Rinku Jha
Sunday, October 11, 2015
आठवीं के सिलेबस में 25 फीसदी कटौती, बस्ता का बोझ होगा कम
2016 सेशन से हर स्कूलों को करना है लागू
रिंकू झा, पटना
बस्ता के बोझ से अब बच्चों को निजाद मिल सकेगा. अब स्कूल बैग मम्मी नहीं बल्कि बच्चे खुद अपने कंधे पर उठा सकेगे. अगले सेशन से बस्ता के बोझ से स्टूडेंट को राहत मिलेगी. सीबीएसइ ने क्लास वन से आठवीं तक के क्लास में किताबों की संख्या कम कर दी है. 2016 सेशन के अप्रैल से इसे लागू कर दिया जायेगा. इन क्लासों के लिए चल रहे सिलेबस में 25 फीसदी की कटौती की गयी है.
किताबों की संख्या हो जायेगी कम
सीबीएसइ स्कूलों की बात करें तो सिलेबस में 25 फीसदी कटौती होने से किताबो की संख्या में कमी हो जायेगी. इन क्लासों में उन्हीं किताबों को चलाया जायेगा जो स्टूडेंट के बेसिक नॉलेज के लिए जरूरी होगी. सीबीएसइ की माने तो अभी स्कूलों में एक विषय के कई किताबें चलायी जा रही है. ऐसे में स्टूडेंट के उपर किताबो का बोझ तो बढ़ता ही है, इसके अलावा एक ही विषय की कई किताबों में स्टूडेंट उलझे रह जाते है.
15 से 20 किताबें चल रहे स्कूलों में
क्लास वन की बात करें या सीनियर क्लासेज के, हर क्लास में अभी किताबों की संख्या काफी बढ़ी है. औसतन बात करें तो 15 से 20 किताबें इन क्लासों में चलाये जा रहे है. एक-एक विषय के कई-कई किताबें स्कूल में चलाये जा रहे है. इसमें कई किताबें तो स्कूल वाले खरीदवा देते है, लेकिन उसकी पढ़ाई साल भर नहीं हो पाती है.
जो स्कूल नहीं करेगा लागू, उस पर होगा कार्रवाई
सीबीएसइ ने अप्रैल 2016 से इसे लागू करने की कवायद अभी से शुरू कर दिया है. सीबीएसइ की माने तो सेशन शुरू होने के पहले हर स्कूल को क्लास वाइज सिलेबस भेज दिया जायेगा. इसी सिलेबस के अनुसार उतनी ही संख्या में किताबें चलायी जायेगी. इस नियम को जो स्कूल नहीं मानेगा और इसको लेकर अभिभावक अगर स्कूल के खिलाफ शिकायत करेंगे तो उस स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.
किताबें कम होने से ये सारे होंगे फायदे
- स्टूडेंट अपने सिलेबस को अच्छे से समझ पायेंगे
- स्टूडेंट को हर किताबों के टॉपिक को समझना आसान हो जायेगा - स्टूडेंट का बेसिक नॉलेज बढ़ेगा
- स्टूडेंट किताबो के उलझन में नहीं फंसेंगे, उन्हें कोर्स को लेकर कंफ्यूजन नहीं होगा - बस्ता कम होने से पढ़ाई बोझ नहीं लगेगा
- पढ़ाई के प्रति रूझान बढ़ेगा
कोट
स्कूलों में किताबों की संख्या को कम करने का फैसला बहुत ही अच्छा प्रयास है. इससे बच्चों को बस्ता के बोझ से निजात मिलेगा. अभिभावकों के लिए यह काफी राहत की खबर होगी.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया
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