Rinku Jha
Sunday, October 11, 2015
नेता जी नहीं करेंगे हमारे मुद्दों की बात तो डालेंगे नोटा पर वोट
- कई संगठन चला रहे नोटा वोटिंग पर कैंपेन
संवाददाता, पटना
जनता के विरोध का सामना तो हमेशा ही सरकार को करना पड़ता है. लेकिन पहली बार इस विरोध का सामना मौजूदा तमाम राजनीतिक पार्टियों को करना पड़ेगा. जनता मतदान करने तो निकलेगी, लेकिन मतदान किसी पार्टी या नेता को नहीं करेगी, बल्कि नोटा का बटन दबा कर अपना विराेध प्रकट करेगी. जी हां, बिहार विधानसभा चुनाव में पहली बार लोगों ने नोटा के वोट को अपना हथियार बना लिया है. जहां कुछ लोगों ने ग्रुप बना कर नोटा का प्रचार कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग नोटा का ही बटन दबाने की बात कर रहे है. सोशल साइट्स के अलावा लोकल लेबल पर भी नोटा संबंधित कैंपेन कई ग्रुप वाले कर रहे हैं.
नोटा पर दे वोट, चल रहा कंपैनिंग
वोट जरूर दे. मतदान के प्रति लोगों में अवेयरनेस करने का सिलसिला चल रहा है. लेकिन वहीं कुछ ग्रुप ऐसे भी है जो नोटा पर वोट देने का कंपैनिंग चला रहे है. मौजूदा तमाम नेताओं के एजेंडे में उनके मुद्दों की बात नहीं होने के कारण नोट पर वोट देकर वो अपना विरोध व्यक्त करना चाहते है. फेसबुक पर अपना ग्रुप बना चुके फरीद आलम ने बताया कि नेता बदल जाते है, लेकिन विचार नहीं बदलता है. जनता की बात कोई नहीं करता है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने नोटा का आप्सन दिया है. मतदान हमारा अधिकार है. मतदान करने तो निकलेंगे, लेकिन कोई नेता नहीं चाहिए, बस नोटा का बटन दबाना है.
जनता के संघर्ष नहीं आते है मुददों में
बिहार के कई ऐसे जिले है जहां की कई ऐसे मुद्दें है जो सीधे वहां के जनता को जुड़े है. नोटा बटन का कंपैन कर रहे पार्थ सरकार ने बताया कि रोहतास, कैमूर, भोजपुर जिले में कई गांवों की हालत ऐसी है कि शराब के कारण हर घर में लाेग मर रहे है. महिलाएं विधवा हो रही है. लेकिन सरकार का इस पर कोई ध्यान नहीं है. इन गांवों की महिलाएं लगातार शराब पर पाबंदी लगाने की मांग कर रही है. अब वो महिलाएं नोटा के माध्यम से अपना विराेध करने की सोच रही है. ऐसे कई उदाहरण हैं जिसमें लोग अपना विरोध नोटा के बटन दबा कर करना चाह रहे है.
कोट
लोकल लेबल पर लोगों की कई ऐसी समस्याएं है जिस पर किसी भी राजनीतिक पार्टी के नेताओं का ध्यान नहीं रहता है. ऐसे में इस बार नोटा पर ही वोट देने का फैसला हम लोगों ने किया है. सरकार तो बदलती है, लेकिन मुद्दे नहीं बदलते हैं. इस कारण हम लोगों ने इसकी सूचना चुनाव आयोग को भी दिया है. और नोटा का कैंपेन चला रहे है.
सतीश, सदस्य, नोटा कैंपेन
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