- नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव के रेटिंग में नहीं बढ़ पाया बिहार
- पूरे प्रदेश से मात्र दस स्कूलों ही हैं सैनिटेशन के रेटिंग में शामिल
संवाददाता, पटना
अपने आस पास की साफ सफाई ही हमें अच्छे नागरिक बना सकता हैं. इसकी शुरुआत हमें जमीनी स्तर से करना होगा. इसी को ध्यान में रख कर सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव की शुरुआत किया. सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत तो किया. इसे स्कूल के कोर्स में भी शामिल किया गया. कोर्स की पढ़ाई में तो सैनिटेशन दिखता है, लेकिन स्कूल के ग्राउंड में यह असर नहीं दिखता है. इस बात का खुलासा सीबीएसइ के खुद के नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव रिपोर्ट में ही सामने आयी है. ऑन लाइन रेटिंग के तहत इसमें स्कूलों को कई पैरामीटर में रखा गया था. इस पैरामीटर के आधार पर ही स्कूलों को ऑन लाइन रेटिंग में रखा गया. स्कूल में हेल्थ को प्रमोट करने के उदेश्य से इसे शुरू किया गया है. देश भर के 16 हजार से अधिक स्कूल इससे जुड़े हुए है. सीबीएसइ ने उन तमाम स्कूलों की लिस्ट जारी किया है जो इस रेटिंग में कहीं ना कहीं अपना जगह बना रहे. वहीं बांकी बचे हुए स्कूल को सीबीएसइ ने रेटिंग से भी बाहर कर दिया है, जहां पर सैनिटेशन को लेकर कोई काम नहीं हो रहा हैं.
- बिहार के दस स्कूल हैं शामिल
सीबीएसइ के रेटिंग में बिहार के दस स्कूलों को शामिल किया गया है. मिनिस्ट्री ऑफ रिसोर्स डेवलपमेंट और मिनिस्ट्री ऑफ अरवन डेवलपमेंट के निर्देश पर सीबीएसइ स्कूलों के लिए ऑन लाइन सैनिटेशन की शुरुआत 2011 में किया गया था. रेटिंग में प्रथम आने वाले को अवार्ड देने का भी प्रावधान है. ऑन लाइन सैनिटेशन रेटिंग में केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, गवर्नमेंट स्कूल, प्राइवेट स्कूल, डीएवी और आर्मी स्कूल को शामिल किया जायेगा.
इन प्वाइंट पर होती है ऑन लाइन रेटिंग
- फूड एंड न्यूट्रिशन
- अपने शरीर के बारे में जानकारी
- पर्सनल, इंवायरमेंटल हाइजिन और सैनिटेशन के बारे में जानकारी
- विहेवियर एंड लाइफ स्कील्स
- फिजिकल फिटनेस
- स्कूल में सेफ इंवायरमेंट
इन प्वाइंट पर होता हैं सैनिटेशन की रेटिंग
केटेगरी - रेटिंग - रिमार्क
91 से 100 फीसदी - ग्रीन - एक्सीलेंट
75 से 90 फीसदी - ब्लू - वेरी गुड, लेकिन सुधार की आवश्यकता है
50 से 74 फीसदी - येलो - फेयर
34 से 49 फीसदी - ब्लैक - पूअर
33 फीसदी से नीचे - रेड - खतरनाक स्थिति
बिहार के इन स्कूलों को दी गयी हैं रेटिंग
स्कूल - रेटिंग
केंद्रीय विद्यालय, जमालपुर - ग्रीन
डीएवी, पूर्वी चंपारण - ग्रीन
केंद्रीय विद्यालय, दरभंगा - ब्लू
केंद्रीय विद्यालय, पूसा - ब्लू
केंद्रीय विद्यालय, पूर्णिया - ब्लू
केंद्रीय विद्यालय, मुजफ्फरपुर - ब्लू
सेंट्रल स्कूल, छपरा - येलो
केंद्रीय विद्यालय, कटिहार - येलो
केंद्रीय विद्यालय, बेगूसराय - येलो
केंद्रीय विद्यालय, गया - येलो
कोट
नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव से हर स्कूल जुड़ा हुआ है. आन लाइन इसकी रेटिंग की जाती है. छह प्वाइंट पर स्कूलों की जांच होती है. 2011 में सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत की थी. पहली बार इसकी लिस्ट सीबीएसइ ने जारी किया है. बिहार से दस स्कूल को इसमें रेटिंग दी गयी है.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोडिनेटर, सीबीएसइ
- पूरे प्रदेश से मात्र दस स्कूलों ही हैं सैनिटेशन के रेटिंग में शामिल
संवाददाता, पटना
अपने आस पास की साफ सफाई ही हमें अच्छे नागरिक बना सकता हैं. इसकी शुरुआत हमें जमीनी स्तर से करना होगा. इसी को ध्यान में रख कर सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव की शुरुआत किया. सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत तो किया. इसे स्कूल के कोर्स में भी शामिल किया गया. कोर्स की पढ़ाई में तो सैनिटेशन दिखता है, लेकिन स्कूल के ग्राउंड में यह असर नहीं दिखता है. इस बात का खुलासा सीबीएसइ के खुद के नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव रिपोर्ट में ही सामने आयी है. ऑन लाइन रेटिंग के तहत इसमें स्कूलों को कई पैरामीटर में रखा गया था. इस पैरामीटर के आधार पर ही स्कूलों को ऑन लाइन रेटिंग में रखा गया. स्कूल में हेल्थ को प्रमोट करने के उदेश्य से इसे शुरू किया गया है. देश भर के 16 हजार से अधिक स्कूल इससे जुड़े हुए है. सीबीएसइ ने उन तमाम स्कूलों की लिस्ट जारी किया है जो इस रेटिंग में कहीं ना कहीं अपना जगह बना रहे. वहीं बांकी बचे हुए स्कूल को सीबीएसइ ने रेटिंग से भी बाहर कर दिया है, जहां पर सैनिटेशन को लेकर कोई काम नहीं हो रहा हैं.
- बिहार के दस स्कूल हैं शामिल
सीबीएसइ के रेटिंग में बिहार के दस स्कूलों को शामिल किया गया है. मिनिस्ट्री ऑफ रिसोर्स डेवलपमेंट और मिनिस्ट्री ऑफ अरवन डेवलपमेंट के निर्देश पर सीबीएसइ स्कूलों के लिए ऑन लाइन सैनिटेशन की शुरुआत 2011 में किया गया था. रेटिंग में प्रथम आने वाले को अवार्ड देने का भी प्रावधान है. ऑन लाइन सैनिटेशन रेटिंग में केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, गवर्नमेंट स्कूल, प्राइवेट स्कूल, डीएवी और आर्मी स्कूल को शामिल किया जायेगा.
इन प्वाइंट पर होती है ऑन लाइन रेटिंग
- फूड एंड न्यूट्रिशन
- अपने शरीर के बारे में जानकारी
- पर्सनल, इंवायरमेंटल हाइजिन और सैनिटेशन के बारे में जानकारी
- विहेवियर एंड लाइफ स्कील्स
- फिजिकल फिटनेस
- स्कूल में सेफ इंवायरमेंट
इन प्वाइंट पर होता हैं सैनिटेशन की रेटिंग
केटेगरी - रेटिंग - रिमार्क
91 से 100 फीसदी - ग्रीन - एक्सीलेंट
75 से 90 फीसदी - ब्लू - वेरी गुड, लेकिन सुधार की आवश्यकता है
50 से 74 फीसदी - येलो - फेयर
34 से 49 फीसदी - ब्लैक - पूअर
33 फीसदी से नीचे - रेड - खतरनाक स्थिति
बिहार के इन स्कूलों को दी गयी हैं रेटिंग
स्कूल - रेटिंग
केंद्रीय विद्यालय, जमालपुर - ग्रीन
डीएवी, पूर्वी चंपारण - ग्रीन
केंद्रीय विद्यालय, दरभंगा - ब्लू
केंद्रीय विद्यालय, पूसा - ब्लू
केंद्रीय विद्यालय, पूर्णिया - ब्लू
केंद्रीय विद्यालय, मुजफ्फरपुर - ब्लू
सेंट्रल स्कूल, छपरा - येलो
केंद्रीय विद्यालय, कटिहार - येलो
केंद्रीय विद्यालय, बेगूसराय - येलो
केंद्रीय विद्यालय, गया - येलो
कोट
नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव से हर स्कूल जुड़ा हुआ है. आन लाइन इसकी रेटिंग की जाती है. छह प्वाइंट पर स्कूलों की जांच होती है. 2011 में सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत की थी. पहली बार इसकी लिस्ट सीबीएसइ ने जारी किया है. बिहार से दस स्कूल को इसमें रेटिंग दी गयी है.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोडिनेटर, सीबीएसइ
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