- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में सात वोकेशनल कोर्स चलते है बिना मान्यता के
- मान्यता नहीं होने से पड़ रहा नामांकन पर असर
संवाददाता, पटना
वोकेशनल कोर्स करने से सेल्फ इंप्लाइमेंट का रास्ता साफ होता है. प्लस टू लेवल पर जो भी रिक्तियां केंद्र या राज्य सरकार की ओर से संबंधित पद के लिए निकलता है तो आसानी से उसमें नौकरी भी लग जाती है. लेकिन जब सर्टिफिकेट को संबंधित संस्थान मान्यता ही नहीं देगा तो ऐसे कोर्स करने का फायदा ही क्या होगा. कुछ ऐसा ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के छात्रों के साथ हो रहा है. छात्र वोकेशनल कोर्स तो करते है, लेकिन नौकरी के समय उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है. समिति की ओर से वर्तमान में 25 वोकेशनल कोर्स चलाये जा रहे है . इसमें इंजीनियरिंग और मेडिकल से संबंधित सात वोकेशनल कोर्स को संबंधित संस्थान से मान्यता नहीं मिला हुआ है. इस कारण इन कोर्स को छात्र करते भी है तो उन्हें नौकरी के साथ सेल्फ इंप्लाइमेंट में भी दिक्कतें हो रही है. इसको लेकर आये दिन इंटर काउंसिल में भी छात्र पहुंच रहे है. लेकिन अभी तक इसका कोई समाधान नहीं हुआ है.
- सात कोर्स में पांच नामांकन
इन सात वोकेशनल कोर्स में मात्र पांच नामांकन ही हो पायें. 2015-17 सत्र के लिए इन सातों वोकेशनल कोर्स में नामांकन काफी कम रहा. समिति सूत्रों की माने तो पूरे प्रदेश से सात वोकेशनल कोर्स में मात्र पांच ही नामांकन हो पाया हैं. इन कोर्स के प्रति छात्रों का रूझान अब खत्म हो गया हैं. क्योंकि कोर्स के बावजूद इसकी मान्यता विश्व विद्यालय की ओर से नहीं दिया जाता हैं. इससे छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं. 2015-17 सत्र के लिए प्रदेश भर के 91 स्कूलों में मात्र 15 सौ ही नामांकन हुआ हैं. इसमें इन सात कोर्स में नामांकन नहीं के बराबर हैं.
- बंद करना पड़ सकता हैं ये कोर्स
समिति सूत्रों की माने तो अगर नामांकन की यहीं स्थिति रही तो इन सात वोकेशनल कोर्स को बंद करना पड़ जायेगा. सात वोकेशनल कोर्स की मान्यता के लिए समिति की ओर प्रयास भी किया गया. लेकिन इंफ्रास्ट्रर की कमी के कारण अभी तक मान्यता नहीं मिल पायी. अब समिति के पास समस्या है आ रही हैं इन कोर्स को चलाने के लिए पैसे भी खर्च हो रहें है. इन विषयों के परीक्षा लेने में भी खर्च आता हैं. सारी तैयारी करनी पड़ती हैं. लेकिन इसका फायदा छात्रों को नहीं हो रहा हैं. इस कारण अगर यहीं स्थिति रही तो 2016 में इन कोर्स को बंद कर दिया जायेगा.
- 25 में सात वोकेशनल कोर्स बिना मान्यता के
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के तहत 1988 से वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई शुरू की गयी. शुरुआत में 16 कोर्स वोकेशनल के तहत चलाये जाते थे. लेकिन बाद में 1991 के बाद कुछ और कोर्स को शामिल किया गया, जिसके बाद समिति में 25 वोकेशनल कोर्स हो गये. बिहार और झारखंड जब एक साथ था तो 148 प्लस टू स्कूलों में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई होती थी. झारखंड के अलग होने के बाद वर्तमान में बिहार 91 प्लस टू स्कूलों में वोकेशनल कोर्स चलता है. 22 साल से चल रहे सात वोकेशनल कोर्स को अभी तक मान्यता नहीं दिया गया है.
- एनसीवीटी और नर्सिग काउंसिल से लेनी होगी मान्यता
बिहार बोर्ड के तहत जो इंजीनियरिंग के कोर्स होते है, उन्हें एनसीवीटी (नेशनल काउंसिल ऑफ कंवोकेशन ट्रेनिंग, नयी दिल्ली) से मान्यता लेनी होती है. एनसीवीटी के मापदंड के अनुसार वोकेशनल की पढ़ाई नहीं होने के कारण एनसीवीटी मान्यता नहीं देता है. वहीं हाल मेडिकल संबंधित वोकेशनल कोर्स का है. इन कोर्स को नर्सिग काउंसिल ऑफ बिहार से मान्यता लेनी होती है. तभी बिहार स्तर पर किसी तरह की रिक्तियां निकलने पर छात्रों को नियुक्त किया जायेगा. लेकिन मेडिकल कोर्स भी नर्सिग काउंसिल के मापदंड के अनुसार नहीं चलने के कारण मान्यता से दूर है.
- बस मिलता है ग्रेजुएशन में नामांकन
बिहार बोर्ड से वोकेशनल कोर्स करने के बाद बस छात्रों को ग्रेजुएशन में नामांकन मिलता है. छात्र निहारिका ने बताया कि उसने नर्सिग का कोर्स दो साल पहले किया है. लेकिन अभी तक नौकरी नहीं मिली है. प्राइवेट में कहीं नौकरी मांगने जाती है तो सर्टिफिकेट पर नर्सिंग काउंसिल ऑफ बिहार से मान्यता नहीं होने से लौटा दिया जाता है. कुछ ऐसा ही हाल ऑटो मोबाइल का कोर्स कर चुका प्रदीप सिंह का है. प्रदीप सिंह के अनुसार कोई भी कंपनी सर्टिफिकेट में एनसीवीटी की मान्यता को देखता है.
इन वोकेशनल कोर्स को नहीं है मान्यता
इंजीनियरिंग संबंधित
- लैब टेक्निशियन
- इलेक्ट्रॉनिक
- इलेक्ट्रिकल
- ऑटो मोबाइल
- मेकेनिक सर्विस
मेडिकल संबंधित
- नर्सिग
- हेल्थ वर्कर
- लैब टेक्निशियन
कोर्ट
हमारे पास छात्र अपनी दिक्कतें ले कर आते है. वो दो साल का वोकेशनल कोर्स तो कर लेते है, लेकिन जब नौकरी के लिए जाते है तो उन्हें नहीं मिलती है. क्योंकि बिहार बोर्ड के सर्टिफिकेट पर संबंधित संस्थान की मान्यता नहीं मिली रहती है. इसका नतीजा अब ऐसा हो गया है कि इन कोर्स में छात्र अब नामांकन ही नहीं लेते है. काफी संख्या में छात्र है जो कोर्स करने के बाद ऐसे ही बैठे है.
एसएन सिंह, इंचाजर्, वोकेशनल कोर्स, शास्त्रीनगर गल्र्स हाई स्कूल
कई वोकेशनल कोर्स में इस बार एक भी नामांकन नहीं हुआ हैं. वहीं कई कोर्स में मात्र एक दो ही नामांकन हुआ. वोकेशनल कोर्स के प्रचार प्रसार की जरूरत हैं. जिन सात वोकेशनल कोर्स को मान्यता नहीं मिली हैं, उसके लिए हम प्रयास कर रहें है, लेकिन अगर नहीं मिलेगा तो बाद में इसे बंद करने के अलावा मेरे पास कोई चारा नहीं रहेगा.
श्रीनिवास चंद्र तिवारी, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
- मान्यता नहीं होने से पड़ रहा नामांकन पर असर
संवाददाता, पटना
वोकेशनल कोर्स करने से सेल्फ इंप्लाइमेंट का रास्ता साफ होता है. प्लस टू लेवल पर जो भी रिक्तियां केंद्र या राज्य सरकार की ओर से संबंधित पद के लिए निकलता है तो आसानी से उसमें नौकरी भी लग जाती है. लेकिन जब सर्टिफिकेट को संबंधित संस्थान मान्यता ही नहीं देगा तो ऐसे कोर्स करने का फायदा ही क्या होगा. कुछ ऐसा ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के छात्रों के साथ हो रहा है. छात्र वोकेशनल कोर्स तो करते है, लेकिन नौकरी के समय उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है. समिति की ओर से वर्तमान में 25 वोकेशनल कोर्स चलाये जा रहे है . इसमें इंजीनियरिंग और मेडिकल से संबंधित सात वोकेशनल कोर्स को संबंधित संस्थान से मान्यता नहीं मिला हुआ है. इस कारण इन कोर्स को छात्र करते भी है तो उन्हें नौकरी के साथ सेल्फ इंप्लाइमेंट में भी दिक्कतें हो रही है. इसको लेकर आये दिन इंटर काउंसिल में भी छात्र पहुंच रहे है. लेकिन अभी तक इसका कोई समाधान नहीं हुआ है.
- सात कोर्स में पांच नामांकन
इन सात वोकेशनल कोर्स में मात्र पांच नामांकन ही हो पायें. 2015-17 सत्र के लिए इन सातों वोकेशनल कोर्स में नामांकन काफी कम रहा. समिति सूत्रों की माने तो पूरे प्रदेश से सात वोकेशनल कोर्स में मात्र पांच ही नामांकन हो पाया हैं. इन कोर्स के प्रति छात्रों का रूझान अब खत्म हो गया हैं. क्योंकि कोर्स के बावजूद इसकी मान्यता विश्व विद्यालय की ओर से नहीं दिया जाता हैं. इससे छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं. 2015-17 सत्र के लिए प्रदेश भर के 91 स्कूलों में मात्र 15 सौ ही नामांकन हुआ हैं. इसमें इन सात कोर्स में नामांकन नहीं के बराबर हैं.
- बंद करना पड़ सकता हैं ये कोर्स
समिति सूत्रों की माने तो अगर नामांकन की यहीं स्थिति रही तो इन सात वोकेशनल कोर्स को बंद करना पड़ जायेगा. सात वोकेशनल कोर्स की मान्यता के लिए समिति की ओर प्रयास भी किया गया. लेकिन इंफ्रास्ट्रर की कमी के कारण अभी तक मान्यता नहीं मिल पायी. अब समिति के पास समस्या है आ रही हैं इन कोर्स को चलाने के लिए पैसे भी खर्च हो रहें है. इन विषयों के परीक्षा लेने में भी खर्च आता हैं. सारी तैयारी करनी पड़ती हैं. लेकिन इसका फायदा छात्रों को नहीं हो रहा हैं. इस कारण अगर यहीं स्थिति रही तो 2016 में इन कोर्स को बंद कर दिया जायेगा.
- 25 में सात वोकेशनल कोर्स बिना मान्यता के
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के तहत 1988 से वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई शुरू की गयी. शुरुआत में 16 कोर्स वोकेशनल के तहत चलाये जाते थे. लेकिन बाद में 1991 के बाद कुछ और कोर्स को शामिल किया गया, जिसके बाद समिति में 25 वोकेशनल कोर्स हो गये. बिहार और झारखंड जब एक साथ था तो 148 प्लस टू स्कूलों में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई होती थी. झारखंड के अलग होने के बाद वर्तमान में बिहार 91 प्लस टू स्कूलों में वोकेशनल कोर्स चलता है. 22 साल से चल रहे सात वोकेशनल कोर्स को अभी तक मान्यता नहीं दिया गया है.
- एनसीवीटी और नर्सिग काउंसिल से लेनी होगी मान्यता
बिहार बोर्ड के तहत जो इंजीनियरिंग के कोर्स होते है, उन्हें एनसीवीटी (नेशनल काउंसिल ऑफ कंवोकेशन ट्रेनिंग, नयी दिल्ली) से मान्यता लेनी होती है. एनसीवीटी के मापदंड के अनुसार वोकेशनल की पढ़ाई नहीं होने के कारण एनसीवीटी मान्यता नहीं देता है. वहीं हाल मेडिकल संबंधित वोकेशनल कोर्स का है. इन कोर्स को नर्सिग काउंसिल ऑफ बिहार से मान्यता लेनी होती है. तभी बिहार स्तर पर किसी तरह की रिक्तियां निकलने पर छात्रों को नियुक्त किया जायेगा. लेकिन मेडिकल कोर्स भी नर्सिग काउंसिल के मापदंड के अनुसार नहीं चलने के कारण मान्यता से दूर है.
- बस मिलता है ग्रेजुएशन में नामांकन
बिहार बोर्ड से वोकेशनल कोर्स करने के बाद बस छात्रों को ग्रेजुएशन में नामांकन मिलता है. छात्र निहारिका ने बताया कि उसने नर्सिग का कोर्स दो साल पहले किया है. लेकिन अभी तक नौकरी नहीं मिली है. प्राइवेट में कहीं नौकरी मांगने जाती है तो सर्टिफिकेट पर नर्सिंग काउंसिल ऑफ बिहार से मान्यता नहीं होने से लौटा दिया जाता है. कुछ ऐसा ही हाल ऑटो मोबाइल का कोर्स कर चुका प्रदीप सिंह का है. प्रदीप सिंह के अनुसार कोई भी कंपनी सर्टिफिकेट में एनसीवीटी की मान्यता को देखता है.
इन वोकेशनल कोर्स को नहीं है मान्यता
इंजीनियरिंग संबंधित
- लैब टेक्निशियन
- इलेक्ट्रॉनिक
- इलेक्ट्रिकल
- ऑटो मोबाइल
- मेकेनिक सर्विस
मेडिकल संबंधित
- नर्सिग
- हेल्थ वर्कर
- लैब टेक्निशियन
कोर्ट
हमारे पास छात्र अपनी दिक्कतें ले कर आते है. वो दो साल का वोकेशनल कोर्स तो कर लेते है, लेकिन जब नौकरी के लिए जाते है तो उन्हें नहीं मिलती है. क्योंकि बिहार बोर्ड के सर्टिफिकेट पर संबंधित संस्थान की मान्यता नहीं मिली रहती है. इसका नतीजा अब ऐसा हो गया है कि इन कोर्स में छात्र अब नामांकन ही नहीं लेते है. काफी संख्या में छात्र है जो कोर्स करने के बाद ऐसे ही बैठे है.
एसएन सिंह, इंचाजर्, वोकेशनल कोर्स, शास्त्रीनगर गल्र्स हाई स्कूल
कई वोकेशनल कोर्स में इस बार एक भी नामांकन नहीं हुआ हैं. वहीं कई कोर्स में मात्र एक दो ही नामांकन हुआ. वोकेशनल कोर्स के प्रचार प्रसार की जरूरत हैं. जिन सात वोकेशनल कोर्स को मान्यता नहीं मिली हैं, उसके लिए हम प्रयास कर रहें है, लेकिन अगर नहीं मिलेगा तो बाद में इसे बंद करने के अलावा मेरे पास कोई चारा नहीं रहेगा.
श्रीनिवास चंद्र तिवारी, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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