमारे पास अभी तक सूचना नहीं आयी है. ऐसा होगा तो छात्रों के अच्छा होगा. जब हमें सूचना आयेगी तो हम इस विचार करेंगे कि इसे कैसे किया जायें.
श्रीनिवास चंद तिवारी, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति

12वीं के परीक्षा पर अभी तक प्लस टू का रिजल्ट तैयार किया जाता था. इसको लेकर आंध्र प्रदेश की ओर से मांग हुई थी कि 11वीं के अंक को भी प्लस टू में शामिल किया जायें. जिससे जेइइ मेन के मेरिट लिस्ट में 40 परसेंट वेटेज लेने में स्टूडेंट्स को आसानी होगी. सीबीएसइ ने इसे मान लिया है. इसे दूसरे बोर्ड भी लागू कर सकते है.
सीबी सिंह, सचिव, सीबीएसइ सहोदया कांप्लेक्स  

Monday, May 11, 2015

मार्क्‍स डिटेल्स नहीं रहेगा तो आइआइटी में जाने का सपना होगा अधूरा

मार्क्‍स डिटेल्स नहीं रहेगा तो आइआइटी में जाने का सपना होगा अधूरा

- सीबीएसइ ने 31 मई तक मार्क्‍स डिटेल्स डालने का समय दिया स्टूडेंट्स को
- 7 जुलाई को सीबीएसइ जारी करेगा क्वालिफाईग डिटेल्स
- मार्क्‍स डिटेल्स नहीं तो मेरिट लिस्ट में शामिल नहीं
संवाददाता, पटना
जेइइ मेन में अच्छे अंक प्राप्त हो गये. अब 12वीं बोर्ड के रिजल्ट का इंतजार हैं. 12वीं बोर्ड के अंक निर्धारित करेगा कि किसे कैसा रैंक मिला. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने 12वीं रिजल्ट निकलने के पहले ही तमाम स्टेट बोर्ड को निर्देश देना शुरू कर दिया है. जेइइ मेन के अंक अभ्यर्थी को प्राप्त हो चुके है. अब 12वीं के अंक प्राप्त होने के बाद रैंक निकाली जायेगी. इसके लिए सीबीएसइ ने मई के अंतिम सप्ताह का समय दिया है. ज्ञात हो कि इंजीनियरिंग कॉलेज के ऑल इंडिया रैंक में शामिल होने के लिए छात्रों को 40 फीसदी जेइइ मेन तो 60 फीसदी 12वीं बोर्ड के अंकों की आवश्यकता है. 2015 में 12वीं बोर्ड देने वाले तमाम छात्रों को समय रहते ही अपना मार्क्‍स डिटेल्स सीबीएसइ के वेबसाइट पर अपलोड करना होगा. इसके लिए स्टूडेंट्स और संबंधित बोर्ड को सीबीएसइ को मार्क्‍स डिटेल्स उपलब्ध करवानी होगी.
- आइआइटी में नामांकन नहीं ले पाया था आदित्य कुमार
बिहार बोर्ड का 2014 का 12वीं साइंस का रिजल्ट खराब होने के कारण मार्क्‍स डिटेल्स समय पर नहीं भेज पाया था. बाद में सीबीएसइ ने एक सप्ताह का समय दिया था. इसके बाद ही बिहार बोर्ड के स्टूडेंट्स अपना मार्क्‍स सीट बोर्ड को उपलब्ध करवा पायी थी. राजाराम शाह कॉलेज, पूर्वी चंपारण का छात्र आदित्य कुमार ने बताया कि 2014 में 12वीं का मार्क्‍स सीट काफी लेट मिला था. समय पर मार्क्‍स सीट नहीं मिलने के कारण आइआइटी में प्रवेश नहीं मिल पाया था. कुछ ऐसा ही हाल जेएन मिश्र कॉलेज, रोहतास का छात्र अजित ने 2014 में जेइइ मने में 235 अंक प्राप्त किये. लेकिन 12वीं में उन्हें कितना अंक प्राप्त हुआ, इसकी जानकारी रिजल्ट निकलने के कई दिनों तक नहीं मिला. अंक भेजने की अंतिम तिथि 31 मई निर्धारित की गयी थी.  बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की कार्यशैली का खामियाजा इस बार उन छात्रों को भुगतना पड़ा जो जेइइ मेन में अच्छे अंक प्राप्त करने के बावजूद आइआइटी तक नहीं पहुंच पाये.
- 12वीं के क्वालिफाईग डिटेल्स नहीं, मेरिट लिस्ट में नाम नहीं
जेइइ मेन का मेरिट लिस्ट 7 जुलाई को वेबसाइट पर डाला जायेगा. इस मेरिट लिस्ट से छात्रों को पता चलेगा कि उन्हें जेइइ मेन में कितना रैंक मिला है और उन्हें किस आइआइटी में प्रवेश मिल सकता है. इस मेरिट लिस्ट में उन्हीं छात्रों को शामिल किया जायेगा, जो 12वीं के क्वालिफाइ एग्जामिनेशन डिटेल्स को जेइइ मेन के वेबसाइट पर अपलोड किये है. वेबसाइट पर अपलोडिंग का अंतिम तिथि 31 मई निर्धारित की गयी हैं.  31 मई के बाद छात्र अपना मार्क्‍स भेजेंगे भी तो उन्हें एक्सेप्ट नहीं किया जायेगा. मार्क्‍स अपलोड होने के एक सप्ताह के बाद 7 जुलाई को जेइइ मेन का ऑल इंडिया रैंक निकाला जायेगा.
- डिटेल्स रहेगा तभी आयेंगे मेरिट में
सीबीएसइ ने जेइइ मेन के लिए तमाम छात्रों को स्पष्ट निर्देश दे दिया है. जो छात्र 12वीं क्वालिफाइंग के बारे में जानकारी बोर्ड को 31 मई तक नहीं हैे, उन्हें ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट में शामिल नहीं किया जायेगा. बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार जो छात्र अपना क्वालिफाइंग डिटेल्स भेजेंगे,  उन्हें एक दो दिनों में कंफर्मेशन दे दिया जायेगा.  बोर्ड ने कहा है कि अगर किसी छात्र को 12वीं डिटेल्स भेजने के बाद कंफर्मेशन नहीं मिले तो वो जल्द से जल्द बोर्ड को इसकी जानकारी भी देंगे. इससे उनके प्राब्लम को सॉल्व किया जायेगा.
आइआइटी में जाने के लिए बोर्ड में 80 फीसदी के उपर हो मार्क्‍स
बोर्ड एग्जाम में 80 फीसदी मार्क्‍स लाने वाले स्टूडेंट्स की आइआइटी में सेलेक्शन की उम्मीद है. अभी जेइइ एडवांस की परीक्षा और उसके रिजल्ट के बाद यह तय हो पायेगा कि कौन से आइआइटी में नामांकन छात्र ले पायेंगे.  2013 में बिहार बोर्ड से सामान्य केटेगरी के स्टूडेंट्स को 12वीं में 80.34 परसेंटेज लाने पर आइआइटी में एडमिशन मिल गया था. लेकिन इस बार टफ कांम्पटीशन होने की वजह से यह परसेंटेज 80 प्रतिशत के उपर तक जा सकता है. एक्सपर्ट की माने तो पिछले साल कटऑफ 160 रहा. इस बार इसके आसपास ही रहने की उम्मीद है. एक्सपर्ट एसके ठाकुर ने बताया कि नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया के तहत स्टूडेंट्स के जेइइ मेंस में 60 परसेंट और 12वीं में 40 परसेंट के आधार पर मेरिट बनायी जायेगी. यह मेरिट सात जुलाई को घोषित होगी. 20 परसेंटाइल में सेलेक्ट हुए स्टूडेंट्स को आइआइटी में एडमिशन के योग्य माना जायेगा.

इतनी रैंक पर 2014 सत्र में इन इंजीनियरिंग
आइआइटी में मिलेगा एडमिशन  - 9 हजार रैंक तक
एनआइटी कॉलेज में एडमिशन  - 15 हजार रैंक तक
स्टेट के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन -  25 हजार रैंक तक

आइआइटी के लिए
जेइइ मेन एवं 12वीं बोर्ड के अंकों को 50-50 फीसदी महत्व देते हुए टॉप 50 हजार की सूची तैयार कर रैंक दी जाती है. फिर एडवांस टेस्ट को 100 फीसदी महत्व देते हुए कॉमन स्कोर से मेरिट सूची तैयार होगी.

एनआइटी के लिए
इसमें मेरिट में 40 फीसदी महत्व 12वीं बोर्ड में प्राप्तांक, 30 फीसदी जेइइ मेंस परीक्षा और शेष 30 फीसदी एडवांस टेस्ट का रहेगा. तीनों के कॉमन स्कोर में मेरिट सूची में रैक तैयार की जायेगी.

2013 में जेइइ मेन का कटऑफ 113 अंक गया था
2014 में जेइइ मेन का कटऑफ 115 गया है
2013 में जेइइ एडवांस्ड का कटऑफ 165 गया था
2014 में जेइइ एडवांस्ड का कटऑफ 150 पर जाने की उम्मीद है

अब एक साल का मिलेगा एफिलिएशन, सीबीएसइ कर रहा तैयारी

अब एक साल का मिलेगा एफिलिएशन, सीबीएसइ कर रहा तैयारी

- डोमेन रहेगा तभी मिलेगा एफिलिएशन
- सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को डोमेन नाम को रजिस्टर करने का दिया निर्देश
संवाददाता, पटना
अब स्कूलों को एक साल का ही एफिलिएशन मिल सकता है. इसकी तैयारी सीबीएसइ ने शुरू कर दी है. यह अगले साल से लागू की जायेगी. जिन स्कूलों का एफिलिएशन 2016 में समाप्त होगा, उन स्कूलों पर यह लागू होगा. लेकिन जिन स्कूलों को अभी तीन साल से पांच साल का एफिलिएशन मिला हुआ है. उन स्कूलों पर अभी यह नियम लागू नहीं होगा. सीबीएसइ ने स्कूलों की मनमानी पर नजर रखने के लिए यह कदम उठाने की तैयारी कर रहा है. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो कई स्कूलों एफिलिएशन लेने के बाद मनमानी तरीके से स्कूल में नामांकन और कई गलत गतिविधि करते है. एफिलिएशन मिलने के बाद स्कूल सीबीएसइ के कई नियमों का ताक पर रख कर अपनी मरजी से सारा काम करते है. इससे उस स्कूल में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स, उनके अभिभावकों के साथ सीबीएसइ को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं.
- एफिलिएशन चार्ज किया गया कम
सीबीएसइ जहां एक साल का एफिलिएशन देने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए एक्सपर्ट से फीड बैक ली जा रही है. फीड बैक के बाद इसे लागू किया जायेगा. वहीं एक साल के एफिलिएशन का चार्ज भी सीबीएसइ ने कम करने जा रही है. अगर किसी स्कूल को एक साल का एफिलिएशन मिलने तो उस स्कूल को एफिलिएशन के रजिस्ट्रेशन के लिए 750 रुपये खर्च करने पड़ेंगे. सीबीएसइ सूत्रों के मुताबिक एक साल के एफिलिएशन के बाद सीबीएसइ उस स्कूल पर नजर रखेगी. अगर वो स्कूल सीबीएसइ के सारे नॉम्स का पालन करता है तो फिर उसे दो या तीन सालों का एफिलिएशन मिल सकता है.
- एफिलिएशन के लिए डोमेन नाम को अनिवार्य किया बोर्ड ने
जिस स्कूल के पास डोमेन नाम का रजिस्ट्रेशन नहीं रहेगा, उन्हें एफिलिएशन नहीं मिलेगा. इसके साथ ही एफिलिएशन को भी समाप्त कर दिया जायेगा. इसकी जांच जुलाई में स्कूलों में शुरू हो जायेगा. इसकी सूचना सीबीएसइ की ओर से तमाम स्कूलों को दे दिया गया है. अब सीबीएसइ एफिलिएटेड तमाम स्कूलों को डोमेन नेम बोर्ड से रजिस्टर करवाना होगा. सीबीएसइ सूत्रों के मुताबिक अधिकांश स्कूल डोमेन नेम का रजिस्टर नहीं करवाया है. इससे सीबीएसइ को स्कूल के वेबसाइट की जानकारी नहीं होती हैं. स्कूल का वेबसाइट चल रहा है या नहीं इस पर भी बोर्ड को डाउट हो रहा हैं. इस कारण सीबीएसइ ने देश भर के सीबीएसइ स्कूलों को दो डोमेन नेम रखने का निर्देश दिया है. सूत्रों की माने तो अब हर स्कूलों को अपना वेबसाइट का डोमेन नेम डॉट कॉम चेंज करना होगा. अब हर स्कूलों का डोमेन नेम डॉट एसी डॉट इन या डॉट इडीयू डॉट इन होगा. जिन स्कूलों का पहले से वेबसाइट बोर्ड द्वारा दिये गये डोमेन नेम पर है, उनका तो ठीक है लेकिन जिन स्कूलों का डोमेन नेम बोर्ड द्वारा दिये गये डोनेम नेम नहीं है, उन्हें चेंज करना होगा. यह परिवर्तन जून तक तमाम स्कूलों को कर लेना है. इसके बाद जुलाई से बोर्ड की ओर से जांच किया जायेगा. जिन स्कूलों का डोमेन नेम बोर्ड से रजिस्टर नहीं होगा, उसकी मान्यता को लेकर उसे नोटिस दिया जायेगा.
- ऑन लाइन भरना होगा फार्म
 डोमेन नेम के परिवर्तन के लिए स्कूलों को ऑन लाइन फार्म भरना होगा. इसके लिए स्कूल को सीबीएसइ के वेबसाइट पर जाकर फार्म भरना होगा. फार्म भरने के बाद बोर्ड द्वारा स्कूल के नाम के साथ डोमेन नेम देकर नया वेबसाइट का रजिस्ट्रेशन किया जायेगा. इसके बाद वो स्कूल की पूरी मॉनिटरिंग बोर्ड की ओर से किया जायेगा.
- सेंट माइकल ने किया शुरुआत
पटना में इसकी शुरुआत सेंट माइकल हाई स्कूल से किया गया है. सेंट माइकल हाई स्कूल ने अपना डोमेन नेम बोर्ड से रजिस्टर करवा लिया है. स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार बोर्ड ने इसके लिए अप्लाई करना पड़ा और एक दिन में डोमेन नेम भेज दिया गया है.  इसके अलावा कई स्कूलों ने अप्लाई करना शुरू कर दिया है. बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार देश भर के 10 हजार स्कूलों का अभी तक डोमेन नेम चेंज कर दिया गया है. इसमें पटना जोन के कुछ स्कूल शामिल है. हर हफ्ते 15 से 20 स्कूल अपना डोमेन नेम चेंज किया जा रहा है.
वेबसाइट पर इस तरह रखेगा नजर
- रेगुलर अपडेट होता है या नहीं
- वेबसाइट में तमाम जानकारी दी गयी है या नही
- अभिभावको की सुविधा के लिए स्कूल ने वेबसाइट पर किस तरह की जानकारी दी है
- स्कूल की टाइमिंग के साथ कैलेंडर पर स्कूल कितना फोकस कर रहा है
- अभिभावकों को स्कूल अपडेट की जानकारी कैसे दी जा रही है

इस तरह देना होगा चार्ज
5 साल के लिए डोमेन का रजिस्ट्रेशन चार्ज  -  3371 रुपये
2 साल के लिए डोमेन का रजिस्ट्रेशन चार्ज   - 1350 रुपये
1 साल के लिए डोमेन का रजिस्ट्रेशन चार्ज  - 750

कोट
हर स्कूल को अपना डोमेन चेंज करना होगा. अभी तक देश भर में 10 हजार के उपर स्कूलों ने डोमेन नेम का परिवर्तन किया है. इसमें पटना जोन के सैकड़ों स्कूल भी शामिल है. हर स्कूल को अपना डोमेन नेम सीबीएसइ से रजिस्टर करवाना होगा. इसके अलावा अब एक साल के एफिलिएशन मिलने पर भी सीबीएसइ विचार कर रहा है.
बीबी तिवारी, डायरेक्टर, सीबीएसइ एफिलिएशन 

Sunday, May 10, 2015

एडवांस के लिए केमेस्ट्री पर करें फोसक, रहेगा डिसाइडिंग

एडवांस के लिए केमेस्ट्री पर करें फोसक, रहेगा डिसाइडिंग

- जेइइ मेंस के रिजल्ट के बाद अब जेइइ एडवांस की तैयारी चैलेंजिंग
- आइआइटी खुद तैयार करता है जेइइ एडवांस का प्रश्न पत्र
संवाददाता, पटना
जेइइ मेंस में हर विषय को एक समान रखा जाता है. किसी एक विषय को फोकस नहीं किया जाता है,  लेकिन जेइइ एडवांस में कोई एक विषय डिसाइडिंग होता है. पिछले 5 साल की बात करें तो आइआइटी और पिछले साल जेइइ एडवांस की परीक्षा में केमेस्ट्री सब्जेक्ट डिसाइडिंग रहा है. इस कारण जेइइ एडवांस की तैयारी में केमेस्ट्री को अधिक से अधिक फोकस करें.  क्योंकि मैथेमेटिक्स और फिजिक्स काफी टफ रहने से निश्चित समय सीमा में स्टूडेंट्स सारे प्रश्न का जवाब देने में असमर्थ होते है. ऐसे में केमेस्ट्री ही सेलेक्शन के लिए डिसाइडिंग होता है. एक्सपर्ट की माने तो इस बार भी जेइइ एडवांस के लिए स्टूडेंट्स को केमेस्ट्री पर ही फोकस करना चाहिए. इसके लिए पिछले 5 से 6 सालों का क्वेशचन बैंक जरूर देख ले. ज्ञात हो कि जेइइ एडवांस की परीक्षा 24 मई को देश भर में आयोजित की जायेगी. इसमें जेइइ मेन से
- 15 दिन का समय है बस
समय कम है. तैयारी अधिक करना है. प्लानिंग ऐसा हो कि पिछली परीक्षा में हुई लगती दुहरायी ना जायें. इसके लिए अभी से समय की स्ट्रेटजी बनानी होगी. एक्सपर्ट की माने तो हर दिन 9 से 10 घंटे की पढ़ाई करनी होगी. हर विषय के लिए एक प्लानिंग बनानी होगी. इस संबंध में लोयेला हाई स्कूल के मैथ के टीचर संजय कुमार झा ने बताया कि हर चैप्टर को पहले अच्छी तरह से प्रैक्टिस कर ले. उसके बाद उन चैप्टर पर फोकस करें जिसमें थोड़ा की कंफ्यूजन हो रहा हो. क्योंकि कम समय में प्रैक्टिस करनी है. जेइइ एडवांस में जितनी प्रैक्टिस होगी, एक्जाम अच्छा जाने की संभावना अधिक होगी.
- आइआइटी खुद तैयार करता है प्रश्न पत्र
जेइइ एडवांस के लिए आइआइटी खुद ही प्रश्न पत्र तैयार करता है. इसके लिए एक्सपर्ट का पैनल तैयार होता है. इसमें प्रश्न भी होते है जो कभी किसी कोर्स के लिए नहीं बना होता है. इस संबंध में फिजिक्स के एक्सपर्ट अमरेंद्र कुमार ने बताया कि आइआइटी के प्रश्न के पैटर्न को जानने के लिए क्वेशचन बैंक को पढ़ना बहुत ही जरूरी है. इससे आइआइटी के प्रश्नों का लेवल पता चलेगा. स्टूडेंट्स को एक्जामिनेशन हॉल में तुरंत प्रश्न का उत्तर देने में सहूलियत होगी.
- जेइइ मेन में लेंदी था केमेस्ट्री
2015 में लिया जाने वाला जेइइ मेन में भी केमेस्ट्री ही डिसाइडिंग रहा है. केमेस्ट्री से कई प्रश्न अलग तरीके से पूछे गये हैं. एक्सपर्ट की माने तो फिजिक्स जेइइ मेन में काफी टफ था. इस कारण फिजिक्स का कट ऑफ मार्क्‍स कम पर ही हुआ था. मैथ में भी प्रश्नों का स्टैंडर्ड सही था. पिछले बार की तरह इस बार भी केमेस्ट्री की डिसाइडिंग रहेगा.

विषय वार जेइइ एडवांस के लिए रखें ऐसे ख्याल
मैथ
- पिछले पांच साल का आइआइटी का क्वेशचन बैंक की प्रैक्टिस करें
- आइआइटी लेवल के प्रश्न पत्र को बना ले
- मैथ में 20 से 25 फीसदी प्रश्न उलझाने वाले होते है. ऐसे में आपके हाथ में समय रहेगा तभी प्रश्न का उत्तर कर पायेंगे. इस कारण फमरूला की प्रैक्टिस अधिक से अधिक कर ले
- एडवांस के लिए कोई डिसाइडिंग सिलेबस नहीं होता है. इस कारण खुद ही प्रश्न का एक्सपेरिमेंट कर सॉल्व करने की कोशिश करें
- आइआइटी या पिछले साल के जेइइ मेंस के प्रश्नों को अच्छी तरह से प्रैक्टिस करें, इससे प्रश्नों के मिक्चर का पता चलेगा
- 5 से 6 घंटे मैथ पर हर दिन देना चाहिए
- हर दिन खुद का टेस्ट ले
एसके ठाकुर, टीचर, सेंट माइकल हाई स्कूल

केमेस्ट्री
- पिछले 5 से 6 सालों के क्वेशचन बैंक की प्रैक्टिस करें
- केमेस्ट्री में फिजिकल और ऑग्रेनिक केमेस्ट्री काफी महत्वपूर्ण रहता है. इस कारण दोनों की खूब प्रैक्टिस करें
- 11वीं में फिजिकल और 12वीं के ऑग्रेनिक केमेस्ट्री को अच्छी तरह से पढ़ ले
- एडवांस का कोई सिलेबस नहीं होता है. इसमें कुछ प्रश्न ऐसे भी पूछे जाते है जो प्रश्न कभी कहीं पर देखा नहीं गया होता है. एक दम नये तरीके के प्रश्न पूछे जाते है.
- पिछले कई सालों से देखा गया है कि मैथ, फिजिक्स और केमेस्ट्री में केमेस्ट्री के प्रश्न आसान रहते है. निश्चित समय सीमा के अंदर स्टूडेंट्स प्रश्नों का उत्तर कर लेते है.
- हर दिन 4 से 5 घंटे की पढ़ाई करें
पीसी दास, टीचर, सेंट माइकल हाई स्कूल

फिजिक्स
- जो टेस्ट  बुक को पहले पढ़ा है. उसे ही पढ़े.
- फमरूला आदि को अच्छी तरह से प्रैक्टिस कर ले. सॉट कट फमरूला सॉल्व करने के तरीके अच्छी तरह से देख ले
- एक अंक के प्रश्न की प्रैक्टिस अभी नहीं करें. जहां तक संभव हो लॉग प्रश्न अच्छे से बना ले.
- फिजिक्स में 20 से 25 फीसदी प्रश्न काफी टफ होते है. समय सीमा के अंदर आंसर करना मुश्किल होता है. इस कारण इनोवेशन प्रश्न की प्रैक्टिस अधिक से अधिक करें
- सॉट कट प्रैक्टिस करने की कोशिश ना करें. पूरा कांसेप्ट क्लियर कर ही आगे की पढ़ाई करें
शिव कुमार, टीचर, सेंट कैरेंस हाई स्कूल, गोला रोड

मोबाइल जैमर से लिया जायेगा एम्स एंट्रांस

मोबाइल जैमर से लिया जायेगा एम्स एंट्रांस

- 1 जून को होने वाले एम्स की परीक्षा में जैमर से रखी जायेगी नजर
संवाददाता, पटना
परीक्षा हॉल में मोबाइल साथ होगा तो तुरंत पकड़ में आयेगा. परीक्षा हॉल में मोबाइल का नेटवर्क खुद से खुद काम करना बंद कर देगा. कितना भी हाइटेक ब्लूटूथ का इस्तेमाल किया जायें, पकड़ में आना निश्चित हो जायेगा. किसी भी तरह का इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस काम नही करेगा. एंट्रांस परीक्षा को कदाचार मुक्त बनाने के लिए ऑल इंडिया इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) की ओर से यह व्यवस्था की जा रही है. इस बार एम्स एंट्रांस परीक्षा के तमाम परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल जैमर लगाया जायेगा. एक्सपर्ट की माने तो मोबाइल जैमर से उस एरिया में रहने वाले तमाम मोबाइल का नेटवर्क बंद हो जायेगा.
- ऑन लाइन ली जायेगी एम्स एंट्रांस
पहली बार एम्स की परीक्षा देश भर में ऑन लाइन ली जा रही है. देश भर में 672 सीटों के लिए ली जाने वाले एम्स की परीक्षा इस बार कम्प्यूटर बेस्ड लिया जायेगा. दो शिफ्ट में एम्स की परीक्षा ली जायेगी. दोनों की शिफ्ट की परीक्षा ऑन लाइन ही देनी होगी. इस बार एम्स की परीक्षा में देश भर से लगभग 2 लाख अभ्यर्थी शामिल होंगे. इसमें पटना से इस बार एम्स की परीक्षा में  15 से 20 हजार अभ्यर्थी शामिल होंगे. पूरे बिहार में पटना के अलावा इस बार गया, मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद, पूर्णिया में परीक्षा केंद्र बनाये गये है. ऑन लाइन परीक्षा होने के कारण इस बार बिहार में एम्स एंट्रांस के लिए परीक्षा केंद्रों की संख्या काफी कम है.
- बिहार के छात्रों  को भेज दिया गया दूसरे स्टेट
इस बार बिहार के काफी संख्या में छात्रों को दूसरे स्टेट में परीक्षा केंद्र दे दिया गया है. परीक्षार्थी ने जिस शहर को च्वाइस के रूप में सेंटर दिया था, उनका सेंटर चेंज कर दिया गया. बिहार में आन लाइन सेंटर की संख्या कम होने के कारण काफी संख्या में छात्रों को दक्षिण भारत के शहरों में परीक्षा केंद्र बनाया गया है.

एम्स एंट्रांस   - 1 जून
रिजल्ट   - 25 जून  (संभावित)
फस्र्ट काउंसेलिंग  -  6 से 9 जुलाई
सेकेंड काउंसेलिंग   -  10 अगस्त
थर्ड काउंसेलिंग     -   7 सितंबर
ओपेन काउंसेलिंग   -  23 सितंबर

देश भर के कुल सात एम्स में 672 सीटों के लिए नामांकन ली जायेगी. इसमें जेनरल से लेकर हर केटेगरी के लिए सीटें निश्चित कर दी गयी है
    एम्स         -   जेनरल     -   ओबीसी    -    एससी
 नयी दिल्ली    -    37         -     19        -    11
  भोपाल        -     50         -     27       -    15
  पटना         -     50          -     27      -     15
  जोधपुर       -   50            -    27      -     15
  ऋषिकेश     -    50            -   27      -   15  
  भूवनेश्वर    -     50            -   27      -   15
  रायपुर      -       50            -   27      -   15

कोट
पहली बार एम्स एंट्रांस आन लाइन लिया जायेगा. बिहार में भी ऑन लाइन परीक्षा केंद्र बनाये गये है. इस बार 2 लाख के लगभग परीक्षा देश भर से शामिल होंगे. कदाचार मुक्त परीक्षा के लिए कई सावधानी बरती जा रही है.
जेके सिंह, डायरेक्टर, एम्स पटना

पहली बार एम्स के तमाम परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल जैमर लगायी जा रही हैं. जिस तरह से मेडिकल के एंट्रांस परीक्षा में कदाचार करने के लिए माइक्रो मोबाइल आदि का उपयोग होने लगा है. यह एक चिंता का विषय बनता जा रहा है. मोबाइल जैमर लगाने से ब्लूटूथ से कोई भी हाइटेक चोरी करना संभव नहीं हो पायेगा. एम्स की ओर से किया जाने वाला यह प्रयास काफी अच्छा है. इसे दूसरे एंट्रांस परीक्षा में भी लागू करना चाहिए.
विपिन कुमार, डायरेक्टर, गोल इंस्ट्रीच्यूट 

Saturday, May 9, 2015

टॉपर लिस्ट की स्क्रूटनी और रिब्यू के बाद निकलेगा इंटर का रिजल्ट

टॉपर लिस्ट की स्क्रूटनी और रिब्यू के बाद निकलेगा इंटर का रिजल्ट

- 2015 में इंटर साइंस के रिजल्ट निकालने से पहले बरती जायेगी सावधानी
- टॉपरों की सूची की होगी दुबारा जांच
संवाददाता, पटना
इंटरमीडिएट के रिजल्ट निकालने से पहले टॉपर लिस्ट की पूरी जांच होगी. अंकों की स्क्रूटनी की जायेगी. रिजल्ट का रिव्यू एक्सपर्ट के द्वारा किया जायेगा. इसके बाद ही रिजल्ट को घोषित किया जायेगा. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से इंटर क रिजल्ट निकालने से पहले इस बार काफी सावधानी बरती जा रही हैं. ज्ञात हो कि इस बार साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स स्ट्रीम के टॉपर लिस्ट पर खुद समिति के अध्यक्ष और सचिव की नजर रहेगी. पूरी तरह से जांच करने के बाद ही रिजल्ट को घोषित किया जायेगा.
- टॉप टेन स्टूडेंट्स की देखी जायेगी उत्तर पुस्तिका
इंटर साइंस का टॉप टेन का लिस्ट पूरे प्रदेश से तैयार किया जाता है. टॉपर लिस्ट में जिन स्टूडेंट्स का नाम शामिल होगा. उस स्टूडेंट्स के उत्तर पुस्तिका को उस मूल्यांकन केंद्र से मंगवाया जायेगा जहां पर कॉपी जांच हुई होगी. काउंसिल मे सारे उत्तर पुस्तिका को मंगवाया जायेगा. इसके बाद टॉप टेन लिस्ट में शामिल तमाम स्टूडेंट्स के अंकों का मिलान किया जायेगा. इसमें देखा जायेगा कि कहीं अंक अधिक या कम तो नहीं दे दिया गया है. टॉप टेन लिस्ट में आगे पीछे तो स्टूडेंट्स शामिल नहीं हो रहा है. सारे विषयों के अंकों का पूरी तरह से मिलान किया जायेगा. अगर जरूरत पड़ेगी तो टॉपर लिस्ट में परिवर्तन भी किया जा सकता है.
- एक विषय में कम और सारे विषय में अधिक अंक वाले कॉपी पर रखी जायेगी नजर
मार्क्‍स फाइल तैयार होने के बाद उसे स्टूडेंट्स के रिजल्ट को भी दुबारा जांचा जायेगा जिसमें स्टूडेंटस को चार विषयों में अच्छे अंक और एक विषय में फेल कर दिया गया हो. इंटर काउंसिल के सूत्रों की माने तो कई बार स्क्रूटनी में ऐसे स्टूडेंटस आवेदन देते है जिन्हें दो या तीन विषयों में अच्छे अंक आते है, लेकिन एक विषय में वो फेल कर जाते है या उन्हें कम अंक प्राप्त होता है. ऐसे मामलों को भी रिजल्ट निकालने से पहले ही देखा जायेगा. सूत्रों की माने तो मार्क्‍स फाइल तैयार होने के साथ एक ऐसा लिस्ट भी तैयार किया जायेगा जिसमें स्टूडेंट्स के पांचों विषयों के अंकों में अंतर होगा. ऐसे स्टूडेट्स के उत्तर पुस्तिका की भी दुबारा रिव्यू किया जायेगा.
- मार्क्‍स फाइल बनने के बाद तैयार होगा टॉपर लिस्ट
इंटर के रिजल्ट का मार्क्‍स फाइल तैयार किया जा रहा है. मार्क्‍स फाइल के अंतर्गत छात्रों के कुल अंक, प्रैक्टिकल अंक, थ्योरी अंकों आदि का ख्याल रखा जाता है. हर छात्र के अंकों को उनके रॉल नंबर और रॉल कोड के साथ एरेंज किया जा रहा हैं. इस मार्क्‍स फाइल पर छात्र का मार्क्‍स सीट भी तैयार किया जाता है. जो रिजल्ट घोषणा के बाद छात्रों को दी जाती है. काउंसिल सूत्रों की माने तो मार्क्‍स फाइल में ही गड़बड़ियों को इस बार सही किया जायेगा. इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गयी है.

कोट
इस बार रिजल्ट निकालने से पहले टॉपर लिस्ट की पूरी जांच की जायेगी. जो भी टॉपर लिस्ट तैयार होगा. उसमें जो भी छात्र शामिल किये जायेंगे. उनके अंकों को उनके उत्तर पुस्तिका से दुबारा मिलान किया जायेगा. टॉपर लिस्ट में किसी तरह की गलती ना हो, इसके लिए पूरी सावधानी रखी जायेगी.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति 

कान में स्पीकर लगा कर दे दिया एआइपीएमटी

कान में स्पीकर लगा कर दे दिया एआइपीएमटी

दोनो अभ्यर्थी की फोटो पटना ब्यूरो फोल्डर में रखी हुई हैं 

- सीबीएसइ के पास भेजी गयी जानकारी
- पटना के 1270 एआइपीएमटी के स्टूडेंट्स ने सीबीएसइ को दी जानकारी
संवाददाता, पटना
कान के अंदर वाली जगह पर स्पीकर लगाया. उसके तार (वायर) के साथ छोटे साइज के मोबाइल को बनियान में फिट कर दिया. प्रश्न पत्र सेट की जानकारी बाहर भेजी गयी. उसके बाद उत्तर मोबाइल पर आता रहा और सही उत्तर में टिक लगाते रहे. चोरी का यह हाइटेक फमरूला कहीं और नहीं बल्कि ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट और प्री डेंटल टेस्ट (एआइपीएमटी) 2015  में बड़े पैमाने पर की गयी है. पहली बार ब्लू टूथ से चोरी इस स्तर पर किया गया है. पटना के एआइपीएमटी के अभ्यर्थी ने  इसकी जानकारी सीबीएसइ के पास भेजी हैं.  देश भर  से एआइपीएमटी के अभ्यर्थी से सीबीएसइ को ब्लू टूथ से चोरी होने की जानकारी दी है. इसमें पटना से 1270 अभ्यर्थी भी शामिल है. ये अभ्यर्थी  इ-मेल, स्पीड पोस्ट और रजिस्ट्री के माध्यम से सीबीएसइ को उन सारी बातों की जानकारी दी हैं जिसे अभ्यर्थी ने एआइपीएमटी की परीक्षा में देखा और जाना.  
- ऑटोमेटिक करता है काम 
ब्लू टूथ डिवाइस पूरी तरह से ऑटोमेटिक होता हैं. स्पीकर में मैगनेट लगा होता हो आवाज को तुरंत पकड़ लेता है. इससे एक हल्का आवाज भी काफी होती है. इस बार जिस ब्लू टूथ डिवाइस का उपयोग किया है, वह काफी हाइटेक लेवल का था. अभ्यर्थी रोहित कुमार ने बताया कि कान में एक छोटा सा स्पीकर लगा होता है. उसके तार बनियान में लगे होते है. तार के साथ ही एक माइक्रो मोबाइल होता है. यह मोबाइल आवाज को कैच करता है. जब परीक्षा शुरू हुआ तो बस सेट के नंबर की जानकारी दे दी गयी. इसके बाद स्पीकर के माध्यम से प्रश्न के नंबर के साथ उसके उत्तर आते रहे और टिक लगाते रहें. इसमें परीक्षा देते हुए अभ्यर्थी को बोलने की जरूरत नहीं होती है. इस बार एआइपीएमटी की परीक्षा में इसी डिवाइस का उपयोग बिहार में पटना के साथ गया और मुजफ्फरपुर में किया गया. तीन घंटे के एआइपीएमटी की परीक्षा में प्रश्न पत्र के चार सेट होते है. सेट नंबर इ, एफ, जी एच नाम के इस सेट में प्रश्न तो एक जैसा होता है, लेकिन प्रश्नों की नंबरिंग अलग-अलग होती है. सूत्रों की माने तो प्रश्न पत्र मिलते ही चोरी की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. पहले सेट नंबर की जानकारी बाहर भेजी गयी और इसके बाद नकल शुरू हो गया.  
- सीबीएसइ ने नकल होने से किया इंकार
एआइपीएमटी की परीक्षा में बड़े स्तर पर ब्लू टूथ के माध्यम से नकल और चोरी की बातें सामने आयी है. बिहार के अलावा बंगाल, झारखंड, छतीसगढ़, हरियाणा, दिल्ली आदि जगहों पर एआइपीएमटी की परीक्षा में चोरी हुई. इसकी जानकारी भी सीबीएसइ को दिया गया है. लेकिन शुक्रवार को सीबीएसइ के एग्जामिनेशन कंट्रोलर केके चौधरी ने एआइपीएमटी की परीक्षा में किसी भी तरह के नकल होने से इंकार किया है. केके चौधरी ने बताया कि एआइपीएमटी की परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक नहीं हुआ था. परीक्षा फेयर रहा. परीक्षा के पहले और बाद की पूरी जांच की गयी है. लेकिन सारी अफवाहें है ं. 

अभी तक इस तरह से ब्लू टूथ इंस्ट्रमेंट का विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा में होता रहा है उपयोग 
-  ब्लू टूथ वॉच विद इयरपीस 
-  ब्लू टूथ नेक इयरपीस सेट
-  ब्लू टूथ शर्ट इयरपीस सेट
-  इयरपीस ब्लूटूथ पेन सेट
-  ब्लू टूथ मैगनेटिक इयरपीस सेट
-  ब्लू टूथ जैकेट इयरपीस सेट
-  वॉकी टॉकी इयरपीस सेट
- इयरपीस ब्लू टूथ कैप सेट
- ब्लू टूथ इरेजर इयरपीस सेट
- ब्लू टूथ ताबीज इयरपीस सेट
- ब्लू टूथ मोबाइल वॉच इयरपीस सेट 

परीक्षा केंद्र को सुरक्षित किया जायें तो नहीं होगी चोरी की घटनाएं. देश भर से अभ्यर्थी ने सीबीएसइ को भेजा सजेशन
- सभी परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल जैमर लगाया जायें. जिससे ब्लू टूथ को रोका जा सके
- सभी परीक्षा केंद्रों पर डिटेक्टर लगाया जायें. जिससे सभी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के ऑन और ऑफ होने की जानकारी मिलती रहेगी 
- हैंड मेड मेटल डिटेक्टर से सभी परीक्षार्थी को जांच किया जायें 
- सीसी टीवी कैमरा लगाया जायें 
- परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थी के शर्ट कॉलर, ऑमर्स, जूता, घड़ी आदि पहन कर आने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी जायें 
- परीक्षार्थी को परीक्षा के दो घंटे पहले बुलाया जायें. जिससे परीक्षार्थी की जांच अच्छे से किया जा सके 
- परीक्षार्थी किसी भी तरह के आभूषण (हेयर पीन, नोज पीन, रिंग, नेक रिंग आदि) पहन कर आने पर पाबंदी लगे 

अभ्यर्थी की बातें 
 परीक्षा देने के लिए हॉल में बस एडमिट कार्ड लेकर जाना था. लेकिन परीक्षा हॉल में जाने से पहले किसी तरह की चेकिंग नहीं की गयी. मोबाइल और लैपटॉप बैग लेकर भी काफी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा हॉल में गये थे. ब्लू टूथ से चोरी भी चल रही थी. लेकिन उन्हें कोई रोक नहीं रहा था. 
दशरथ कुमार, एआइपीएमटी के अभ्यर्थी  

एआइपीएमटी की परीक्षा कैंसिल होना चाहिए. हमने कई साक्ष्य सीबीएसइ को भेजा है. किस  तरह से पटना के कई परीक्षा केंद्र पर ब्लू टूथ से चोरी किया गया है. प्रश्न पत्र लीक कर दिया गया था. परीक्षा के एक घंटे पहले 8.30 बजे प्रश्न पत्र बाहर चला गया था. ये सारी जानकारी सीबीएसइ को दी गयी है. परीक्षा कैंसिल होना चाहिए. 
मून्ना कुमार, एआइपीएमटी के अभ्यर्थी