Friday, March 18, 2016

खुद की जिंदगी से लिया सीख और बना डाला फुटबाॅल टीम

- दस गांवों में दस फुटबॉल टीम तैयार कर चुकी है प्रतिमा
संवाददाता, पटना

अपनी जिंदगी को बनाया किताब, उसे पढ़ा और सीख लेकर चल पड़ी बदलाव करने को. खुद से बस एक कंमिटमेंट किया कि जो उसके साथ हुआ, वो दूसरी बेटियों के साथ नहीं होने देगी. चली तो थी अकेले, बढ़ती गयी और कारवां तैयार होता चला गया. प्रतिमा ने अपनी लड़ाई शुरू तो किया अकेले, लेकिन आज वो छह सौ लड़कियों को आत्मनिर्भर बना चुकी और आगे उनका प्रयास चल रहा है. परसा बाजार की रहने वाले प्रतिमा की शादी कम उम्र में कर दिया गया था. इससे प्रतिमा शारीरिक रूप से काफी परेशान रही. प्रतिमा ने बताया कि हमारे समाज में आज भी बाल विवाह या कम उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती है. इससे काफी परेशानी होती है. ऐसे में शादी के लिए रोका नहीं जा सकता है. ऐसे में फुटबाल के माध्यम से खेल और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकार के बारे अवेयर करना शुरू किया. शुरूआत में तो मै अकेले ही सारा कुछ करती थी. लेकिन 2013 से इंटरनेशनल संस्था क्रिया की मदद मिल रही है. अभी हमारी आठ लोगों की टीम है. 
- फुटबाल की दस टीम बन कर है तैयार
प्रतिमा के प्रयास से आज दस गांव में दस फुटबाल टीम तैयार हो चुका है. इसमें से कई टीम को दिल्ली के कैंप में ले जाने की तैयारी चल रही है.  दस गांव में सकरौंचा, ढिवड़ा, लालकोठी, मुरगिराचक, जानीपुर, नगमा, वधनपुरा, मोहली, सीरापर, अधपा शामिल है. ये सारे गांव पटना के परसा बाजार से शुरू होता है. प्रतिमा ने बताया कि इन दस गांवों में दस टीम तैयार हो चुका है. इन तमाम टीमाें में 95 फीसदी ऐसी लड़कियां है जो फुटबाल के बारे में जानती तक नहीं थी. इन्हें फुटबाल के बारे में बताना और फिर फुटबाल खेलना सीखया जाता है. फुटबाल खेलने से इन लड़कियों के बीच आत्मविश्वास बढ़ता है. ये पढ़ना और खेल मे आगे बढ़ना चाहती है. प्रतिमा ने बताया कि गांव स्तर पर फुटबाल की दस टीमों के बीच प्रतियोगिता करवाने की तैयारी चल रही है. इसके बाद जिला स्तर पर आयोजित की जायेगी. - 2008 से शुरू किया अभियान को पहुंचा चुकी है 25 गांवों तक
प्रतिमा का अपना अभियान 2008 में शुरू किया. गौवर ग्रामीण महिला विकास मंच अपने संस्था का नाम रखा. इसके बाद हर गांव में जाकर लोगों को अवेयर करना शुरू किया. कम उम्र में शादी होने से लड़कियों को किस तरह की परेशानी से गुजरना पड़ता है, इसकी जानकारी दिया. गांवों में महिलाओं, पुरूष आदि को अवेयर करने के बाद उस गांव के बेटियों को आपस में जोड़ना शुरू किया. बताती है प्रतिमा कि शुरूआत में तो कोई तैयार नहीं होता है. लेकिन समझाने और कैंप आदि लगाने से लोगों को समझ मे आया. अब लोग बेटियों को पढ़ाना चाहते है. अभी 25 गांव में काम चल रहा है.
- 100 से अधिक बाल विवाह को रोकने में हुई सफल
प्रतिमा के इस फुटबाल टीम का एेसा असर हुआ है कि इन गांवों में अब बाल विवाह या कम उम्र में शादी का प्रचलन खत्म होता जा रहा है. बेटियां पढ़ना चाहती है और अभिभावक अब पढ़ाना चाहते है. ज्ञात हो कि पटना के आसपास के इन गांवों में बाल विवाह का प्रचलन काफी है. बेटियों 12 साल की होती नहीं है कि उनकी शादी कर दी जाती है. ऐसे में फुटबाल खेलना बेटियों के लिए वरदान साबित हो रहा है. प्रतिमा ने बताया कि अभी तक सौ से अधिक बाल विवाह को रोका गया है. अब लड़कियां खुद बोलती है कि वो पढ़ना चाहती है. अभी शादी नहीं करेगी.

Sunday, March 13, 2016

आत्मविश्वास से कैंसर काे दिया मात, आज दे रही साठ महिलाओं को ट्रेनिंग



- हैंड मेड स्वेटर की ट्रेनिंग दे कर पुरानी परंपरा को बचाने का कर रही काम
संवाददाता, पटना

अगर आत्मविश्वास हो तो हम कोई भी जंग जीत सकते है. हर मुश्किल आसान हो जाती है अगर आपमें आत्मविश्वास हो. आत्मविश्वास को बनाये रखना ही जिंदगी जीने का कला है. अपनी लाइफ को इस एक पंक्ति के पर ऐसा आत्मविश्वास से रखा कि कैंसर जैसी बीमारी को मात दे दिया. पटना की गर्दनीबाग की रहने वाली शिप्रा चंद्रा की 20 सालों तक कैंसर से जुझती रही. लेकिन हार नहीं माना. कैंसर होने के बावजूद वो अपने काम में लगी रही. कैंसर होने के कारण नौकरी छूट गयी. फिर घर से ही अपना रोजगार शुरू किया. शिप्रा चंद्रा को स्वेटर बनाना काफी पसंद था. ऐसे में वो स्वेटर बनाने का ऑडर लेना शुरू किया. आज शिप्रा चंद्रा ना सिर्फ स्वेटर बनाती है, बल्कि ट्रेनिंग भी देती है.
- मशीन के स्वेटर को लोगों ने नहीं किया पसंद      
शिप्रा चंद्रा ने बताया कि कैंसर होने से मै स्वेटर बिन नहीं पाती थी. ऐसे में मै मशीन से स्वेटर बनाकर देने लगी. शुरूआत में तो मशीन के स्वेटर के लिए आर्डर आयें, लेकिन बाद में लोगों ने उसे नकार दिया. इसके बाद मै दुबारा हाथ से ही स्वेटर बनाने लगी. बीमार होने के कारण जितना आर्डर आता था, उसे पूरा नहीं कर पाती थी. ऐसे में महिलाओं को ट्रेनिंग देने लगी. इसके लिए मै सैलरी भी देती हूं. पटना वीमेंस कॉलेज से होमसाइंस में ग्रेजुएशन कर चुकी शिप्रा चंद्रा ने बताया कि कैंसर से 20 सालों तक लड़ी हूं. लेकिन मैने उसे मात दे दिया. अब ठीक हूं. इस बीच मैने अपना आत्मविशवास बनाये रखा. अपना काम जारी रखा. मैने इस काम को लगभग 25 सालों पहले शुरू किया था. 70 साल की शिप्रा चंद्रा को अब दिखायी भी कम देता है, लेकिन फिर भी इस काम को उसी आत्मविश्वास से कर रही है जब उन्हाेंने इसकी शुरूआत की थी.
- 60 महिलाओं को देती है ट्रेनिंग
खुद के रोजगार करने के अलावा शिप्रा चंद्रा दूसरों के लिए भी अब रोजगार की माध्यम बन रही है. विलुप्त हो रहे स्वेटर बनाने की कला को शिप्रा चंद्रा ने दुबारा लोगों के पास ला रही है. अभी 60 महिलाओं को ट्रेनिंग दे रही है. शिप्रा चंद्रा के पास से ट्रेनिंग लेकर ये महिलाएं भी दूसरों से स्वेटर का आर्डर ले रही है. शिप्रा चंद्रा ने बताया कि हमारे पास हर साइज का स्वेटर मिलता है. जीरो साइज से लेकर 46 साइज तक का स्वेटर हम बनाते है. घर से ही यह सारा काम होता है. पूरे बिहार से हमारे पास स्वेटर का आर्डर आता है.
- कस्टमर से केवल लेते है कलर और साइज
शिप्रा चंद्रा ने बताया कि किसी भी कस्टमर से हम केवल आर्डर लेते है. आर्डर लेते समय ही स्वेटर का कलर और साइज लेते है. ऊन लेकर हम स्वेटर नहीं बनाते है. ऊन हम अपनी ओर से देते है. कलर कांबिनेशन आदि कस्टमर से लेते है. इसके बाद स्वेटर डिलिबरी का समय देते है. जब स्वेटर तैयार हो जाता है तो कस्टमर खुद ले जाते है. मेरा कोई दुकान नहीं है. 

बचपन के मूर्ति बनाने के शौक को बना डाला अपना रोजगार

 अपने हॉवी से रानी गुप्ता का हो रहा देश विदेश में नाम 

संवाददाता, पटना
कभी-कभी हम जो करना चाहते है, वो नहीं कर पाते है. ऐसे में हम मायूस हो कर बैठ जाते है. लेकिन कुछ ऐसे भी लोग है जिन्हें एक में मौका नहीं मिलता है तो वो दूसरी चीजों को अपना शौक या हॉवी बना डालते है. कुछ ऐसे ही में ही शामिल है रानी गुप्ता. कोलकाता की रहने वाली रानी गुप्ता को उनकी दादी ने कॉलेज की पढ़ाई नहीं करने दिया. 11वीं तक ही अपनी पढ़ाई कर पायी रानी गुप्ता बैंक अधिकारी बनना चाहती थी. पढा़ई उनकी शौक था. लेकिन बेटी होने के कारण रानी गुप्ता आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर पायी. ऐसे में निराश होने के बदले रानी जी ने अपने शौक को ही बदल डाला. वो अलग-अलग क्रिटेविट वर्क करने लगी. आज रानी गुप्ता गिफ्ट पैकिंग से लेकर कुकिंग और हर तरह की मेकिंग का काम करती है.
- बचपन के शौक को दिया प्रोफेशनल लुक
बचपन में हर लड़की मिट्टी या प्लास्टिक के मूर्तियो से खेलती है. बड़े होने पर वो खेल पीछे छूट जाता है. लेकिन रानी गुप्ता ने बचपन के इस शौक को अपना प्रोफेशनल लुक दे डाला है. आज वो अपनी मुर्तियों पर इनोवेशन करती है. रानी गुप्ता ने बताया कि बेसिक रूप से वो गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति बनाती है. लेकिन अगर कोई आर्डर करता है तो दूसरी मूर्ति भी बनाती हूं. दीपावली को लेकर साल भर आर्डर भी आता रहता है. सीजन के अनुसार गणेश और लक्ष्मी के ड्रेस आदि में चेंज भी करती हूं. जैसे इस साल गणेश जी पर माेतियों की ज्वेलरी से सजाया गया तो वहीं माता लक्ष्मी को बनारसी साड़ी का लुक दिया गया. ऐसे हर बार कुछ ना कुछ इनोवेशन करती हूं.
- विदेशाें तक जाता है रानी की गणेश लक्ष्मी की मूर्ति
रानी गुप्ता की मूर्तियां ना सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी काफी लोकप्रिय है. पटना, गया, दिल्ली, कोलकाता के मार्केट के अलावा अमेरिका से भी उन्हें मूर्ति बनाने के आर्डर आते है. रानी गुप्ता बताती है कि मैने कोई दुकान नहीं खोला है. दो हजार की पू्ंजी लगा कर घर में ही मूर्ति बनाने का काम करती हूं. घर में ही आर्डर आते है. अब तो ऑन लाइन आर्डर लेती हूं. बाहर रहने वाले लोगों को स्काइप पर ऑन लाइन मूर्ति दिखाती हूं. जिन्हें पसंद आ जाता है, उसी मूर्ति को उन्हें भेज देती हूं. दीपावली के लिए ऑडर तीन महीने पहले से ही आने लगता है.
- मां का मिला पूरा सहयोग
शादी जल्दी हो जाने से रानी गुप्ता को परिवार की जिम्मेवारी आ गयी. कोलकाता से पटना आ गयी. नया शहर होने से वो उन्हें कुछ समझ में नहीं आता था कि कहां से और कैसे कोई काम शुरू करे. ऐसे में उन्हें अपनी मां बेला गुप्ता का काफी सहयोग मिला. रानी गुप्ता बताती है कि कोलकाता से सारा मेटेरियल खरीद कर मां मुझे पटना भेजती थी. उन्हें रॉ मेटेरियल खरीदने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता था. ऐसे में मै अपना काम अच्छे से शुरू कर पायी. शुरूआत में 30 मूर्ति से अधिक नहीं बना पाती थी. लेकिन अब ढाई सौ से तीन सौ तक मूर्ति बना लेती हूं.

Friday, March 11, 2016

क्रियेटिव वर्क ने बना दिया समाज में अलग पहचान

 विलुप्त हो रही बिहार की परंपरागत कला को सुमिता प्रकाश दे रही नया रूप

संवाददाता, पटनाजहां चाह है वहां राह है. अगर कुछ करने की चाह हो तो हम उसके लिए अपना रास्ता बना ही लेते है. अब चाहे जीवन में कितनी भी परेशानियां क्यूं ना आ जायें. कुछ ऐसा ही रास्ता अपने लिए सुमिता प्रकाश ने भी बनाया. बचपन से ही कुछ अलग करने की चाह ने आज सुमिता प्रकाश को समाज में अलग पहचान दिलायी है. हैंड वर्क में अलग-अलग तरीके से कई लोग कर रहे है, लेकिन सभी के बीच में अपनी कला को अलग पहचान देने का काम सुमिता प्रकाश ने किया है. तभी तो राज्य स्तर से लेकर नेशनल और फिर इंटरनेशनल लेवल पर सुमिता जी क्रियेटिव वर्क के कारण ही जानी जाती है.
- परंपरागत कला से लेकर कैनवास पर आज का पर्व त्योहार तक शामिल शादी के बाद बच्चे और फिर परिवार की देखभाल. इन सभी के बीच में सुमिता प्रकाश अपना वर्क के लिए समय नहीं निकाल पायी. लेकिन इसी बीच ससुर के कहने पर अपना काम शुरू किया. टेक्सटाइल डिजाइनिंग को कोर्स करके ब्लाॅक पेटिंग, स्क्रीन पेटिंग, मंजूषा ब्लॉक प्रिंट, एप्लिक आदि का काम करती हैं. सुमिता प्रकाश के पेटिंग की खास बात यह है कि विलुप्त हो रहे बिहार की कला को वो किसी ना किसी रूप में अपने पेटिंग में शामिल करती है. इसके अलावा दीपावली, होली, छठ, दशहरा आदि पर्व के हर मूवमेंट को अपने कैनवास लेती है. सुमिता प्रकाश ने बताया कि आरा की एक चुनरी कला है. जो अब विलुप्त हो रहा है. इस कला को मै अभी कुर्ते आदि में डाल कर नया लुक दे रही है. लोगों को पसंद भी आ रहा है. उसी तरह कोई भी पर्व होता है तो उसी के अनुसार डिजाइन करती हूं. इससे लोगों को फेस्टिवल च्वाइस का समान मिल जाता है.
- राज्य पुरस्कार से लेकर इंटरनेशनल ट्रेड फेयर तक सुमिता प्रकाश प्रोडक्शन से लेकर ट्रेनिंग देने का काम भी करती है. अभी तक 15 सौ से अधिक लड़कियों को ट्रेनिंग दे चुकी है. उद्योग विभाग, बिहार सरकार से 2013 में ब्लॉक प्रिटिंग के लिए राज्य पुरस्कार मिला. इसके अलावा जनवरी में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन में बिहार को रिप्रेजेंट कर चुकी है. इसके साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला में भी सुमिता प्रकाश जा चुकी है. इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में 2010 से 2012 तक जाने का माैका सुमिता प्रकाश को देश की ओर से मिला है.
- 15 हजार से शुरू किया छह लाख की हो रही कमाई सुमिता प्रकाश ने अपनी शुरूआत बहुत ही छोटे स्तर पर किया था. घर में ही रोजगार का माध्यम बना कर ब्लॉक प्रिंटिंग का काम शुरू किया. कुछ दिनो के बाद घर में ही अपना स्टॉल खोल लिया. आज कलाकार दुकानों में सामन लेने को जाते है. लेकिन सुमिता प्रकाश के कला के लोग ऐसे दिवाने है कि उनके घर ही लोग समान लेने पहुंच जाते है. सुमिता प्रकाश ने इसकी शुरूआत 15 हजार पूंजी लगा कर किया था. अब सालाना 5 से छह लाख रूपये की आमदनी हो रही है. सुमिता प्रकाश बताती है कि मै उत्सव आदि में शामिल होती हूं. लेकिन अगर किसी को मेरा सामान लेना होता है तो वो मेरे घर पर ही आकर लेते है. 

क्रियेटिव वर्क ने बना दिया समाज में अलग पहचान

 विलुप्त हो रही बिहार की परंपरागत कला को सुमिता प्रकाश दे रही नया रूप

संवाददाता, पटनाजहां चाह है वहां राह है. अगर कुछ करने की चाह हो तो हम उसके लिए अपना रास्ता बना ही लेते है. अब चाहे जीवन में कितनी भी परेशानियां क्यूं ना आ जायें. कुछ ऐसा ही रास्ता अपने लिए सुमिता प्रकाश ने भी बनाया. बचपन से ही कुछ अलग करने की चाह ने आज सुमिता प्रकाश को समाज में अलग पहचान दिलायी है. हैंड वर्क में अलग-अलग तरीके से कई लोग कर रहे है, लेकिन सभी के बीच में अपनी कला को अलग पहचान देने का काम सुमिता प्रकाश ने किया है. तभी तो राज्य स्तर से लेकर नेशनल और फिर इंटरनेशनल लेवल पर सुमिता जी क्रियेटिव वर्क के कारण ही जानी जाती है.
- परंपरागत कला से लेकर कैनवास पर आज का पर्व त्योहार तक शामिल शादी के बाद बच्चे और फिर परिवार की देखभाल. इन सभी के बीच में सुमिता प्रकाश अपना वर्क के लिए समय नहीं निकाल पायी. लेकिन इसी बीच ससुर के कहने पर अपना काम शुरू किया. टेक्सटाइल डिजाइनिंग को कोर्स करके ब्लाॅक पेटिंग, स्क्रीन पेटिंग, मंजूषा ब्लॉक प्रिंट, एप्लिक आदि का काम करती हैं. सुमिता प्रकाश के पेटिंग की खास बात यह है कि विलुप्त हो रहे बिहार की कला को वो किसी ना किसी रूप में अपने पेटिंग में शामिल करती है. इसके अलावा दीपावली, होली, छठ, दशहरा आदि पर्व के हर मूवमेंट को अपने कैनवास लेती है. सुमिता प्रकाश ने बताया कि आरा की एक चुनरी कला है. जो अब विलुप्त हो रहा है. इस कला को मै अभी कुर्ते आदि में डाल कर नया लुक दे रही है. लोगों को पसंद भी आ रहा है. उसी तरह कोई भी पर्व होता है तो उसी के अनुसार डिजाइन करती हूं. इससे लोगों को फेस्टिवल च्वाइस का समान मिल जाता है.
- राज्य पुरस्कार से लेकर इंटरनेशनल ट्रेड फेयर तक सुमिता प्रकाश प्रोडक्शन से लेकर ट्रेनिंग देने का काम भी करती है. अभी तक 15 सौ से अधिक लड़कियों को ट्रेनिंग दे चुकी है. उद्योग विभाग, बिहार सरकार से 2013 में ब्लॉक प्रिटिंग के लिए राज्य पुरस्कार मिला. इसके अलावा जनवरी में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन में बिहार को रिप्रेजेंट कर चुकी है. इसके साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला में भी सुमिता प्रकाश जा चुकी है. इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में 2010 से 2012 तक जाने का माैका सुमिता प्रकाश को देश की ओर से मिला है.
- 15 हजार से शुरू किया छह लाख की हो रही कमाई सुमिता प्रकाश ने अपनी शुरूआत बहुत ही छोटे स्तर पर किया था. घर में ही रोजगार का माध्यम बना कर ब्लॉक प्रिंटिंग का काम शुरू किया. कुछ दिनो के बाद घर में ही अपना स्टॉल खोल लिया. आज कलाकार दुकानों में सामन लेने को जाते है. लेकिन सुमिता प्रकाश के कला के लोग ऐसे दिवाने है कि उनके घर ही लोग समान लेने पहुंच जाते है. सुमिता प्रकाश ने इसकी शुरूआत 15 हजार पूंजी लगा कर किया था. अब सालाना 5 से छह लाख रूपये की आमदनी हो रही है. सुमिता प्रकाश बताती है कि मै उत्सव आदि में शामिल होती हूं. लेकिन अगर किसी को मेरा सामान लेना होता है तो वो मेरे घर पर ही आकर लेते है. 

सीबीएसइ ने दिया आठ मिशन, हर स्कूल को 2022 तक करना है पूरा

सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को दिया मिशन स्टेटमेंट

संवाददाता, पटनास्कूल तभी तक सही है जब तक वहां पर स्टूडेंट और टीचर्स के लिए वातावरण सही हो. स्कूल में स्टूडेंट्स को आेवल ऑल डेवलपमेंट हो, इसके लिए सीबीएसइ ने स्कूलों को अगले तीन से पांच साल तक का टास्क दिया है. इस टास्क को स्कूल अपना मिशन बना कर अागे काम करें. बोर्ड की ओर से आठ मिशन स्कूलो को पूरा करने के लिए दिया है. इन सारे मिशन को स्कूलों को अपने वेबसाइट के होम पेज पर लगाना है. इसमें जिस तरह से डेवलपमेंट होगा, इसकी जानकारी स्कूल को समय-समय पर देना होगा.
- 75वां सालगिरह बनेगा देश का सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को 2022 तक मिशन पूरा करने को कहा है. स्कूल खुलने से लेकर अब तक स्कूल ने स्टूडेंट्स और टीचर्स के लिए क्या सब किया. सीबीएसइ के अनुसार 2022 में देश की स्वतंत्रता का 75वां सालगिरह होगा. इससे पहले सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूल को मिशन पूरा कर लेना है. मिशन स्टेटमेंट के लिए स्कूलों को फर्स्ट स्टेज का काम पूरा करने के लिए जून का प्रथम सप्ताह तक का समय दिया गया है.
इन मिशन को करना है पूरा - हर स्कूल कैंपस को स्टूडेंट के लिए फ्रेडली बनाना है. स्कूल का वातावरण ऐसा हो जिससे स्कूल आने में स्टूडेंट डरें नहीं. अगले तीन साल में 60 से 80 फीसदी और 2022 तक 100 फीसदी एटेंडेंस हो जायें
- हर साल स्कूलों को एटेंडेंस बढ़ाना होगा. हर साल 20 फीसदी एटेंडेंस की वृद्धि होनी चाहिए. स्कूल में साइंस और मैथ वीक, रिडिंग वीक, रिडिंग क्लब आदि होना चाहिए - स्कूल अपने आस के इलाकों में 100 फीसदी सारक्षता का प्राप्त करें. आस पास रहने वाले तमाम बच्चों को सारक्षता से जोड़े. इसके लिए स्कूल टीचर्स, स्टूडेंट्स की ग्रुप की स्कूल मैनेजमेंट कमिटी बनायें.
- हर स्कूल को पौधारोपन करना है. 2022 तक तमाम स्कूलों को अपने एरिया के आस पास दो हजार पेड़ लगाना होगा - स्कूल में टीचिंग और लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए टीचर्स और स्टूडेंट्स के लिए बेसिक फैसिलिटी को अगले तीन साल में पूरा करें
- अगले पांच साल में स्कूल में अलग-अलग तरीके के एक्टिविटी करवायें - अगले तीन साल में हर स्कूल हर स्टूडेट का हेल्थ प्रोफाइल बनायें. इससे स्टूडेंट्स के हेल्थ संबंधित सारी जानकारी स्कूल के पास मौजूद रहेगा. इसके अलावा स्कूल में हेल्थ सेंटर बनाया जायें
- स्कील डेवलपमेंट के लिए आठवीं तक के स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग दी जायें. 

परीक्षा में अफवाह फैलाने वाले पर होगी कानूनी कार्रवाई, चिट पुर्जा मिला तो होंगे निष्कासित

 डेढ़ घंटे पहले खुलेगा परीक्षा केंद्र, होगी परीक्षार्थी की पूरी जांच

संवाददाता, पटनामैट्रिक की परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्र आउट होने या लीक होने की अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जायेगी. अगर ऐसा करते हुए कोई पकड़ में आयेगा तो उस पर अफवाह फैलाने और परीक्षा को बाधित करने को लेकर कानूनी कार्रवाई की जायेगी. परीक्षा के दौरान केंद्र पर मौजूद नोडल अफसरों को इस पर निगाह रखने के लिए कहा गया है. इस बार परीक्षा केंद्र को डेढ़ घंटे पहले ही खोला जायेगा. इस दौरान तमाम परीक्षार्थी की तीन जगहों पर जांच की जायेगी. केंद्र के मुख्य द्वार के अलावा क्लास रूम के अंदर जाने के पहले और सीट पर बैठने के बाद परीक्षार्थी की पूरी जांच होगी. जांच के दौरान अगर किसी परीक्षार्थी के पास चिट पुर्जा पाया गया तो पहली बार चिट लेकर उसे छोड़ दिया जायेगा. अगर वहीं परीक्षार्थी के पास दूसरे दिन भी चिट पकड़े जायेगा तो उसे परीक्षा से निष्कासित कर दिया जायेगा. इन बातों की जानकारी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष प्रो. लालकेश्वर प्रसाद सिंह, सचिव हरिहर नाथ झा और संयुक्त सचिव देवशील ने संयुक्त रूप से गुरूवार को समिति कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान दिया.
- 86 हजार छात्र और 61 हजार बढ़ी छात्राएं शुक्रवार से मैट्रिक की परीक्षा शुरू हो रही है. परीक्षा के पहले दिन अंग्रेजी विषय की परीक्षा ली जायेगी. परीक्षा दो पाली में होगी. प्रथम पाली सुबह 9.30 से 12.45 तक और द्वितीय पाली 2 बजे से 5.15 बजे तक आयोजित होगी. इस बार पिछले साल की तुलना में एक लाख 47 हजार 289 परीक्षार्थी अधिक शामिल होंगे. इसमें 86 हजार 234 छात्र और 61 हजार 055 अधिक छात्राएं शामिल होंगी. 11 मार्च से 18 मार्च तक मैट्रिक की परीक्षा चलेगी. किसी भी परीक्षा केंद्र पर अगर टेंट में परीक्षा ली जायेगी तो इसका कारण बताना होगा.
- एक घंटे पहले पहुंचे केंद्र पर समिति द्वारा परीक्षार्थी को परीक्षा केंद्र पर एक घंटे पहले पहुंचने की हिदायत दी गयी है. जांच प्रक्रिया में सहयाेग देने के लिए परीक्षार्थी को केंद्र पर जल्दी आने को कहा गया है. एक ही समय पर परीक्षार्थी के अाने से केंद्र पर भीड़ जमा हो जायेगी. हर परीक्षार्थी का तीन बार जांच किया जायेगा. इसमें 15 से 20 मिनट लगेगा. इस कारण परीक्षार्थी को केंद्र पर जल्दी आने को कहा गया है. अभिभावकों को परीक्षा केंद्र से दूर रहने काे कहा गया है.
मैट्रिक परीक्षा एक नजर कुल परीक्षार्थी - 15,73,498
छात्रों की संख्या - 8,53,221छात्राओं की संख्या - 7,20,277
कुल परीक्षा केंद्र - 1309 सबसे अधिक परीक्षार्थी वाला जिला - गया (80373 परीक्षार्थी)
छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा वाला जिला - गया (43350 परीक्षार्थी)छात्राओं की संख्या सबसे ज्यादा वाला जिला - छपरा (37708 परीक्षार्थी)
सबसे अधिक परीक्षा केंद्र वाला जिला - पटना (73 केंद्र)नकल रोकने के लिए हर केंद्र पर होगी ऐसी व्यवस्था
- प्रवेश द्वार को डेढ़ घंटे पहले खोला जायेगा - मजिस्ट्रेट खुद परीक्षार्थी की जांच करेंगे
- सेंटर के बाहर सीसी टीवी कैमरे लगे होंगे. अभिभावकों पर सीसी टीवी कैमरा से नजर रखी जायेगी- परीक्षा केंद्र पर धारा 144 लगायी जायेगी
- विडियोग्राफर को भी मोबाइल नहीं रखने को कहा गया है. परीक्षा के दौरान विडियोग्राफर मोबाइल नहीं रखेंगे - परीक्षार्थी के साथ वीक्षक, स्कूल कर्मी भी मोबाइल नहीं रख सकते है. परीक्षार्थी के पास मोबाइल पाया जायेगा तो वो दो साल के लिए परीक्षा से निष्कासित हो जायेंगे.
अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखी जायेगी - केंद्र पर उपद्रव मचाने की कोशिश तथा वीक्षकों एवं केंद्राधीक्षक के कार्य में बाधा देने पर दो साल के लिए निष्कासित कर दिया जायेगा
- मुन्ना भाई बन कर परीक्षा देने पर दो साल के लिए निष्कासित कर दिये जायेंगे - मोबाइल के अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामान पाया गया तो एक साल के लिए परीक्षा से निष्कासित कर दिये जायेंगे 

तीन सेक्शन चलाने का मिला था आदेश, चला रहे पांच सेक्शन

 सीबीएसइ विजिलेंस ने बिहार के छह स्कूलों को दिया नोटिस

संवाददाता, पटनास्कूल में कमरे नहीं, टीचर्स की है कमी, एक सेक्शन में 40 से अधिक स्टूडेंट, 11वीं और 12वीं में इंफ्रास्ट्रक्चर को देख सीबीएसइ विजिलेंस ने देश भर के 21 स्कूलों को नोटिस दिया था. इसमें बिहार से छह स्कूल शामिल है. 2014 में दिये गये इस नोटिस में विजिलेंस विभाग ने स्कूलों को 9वीं से 12वीं तक के सेक्शन कम करने को कहा था. विजिलेंस विभाग ने इन स्कूलों के लिए सेक्शन को फिक्स कर दिया था. लेकिन अभी भी इन स्कूलों में अपनी मरजी के सेक्शन चलाये जा रहे है. स्कूल के पास इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, लेकिन स्कूल में स्टूडेंट्स की संख्या हर साल बढ़ा दी जा रही है.
- दुबारा नोटिस भेजा गया इन तमाम स्कूलों में एक दो में तो स्थिति थोड़ी सुधरी है. लेकिन सेक्शन में कुछ स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ा दी गयी है. सीबीएसइ के अनुसार 40 स्टूडेंट्स एक सेक्शन में होना चाहिए. लेकिन सेक्शन के मामले में कोई स्कूल सीबीएसइ के नॉमर्स को पूरा नहीं कर रहा है. हर स्कूल में एक सेक्शन चार से पांच स्टूडेंट्स अधिक है. इसको देखते हुए सीबीएसइ विजिलेंस विभाग की ओर से फिर एक बार इन स्कूलों को नोटिस दिया गया है. विजिलेंस ने इसकी जानकारी सीबीएसइ के संबंद्धता विभाग को भी दिया है.
- परीक्षा फॉर्म भराने के समय नहीं हुई कोई जांच सीबीएसइ विजिलेंस की ओर से तो सेक्शन को कम करने का आदेश दो साल पहले दिया गया. लेकिन सीबीएसइ रीजनल ऑफिस की ओर से परीक्षा फार्म भराने के समय इस बात की जांच नहीं किया गया. जितने सेक्शन का परमिशन दिया गया था, उतने ही स्टूडेंट्स के परीक्षा फार्म भराये जाने थे, लेकिन सीबीएसइ द्वारा सारे स्टूडेंट्स को 12वीं का परीक्षा फार्म भरने दिया गया. सीबीएसइ विजिलेंस ने संबंद्धता को इसकी जानकारी दे दिया है. अब मार्च और अप्रैल में संबंद्धता को लेकर होने वाली जांच में इन बिंदुओ पर जांच हो सकती है.
इन स्कूलों को 11वीं और 12वीं सेक्शन कम करने का दिया गया था आदेश स्कूल                         - फिक्स इतना सेक्शन - चला रहे स्कूल इतना सेक्शन
सेंट माइकल हाई स्कूल, पटना - 5 सेक्शन            - 11वीं में 10 और 12वीं में 11 सेक्शन पटना सेंट्रल स्कूल, जगनपुरा, पटना - 10 सेक्शन - 11वीं में 11 और 12वीं में 10 सेक्शन
डीएवी पब्लिक स्कूल, खगौल - 6 सेक्शन - 11वीं में 12 और 12वीं में 12 सेक्शन जेसस एंड मेरी एकेडमी, दरभंगा - 8 सेक्शन - 11वीं में 10 और 12वीं में 12 सेक्शन
वुडवाइन मॉडर्न स्कूल, दरभंगा - 5 सेक्शन - 11वीं में 5 और 12वीं में 5 सेक्शन सेंट जेवियर्स जूनियर सीनियर स्कूल, मुजफ्फरपुर - 3 सेक्शन - 11वीं में 6 और 12वीं में 7 सेक्शन
नोट - स्कूलों को 11वीं और 12वीं में सेक्शन कम करने को कहा गया था.             

रिजल्ट चाहे जो हो, बच्चों को साथ दे पैरेंट्स

 सीबीएसइ ने अभिभावकों को काउंसेलिंग के दौरान रिजल्ट को लेकर दिये टिप्स

संवाददाता, पटनास्कूल में परीक्षा समाप्त हो चुकी है. अभी तमाम स्कूलों में रिजल्ट का दौर शुरू हो गया है. कुछ स्कूलों ने रिजल्ट निकालना भी शुरू कर दिया है. बारी-बारी से हर क्लासेज का रिजल्ट निकाला जा रहा है. ऐसे में रिजल्ट देखकर बच्चे डिप्रेशन में भी जा रहे है. सीबीएसइ ने स्कूल रिजल्ट को लेकर पैरेंट्स को कई टिप्स दिये है. सीबीएसइ के अनुसार रिजल्ट बोर्ड की हो या स्कूल की, पैरेंट्स को हमेशा बच्चों का साथ देना चाहिए. मार्क्स केवल खुद का आकलन होता है कि आपके बच्चे में कहां पर क्या कमी है. उसे स्टेट्स ना जोड़े. सीबीएसइ के अनुसार कई पैरेंट्स बच्चे के रिजल्ट को खुद की इज्जत और स्टेट्स से जोड़ लेते है. इसका सबसे बुरा असर बच्चों के उपर ही पड़ता है.
- सीबीएसइ ने पैरेंट्स को प्रेशर नहीं बनाने की दी सलाह स्कूल के रिजल्ट को लेकर सीबीएसइ ने पैरेंट्स को प्रेशर नहीं देने की सलाह भी दिया है. सीबीएसइ ने सलाह में कहा है कि पैरेंट्स बच्चे से बहुत ज्यादा एक्सपेक्टेशन रखते है. मगर पैरेंट्स के उम्मीदों को बच्चे खुद पर बोझ मानते है. क्योंकि पढ़ने से अधिक बच्चों के उपर पैरेंट्स को खुश रखने का प्रेशर होता है. इस प्रेशर में भी कई बार उनका एग्जाम बिगड़ता है. रिजल्ट खराब आता है. कई बार तो कुछ बच्चे पढ़ाई में वीक होते है, उन बच्चों पर भी अच्छे मार्क्स लाने का प्रेशर होता है.
इन चीजों पर दे पैरेंट्स ध्यान - बच्चे की क्षमता देखकर उसे वैसे ही एक्सेप्ट करें
- दूसरों बच्चों से खुद के बच्चे की तुलना ना करें. क्योंकि हर बच्चे की अपनी कैपेबिलिटी होती है - अच्छे मार्क्स लाने पर गिफ्ट देने का लालच ना दे
- रिजल्ट आने के लगभग 120 घंटे पहले बच्चों से बात करके उनका मनोबल जीते - बच्चों के साथ फ्रेंडली बिहेवियर रखिये
- एहसास करायें कि अगर कम मार्क्स आता है तो कोई बात नहीं, नेक्स्ट क्लास में अच्छी कोशिश करेंगे - उन्हें आजादी दीजिए, लेकिन उनके हाव भाव पर गौर कीजिए
- सुसाइड के लिए सोचने वाले बच्चों में काफी दिन पहले से ही लक्षण बदल जाते है- रिजल्ट को लेकर बच्चों को चेतावनी कभी ना दे
- रिजल्ट वाले दिन खुद बच्चों के साथ रहें. क्यों करें टीचर
- कमजाेर बच्चों को मेंटल स्पोर्ट करें - बच्चे को लेकर पैरेंट्स से बात करें, बच्चों के सामने उनकी शिकायत ना करें
- मेंटल सेटिस्फेक्शन जरूरी है और ये टीचर ही बच्चों का दे सकते है- स्टूडेंट्स को एग्जाम्पल देकर समझाएं, बच्चों की काउंसिलिंग किया जायें
- नोट बुक में माइनस कांमेंट ना करें - रिजल्ट देते वक्त जरूर कहें कि अच्छा किये हो, नेक्स्ट टाइम और अच्छा करना
- दोस्तों के सामने स्टूडेंट्स को बुरी तरह से ना डांटे. उसे प्यार से समझाएं - क्लास में सारे बच्चों को रिजल्ट देने के बाद सारे बच्चों के बेहतर परफार्मेंस के लिए तालियां बजायें
- स्टूडेंट को नये क्लास में प्रमोट होने की बधाई दे कोट
पैरेंट्स करें सपोर्ट रिजल्ट अच्छा ना होने पर भी पैरेंट्स बच्चों का सपोर्ट करें. फैमिली का माहौल इस तरह रखें कि बच्चा ना ही डिप्रेशन में जायें और ना ही सुसाइड करने की सोचे. अगर पैरेंट्स ही बच्चों का साथ नहीं देंगे तो वो इस तरह का कदम उठा ही लेते है. अक्सर बच्चे अपने रिजल्ट पर कई उम्मीदें बना लेते है. लेकिन उस तरह के मार्क्स नहीं आने पर डिप्रेशन में चले जाते है. इस कारण इस पर हर पैरेंट्स को ध्यान देने की जरूरत है.
कुमुद श्रीवास्तव, काउंसलर, सीबीएसइ \\B

... रिजल्ट ने बदल दी जिलों की तस्वीर

 पिछले पांच सालों में टॉप पर रहने वाले जिले चले गये निचले पायदान पर

रिंकू झा, पटनापरीक्षा में नकल होने से ना सिर्फ राज्य की तस्वीर बदलती है, बल्कि जिलों की भी तस्वीर बदल जाती है. जहां नकल होने से उस राज्य की बदनामी होती है, वहीं उन जिलों के रिजल्ट पर फर्क पड़ता है जहां पर परीक्षा कड़ाई से ली जाती है. ऐसी स्थिति में उन जिलों को काफी फायदा होता है जहां पर नकल खुलेआम चलता है. इससे ऐसे जिलों का रिजल्ट 80 से 90 फीसदी तक पहुंच जाता है. रिजल्ट का कुछ ऐसा सीन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के मैट्रिक के रिजल्ट में भी देखने को मिल रहा है. पिछले पांच सालों का आकलन करें तो उन जिलों के रिजल्ट सबसे बेहतर हो रहे जहां पर नकल चलती है.
- जो पीछे थे वो पहुंच गये टॉप पर समिति सूत्रों की माने तो पिछले पांच सालों में मैट्रिक के रिजल्ट में जिलों के टॉप लिस्ट चेंज हो गया है. पहले टाॅप लिस्ट में सुपौल, पटना, भागलपुर, दरभंगा जिलों का रहता था. लेकिन अब इन जिलों का स्थान या तो बीच में रहता है या नीचे के पायदान में रहता है. पहले मैट्रिक का रिजल्ट 80 फीसदी तक ही जाता था, लेकिन अब 90 फीसदी के उपर भी रिजल्ट होता है. सूत्रों की माने तो मैट्रिक के रिजल्ट में जिलों का यह परिवर्तन पिछले पांच सालों में अधिक देखने को मिल रहा है.
- पांच सालों से चार पांच जिले ही रहते टॉप पर पिछले पांच सालों में अरवल, नवादा, शेखपुरा, जमुई ऐसे कुछ जिले है जो रिजल्ट सबसे बेहतर कर रहे है. इन जिलो में रिजल्ट 90 फीसदी के उपर रहता है. बाकी कुछ जिला में 70 से 80 फीसदी तक रिजल्ट होता है. वहीं कुछ जिलों में 70 फीसदी के लगभग और बाकी में 60 फीसदी के नीचे रिजल्ट होता है. 60 फीसदी के नीचे रिजल्ट देने वाले जिलों की संख्या लगभग 10 है.
- बदल सकता है इस बार जिलों का नाम इस बार मैट्रिक के रिजल्ट में फिर एक जिलों का नाम चेंज हो सकता है. इस बार प्रदेश भर में नकल पर रोक लगा दी गयी है. पूरी कड़ाई से परीक्षा ली जा रही है. ऐसे में बेहतर रिजल्ट में जिलों के नाम में चेंज हो सकता है. पिछले पांच साल में जिन जिलों ने कब्जा कर रखा है, उन जिलों के बदले कुछ और जिलें का नाम शामिल हो सकता है.
पिछले पांच सालों में मैट्रिक 2010 से 2015 तक मैट्रिक के रिजल्ट में टॉप तीन जिला
साल - 2010
टॉप तीन जिला - अरवल (95 फीसदी), नवादा (94 फीसदी), जमुई (94 फीसदी),
साल - 2011 टॉप तीन जिला - नवादा (96.15 फीसदी), खगड़िया (93.21 फीसदी), अरवल (92.33 फीसदी),
साल - 2012 टाॅप तीन जिला - जमुई (94.25 फीसदी), शेखपुरा (93.11 फीसदी), अरवल (91.33 फीसदी),
साल - 2013 टॉप तीन जिला - शेखपुरा (92.45 फीसदी), अरवल (93.31 फीसदी), नवादा (90.23 फीसदी),
साल - 2014 टाॅप तीन जिला - जमुई (93 फीसदी), अरवल (91.35 फीसदी), नवादा (92.79 फीसदी),
साल - 2015 टॉप तीन जिला - अरवल (95 फीसदी), नवादा (94 फीसदी), जमुई (94 फीसदी),
2010 से 2015 तक मैट्रिक के रिजल्ट में कम परसेंटेज लाने वाले जिले साल - 2010
टॉप तीन जिला - समस्तीपुर (64 फीसदी), दरभंगा (54 फीसदी), सहरसा (52 फीसदी),साल - 2011
टॉप तीन जिला - मधेपुरा (61.15 फीसदी), पूर्णिया (54.31 फीसदी), मधुबनी (52.32 फीसदी),साल - 2012
टाॅप तीन जिला - दरभंगा (56.45 फीसदी), मधुबनी (45.11 फीसदी), पूर्णिया (65.33 फीसदी),साल - 2013
टॉप तीन जिला - मुजफ्फरपुर (60.46 फीसदी), दरभंगा (69.38 फीसदी), मधुबनी (68.69 फीसदी),साल - 2014
टाॅप तीन जिला - मधेपुरा (50 फीसदी), बांका (64.35 फीसदी), पूर्णिया (65.79 फीसदी)साल - 2015
टॉप तीन जिला - अररिया (60 फीसदी), पूर्णिया (65 फीसदी), मुजफ्फरपुर (48 फीसदी)

Monday, March 7, 2016

मूल्यांकन के लिए बनाया गया स्पेशल केंद्र, संदेहास्पद उत्तर पुस्तिका की होगी जांच

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने बनाया स्पेशल मूल्यांकन केंद्र

संवाददाता, पटनाइंटरमीडिएट के उत्तर पुस्तिका की जांच के लिए इस बार एक स्पेशल केंद्र भी बनाये जायेंगे. इस स्पेशल मूल्यांकन केंद्र पर उन उत्तर पुस्तिका की जांच होगी, जिस परीक्षा केंद्र को लेकर कुछ संदेह बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को हुआ है. जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से जिन परीक्षा केंद्रों की रिपोर्ट निगेटिव होगी या कुछ संदेह होगा तो उन केंद्रों के उत्तर पुस्तिका को स्पेशल मूल्यांकन केंद्र पर जांचा जायेगा. ज्ञात हो कि इस बार इंटर के मूल्यांकन के लिए 76 मूल्यांकन केंद्र बनाये गये है. इसमें से एक केंद्र स्पेशल रखा गया है.
- रिजल्ट निकलने के पहले बना था स्पेशल मूल्यांकन केंद्र स्पेशल मूल्यांकन केंद्र 2015 के इंटर उत्तर पुस्तिका की जांच के लिए भी किया गया था. लेकिन रिजल्ट निकलने के पहले किया गया था. वैैशाली के परीक्षा केंद्र से एक हजार ऐसे उत्तर पुस्तिका एग्जामिनर के पास आयें थे जिसमें हर उत्तर पुस्तिका की हैंडराइटिंग एक जैसी थी. उत्तर पुस्तिका में हर प्रश्न का उत्तर एक जैसा लिखा हुआ था. इस बात की जानकारी समिति को मिली तो फिर इन उत्तर पुस्तिका की जांच के लिए अलग से स्पेशल मूल्यांकन केंद्र बना कर किया गया था.
- स्क्रूटनी में होती है टोटलिंग, मूल्यांकन नहीं बिहार बोर्ड में एक बार उत्तर पुस्तिका की जांच होने के बाद उस कॉपी की दुबारा जांच नहीं होती है. बोर्ड में यह प्रावधान नहीं है कि किसी उत्तर पुस्तिका की दुबारा जांच की जायें. स्क्रूटनी के दौरान बस अंकों को देखा जाता है. उसकी टोटलिंग को जांच जाता है. अंदर के अंक अाैर बाहर के अंकों को मिलाया जाता है. ऐसे में स्पेशल मूल्यांकन केंद्र से रिजल्ट में पारदर्शिता लायी जा सकेगी. 

इवैल्यूएशन के साथ ही तैयार होगा मार्क्स फाइल

- आइसीएसइ बोर्ड में इवैल्यूशन को किया गया आसान

संवाददाता, पटनाबोर्ड एग्जाम चलने के साथ-साथ इस बार इवैल्यूशन का काम भी होगा. इवैल्यूशन जल्दी और सही तरीके से हो, इसके लिए इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (आइसीएसइ) ने ऑन स्क्रीन इवैल्यूशन की व्यवस्था की है. ऑन स्क्रीन इवैल्यूशन होने के मार्क्स फाइल भी तैयार होगा. इससे बोर्ड एग्जाम समाप्त होने और इवैल्यूशन समाप्त होने के साथ ही मार्क्स सीट भी तैयार हो जायेगा. आइसीएसइ बोर्ड की माने तो रिजल्ट जल्दी निकले, इस कारण यह व्यवस्था की गयी है. इससे मूल्यांकन के सारी गतिविधियों पर बोर्ड खुद नजर रख पायेगा. किसी तरह की गड़बड़ी होने की चांस कम रहेगा.
- मार्क्स के लिए नहीं करना होगा बोर्ड को इंतजार ऑन स्क्रीन इवैल्यूशन होने से बोर्ड काे अब मार्क्स के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा. इवैल्यूशन होने के साथ ही साथ मार्क्स भी बोर्ड के पास जाता रहेगा. इससे मार्क्स सीट तैयार करने में बोर्ड को आसानी हो जायेगी. ज्ञात हो कि अभी तक इवैल्यूशन होने तक बोर्ड को इंतजार करना पड़ता था. जोनल लेवल पर इवैल्यूशन होने के बाद सारी जगहों से मार्क्स बोर्ड के पास जाता था. मार्क्स के जाने के बाद बोर्ड पहले मार्क्स फाइल और उसके बाद मार्क्स सीट तैयार करता था. लेकिन इस बार यह व्यवस्था चेंज हो गयी है.
- 15 से 20 मई के बीच रिजल्ट इस बार आइसीएसइ बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट भी जल्दी निकाल पायेगा. ऑन स्क्रीन इवैल्यूशन की व्यवस्था होने से आंसर कॉपी जल्दी जांची जा सकेगी. बोर्ड की माने तो इस बार इवैल्यूशन में अधिक से अधिक 15 दिन का समय लगेगा. मार्च के तीसरे सप्ताह से इवैल्यूशन काम शुरू होगा. 10वीं बोर्ड की परीक्षा 29 मार्च तक और 12वीं बोर्ड 15 अप्रैल तक चलेगा.
- 15 मार्च से सीबीएसइ और 19 मार्च से इंटर का इवैल्यूशन वहीं इस बार सीबीएसइ ने भी इवैल्यूशन काम जल्दी शुरू करने जा रहा है. 15 मार्च से सीबीएसइ 12वीं का इवैल्यूशन शुरू हो जायेगा. वहीं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति भी इंटर का इवैल्यूशन 19 मार्च से शुरू करने जा रही है. अप्रैल के पहले सप्ताह तक इंटर का इवैल्यूशन कर लिया जायेगा. सीबीएसइ की ओर से मैन्यूअल ही इवैल्यूशन किया जायेगा. इसके लिए हर विषय के लिए मार्किंग स्कीम तैयार किये जा रहे है.  

मैट्रिक परीक्षा : गया में सबसे अधिक परीक्षार्थी, पटना से 68 हजार होंगे शामिल

 पटना में बनाये गये 73 सबसे अधिक परीक्षा केंद्र

संवाददाता, पटनाइंटर की परीक्षा के बाद बिहार विद्यालय परीक्षा समिति मैट्रिक की परीक्षा में जुट गया है. परीक्षार्थी की संख्या अधिक होने के कारण समिति के पास चुनौती भी काफी है. इस बार परीक्षा में 15 लाख 73 हजार 199 परीक्षार्थी शामिल होंगे. उनके लिए प्रदेश भर में 1309 परीक्षा केंद्र बनाये गये है. सबसे अधिक परीक्षार्थी गया जिले में हैं. गया से इस बार 80 हजार 373 परीक्षार्थी मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होंगे. दूसरे और तीसरे स्थान पर छपरा और वैशाली जिला है जहां से सबसे अधिक परीक्षार्थी परीक्षा देंगे. पटना से इस बार 68 हजार 933 परीक्षार्थी मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होंगे. मैट्रिक की परीक्षा 11 मार्च से 18 मार्च तक चलेगा.
- पटना जिला में सबसे ज्यादा परीक्षा केंद्र परीक्षा में एक बेंच पर दो परीक्षार्थी ही बैठ सकते है. इससे हर जिला में परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाया गया है. पटना जिला में सबसे अधिक 73 परीक्षा केंद्र बनाया गया है. वहीं समस्तीपुर, गया और वैशाली में 67-67 परीक्षा केंद्र बनाया गया है. कदाचार मुक्त परीक्षा के लिए हर परीक्षा केंद्र पर सीसी टीवी कैमरा लगाया गया है. सीसी टीवी कैमरा हर केद्र के बाहर लगायी जा रही है. इससे अभिभावकों पर नजर रखी जा सके.
- छपरा से छात्राओं की संख्या और गया से छात्रों की संख्या अधिक इस बार छपरा जिला से सबसे ज्यादा छात्राएं मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होंगी. वहीं गया जिला से भी छात्राओं की संख्या काफी है. छात्राओं की संख्या में पटना जिला का स्थान तीसरे पर है. पटना जिला से 35771 परीक्षार्थी मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होंगी. वहीं इस बार छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा गया जिला में है. गया से 43350 परीक्षार्थी मैट्रिक में शामिल होंगे.
मैट्रिक की परीक्षा सबसे अधिक परीक्षार्थी वाला जिला
गया - 80373 छपरा - 77362
वैशाली - 74420 पटना - 68933
छात्राओं की सबसे अधिक संख्या वाला जिला छपरा - 37708
गया - 37023पटना - 35771
छात्रों की सबसे अधिक संख्या वाला जिला गया - 43350
वैशाली - 41076छपरा - 39654
सबसे अधिक परीक्षा केंद्र वाला जिला पटना - 73
वैशाली, समस्तीपुर, गया - 67मधुबनी - 58
कोटमैट्रिक की परीक्षा के लिए सारे इंतजाम हो चुके है. सारे केंद्रों पर उत्तर पुस्तिका पहुंच चुकी है. प्रश्न पत्र भी भेजे जा रहे है. इंटर की तरह मैट्रिक की परीक्षा में भी खास इंतजाम किये गये है. नकल करने और करवाने वाले दोनो पर सख्ती की जायेगी.
प्रो. लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति 

रेप पीड़िता ने कहा - मजबूरी को कमजाेरी नहीं बनाउंगी, पढ़ूंगी और मुकाम हासिल करूंगी

 दो साल पहले हुए रेप की घटना को बना लिया अपनी ताकत 

संवाददाता, पटना
मैडम स्कूल में टीचर है. सर पटना में वकील है. मैडम सुबह स्कूल चले जाने के बाद सर मेरे साथ दुष्कर्म करते थे. ऐसा चार दिनों तक चला. मैने मैडम को सारी बातें बतायी. मैडम ने मुझे ही झूठा कहा. मै विराेध करती तो वो लोग मुझे मारते भी थे. शहर नया था, समझ में नहीं आता था कि कहां जायें. मैडम की बेटी को छोड़ने मै हर नॉट्रेडम स्कूल जाती थी. वहां पर एक महिला ने मेरी मदद की. मै एक संस्था के पास पहुंची. मुझे काफी दर्द था. मै पीड़ा में थी. मैने संस्था वाले को बताया. उन लोगों ने डाक्टर से दिखाया. कई दिनों के बाद मै ठीक हो पायी. जीने की चाह खत्म हो गयी. फिर मैने सोचा, गलत किसी और ने किया और सजा भी मुझे ही मिलेगी. मैने खुद को संभालना शुरू किया. आज मेरे साथ घटी घटना का दो साल हो चुका है, घटना मुझे आज भी पूरी याद है कि किस तरह चार दिनों तक उस दरिंदे ने मेरे साथ रेप किया. लेकिन उस घटना को सोचने से मेरे अंदर और मजबूरी आती है. मै कमजोर नहीं पड़ना चाहती. ताकत बना कर उस घटना से हर दिन लड़ती हूं. रेप पीड़िता की यह कहानी कोई खास नहीं है. आज हमारे समाज में कई ऐसी बेटी है जिनके साथ इस तरह की घटना होती है. लेकिन रेप होने के बाद ये बेटी समाज के सामने नहीं आती. कहीं गुम हो जाती है. उन्हें शर्म लगता है और वो समाज के लायक नहीं है. जबकि शर्म तो उन्हें आनी चाहिए जो लाेग महिलाओं के साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार या ऐसी घिनौनी कुकृत्य को अंजाम देते है. लेकिन राेजी (पीड़िता का बदला हुआ नाम) हमारे समाज की ऐसी बेटी है जो समाज में रहा कर अपना मुकाम बनाना चाहती है. बिहार सरकार ने रेप पीड़िता के नाम पर एक लाख रूपये का मुआवजा रोजी को दिया है. रोजी अब इस पैसे से अपना कैरियर बनाना चाहती है. बिहार बाेर्ड से 2015 में मैट्रिक करने के बाद अब रोजी प्राइवेट स्कूल से 12वीं में पढ़ रही है.
- मुआवजे की राशि से नर्स ट्रेनिंग सेंटर खोलने का ख्वाब
रोजी ने बताया कि मुझे मेडिकल के लिए कई बार हास्पीटल लेकर गये. एक ही काम को बार-बार डाक्टर और नर्स कर रहे थे. इससे मुझे बहुत ही परेशानी और शारीरिक कष्ट भी हुआ. इस कारण नर्स बनाना चाहती हूं. जो मुआवजे की राशि मुझे मिली है उससे एक नर्स ट्रेनिंग सेंटर खोलना चाहती हूं, जिससे नर्स को सही ट्रेनिंग मिले और रेप पीड़िता का मेडिकल टेस्ट एक बार में ही हो जायें.
- 7 जुलाई 2014 को बदल गयी दुनियां
साधारण सी दिखने वाले रोजी घर में सभी की दुलारी थी. वो बचपन से ही डाक्टर बनना चाहती थी. मा बाप गरीब थे, इससे रोजी भी पार्ट टाइम काम करती थी. सिगडेगा, झारखंड की रहने वाली रोजी ने बताया कि झारखंड बोर्ड से मैट्रिक की परीक्षा देने के बाद सुशीला नाम की एक लड़की के साथ पटना आ गयी. सुशीला ने एक घर में नौकरानी का काम दिलवा दिया. शुरू में तो सब ठीक रहा, लेकिन बाद में घर का मालिक ने उसके साथ रेप किया. नया शहर होने के बाद कहां जायें पता नहीं था. बिहार घरेलू कामगार यूनियन का साथ मिला. जैसे तैसे अशोक राजपथ स्थित उसके कार्यालय पहुंची. वहां की सिस्टम लूसी और सुशमा को सारी बातें बतायी.
- दीघा थाना में मामला हुआ दर्ज
रोजी के बारे में यूनियन की सुशमा ने बताया कि हमारे पास आयी तो हमने पिरबहाेर थाना को इसकी जानकारी दिया. इसके बाद रोजी के माता पिता को बुलाया गया. इसके बाद हमने वकील के खिलाफ दीघा थाना में एफआइआर किया. पुलिस ने रोजी को तीन दिनो तक अपने पास रखा. मेडिकल हुआ. मेडिकल में रेप होने का रिपोर्ट भी आया. लेकिन अभी भी वो अपराधी घूम रहा है. कोई कार्रवाई क्या पुलिस अभी तक पकड़ तक नहीं पायी है.
कोट
रोजी के मामले में पुलिस ने बहुत मदद नहीं किया है. रेप के मामले में वर्मा कमिटी की रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर पुलिस मदद नहीं करती है तो पुलिस के उपर भी सजा का प्रावधान है. रोजी को मुआवजा तो मिल गया, लेकिन आज भी अपराधी बाहर घूम रहा है.
श्रुति सिंह, वकील, पटना हाई कोट\B

Sunday, March 6, 2016

आंसर तैयार करने के लिए पटना जोन से चुने गये दस टीचर

परीक्षा होने के तीसरे दिन से बनाया जायेगा मार्किंग स्कीम

संवाददाता, पटनापरीक्षा होने के साथ ही मार्किंग स्कीम की तैयारी शुरू हो जायेगी. इसके लिए देश भर से सब्जेक्ट एक्सपर्ट की टीम बनायी जाती है. इस बार सीबीएसइ ने हर रीजनल ऑफिस के स्कूलों से यह टीम तैयार कर रही है. पटना जोन से इस बार दस टीचर्स को मार्किंग स्कीम तैयार करने वाले टीम में शामिल किया गया है. इसमें बिहार से पांच और झारखंड से भी पांच सब्जेक्ट एक्सपर्ट को मार्किंग स्कीम तैयार करने के लिए चुना गया है. ये तमाम टीचर परीक्षा होने के बाद प्रश्न पत्र और उसके आंसर के आधार पर मार्किंग स्कीम तैयार करेंगे.
- परीक्षा के तीसरे दिन से शुरू होगा मार्किंग स्कीम का काम मार्किंग स्कीम का काम परीक्षा होने के अनुसार तैयार किया जायेगा. जिन विषयों की परीक्षा होगी, उसके तीसरे दिन से मार्किंग स्कीम बनाने का काम शुरू हो जायेगा. सीबीएसइ के अनुसार जिस विषय की परीक्षा एक मार्च को होगा, उसका मार्किंग स्कीम तीन मार्च से बनाना शुरू कर दिया जायेगा. सब्जेक्ट के अनुसार एक्सपर्ट की टीम बनायी गयी है. हर सब्जेक्ट के मार्किंग स्कीम के लिए टीम में कम से कम आठ से नौ एक्सपर्ट को रखा जाता है.
- तैयार मार्किंग स्कीम पर ही होता है इवैल्यूशन सीबीएसइ द्वारा हर साल मार्किंग स्कीम तैयार किया जाता है. एक्सपर्ट द्वारा तैयार मार्किग स्कीम के अनुसार ही 2016 के 12वीं का इवैल्यूशन किया जायेगा. सीबीएसइ की माने तो प्रश्न पत्र में किसी तरह की प्रश्न गलत होने, सिलेबस के बाहर होने जैसी बातों का ख्याल रख कर ही मार्किंग स्कीम तैयार किया जाता है. मार्किंग स्कीम तैयार होने के पांच दिनों के बाद इवैल्यूशन शुरू हो जाता है. एक विषय के मार्किंग स्कीम को तैयार करने में लगभग चार दिन लग जाते है. तैयार मार्किंग स्कीम को इवैल्युशन सेंटर पर भेजा जाता है.
पटना जोन के दस एक्सपर्ट चुने गये है - विपिन शर्मा, प्रिंसिपल, वीबी चिन्मया विद्यालय, जमशेदपुर, इंगलिश
- राजीव रंजन सिन्हा, प्रिंसिपल, वाल्डविन एकेडमी, पटना, जोगरफी - बी विनोद, प्रिंसिपल, डीपीएस, पटना, फिजिक्स
- डा. अशोक सिंह, प्रिंसिपल, चिन्मया विद्यालय, बोकारो, मैथेमेटिक्स - एस वल्लभन, प्रिंसिपल, केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड, केमेस्ट्री
- यूएस प्रसाद, प्रिंसिपल, डीएवी, गया, बायोलॉजी - डा. मधु सिन्हा, प्रिंसिपल, जीन पार्ल्स हाई स्कूल, आरा, भोजपुर, इंगलिश
- बीए कुमार, प्रिंसिपल डीएवी, गिरिडिह, झारखंड, मैथेमेटिक्स - सुभोश्री सरकार, प्रिंसिपल, वाल्डविन फर्म एरिया हाई स्कूल, कदमा, जमशेदपुर, साइंस
- उर्मिला सिंह, प्रिंसिपल, डीएवी, रामगढ़, सोशल साइंस 

सिलेबस की जानकारी नहीं, प्रैक्टिकल एग्जाम स्कूल और कॉलेज लेते अपनी मरजी से

 इंटर के प्रैक्टिकल एग्जाम में नहीं होता एससीइआरटी द्वारा बनाये गये नियम का फॉलो

रिंकू झा, पटना
इंटर के प्रैक्टिकल में एक एक्सपेरिमेंट आठ अंक के होने चाहिए. वहीं एक एक्टिविटी भी करवानी है. एक्टिविटी भी आठ अंक का होगा. एक प्रोजेक्ट वर्क चार अंक का लेना है. इसके अलावा पांच अंक का वाइवा और पांच अंक छात्रों को कॉपी पर दिये जायेंगे. एससीइआरटी ने इंटर के प्रैक्टिकल एग्जाम के लिए यह सिलेबस बना रखा है. लेकिन इस नियम को फॉलो प्रैक्टिकल के एग्जाम में नहीं किया जाता है. बोर्ड जो प्रैक्टिकल का फाॅर्मेट स्कूल और कॉलेज को भेजती है, उसे भर कर तो स्कूल और कॉलेज बोर्ड को भेज देते है. लेकिन प्रैक्टिकल के सिलेबस को अपनी मरजी से चलाते हैं.- आठ अंक की जगह 20 अंक का होता है एक्सपेरिमेंट
प्रैक्टिकल के नाम पर बस खानापूर्ति ही की जाती है. ना ताे एक्टिविटी करवायी जाती है और ना ही प्रोजेक्ट वर्क ही करवाया जाता है. प्रैक्टिकल के नाम पर बस 20 अंक का एक एक्सपेरिमेंट अौर पांच अंक का वाइवा और पांच अंक कॉपी पर दिये जाते है. 30 अंक का प्रैक्टिकल बस यही करके खत्म कर दिया जाता है. स्कूल सूत्रों की माने ताे हमें प्रैक्टिकल के सिलेबस की जानकारी स्कूल को नहीं है. बस एक्सपेरिमेंट करके मार्क्स दिया जाता है. वाइवा के लिए शिक्षक बाहर के दूसरे स्कूल से आते है. - एक्टिविटी की नहीं होती प्रैक्टिस
11वीं और 12वीं के पढ़ाई के दौरान भी एक्टिवटी पर कोई काम नहीं होता है. स्कूल या काॅलेज में प्रॉपर लैब नहीं होने से प्रैक्टिकल का काम भी नहीं होता है. शिक्षक प्रो. शंकर प्रसाद की माने तो एक्सपेरिमेंट के लिए इंक्यूमेंट की जरूरत होती है. लेकिन एक्टिविटी के माध्यम से लोकल मेटेरियल से एक्सपेरिमेंट करना सीखाना होता है. इसके लिए स्कूल में पढ़ाई और इंटर की परीक्षा में आठ अंक का एक्सपेरिमेंट करने को दिया जाता है. जिससे छात्रों को लो कास्ट में एक्सपेरिमेंट करना आयें. - मार्च के दूसरे सप्ताह में होगा प्रैक्टिकल एग्जाम
24 फरवरी से 5 पांच तक इंटर की परीक्षा ली जायेगी. इसके बाद प्रैक्टिकल का एग्जाम लिया जायेगा. इंटर में तीन विषयों में प्रैक्टिकल एग्जाम लिया जाता है. फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायोलाॅजी विषय में 70 अंकों का थ्योरी और 30 अंकों का प्रैक्टिकल होता है. इस बार इंटर की परीक्षा में 12 लाख 50 हजार परीक्षार्थी शामिल होंगे. कोट
प्रैक्टिकल एग्जाम के लिए जो फार्मेट भेजा जायेगा. उसे अच्छी तरह से देखा जायेगा. फार्मेट में अंकों का बंटवारा एससीइआरटी के आधार पर ही किया जायेगा. जैसा फार्मेट हो उसी तरह से अंक दिये जायेंगे. लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति \\\\
\\B

कॉमन गलतियों से बचेंगे तो आयेंगे अच्छे मार्क्स

 सीबीएसइ ने कहा 90 फीसदी स्टूडेंट्स काॅमन गलतियों के कारण पाते है कम अंक

संवाददाता, पटनासीबीएसइ 12वी की परीक्षा मंगलवार से शुरू हो रहा है. स्टूडेंट्स के लिए अब कुछ घंटे बस रिवीजन के लिए है. ऐसे में परीक्षा हॉल में प्रश्न पत्र मिलने के बाद किन बातों का ख्याल रखें, किन-किन छोटी-छोटी गलतियों पर ध्यान दे. इसको लेकर सीबीएसइ काउंसलर की ओर से स्टूडेंट्स को टिप्स दिया गया है. सीबीएसइ काउंसलर ने उन कॉमन गलतियों की ओर भी परीक्षार्थी का ध्यान आकृष्ट किया है जो अक्सर एग्जाम देते समय हो जाता है. इन गलतियों पर स्टूडेंट्स का ध्यान नहीं होता है और मार्क्स कम आने पर शिकायत भी करते है.
- लिस्ट देखकर जायें परीक्षा देने सीबीएसइ ने परीक्षार्थी की मदद के लिए कुछ कॉमन गलतियाें की लिस्ट दिया है. इन गलतियो को स्टूडेंट देख कर परीक्षा देने जायें तो उनकी गलती कम होगी. एग्जामिनेशन हॉल में समय का बंटवारा करें, इसकी भी जानकारी सीबीएसइ ने दिया है. सीबीएसइ काउंसलर कुमुद श्रीवास्तव ने बताया कि अक्सर स्टूडेंट कुछ गलतियां करते है. कई बार आंसर उनकी सही होती है, लेकिन जल्दबाजी के कारण लेबरिंग करना या मार्क करना भूल जाते है. इससे पूरे अंक नहीं आते है. इसके अलावा प्रश्नों की संख्या लिखने में भी स्टूडेंट्स गलती करते है. कई बार तो स्टूडेंट प्रश्न की संख्या लिखना भूल जाते है.
ये है वो कॉमन गलतियां- सैंपल पेपर में प्रैक्टिस किया कोई सवाल यदि फाइनल में आ जायें, तो लगता है कि वहीं सवाल आ गया, जबकि सवाल शुरूआत में मिलता जुलता है, लेकिन आखिर में अलग होता है. इस कारण प्रश्न को देखकर ही सही उत्तर करें
- प्रश्न क्रमांक गलत डाल देना. अक्सर इस तरह की गलतियां परीक्षार्थी करते है. सवाल नंबर दो का जवाब लिखते वक्त उत्तर क्रमांक तीन में डाल देना - जवाब का स्ट्रक्चर तय न करना, उत्तर में जो बात पहले लिखना चाहिए था, उसे बाद में लिख देते है
- जवाब में चित्र बनाना, लेकिन उसकी लेबलिंग न करना - रनिंग टेक्स्ट लिखते जाना. कहीं हाइलाइट या सब हेड नहीं देना
- प्वाइंट वाइज आंसर नहीं करना - कम अंक के सवाल को बढ़ा चढ़ा कर लिखना
- पूरा पेपर पढ़े बिना हल करना शुरू कर देना -प्रश्नों के बीच जगह अधिक छोड़ देना
- गलत पेन का इस्तेमाल करना - पेपर की बीच में छोड़े जा रहे सवालों को अगल से मार्क न करना
बेहतर स्कोर के लिए इन टिप्स पर रखें ध्यान - पहले जवाब का शीर्षक दे. इसके बाद उसे एक्सप्लेन करें. अंत में कंक्लूजन देना ना भूले
- उत्तर में प्वाइंट और सब हेड में बांटकर जवाब दे- हर जवाब के बाद दो लाइन खींच दे, ताकि पता चल सके कि जवाब खत्म हो गया है
- अधिक अंक के जो सवाल आते है, उन्हें पहले हल करें - अंक के आधार पर उत्तर लिखे
- लिखावट सूंदर ना भी हो तो चलेगा, लेकिन परीक्षक के पढ़ने योग्य राइटिंग हो - कुछ शब्द जिनके लिखने पर कंफ्यूजन महसूस होता हो, उन्हें और स्पष्टता के साथ लिखे
- 10 से 16 मिनट पूरा पेपर ध्यान से पढ़े, ताकि स्ट्रेटजी बनायी जा सके - सवाल के अंदर भी सवाल हो तो उप प्रश्न को भी उसी पेज पर लिखे, जिस पर मुख्य प्रश्न का जवाब लिखा हो 

मैट्रिक से इंटर पहुंचते घट जा रहे 32 से 35 फीसदी अल्पसंख्यक परीक्षार्थी

रिंकू झा, पटना

बिहार बोर्ड की मैट्रिक व इंटर की परीक्षाओं में हर साल परीक्षार्थियों की संख्या लाखों में बढ़ रही है. बोर्ड के आंकड़े इसकी पुष्टि भी करते हैं. लेकिन केटेगरी वाइज परीक्षार्थियों की संख्या का आकलन करने पर पता लगा है कि अल्पसंख्यक तबके के परीक्षार्थी मैट्रिक से इंटर की परीक्षा तक पहुंचते-पहुंचते घट जा रहे हैं. मैट्रिक परीक्षा पास करने वाले करीब 65 से 67 फीसदी अल्पसंख्यक परीक्षार्थी ही इंटर परीक्षा दे रहे हैं जबकि शेष 30 से 32 अल्पसंख्यक परीक्षार्थी ड्रॉप आउट का शिकार हो जा रहे हैं.
- 50 हजार छात्रों ने छोड़ दिया मैट्रिक के बाद पढ़ाई बिहार बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक हर साल लगभग 40 से 50 हजार अल्पसंख्यक परीक्षार्थी ड्राॅप आउट हो रहे है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की माने तो इंटर में अल्पसंख्यक परीक्षार्थियों की संख्या मैट्रिक से कम होती है. मैट्रिक और इंटर में छात्रों का यह अंतर पिछले कई सालाें से हाे रहा है. हर साल मैट्रिक और इंटर में परीक्षार्थी बढ़ रहे है, लेकिन अल्पसंख्यक परीक्षार्थियों की संख्या कम हो रही है.
- छात्राएं अधिक हो रही ड्राॅप आउट मैट्रिक करने के बाद अल्पसंख्यक परीक्षार्थियों में छात्राएं अधिक ड्राॅप आउट हो रही हैं. हाल के आंकड़ों पर ध्यान दें तो 2014 में 71 हजार 618 मुसलिम छात्राओं ने मैट्रिक की परीक्षा दी, वहीं इंटर में यह संख्या घट कर 37 हजार पर आ गयी. वहीं 2015 की बात करें तो 78 हजार 149 छात्राएं मैट्रिक परीक्षा में पास हुई, लेकिन इंटर में इनकी संख्या 43 हजार ही रही.
- मदरसा बोर्ड में पढ़ रहीं छात्राएं अगर फोकानियां और मौलवी की बात करें तो यहां पर छात्राओं की संख्या हर साल छात्रों से अधिक हो रही है. पिछले चार साल की बात करें तो हर साल छात्राओं की संख्या बढ़ रही है. इतना ही नहीं रिजल्ट में भी छात्राएं आगे आ रही है. बिहार राज्य मदरसा बोर्ड की माने तो पिछले कई सालों में छात्राओं का रूझान पढ़ाई में काफी हुआ है. वहीं मदरसा बोर्ड में नॉन मुस्लिम छात्र और छात्राएं भी बढ़ रही है.
साल दर साल कम हो रहे अल्पसंख्यक परीक्षार्थी 2012
मैट्रिक में पास कुल अल्पसंख्यक परीक्षार्थी की संख्या - 97 हजार 345इंटर में शामिल कुल अल्पसंख्यक परीक्षार्थी की संख्या - 65 हजार 239
2013 मैट्रिक में पास कुल अल्पसंख्यक परीक्षार्थी की संख्या - एक लाख 25 हजार 465
इंटर में शामिल कुल अल्पसंख्यक परीक्षार्थी की संख्या - 85 हजार 89 2014
मैट्रिक में पास कुल अल्पसंख्यक परीक्षार्थी की संख्या - एक लाख 45 हजार 26 इंटर में शामिल कुल अल्पसंख्यक परीक्षार्थी की संख्या - 97 हजार 75
2015मैट्रिक में पास कुल अल्पसंख्यक परीक्षार्थी की संख्या - एक लाख 56 हजार 987
इंटर में शामिल कुल अल्पसंख्यक परीक्षार्थी की संख्या - एक लाख पांच हजार 28 2016
मैट्रिक में शामिल कुल अल्पसंख्यक परीक्षार्थी की संख्या - एक लाख 87 हजार 487इंटर में शामिल कुल अल्पसंख्यक परीक्षार्थी की संख्या - एक लाख 9 हजार 74  

इवैल्यूशन के बाद शुरू होगा नया सेशन

 9वीं से 12वीं का नया सेशन 21 अप्रैल के बाद शुरू करने का सीबीएसइ ने दिया निर्देश

संवाददाता, पटना फरवरी में एग्जाम हुआ. मार्च में मिलेगा रिजल्ट. लेकिन 9वीं से 12वीं के स्टूडेंट्स का नया सेशन दो अप्रैल से शुरू नहीं होगा. नये सेशन के लिए इस बार स्टूडेंट्स को इंतजार करना पड़ेगा. सीबीएसइ ने स्कूलों को 9वीं से 12वीं का नया सेशन अप्रैल के तीसरे सप्ताह के बाद शुरू करने का निर्देश दिया है. बोर्ड ने ऐसा 10वीं और 12वीं बोर्ड के आंसर कॉपी के इवैल्यूशन को लेकर किया है. ज्ञात हो कि मार्च में बोर्ड एग्जाम के साथ-साथ इवैल्यूशन का काम भी होता है. इवैल्यूशन का काम अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक चलता है. ऐसे में तमाम सीनियर टीचर्स इवैल्यूशन में लगे होते है. ऐसे में सीनियर क्लासेज चलाना संभव नहीं होता है. इस कारण 9वीं से 12वीं तक का सेशन 21 अप्रैल से 25 अप्रैल के बीच शुरू करने का निर्देश बोर्ड की ओर दिया गया है.
- इवैल्यूशन के साथ क्लास करने में टीचर्स को होती है दिक्कतें सीबीएसइ के अनुसार बच्चों को पढ़ाने के साथ इवैल्यूशन दोनों काम करने में टीचर्स को दिक्कतें होती है. इस कारण इवैल्यूशन होने के बाद सीनियर क्लासेज शुरू किया जायेगा. 15 अप्रैल तक इवैल्यूशन का काम होगा. इसके बाद ही नया सेशन शुरू होगा. सीबीएसइ की माने तो बस इवैल्यूशन का काम होने से टीचर्स का कांसंट्रेशन केवल आंसर कॉपी जांच में ही रहेगा.
- एक महीने के स्कूल के बाद हो जायेगा समर की छुट्टी अप्रैल अंतिम सप्ताह में 9वीं से 12वीं तक के क्लास शुरू होने से कोर्स पूरा करना स्टूडेंट्स और टीचर्स के लिए टफ हो जायेगा. अभी तक जहां पूरा अप्रैल और 20 दिन मई में क्लास चल जाता था. इससे अधिकांश कोर्स को समर वैकेशन के पहले समाप्त कर लिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. मात्र एक महीना ही स्कूल के पास कोर्स पूरा करने के लिए बचेगा.
- सितंबर में एसए-वन की परीक्षा सितंबर में एसए-वन (समेटिव असेसमेंंट) की परीक्षा ली जाती है. इससे पहले 9वीं का 60 फीसदी कोर्स को पूरा करना होता है. सीबीएसइ की माने तो एसए-वन में कोर्स का 60 फीसदी पार्ट को शामिल किया जाता है. इस कारण इससे पहले स्कूलों को कोर्स पूरा करना अावश्यक है. जून से अगस्त तक कोर्स को पूरा करना होता है.
- नर्सरी से 8वीं तक का सेशन चार अप्रैल से 9वीं से 12वीं तक के क्लास भले 21 अप्रैल से शुरू होगा. लेकिन नर्सरक्से 8वीं तक का सेशन अप्रैल के पहले सप्ताह से ही शुरू हो जायेगा. इस बार चार अप्रैल से नया सेशन शुरू किया जायेगा. चुकी दो अप्रैल इस बार शनिवार हो रहा है. इस कारण सोमवार यानी चार अप्रैल से नया सेशन शुरू होगा.
कोट
अब हमें कोर्स पूरा करने के लिए कम समय मिलेगा. इससे काफी प्रेशर हो जायेगा. 20 मई के बाद समर वैकेशन शुरू हो जाता है. ऐसे में बस एक महीने ही मिलेगा. समर वैकेशन के बाद एसए वन की परीक्षा होती है. ऐसे में कोर्स पूरा करने में कठिनाई तो आयेगी ही. संजय जोसफ, टीचर, सेंट माइकल हाई स्कूल
इवैल्यूशन के बाद क्लास शुरू होने से हमारे उपर प्रेशर कम होगा. क्योंकि दोनों ही काम हम एक साथ नहीं कर पाते थे. इससे इवैल्यूशन में भी देरी हो जाती थी. हां यह भी है कि कोर्स पूरा करने का प्रेशर भी बाद में हमें झेलना पड़ेगा. अरविंद कुमार, टीचर, लोयेला हाई स्कूल \\B

दिव्यांग स्टूडेंट्स के नामांकन में पिछड़ रहा स्कूल, स्टूडेंट्स ले रहे एनआइओएस में नामांकन

दिव्यांग स्टूडेंट्स की पहली पसंद बन रही राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान

संवाददाता, पटनाक्लास में जाने के लिए रैंप नहीं, क्लास रूम में जाने की कोई सुविधा नहीं, सीनियर क्लास ग्राउंड फ्लोर पर नहीं होना, व्हील चेयर नहीं होना, इन तमाम तरह की दिक्कतें पटना के अधिकांश स्कूलों में है. नाॅर्मल स्कूल में स्पेशल चाइल्ड यानि दिव्यांग स्टूडेंट्स के लिए सुविधा नहीं हाेने के कारण हर साल स्कूल से स्टूडेंट्स नाम कटवा लेते है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड स्कूल को छोड़ स्टूडेंट्स अब राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) से अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे है. पिछले पांच साल की बात करें तो पटना के प्राइवेट स्कूलों में दिव्यांग स्टूडेंट्स की संख्या कम हुई है, वहीं एनआइओएस में दिव्यांग स्टूडेंट्स बढ़े है.
- 260 एजुकेशन सेंटर चलते है पूरे बिहार में दिव्यांग स्टूडेंट्स को मदद मिले इसके लिए एनआइओएस की ओर से पूरे बिहार में 260 एजुकेशन सेंटर चलाये जाते है. इन सेंटरों पर स्टूडेंट्स की सुविधा का पूरा ख्याल रखा जाता है. 10वीं में नामांकन के तौर पर छात्रों को पांच साल के लिए 1350 और छात्राओं को 1100 रूपये देने होते है. वहीं 12वीं में नामांकन के लिए छात्रों को 15 सौ और छात्राओं को 1250 रूपये पांच साल के लिए देना होता है. इस पांच साल के अंदर परीक्षार्थी नौ बार परीक्षा दे सकते है. इसके अलावा फ्री एजुकेशन मेटेरियल भी दिया जाता है.
- दिव्यांग स्टूडेंट्स के लिए होता है एक्टिविटी एनआइओएस की ओर से समय-समय पर दिव्यांग स्टूडेंट्स के लिए एक्टिविटी भी करवाया जाता है. 2015 में बोलने और सूनने में असमर्थ स्टूडेंट्स के लिए पेंटिंग कंपीटिशन करवाया गया. देश भर में आयोजित इस कंपीटिशन में बिहार के भी पांच दिव्यांग स्टूडेंट्स का पेंटिंग चुना गया. जिसे एनआइओएस ने वार्षिक कैलेंडर मे जगह दिया. वहीं 2016 में एनआइओएस की योजना ब्लाइंड बच्चों के लिए पेंटिंग कंपीटिशन करवाने की है.
सीबीएसइ पटना जोन में 10वीं और 12वीं बोर्ड में शामिल होने वाले परीक्षार्थी की संख्या साल - 10वीं - 12वीं
2012 - 408 - 4532013 - 345 - 375
2014 - 324 - 213 2015 - 290 - 146
2016 - 173 - 93 पिछले पांच साल में बढ़े है राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान में दिव्यांग परीक्षार्थी की संख्या
साल - 10वीं - 12वीं 2012 - 17 - 15
2013 - 20 - 162014 - 35 - 60
2015 - 150 - 1682016 - 700 - 545
कोटपिछले कुछ सालों में दिव्यांग स्टूडेंट्स की संख्या काफी बढ़ी है. इसके लिए कई जागरूकता अभियान हमने किया है. हमारी तरह से कई सुविधाएं एेसे स्टूडेंट्स को दिया जाता है, इससे नामांकन लेना और पढ़ाई करना आसान होता है.
संजय कुमार सिन्हा, रीजनल डायरेक्टर, पटना एनआइओएस 

स्क्रीन टच करें और स्कूल के बारे में जाने सारी बातें

ऑन लाइन जुड़ा पटना जोन का सारा केंद्रीय विद्यालय

संवाददाता, पटनाअब स्कूल के बारे में जानकारी लेना आसान होगा. स्कूल में क्या सब सुविधाएं है. कितने कमरे, कितने स्टूडेंट्स पढ़ रहे है, स्कूल में टीचर कितने है, क्या नाम है, किस सब्जेक्ट में कितने टीचर कार्यरत है. ये सारी जानकारी अब जानने के लिए किसी से पूछने की जरूरत नहीं होगी. बस स्क्रीन को टच करें और सारी जानकारी प्राप्त करें. अब ना ही अभिभावकों को परेशान होने की जरूरत होगी और ना ही दूसरों से स्कूल की इंक्वायरी करने की जरूरत होगी. नये सेशन से कई स्कूल कैंपस में ही टच स्क्रीन लगाने की प्लानिंग कर रहे है. इससे स्कूल के बारे मे जानकारी लेना आसान होगा.
- केंद्रीय विद्यालय कर रहा इसकी शुरूआत पटना में इसकी शुरूआत केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड में किया जा रहा है. स्कूल कैंपस में ही एक स्क्रीन लगाया जायेगा. इस स्क्रीन को टच करने मात्र से ही स्कूल के बारे में सारी जानकारी उपलब्ध हो जायेगी. अभिभावक चाहे तो स्कूल संबंधित हर तरह की जानकारी स्क्रीन पर ले पायेंगे. यह सुविधा पूरी तरह से फ्री होगी. केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड से मिली जानकारी के अनुसार इसको लेकर स्कूल ने तैयारी शुरू कर दी है. अप्रैल में नये सेशन यह शुरू कर दिया जायेगा. अभिभावक अपने बच्चे के बारे में भी जानकारी ले पायेंगे. फी स्ट्रक्चर से लेकर तमाम जानकारी, नोटिस आदि भी उपलब्ध होगा.
- ऑन लाइन जुड़ गया केंद्रीय विद्यालय पटना जोन का सारा केंद्रीय विद्यालय आन लाइन जुड़ गया है. शाला दर्पण प्रोजेक्ट के तहत पटना जोन के तमाम केंद्रीय विद्यालय को आन लाइन जोड़ा गया है. अब किसी भी केंद्रीय विद्यालय के बारे में जानने के लिए केंद्रीय विद्यालय संगठन के वेबसाइट से भी जाया जा सकता है. केवीएस के वेबसाइट पर जाकर भी देश के किसी भी केंद्रीय विद्यालय से जुड़ सकते है. यह सुविधा शुरू हो चुकी है.
- स्कूल की सारी जानकारी वेबसाइट पर ही सीबीएसइ की माने तो तमाम स्कूल को अपने बारे में सारी जानकारी वेबसाइट पर देना होगा. फी से लेकर टीचर्स और कोर्स, पढ़ाई, क्लास रूम के साथ सारी सुविधाएं अब वेबसाइट पर ही डालना होगा. सीबीएसइ के भी कई स्कूल इसकी तैयारी शुरू कर दिये है. स्कूल वेबसाइट पर सारी जानकारी नये सेशन से दिया जायेगा. डीपीएस पटना से मिली जानकारी के अनुसार स्कूल वेबसाइट पर सारी जानकारी दी जाती है. अब यही सुविधा स्कूल कैंपस में भी दिया जायेगा. इसकी तैयारी चल रही है.
कोटनये सेशन के शुरू होने के पहले हम स्कूल कैंपस में टच स्क्रीन लगायेंगे. अभिभावक या छात्र स्कूल के बारे में सारी जानकारी ले पायेंगे. इससे काफी आसान हो जायेगा. स्कूल के बारे में सभी जानकारी ऑन लाइन उपलब्ध होगी. इसके लिए स्कूल के वेबसाइट पर जाने की जरूरत नहीं होगी. स्कूल की ओर से यह सुविधा फ्री मे दिया जायेगा.
एस वल्लभम, प्रिंसिपल, केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड \\B

पिछले एक साल में खबरों की समीक्षा

रिंकू झा

बेस्ट स्टोरी 1़ मदरसों में बढ़ी गैर मुस्लिम छात्र छात्राओं की संख्या - 4 जनवरी 2015
2. अनिता को अपना असली नाम पाने में लग गये 21 साल 13 सितंबर 3. छोटे कंधे पर बड़ा बोझ - 1 अप्रैल
- सीबीएसइ ने 8वीं तक के सिलेगस में 25 फीसदी कटौती किया, बस्ता का बोझ हुआ कम - 5 अक्तूबर 4. फुटबॉल चैंपियन को पढ़ने के लिए भी पैसे नहीं - 22 नवंबर
- सोनी की मदद के लिए आगे अाया प्लेयर एसोसिएशन - 23 नंबर 5. न इन्फ्रास्ट्रक्चर, ना स्टूडेंट, बंद क्यों नहीं कर देते पटना डेंटल कॉलेज - 31 जनवरी 2016
6. मैट्रिक परीक्षा में चोरी पर लगेगा 20 हजार जुर्माना - 16 जनवरी 7. कब तक पुकारूं
- सात साल में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने चेंज कर दिया रौल नंबर, नहीं मिला रिजल्ट - 7 फरवरी 2016 चर्चा में रही ये खबर
1. बनियान में गलाया माइक्रो मोबाइल, बन गये डाक्टर - 9 मई 2015 - प्रभात खबर की यह खबर सुप्रीम कोर्ट में अभ्यर्थी के लिए रामबाण का काम किया. एआइपीएमटी कैंसिल होने में इस खबर का रहा योगदान
- इस खबर में एआइपीएमटी को लेकर जितने सजेशन छात्रों ने दिया था. उसे सबसे पहले प्रभात खबर ने ही छापा था. 2. जैमर के पहले में होगी एआइपीएमटी - 18 जून
- 9 मई काे छपी खबर के बाद सुप्रीम कोर्ट में केस चला. इसके बाद 18 जून को सुप्रीम कोर्ट ने दुबारा सीबीएसइ को एआइपीएमटी लेने का आदेश दिया. 25 जुलाई को लिया गया एआइपीएमटी 2015चर्चा में रही ये खबर
1़ कैसे रूके स्कूलों की मनमानी - 25 जून - बिहार में अब नहीं बना एजुकेशन ट्रिब्यूनल
2. सुप्रीम कोर्ट ने दिया बिहार सरकार को एजुकेशन ट्रिब्यूनल गठन करने का आदेश - जुलाई में बिहार में एजुकेशनल ट्रिब्यूनल को हुआ गठन
3. शिक्षक जाहिद को 17 साल के बाद मिला न्याय - 27 फरवरी - मुंगेर नॉट्रेडम एकेडमी में शिक्षक जाहिद बिहार के पहले शिक्षक है जिन्हें ट्रिब्यूनल के तहत न्याय मिला
अभियान 1. झूठा है डीएवी बीएसइबी का दावा, प्रिया इसी स्कूल की छात्रा - 18 मार्च 2015
2. सीबीएसइ करेगा छात्रों की सूची की जांच - 19 मार्च 3. 127 कमरे, 10 हजार छात्र - 20 मार्च
4. डीएवी बीएसइबी की 12वीं का एफिलिएशन होगा खत्म - 22 मार्च 5. 88 छात्रों को कहा गया नहीं आया है एडमिट कार्ड - 21 मार्च
6़ 11वीं में प्रिया राय को मिले 276 मार्च, मैथ में कर दिया फेल - 23 मार्च 7़ डिग्री पर संदेश, अवार्ड भी फर्जी - 20 मार्च
8़ डीएवी के प्रार्चाय सस्पेंड - 24 मार्च वर्तमान में बिहार के तमाम डीएवी सीबीएसइ के संदेश के घेरे में है. कई डीएवी की मान्यता सीबीएसइ ने खत्म कर दिया है. पिछले दो सालों से कई डीएवी बिना मान्यता के चल रहे है.
अभियान 1. पुलिस से एक कदम अागे सोचते है छात्र - 17 दिसंबर
2. बसें स्कूल में पार्क हो, सड़क पर नहीं - 18 दिसंबर 3़ क्या हमें रहता हादसों का इंतजार - 20 दिसंबर
4़ ड्राइवर के भरोसे स्कूली बसों में बच्चे - 21 दिसंबर 5़ जोखिम में जिगर में टूकडें की जान - 22 दिसंबर
6. स्कूल की छुट्टी के साथ ही यातायात ठप - 6 जनवरी स्कूल कैंपस में असुरक्षित बच्चों के अभियान को पटना के डीएम ने संज्ञान लिया. इसके बाद डीएम ने 11 फरवरी को स्कूल प्रशासन के साथ बैठक किया. बैठक में डीएम ने नौ दिशा निर्देश स्कूल प्रशासन को जारी किया. इसके बाद स्कूलों ने एक अप्रैल 2016 से कई नियम को लागू भी किया है. 

स्कूलों ने 70 फीसदी तक बढ़ायी फी, सीबीएसइ पहुंच रहे अभिभावक

संवाददाता, पटना

इस बार पटना के कई स्कूल 70 फीसदी तक ट्यूशन फी में बढ़ोतरी कर रहे है. अभिभावक परेशान है कि वो इतनी अधिक फी कैसे दे पायेंगे. स्कूल की इस मनमाने का कुछ अभिभावकों ने विरोध भी किया है. स्कूल प्रशासन के पास विरोध करने के बाद पटना जिलाधिकारी संजय अग्रवाल से मिले. जिलाधिकारी से मिलने के बाद तमाम अभिभावक गुरूवार को सीबीएसइ रीजनल ऑफिसर आरआर मीणा से मिले. पटना के स्कूलों के मनमाने तरीके से फी बढ़ोतरी की सारी जानकारी दिया. सीबीएसइ रीजनल ऑफिस की ओर से मामले को संज्ञान में लेने के लिए अभिभावकों से आवेदन लिया है. - 10 फीसदी से 70 फीसदी तक फी बढ़ोतरी
इस बार स्कूलों में फी बढ़ोतरी का यह हाल है कि स्कूल 10 फीसदी से 70 फीसदी तक फी बढ़ा दिये है. इसमें कई स्कूलों ने फी बढ़ोतरी की लिस्ट स्कूलों को दिया है तो वहीं कई स्कूल देने की तैयारी में है. पटना में मिनिमम 10 फीसदी तो हर स्कूलो ने फी में बढ़ोतरी किया है. मार्च के दूसरे सप्ताह तक सारे स्कूलों की फी बढ़ोतरी के बारे में स्पष्ट हो जायेगा. कई बड़े स्कूलों ने अभी नामांकन की लिस्ट अभिभावकों को नहीं दिया है. - डीएम से मिल रहे अभिभावक
अभिभावक अभी से ही पटना के जिलाधिकारी से भी मिलना शुरू कर दिया है. अभिभावक सुभाष चंद्र ने बताया कि अलग-अलग स्कूल के अभिभावक के साथ मिल कर कई बार डीएम संजय अग्रवाल से मिले है. डीएम को हमने कई बातों से अवगत करवाया है. स्कूल की मनमानी फी बढ़ोतरी की सारी बातें डीएम को दिया गया है. - फी के साथ डेवलपमेंट चार्ज और किताबों के नाम पर पैसे
नये सेशन में स्कूल मनमाने फी बढ़ोतरी से लेकर अभिभावक मिसलेनिशस चार्ज आदि से भी परेशान रहते है. अभिभावकों ने बताया कि रि-एडमिशन से लेकर डेवलपमेंट, यूनिफार्म, किताबें आदि के नाम पर चार्ज लिया जाता है. हर स्कूल का अलग-अलग चार्ज होता है. जिसका जो मन करता है, अपने हिसाब से फी बढ़ाेतरी कर देता है. - दस दिन में नामांकन की सारी प्रक्रिया समाप्त
स्कूल की फाइनल परीक्षा फरवरी अंतिम सप्ताह तक समाप्त हो गयी है. कई स्कूल में हफ्ते भर या रिजल्ट निकलने तक की छुट्टी कर दी गयी है. अधिकांश स्कूलों में बोर्ड परीक्षा के साथ नये सेशन की तैयारी शुरू हो चुकी है. नये सेशन को लेकर कई स्कूलों ने लिस्ट भी अभिभावकों को थमा दिया है. रिजल्ट निकलने और नये क्लास में नामांकन लेने के बीच मात्र दस दिनों का अंतराल होता है. रिजल्ट के साथ ही स्कूल नामांकन संबंधित लिस्ट भी अभिभावकों को देती है. इस लिस्ट के अनुसार ही नामांकन लेना होता है. कोट
हर साल स्कूल में ट्यूशन फी बढ़ा दिया जाता है. फी बढ़ाने पर कोई रोक टोक नहीं है. इस बार हर क्लास में 70 फीसदी तक टयूशन फी में बढ़ोतरी कर दी गयी है. इसको लेकर हमने सीबीएसइ और जिलाधिकारी दोनों के पास आवेदन दिया है. संजीव पाठक, अभिभावक, क्राइस्ट चर्च स्कूल, गांधी मैदान
हर साल स्कूल में फी मनमाने ढंग से बढ़ता है. कभी दो सौ तो कभी ढाई सौ बढ़ा देते है. अभिभावक विरोध करते है तो स्कूल से बच्चे को निकाल देने की बात स्कूल प्रशासन करते है. इस बार अभी तक लिस्ट तो नहीं मिला है, लेकिन दो सौ तो बढ़ेगा ही. हर साल दो सौ से तीन सौ के बीच फी बढ़ जाता है. मालती सिन्हा, अभिभावक, बिशप स्कॉट स्कूल, कंकड़बाग
इस स्कूल में फी बैलेंस में था. लेकिन इस बार नामांकन से लेकर टयूशन फी 70 फीसदी तक बढ़ा दिया गया है. इससे आम अभिभावकों को काफी परेशानी हो रही है. एक साथ इतना अधिक फी देना बहुत ही कठिन होता है. स्वाति सिंह, अभिभावक, प्रारंभिका स्कूल, बोरिंग रोड \\B

इंटर की परीक्षा ने बदल दिया तस्वीर, नकल करने की भी हिम्मत नहीं जुटा पायें परीक्षार्थी

 पांच साल में सबसे कम रहा निष्कासित परीक्षार्थी की संख्या

संवाददाता, पटनानकल किया तो लगेगा जुर्माना, नकल करते पकड़े गये तो जायेंगे जेल, परीक्षा केंद्रों पर अभिभावक दिखेंगे तो उन्हें पर देना होगा जुर्माना. हर केंद्रों पर नकल करने वालें को पकड़ने के लिए सीसी टीवी कैमरा लगाया जायेगा. विडियोग्राफी होगी. हर परीक्षार्थी पर जिलाधिकारी की नजर होगी. इंटर परीक्षा को लेकर ऐसी व्यवस्था हुई कि इस बार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की तस्वीर ही चेंज हो गयी. जहां अभी तक बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के परीक्षार्थी नकल करके ही पास होने के लिए प्रसिद्ध थे, उस विचार धारा में इस बार परिवर्तन हो गया. परीक्षा केंद्र की व्यवस्था देखकर ही परीक्षार्थी के अलावा अभिभावक भी नकल करवाने की हिम्मत नहीं जुटा पायें. तभी तो इस बार पिछले पांच सालों के निष्कासित परीक्षार्थी की संख्या को भी बदल डाला.
- चिट लाने की हिम्मत ही नहीं हुई इस बार परीक्षा केंद्र पर चिट लाने की हिम्मत तक परीक्षार्थी नहीं कर पायें. परीक्षा के पहले दिन से लेकर अंतिम दिन तक हर परीक्षा केंद्र पर कर्फ्यू जैसा माहौल था. केंद्र के 100 मीटर की रेंज में पुलिस बल के अलावा कोई नजर नहीं आ रहा था. परीक्षा के पहले दिन तो कुछ परीक्षार्थी ने चिट लाने की हिम्मत जुटाई, लेकिन पकड़ में आ गये. इसे देख कर दूसरे परीक्षार्थी हिम्मत ही नहीं कर पायें.
- परीक्षा को कैंसिल करवाने में जुटे रहे परीक्षार्थी नकल नहीं करने देने का प्रेशर परीक्षार्थी पर इतना था कि हर दिन परीक्षार्थी इंटर की परीक्षा को कैंसिल करने में लगे रहे. केंद्र पर चिट पर्ची नहीं ले जाने देेने से परीक्षार्थी मोबाइल को माध्यम बना कर हर दिन की परीक्षा को कैंसिल करवाने में जुटे रहें. परीक्षा शुरू होने के आधे घंटे बाद ही नकली प्रश्न पत्र को व्हाट्सअप पर वायरल कर दिया जाता था. समिति द्वारा जांच के बाद पता चलता था कि ये सारी अफवाहें थी. पूरे परीक्षा के दाैरान परीक्षा को कैंसिल करवाने की कोशिश की जाती रही.
- 45 वीक्षक को पहली बार हटाया गया इंटर की परीक्षा के दौरान पहली बार ऐसा हुआ है कि परीक्षा के दौरान गलती करते पकड़े गये वीक्षक को हटाया गया है. बोर्ड में प्रावधान होने के बावजूद वीक्षक पर कभी कार्रवाई नहीं होती थी. लेकिन वीक्षक पर भी नजर रखी गयी. गड़बड़ी करने वाले कुल 45 वीक्षक को परीक्षा केंद्र से निष्कासित किया गया.
- मुन्ना भाई भी नहीं बच सके नजर से इंटर की परीक्षा में अासानी से एक के बदले दूसरे परीक्षार्थी परीक्षा दे देते थे. कोई रोक टोक नहीं और ना ही पकड़ में आते थे. लेकिन इस बार जिस भी परीक्षार्थी ने यह काम किया, वो बच नहीं सका. प्रदेश भर से 36 ऐसे मुन्ना भाई को पकड़ा गया जो दूसरे के बदले परीक्षा दे रहे थे.
- रिपोर्ट के अनुसार अगले साल के लिए भी हो सकते है निष्कासित समिति की माने तो जिन परीक्षार्थी को निष्कासित किया गया है, वो 2017 की परीक्षा से भी निष्कासित हो सकते है. इस संबंध में समिति के अध्यक्ष और सचिव ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है. निष्कासित छात्रों की रिपोर्ट संबंधित डीइओ से लिया जायेगा. रिपोर्ट देखने के बाद समिति यह फैसला लेगी कि किस परीक्षार्थी को कितने सालों के लिए निष्कासित किया जायेगा.
- तीन हजार भी नहीं हुआ निष्कासित जहां इस बार इंटर की परीक्षा में हर साल हजारों की संख्या में परीक्षार्थी निष्कासित किये जाते थे. वहीं इस बार 26 सौ के लगभग परीक्षार्थी निष्कासित किये गये. किसी भी दिन निष्कासन पांच सौ से अधिक तक नहीं गया. इस बार इंटर की परीक्षा में 11 लाख 58 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए थे. इसमें मात्र 2628 परीक्षार्थी को निष्कासित किया गया. पिछले पांच साल में पहली बार हुआ जब निष्कासन इतना कम हुआ.
इस तरह कड़ाई रहा हर परीक्षा केंद्रों पर - हर परीक्षार्थी का तीन जगहों पर जांच होती थी
- मुख्य गेट पर जांच के बाद सेंटर के अंदर आने पर परीक्षार्थी के जूते, शर्ट आदि को खोल कर जांचा जाता था - परीक्षा मेटेरियल में चिट आदि की जांच होती थी
- हर परीक्षा केंद्र पर सीसी टीवी कैमरा लगाया गया था - हर परीक्षा केंद्र की विडियो ग्राफी हुई
- परीक्षा केंद्र पर होमगार्ड के अलावा बिहार पुलिस बल को लगाया गया - हर जिले के लिए शिक्षा विभाग की ओर से नोडल आॅफिसर नियुक्त हुए थे
- केंद्रों पर 144 धारा लगाया गया थापिछले पांच साल में निष्कासित परीक्षार्थी की संख्या
वर्ष - निष्कासित परीक्षार्थी की संख्या 2011 - 5412
2012 - 5478 2013 - 6234
2014 - 43212015 - 5879
2016 - 2635हर दिन इतने परीक्षार्थी किये गये निष्कासित
दिन             - निष्कासित परीक्षार्थी 24 फरवरी - 485
25 फरवरी - 35826 फरवरी - 500
27 फरवरी - 17629 फरवरी - 476
1 मार्च             - 542 मार्च             - 329
3 मार्च             - 149 4 मार्च             - 105
5 मार्च             - 03कोट
इंटर की परीक्षा को कदाचार मुक्त किया गया. ऐसी ही परीक्षा मैट्रिक का भी होगा. नकल नहीं हो, इसके लिए कई इंतजाम किये गये थे. परीक्षार्थी के सुविधा का ख्याल रखा गया था. लेकिन नकल करने की इजाजत नहीं दी गयी थी. लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति\\B

एफिलिएशन नंबर देंगे तो स्कूलों को सीबीएसइ देगा किताबें

 सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को किताबों की लिस्ट भेजने का दिया निर्देश

संवाददाता, पटनाजो स्कूल अपना एफिलिएशन नंबर देगा, उसे सीबीएसइ एनसीइआरटी बुक्स उपलब्ध करवायेगी. इसके लिए अपनी जरूरत के अनुसार हर स्कूल किताबो की लिस्ट सीबीएसइ के पास भेजना है. स्कूलों की लिस्ट के अनुसार ही सीबीएसइ स्कूलों को किताबें उपलब्ध करवायेगा. लेकिन एनसीइआरटी की बुक्स उन्हीं स्कूलों को मिलेगा, जो सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त है. सीबीएसइ ने स्कूलों को बुक्स की लिस्ट भेजने के लिए 10 मार्च तक का समय दिया है. जो स्कूल लिस्ट भेजेगा उसे 25 मार्च तक बुक्स उपलब्ध करवा दिया जायेगा.
- स्कूलों को दिया गया है यूजर आइडी और पासवर्ड एनसीइआरटी की बुक्स लेने के लिए तमाम स्कूलों को अपना लॉगिग खोलना है. उनके यूजर आइडी और पासवर्ड के बाद ही बुक्स स्कूलों को मिल पायेगा. इससे पहले स्कूल को अपना एफिलिएशन नंबर देना होगा. मान्यता प्राप्त स्कूलों को ही बुक्स उपलब्ध होगा.
- क्लास वन से 11 वीं तक का मिलेगा बुक्स सीबीएसइ ने 2016-17 एकेडेमिक सेशन के लिए यह व्यवस्था किया है. क्लास वन से क्लास 11वीं तक के लिए बुक्स सीबीएसइ उपलब्ध करवायेगी. ज्ञात हो कि सीबीएसइ के निर्देश के बावजूद स्कूल एनसीइआरटी बुक्स नहीं चलाते है. खासकर क्लास वन से आठवीं तक में प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक्स से पढ़ाई होती है. ऐसे में जरूरत से ज्यादा बुक्स एक क्लास में चलता है. इससे स्टूडेंट्स को परेशानी तो होती ही है, अभिभावक भी किताबें खरीद कर परेशान होते है. इसी को देखते हुए सीबीएसइ ने अब क्लास वन से 8वीं तक एनसीइआरटी के बुक्स ही चलाने के निर्देश दिये है.
- बस्ता का बोझ होगा कम इस बार बस्ता का बोझ होगा कम. अभिभावकों के जेब ढीली नहीं होगी. क्योंकि इस बार हर क्लास में 25 फीसदी किताबें कम हो जायेगी. इसके लिए सीबीएसइ ने अभी से निर्देश देना शुरू कर दिया है. सीबीएसइ के अनुसार कोई भी स्कूल एनसीइआरटी के बुक्स के अलावा दूसरा बुक्स नहीं चलायेगा. सीबीएसइ की माने तो अधिकांश स्कूलों की शिकायत होती है कि एनसीइआरटी की बुक्स समय पर नहीं मिल पाता है. इस कारण मजबूरी मे प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक्स चलानी पड़ती है. लेकिन यह दिक्कत इस बार नहीं होगा. क्योंकि सीबीएसइ इस बार एनसीइआरटी की बुक्स खुद ही स्कूलों को ऑन लाइन भेजेगी.
कोटएनसीइआरटी की बुक्स इस बार समय पर स्कूलो को उपलब्ध हो जायेगा. इसके लिए सीबीएसइ ने तैयारी शुरू कर दी है. इस बार अॉन लाइन ही बुक्स मिल जायेगा. लेकिन यह सुविधा मान्यता प्राप्त स्कूलों को ही मिल पायेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ \\B

मोबाइल के साथ पकड़े गये तो मैट्रिक परीक्षा से होंगे निष्कासित

- इंटर की परीक्षा को देखते हुए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने लिया निर्णय

संवाददाता, पटनामैट्रिक की परीक्षा में किसी परीक्षार्थी को मोबाइल लाने की इजाजत नहीं दी जायेगी. इंटर परीक्षा के दौरान लगभग हर दिन परीक्षा के दौरान ही प्रश्न पत्र वाट्सअप पर वायरल होने की शिकायत के बाद बिहार बोर्ड ने यह निर्णय लिया है. परीक्षा हॉल में परीक्षार्थी के पास मोबाइल पाये जाने पर उसे परीक्षा से निष्कासित कर दिया जायेगा. समिति के अध्यक्ष प्रो. लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि इस बार चिट के साथ मोबाइल की भी गहन चेकिंग की जायेगी. मोबाइल पर प्रश्न पत्र भेजने की अफवाहों से परीक्षा के माहौल पर थोड़ी देर के लिए काफी असर डालता रहा. इसको देखते हुए तमाम जिलाधिकारी से मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने को कहा है.
- 44 सौ सीसी टीवी कैमरे के नजर में होंगे परीक्षार्थी मैट्रिक की परीक्षा के लिए प्रदेश भर में 1309 परीक्षा केंद्र बनाये गये है. हर परीक्षा केंद्र के बाहर सीसी टीवी कैमरा लगाया जायेगा. कुल 44 सौ सीसी टीवी कैमरा लगाया जायेगा. संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर सीसी टीवी कैमरा की संख्या चार से पांच होगी. सीसी टीवी कैमरा लगाने के लिए तमाम केंद्रों को पैसे भी दे दिया गया है. सीसी टीवी कैमरे की मॉनिटरिंग संबंधित जिले के जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी के द्वारा किया जायेगा.
- उत्तर पुस्तिका पहुंच गया केंद्रों पर मैट्रिक की परीक्षा के लिए तमाम परीक्षा केंद्रों पर उत्तर पुस्तिका पहुुंच चुका है. प्रश्न पत्र भी भेेजने की तैयारी चल रही है. एडमिट कार्ड वितरण का काम भी शुरू हो चुका है. वैसे आठ मार्च को बोर्ड के वेबसाइट पर भी एडमिट कार्ड डाल दिया जायेगा. समिति की ओर से कंट्रोल रूम बनाया गया है. 10 मार्च से 18 मार्च तक कंट्रोल रूम काम करेगा. 

इंटर कृषि विज्ञान का सिलेबस तो बना, अतिरिक्त विषय की जानकारी नहीं

अगस्त में रजिस्ट्रेशन और अतिरिक्त विषय नहीं ले पाये हैं छात्र

रिंकू झा, पटनाकृषि विज्ञान की पढ़ाई 2015 से शुरू हो गया. बिहार के ग्यारह उच्च विद्यालय में कृषि विज्ञान की पढ़ाई चल रही है. इन विद्यालयो में लगभग 360 छात्र-छात्राओं ने नामांकन भी ले लिया है. सिलेबस भी बन चुका है. 500 अंक के थ्योरी और प्रैक्टिकल के बारे में भी जानकारी दी जा चुकी है. लेकिन अभी तक अतिरिक्त विषय के बारे में क्लियर नहीं किया गया है. मैथ और बायोलॉजी में अतिरिक्त विषय रखने का प्रावधान है, ऐसे में कृषि विज्ञान लेने वाले छात्र में अतिरिक्त विषय लेना चाहते है. लेकिन अभी तक इसे क्लियर नहीं गया है. इसको लेकर छात्र अब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पास आवेदन दिये है. छात्र यह जानना चाहते है कि वो अतिरिक्त विषय के रूप में कौन से विषय को रख सकते है.
- अगस्त में होगा रजिस्ट्रेशन, अभी तक जानकारी नहीं कृषि विज्ञान से इंटर की परीक्षा पहली बार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति 2017 में लेगी. इसको लेकर छात्रों का रजिस्ट्रेशन 11वीं में अगस्त में करवाया जायेगा. रजिस्ट्रेशन के समय में ही विषय के बारे में जानकारी दी जाती है. अगर तब तक अतिरिक्त विषय के बारे में जानकारी छात्राें नहीं मिलेगी तो वो अतिरिक्त विषय नहीं ले पायेंगे. छात्रों के अनुसार बोर्ड अभी तक क्लियर नहीं किया है. इससे हमें कंफ्यूजन में है.
- अतिरिक्त विषय से इंटर चेंज करने में मिलती है मदद चौथे विषय के रूप में अतिरिक्त विषय छात्र रखना चाहते है. इससे छात्रों को कई फायदें होते है. अगर किसी मुख्य विषय में अंक कम आते है, लेकिन अतिरिक्त विषय में अंक अधिक आ जाते हैं तो अतिरिक्त विषय को इंटर चेंज करने की सुविधा छात्रों को मिल जाती है. इससे कुल अंक में छात्रों को फायदा हो जाता है.
ऐसा होता है इंटर का सिलेबस मैथ स्टीम के छात्रों के लिए
मुख्य विषय - मैथ (100 का), फिजिक्स (100 का), केमेस्ट्री (100 का)अतिरिक्त विषय - कंप्यूटर, वेब टेक्नोलॉजी
भाषा - 100 की अंटरनेटिव इंगलिश के साथ 14 अगल-अगल भाषा ले सकते है, 50 की एनआरबी, 50 की इंगलिश या हिंदी बायोलॉजी के छात्रों के लिए
मुख्य विषय - बायोलॉजी (100 का), फिजिक्स (100 का), केमेस्ट्री (100 का)अतिरिक्त विषय - मैथ, कंप्यूटर, वेब टेक्नोलॉजी
भाषा - 100 की अंटरनेटिव इंगलिश के साथ 14 अगल-अगल भाषा ले सकते है, 50 की एनआरबी, 50 की इंगलिश या हिंदी कृषि के छात्रों के लिए
मुख्य विषय - बायोलॉजी (100 का), कृषि (100 का), केमेस्ट्री (100 का)अतिरिक्त विषय - नहीं रखा गया है
भाषा - 100 की अंटरनेटिव इंगलिश के साथ 14 अगल-अगल भाषा ले सकते है, 50 की एनआरबी, 50 की इंगलिश या हिंदी इन विद्यालयाें में होता है कृषि विज्ञान की पढ़ाई
- गवर्नमेंट हाई स्कूल, नौबतपुर, पटना - गवर्नमेंट हाई स्कूल, भगवानपुर, राती, वैशाली
- गवर्नमेंट हाई स्कूल, कुमारबाग, बेतिया - गवर्नमेंट हाई स्कूल, टर्की, मुजफ्फरपुर
- गवर्नमेंट हाई स्कूल, कुलहंता, पाटोरी, दरभंगा - गवर्नमेंट हाई स्कूल, वीरपुर, सुपौल
- गवर्नमेंट हाई स्कूल, श्रीनगर, पूर्णिया - गवर्नमेंट हाई स्कूल, कोधा, कटिहार
- गवर्नमेंट हाई स्कूल, लथलथ, जमुई - गवर्नमेंट हाई स्कूल, हवेली खगड़पुर, मुंगेर 

इंटर के मूल्यांकन केंद्रों पर लगाये जायेंगे जैमर

उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर के साथ परीक्षक के होंगे फोटोग्राफ

रिंकू झा, पटनाइंटर के मूल्यांकन केंद्र पर इस बार परिंदा भी पर नहीं मार सके, इसकी तैयारी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने कर ली है. इस बार मूल्यांकन केंद्रों पर जैमर लगाये जायेंगे. पहली बार समिति की ओर से मूल्यांकन केंद्र पर जैमर की व्यवस्था की जा रही है. 75 मूल्यांकन केंद्र पर 75 जैमर होंगे, इससे मूल्यांकन के दौरान परीक्षक की लापरवाही को पकड़ा जा सकेगा. इसके अलावा चाहते हुए भी परीक्षक अपने मोबाइल का उपयोग नहीं कर पायेंगे. समिति द्वारा यह फैसला लिया गया है कि इस बार मूल्यांकन के दौरान परीक्षक को बाहर जाने की इजाजत नहीं होगी. अगर कोई परीक्षक बाहर जायेंगे तो उन्हें दोबारा मूल्यांकन नहीं करने दिया जायेगा.
- मूल्यांकन केंद्र पर फोटो के साथ आने का मिला निर्देश इस बार इंटर के मूल्यांकन करने के लिए हर परीक्षक को अपना फोटाेग्राफ लेकर आना होगा. इस बार हस्ताक्षर के साथ हर परीक्षक का फोटोग्राफ भी केंद्रों पर रखा जायेगा. समिति से मिली जानकारी के अनुसार हर केंद्र पर एक रजिस्टर होगा. इस रजिस्टर पर परीक्षक का नाम दर्ज होगा. अपने नाम के आगे परीक्षक अपना विषय लिखेंगे और हस्ताक्षर करेंगे और अपनी फोटो लगायेंगे. इससे अगर कोई एग्जामिनर कॉपी जांचने में गलती करेंगे तो उन्हें आसानी से पकड़ा जा सकेगा. इसके अलावा यह पता चलेगा कि कौन विषय की उत्तर पुस्तिका किस एग्जामिनर ने जांची.
- नंबर देने में कोताही ना बरते परीक्षकइंटर के मूल्यांकन को लेकर मूल्यांकन केंद्रों के निदेशकों के साथ एक बैठक रविवार को समिति कार्यालय में आयोजित किया गया. इस मौके पर 76 मूल्यांकन केंद्रों के निदेशक मौजूद थे. समिति के अध्यक्ष प्रो. लालकेश्वर प्रसाद सिंह ने तमाम निदेशक से कहा कि उत्तर पुस्तिका जांच में किसी तरह की कोताही माफ नहीं की जायेगी. हर उत्तर पुस्तिका की सही से जांच हो. हर उत्तर में सही से अंक दिये जायें. स्टेप वाइज मार्किंग को पूरा फाॅलो किया जायें. दो घंटे तक चले बैठक में मूल्यांकन संबंधित कई चीजों की जानकारी दी गयी.
- डीएम ऑफिस से जुड़ेगा मूल्यांकन केंद्र का सीसी टीवी कैमराइंटर के हर मूल्यांकन केंद्र के हर कमरे में सीसी टीवी कैमरा लगाया जायेगा. सीसी टीवी कैमरा से परीक्षक की मॉनिटरिंग संबंधित जिले के जिलाधिकारी द्वारा किया जायेगा. हर मूल्यांकन केंद्र पर जिला प्रशासन के एक अधिकारी को रखा जायेगा. समिति की ओर से स्क्रूटनाइजर की व्यवस्था की जायेगी. स्क्रूटनाइजर कोई शिक्षाविद होंगे. जिस विषय का मूल्यांकन जहां पर होगा, वहां पर उसी विषय के स्क्रूटनाइजर होंगे, जो जांचे गये उत्तर पुस्तिका को दुबारा देंखेंगे.
- 22 हजार परीक्षक करेंगे मूल्यांकन इस बार इंटर के मूल्यांकन में समिति की ओर से 22 हजार परीक्षकों को लगाया गया है. 19 मार्च से प्रदेश भर में मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू हो जायेगा. 19 मार्च को हर परीक्षक को ज्वाइन कर लेना है. मूल्यांकन के लिए साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स स्ट्रीम को अलग-अलग रखा गया है.
कोटइंटर के मूल्यांकन को लेकर हमारी तैयारी चल रही है. इस बार मूल्यांकन में गलती करने वाले परीक्षक पर कार्रवाई की जायेगी. परीक्षार्थी ने बिना नकल की परीक्षा दिया है, इस कारण उत्तर पुस्तिका की जांच में अंक सही से देने का निर्देश एग्जामिनर को दिया गया है. अंकों में हेराफेरी या कम देेन वाले परीक्षक की लिस्ट तैयार किया जायेगा.
प्रो. लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति

Wednesday, March 2, 2016

तेजाब पीड़िता के हक की करती बात, मुफ्त इलाज के साथ विकलांगता का दिलवाया दर्जा

- लातूर से आकर बिहार में 14 साल से कर रही समाज सेवा 

संवाददाता, पटना
कुछ लोग जीते ही है बस दूसरों की खुशी के लिए. अब ये खुशी अगर अपने आस पास नहीं मिले तो वो कहीं और जाकर इस खुशी को ढूढ़ने की कोशिश करते है. इन्हीं में से एक है पटना की वर्षा. महाराष्ट्र के लातूर जिले की रहने वाली वर्षा की सारी पढ़ाई लिखाई भले महाराष्ट्र में हुई. लेकिन अपना कर्मभूमि उन्होंने बिहार को चूना. 2002 में वर्षा पटना आयी. शुरूआत में तो वो कई समाजिक संस्थान से जुड़ी रही. भूमिहीन लोगों के बीच रह कर काम किया. दलितों और बच्चों के बीच काम करते हुए वर्षा के सामने तेजाब पीड़िता के मामले आने शुरू हुए. तेजाब पीड़िता के मामले थाना में दर्ज नहीं होते थे और ना ही इलाज के लिए सरकार से सही मुआवजा की राशि की मिलती थी. यहां से वर्षा ने लड़ाई लड़नी शुरू किया. मनेर की रहने वाली चंचल पर गांव का ही एक लड़का ने तेजाब फेंक दिया था. चंचल के इलाज और मुआवजा दिलाने की लड़ाई में वर्षा को पता चला कि तेजाब पीड़िता को 25 हजार तक ही मुआवजे की राशि मिलती है. इतना ही नहीं तेजाब पीड़िता के मामले थाना में भी दर्ज नहीं होते है.  हर परिस्थिति को देखते हुए वर्षा ने 2012 में सुप्रीम कोर्ट में एक पीआइएल दर्ज करवाया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब पीड़िता चंचल के इलाज की राशि 13 लाख करने का आदेश दिया. इसके अलावा तेजाब पीड़िता को विकलांग का दर्जा सुप्रीम कोर्ट से मिला. साथ में सरकारी और प्राइवेट हास्पीटल में तेजाब पीड़िता के लिए मुफ्त इलाज की छूट मिली. अगर कोई हास्पीटल इलाज नहीं करने तो उसके खिलाफ अवमानना का केस दर्ज होगा. तेजाब पीड़िता को सुप्रीम कोर्ट से अधिकार दिलवाने के बाद से अब तक वर्षा ने कई तेजाब पीड़िता को उनका हक दिलवाया है. इसके अलावा अब वर्षा काे दूसरे स्टेट से भी बुलावा आता है. लगभग दस से उपर तेजाब पीड़िता की मदद कर चुकी वर्षा के प्रयास के तेजाब फेंकने वाले को सजा भी हुआ है. हाल में वर्षा के पास असम की निरूपमा तेजाब पीड़िता का मामला आया था. वर्षा निरूपमा को भी सारी सुविधाएं दिलवायी है. इन निर्दोष लड़कियों के बीच काम करते हुए वर्षा को काफी सूकुन मिलता है. पूरी जिंदगी इन लड़कियों के उपर समर्पित कर चुकी वर्षा ने उन तमाम लड़कियों से अपील की है कि अपनी हक की लड़ाई खुद लड़े. किसी चीज से डरे नहीं और ना ही मन में बात दबा कर रखें. अपनी आवाज खुद बने तभी सही हक मिलेगा.

इंटर में शादी हो गयी, हार नहीं मानी, सपना किया साकार

 मृगनैनी कुमारी ने अपने शौक को ही बना लिया अपना कैरियर 

संवाददाता, पटना
हर किसी के अंदर एक कला छुपी रहती है. बस जरूरत होता है, इसे बाहर निकालने की. कई बार यह शौक या हॉवी के रूप में बाहर आता भी है, पर यह अधिक आगे नहीं चल पाता है और दब कर रह जाता है. हमारे समाज में ऐसे भी लोग है जो अपने शौक काे ही अपना कैरियर का रूप दे डालते है. ऐसा ही एक उदाहरण बनी है मृगनैनी कुमारी. इंटर में ही शादी और परिवार की जिम्मेवारी आ जाने के बावजूद मृगनैनी से हिम्मत नहीं हारी. परिवार की जिम्मेवारी को पूरी तरह से निभाने के साथ-साथ पढ़ाई पूरी किया. इसके साथ अपने शौक को रोजगार का माध्यम बना डाला.
- कोलकाता के जूट आर्ट को बना दिया बिहार की पहचान
मृगनैनी कुमारी को बचपन से ही हैंडक्राफ्ट में काफी शौक था. फालतू पड़ी हुई चीजों को भी आर्ट का रूप दे देती थी. हमेशा कुछ नया प्रयोग करने के बारे में सोचती रहती थी. लेकिन जल्द शादी हो जाने के कारण मृगनैनी कुमारी के सपने दब कर रह गये. मृगनैनी कुमारी ने बताया कि शादी के बाद सारा कुछ छूट गया. लेकिन मैने हिम्मत नहीं हारी. परिवार की जिम्मेवारी को पूरा किया. बच्चे जब बड़े हो गये, स्कूल जाने लगे तो घर पर ही रह कर रोजगार करने की सोचने लगी. हैंडीक्राफ्ट के अपने शौक को फिर शुरू किया. इस बीच एक बार कोलकाता जाने का मौका मिला. वहां पर जूट आर्ट को देखी. फिर मैने ट्रेनिंग भी लिया. आज मै जूट आर्ट को एक अलग पहचान दे रही हूं. बिहारी लुक से इस आर्ट को आगे बढ़ा रही हूं. मेरे इस आर्ट में पटुआ से समान बनाया जाता है. अब इसकी पहचान कोलकाता जूट आर्ट से नहीं बल्कि बिहार के जूट आर्ट से होने लगा है.
- दूसरों को रोजगार दे रही है मृगनैनी
परिवार की जिम्मेवारी संभालते हुए मृगनैनी कुमारी खुद तो नौकरी नहीं किया, लेकिन आज वो इस जगह पर खड़ी है जहां दूसरी महिलाओं को रोजगार दे रही है. मृगनैनी कुमारी ने बताया कि शुरू में मै अकेले ही सारा कुछ करती थी. नये प्रयोग के बारे में सोचती थी, उसे स्केच का रूप देती, फिर उसे आर्ट से रूप में गढ़ती थी. लेकिन ये सारे काम करने में मुझे काफी समय लग जाता था. इसके बाद मै दूसरी महिलाओं को इकट्ठा करना शुरू किया. उन्हें ट्रेनिंग दी. अभी मेरे पास एेसी 25 महिलाएं है जो इस आर्ट से जुड़ी है.
- एक हजार का बिजनेस अब दो लाख पर पहुंच गया
मृगनैनी कुमारी ने एक हजार रूपये की पूंजी लगा कर रोजगार शुरू किया था. अब मृगनैनी का टर्न ओवर दो लाख तक पहुंच गया है. जूट आर्ट के तौर पर घर के सजावट के अलावा बैग, मूर्तियां आदि भी मृगनैनी बनाती है. मृगनैनी कुमारी ने बताया कि देश में कहीं पर भी कोई मेला लगता है तो मै वहां पर जाती हूं. बिहार उद्योग विभाग की ओर से 2011-12 में स्टेट अवार्ड से सम्मानित हो चुकी मृगनैनी कुमारी को 2014 में उपेंद्र महारथी संस्थान की ओर से भी बेस्ट स्टॉल का अवार्ड मिला था. सूरजकुंज मेला, दिल्ली हाट, प्रगति मैदान, सोनपुर मेला आदि में भी मृगनैनी कुमारी अपना स्टॉल लगाती है.