Friday, August 7, 2015

महिला सामाख्या के अस्तित्व पर खतरा, नहीं हुआ बजट का अनूमोदन

- आइआइएम अमहदाबाद के रिपोर्ट पर केंद्र सरकार महिला सामाख्या कार्यक्रम को बंद करने का बना रही योजना
संवाददाता, पटना
महिलाओं के अधिकार, उनके कर्तव्य, उनके भविष्य को संवारने का काम महिला सामाख्या करती है. 1992 में शुरू हुआ केंद्र सरकार का महिला सामाख्या कार्यक्रम महिलाओं द्वारा ही संचालित की जाती है. जहां यह कार्यक्रम स्थापना के 25वीं साल में प्रवेश कर गया हैं, वहीं अब इस कार्यक्रम को बंद करने की योजना केंद्र सरकार द्वारा बनायी जा रही है. केंद्र सरकार द्वारा 2015-16 सत्र के लिए अभी तक कोई बजट महिला सामाख्या के पास नहीं भेजा गया है, इस कारण सबला, आत्मा कार्यक्रम को ठप करना पड़ा है. यह जानकारी महिला सामाख्या की राज्य कार्यक्रम सन्वयक कृति ने दिया. महिला सामाख्या ऑफिस में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कृति ने बताया कि 2014 में आइआइएम अहमदाबाद की ओर से देश भर के महिला सामाख्या कार्यक्रम पर सर्वे करवाया गया था. इसकी रिपोर्ट आइआइएम अहमदाबाद द्वारा नवंबर 2014 में दिया गया. रिपोर्ट में कई प्वाइंट में महिला समाख्या पर प्रश्न चिन्ह भी लगाये गये हैं. वहीं कई प्वाइंट पर तारीफ की गयी हैं. कृति ने बताया कि हर साल मार्च के पहले बजट का अनुमोदन हो जाता था. लेकिन अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई बजट नहीं दिया गया है. बजट आने के तीन महीने बाद ही हमारे पास पैसे पहुंचते है. पैसे नहीं होने के कारण हमें कई कार्यक्रम को बंद करना पड़ गया है.
- 21 जिलों में काम करता है महिला समाख्या
महिलाओं को सशिक्तकरण के लिए कई तरह के प्रोग्राम इसके लिए चलाये जाते हैं. देश भर में 11 राज्य में चल रहे यह प्रोग्राम बिहार के 21 जिलों में चलाये जाते है. कृति ने बताया कि बिहार की लगभग चार लाख महिलाएं और किशोरियां इस प्रोग्राम से लाभांवित हो रही है. प्रखंड, पंचायत, राज्य स्तर पर महिला सामाख्या के कार्यक्रम चलाये जा रहें है. अगर यह प्रोग्राम बंद हो जायेगा, तो काफी संख्या में महिलाओं का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा. महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए महिलाओं द्वारा चलाये जाने वाला यह सबसे बड़ा देश का कार्यक्रम है. कृति ने बताया कि महिला सामाख्या की 2015-16 का बजट 13 करोड़ का बनाया गया है.

बिहार के इन जिलों में चलता है महिला सामाख्या का प्रोग्राम
- मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, प. चंपारण, रोहतास, शिवहर, दरभंगा, भोजपुर, कैमूर, गया, सुपौल, किशनगंज, बांका जमुई, पूर्णिया, कटिहार, वैशाली, पूर्वी चंपारण

महिला सामाख्या के बारे में जानकारी
समूहों की संख्या  - 11010
समूहों की महिला सदस्यों की संख्या  -  211729

इन मुददों पर होता हैं काम
- दहेज प्रताड़ना, बलात्कार, घरेलू हिंसा, सामाजिक या अन्य हिंसा

No comments:

Post a Comment