- पटना जोन के एक भी स्कूल को सीबीएसइ ने नहीं दिया कोई जगह
- 2014 के बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट पर निकाला गया टॉप-8 स्कूलों की सूची
संवाददाता, पटना
पढ़ाई अच्छी है, एक्टिविटी में भी ठीक है. स्पोर्ट्स में भी स्कूलों में काम होता है. लेकिन रिजल्ट देने में पटना जोन फिसड्डी है. पटना जोन के रिजल्ट का औसत काफी खराब है. तभी तो सीबीएसइ के टॉप-8 स्कूलों की सूची में पटना जोन का एक भी स्कूल कोई जगह नहीं बना पाया है. बोर्ड की ओर से सोमवार टॉप-8 स्कूलों की सूची निकाली गयी है. देश भर के तमाम जोन से चूने गये इन टॉप-8 स्कूलों का रिजल्ट इस बार सबसे बेस्ट रहा है. इन स्कूलों में इस बार 12वीं का रिजल्ट 90 फीसदी से भी उपर रहा है. इसके तहत चेन्नई जोन से तीन स्कूल, दिल्ली जोन से एक स्कूल, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के दो-दो स्कूल शामिल है.
- इंगलिश और चार विषयों के आधार पर निकाली गयी सूची
सीबीएसइ के 12वीं के रिजल्ट निकालने के बाद बोर्ड की ओर से परीक्षा का विेषण किया गया. विेषण में निकल कर आया कि देश में कुल आठ स्कूल है जिनका इंगलिश और बेस्ट चार विषयों में औसतन रिजल्ट 90 फीसदी के आस-पास रहा है. इन स्कूलों को बोर्ड ने बेस्ट स्कूल माना है. सीबीएसइ ने जहां जोन के रिजल्ट में चेन्नई को बेस्ट जोन माना है वहीं राज्य में तमिलनाडू का रिजल्ट सबसे बेस्ट रहा है. तमिलानाडू में 80.7 फीसदी रिजल्ट इस बार का रहा.
- पटना जोन का स्कूल बेस्ट केटेगरी में शामिल नहीं
ना तो बेस्ट चार विषयों के रिजल्ट में और ना ही इंगलिश में बेस्ट रिजल्ट में पटना जोन के स्कूल अपना स्थान बना पायें है. पटना जोन इस बार 12वीं के रिजल्ट में कही नहीं है. ना तो जोन के रिजल्ट में भी अपना स्थान बोर्ड के पास बना पाया और ना ही स्टेट के रिजल्ट में भी बिहार को कोई स्थान मिल पाया है. बोर्ड की माने तो पटना जोन का रिजल्ट 20के मुकाबले खराब रहा है. यहां के किसी भी स्कूल में रिजल्ट 90 फीसदी तक पहुंच नहीं पायी है. एक भी स्कूल ऐसा नहीं है जहां पर विषयों के अनुसार 90 फीसदी के उपर रिजल्ट हो. पाटलिपुत्र सहोदया के सचिव सीबी सिंह ने बताया कि यहां पर स्टूडेंट्स स्कूल में रेगूलर क्लासेज नहीं करते है. ऐसे में स्कूल की पढ़ाई पर फोकस नहीं होने के कारण स्टूडेंट्स सब्जेक्टिव पढ़ाई को अच्छी तरह से नहीं कर पाते है. स्टूडेंट्स का फोकस प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पर अधिक रहता है. स्टूडेंट्स ऑब्जेक्टिव की पढ़ाई तो कर लेते है. लेकिन सब्जेक्टिव नहीं पढ़ने के कारण वो लॉग प्रश्नों का उत्तर सही से नहीं कर पाते है. इससे पास तो स्टूडेंट्स कर जाते है लेकिन मार्क्स अधिक नहीं ला पाते है.
टीचर व्यू
स्टूडेंट्स का फोकस अब बस इंजीनियरिंग और मेडिकल में जाना रह गया है. वो 12वीं की परीक्षा अच्छे अंक से पास करें इस पर उनका फोकस नहीं रहता है. पूरे दो सालों में बस वो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पर ध्यान देते है. इस कारण रिजल्ट खराब होता है. अभी जेइइ मेन में 12वीं के रिजल्ट को अहमियत दिया गया है तो थोड़ा सुधार हुआ है. इस बार तो कई स्टूडेट्स ऐसे भी थे जो जेइइ मेन मे रिजल्ट अच्छा कर गये लेकिन प्लस टू में फेल हो गये. इसका असर स्कूल के ओवरऑल रिजल्ट पर पड़ता है.
संजय कुमार झा, मैथ टीचर, लोयेला हाई स्कूल
स्कूल की पढ़ाई को फोकस करना होगा. स्कूल का रिजल्ट तमाम स्टूडेंट्स के रिजल्ट पर निर्भर करता है. ऐसे में एक भी स्टूडेंट का रिजल्ट खराब होने से स्कूल के औसत रिजल्ट पर असर होता है. अच्छे मार्क्स लाने के लिए पूरा टेक्स्ट बुक की पढ़ाई करनी होगी. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी और प्लस टू की पढ़ाई की तैयारी दोनों की अलग-अलग चीज है. अभी स्टूडेंट्स का फोकस बस प्लस टू कैसे भी पास कर जाये पर होती है.
एसपी राय, कॉमर्स टीचर, सेंट माइकल हाई स्कूल
कोट
पटना जोन के रिजल्ट खराब होने की मुख्य वजह है कि यहां के स्टूडेंट्स स्कूल की पढ़ाई पर फोकस नहीं करते है. 10वीं की परीक्षा तक तो थोड़ा बहुत स्कूल की पढ़ाई को महत्व देते भी है. लेकिन 11वीं 12वीं में पूरी तरह स्टूडेंट्स कोचिंग की पढ़ाई पर ही निर्भर हो जाते है. ऐसे में रिजल्ट खराब होना नेचुरल है. इस बार पटना जोन का रिजल्ट पिछले साल से भी खराब रहा है.
राजीव रंजन प्रसाद, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ
- 2014 के बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट पर निकाला गया टॉप-8 स्कूलों की सूची
संवाददाता, पटना
पढ़ाई अच्छी है, एक्टिविटी में भी ठीक है. स्पोर्ट्स में भी स्कूलों में काम होता है. लेकिन रिजल्ट देने में पटना जोन फिसड्डी है. पटना जोन के रिजल्ट का औसत काफी खराब है. तभी तो सीबीएसइ के टॉप-8 स्कूलों की सूची में पटना जोन का एक भी स्कूल कोई जगह नहीं बना पाया है. बोर्ड की ओर से सोमवार टॉप-8 स्कूलों की सूची निकाली गयी है. देश भर के तमाम जोन से चूने गये इन टॉप-8 स्कूलों का रिजल्ट इस बार सबसे बेस्ट रहा है. इन स्कूलों में इस बार 12वीं का रिजल्ट 90 फीसदी से भी उपर रहा है. इसके तहत चेन्नई जोन से तीन स्कूल, दिल्ली जोन से एक स्कूल, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के दो-दो स्कूल शामिल है.
- इंगलिश और चार विषयों के आधार पर निकाली गयी सूची
सीबीएसइ के 12वीं के रिजल्ट निकालने के बाद बोर्ड की ओर से परीक्षा का विेषण किया गया. विेषण में निकल कर आया कि देश में कुल आठ स्कूल है जिनका इंगलिश और बेस्ट चार विषयों में औसतन रिजल्ट 90 फीसदी के आस-पास रहा है. इन स्कूलों को बोर्ड ने बेस्ट स्कूल माना है. सीबीएसइ ने जहां जोन के रिजल्ट में चेन्नई को बेस्ट जोन माना है वहीं राज्य में तमिलनाडू का रिजल्ट सबसे बेस्ट रहा है. तमिलानाडू में 80.7 फीसदी रिजल्ट इस बार का रहा.
- पटना जोन का स्कूल बेस्ट केटेगरी में शामिल नहीं
ना तो बेस्ट चार विषयों के रिजल्ट में और ना ही इंगलिश में बेस्ट रिजल्ट में पटना जोन के स्कूल अपना स्थान बना पायें है. पटना जोन इस बार 12वीं के रिजल्ट में कही नहीं है. ना तो जोन के रिजल्ट में भी अपना स्थान बोर्ड के पास बना पाया और ना ही स्टेट के रिजल्ट में भी बिहार को कोई स्थान मिल पाया है. बोर्ड की माने तो पटना जोन का रिजल्ट 20के मुकाबले खराब रहा है. यहां के किसी भी स्कूल में रिजल्ट 90 फीसदी तक पहुंच नहीं पायी है. एक भी स्कूल ऐसा नहीं है जहां पर विषयों के अनुसार 90 फीसदी के उपर रिजल्ट हो. पाटलिपुत्र सहोदया के सचिव सीबी सिंह ने बताया कि यहां पर स्टूडेंट्स स्कूल में रेगूलर क्लासेज नहीं करते है. ऐसे में स्कूल की पढ़ाई पर फोकस नहीं होने के कारण स्टूडेंट्स सब्जेक्टिव पढ़ाई को अच्छी तरह से नहीं कर पाते है. स्टूडेंट्स का फोकस प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पर अधिक रहता है. स्टूडेंट्स ऑब्जेक्टिव की पढ़ाई तो कर लेते है. लेकिन सब्जेक्टिव नहीं पढ़ने के कारण वो लॉग प्रश्नों का उत्तर सही से नहीं कर पाते है. इससे पास तो स्टूडेंट्स कर जाते है लेकिन मार्क्स अधिक नहीं ला पाते है.
टीचर व्यू
स्टूडेंट्स का फोकस अब बस इंजीनियरिंग और मेडिकल में जाना रह गया है. वो 12वीं की परीक्षा अच्छे अंक से पास करें इस पर उनका फोकस नहीं रहता है. पूरे दो सालों में बस वो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पर ध्यान देते है. इस कारण रिजल्ट खराब होता है. अभी जेइइ मेन में 12वीं के रिजल्ट को अहमियत दिया गया है तो थोड़ा सुधार हुआ है. इस बार तो कई स्टूडेट्स ऐसे भी थे जो जेइइ मेन मे रिजल्ट अच्छा कर गये लेकिन प्लस टू में फेल हो गये. इसका असर स्कूल के ओवरऑल रिजल्ट पर पड़ता है.
संजय कुमार झा, मैथ टीचर, लोयेला हाई स्कूल
स्कूल की पढ़ाई को फोकस करना होगा. स्कूल का रिजल्ट तमाम स्टूडेंट्स के रिजल्ट पर निर्भर करता है. ऐसे में एक भी स्टूडेंट का रिजल्ट खराब होने से स्कूल के औसत रिजल्ट पर असर होता है. अच्छे मार्क्स लाने के लिए पूरा टेक्स्ट बुक की पढ़ाई करनी होगी. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी और प्लस टू की पढ़ाई की तैयारी दोनों की अलग-अलग चीज है. अभी स्टूडेंट्स का फोकस बस प्लस टू कैसे भी पास कर जाये पर होती है.
एसपी राय, कॉमर्स टीचर, सेंट माइकल हाई स्कूल
कोट
पटना जोन के रिजल्ट खराब होने की मुख्य वजह है कि यहां के स्टूडेंट्स स्कूल की पढ़ाई पर फोकस नहीं करते है. 10वीं की परीक्षा तक तो थोड़ा बहुत स्कूल की पढ़ाई को महत्व देते भी है. लेकिन 11वीं 12वीं में पूरी तरह स्टूडेंट्स कोचिंग की पढ़ाई पर ही निर्भर हो जाते है. ऐसे में रिजल्ट खराब होना नेचुरल है. इस बार पटना जोन का रिजल्ट पिछले साल से भी खराब रहा है.
राजीव रंजन प्रसाद, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ
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