- पुराने स्टाइल में ही पढ़ाई जाती हैं बिहार बोर्ड में वोकेशनल कोर्स
- एक हजार अंक की परीक्षा देना होता हैं वोकेशनल कोर्स में
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ के पैटर्न पर भले बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने वोकेशनल कोर्स को अपडेट किया, लेकिन अभी तक उसे लागू नहीं किया गया हैं. कई सालों के बाद समिति की ओर से वोकेशनल कोर्स को 2013 में अपडेट किया गया था. लेकिन अभी भी फाइल तक ही वो चल रहा हैं. उसे कोर्स में अप्लाई नहीं किया गया हैं. 1988 में शुरू हुए इंटर में वोकेशनल कोर्स अभी भी पुराने पद्धति पर ही चलाये जा रहे हैं. वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई करने वाले छात्रों के साथ मुश्किल यह होता हैं कि उन्हें एक हजार अंकों की परीक्षा इंटर में देना होता हैं. इसके लिए उन्हें हर विषय में 100-100 अंकों की पढ़ाई करनी होती हैं. काफी लेंदी सिलेबस हो जाने से छात्र वोकेशनल कोर्स करने से कतराते हैं.
- इंटर की पांच सौ अंक और वोकेशनल की होती हैं एक हजार अंक की परीक्षा
इंटरमीडिएट की परीक्षा भी पहले एक हजार अंकों की होती थी. लेकिन समय के साथ इसमें परिवर्तन कर दिया गया. अब इंटर की परीक्षा मात्र पांच सौ अंकों की होगी. वहीं वोकेशनल कोर्स अभी भी एक हजार अंकों का होता हैं. छात्रों को एक हजार अंकों की परीक्षा देनी होती है. वोकेशनल कोर्स के इंचार्ज एसएन सिंह ने बताया कि सिलेबस को अपडेट तो किया गया हैं, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया हैं. अपडेट वाले सिलेबस में कम अंकों की ही पढ़ाई होगी. परीक्षाएं भी कम अंकों का देना होगा, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया हैं. अधिक अंकों की परीक्षा होने से छात्र वोकेशनल कोर्स नहीं करना चाहते हैं. इसके साथ ना तो किताबें मिलती हैं और ना ही टीचर्स है. इसके अलावा हर स्कूलों में वोकेशनल कोर्स के इंफ्रास्क्ट्रचर की काफी कमी हैं.
अभी भी वोकेशनल कोर्स में अंकों का बंटवारा पुराने पद्धति पर
थ्योरी पेपर - 300 अंक
प्रैक्टिकल पेपर - 300 अंक
हिंदी - 100 अंक
इंगलिश - 100 अंक
फाउंडेशन - 100 अंक
रिलेटेड पेपर - 100
इंटरमीडिएट के अंकों का बंटवारा
तीन मुख्य विषय (जैसे साइंस में फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ) - 100, 100, 100 अंकों
हिंदी - 50
इंगलिश - 50
या
इंगलिश - 100
कोट
संघ की ओर से कई बार मांग की गयी है कि वोकेशनल कोर्स के कम अंकों वाला सिलेबस तैयार किया जायें. लेकिन अभी तक पुरानी पद्धति पर ही सिलेबस के अंकों का बंटवारा किया गया हैं. फाउंडेशन की पढ़ाई को बंद कर देना चाहिए. कम अंकों की परीक्षा होगी तो स्टूडेंट्स वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई करेंगे.
वरूण कुमार सिंह, महासचिव, बिहार प्रदेश प्लस टू व्यावसायिक शिक्षा संघ
- एक हजार अंक की परीक्षा देना होता हैं वोकेशनल कोर्स में
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ के पैटर्न पर भले बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने वोकेशनल कोर्स को अपडेट किया, लेकिन अभी तक उसे लागू नहीं किया गया हैं. कई सालों के बाद समिति की ओर से वोकेशनल कोर्स को 2013 में अपडेट किया गया था. लेकिन अभी भी फाइल तक ही वो चल रहा हैं. उसे कोर्स में अप्लाई नहीं किया गया हैं. 1988 में शुरू हुए इंटर में वोकेशनल कोर्स अभी भी पुराने पद्धति पर ही चलाये जा रहे हैं. वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई करने वाले छात्रों के साथ मुश्किल यह होता हैं कि उन्हें एक हजार अंकों की परीक्षा इंटर में देना होता हैं. इसके लिए उन्हें हर विषय में 100-100 अंकों की पढ़ाई करनी होती हैं. काफी लेंदी सिलेबस हो जाने से छात्र वोकेशनल कोर्स करने से कतराते हैं.
- इंटर की पांच सौ अंक और वोकेशनल की होती हैं एक हजार अंक की परीक्षा
इंटरमीडिएट की परीक्षा भी पहले एक हजार अंकों की होती थी. लेकिन समय के साथ इसमें परिवर्तन कर दिया गया. अब इंटर की परीक्षा मात्र पांच सौ अंकों की होगी. वहीं वोकेशनल कोर्स अभी भी एक हजार अंकों का होता हैं. छात्रों को एक हजार अंकों की परीक्षा देनी होती है. वोकेशनल कोर्स के इंचार्ज एसएन सिंह ने बताया कि सिलेबस को अपडेट तो किया गया हैं, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया हैं. अपडेट वाले सिलेबस में कम अंकों की ही पढ़ाई होगी. परीक्षाएं भी कम अंकों का देना होगा, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया हैं. अधिक अंकों की परीक्षा होने से छात्र वोकेशनल कोर्स नहीं करना चाहते हैं. इसके साथ ना तो किताबें मिलती हैं और ना ही टीचर्स है. इसके अलावा हर स्कूलों में वोकेशनल कोर्स के इंफ्रास्क्ट्रचर की काफी कमी हैं.
अभी भी वोकेशनल कोर्स में अंकों का बंटवारा पुराने पद्धति पर
थ्योरी पेपर - 300 अंक
प्रैक्टिकल पेपर - 300 अंक
हिंदी - 100 अंक
इंगलिश - 100 अंक
फाउंडेशन - 100 अंक
रिलेटेड पेपर - 100
इंटरमीडिएट के अंकों का बंटवारा
तीन मुख्य विषय (जैसे साइंस में फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ) - 100, 100, 100 अंकों
हिंदी - 50
इंगलिश - 50
या
इंगलिश - 100
कोट
संघ की ओर से कई बार मांग की गयी है कि वोकेशनल कोर्स के कम अंकों वाला सिलेबस तैयार किया जायें. लेकिन अभी तक पुरानी पद्धति पर ही सिलेबस के अंकों का बंटवारा किया गया हैं. फाउंडेशन की पढ़ाई को बंद कर देना चाहिए. कम अंकों की परीक्षा होगी तो स्टूडेंट्स वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई करेंगे.
वरूण कुमार सिंह, महासचिव, बिहार प्रदेश प्लस टू व्यावसायिक शिक्षा संघ
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