Rinku Jha
Wednesday, October 28, 2015
किराया मिला, अब रामानुज प्रसाद से घर खाली करवायेगा बीएसइबी
- डीएवी के पूर्व प्रिंसिपल ने 16 साल बाद बीएसइबी के किराये को किया क्लियर
संवाददाता, पटना
डीएवी बीएसइबी के प्रिंसिपल के रूप में भले रामानुज प्रसाद अब नही हों, डीएवी ने उनके उपर कई चार्ज लगा कर प्रिंसिपल के पद से निलंबित कर दिया हो, लेकिन बीएसइबी के क्वार्टर का उपयोग अभी भी रामानुज प्रसाद कर रहे है. इतना ही नहीं, बीएसइबी के क्वार्टर का किराया देने में भी रामानुज प्रसाद ने कई-कई साल लगा दिये. लेकिन अब बीएसइबी डीएवी के पूर्व प्रिंसिपल रामानुज प्रसाद पर दबाव बढ़ाने लगी है. तभी तो रामानुज प्रसाद ने बीएसइबी के क्वार्टर का किराया देना शुरू किया है.
1999 से बाकी था किराया
पूर्व प्रिंसिपल रामानुज प्रसाद को बीएसइबी के क्वार्टर रहने को दिया गया था. डीएवी के प्रिंसिपल के तौर पर रामानुज प्रसाद को अपनी बेसिक सैलरी का मात्र 10 फीसदी ही किराया देना था. लेकिन ये मामूली किराया भी उन्हाेंने लगातार नहीं दिया. सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार रामानुज प्रसाद 1999 से अब तक यानी 16 साल तक किराया नहीं दिया. बीच-बीच में एक बार बार उन्होंने एक दो महीने का किराया दिया. बीएसइबी की ओर से रामानुज प्रसाद का कई बार दबाव भी बनाया गया. अब रामानुज प्रसाद किराया देना शुरू किये है.
क्वार्टर खाली करवाने की शुरू होगी प्रक्रिया
किराया मिल जाने के बाद अब बीएसइबी रामानुज प्रसाद से अपने तरीके से क्वार्टर को खाली करवायेगी. बीएसइबी से मिली जानकारी के अनुसार चुकी डीएवी ने अभी रामानुज प्रसाद को केवल निलंबित किया है. प्रिंसिपल के पद से हटाया नहीं है. ऐसे में बीएसइबी अपने तरीके से रामानुज प्रसाद से क्वार्टर खाली करवायेगी.
कोट
रामानुज प्रसाद ने कभी भी रेगुलर किराया नहीं दिया. कई बार इसके लिए नोटिस भी उन्हें अभी दिया गया है. अब वो किराया देना शुरू किये है. बीच-बीच में एक दो महीने का किराया उन्होंने दिया भी है. लेकिन अभी जाकर सारा किराया क्लियर कर रहे है. अब क्वार्टर खाली करवाने की प्रक्रिया हम शुरू करेंगे.
राजीव रंजन, एलएमसी, बीएसइबी
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार पूर्व प्रिंसिपल रामानुज प्रसाद ने 1999 के बाद बीएसइबी को किराया नहीं दिया है. अब वो किराया देना शुरू किये है. डीएवी और बीएसइबी के एग्रीमेंट के अनुसार पूर्व प्रिंसिपल को मात्र बेसिक सैलरी का 10 फीसदी ही किराये के रूप में देना था.
निखिल कुमार, महासचिव, डीएवी टीचर्स एसोसिएशन
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