- अब तक रिकॉर्डिग मेटेरियल ही स्कूल को भेजना होता था
संवाददाता, पटना
असेसमेंट ऑफ स्पीकिंग एंड लिसनिंग स्कील्स (एएसएल) में अब स्कूलों की धांधली नहीं चलेगी. अब स्कूल इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में ना तो मनमानी कर पायेंगे और ना ही लापरवाही करने का मौका उन्हें मिलेगा. सीबीएसइ ने 2015-16 सत्र के लिए एएसएल में चेंज कर दिया है. अब हर स्कूल को एएसएल का टेस्ट की रिकॉडिंग लाइव करनी होगी. इस संबंध में जल्द ही स्कूलों को तमाम निर्देश बोर्ड द्वारा ऑन लाइन भेजा जायेगा. ज्ञात हो कि अभी तक एएसएल की जांच रिकॉडिंग के माध्यम से होता था. हर स्कूलों को एएसएल संबंधित सैंपल पेपर, मेटेरियल आदि सीबीएसइ को रिकॉडिंग करके उपलब्ध करवाना होता था. लेकिन इस बोर्ड ने इसमें चेंज कर दिया है.
- स्कूल नहीं कर पायेंगे मनमानी
सीबीएसइ द्वारा क्लास 9वीं और 10वीं में एएसएल की शुरुआत की गयी थी. 2013-14 सत्र से एएसएल प्रोजेक्ट को शुरू किया गया. इसके तहत हर स्कूलों में टीचर्स को यह जिम्मेवारी दी गयी थी. लैंग्वेज के हर टीचर को एएसएल का टेस्ट लेने का निर्देश दिया गया था. इसके तहत टीचर्स को खुद टेस्ट लेते हुए रिकॉर्डिग करनी थी. सून कर और बोल कर लैंग्वेज सीखाने के उदेश्य से इसे शुरू किया गया था. इसमें अधिकांश स्कूल इसमें मनमाने रूप से अवरेज मार्किग कर देते थे. स्टूडेंट्स का ना तो रिकॉर्डिग किया गया और ना ही टेस्ट लिया जाता था. बस मार्क्स दे दिये जाते थे.
- 10 अंक मिलता है एएसएल के लिए
9वीं और 10वीं क्लास के लिए एसए (समेटिव असेसमेंट) वन और एसए-टू दोनों ही के लिए अलग-अलग टेस्ट लिये जाते है. दोनों के लिए ही 10-10 अंकों की परीक्षाएं इसके तहत ली जाती है. 20 अंकों के इस टेस्ट में लैंग्वेज की जानकारी स्टूडेंट्स को कितना है, इसकी जांच की जाती है.
कोट
एएसएल लागू तो कर दिया गया है. लेकिन प्रॉपर वे में इसे स्कूलों में लागू नहीं किया जा सका है. 2015-16 से इसमें चेंज किया गया है. अब स्कूलों को इसकी रिकॉर्डिेग नहीं बल्कि लाइव रिपोर्ट तैयार करना होगा. इसके लिए स्कूलों को निर्देश ऑन लाइन भेजा जायेगा.
साधना पराशर, एकेडेमिक हेड, सीबीएसइ
संवाददाता, पटना
असेसमेंट ऑफ स्पीकिंग एंड लिसनिंग स्कील्स (एएसएल) में अब स्कूलों की धांधली नहीं चलेगी. अब स्कूल इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में ना तो मनमानी कर पायेंगे और ना ही लापरवाही करने का मौका उन्हें मिलेगा. सीबीएसइ ने 2015-16 सत्र के लिए एएसएल में चेंज कर दिया है. अब हर स्कूल को एएसएल का टेस्ट की रिकॉडिंग लाइव करनी होगी. इस संबंध में जल्द ही स्कूलों को तमाम निर्देश बोर्ड द्वारा ऑन लाइन भेजा जायेगा. ज्ञात हो कि अभी तक एएसएल की जांच रिकॉडिंग के माध्यम से होता था. हर स्कूलों को एएसएल संबंधित सैंपल पेपर, मेटेरियल आदि सीबीएसइ को रिकॉडिंग करके उपलब्ध करवाना होता था. लेकिन इस बोर्ड ने इसमें चेंज कर दिया है.
- स्कूल नहीं कर पायेंगे मनमानी
सीबीएसइ द्वारा क्लास 9वीं और 10वीं में एएसएल की शुरुआत की गयी थी. 2013-14 सत्र से एएसएल प्रोजेक्ट को शुरू किया गया. इसके तहत हर स्कूलों में टीचर्स को यह जिम्मेवारी दी गयी थी. लैंग्वेज के हर टीचर को एएसएल का टेस्ट लेने का निर्देश दिया गया था. इसके तहत टीचर्स को खुद टेस्ट लेते हुए रिकॉर्डिग करनी थी. सून कर और बोल कर लैंग्वेज सीखाने के उदेश्य से इसे शुरू किया गया था. इसमें अधिकांश स्कूल इसमें मनमाने रूप से अवरेज मार्किग कर देते थे. स्टूडेंट्स का ना तो रिकॉर्डिग किया गया और ना ही टेस्ट लिया जाता था. बस मार्क्स दे दिये जाते थे.
- 10 अंक मिलता है एएसएल के लिए
9वीं और 10वीं क्लास के लिए एसए (समेटिव असेसमेंट) वन और एसए-टू दोनों ही के लिए अलग-अलग टेस्ट लिये जाते है. दोनों के लिए ही 10-10 अंकों की परीक्षाएं इसके तहत ली जाती है. 20 अंकों के इस टेस्ट में लैंग्वेज की जानकारी स्टूडेंट्स को कितना है, इसकी जांच की जाती है.
कोट
एएसएल लागू तो कर दिया गया है. लेकिन प्रॉपर वे में इसे स्कूलों में लागू नहीं किया जा सका है. 2015-16 से इसमें चेंज किया गया है. अब स्कूलों को इसकी रिकॉर्डिेग नहीं बल्कि लाइव रिपोर्ट तैयार करना होगा. इसके लिए स्कूलों को निर्देश ऑन लाइन भेजा जायेगा.
साधना पराशर, एकेडेमिक हेड, सीबीएसइ
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