Wednesday, October 28, 2015

वोट डालने को एफआइआर किया, फिर भी नहीं नाम जुड़ा


एंकर स्टोरी -1
- राजेंद्र नगर के रहने वाले जगदीश कुमार इस बार भी नहीं डाल पायें वोट संवाददाता, पटना
वोटर पहचान पत्र तो है, लेकिन वोट नहीं डालने दिया गया. हर बार अपना नाम वोटर लिस्ट में खोजते है, लेकिन उनका नाम गायब रहता है. राजेंद्र नगर के रहने वाले जगदीश कुमार पिछले तीन बार से अपने मतदान करने के अधिकार से वंचित हो रहे है. वोट देने के अधिकार को लेकर जगदीश कुमार ने कदमकुुंआ थाने में 2013 में एफआइआर तक कर डाला. सूचना के अधिकार के तहत जानकारी भी मांगी. 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में नाम डालने का आश्वासन भी मिला, पर जगदीश कुमार को इस बार भी वोट देने का मौका नहीं मिला. बिना जानकारी दिये अधिकार से कर दिया वंचित
मायूस जगदीश कुमार ने बताया कि दो बार से वोट नहीं डाला हूं. बिना जानकारी दिये ही हमारा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया. पेशे से वकील और बिहार इंकमटैक्स वार एसोसिएशन के महासचिव जगदीश कुमार ने कहा कि 2010 में जब वोटर लिस्ट में नाम नहीं था तो मैने एफआइआर किया. उसका कुछ नहीं हुआ. इसके बाद मैने सूचना के अधिकार के तहत लिस्ट से नाम हटाये जाने की जानकारी लिया. पता चला कि टेक्निकल गलती के कारण वोटर लिस्ट में नाम हट गया था. इसके बाद आश्वासन मिला कि 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में नाम जुड़ा रहेगा. लेकिन जब आज वोट डालने आया हूं तो आज भी मायूस होकर ही लौट रहा हूं. मेरा नाम इस बार भी वोटर लिस्ट में नहीं है. एंकर स्टोरी - 2
एक वोट डालने पर खर्च किया डेढ़ लाख, फिर भी नहीं दे पायें वोट - इंडोनेशिया से आये आशीष अभिषेक का नाम वोटर लिस्ट से गायब
संवाददाता, पटना
बिहार में विकास हो, शिक्षा में सुधार हो, ऐसी सरकार आयें जिससे बिहार आगे बढ़े, कुछ इसी उदेश्य से आशीष अभिषेक विदेश से अपना वोट डालने को पटना आयें, लेकिन वो वोट नहीं दे पायें. इंडोनेशिया में कोल माइंस में इंजीनियर आशीष अभिषेक का नाम वोटर लिस्ट में नहीं था. इंडोनेशिया से आने और जाने में डेढ़ लाख रुपये का खर्च किया. इसके बावजूद आशीष अभिषेक अपने मतदान का उपयोग नहीं कर पायें.
हर बार 61 बूथ नंबर पर देता था वोट मूल रूप से राजेंद्र नगर के रहने वाले आशीष अभिषेक ने बताया कि इससे पहले 2013 में भी लोक सभा चुनाव में यहां आकर वोट डाला था. उससे पहले 2010 में बिहार विधान सभा चुनाव में भी वोट डाला था. इस बार वोट डालने आये थे. पांच साल में एक बार यह मौका लगता है. लेकिन इस वोटर लिस्ट में नाम नहीं है. मोइनुअहक स्टेडियम में 61 बूथ नंबर पर हर बार वोट डालते आशीष अभिषेक ने बताया कि सुबह 6 बजे ही वोट डालने आ गया था. पर्ची नहीं होने के कारण वोट नहीं डालने दिया गया.
डीएम ऑफिस से भी आ गया वापसतीसरे चरण के मतदान में शामिल होने के लिए आशीष अभिषेक 24 अक्तूबर को ही पटना आ गये थे. पटना आने के साथ जिला प्रशासन आॅफिस से संपर्क किया. आशीष अभिषेक ने बताया कि जिला प्रशासन ऑफिस से पता चला कि नाम जुड़वाना होगा. लेकिन नाम जुड़वाने की अंतिम तिथि 7 अक्तूबर तक ही था. लेकिन फिर भी मुझे लगा कि मै 28 अक्तूबर को वोट दे पाउंगा. लेकिन आज पर्ची खोजा तो नहीं मिला. मै वोट नहीं डाल पाया, इसका बहुत अफसोस है. मेरी पत्नी श्वेता अभिषेक का नाम वोटर लिस्ट में है, लेकिन मेरा नहीं है. पत्नी के नाम में भी चेंज कर दिया है. श्वेता अभिषेक की जगह श्वेता विश्वास कर दिया है.
एंकर स्टोरी - 3
73 साल के विनोद मिश्र हो गये 21 साल के
- फोरेंसिक साइंस विभाग से रिटायर हो चुके विनोद मिश्र के जन्म तिथि और जाति में परिवर्तनसंवाददाता, पटना
चुनाव आयोग भले सुधार करने की कोशिश की हो, लेकिन इस बार भी कई मतदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा. इतना ही नहीं, कई मतदाता तो दूसरे के सामने मजाक बन कर रह गये. कुछ ऐसा ही राजेंद्र नगर के रहने वाले विनोद कुमार के साथ हुआ. चुनाव आयोग की गलती के कारण विनोद कुमार की ना सिर्फ जाति बदल गयी बल्कि 15 साल पहले रिटायर हो चुके विनोद कुमार को 21 साल का युवा बना दिया.
1943 में जन्म लिये विनोद मिश्र हो गये 21 साल के
अपने वोटर कार्ड को दिखा कर विनोद मिश्र ने बताया कि मेरा जन्म छह जून 1943 में हुआ था. लेकिन वोटर कार्ड में जन्म तिथि एक जनवरी 1990 कर दिया गया है. मै 2001 में फोरेंसिक विभाग से रिटायर हो चुका हूं. लेकिन वोटर कार्ड में मेरी उम्र मात्र 21 साल कर दिया गया है. जबकि मेरी उम्र अभी 73 साल की है. चुनाव आयोग की इस गलती से मुझे बहुत परेशानी हो रही है. विनोद कुमार ने बताया कि मेरा पूरा नाम विनोद कुमार मिश्र है. मेरे पिता का नाम बनसंरक्षण मिश्रा है. लेकिन वोटर कार्ड में मेरा नाम विनोद कुमार और पिता का नाम बंषर दास कर दिया है. इससे मेरी जाति भी चुनाव आयोग ने बदल डाली है.  

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