- सीबीएसइ स्कूलों को नोटिस देने की कर रहा तैयारी
- क्लास पांचवीं से 12वीं तक केवल एनसीइआरटी बुक से हो पढ़ाई
पटना
हर सीबीएसइ स्कूलों में एनसीइआरटी की बुक्स से ही पढ़ाई होगी. कोई भी स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक को किसी भी क्लास के लिए लागू नहीं करेगा. सीबीएसइ का निर्देश 2015 सत्र के शुरू होने के साथ ही तमाम स्कूलों को दिया गया था. इस निर्देश के बावजूद स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर्स के बुक चलाये जा रहे है. अब सीबीएसइ उन स्कूलों को नोटिस देने की तैयारी कर रहा है जिन स्कूलों में एनसीइआरटी के बुक नहीं चलाये जा रहे है. ज्ञात हो कि अधिकांश सीबीएसइ स्कूलों में एनसीइआरटी की किताबें कम, प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें अधिक कोर्स में शामिल है. इससे अभिभावकों की जेब पर तो असर हो ही रहा है, इसके अलावा बच्चे भी भारी बस्ते से परेशान हो रहे है.
- छह महीने का दिया समय, होगी कार्रवाई
सीबीएसई ने मई 2015 में नोटिस जारी कर तमाम स्कूलों को केवल एनसीइआरटी की बुक कोर्स में लागू करने की सलाह दिया था. लेकिन इस निर्देश का पालन स्कूलों में नहीं दिख रहा. इसको लेकर अब सीबीएसइ ने स्कूलों को अंतिम मौका दिया है. बोर्ड ने तमाम स्कूलों को अगले छह महीने का समय दिया है. छह महीने में अगर स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक को कोर्स में नहीं निकालता है तो ऐसे में स्कूलों पर जुर्माना लगाया जायेगा. सीबीएसइ ने इसके लिए 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने की बात कहीं है. इसकी सूचना स्कूलों को जल्द से जल्द भेजा जायेगा. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो सीबीएसइ इस कार्रवाई को लेकर काफी सीरियस है.
अभिभावकों की परेशानी
- हजारों रुपये बस किताबों की खरीदारी में लग जाता है
- किताबों की संख्या जरूरत से ज्यादा होने से अभिभावकों का अधिक समय मैनेज करने में लग जाता है
- होमवर्क जरूरत से अधिक मिलता है, जिसे पूरा करवाने में अभिभावक दिन भर परेशान रहते है
- किताबों की खरीदारी तो स्कूल वाले करवा लेते है, लेकिन कई किताबों की पढ़ाई साल भर नहीं हो पाती है
- किताबों की खरीदारी में अभिभावकों के पैसे भी बर्बाद हो जाते है
बच्चे का सिरदर्द बन रहा किताबें
- एक विषय के कई किताबें चलते है
- बच्चे समझ में नहीं पाते कि कौन पहले पढ़े और कौन बाद में पढ़े
- किताबों के बोझ से दबे रहते है बच्चे
- डेली रूटीन की किताबें और नोट बुक ले जाने में उनकी हालत खराब हो जाती है
- बस्ता इतना अधिक भारी हो जाता है कि उसे उठाना संभव नहीं हो पाता है
कोट
हर स्कूल में एनसीइआरटी की ही बुक चलाना है. इसकी सूचना तमाम स्कूलों को दे दिया गया है. लेकिन अभी भी कई स्कूलों में एनसीइआरटी की बुक चलाये नहीं जा रहे है. किसी भी स्कूल में एनसीइआरटी की बुक के अलावा कोई नहीं चलाया जा सकता है. प्राइवेट पब्लिशर्स के बुक को कोर्स में लागू नहीं किया जा सकता है.
जोसफ मैन्यूअल, सचिव, सीबीएसइ
- क्लास पांचवीं से 12वीं तक केवल एनसीइआरटी बुक से हो पढ़ाई
पटना
हर सीबीएसइ स्कूलों में एनसीइआरटी की बुक्स से ही पढ़ाई होगी. कोई भी स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक को किसी भी क्लास के लिए लागू नहीं करेगा. सीबीएसइ का निर्देश 2015 सत्र के शुरू होने के साथ ही तमाम स्कूलों को दिया गया था. इस निर्देश के बावजूद स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर्स के बुक चलाये जा रहे है. अब सीबीएसइ उन स्कूलों को नोटिस देने की तैयारी कर रहा है जिन स्कूलों में एनसीइआरटी के बुक नहीं चलाये जा रहे है. ज्ञात हो कि अधिकांश सीबीएसइ स्कूलों में एनसीइआरटी की किताबें कम, प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें अधिक कोर्स में शामिल है. इससे अभिभावकों की जेब पर तो असर हो ही रहा है, इसके अलावा बच्चे भी भारी बस्ते से परेशान हो रहे है.
- छह महीने का दिया समय, होगी कार्रवाई
सीबीएसई ने मई 2015 में नोटिस जारी कर तमाम स्कूलों को केवल एनसीइआरटी की बुक कोर्स में लागू करने की सलाह दिया था. लेकिन इस निर्देश का पालन स्कूलों में नहीं दिख रहा. इसको लेकर अब सीबीएसइ ने स्कूलों को अंतिम मौका दिया है. बोर्ड ने तमाम स्कूलों को अगले छह महीने का समय दिया है. छह महीने में अगर स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक को कोर्स में नहीं निकालता है तो ऐसे में स्कूलों पर जुर्माना लगाया जायेगा. सीबीएसइ ने इसके लिए 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने की बात कहीं है. इसकी सूचना स्कूलों को जल्द से जल्द भेजा जायेगा. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो सीबीएसइ इस कार्रवाई को लेकर काफी सीरियस है.
अभिभावकों की परेशानी
- हजारों रुपये बस किताबों की खरीदारी में लग जाता है
- किताबों की संख्या जरूरत से ज्यादा होने से अभिभावकों का अधिक समय मैनेज करने में लग जाता है
- होमवर्क जरूरत से अधिक मिलता है, जिसे पूरा करवाने में अभिभावक दिन भर परेशान रहते है
- किताबों की खरीदारी तो स्कूल वाले करवा लेते है, लेकिन कई किताबों की पढ़ाई साल भर नहीं हो पाती है
- किताबों की खरीदारी में अभिभावकों के पैसे भी बर्बाद हो जाते है
बच्चे का सिरदर्द बन रहा किताबें
- एक विषय के कई किताबें चलते है
- बच्चे समझ में नहीं पाते कि कौन पहले पढ़े और कौन बाद में पढ़े
- किताबों के बोझ से दबे रहते है बच्चे
- डेली रूटीन की किताबें और नोट बुक ले जाने में उनकी हालत खराब हो जाती है
- बस्ता इतना अधिक भारी हो जाता है कि उसे उठाना संभव नहीं हो पाता है
कोट
हर स्कूल में एनसीइआरटी की ही बुक चलाना है. इसकी सूचना तमाम स्कूलों को दे दिया गया है. लेकिन अभी भी कई स्कूलों में एनसीइआरटी की बुक चलाये नहीं जा रहे है. किसी भी स्कूल में एनसीइआरटी की बुक के अलावा कोई नहीं चलाया जा सकता है. प्राइवेट पब्लिशर्स के बुक को कोर्स में लागू नहीं किया जा सकता है.
जोसफ मैन्यूअल, सचिव, सीबीएसइ
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