Saturday, August 22, 2015
Thursday, August 20, 2015
Wednesday, August 19, 2015
Tuesday, August 18, 2015
Sunday, August 16, 2015
छात्रों की सुविधा के लिए बना शिकायत कोषांग
पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के मैट्रिक विंग में शिकायत कोषांग बनाया गया है. इस शिकायत कोषांग में छात्र अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है. दर्ज होने के एक से दो दिनों के अंदर छात्र के शिकायत को दूर किया जायेगा. छात्रों की सुविधा के लिए इस कोषांग को बनाया गया है. हर दिन समिति कार्यालय में पांच सौ से छह सौ के लगभग छात्र और अभिभावक अपना काम करवाने को आते है. लेकिन कई बार छात्रों को महीनों इंतजार के बाद भी काम नहीं होता है. ऐसे में छात्र अपनी शिकायत बोर्ड के पास कर पायेंगे. शिकायत कोषांग में दर्ज सभी मामले को हर दिन खुद सचिव श्रीनिवास चंद्र तिवारी देखेंगे. सचिव श्रीनिवास चंद्र तिवारी ने बताया कि अक्सर छात्र अपनी शिकायत को लेकर बोर्ड का चक्कर लगाते रहते है. ऐसे में छात्र अब अपनी शिकायत शिकायत कोषांग में दर्ज करवा सकते है. छात्रों के शिकायत को दर्ज
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के मैट्रिक विंग में शिकायत कोषांग बनाया गया है. इस शिकायत कोषांग में छात्र अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है. दर्ज होने के एक से दो दिनों के अंदर छात्र के शिकायत को दूर किया जायेगा. छात्रों की सुविधा के लिए इस कोषांग को बनाया गया है. हर दिन समिति कार्यालय में पांच सौ से छह सौ के लगभग छात्र और अभिभावक अपना काम करवाने को आते है. लेकिन कई बार छात्रों को महीनों इंतजार के बाद भी काम नहीं होता है. ऐसे में छात्र अपनी शिकायत बोर्ड के पास कर पायेंगे. शिकायत कोषांग में दर्ज सभी मामले को हर दिन खुद सचिव श्रीनिवास चंद्र तिवारी देखेंगे. सचिव श्रीनिवास चंद्र तिवारी ने बताया कि अक्सर छात्र अपनी शिकायत को लेकर बोर्ड का चक्कर लगाते रहते है. ऐसे में छात्र अब अपनी शिकायत शिकायत कोषांग में दर्ज करवा सकते है. छात्रों के शिकायत को दर्ज
आरआर मीणा बने सीबीएसइ के रीजनल ऑफिसर
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ के पटना रीजनल ऑफिस के प्रभारी के तौर पर आरआर मीणा को रीजनल ऑफिसर बनाया गया है. पहले से डिप्टी सेक्रेटरी के तौर पर कार्यरत आरआर मीणा रश्मि त्रिपाठी के जाने के बाद कार्यभार संभाले है. सीबीएसइ दिल्ली की ओर से अभी नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है. जब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं होग.
सीबीएसइ के पटना रीजनल ऑफिस के प्रभारी के तौर पर आरआर मीणा को रीजनल ऑफिसर बनाया गया है. पहले से डिप्टी सेक्रेटरी के तौर पर कार्यरत आरआर मीणा रश्मि त्रिपाठी के जाने के बाद कार्यभार संभाले है. सीबीएसइ दिल्ली की ओर से अभी नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है. जब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं होग.
लाइफ इंश्योरेंश होगा स्टूडेंट्स का
- एआइसीटीइ ने टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस को जारी किया गाइड लाइन
- तमाम संस्थानों को करने होंगे सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम
पटना
स्टूडेंट्स की जिम्मेवारी जितना अभिभावक की होती है, उतना ही उस संस्थान की होती है जहां पर स्टूडेंट्स शिक्षा लेते है. ऐसे में स्टूडेंट्स के संस्थान कैंपस और कैंपस के बाहर दोनों ही जगहों पर सुरक्षा की जिम्मेवारी उस संस्थान की भी होगी. यह निर्देश ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्टिकल एजुकेशन (एआइसीटीइ) की ओर से जारी किया गया है. इन निर्देश को तमाम टेक्निकल इंस्टीच्यूशंस पर लागू होगा. निर्देश में कहा गया है कि संस्थान की ओर से तमाम स्टूडेंट्स का लाइफ इंश्योरेंस संस्थान को करवाना होगा. लाइफ इंश्योरेंस पर आने वाले खर्च भी वहीं संस्थान देगा. एआइसीटीइ द्वारा सभी संस्थानों को नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. काउंसिल की ओर से इसके लिए गाइडलाइंस भी बनाया गया है. जिसके मुताबिक संस्थानों को सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी. इतना ही नहीं संस्थानों को गाइडलाइंस को कितना फॉलो किया, इसको लेकर काउंसिल को जानकारी भी देगी होगी. गाइडलाइन फॉलो न किये जाने की स्थिति में काउंसिल ने सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी थी.
- सीबीएसइ ने एक साल पहले जारी किया था गाइड लाइन
स्टूडेंट्स की सुरक्षा को लेकर सीबीएसइ ने पहल किया था. सीबीएसइ की ओर से एक साल यानी 2014 दिसंबर में ही स्कूलों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था कायम करने के निर्देश जारी किये गये थे. इसके अंतर्गत स्कूल के अंदर और बाहर कैंपस में कई तरह की सुरक्षा व्यवस्था करने का गाइड लाइन जारी किया गया. इसके अतिरिक्त बोर्ड ने एजुकेशनल टूर को लेकर भी स्कूलों को कई निर्देश दिये थे. एजुकेशन टूर के पहले अभिभावकों की अनुमति जरूरी है. इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस, आई कार्ड आदि संबंधित सुरक्षा निर्देश सीबीएसइ ने स्कूलों को दिया है.
- यूजीसी भी दे चुका है आदेश
यूजीसी द्वारा भी कॉलेजज और यूनिवर्सिटीज को पर्याप्त व्यवस्था बनाने को गाइडलाइंस जारी की गयी थी. यूजीसी से मान्यता प्राप्त तमाम कॉलेजों को निर्देश जारी किया गया था कि हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी का दायित्व है कि कैंपस के अंदर और बाहर स्टूडेंट के सुरक्षा का पूरा ख्याल रखें. इस संबंधित एक गाइड लाइन भी तमाम यूनिवर्सिटी को यूजीसी ने दिया है. अब इसी कड़ी में ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआइसीटीइ) ने भी टेक्निकल इंस्टीच्यूशंस के अंदर व बाहर स्टूडेंट्स के सुरक्षित रखे जाने को लेकर गाइड लाइन जारी किया है.
ये है गाइड लाइन
- संस्थान यह सुनिश्चित करें कि एजुकेशन टूर स्टूडेंट्स के कोर्स करिकुलम संबंधित हैं और कितना लाभदायक है
- सुरक्षा को देखते हुए संस्थान हर स्टूडेंट्स की जानकारी का डाटा बेस तैयार करें
- टूर पर स्टूडेंट्स की निगरानी के लिए ऑटोमैटिक ट्रेकिंग सिस्टम लगाया जायेगा
- हर स्टूडेंट को आई कार्ड जारी किया जायेगा
- इंडस्ट्रियल विजिट को लेकर लोकल ऑथोरिटी को जानकारी देनी होगी
- फील्ड विजिट आदि में शामिल सभी स्टूडेंट्स का लाइफ इंश्योरेंस संस्थानों द्वारा किया जायें
- संस्थानों को अपने खर्च पर करना होगा स्टूडेंट्स का एक्सीडेंट और लाइफ इंश्योरेंस
- टूर ग्रुप में गल्र्स स्टूडेंट्स के साथ फीमेल फैकल्टी अनिवार्य रूप से रहें
- टूर के लिए अभिभावकों की मरजी जानना अनिवार्य होगा
- टूर पर जाने से पहले फैकल्टी को लीडरशिप और फस्र्ट एड आदि को लेकर ट्रेनिंग प्रदान की जायें
- हर स्टूडेंट का फिटनेस चेकअप करवाना होगा
- तमाम संस्थानों को करने होंगे सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम
पटना
स्टूडेंट्स की जिम्मेवारी जितना अभिभावक की होती है, उतना ही उस संस्थान की होती है जहां पर स्टूडेंट्स शिक्षा लेते है. ऐसे में स्टूडेंट्स के संस्थान कैंपस और कैंपस के बाहर दोनों ही जगहों पर सुरक्षा की जिम्मेवारी उस संस्थान की भी होगी. यह निर्देश ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्टिकल एजुकेशन (एआइसीटीइ) की ओर से जारी किया गया है. इन निर्देश को तमाम टेक्निकल इंस्टीच्यूशंस पर लागू होगा. निर्देश में कहा गया है कि संस्थान की ओर से तमाम स्टूडेंट्स का लाइफ इंश्योरेंस संस्थान को करवाना होगा. लाइफ इंश्योरेंस पर आने वाले खर्च भी वहीं संस्थान देगा. एआइसीटीइ द्वारा सभी संस्थानों को नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. काउंसिल की ओर से इसके लिए गाइडलाइंस भी बनाया गया है. जिसके मुताबिक संस्थानों को सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी. इतना ही नहीं संस्थानों को गाइडलाइंस को कितना फॉलो किया, इसको लेकर काउंसिल को जानकारी भी देगी होगी. गाइडलाइन फॉलो न किये जाने की स्थिति में काउंसिल ने सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी थी.
- सीबीएसइ ने एक साल पहले जारी किया था गाइड लाइन
स्टूडेंट्स की सुरक्षा को लेकर सीबीएसइ ने पहल किया था. सीबीएसइ की ओर से एक साल यानी 2014 दिसंबर में ही स्कूलों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था कायम करने के निर्देश जारी किये गये थे. इसके अंतर्गत स्कूल के अंदर और बाहर कैंपस में कई तरह की सुरक्षा व्यवस्था करने का गाइड लाइन जारी किया गया. इसके अतिरिक्त बोर्ड ने एजुकेशनल टूर को लेकर भी स्कूलों को कई निर्देश दिये थे. एजुकेशन टूर के पहले अभिभावकों की अनुमति जरूरी है. इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस, आई कार्ड आदि संबंधित सुरक्षा निर्देश सीबीएसइ ने स्कूलों को दिया है.
- यूजीसी भी दे चुका है आदेश
यूजीसी द्वारा भी कॉलेजज और यूनिवर्सिटीज को पर्याप्त व्यवस्था बनाने को गाइडलाइंस जारी की गयी थी. यूजीसी से मान्यता प्राप्त तमाम कॉलेजों को निर्देश जारी किया गया था कि हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी का दायित्व है कि कैंपस के अंदर और बाहर स्टूडेंट के सुरक्षा का पूरा ख्याल रखें. इस संबंधित एक गाइड लाइन भी तमाम यूनिवर्सिटी को यूजीसी ने दिया है. अब इसी कड़ी में ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआइसीटीइ) ने भी टेक्निकल इंस्टीच्यूशंस के अंदर व बाहर स्टूडेंट्स के सुरक्षित रखे जाने को लेकर गाइड लाइन जारी किया है.
ये है गाइड लाइन
- संस्थान यह सुनिश्चित करें कि एजुकेशन टूर स्टूडेंट्स के कोर्स करिकुलम संबंधित हैं और कितना लाभदायक है
- सुरक्षा को देखते हुए संस्थान हर स्टूडेंट्स की जानकारी का डाटा बेस तैयार करें
- टूर पर स्टूडेंट्स की निगरानी के लिए ऑटोमैटिक ट्रेकिंग सिस्टम लगाया जायेगा
- हर स्टूडेंट को आई कार्ड जारी किया जायेगा
- इंडस्ट्रियल विजिट को लेकर लोकल ऑथोरिटी को जानकारी देनी होगी
- फील्ड विजिट आदि में शामिल सभी स्टूडेंट्स का लाइफ इंश्योरेंस संस्थानों द्वारा किया जायें
- संस्थानों को अपने खर्च पर करना होगा स्टूडेंट्स का एक्सीडेंट और लाइफ इंश्योरेंस
- टूर ग्रुप में गल्र्स स्टूडेंट्स के साथ फीमेल फैकल्टी अनिवार्य रूप से रहें
- टूर के लिए अभिभावकों की मरजी जानना अनिवार्य होगा
- टूर पर जाने से पहले फैकल्टी को लीडरशिप और फस्र्ट एड आदि को लेकर ट्रेनिंग प्रदान की जायें
- हर स्टूडेंट का फिटनेस चेकअप करवाना होगा
सीबीएसइ अब लेगा बैक एकाउंट की जानकारी
- स्कूलों को सीबीएसइ ने दिया निर्देश
- ट्यूशन फी के साथ हर दूसरे चाज्रेज पर सीबीएसइ की होगी अब नजर
पटना
मनमाने रूप से फी बढ़ोतरी, महीने में कई अलग चाज्रेज लेना, जब चाहे फी बढ़ा दिया, अब इन तमाम स्कूलों की मनमानी पर सीबीएसइ ने अलग तरीके का इस्तेमाल करने जा रही है. सीबीएसइ के तमाम स्कूलों को अब अपने बैंक एकाउंट की जानकारी बोर्ड को देनी होगी. किस स्कूल में कौन से बैंक का ब्रांच चल रहा है, किस स्कूल का ब्रांच बैंक कहां पर है, उसका लोकेशन के साथ पूरी जानकारी देनी होगी. ज्ञात हो कि सीबीएसइ के तमाम स्कूलों में महीने के ट्यूशन फी को अभिभावक स्कूल द्वारा प्रोवाइड बैंक में ही जमा करते है. कई स्कूलों दो महीने पर तो कई स्कूल तीन महीने पर फी लेते है. हर स्कूल फी कैश जमा करवाते है, ऐसे में स्कूल अपनी मरजी से कई बार फी की वसूल लेते है.
- ट्यूशन फी पर रखी जायेगी नजर
ट्यूशन फी में स्कूलों ने कितना बढ़ोतरी किया, किसी स्कूल ने साल मे बीच मे तो ट्यूशन फी नहीं बढ़ा दिया इन तमाम चीजों पर अब सीबीएसइ बैंक एकाउंट के माध्यम से नजर रखेगी. सीबीएसइ ने स्कूलों से ट्यूशन फी जमा करने की तिथि भी मांगी है. किस तिथि के बीच अभिभावकों से फी जमा करने को कहा जाता है. इसके माध्यम से सीबीएसइ उन स्कूलों पर आसानी से नजर रख पायेगी, जो अचानक से ट्यूशन फी बढ़ा देते है. जिस स्कूल में फी जमा करने की जो तिथि होगी, उस दौरान उस स्कूल पर नजर रखी जायेगी.
- एक से अधिक बैंक एकांउट नहीं होगा स्कूल का
सीबीएसइ ने एफिलिएशन बाइलॉज में डाले अपने निर्देश में कहा है कि हर स्कूल के पास एक ही बैंक अकाउंट होगा. कोई भी स्कूल एक से अधिक बैंक एकाउंट नहीं खोल सकता है. जो भी स्कूल का फाइनेंशियल एक्टिविटी होगी, सारे के सारे एक ही बैंक एकाउंट से किया जायेगा.
स्टूडेंट्स और अभिभावकों को ये होगा फायदा
- अब मनमाने फी जमा करने से अभिभावक बच पायेंगे
- अब जो स्कूल फी लेगा वहीं रसीद भी देगा, रसीद पर अलग एमाउंट अब नहीं लिख पायेगा स्कूल
- अभिभावक जब चाहे सीबीएसइ के पास फी को लेकर शिकायत कर पायेंगे
- स्कूल के मनमाने रवैये पर पाबंदी लगेगी
टीचर्स को मिलेगी राहत
- टीचर्स के साथ स्कूल शोषण नहीं कर सकेगा
- हर टीचर्स को सैलरी सीबीएसइ के नाम्स के अनुसार मिलेगा
- टीचर्स की सैलरी पर सीबीएसइ की नजर होगी, तो स्कूल मनमानी नहीं कर पायेगा
- फिक्स सैलरी पर अब टीचर्स की नियुक्ति होगी
कोट
अब स्कूलों को बैंक अकाउंट की जानकारी देनी होगी. इसके लिए बोर्ड ने निर्देश जारी किया है. ट्यूशन फी संबंधित तमाम जानकारी अब सीबीएसइ अपने पास रखेगी.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोडिनेटर, सीबीएसइ
Wednesday, August 12, 2015
सिमुलतला प्रवेश परीक्षा संपन्न, अंग्रेजी विषय को रखा गया प्रवेश परीक्षा से बाहर
- 120 प्रश्न के लिए दिये गये दो घंटे
संवाददाता, पटना
सिमुलतला आवासीय विद्यालय के प्रवेश परीक्षा रविवार को संपन्न हो गया. पूरे प्रदेश में प्रवेश परीक्षा आयोजित की गयी. परीक्षा में प्रदेश भर से 8853 परीक्षार्थी ने आवेदन दिया था. लेकिन परीक्षा में मात्र 86 फीसदी परीक्षार्थी ही शामिल हुए. परीक्षा में चार विषयों से प्रश्न दिये गये थे. पहले से घोषित अंग्रेजी विषय के प्रश्न को शामिल करना बिहार विद्यालय परीक्षा समिति भूल गयी. मैथेमेटिक्स से 40, साइंस से 30, सोशल साइंस से 25 और हिंदी से 25 प्रश्न पूछे गये. हर विषय से उत्तर लिखना अनिवार्य था. प्रवेश परीक्षा में अंग्रेजी से प्रश्न भी प्रश्न पूछे जायेगे, लेकिन अंग्रेजी के प्रश्न नहीं पूछे गये. इस बार परीक्षा दो चरणों में ही लिया जायेगा. प्रारंभिक परीक्षा के बाद मेडिकल जांच के आधार पर अभ्यर्थी का चुनाव किया जायेगा.
- पटना में 99 फीसदी परीक्षार्थी हुए शामिल
प्रवेश परीक्षा में 120 प्रश्न पूछे गये थे. पटना में दो परीक्षा केंद्र बनाये गये थे. दोनों ही परीक्षा केंद्र पर 99 फीसदी छात्र परीक्षा में शामिल हुए. राम लखन सिंह यादव उच्च विद्यालय में चार सौ परीक्षार्थी में मात्र पांच विद्यार्थी परीक्षा में शामिल नहीं हुए. विद्यालय की प्राचार्य नीरा कुमारी ने बताया कि चार सौ परीक्षार्थी के लिए परीक्षा केंद्र बनाये गये थे. इसमें से मात्र पांच चिद्यार्थी परीक्षा नहीं दे पायें. कुछ ऐसी ही स्थिति पीएन एंग्लो परीक्षा केंद्र ही भी रही. ज्ञात हो कि 120 सीटों के लिए परीक्षा लिया गया. इसमें से 60 सीटें छात्र और 60 सीटें छात्रओं के लिए आरक्षित है.
- 13 को आयेगा रिजल्ट
सिमुलतला आवासीय विद्यालय के प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट 13 को घोषित किया जायेगा. इस संबंध में समिति के सचिव श्रीनिवास चंद्र तिवारी ने बताया कि रिजल्ट जल्द से जल्द निकाल दिया जायेगा. परीक्षा चुकी ओएमआर सीट पर लिया गया है. कंप्यूटर पर ही इसकी जांच होगी. 13 अगस्त को रिजल्ट आ जायेगा. रिजल्ट बिहार बोर्ड के वेबसाइट पर जारी किया जायेगा.
कोट
2015 के प्रवेश परीक्षा से अंग्रेजी विषय के भी प्रश्न पूछे जाने थे. चुकी सिमुलतला आवासीय विद्यालय इंगलिश मिडियम बेस्ड है. ऐसे में प्रवेश परीक्षा में अंग्रेजी की जानकारी होना जरूरी है. लेकिन प्रवेश परीक्षा में अंग्रेजी से एक भी प्रश्न नहीं पूछा गया. इसके अलावा 50 अंकों की बौद्धिक परीक्षा भी नहीं लिया जायेगा. यह परीक्षा मुख्य परीक्षा
डा. शंकर प्रसाद, पूर्व प्राचार्य, सिमुलतला आवासीय विद्यालय
संवाददाता, पटना
सिमुलतला आवासीय विद्यालय के प्रवेश परीक्षा रविवार को संपन्न हो गया. पूरे प्रदेश में प्रवेश परीक्षा आयोजित की गयी. परीक्षा में प्रदेश भर से 8853 परीक्षार्थी ने आवेदन दिया था. लेकिन परीक्षा में मात्र 86 फीसदी परीक्षार्थी ही शामिल हुए. परीक्षा में चार विषयों से प्रश्न दिये गये थे. पहले से घोषित अंग्रेजी विषय के प्रश्न को शामिल करना बिहार विद्यालय परीक्षा समिति भूल गयी. मैथेमेटिक्स से 40, साइंस से 30, सोशल साइंस से 25 और हिंदी से 25 प्रश्न पूछे गये. हर विषय से उत्तर लिखना अनिवार्य था. प्रवेश परीक्षा में अंग्रेजी से प्रश्न भी प्रश्न पूछे जायेगे, लेकिन अंग्रेजी के प्रश्न नहीं पूछे गये. इस बार परीक्षा दो चरणों में ही लिया जायेगा. प्रारंभिक परीक्षा के बाद मेडिकल जांच के आधार पर अभ्यर्थी का चुनाव किया जायेगा.
- पटना में 99 फीसदी परीक्षार्थी हुए शामिल
प्रवेश परीक्षा में 120 प्रश्न पूछे गये थे. पटना में दो परीक्षा केंद्र बनाये गये थे. दोनों ही परीक्षा केंद्र पर 99 फीसदी छात्र परीक्षा में शामिल हुए. राम लखन सिंह यादव उच्च विद्यालय में चार सौ परीक्षार्थी में मात्र पांच विद्यार्थी परीक्षा में शामिल नहीं हुए. विद्यालय की प्राचार्य नीरा कुमारी ने बताया कि चार सौ परीक्षार्थी के लिए परीक्षा केंद्र बनाये गये थे. इसमें से मात्र पांच चिद्यार्थी परीक्षा नहीं दे पायें. कुछ ऐसी ही स्थिति पीएन एंग्लो परीक्षा केंद्र ही भी रही. ज्ञात हो कि 120 सीटों के लिए परीक्षा लिया गया. इसमें से 60 सीटें छात्र और 60 सीटें छात्रओं के लिए आरक्षित है.
- 13 को आयेगा रिजल्ट
सिमुलतला आवासीय विद्यालय के प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट 13 को घोषित किया जायेगा. इस संबंध में समिति के सचिव श्रीनिवास चंद्र तिवारी ने बताया कि रिजल्ट जल्द से जल्द निकाल दिया जायेगा. परीक्षा चुकी ओएमआर सीट पर लिया गया है. कंप्यूटर पर ही इसकी जांच होगी. 13 अगस्त को रिजल्ट आ जायेगा. रिजल्ट बिहार बोर्ड के वेबसाइट पर जारी किया जायेगा.
कोट
2015 के प्रवेश परीक्षा से अंग्रेजी विषय के भी प्रश्न पूछे जाने थे. चुकी सिमुलतला आवासीय विद्यालय इंगलिश मिडियम बेस्ड है. ऐसे में प्रवेश परीक्षा में अंग्रेजी की जानकारी होना जरूरी है. लेकिन प्रवेश परीक्षा में अंग्रेजी से एक भी प्रश्न नहीं पूछा गया. इसके अलावा 50 अंकों की बौद्धिक परीक्षा भी नहीं लिया जायेगा. यह परीक्षा मुख्य परीक्षा
डा. शंकर प्रसाद, पूर्व प्राचार्य, सिमुलतला आवासीय विद्यालय
एआइपीएमटी का ओएमआर सीट आज होगा जारी, अभ्यर्थी कर सकते है चैलेंज
- ओएमआर सीट देखने और चैलेंज करने के लिए अभ्यर्थी को मिलेगा सिर्फ दो दिन
संवाददाता, पटना
ऑल इंडिया प्री मेडिकल प्री डेंटल एंट्रांस टेस्ट (एआइपीएमटी) की ओएमआर सीट सोमवार यानी 10 अगस्त को जारी किया जायेगा. ओएमआर सीट को अभ्यर्थी अपने रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड डाल कर देख पायेंगे. सीबीएसइ ने इस बार ओएमआर सीट को देखने के लिए मात्र दो दिनों का समय अभ्यर्थी को दिया है. दो दिनों के दौरान ही अभ्यर्थी ओएमआर सीट देख कर अपने आंसर का मिलान कर सकते है. इसके अलावा अभ्यर्थी चाहे तो अपने उत्तर के लिए सीबीएसइ के पास चैलेंज भी कर सकते है. ओएमआर सीट 10 अगस्त के सुबह 10 बजे से 11 अगस्त के 12 बजे रात तक ही सीबीएसइ के वेबसाइट पर डाला जायेगा. इसी दौरान अभ्यर्थी को चैलेंज करने की भी सुविधा दी गयी है.
- 12 को जारी होगा आंसर की
एआइपीएमटी का आंसर की 12 अगस्त को सीबीएसइ वेबसाइट पर जारी करेगा. आंसर की पर भी अभ्यर्थी सीबीएसइ के पास चैलेंज कर सकता है. आंसर की 12 अगस्त के 10 बजे से 13 अगस्त के 12 बजे रात तक अभ्यर्थी देख पायेंगे. वहीं इसके लिए चैलेंज करने का भी समय 12 अगस्त से 13 अगस्त का ही रखा गया है. सीबीएसइ के अनुसार चैलेंज करने के लिए अभ्यर्थी प्रति प्रश्न एक हजार रुपये देने होंगे. चैलेंज ऑन लाइन ही किया जाना है. ओएमआर सीट और आंसर की एआइपीएमटी के वेबसाइट .. पर देखा जा सकता है.
संवाददाता, पटना
ऑल इंडिया प्री मेडिकल प्री डेंटल एंट्रांस टेस्ट (एआइपीएमटी) की ओएमआर सीट सोमवार यानी 10 अगस्त को जारी किया जायेगा. ओएमआर सीट को अभ्यर्थी अपने रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड डाल कर देख पायेंगे. सीबीएसइ ने इस बार ओएमआर सीट को देखने के लिए मात्र दो दिनों का समय अभ्यर्थी को दिया है. दो दिनों के दौरान ही अभ्यर्थी ओएमआर सीट देख कर अपने आंसर का मिलान कर सकते है. इसके अलावा अभ्यर्थी चाहे तो अपने उत्तर के लिए सीबीएसइ के पास चैलेंज भी कर सकते है. ओएमआर सीट 10 अगस्त के सुबह 10 बजे से 11 अगस्त के 12 बजे रात तक ही सीबीएसइ के वेबसाइट पर डाला जायेगा. इसी दौरान अभ्यर्थी को चैलेंज करने की भी सुविधा दी गयी है.
- 12 को जारी होगा आंसर की
एआइपीएमटी का आंसर की 12 अगस्त को सीबीएसइ वेबसाइट पर जारी करेगा. आंसर की पर भी अभ्यर्थी सीबीएसइ के पास चैलेंज कर सकता है. आंसर की 12 अगस्त के 10 बजे से 13 अगस्त के 12 बजे रात तक अभ्यर्थी देख पायेंगे. वहीं इसके लिए चैलेंज करने का भी समय 12 अगस्त से 13 अगस्त का ही रखा गया है. सीबीएसइ के अनुसार चैलेंज करने के लिए अभ्यर्थी प्रति प्रश्न एक हजार रुपये देने होंगे. चैलेंज ऑन लाइन ही किया जाना है. ओएमआर सीट और आंसर की एआइपीएमटी के वेबसाइट .. पर देखा जा सकता है.
पढ़ाई में सैनिटेशन, स्कूल में नहीं दिखता असर
- नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव के रेटिंग में नहीं बढ़ पाया बिहार
- पूरे प्रदेश से मात्र दस स्कूलों ही हैं सैनिटेशन के रेटिंग में शामिल
संवाददाता, पटना
अपने आस पास की साफ सफाई ही हमें अच्छे नागरिक बना सकता हैं. इसकी शुरुआत हमें जमीनी स्तर से करना होगा. इसी को ध्यान में रख कर सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव की शुरुआत किया. सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत तो किया. इसे स्कूल के कोर्स में भी शामिल किया गया. कोर्स की पढ़ाई में तो सैनिटेशन दिखता है, लेकिन स्कूल के ग्राउंड में यह असर नहीं दिखता है. इस बात का खुलासा सीबीएसइ के खुद के नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव रिपोर्ट में ही सामने आयी है. ऑन लाइन रेटिंग के तहत इसमें स्कूलों को कई पैरामीटर में रखा गया था. इस पैरामीटर के आधार पर ही स्कूलों को ऑन लाइन रेटिंग में रखा गया. स्कूल में हेल्थ को प्रमोट करने के उदेश्य से इसे शुरू किया गया है. देश भर के 16 हजार से अधिक स्कूल इससे जुड़े हुए है. सीबीएसइ ने उन तमाम स्कूलों की लिस्ट जारी किया है जो इस रेटिंग में कहीं ना कहीं अपना जगह बना रहे. वहीं बांकी बचे हुए स्कूल को सीबीएसइ ने रेटिंग से भी बाहर कर दिया है, जहां पर सैनिटेशन को लेकर कोई काम नहीं हो रहा हैं.
- बिहार के दस स्कूल हैं शामिल
सीबीएसइ के रेटिंग में बिहार के दस स्कूलों को शामिल किया गया है. मिनिस्ट्री ऑफ रिसोर्स डेवलपमेंट और मिनिस्ट्री ऑफ अरवन डेवलपमेंट के निर्देश पर सीबीएसइ स्कूलों के लिए ऑन लाइन सैनिटेशन की शुरुआत 2011 में किया गया था. रेटिंग में प्रथम आने वाले को अवार्ड देने का भी प्रावधान है. ऑन लाइन सैनिटेशन रेटिंग में केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, गवर्नमेंट स्कूल, प्राइवेट स्कूल, डीएवी और आर्मी स्कूल को शामिल किया जायेगा.
इन प्वाइंट पर होती है ऑन लाइन रेटिंग
- फूड एंड न्यूट्रिशन
- अपने शरीर के बारे में जानकारी
- पर्सनल, इंवायरमेंटल हाइजिन और सैनिटेशन के बारे में जानकारी
- विहेवियर एंड लाइफ स्कील्स
- फिजिकल फिटनेस
- स्कूल में सेफ इंवायरमेंट
इन प्वाइंट पर होता हैं सैनिटेशन की रेटिंग
केटेगरी - रेटिंग - रिमार्क
91 से 100 फीसदी - ग्रीन - एक्सीलेंट
75 से 90 फीसदी - ब्लू - वेरी गुड, लेकिन सुधार की आवश्यकता है
50 से 74 फीसदी - येलो - फेयर
34 से 49 फीसदी - ब्लैक - पूअर
33 फीसदी से नीचे - रेड - खतरनाक स्थिति
बिहार के इन स्कूलों को दी गयी हैं रेटिंग
स्कूल - रेटिंग
केंद्रीय विद्यालय, जमालपुर - ग्रीन
डीएवी, पूर्वी चंपारण - ग्रीन
केंद्रीय विद्यालय, दरभंगा - ब्लू
केंद्रीय विद्यालय, पूसा - ब्लू
केंद्रीय विद्यालय, पूर्णिया - ब्लू
केंद्रीय विद्यालय, मुजफ्फरपुर - ब्लू
सेंट्रल स्कूल, छपरा - येलो
केंद्रीय विद्यालय, कटिहार - येलो
केंद्रीय विद्यालय, बेगूसराय - येलो
केंद्रीय विद्यालय, गया - येलो
कोट
नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव से हर स्कूल जुड़ा हुआ है. आन लाइन इसकी रेटिंग की जाती है. छह प्वाइंट पर स्कूलों की जांच होती है. 2011 में सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत की थी. पहली बार इसकी लिस्ट सीबीएसइ ने जारी किया है. बिहार से दस स्कूल को इसमें रेटिंग दी गयी है.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोडिनेटर, सीबीएसइ
- पूरे प्रदेश से मात्र दस स्कूलों ही हैं सैनिटेशन के रेटिंग में शामिल
संवाददाता, पटना
अपने आस पास की साफ सफाई ही हमें अच्छे नागरिक बना सकता हैं. इसकी शुरुआत हमें जमीनी स्तर से करना होगा. इसी को ध्यान में रख कर सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव की शुरुआत किया. सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत तो किया. इसे स्कूल के कोर्स में भी शामिल किया गया. कोर्स की पढ़ाई में तो सैनिटेशन दिखता है, लेकिन स्कूल के ग्राउंड में यह असर नहीं दिखता है. इस बात का खुलासा सीबीएसइ के खुद के नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव रिपोर्ट में ही सामने आयी है. ऑन लाइन रेटिंग के तहत इसमें स्कूलों को कई पैरामीटर में रखा गया था. इस पैरामीटर के आधार पर ही स्कूलों को ऑन लाइन रेटिंग में रखा गया. स्कूल में हेल्थ को प्रमोट करने के उदेश्य से इसे शुरू किया गया है. देश भर के 16 हजार से अधिक स्कूल इससे जुड़े हुए है. सीबीएसइ ने उन तमाम स्कूलों की लिस्ट जारी किया है जो इस रेटिंग में कहीं ना कहीं अपना जगह बना रहे. वहीं बांकी बचे हुए स्कूल को सीबीएसइ ने रेटिंग से भी बाहर कर दिया है, जहां पर सैनिटेशन को लेकर कोई काम नहीं हो रहा हैं.
- बिहार के दस स्कूल हैं शामिल
सीबीएसइ के रेटिंग में बिहार के दस स्कूलों को शामिल किया गया है. मिनिस्ट्री ऑफ रिसोर्स डेवलपमेंट और मिनिस्ट्री ऑफ अरवन डेवलपमेंट के निर्देश पर सीबीएसइ स्कूलों के लिए ऑन लाइन सैनिटेशन की शुरुआत 2011 में किया गया था. रेटिंग में प्रथम आने वाले को अवार्ड देने का भी प्रावधान है. ऑन लाइन सैनिटेशन रेटिंग में केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, गवर्नमेंट स्कूल, प्राइवेट स्कूल, डीएवी और आर्मी स्कूल को शामिल किया जायेगा.
इन प्वाइंट पर होती है ऑन लाइन रेटिंग
- फूड एंड न्यूट्रिशन
- अपने शरीर के बारे में जानकारी
- पर्सनल, इंवायरमेंटल हाइजिन और सैनिटेशन के बारे में जानकारी
- विहेवियर एंड लाइफ स्कील्स
- फिजिकल फिटनेस
- स्कूल में सेफ इंवायरमेंट
इन प्वाइंट पर होता हैं सैनिटेशन की रेटिंग
केटेगरी - रेटिंग - रिमार्क
91 से 100 फीसदी - ग्रीन - एक्सीलेंट
75 से 90 फीसदी - ब्लू - वेरी गुड, लेकिन सुधार की आवश्यकता है
50 से 74 फीसदी - येलो - फेयर
34 से 49 फीसदी - ब्लैक - पूअर
33 फीसदी से नीचे - रेड - खतरनाक स्थिति
बिहार के इन स्कूलों को दी गयी हैं रेटिंग
स्कूल - रेटिंग
केंद्रीय विद्यालय, जमालपुर - ग्रीन
डीएवी, पूर्वी चंपारण - ग्रीन
केंद्रीय विद्यालय, दरभंगा - ब्लू
केंद्रीय विद्यालय, पूसा - ब्लू
केंद्रीय विद्यालय, पूर्णिया - ब्लू
केंद्रीय विद्यालय, मुजफ्फरपुर - ब्लू
सेंट्रल स्कूल, छपरा - येलो
केंद्रीय विद्यालय, कटिहार - येलो
केंद्रीय विद्यालय, बेगूसराय - येलो
केंद्रीय विद्यालय, गया - येलो
कोट
नेशनल स्कूल सैनिटेशन इनिसियेटिव से हर स्कूल जुड़ा हुआ है. आन लाइन इसकी रेटिंग की जाती है. छह प्वाइंट पर स्कूलों की जांच होती है. 2011 में सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत की थी. पहली बार इसकी लिस्ट सीबीएसइ ने जारी किया है. बिहार से दस स्कूल को इसमें रेटिंग दी गयी है.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोडिनेटर, सीबीएसइ
सीबीएसइ के टॉप-8 स्कूलों में पटना जोन से एक भी नहीं
- पटना जोन के एक भी स्कूल को सीबीएसइ ने नहीं दिया कोई जगह
- 2014 के बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट पर निकाला गया टॉप-8 स्कूलों की सूची
संवाददाता, पटना
पढ़ाई अच्छी है, एक्टिविटी में भी ठीक है. स्पोर्ट्स में भी स्कूलों में काम होता है. लेकिन रिजल्ट देने में पटना जोन फिसड्डी है. पटना जोन के रिजल्ट का औसत काफी खराब है. तभी तो सीबीएसइ के टॉप-8 स्कूलों की सूची में पटना जोन का एक भी स्कूल कोई जगह नहीं बना पाया है. बोर्ड की ओर से सोमवार टॉप-8 स्कूलों की सूची निकाली गयी है. देश भर के तमाम जोन से चूने गये इन टॉप-8 स्कूलों का रिजल्ट इस बार सबसे बेस्ट रहा है. इन स्कूलों में इस बार 12वीं का रिजल्ट 90 फीसदी से भी उपर रहा है. इसके तहत चेन्नई जोन से तीन स्कूल, दिल्ली जोन से एक स्कूल, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के दो-दो स्कूल शामिल है.
- इंगलिश और चार विषयों के आधार पर निकाली गयी सूची
सीबीएसइ के 12वीं के रिजल्ट निकालने के बाद बोर्ड की ओर से परीक्षा का विेषण किया गया. विेषण में निकल कर आया कि देश में कुल आठ स्कूल है जिनका इंगलिश और बेस्ट चार विषयों में औसतन रिजल्ट 90 फीसदी के आस-पास रहा है. इन स्कूलों को बोर्ड ने बेस्ट स्कूल माना है. सीबीएसइ ने जहां जोन के रिजल्ट में चेन्नई को बेस्ट जोन माना है वहीं राज्य में तमिलनाडू का रिजल्ट सबसे बेस्ट रहा है. तमिलानाडू में 80.7 फीसदी रिजल्ट इस बार का रहा.
- पटना जोन का स्कूल बेस्ट केटेगरी में शामिल नहीं
ना तो बेस्ट चार विषयों के रिजल्ट में और ना ही इंगलिश में बेस्ट रिजल्ट में पटना जोन के स्कूल अपना स्थान बना पायें है. पटना जोन इस बार 12वीं के रिजल्ट में कही नहीं है. ना तो जोन के रिजल्ट में भी अपना स्थान बोर्ड के पास बना पाया और ना ही स्टेट के रिजल्ट में भी बिहार को कोई स्थान मिल पाया है. बोर्ड की माने तो पटना जोन का रिजल्ट 20के मुकाबले खराब रहा है. यहां के किसी भी स्कूल में रिजल्ट 90 फीसदी तक पहुंच नहीं पायी है. एक भी स्कूल ऐसा नहीं है जहां पर विषयों के अनुसार 90 फीसदी के उपर रिजल्ट हो. पाटलिपुत्र सहोदया के सचिव सीबी सिंह ने बताया कि यहां पर स्टूडेंट्स स्कूल में रेगूलर क्लासेज नहीं करते है. ऐसे में स्कूल की पढ़ाई पर फोकस नहीं होने के कारण स्टूडेंट्स सब्जेक्टिव पढ़ाई को अच्छी तरह से नहीं कर पाते है. स्टूडेंट्स का फोकस प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पर अधिक रहता है. स्टूडेंट्स ऑब्जेक्टिव की पढ़ाई तो कर लेते है. लेकिन सब्जेक्टिव नहीं पढ़ने के कारण वो लॉग प्रश्नों का उत्तर सही से नहीं कर पाते है. इससे पास तो स्टूडेंट्स कर जाते है लेकिन मार्क्स अधिक नहीं ला पाते है.
टीचर व्यू
स्टूडेंट्स का फोकस अब बस इंजीनियरिंग और मेडिकल में जाना रह गया है. वो 12वीं की परीक्षा अच्छे अंक से पास करें इस पर उनका फोकस नहीं रहता है. पूरे दो सालों में बस वो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पर ध्यान देते है. इस कारण रिजल्ट खराब होता है. अभी जेइइ मेन में 12वीं के रिजल्ट को अहमियत दिया गया है तो थोड़ा सुधार हुआ है. इस बार तो कई स्टूडेट्स ऐसे भी थे जो जेइइ मेन मे रिजल्ट अच्छा कर गये लेकिन प्लस टू में फेल हो गये. इसका असर स्कूल के ओवरऑल रिजल्ट पर पड़ता है.
संजय कुमार झा, मैथ टीचर, लोयेला हाई स्कूल
स्कूल की पढ़ाई को फोकस करना होगा. स्कूल का रिजल्ट तमाम स्टूडेंट्स के रिजल्ट पर निर्भर करता है. ऐसे में एक भी स्टूडेंट का रिजल्ट खराब होने से स्कूल के औसत रिजल्ट पर असर होता है. अच्छे मार्क्स लाने के लिए पूरा टेक्स्ट बुक की पढ़ाई करनी होगी. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी और प्लस टू की पढ़ाई की तैयारी दोनों की अलग-अलग चीज है. अभी स्टूडेंट्स का फोकस बस प्लस टू कैसे भी पास कर जाये पर होती है.
एसपी राय, कॉमर्स टीचर, सेंट माइकल हाई स्कूल
कोट
पटना जोन के रिजल्ट खराब होने की मुख्य वजह है कि यहां के स्टूडेंट्स स्कूल की पढ़ाई पर फोकस नहीं करते है. 10वीं की परीक्षा तक तो थोड़ा बहुत स्कूल की पढ़ाई को महत्व देते भी है. लेकिन 11वीं 12वीं में पूरी तरह स्टूडेंट्स कोचिंग की पढ़ाई पर ही निर्भर हो जाते है. ऐसे में रिजल्ट खराब होना नेचुरल है. इस बार पटना जोन का रिजल्ट पिछले साल से भी खराब रहा है.
राजीव रंजन प्रसाद, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ
- 2014 के बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट पर निकाला गया टॉप-8 स्कूलों की सूची
संवाददाता, पटना
पढ़ाई अच्छी है, एक्टिविटी में भी ठीक है. स्पोर्ट्स में भी स्कूलों में काम होता है. लेकिन रिजल्ट देने में पटना जोन फिसड्डी है. पटना जोन के रिजल्ट का औसत काफी खराब है. तभी तो सीबीएसइ के टॉप-8 स्कूलों की सूची में पटना जोन का एक भी स्कूल कोई जगह नहीं बना पाया है. बोर्ड की ओर से सोमवार टॉप-8 स्कूलों की सूची निकाली गयी है. देश भर के तमाम जोन से चूने गये इन टॉप-8 स्कूलों का रिजल्ट इस बार सबसे बेस्ट रहा है. इन स्कूलों में इस बार 12वीं का रिजल्ट 90 फीसदी से भी उपर रहा है. इसके तहत चेन्नई जोन से तीन स्कूल, दिल्ली जोन से एक स्कूल, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के दो-दो स्कूल शामिल है.
- इंगलिश और चार विषयों के आधार पर निकाली गयी सूची
सीबीएसइ के 12वीं के रिजल्ट निकालने के बाद बोर्ड की ओर से परीक्षा का विेषण किया गया. विेषण में निकल कर आया कि देश में कुल आठ स्कूल है जिनका इंगलिश और बेस्ट चार विषयों में औसतन रिजल्ट 90 फीसदी के आस-पास रहा है. इन स्कूलों को बोर्ड ने बेस्ट स्कूल माना है. सीबीएसइ ने जहां जोन के रिजल्ट में चेन्नई को बेस्ट जोन माना है वहीं राज्य में तमिलनाडू का रिजल्ट सबसे बेस्ट रहा है. तमिलानाडू में 80.7 फीसदी रिजल्ट इस बार का रहा.
- पटना जोन का स्कूल बेस्ट केटेगरी में शामिल नहीं
ना तो बेस्ट चार विषयों के रिजल्ट में और ना ही इंगलिश में बेस्ट रिजल्ट में पटना जोन के स्कूल अपना स्थान बना पायें है. पटना जोन इस बार 12वीं के रिजल्ट में कही नहीं है. ना तो जोन के रिजल्ट में भी अपना स्थान बोर्ड के पास बना पाया और ना ही स्टेट के रिजल्ट में भी बिहार को कोई स्थान मिल पाया है. बोर्ड की माने तो पटना जोन का रिजल्ट 20के मुकाबले खराब रहा है. यहां के किसी भी स्कूल में रिजल्ट 90 फीसदी तक पहुंच नहीं पायी है. एक भी स्कूल ऐसा नहीं है जहां पर विषयों के अनुसार 90 फीसदी के उपर रिजल्ट हो. पाटलिपुत्र सहोदया के सचिव सीबी सिंह ने बताया कि यहां पर स्टूडेंट्स स्कूल में रेगूलर क्लासेज नहीं करते है. ऐसे में स्कूल की पढ़ाई पर फोकस नहीं होने के कारण स्टूडेंट्स सब्जेक्टिव पढ़ाई को अच्छी तरह से नहीं कर पाते है. स्टूडेंट्स का फोकस प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पर अधिक रहता है. स्टूडेंट्स ऑब्जेक्टिव की पढ़ाई तो कर लेते है. लेकिन सब्जेक्टिव नहीं पढ़ने के कारण वो लॉग प्रश्नों का उत्तर सही से नहीं कर पाते है. इससे पास तो स्टूडेंट्स कर जाते है लेकिन मार्क्स अधिक नहीं ला पाते है.
टीचर व्यू
स्टूडेंट्स का फोकस अब बस इंजीनियरिंग और मेडिकल में जाना रह गया है. वो 12वीं की परीक्षा अच्छे अंक से पास करें इस पर उनका फोकस नहीं रहता है. पूरे दो सालों में बस वो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पर ध्यान देते है. इस कारण रिजल्ट खराब होता है. अभी जेइइ मेन में 12वीं के रिजल्ट को अहमियत दिया गया है तो थोड़ा सुधार हुआ है. इस बार तो कई स्टूडेट्स ऐसे भी थे जो जेइइ मेन मे रिजल्ट अच्छा कर गये लेकिन प्लस टू में फेल हो गये. इसका असर स्कूल के ओवरऑल रिजल्ट पर पड़ता है.
संजय कुमार झा, मैथ टीचर, लोयेला हाई स्कूल
स्कूल की पढ़ाई को फोकस करना होगा. स्कूल का रिजल्ट तमाम स्टूडेंट्स के रिजल्ट पर निर्भर करता है. ऐसे में एक भी स्टूडेंट का रिजल्ट खराब होने से स्कूल के औसत रिजल्ट पर असर होता है. अच्छे मार्क्स लाने के लिए पूरा टेक्स्ट बुक की पढ़ाई करनी होगी. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी और प्लस टू की पढ़ाई की तैयारी दोनों की अलग-अलग चीज है. अभी स्टूडेंट्स का फोकस बस प्लस टू कैसे भी पास कर जाये पर होती है.
एसपी राय, कॉमर्स टीचर, सेंट माइकल हाई स्कूल
कोट
पटना जोन के रिजल्ट खराब होने की मुख्य वजह है कि यहां के स्टूडेंट्स स्कूल की पढ़ाई पर फोकस नहीं करते है. 10वीं की परीक्षा तक तो थोड़ा बहुत स्कूल की पढ़ाई को महत्व देते भी है. लेकिन 11वीं 12वीं में पूरी तरह स्टूडेंट्स कोचिंग की पढ़ाई पर ही निर्भर हो जाते है. ऐसे में रिजल्ट खराब होना नेचुरल है. इस बार पटना जोन का रिजल्ट पिछले साल से भी खराब रहा है.
राजीव रंजन प्रसाद, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ
पहले करे तैयारी, फिर करें एफिलिएशन के लिए अप्लाई
- 2017-18 सत्र के लिए सीबीएसइ ने एफिलिएशन बाइ लॉज में किया चेंज
- अब सीबीएसइ की मान्यता के लिए मिलेगा छह महीने का समय
संवाददाता, पटना
अब किसी भी स्कूल के लिए सीबीएसइ से एफिलिएशन लेना महंगा पड़ सकता है. क्योंकि सीबीएसइ ने एफिलिएशन बाइ लॉज में चेंज कर दिया है. नयी व्यवस्था के अंतर्गत हर स्कूल को एफिलिएशन लेने के लिए मात्र छह महीने का समय मिलेगा. सीबीएसइ की यह व्यवस्था 2017-18 सत्र के लिए लागू किया जायेगा. जो स्कूल 2017-18 सत्र के लिए सीबीएसइ का एफिलिएशन लेना चाह रहे है, उन्हें एक जनवरी 2016 से 30 जून 2016 के बीच अप्लाई करना होगा. छह महीने सीबीएसइ ने अप्लाई के लिए दिया है. अप्लाई के बाद स्कूल को कंफर्मेशन लेटर दिया जायेगा. इसके बाद एफिलिएशन की प्रक्रिया शुरू होगी.
- छह महीने में तीन बार विजिट करेगा सीबीएसइ
अभी तक किसी भी स्कूल की रेंडमली जांच एक बार होती थी. लेकिन अब नये एफिलिएशन बाइ लॉज के अनुसार किसी भी स्कूल की जांच तीन बार किया जायेगा. तीनों बार ही जांच रेंडमली होगी. जांच की तिथि तक अब स्कूल को नहीं बताया जायेगा. स्कूल को सीबीएसइ छह महीने का समय देगा. इस छह महीने में कभी भी किसी भी दिन सीबीएसइ की जांच टीम स्कूल में विजिट करेगा. किन-किन प्वाइंट पर स्कूल की जांच होगी, इसकी जानकारी बोर्ड की ओर से पहले ही स्कूल को दे दिया जायेगा.
- रिजेक्ट होने के बाद दो साल मिलेगा मौका
जो स्कूल एक बार अप्लाई करने के बाद एफिलिएशन की जांच में रिजेक्ट हो जायेगा. उसे दुबारा मौका तुरंत में नहीं मिलेगा. क्योंकि सीबीएसइ ने इसके उपर भी अब पाबंदी लगा दी है कि कोई भी स्कूल बार-बार हर साल एफिलिएशन के लिए अप्लाई नहीं कर सकता है. एक बार अप्लाई करने के बाद अगर स्कूल एफिलिएशन की जांच में रिजेक्ट हो जाता है तो उसे दो साल बाद ही मौका मिलेगा.
- डिसेबल और हैंडिकैप स्टूडेंट्स की संख्या भी देखी जायेगी
सीबीएसइ ने एफिलिएशन बाइ लॉज में कई नये प्वाइंट को जोड़ा है. अब एफिलिएशन के लिए स्कूल में डिसेबल और हैंडिकैप स्टूडेंट्स की संख्या भी देखी जायेगी. स्कूल ने स्पेशल स्टूडेंट्स का नामांकन स्कूल में कितना लिया है. स्पेशल स्टूडेंट्स के लिए स्कूल में व्यवस्था क्या सब है. रैंप है या नहीं. क्लास रूम और कैंटिंग में बैठने की व्यवस्था कैसी है.
इन प्वाइंट पर होगी जांच
- स्कूल में टीचर्स और स्टूडेंट्स का रेसियो
- स्कूल में कमरों की संख्या
- सीसी टीवी कैमरा कितना लगा है और किन-किन जगहों पर लगा है
- स्कूल पास के लोकल थाने से कितना जुड़ा हुआ है
- स्टूडेंट्स के स्कूल आने के लिए स्कूल बस है या नहीं है
- लंच आवर कितने देर का है
- क्लास रूम का साइज क्या है
- प्ले ग्राउंड का साइज क्या है और खेलने के लिए व्यवस्था कैसी है
कोट
एफिलिएशन बाइ लॉज में बोर्ड ने चेंज कर दिया है. अब इसी के अनुसार एफिलिएशन किसी स्कूल को मिलेगा. यह नियम नये और पुराने दोनों ही स्कूल के लिए सीबीएसइ लागू करेगा. अब एफिलिएशन जांच के लिए छह महीने का समय मिलेगा. इस बीच ही सारे स्कूलों को तैयारी कर लेनी है.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोडिनेटर
- अब सीबीएसइ की मान्यता के लिए मिलेगा छह महीने का समय
संवाददाता, पटना
अब किसी भी स्कूल के लिए सीबीएसइ से एफिलिएशन लेना महंगा पड़ सकता है. क्योंकि सीबीएसइ ने एफिलिएशन बाइ लॉज में चेंज कर दिया है. नयी व्यवस्था के अंतर्गत हर स्कूल को एफिलिएशन लेने के लिए मात्र छह महीने का समय मिलेगा. सीबीएसइ की यह व्यवस्था 2017-18 सत्र के लिए लागू किया जायेगा. जो स्कूल 2017-18 सत्र के लिए सीबीएसइ का एफिलिएशन लेना चाह रहे है, उन्हें एक जनवरी 2016 से 30 जून 2016 के बीच अप्लाई करना होगा. छह महीने सीबीएसइ ने अप्लाई के लिए दिया है. अप्लाई के बाद स्कूल को कंफर्मेशन लेटर दिया जायेगा. इसके बाद एफिलिएशन की प्रक्रिया शुरू होगी.
- छह महीने में तीन बार विजिट करेगा सीबीएसइ
अभी तक किसी भी स्कूल की रेंडमली जांच एक बार होती थी. लेकिन अब नये एफिलिएशन बाइ लॉज के अनुसार किसी भी स्कूल की जांच तीन बार किया जायेगा. तीनों बार ही जांच रेंडमली होगी. जांच की तिथि तक अब स्कूल को नहीं बताया जायेगा. स्कूल को सीबीएसइ छह महीने का समय देगा. इस छह महीने में कभी भी किसी भी दिन सीबीएसइ की जांच टीम स्कूल में विजिट करेगा. किन-किन प्वाइंट पर स्कूल की जांच होगी, इसकी जानकारी बोर्ड की ओर से पहले ही स्कूल को दे दिया जायेगा.
- रिजेक्ट होने के बाद दो साल मिलेगा मौका
जो स्कूल एक बार अप्लाई करने के बाद एफिलिएशन की जांच में रिजेक्ट हो जायेगा. उसे दुबारा मौका तुरंत में नहीं मिलेगा. क्योंकि सीबीएसइ ने इसके उपर भी अब पाबंदी लगा दी है कि कोई भी स्कूल बार-बार हर साल एफिलिएशन के लिए अप्लाई नहीं कर सकता है. एक बार अप्लाई करने के बाद अगर स्कूल एफिलिएशन की जांच में रिजेक्ट हो जाता है तो उसे दो साल बाद ही मौका मिलेगा.
- डिसेबल और हैंडिकैप स्टूडेंट्स की संख्या भी देखी जायेगी
सीबीएसइ ने एफिलिएशन बाइ लॉज में कई नये प्वाइंट को जोड़ा है. अब एफिलिएशन के लिए स्कूल में डिसेबल और हैंडिकैप स्टूडेंट्स की संख्या भी देखी जायेगी. स्कूल ने स्पेशल स्टूडेंट्स का नामांकन स्कूल में कितना लिया है. स्पेशल स्टूडेंट्स के लिए स्कूल में व्यवस्था क्या सब है. रैंप है या नहीं. क्लास रूम और कैंटिंग में बैठने की व्यवस्था कैसी है.
इन प्वाइंट पर होगी जांच
- स्कूल में टीचर्स और स्टूडेंट्स का रेसियो
- स्कूल में कमरों की संख्या
- सीसी टीवी कैमरा कितना लगा है और किन-किन जगहों पर लगा है
- स्कूल पास के लोकल थाने से कितना जुड़ा हुआ है
- स्टूडेंट्स के स्कूल आने के लिए स्कूल बस है या नहीं है
- लंच आवर कितने देर का है
- क्लास रूम का साइज क्या है
- प्ले ग्राउंड का साइज क्या है और खेलने के लिए व्यवस्था कैसी है
कोट
एफिलिएशन बाइ लॉज में बोर्ड ने चेंज कर दिया है. अब इसी के अनुसार एफिलिएशन किसी स्कूल को मिलेगा. यह नियम नये और पुराने दोनों ही स्कूल के लिए सीबीएसइ लागू करेगा. अब एफिलिएशन जांच के लिए छह महीने का समय मिलेगा. इस बीच ही सारे स्कूलों को तैयारी कर लेनी है.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोडिनेटर
14 को आयेगा सिमुलतला प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट
, पटना
सिमुलतला आवासीय विद्यालय के 2015-16 सत्र के प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट 14 अगस्त को प्रकाशित की जायेगी. रिजल्ट की तैयारी लगभग पूरी हो गयी है. 14 अगस्त को बोर्ड के कोर कमिटी की बैठक के बाद रिजल्ट की घोषणा समिति की ओर से की जायेगी. समिति के सचिव श्रीनिवास चंद्र तिवारी ने बताया कि रिजल्ट तैयार कर लिया गया है. 14 अगस्त को रिजल्ट की घोषणा की जायेगी. बोर्ड के वेबसाइट पर रिजल्ट को डाला जायेगा. ज्ञात हो कि इस बार सिमुलतला प्रवेश परीक्षा में 8500 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे. प्रारंभिक परीक्षा के बाद मेडिकल लेने के बाद 120 छात्र-छात्रओं का चयन किया जायेगा. इसमें 60 छात्र और 60 छात्रएं शामिल होंगी. प्रवेश परीक्षा 9 अगस्त को आयोजित किया गया था. इसके लिए प्रदेश भर में 36 परीक्षा केंद्र बनाये गये थे.
सिमुलतला आवासीय विद्यालय के 2015-16 सत्र के प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट 14 अगस्त को प्रकाशित की जायेगी. रिजल्ट की तैयारी लगभग पूरी हो गयी है. 14 अगस्त को बोर्ड के कोर कमिटी की बैठक के बाद रिजल्ट की घोषणा समिति की ओर से की जायेगी. समिति के सचिव श्रीनिवास चंद्र तिवारी ने बताया कि रिजल्ट तैयार कर लिया गया है. 14 अगस्त को रिजल्ट की घोषणा की जायेगी. बोर्ड के वेबसाइट पर रिजल्ट को डाला जायेगा. ज्ञात हो कि इस बार सिमुलतला प्रवेश परीक्षा में 8500 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे. प्रारंभिक परीक्षा के बाद मेडिकल लेने के बाद 120 छात्र-छात्रओं का चयन किया जायेगा. इसमें 60 छात्र और 60 छात्रएं शामिल होंगी. प्रवेश परीक्षा 9 अगस्त को आयोजित किया गया था. इसके लिए प्रदेश भर में 36 परीक्षा केंद्र बनाये गये थे.
नेशनल टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन 8 नवंबर को
, पटना
नेशनल टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन 2015-16 के लिए तिथि को घोषणा कर दी गयी है. इस परीक्षा का प्रथम चरण 8 नवंबर को लिया जायेगा. वहीं द्वितीय चरण की परीक्षा 8 मई 2016 को लिया जायेगा. एनसीइआरटी द्वारा आयोजित इस परीक्षा में सीबीएसइ, केंद्रीय विद्यालय, आइसीएसइ बोर्ड के साथ तमाम स्टेट बोर्ड के स्टूडेंट्स भी शामिल होंगे. इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए एनसीइआरटी के वेबसाइट 666.ल्लूी13.ल्ल्रू.्रल्ल पर लिया जा सकता है.
नेशनल टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन 2015-16 के लिए तिथि को घोषणा कर दी गयी है. इस परीक्षा का प्रथम चरण 8 नवंबर को लिया जायेगा. वहीं द्वितीय चरण की परीक्षा 8 मई 2016 को लिया जायेगा. एनसीइआरटी द्वारा आयोजित इस परीक्षा में सीबीएसइ, केंद्रीय विद्यालय, आइसीएसइ बोर्ड के साथ तमाम स्टेट बोर्ड के स्टूडेंट्स भी शामिल होंगे. इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए एनसीइआरटी के वेबसाइट 666.ल्लूी13.ल्ल्रू.्रल्ल पर लिया जा सकता है.
नहीं करना होगा मैट्रिक और इंटर के सर्टिफिकेट का इंतजार, मार्क्स सीट के साथ मिलेगा ऑरिजनल सर्टिफिकेट
- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति प्रॉविजनल सर्टिफिकेट के साथ ऑरिजनल सर्टिफिकेट को भी जल्द देने की कर रहा व्यवस्था
संवाददाता, पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के मैट्रिक और इंटरमीडिएट के ऑरिजनल सर्टिफिकेट के लिए अब छात्रों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. अब समिति ऐसी व्यवस्था करने जा रही है जिससे छात्रों को कुछ ही महीनों में ऑरिजनल सर्टिफिकेट भी उपलब्ध करवा दी जायेगी. ज्ञात हो कि अभी तक समिति की ओर से मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट निकलने के बाद मात्र मार्क्स सीट ही उपलब्ध करवाया जाता था. वहीं छात्रों को अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें प्रोविजनल सर्टिफिकेट उपलब्ध करवा दिया जाता था. छात्रों को ऑरिजनल सर्टिफिकेट लेने के लिए दो साल तीन सालों तक इंतजार करना पड़ता था. लेकिन अब सीबीएसइ की तरह ही बिहार बोर्ड छह महीने के अंदर ही ऑरिजनल सर्टिफिकेट उपलब्ध करवा देगी.
- 2012 सेशन के छात्रों को मिल रहा सर्टिफिकेट
अभी समिति की ओर से 2012-13 सत्र के लिए मैट्रिक और इंटर के छात्रों को सर्टिफिकेट भेजा जा रहा है. कंप्यूटराइज होने के बाद बैक लॉग को जल्द से जल्द खत्म करने की कोशिश की जा रही है. देर से मैट्रिक या इंटर के ऑरिजनल सर्टिफिकेट नहीं होने से अधिकांश छात्र परेशान होते है. खासकर तब जब किसी नौकरी में इंटर पास सर्टिफिकेट की जरूरत होती है. ऐसी स्थिति में छात्रों को बिहार बोर्ड के पास अप्लाई करना होता है. तत्काल अप्लाई करने में छात्रों को पैसे भी अधिक देने होते है. इसके बाद ही सर्टिफिकेट उपलब्ध किया जाता है.
कोट
मैट्रिक और इंटर के बैक लॉग सर्टिफिकेट को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. लेकिन अब करेंट सेशन वाले छात्रों को उसी साल ऑरिजनल सर्टिफिकेट उपलब्ध करवा दिया जायेगा.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
संवाददाता, पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के मैट्रिक और इंटरमीडिएट के ऑरिजनल सर्टिफिकेट के लिए अब छात्रों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. अब समिति ऐसी व्यवस्था करने जा रही है जिससे छात्रों को कुछ ही महीनों में ऑरिजनल सर्टिफिकेट भी उपलब्ध करवा दी जायेगी. ज्ञात हो कि अभी तक समिति की ओर से मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट निकलने के बाद मात्र मार्क्स सीट ही उपलब्ध करवाया जाता था. वहीं छात्रों को अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें प्रोविजनल सर्टिफिकेट उपलब्ध करवा दिया जाता था. छात्रों को ऑरिजनल सर्टिफिकेट लेने के लिए दो साल तीन सालों तक इंतजार करना पड़ता था. लेकिन अब सीबीएसइ की तरह ही बिहार बोर्ड छह महीने के अंदर ही ऑरिजनल सर्टिफिकेट उपलब्ध करवा देगी.
- 2012 सेशन के छात्रों को मिल रहा सर्टिफिकेट
अभी समिति की ओर से 2012-13 सत्र के लिए मैट्रिक और इंटर के छात्रों को सर्टिफिकेट भेजा जा रहा है. कंप्यूटराइज होने के बाद बैक लॉग को जल्द से जल्द खत्म करने की कोशिश की जा रही है. देर से मैट्रिक या इंटर के ऑरिजनल सर्टिफिकेट नहीं होने से अधिकांश छात्र परेशान होते है. खासकर तब जब किसी नौकरी में इंटर पास सर्टिफिकेट की जरूरत होती है. ऐसी स्थिति में छात्रों को बिहार बोर्ड के पास अप्लाई करना होता है. तत्काल अप्लाई करने में छात्रों को पैसे भी अधिक देने होते है. इसके बाद ही सर्टिफिकेट उपलब्ध किया जाता है.
कोट
मैट्रिक और इंटर के बैक लॉग सर्टिफिकेट को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. लेकिन अब करेंट सेशन वाले छात्रों को उसी साल ऑरिजनल सर्टिफिकेट उपलब्ध करवा दिया जायेगा.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
स्पीकिंग एंड लिसनिंग असेसमेंट का लाइव टेस्ट दिखाने का सीबीएसइ ने दिया निर्देश
- अब तक रिकॉर्डिग मेटेरियल ही स्कूल को भेजना होता था
संवाददाता, पटना
असेसमेंट ऑफ स्पीकिंग एंड लिसनिंग स्कील्स (एएसएल) में अब स्कूलों की धांधली नहीं चलेगी. अब स्कूल इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में ना तो मनमानी कर पायेंगे और ना ही लापरवाही करने का मौका उन्हें मिलेगा. सीबीएसइ ने 2015-16 सत्र के लिए एएसएल में चेंज कर दिया है. अब हर स्कूल को एएसएल का टेस्ट की रिकॉडिंग लाइव करनी होगी. इस संबंध में जल्द ही स्कूलों को तमाम निर्देश बोर्ड द्वारा ऑन लाइन भेजा जायेगा. ज्ञात हो कि अभी तक एएसएल की जांच रिकॉडिंग के माध्यम से होता था. हर स्कूलों को एएसएल संबंधित सैंपल पेपर, मेटेरियल आदि सीबीएसइ को रिकॉडिंग करके उपलब्ध करवाना होता था. लेकिन इस बोर्ड ने इसमें चेंज कर दिया है.
- स्कूल नहीं कर पायेंगे मनमानी
सीबीएसइ द्वारा क्लास 9वीं और 10वीं में एएसएल की शुरुआत की गयी थी. 2013-14 सत्र से एएसएल प्रोजेक्ट को शुरू किया गया. इसके तहत हर स्कूलों में टीचर्स को यह जिम्मेवारी दी गयी थी. लैंग्वेज के हर टीचर को एएसएल का टेस्ट लेने का निर्देश दिया गया था. इसके तहत टीचर्स को खुद टेस्ट लेते हुए रिकॉर्डिग करनी थी. सून कर और बोल कर लैंग्वेज सीखाने के उदेश्य से इसे शुरू किया गया था. इसमें अधिकांश स्कूल इसमें मनमाने रूप से अवरेज मार्किग कर देते थे. स्टूडेंट्स का ना तो रिकॉर्डिग किया गया और ना ही टेस्ट लिया जाता था. बस मार्क्स दे दिये जाते थे.
- 10 अंक मिलता है एएसएल के लिए
9वीं और 10वीं क्लास के लिए एसए (समेटिव असेसमेंट) वन और एसए-टू दोनों ही के लिए अलग-अलग टेस्ट लिये जाते है. दोनों के लिए ही 10-10 अंकों की परीक्षाएं इसके तहत ली जाती है. 20 अंकों के इस टेस्ट में लैंग्वेज की जानकारी स्टूडेंट्स को कितना है, इसकी जांच की जाती है.
कोट
एएसएल लागू तो कर दिया गया है. लेकिन प्रॉपर वे में इसे स्कूलों में लागू नहीं किया जा सका है. 2015-16 से इसमें चेंज किया गया है. अब स्कूलों को इसकी रिकॉर्डिेग नहीं बल्कि लाइव रिपोर्ट तैयार करना होगा. इसके लिए स्कूलों को निर्देश ऑन लाइन भेजा जायेगा.
साधना पराशर, एकेडेमिक हेड, सीबीएसइ
संवाददाता, पटना
असेसमेंट ऑफ स्पीकिंग एंड लिसनिंग स्कील्स (एएसएल) में अब स्कूलों की धांधली नहीं चलेगी. अब स्कूल इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में ना तो मनमानी कर पायेंगे और ना ही लापरवाही करने का मौका उन्हें मिलेगा. सीबीएसइ ने 2015-16 सत्र के लिए एएसएल में चेंज कर दिया है. अब हर स्कूल को एएसएल का टेस्ट की रिकॉडिंग लाइव करनी होगी. इस संबंध में जल्द ही स्कूलों को तमाम निर्देश बोर्ड द्वारा ऑन लाइन भेजा जायेगा. ज्ञात हो कि अभी तक एएसएल की जांच रिकॉडिंग के माध्यम से होता था. हर स्कूलों को एएसएल संबंधित सैंपल पेपर, मेटेरियल आदि सीबीएसइ को रिकॉडिंग करके उपलब्ध करवाना होता था. लेकिन इस बोर्ड ने इसमें चेंज कर दिया है.
- स्कूल नहीं कर पायेंगे मनमानी
सीबीएसइ द्वारा क्लास 9वीं और 10वीं में एएसएल की शुरुआत की गयी थी. 2013-14 सत्र से एएसएल प्रोजेक्ट को शुरू किया गया. इसके तहत हर स्कूलों में टीचर्स को यह जिम्मेवारी दी गयी थी. लैंग्वेज के हर टीचर को एएसएल का टेस्ट लेने का निर्देश दिया गया था. इसके तहत टीचर्स को खुद टेस्ट लेते हुए रिकॉर्डिग करनी थी. सून कर और बोल कर लैंग्वेज सीखाने के उदेश्य से इसे शुरू किया गया था. इसमें अधिकांश स्कूल इसमें मनमाने रूप से अवरेज मार्किग कर देते थे. स्टूडेंट्स का ना तो रिकॉर्डिग किया गया और ना ही टेस्ट लिया जाता था. बस मार्क्स दे दिये जाते थे.
- 10 अंक मिलता है एएसएल के लिए
9वीं और 10वीं क्लास के लिए एसए (समेटिव असेसमेंट) वन और एसए-टू दोनों ही के लिए अलग-अलग टेस्ट लिये जाते है. दोनों के लिए ही 10-10 अंकों की परीक्षाएं इसके तहत ली जाती है. 20 अंकों के इस टेस्ट में लैंग्वेज की जानकारी स्टूडेंट्स को कितना है, इसकी जांच की जाती है.
कोट
एएसएल लागू तो कर दिया गया है. लेकिन प्रॉपर वे में इसे स्कूलों में लागू नहीं किया जा सका है. 2015-16 से इसमें चेंज किया गया है. अब स्कूलों को इसकी रिकॉर्डिेग नहीं बल्कि लाइव रिपोर्ट तैयार करना होगा. इसके लिए स्कूलों को निर्देश ऑन लाइन भेजा जायेगा.
साधना पराशर, एकेडेमिक हेड, सीबीएसइ
एनसीइआरटी की किताबें, स्कूल सिलेबस से हो रही बाहर
- सीबीएसइ स्कूलों को नोटिस देने की कर रहा तैयारी
- क्लास पांचवीं से 12वीं तक केवल एनसीइआरटी बुक से हो पढ़ाई
पटना
हर सीबीएसइ स्कूलों में एनसीइआरटी की बुक्स से ही पढ़ाई होगी. कोई भी स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक को किसी भी क्लास के लिए लागू नहीं करेगा. सीबीएसइ का निर्देश 2015 सत्र के शुरू होने के साथ ही तमाम स्कूलों को दिया गया था. इस निर्देश के बावजूद स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर्स के बुक चलाये जा रहे है. अब सीबीएसइ उन स्कूलों को नोटिस देने की तैयारी कर रहा है जिन स्कूलों में एनसीइआरटी के बुक नहीं चलाये जा रहे है. ज्ञात हो कि अधिकांश सीबीएसइ स्कूलों में एनसीइआरटी की किताबें कम, प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें अधिक कोर्स में शामिल है. इससे अभिभावकों की जेब पर तो असर हो ही रहा है, इसके अलावा बच्चे भी भारी बस्ते से परेशान हो रहे है.
- छह महीने का दिया समय, होगी कार्रवाई
सीबीएसई ने मई 2015 में नोटिस जारी कर तमाम स्कूलों को केवल एनसीइआरटी की बुक कोर्स में लागू करने की सलाह दिया था. लेकिन इस निर्देश का पालन स्कूलों में नहीं दिख रहा. इसको लेकर अब सीबीएसइ ने स्कूलों को अंतिम मौका दिया है. बोर्ड ने तमाम स्कूलों को अगले छह महीने का समय दिया है. छह महीने में अगर स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक को कोर्स में नहीं निकालता है तो ऐसे में स्कूलों पर जुर्माना लगाया जायेगा. सीबीएसइ ने इसके लिए 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने की बात कहीं है. इसकी सूचना स्कूलों को जल्द से जल्द भेजा जायेगा. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो सीबीएसइ इस कार्रवाई को लेकर काफी सीरियस है.
अभिभावकों की परेशानी
- हजारों रुपये बस किताबों की खरीदारी में लग जाता है
- किताबों की संख्या जरूरत से ज्यादा होने से अभिभावकों का अधिक समय मैनेज करने में लग जाता है
- होमवर्क जरूरत से अधिक मिलता है, जिसे पूरा करवाने में अभिभावक दिन भर परेशान रहते है
- किताबों की खरीदारी तो स्कूल वाले करवा लेते है, लेकिन कई किताबों की पढ़ाई साल भर नहीं हो पाती है
- किताबों की खरीदारी में अभिभावकों के पैसे भी बर्बाद हो जाते है
बच्चे का सिरदर्द बन रहा किताबें
- एक विषय के कई किताबें चलते है
- बच्चे समझ में नहीं पाते कि कौन पहले पढ़े और कौन बाद में पढ़े
- किताबों के बोझ से दबे रहते है बच्चे
- डेली रूटीन की किताबें और नोट बुक ले जाने में उनकी हालत खराब हो जाती है
- बस्ता इतना अधिक भारी हो जाता है कि उसे उठाना संभव नहीं हो पाता है
कोट
हर स्कूल में एनसीइआरटी की ही बुक चलाना है. इसकी सूचना तमाम स्कूलों को दे दिया गया है. लेकिन अभी भी कई स्कूलों में एनसीइआरटी की बुक चलाये नहीं जा रहे है. किसी भी स्कूल में एनसीइआरटी की बुक के अलावा कोई नहीं चलाया जा सकता है. प्राइवेट पब्लिशर्स के बुक को कोर्स में लागू नहीं किया जा सकता है.
जोसफ मैन्यूअल, सचिव, सीबीएसइ
- क्लास पांचवीं से 12वीं तक केवल एनसीइआरटी बुक से हो पढ़ाई
पटना
हर सीबीएसइ स्कूलों में एनसीइआरटी की बुक्स से ही पढ़ाई होगी. कोई भी स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक को किसी भी क्लास के लिए लागू नहीं करेगा. सीबीएसइ का निर्देश 2015 सत्र के शुरू होने के साथ ही तमाम स्कूलों को दिया गया था. इस निर्देश के बावजूद स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर्स के बुक चलाये जा रहे है. अब सीबीएसइ उन स्कूलों को नोटिस देने की तैयारी कर रहा है जिन स्कूलों में एनसीइआरटी के बुक नहीं चलाये जा रहे है. ज्ञात हो कि अधिकांश सीबीएसइ स्कूलों में एनसीइआरटी की किताबें कम, प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें अधिक कोर्स में शामिल है. इससे अभिभावकों की जेब पर तो असर हो ही रहा है, इसके अलावा बच्चे भी भारी बस्ते से परेशान हो रहे है.
- छह महीने का दिया समय, होगी कार्रवाई
सीबीएसई ने मई 2015 में नोटिस जारी कर तमाम स्कूलों को केवल एनसीइआरटी की बुक कोर्स में लागू करने की सलाह दिया था. लेकिन इस निर्देश का पालन स्कूलों में नहीं दिख रहा. इसको लेकर अब सीबीएसइ ने स्कूलों को अंतिम मौका दिया है. बोर्ड ने तमाम स्कूलों को अगले छह महीने का समय दिया है. छह महीने में अगर स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक को कोर्स में नहीं निकालता है तो ऐसे में स्कूलों पर जुर्माना लगाया जायेगा. सीबीएसइ ने इसके लिए 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने की बात कहीं है. इसकी सूचना स्कूलों को जल्द से जल्द भेजा जायेगा. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो सीबीएसइ इस कार्रवाई को लेकर काफी सीरियस है.
अभिभावकों की परेशानी
- हजारों रुपये बस किताबों की खरीदारी में लग जाता है
- किताबों की संख्या जरूरत से ज्यादा होने से अभिभावकों का अधिक समय मैनेज करने में लग जाता है
- होमवर्क जरूरत से अधिक मिलता है, जिसे पूरा करवाने में अभिभावक दिन भर परेशान रहते है
- किताबों की खरीदारी तो स्कूल वाले करवा लेते है, लेकिन कई किताबों की पढ़ाई साल भर नहीं हो पाती है
- किताबों की खरीदारी में अभिभावकों के पैसे भी बर्बाद हो जाते है
बच्चे का सिरदर्द बन रहा किताबें
- एक विषय के कई किताबें चलते है
- बच्चे समझ में नहीं पाते कि कौन पहले पढ़े और कौन बाद में पढ़े
- किताबों के बोझ से दबे रहते है बच्चे
- डेली रूटीन की किताबें और नोट बुक ले जाने में उनकी हालत खराब हो जाती है
- बस्ता इतना अधिक भारी हो जाता है कि उसे उठाना संभव नहीं हो पाता है
कोट
हर स्कूल में एनसीइआरटी की ही बुक चलाना है. इसकी सूचना तमाम स्कूलों को दे दिया गया है. लेकिन अभी भी कई स्कूलों में एनसीइआरटी की बुक चलाये नहीं जा रहे है. किसी भी स्कूल में एनसीइआरटी की बुक के अलावा कोई नहीं चलाया जा सकता है. प्राइवेट पब्लिशर्स के बुक को कोर्स में लागू नहीं किया जा सकता है.
जोसफ मैन्यूअल, सचिव, सीबीएसइ
Friday, August 7, 2015
सचिव बांट रहें योजना की राशि, बोर्ड का काम हुआ ठप
- मदरसा बोर्ड और संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सचिव बांट रहे योजना की राशि
संवाददाता, पटना
रिजल्ट निकला, मार्क्स सीट नहीं मिला. नाम में गड़बड़ी हो गयी है, बोर्ड में हफ्ते भर से चक्कर लगा रहें है, लेकिन काम नहीं हो पाया हैं. सारे टेबुल पर से फाइल सचिव के पास रखा है, लेकिन सचिव का हस्ताक्षर के लिए रूका हुआ है. जब तक सचिव का हस्ताक्षर नहीं होगा, तब तक मार्क्स सीट नहीं मिलेगा. हर दिन काम नहीं होने से निराश छात्र बोर्ड से लौट रहें है. यह हाल बिहार स्टेट मदरसा बोर्ड और बिहार राज्य संस्कृत शिक्षा बोर्ड की है. बोर्ड में छात्र हर दिन काम करवाने आ तो रहें है, लेकिन उन्हें बैरंग की वापस पड़ रहा है. पिछले 15 दिनों से दोनों की बोर्ड में काम इस कारण नहीं हो पा रहा है, क्योंकि बोर्ड के सचिव बिहार सरकार के विभिन्न योजनाओं की राशि वितरण में लगे हुए हैं.
- जुलाई के तीसरे सप्ताह से सचिव बांट रहे राशि
संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सचिव मिलिंद कुमार 17 जुलाई से ही बोर्ड नहीं आ पा रहें है. क्योंकि योजना राशि वितरण में सचिव मिलिंद को कटिहार भेजा गया है. वहीं संस्कृत शिक्षा बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक को नवादा भेजा गया है. कुछ ऐसा ही हाल मदरसा बोर्ड के सचिव खुर्शीद आलम का भी है. सचिव खुर्शीद आलम 24 जुलाई से राशि वितरण में लगे हुए हैं. इससे फोकानिया का रिजल्ट निकालने में भी कई परेशानी हुई. 2014 में चार पांच दिन के लिए ही सचिव को योजना राशि वाले काम में लगाया गया था, लेकिन इस बार 10 अगस्त तक सचिव का ड्यूटी लगायी गयी है. अब जब तक सचिव वापस नहीं आ जाते है, तब तक बोर्ड का सारा काम पेंडिंग ही रहेगा.
ये सारे काम है बाधित
- मार्क्स सीट नहीं मिला है
- नाम आदि की गलती में सुधार नहीं हो पा रहा हैं
- उत्तर पुस्तिका की दुबारा जांच के बाद नये मार्क्स सीट पर सचिव के हस्ताक्षर नहीं हुआ है
- स्क्रूटनी का काम रूका हुआ है
- रजिस्ट्रेशन की तिथि नहीं निकाली गयी है
कोट
24 जुलाई से इस काम में लगे हुए है. दोनों की काम तो छात्रो से ही जुड़ा हुआ हैं. योजना की राशि भी तो छात्र के बीच ही बांटा जा रहा है. दोनों ही काम हमारे हैं. बोर्ड के काम पर असर तो ह
खुर्शीद आलम, सचिव, मदरसा बोर्ड
संवाददाता, पटना
रिजल्ट निकला, मार्क्स सीट नहीं मिला. नाम में गड़बड़ी हो गयी है, बोर्ड में हफ्ते भर से चक्कर लगा रहें है, लेकिन काम नहीं हो पाया हैं. सारे टेबुल पर से फाइल सचिव के पास रखा है, लेकिन सचिव का हस्ताक्षर के लिए रूका हुआ है. जब तक सचिव का हस्ताक्षर नहीं होगा, तब तक मार्क्स सीट नहीं मिलेगा. हर दिन काम नहीं होने से निराश छात्र बोर्ड से लौट रहें है. यह हाल बिहार स्टेट मदरसा बोर्ड और बिहार राज्य संस्कृत शिक्षा बोर्ड की है. बोर्ड में छात्र हर दिन काम करवाने आ तो रहें है, लेकिन उन्हें बैरंग की वापस पड़ रहा है. पिछले 15 दिनों से दोनों की बोर्ड में काम इस कारण नहीं हो पा रहा है, क्योंकि बोर्ड के सचिव बिहार सरकार के विभिन्न योजनाओं की राशि वितरण में लगे हुए हैं.
- जुलाई के तीसरे सप्ताह से सचिव बांट रहे राशि
संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सचिव मिलिंद कुमार 17 जुलाई से ही बोर्ड नहीं आ पा रहें है. क्योंकि योजना राशि वितरण में सचिव मिलिंद को कटिहार भेजा गया है. वहीं संस्कृत शिक्षा बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक को नवादा भेजा गया है. कुछ ऐसा ही हाल मदरसा बोर्ड के सचिव खुर्शीद आलम का भी है. सचिव खुर्शीद आलम 24 जुलाई से राशि वितरण में लगे हुए हैं. इससे फोकानिया का रिजल्ट निकालने में भी कई परेशानी हुई. 2014 में चार पांच दिन के लिए ही सचिव को योजना राशि वाले काम में लगाया गया था, लेकिन इस बार 10 अगस्त तक सचिव का ड्यूटी लगायी गयी है. अब जब तक सचिव वापस नहीं आ जाते है, तब तक बोर्ड का सारा काम पेंडिंग ही रहेगा.
ये सारे काम है बाधित
- मार्क्स सीट नहीं मिला है
- नाम आदि की गलती में सुधार नहीं हो पा रहा हैं
- उत्तर पुस्तिका की दुबारा जांच के बाद नये मार्क्स सीट पर सचिव के हस्ताक्षर नहीं हुआ है
- स्क्रूटनी का काम रूका हुआ है
- रजिस्ट्रेशन की तिथि नहीं निकाली गयी है
कोट
24 जुलाई से इस काम में लगे हुए है. दोनों की काम तो छात्रो से ही जुड़ा हुआ हैं. योजना की राशि भी तो छात्र के बीच ही बांटा जा रहा है. दोनों ही काम हमारे हैं. बोर्ड के काम पर असर तो ह
खुर्शीद आलम, सचिव, मदरसा बोर्ड
वोकेशनल कोर्स अपडेट हुआ, पर लागू नहीं हुआ
- पुराने स्टाइल में ही पढ़ाई जाती हैं बिहार बोर्ड में वोकेशनल कोर्स
- एक हजार अंक की परीक्षा देना होता हैं वोकेशनल कोर्स में
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ के पैटर्न पर भले बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने वोकेशनल कोर्स को अपडेट किया, लेकिन अभी तक उसे लागू नहीं किया गया हैं. कई सालों के बाद समिति की ओर से वोकेशनल कोर्स को 2013 में अपडेट किया गया था. लेकिन अभी भी फाइल तक ही वो चल रहा हैं. उसे कोर्स में अप्लाई नहीं किया गया हैं. 1988 में शुरू हुए इंटर में वोकेशनल कोर्स अभी भी पुराने पद्धति पर ही चलाये जा रहे हैं. वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई करने वाले छात्रों के साथ मुश्किल यह होता हैं कि उन्हें एक हजार अंकों की परीक्षा इंटर में देना होता हैं. इसके लिए उन्हें हर विषय में 100-100 अंकों की पढ़ाई करनी होती हैं. काफी लेंदी सिलेबस हो जाने से छात्र वोकेशनल कोर्स करने से कतराते हैं.
- इंटर की पांच सौ अंक और वोकेशनल की होती हैं एक हजार अंक की परीक्षा
इंटरमीडिएट की परीक्षा भी पहले एक हजार अंकों की होती थी. लेकिन समय के साथ इसमें परिवर्तन कर दिया गया. अब इंटर की परीक्षा मात्र पांच सौ अंकों की होगी. वहीं वोकेशनल कोर्स अभी भी एक हजार अंकों का होता हैं. छात्रों को एक हजार अंकों की परीक्षा देनी होती है. वोकेशनल कोर्स के इंचार्ज एसएन सिंह ने बताया कि सिलेबस को अपडेट तो किया गया हैं, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया हैं. अपडेट वाले सिलेबस में कम अंकों की ही पढ़ाई होगी. परीक्षाएं भी कम अंकों का देना होगा, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया हैं. अधिक अंकों की परीक्षा होने से छात्र वोकेशनल कोर्स नहीं करना चाहते हैं. इसके साथ ना तो किताबें मिलती हैं और ना ही टीचर्स है. इसके अलावा हर स्कूलों में वोकेशनल कोर्स के इंफ्रास्क्ट्रचर की काफी कमी हैं.
अभी भी वोकेशनल कोर्स में अंकों का बंटवारा पुराने पद्धति पर
थ्योरी पेपर - 300 अंक
प्रैक्टिकल पेपर - 300 अंक
हिंदी - 100 अंक
इंगलिश - 100 अंक
फाउंडेशन - 100 अंक
रिलेटेड पेपर - 100
इंटरमीडिएट के अंकों का बंटवारा
तीन मुख्य विषय (जैसे साइंस में फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ) - 100, 100, 100 अंकों
हिंदी - 50
इंगलिश - 50
या
इंगलिश - 100
कोट
संघ की ओर से कई बार मांग की गयी है कि वोकेशनल कोर्स के कम अंकों वाला सिलेबस तैयार किया जायें. लेकिन अभी तक पुरानी पद्धति पर ही सिलेबस के अंकों का बंटवारा किया गया हैं. फाउंडेशन की पढ़ाई को बंद कर देना चाहिए. कम अंकों की परीक्षा होगी तो स्टूडेंट्स वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई करेंगे.
वरूण कुमार सिंह, महासचिव, बिहार प्रदेश प्लस टू व्यावसायिक शिक्षा संघ
- एक हजार अंक की परीक्षा देना होता हैं वोकेशनल कोर्स में
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ के पैटर्न पर भले बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने वोकेशनल कोर्स को अपडेट किया, लेकिन अभी तक उसे लागू नहीं किया गया हैं. कई सालों के बाद समिति की ओर से वोकेशनल कोर्स को 2013 में अपडेट किया गया था. लेकिन अभी भी फाइल तक ही वो चल रहा हैं. उसे कोर्स में अप्लाई नहीं किया गया हैं. 1988 में शुरू हुए इंटर में वोकेशनल कोर्स अभी भी पुराने पद्धति पर ही चलाये जा रहे हैं. वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई करने वाले छात्रों के साथ मुश्किल यह होता हैं कि उन्हें एक हजार अंकों की परीक्षा इंटर में देना होता हैं. इसके लिए उन्हें हर विषय में 100-100 अंकों की पढ़ाई करनी होती हैं. काफी लेंदी सिलेबस हो जाने से छात्र वोकेशनल कोर्स करने से कतराते हैं.
- इंटर की पांच सौ अंक और वोकेशनल की होती हैं एक हजार अंक की परीक्षा
इंटरमीडिएट की परीक्षा भी पहले एक हजार अंकों की होती थी. लेकिन समय के साथ इसमें परिवर्तन कर दिया गया. अब इंटर की परीक्षा मात्र पांच सौ अंकों की होगी. वहीं वोकेशनल कोर्स अभी भी एक हजार अंकों का होता हैं. छात्रों को एक हजार अंकों की परीक्षा देनी होती है. वोकेशनल कोर्स के इंचार्ज एसएन सिंह ने बताया कि सिलेबस को अपडेट तो किया गया हैं, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया हैं. अपडेट वाले सिलेबस में कम अंकों की ही पढ़ाई होगी. परीक्षाएं भी कम अंकों का देना होगा, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया हैं. अधिक अंकों की परीक्षा होने से छात्र वोकेशनल कोर्स नहीं करना चाहते हैं. इसके साथ ना तो किताबें मिलती हैं और ना ही टीचर्स है. इसके अलावा हर स्कूलों में वोकेशनल कोर्स के इंफ्रास्क्ट्रचर की काफी कमी हैं.
अभी भी वोकेशनल कोर्स में अंकों का बंटवारा पुराने पद्धति पर
थ्योरी पेपर - 300 अंक
प्रैक्टिकल पेपर - 300 अंक
हिंदी - 100 अंक
इंगलिश - 100 अंक
फाउंडेशन - 100 अंक
रिलेटेड पेपर - 100
इंटरमीडिएट के अंकों का बंटवारा
तीन मुख्य विषय (जैसे साइंस में फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ) - 100, 100, 100 अंकों
हिंदी - 50
इंगलिश - 50
या
इंगलिश - 100
कोट
संघ की ओर से कई बार मांग की गयी है कि वोकेशनल कोर्स के कम अंकों वाला सिलेबस तैयार किया जायें. लेकिन अभी तक पुरानी पद्धति पर ही सिलेबस के अंकों का बंटवारा किया गया हैं. फाउंडेशन की पढ़ाई को बंद कर देना चाहिए. कम अंकों की परीक्षा होगी तो स्टूडेंट्स वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई करेंगे.
वरूण कुमार सिंह, महासचिव, बिहार प्रदेश प्लस टू व्यावसायिक शिक्षा संघ
महिला सामाख्या के अस्तित्व पर खतरा, नहीं हुआ बजट का अनूमोदन
- आइआइएम अमहदाबाद के रिपोर्ट पर केंद्र सरकार महिला सामाख्या कार्यक्रम को बंद करने का बना रही योजना
संवाददाता, पटना
महिलाओं के अधिकार, उनके कर्तव्य, उनके भविष्य को संवारने का काम महिला सामाख्या करती है. 1992 में शुरू हुआ केंद्र सरकार का महिला सामाख्या कार्यक्रम महिलाओं द्वारा ही संचालित की जाती है. जहां यह कार्यक्रम स्थापना के 25वीं साल में प्रवेश कर गया हैं, वहीं अब इस कार्यक्रम को बंद करने की योजना केंद्र सरकार द्वारा बनायी जा रही है. केंद्र सरकार द्वारा 2015-16 सत्र के लिए अभी तक कोई बजट महिला सामाख्या के पास नहीं भेजा गया है, इस कारण सबला, आत्मा कार्यक्रम को ठप करना पड़ा है. यह जानकारी महिला सामाख्या की राज्य कार्यक्रम सन्वयक कृति ने दिया. महिला सामाख्या ऑफिस में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कृति ने बताया कि 2014 में आइआइएम अहमदाबाद की ओर से देश भर के महिला सामाख्या कार्यक्रम पर सर्वे करवाया गया था. इसकी रिपोर्ट आइआइएम अहमदाबाद द्वारा नवंबर 2014 में दिया गया. रिपोर्ट में कई प्वाइंट में महिला समाख्या पर प्रश्न चिन्ह भी लगाये गये हैं. वहीं कई प्वाइंट पर तारीफ की गयी हैं. कृति ने बताया कि हर साल मार्च के पहले बजट का अनुमोदन हो जाता था. लेकिन अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई बजट नहीं दिया गया है. बजट आने के तीन महीने बाद ही हमारे पास पैसे पहुंचते है. पैसे नहीं होने के कारण हमें कई कार्यक्रम को बंद करना पड़ गया है.
- 21 जिलों में काम करता है महिला समाख्या
महिलाओं को सशिक्तकरण के लिए कई तरह के प्रोग्राम इसके लिए चलाये जाते हैं. देश भर में 11 राज्य में चल रहे यह प्रोग्राम बिहार के 21 जिलों में चलाये जाते है. कृति ने बताया कि बिहार की लगभग चार लाख महिलाएं और किशोरियां इस प्रोग्राम से लाभांवित हो रही है. प्रखंड, पंचायत, राज्य स्तर पर महिला सामाख्या के कार्यक्रम चलाये जा रहें है. अगर यह प्रोग्राम बंद हो जायेगा, तो काफी संख्या में महिलाओं का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा. महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए महिलाओं द्वारा चलाये जाने वाला यह सबसे बड़ा देश का कार्यक्रम है. कृति ने बताया कि महिला सामाख्या की 2015-16 का बजट 13 करोड़ का बनाया गया है.
बिहार के इन जिलों में चलता है महिला सामाख्या का प्रोग्राम
- मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, प. चंपारण, रोहतास, शिवहर, दरभंगा, भोजपुर, कैमूर, गया, सुपौल, किशनगंज, बांका जमुई, पूर्णिया, कटिहार, वैशाली, पूर्वी चंपारण
महिला सामाख्या के बारे में जानकारी
समूहों की संख्या - 11010
समूहों की महिला सदस्यों की संख्या - 211729
इन मुददों पर होता हैं काम
- दहेज प्रताड़ना, बलात्कार, घरेलू हिंसा, सामाजिक या अन्य हिंसा
संवाददाता, पटना
महिलाओं के अधिकार, उनके कर्तव्य, उनके भविष्य को संवारने का काम महिला सामाख्या करती है. 1992 में शुरू हुआ केंद्र सरकार का महिला सामाख्या कार्यक्रम महिलाओं द्वारा ही संचालित की जाती है. जहां यह कार्यक्रम स्थापना के 25वीं साल में प्रवेश कर गया हैं, वहीं अब इस कार्यक्रम को बंद करने की योजना केंद्र सरकार द्वारा बनायी जा रही है. केंद्र सरकार द्वारा 2015-16 सत्र के लिए अभी तक कोई बजट महिला सामाख्या के पास नहीं भेजा गया है, इस कारण सबला, आत्मा कार्यक्रम को ठप करना पड़ा है. यह जानकारी महिला सामाख्या की राज्य कार्यक्रम सन्वयक कृति ने दिया. महिला सामाख्या ऑफिस में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कृति ने बताया कि 2014 में आइआइएम अहमदाबाद की ओर से देश भर के महिला सामाख्या कार्यक्रम पर सर्वे करवाया गया था. इसकी रिपोर्ट आइआइएम अहमदाबाद द्वारा नवंबर 2014 में दिया गया. रिपोर्ट में कई प्वाइंट में महिला समाख्या पर प्रश्न चिन्ह भी लगाये गये हैं. वहीं कई प्वाइंट पर तारीफ की गयी हैं. कृति ने बताया कि हर साल मार्च के पहले बजट का अनुमोदन हो जाता था. लेकिन अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई बजट नहीं दिया गया है. बजट आने के तीन महीने बाद ही हमारे पास पैसे पहुंचते है. पैसे नहीं होने के कारण हमें कई कार्यक्रम को बंद करना पड़ गया है.
- 21 जिलों में काम करता है महिला समाख्या
महिलाओं को सशिक्तकरण के लिए कई तरह के प्रोग्राम इसके लिए चलाये जाते हैं. देश भर में 11 राज्य में चल रहे यह प्रोग्राम बिहार के 21 जिलों में चलाये जाते है. कृति ने बताया कि बिहार की लगभग चार लाख महिलाएं और किशोरियां इस प्रोग्राम से लाभांवित हो रही है. प्रखंड, पंचायत, राज्य स्तर पर महिला सामाख्या के कार्यक्रम चलाये जा रहें है. अगर यह प्रोग्राम बंद हो जायेगा, तो काफी संख्या में महिलाओं का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा. महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए महिलाओं द्वारा चलाये जाने वाला यह सबसे बड़ा देश का कार्यक्रम है. कृति ने बताया कि महिला सामाख्या की 2015-16 का बजट 13 करोड़ का बनाया गया है.
बिहार के इन जिलों में चलता है महिला सामाख्या का प्रोग्राम
- मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, प. चंपारण, रोहतास, शिवहर, दरभंगा, भोजपुर, कैमूर, गया, सुपौल, किशनगंज, बांका जमुई, पूर्णिया, कटिहार, वैशाली, पूर्वी चंपारण
महिला सामाख्या के बारे में जानकारी
समूहों की संख्या - 11010
समूहों की महिला सदस्यों की संख्या - 211729
इन मुददों पर होता हैं काम
- दहेज प्रताड़ना, बलात्कार, घरेलू हिंसा, सामाजिक या अन्य हिंसा
11 फरवरी से होगी इंटर की परीक्षा, रजिस्ट्रेशन 14 अगस्त से
- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने शुरू किया इंटर की परीक्षा
संवाददाता, पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से 2016 के इंटरमीडिएट की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी गयी है. रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को लेकर समिति ने स्कूलों और कॉलेजों से छात्रों ेकी सूची मांगी हैं. वहीं परीक्षा की तिथि भी समिति की ओर से घोषित कर दिया गया है. इस बार इंटरमीडिएट की परीक्षा 11 फरवरी 2016 से शुरू होगा. 11 फरवरी से 28 फरवरी 2016 तक इंटर की परीक्षा आयोजित की जायेगी. इसके लिए परीक्षा फार्म 20 नवंबर से भराया जायेगा. बिहार विधान सभा के चुनाव को देखते हुए रजिस्ट्रेशन अगस्त में और परीक्षा फार्म नवंबर में किया जायेगा. चुनाव के दौरान रजिस्ट्रेशन संबंधित सारे कार्य पूरा कर लिये जायेंगे.
- 15 मई 2016 को निकलेगा रिजल्ट
समिति से मिली जानकारी के अनुसार 14 अगस्त से इंटरमीडिएट के रजिस्ट्रेशन का काम शुरू किया जायेगा. तमाम कॉलेज और स्कूलों के पास रजिस्ट्रेशन फार्म भेजा जा रहा है. रजिस्ट्रेशन का काम 24 अगस्त तक चलेगा. इस बार समिति पिछले साल 2015 की तुलना में पहले ही इंटर की परीक्षा लेने और इसका रिजल्ट घोषित करेगा. परीक्षा फरवरी में ली जायेगी. 2015 में जहां 18 फरवरी को परीक्षा ली गयी थी. वहीं इस बार 2016 में 11 फरवरी परीक्षा ली जायेगी. रिजल्ट भी पहले निकाला जायेगा. 2016 में इंटर का रिजल्ट 15 मई क
कुछ मुख्य तिथि की गयी घोषित
रजिस्ट्रेशन का काम - 14 अगस्त से 15 सितंबर
परीक्षा फार्म भराने की प्र्िरक्रया - 20 नवंबर से 30 नवंबर
एडमिट कार्ड वितरण - 16 जनवरी 2016
इंटर की परीक्षा - 11 फरवरी से 28 फरवरी 2016
प्रायोगिक परीक्षा - 2 मार्च से 15 मार्च 2016
मूल्यांकन प्रक्रिया - 18 मार्च से 30 मार्च 2016
इंटर का रिजल्ट - 15 मई 2016
कोट
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी हैं. कॉलेजों और स्कूलों से छात्रों की लिस्ट मांगी गयी है. अगस्त से सितंबर तक रजिस्ट्रेशन का काम पूरा कर लिया जायेगा. इस बार नवंबर में ही परीक्षा फार्म भरवाये जायेंगे. परीक्षा फरवरी में लिया जायेगा.
श्रीनिवास चंद्र तिवारी, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
संवाददाता, पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से 2016 के इंटरमीडिएट की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी गयी है. रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को लेकर समिति ने स्कूलों और कॉलेजों से छात्रों ेकी सूची मांगी हैं. वहीं परीक्षा की तिथि भी समिति की ओर से घोषित कर दिया गया है. इस बार इंटरमीडिएट की परीक्षा 11 फरवरी 2016 से शुरू होगा. 11 फरवरी से 28 फरवरी 2016 तक इंटर की परीक्षा आयोजित की जायेगी. इसके लिए परीक्षा फार्म 20 नवंबर से भराया जायेगा. बिहार विधान सभा के चुनाव को देखते हुए रजिस्ट्रेशन अगस्त में और परीक्षा फार्म नवंबर में किया जायेगा. चुनाव के दौरान रजिस्ट्रेशन संबंधित सारे कार्य पूरा कर लिये जायेंगे.
- 15 मई 2016 को निकलेगा रिजल्ट
समिति से मिली जानकारी के अनुसार 14 अगस्त से इंटरमीडिएट के रजिस्ट्रेशन का काम शुरू किया जायेगा. तमाम कॉलेज और स्कूलों के पास रजिस्ट्रेशन फार्म भेजा जा रहा है. रजिस्ट्रेशन का काम 24 अगस्त तक चलेगा. इस बार समिति पिछले साल 2015 की तुलना में पहले ही इंटर की परीक्षा लेने और इसका रिजल्ट घोषित करेगा. परीक्षा फरवरी में ली जायेगी. 2015 में जहां 18 फरवरी को परीक्षा ली गयी थी. वहीं इस बार 2016 में 11 फरवरी परीक्षा ली जायेगी. रिजल्ट भी पहले निकाला जायेगा. 2016 में इंटर का रिजल्ट 15 मई क
कुछ मुख्य तिथि की गयी घोषित
रजिस्ट्रेशन का काम - 14 अगस्त से 15 सितंबर
परीक्षा फार्म भराने की प्र्िरक्रया - 20 नवंबर से 30 नवंबर
एडमिट कार्ड वितरण - 16 जनवरी 2016
इंटर की परीक्षा - 11 फरवरी से 28 फरवरी 2016
प्रायोगिक परीक्षा - 2 मार्च से 15 मार्च 2016
मूल्यांकन प्रक्रिया - 18 मार्च से 30 मार्च 2016
इंटर का रिजल्ट - 15 मई 2016
कोट
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी हैं. कॉलेजों और स्कूलों से छात्रों की लिस्ट मांगी गयी है. अगस्त से सितंबर तक रजिस्ट्रेशन का काम पूरा कर लिया जायेगा. इस बार नवंबर में ही परीक्षा फार्म भरवाये जायेंगे. परीक्षा फरवरी में लिया जायेगा.
श्रीनिवास चंद्र तिवारी, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
Monday, August 3, 2015
क्लास वन में 17 हजार और 10वीं में आकर 7 हजार हो जाते हैं स्टूडेंट्स
- केंद्रीय विद्यालय में सीनियर क्लास में जाते-जाते घट जाते हैं स्टूडेंट्स की संख्या
संवाददाता, पटना
केंद्रीय विद्यालय में बच्चें का एडमिशन करवाने के लिए अभिभावक काफी मशक्कत करते हैं. हर अभिभावक क्लास वन में नामांकन के लिए केंद्रीय विद्यालय में को चुनना पसंद करते हैं. इससे केंद्रीय विद्यालय में क्लास वन में नामांकन की संख्या कई हजार में चला जाता हैं. लेकिन आगे के क्लास में जाते-जाते यहीं संख्या कम होती जाती हैं. इस बात का खुलासा केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) की ओर से किया गया हैं. केवीएस ने देश भर के केंद्रीय विद्यालय में पढ़ रहे छात्रों की संख्या की लिस्ट जारी किया हैं. इस लिस्ट में पटना जोन के केंद्रीय विद्यालय की लिस्ट भी जारी किया गया हैं. दूसरे तमाम जोन से पटना जोन के केंद्रीय विद्यालय में पढ़ रहे स्टूडेंट्स की संख्या हर साल कम होती जा रही हैं.
- पटना जोन है सबसे आगे
5वीं के बाद केंद्रीय विद्यालय छोड़ने का सिलसिला दूसरे जोन के स्कूलों में भी हैं. लेकिन पटना जोन के विद्यालयों में अधिक हैं. केवीएस द्वारा जारी लिस्ट के अनुसार हर पटना जोन के केंद्रीय विद्यालय में यह स्थिति पहले भी थी. लेकिन हाल के एक साल में यह अधिक देखा जा रहा हैं. क्लास वन में नामांकन लेने में पटना जोन केंद्रीय विद्यालय की स्थिति देश भर में पांचवें स्थान पर हैं. लेकिन नौवीं और दसवीं तक जाते-जाते यह स्थिति 10वें पायदान पर पहुंच जाती हैं. केवीएस के अनुसार पटना जोन में क्वालिटी एजुकेशन को बढ़ावा देने की जरूरत हैं.
इन कारणों से घट रही स्टूडेंट्स की संख्या
- मुख्य रूप से क्लास वन में ही नामांकन लिये जाते हैं
- दूसरे क्लास में नामांकन नहीं के बराबर होता हैं
- ट्रांसफर वाले बच्चों की संख्या अधिक होने से
- उपर के क्लास में सीधे सीबीएसइ स्कूलों में छात्र नामांकन लेते हैं
- सीबीएसइ स्कूल के सिलेबस के पैटर्न पर ही प्रतियोगी परीक्षा ली जाती हैं
- अदर एक्टिविटी काफी होने से उपर के क्लास में जाने के बाद स्टूडेंट्स के पास समय कम होता हैं
- सीबीएसइ के पैटर्न पर सारी एक्टिविटी नहीं होती है
क्लास वाइज स्टूडेंट्स की संख्या
पटना जोन
क्लास वन से पांचवी तक
कुल विद्यार्थी की संख्या - 17802
छात्र की संख्या - 10485
छात्रों की संख्या - 7317
क्लास छठीं से आठवीं तक
कुल विद्यार्थी की संख्या - 11767
छात्र की संख्या - 6922
छात्रों की संख्या - 4845
क्लास नौवीं से दसवीं तक
कुल विद्यार्थी की संख्या - 7797
छात्र की संख्या - 4728
छात्रों की संख्या - 3069
क्लास ग्यारहवीं से बारहवीं तक
कुल विद्यार्थी की संख्या - 4635
छात्र की संख्या - 2490
छात्रों की संख्या - 2145
संवाददाता, पटना
केंद्रीय विद्यालय में बच्चें का एडमिशन करवाने के लिए अभिभावक काफी मशक्कत करते हैं. हर अभिभावक क्लास वन में नामांकन के लिए केंद्रीय विद्यालय में को चुनना पसंद करते हैं. इससे केंद्रीय विद्यालय में क्लास वन में नामांकन की संख्या कई हजार में चला जाता हैं. लेकिन आगे के क्लास में जाते-जाते यहीं संख्या कम होती जाती हैं. इस बात का खुलासा केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) की ओर से किया गया हैं. केवीएस ने देश भर के केंद्रीय विद्यालय में पढ़ रहे छात्रों की संख्या की लिस्ट जारी किया हैं. इस लिस्ट में पटना जोन के केंद्रीय विद्यालय की लिस्ट भी जारी किया गया हैं. दूसरे तमाम जोन से पटना जोन के केंद्रीय विद्यालय में पढ़ रहे स्टूडेंट्स की संख्या हर साल कम होती जा रही हैं.
- पटना जोन है सबसे आगे
5वीं के बाद केंद्रीय विद्यालय छोड़ने का सिलसिला दूसरे जोन के स्कूलों में भी हैं. लेकिन पटना जोन के विद्यालयों में अधिक हैं. केवीएस द्वारा जारी लिस्ट के अनुसार हर पटना जोन के केंद्रीय विद्यालय में यह स्थिति पहले भी थी. लेकिन हाल के एक साल में यह अधिक देखा जा रहा हैं. क्लास वन में नामांकन लेने में पटना जोन केंद्रीय विद्यालय की स्थिति देश भर में पांचवें स्थान पर हैं. लेकिन नौवीं और दसवीं तक जाते-जाते यह स्थिति 10वें पायदान पर पहुंच जाती हैं. केवीएस के अनुसार पटना जोन में क्वालिटी एजुकेशन को बढ़ावा देने की जरूरत हैं.
इन कारणों से घट रही स्टूडेंट्स की संख्या
- मुख्य रूप से क्लास वन में ही नामांकन लिये जाते हैं
- दूसरे क्लास में नामांकन नहीं के बराबर होता हैं
- ट्रांसफर वाले बच्चों की संख्या अधिक होने से
- उपर के क्लास में सीधे सीबीएसइ स्कूलों में छात्र नामांकन लेते हैं
- सीबीएसइ स्कूल के सिलेबस के पैटर्न पर ही प्रतियोगी परीक्षा ली जाती हैं
- अदर एक्टिविटी काफी होने से उपर के क्लास में जाने के बाद स्टूडेंट्स के पास समय कम होता हैं
- सीबीएसइ के पैटर्न पर सारी एक्टिविटी नहीं होती है
क्लास वाइज स्टूडेंट्स की संख्या
पटना जोन
क्लास वन से पांचवी तक
कुल विद्यार्थी की संख्या - 17802
छात्र की संख्या - 10485
छात्रों की संख्या - 7317
क्लास छठीं से आठवीं तक
कुल विद्यार्थी की संख्या - 11767
छात्र की संख्या - 6922
छात्रों की संख्या - 4845
क्लास नौवीं से दसवीं तक
कुल विद्यार्थी की संख्या - 7797
छात्र की संख्या - 4728
छात्रों की संख्या - 3069
क्लास ग्यारहवीं से बारहवीं तक
कुल विद्यार्थी की संख्या - 4635
छात्र की संख्या - 2490
छात्रों की संख्या - 2145
प्रश्न पत्र पर लिखा तो कदाचार में आयेंगे स्टूडेंट्स
- सीबीएसइ ने 2016 बोर्ड परीक्षा के लिए जारी किया निर्देश
संवाददाता, पटना
बोर्ड परीक्षा में अब प्रश्न पत्र पर कुछ लिखा तो स्टूडेंट्स पर कार्रवाई होगी. प्रश्न पत्र पर कुछ भी लिखना स्टूडेंट्स को महंगा पड़ सकता है. एआइपीएमटी की परीक्षा में हुए नकल को देखते हुए सीबीएसइ ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा को लेकर अभी से नियम बनाना शुरू कर दिया है. 2016 में होने वाले परीक्षा पर सीबीएसइ ने प्रश्न पत्र पर कुछ भी लिखने से सख्त मना कर दिया हैं. अगर स्टूडेंट्स प्रश्न पत्र पर कोई रफ वर्क भी करते हैं तो उसे नकल की श्रेणी में लाया जायेगा. तीन घंटे के परीक्षा समय में प्रश्न पत्र पर कुछ नहीं लिखा जा सकता हैं. एग्जामिनेशन हॉल से निकलने के बाद ही प्रश्न पत्र पर कुछ लिखा जा सकता हैं. सीबीएसइ ने इसकी सूचना तमाम स्कूलों को जल्द से जल्द
संवाददाता, पटना
बोर्ड परीक्षा में अब प्रश्न पत्र पर कुछ लिखा तो स्टूडेंट्स पर कार्रवाई होगी. प्रश्न पत्र पर कुछ भी लिखना स्टूडेंट्स को महंगा पड़ सकता है. एआइपीएमटी की परीक्षा में हुए नकल को देखते हुए सीबीएसइ ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा को लेकर अभी से नियम बनाना शुरू कर दिया है. 2016 में होने वाले परीक्षा पर सीबीएसइ ने प्रश्न पत्र पर कुछ भी लिखने से सख्त मना कर दिया हैं. अगर स्टूडेंट्स प्रश्न पत्र पर कोई रफ वर्क भी करते हैं तो उसे नकल की श्रेणी में लाया जायेगा. तीन घंटे के परीक्षा समय में प्रश्न पत्र पर कुछ नहीं लिखा जा सकता हैं. एग्जामिनेशन हॉल से निकलने के बाद ही प्रश्न पत्र पर कुछ लिखा जा सकता हैं. सीबीएसइ ने इसकी सूचना तमाम स्कूलों को जल्द से जल्द
स्कूल की सफाई दिलायेगा शिक्षा पुरस्कार
- सीबीएसइ करेगा एक स्कूल के एक टीचर के साथ एक स्टूडेंट को सम्मानित
संवाददाता, पटना
सर्व का फल मीठा होता है. अभी तक हम लोग यहीं कहावत सुनते आ रहे है. लेकिन सफाई का फल मीठा होता है, यह कहावत चरितार्थ होने वाली है उन टीचर और स्टूडेंट के उपर जो पिछले कई सालों से स्कूल और उसके आसपास की साफ सफाई में अपना सहयोग दे रहे हो. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से पहली बार नेशनल एजुकेशन डे 2015 पर सैनिटेशन को फोकस किया जा रहा है. स्कूल और उसके आसपास की सफाई हो, इसके प्रति स्कूल ऑथोरिटी और स्टूडेंट्स के बीच अवेयरनेस आयें, इसके लिए नेशनल एजुकेशन डे को लेकर सीबीएसइ एक कांपिटिशन करवाने जा रहा हैं.
- अक्तूबर से शुरू है ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन
अब सीबीएसइ स्कूल की साफ सफाई को फोकस करने के लिए ऑन लाइन इसे जोड़ेगा. इसके तहत स्कूल के टीचर्स को अपना कर्तव्य बताना होगा. एक टीचर के तौर पर समाज में उनके योगदान को ऑन लाइन जानकारी देने को सीबीएसइ ने निर्देश दिया है. टीचर के तौर पर स्कूल के अलावा प्रैक्टिकली रूप में टीचर साफ सफाई पर कितना ध्यान दे रहे है. सैनिटेशन की ओर अवेयर करने के लिए सीबीएसइ इसका आयेाजन कर रहा है. 29 अक्तूबर से 7 नवंबर तक इसका रजिस्ट्रेशन होगा. इसमें एक टीचर और एक स्टूडेंट पार्टिफिकेट करेंगे. सीबीएसइ के अनुसार वहीं टीचर पार्टिसिपेट करेंगे जो पिछले दो सालों से सैनिटेशन पर काम रहे हो. वहीं स्टूडेंट पिछले एक साल से सैनिटेशन पर काम कर रहे है. इस प्रोजेक्ट में हर क्लास के स्टूडेंट्स शामिल हो सकते हैं.
ऐसे करें रजिस्ट्रेशन
- सीबीएसइ के वेबसाइट 666.ूु2ीूंंेिं्रू.्रल्ल पर जाकर टीचर और स्टूडेंट रजिस्ट्रेशन करेंगे
- रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 7 नवंबर तक किया जायेगा
- रजिस्ट्रेशन का एक कॉपी डाउनलोड कर उसे फिर ऑन लाइन बोर्ड के पास भेजना होगा
- रजिस्ट्रेशन के लिए प्रत्येक स्कूल को 5 सौ फी भी देना होगा
ऐसे होगी टीम का चुनाव
- हर सीबीएसइ रिजन से दो टीम चुने जायेंगे. एक टीम में एक टीचर और एक स्टूडेंट होंगे
- हर रिजन से पहुंचने के बाद कांपिटिशन के आधार पर टीम को सॉट लिस्ट किया जायेगा
- फाइनल राउंड में सेलेक्ट होने के लिए हर टीम को चार मिनट का प्रेजेंटेशन देना होगा
- 11 नवंबर को है नेशनल एजुकेशन डे
स्वतंत्रता सेनानी और विद्वान मौलाना अबुल कलाम आजाद जी की जयंती समारोह को नेशनल एजुकेशन डे के रूप में मनाया जाता है. देश भर में यह आयोजन 11 नवंबर को हर साल होता है. मौलाना अबुल कलाम आजाद स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे.
संवाददाता, पटना
सर्व का फल मीठा होता है. अभी तक हम लोग यहीं कहावत सुनते आ रहे है. लेकिन सफाई का फल मीठा होता है, यह कहावत चरितार्थ होने वाली है उन टीचर और स्टूडेंट के उपर जो पिछले कई सालों से स्कूल और उसके आसपास की साफ सफाई में अपना सहयोग दे रहे हो. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से पहली बार नेशनल एजुकेशन डे 2015 पर सैनिटेशन को फोकस किया जा रहा है. स्कूल और उसके आसपास की सफाई हो, इसके प्रति स्कूल ऑथोरिटी और स्टूडेंट्स के बीच अवेयरनेस आयें, इसके लिए नेशनल एजुकेशन डे को लेकर सीबीएसइ एक कांपिटिशन करवाने जा रहा हैं.
- अक्तूबर से शुरू है ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन
अब सीबीएसइ स्कूल की साफ सफाई को फोकस करने के लिए ऑन लाइन इसे जोड़ेगा. इसके तहत स्कूल के टीचर्स को अपना कर्तव्य बताना होगा. एक टीचर के तौर पर समाज में उनके योगदान को ऑन लाइन जानकारी देने को सीबीएसइ ने निर्देश दिया है. टीचर के तौर पर स्कूल के अलावा प्रैक्टिकली रूप में टीचर साफ सफाई पर कितना ध्यान दे रहे है. सैनिटेशन की ओर अवेयर करने के लिए सीबीएसइ इसका आयेाजन कर रहा है. 29 अक्तूबर से 7 नवंबर तक इसका रजिस्ट्रेशन होगा. इसमें एक टीचर और एक स्टूडेंट पार्टिफिकेट करेंगे. सीबीएसइ के अनुसार वहीं टीचर पार्टिसिपेट करेंगे जो पिछले दो सालों से सैनिटेशन पर काम रहे हो. वहीं स्टूडेंट पिछले एक साल से सैनिटेशन पर काम कर रहे है. इस प्रोजेक्ट में हर क्लास के स्टूडेंट्स शामिल हो सकते हैं.
ऐसे करें रजिस्ट्रेशन
- सीबीएसइ के वेबसाइट 666.ूु2ीूंंेिं्रू.्रल्ल पर जाकर टीचर और स्टूडेंट रजिस्ट्रेशन करेंगे
- रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 7 नवंबर तक किया जायेगा
- रजिस्ट्रेशन का एक कॉपी डाउनलोड कर उसे फिर ऑन लाइन बोर्ड के पास भेजना होगा
- रजिस्ट्रेशन के लिए प्रत्येक स्कूल को 5 सौ फी भी देना होगा
ऐसे होगी टीम का चुनाव
- हर सीबीएसइ रिजन से दो टीम चुने जायेंगे. एक टीम में एक टीचर और एक स्टूडेंट होंगे
- हर रिजन से पहुंचने के बाद कांपिटिशन के आधार पर टीम को सॉट लिस्ट किया जायेगा
- फाइनल राउंड में सेलेक्ट होने के लिए हर टीम को चार मिनट का प्रेजेंटेशन देना होगा
- 11 नवंबर को है नेशनल एजुकेशन डे
स्वतंत्रता सेनानी और विद्वान मौलाना अबुल कलाम आजाद जी की जयंती समारोह को नेशनल एजुकेशन डे के रूप में मनाया जाता है. देश भर में यह आयोजन 11 नवंबर को हर साल होता है. मौलाना अबुल कलाम आजाद स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे.
इंटर काउंसिल का बदलेगा लुक, परीक्षा विभाग विस्तार के साथ बनेंगे नौ काउंटर
- हर जिले के लिए बनायेंगे जायेंगे काउंटर
संवाददाता, पटना
इंटरमीडिएट में हर साल दो लाख के लगभग छात्रों की संख्या बढ़ रही है. हर दिन इंटर काउंसिल में छात्रों की लंबी लाइन लगी रहती हैं. लगभग आठ सौ से एक हजार तक छात्र अभिभावक हर दिन काम करवाने के लिए इंटर काउंसिल आते हैं. छोटी सी काम के लिए छात्रों को कई घंटे या कई बार तो कई दिन लग जाते है. छात्रों का काम जल्द से जल्द और आसानी से हो, इसके लिए अब इंटर काउंसिल में कुछ चेंज किया जायेगा. इसकी की तैयारी चल रही हैं. इसके तहत काउंसिल का विस्तारीकरण किया जायेगा. जहां पर छात्रों का आना जाना अधिक होता हैं, उनका विस्तार पहले किया जायेगा. समिति की माने तो जहां काउंटर की संख्या बढ़ायी जायेगी, वहीं हर जिलों के कमरों में भी विस्तार किया जायेगा.
स्टोर रूम में जायेगा सारा डॉक्यूमेंट
अभी तमाम जिलों के हर डॉक्यूमेंट को उसी जिला के कमरे में रखा हुआ हैं. इससे वहां पर करने वाले कर्मचारियों को काफी दिक्कतें होती है. इसके अलावा उस कमरे में छात्रों के जाने के लिए भी जगह नहीं होती हैं. तमाम जिलों के सारे डॉक्यूमेंट को अब स्टोर रूम में रखा जायेगा. हर जिलों के कमरा में छात्रों के लिए काउंटर बनाये जायेंगे. जिससे छात्रों को इंतजार नहीं करना पड़े. इसके अलावा काउंसिल के कुछ कमरे कर्मचारियों ने रखे हैं, इसे भी अब काउंसिल के काम में लाया जायेगा.
इन चीजों पर होगा फोकस
- परीक्षा विभाग को दो फ्लोर में किया जायेगा. ज्ञात हो कि अभी सातवें फ्लोर पर ही परीक्षा विभाग चल रहा है.
- ग्राउंड फ्लोर पर अभी मात्र नौ काउंटर है. नौ काउंटर और बनाये जायेंगे. इसके बाद 18 काउंटर हो जायेगा. जिससे छात्रों का काम आसानी से होगा.
- हर जिलों के कमरे को बढ़ाया जायेगा
- जिन जिलों में छात्रों की संख्या अधिक हैं, उन्हें अधिक जगह दी जायेगी
- हर जिलों के काम के लिए छात्रों के लिए काउंटर बनाये जायेंगे
- जिलों के काम में कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ेगी, जिससे छात्रों को इंतजार नहीं करना पड़े
- ग्राउंड फ्लोर पर सूचना पट और पूछ ताछ काउंटर का लुक चेंज होगा
- बोर्ड संबंधित हर सूचना लगायी जायेगी.
- किस फ्लोर पर छात्रों का संबंधित काम होगा, इसकी जानकारी छात्रों को सूचना पट पर ही मिल जायेगी
कोट
इंटर काउंसिल में छात्रों की सुविधा को ध्यान में रख कर विस्तारीकरण किया जायेगा. हर दिन सैकड़ों छात्र आते हैं. कई बार जानकारी नहीं होने के कारण छात्रों को भटकना पड़ता हैं. इस कारण कई चीजों में बदलाव किया जायेगा.
श्रीनिवास चंद्र तिवारी, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
संवाददाता, पटना
इंटरमीडिएट में हर साल दो लाख के लगभग छात्रों की संख्या बढ़ रही है. हर दिन इंटर काउंसिल में छात्रों की लंबी लाइन लगी रहती हैं. लगभग आठ सौ से एक हजार तक छात्र अभिभावक हर दिन काम करवाने के लिए इंटर काउंसिल आते हैं. छोटी सी काम के लिए छात्रों को कई घंटे या कई बार तो कई दिन लग जाते है. छात्रों का काम जल्द से जल्द और आसानी से हो, इसके लिए अब इंटर काउंसिल में कुछ चेंज किया जायेगा. इसकी की तैयारी चल रही हैं. इसके तहत काउंसिल का विस्तारीकरण किया जायेगा. जहां पर छात्रों का आना जाना अधिक होता हैं, उनका विस्तार पहले किया जायेगा. समिति की माने तो जहां काउंटर की संख्या बढ़ायी जायेगी, वहीं हर जिलों के कमरों में भी विस्तार किया जायेगा.
स्टोर रूम में जायेगा सारा डॉक्यूमेंट
अभी तमाम जिलों के हर डॉक्यूमेंट को उसी जिला के कमरे में रखा हुआ हैं. इससे वहां पर करने वाले कर्मचारियों को काफी दिक्कतें होती है. इसके अलावा उस कमरे में छात्रों के जाने के लिए भी जगह नहीं होती हैं. तमाम जिलों के सारे डॉक्यूमेंट को अब स्टोर रूम में रखा जायेगा. हर जिलों के कमरा में छात्रों के लिए काउंटर बनाये जायेंगे. जिससे छात्रों को इंतजार नहीं करना पड़े. इसके अलावा काउंसिल के कुछ कमरे कर्मचारियों ने रखे हैं, इसे भी अब काउंसिल के काम में लाया जायेगा.
इन चीजों पर होगा फोकस
- परीक्षा विभाग को दो फ्लोर में किया जायेगा. ज्ञात हो कि अभी सातवें फ्लोर पर ही परीक्षा विभाग चल रहा है.
- ग्राउंड फ्लोर पर अभी मात्र नौ काउंटर है. नौ काउंटर और बनाये जायेंगे. इसके बाद 18 काउंटर हो जायेगा. जिससे छात्रों का काम आसानी से होगा.
- हर जिलों के कमरे को बढ़ाया जायेगा
- जिन जिलों में छात्रों की संख्या अधिक हैं, उन्हें अधिक जगह दी जायेगी
- हर जिलों के काम के लिए छात्रों के लिए काउंटर बनाये जायेंगे
- जिलों के काम में कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ेगी, जिससे छात्रों को इंतजार नहीं करना पड़े
- ग्राउंड फ्लोर पर सूचना पट और पूछ ताछ काउंटर का लुक चेंज होगा
- बोर्ड संबंधित हर सूचना लगायी जायेगी.
- किस फ्लोर पर छात्रों का संबंधित काम होगा, इसकी जानकारी छात्रों को सूचना पट पर ही मिल जायेगी
कोट
इंटर काउंसिल में छात्रों की सुविधा को ध्यान में रख कर विस्तारीकरण किया जायेगा. हर दिन सैकड़ों छात्र आते हैं. कई बार जानकारी नहीं होने के कारण छात्रों को भटकना पड़ता हैं. इस कारण कई चीजों में बदलाव किया जायेगा.
श्रीनिवास चंद्र तिवारी, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला को पढ़ेंगे सीबीएसइ स्टूडेंट्स
- मलाला यूसुफजाई की जीवनी को केंद्रीय विद्यालय संगठन ने शामिल किया लाइब्रेरी में
- 2016-17 से 9वीं और 10वीं के कोर्स में किया जायेगा शामिल
संवाददाता, पटना
नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजाई को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) के कोर्स में शामिल किया जायेगा. इसके लिए बोर्ड की ओर से तैयारी शुरू कर दी गयी हैं. 2016-17 सत्र से सीबीएसइ 9वीं और 10वीं क्लास में इसे लागू कर देगा. कोर्स के तौर पर मलाला यूसुफजाई के बचपन के संघर्ष की कहानी से लेकर आतंकी हमले की घटना के बारे में भी पढ़ाया जायेगा. इसके अलावा मलाला का शिक्षा में क्षेत्र में काम को भी सीबीएसइ ने कोर्स में शामिल किया हैं. सीबीएसइ की ओर से कोर्स को लेकर एनसीइआरटी को जानकारी दे दी गयी हैं. मलाला की जीवनी को सोशल स्टडी में शामिल किया जायेगा.
- ओटवा में भी पूछे जायेंग सवाल
सीबीएसइ ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि मलाला पर सोशल स्टडी में दो चैप्टर रखे जायेगे. 9वीं के फाइनल और 10वीं बोर्ड की परीक्षा में ओटवा (ओपने टेस्ट बेस्ड असेसमेंट) से संबंधित प्रश्न भी पूछे जायेंगे. 2017 की बोर्ड परीक्षा में मलाला पर बोर्ड परीक्षा में प्रश्न रहेंगे. सीबीएसइ के अनुसार 20 अंक का ओटवा से प्रश्न रहेंगे. इसमें 5 अंक के प्रश्न मलाला पर पूछे जायेंगे. अभी सिलेबस तैयार की जा रही हैं. इसे 2016-17 से लागू किया जायेगा.
- केंद्रीय विद्यालय के लाइब्रेरी में मलाला हुई शामिल
वहीं केंद्रीय विद्यालय संगठन के अंतर्गत आने वाले तमाम केंद्रीय विद्यालय के लाइब्रेरी में मलाला की जीवनी में शामिल किया गया हैं. केंद्रीय विद्यालय के स्टूडेंट्स मलाला पर लिखी गयी पुस्तक मलाला हूं मै को अब पढ़ पायेंगे. इस पुस्तक में मलाला से संबंधित हर पहलू को लिया गया हैं. कैसे एक मुसलिम लड़की शिक्षा का बुगुल अपने देश में करती हैं. इसका विरोध होता है. उसके उपर आतंकी हमला होता है. लेकिन वो हिम्मत नहीं हारती. कई बार ऑपरेशन के बाद फिर उसे नयी जिंदगी मिलती हैं. केवीएस के अनुसार मलाला एक उदाहरण हैं, उसकी जीवनी हर किसी बच्चे को पढ़ना चाहिए. इस कारण मलाला की जीवनी को अभी कोर्स में शामिल किया गया हैं.
कोट
नोबेल पुरस्कार विजेताओं को सीबीएसइ के कोर्स में शामिल किया जाता है. मलाला का जिस तरह से काम होता हैं, उसमें इसे अगर कोर्स में शामिल किया जायेगा तो यह बहुत ही अच्छा होगा. इससे स्टूडेंट्स में संघर्ष करने की शक्
ि
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया
- 2016-17 से 9वीं और 10वीं के कोर्स में किया जायेगा शामिल
संवाददाता, पटना
नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजाई को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) के कोर्स में शामिल किया जायेगा. इसके लिए बोर्ड की ओर से तैयारी शुरू कर दी गयी हैं. 2016-17 सत्र से सीबीएसइ 9वीं और 10वीं क्लास में इसे लागू कर देगा. कोर्स के तौर पर मलाला यूसुफजाई के बचपन के संघर्ष की कहानी से लेकर आतंकी हमले की घटना के बारे में भी पढ़ाया जायेगा. इसके अलावा मलाला का शिक्षा में क्षेत्र में काम को भी सीबीएसइ ने कोर्स में शामिल किया हैं. सीबीएसइ की ओर से कोर्स को लेकर एनसीइआरटी को जानकारी दे दी गयी हैं. मलाला की जीवनी को सोशल स्टडी में शामिल किया जायेगा.
- ओटवा में भी पूछे जायेंग सवाल
सीबीएसइ ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि मलाला पर सोशल स्टडी में दो चैप्टर रखे जायेगे. 9वीं के फाइनल और 10वीं बोर्ड की परीक्षा में ओटवा (ओपने टेस्ट बेस्ड असेसमेंट) से संबंधित प्रश्न भी पूछे जायेंगे. 2017 की बोर्ड परीक्षा में मलाला पर बोर्ड परीक्षा में प्रश्न रहेंगे. सीबीएसइ के अनुसार 20 अंक का ओटवा से प्रश्न रहेंगे. इसमें 5 अंक के प्रश्न मलाला पर पूछे जायेंगे. अभी सिलेबस तैयार की जा रही हैं. इसे 2016-17 से लागू किया जायेगा.
- केंद्रीय विद्यालय के लाइब्रेरी में मलाला हुई शामिल
वहीं केंद्रीय विद्यालय संगठन के अंतर्गत आने वाले तमाम केंद्रीय विद्यालय के लाइब्रेरी में मलाला की जीवनी में शामिल किया गया हैं. केंद्रीय विद्यालय के स्टूडेंट्स मलाला पर लिखी गयी पुस्तक मलाला हूं मै को अब पढ़ पायेंगे. इस पुस्तक में मलाला से संबंधित हर पहलू को लिया गया हैं. कैसे एक मुसलिम लड़की शिक्षा का बुगुल अपने देश में करती हैं. इसका विरोध होता है. उसके उपर आतंकी हमला होता है. लेकिन वो हिम्मत नहीं हारती. कई बार ऑपरेशन के बाद फिर उसे नयी जिंदगी मिलती हैं. केवीएस के अनुसार मलाला एक उदाहरण हैं, उसकी जीवनी हर किसी बच्चे को पढ़ना चाहिए. इस कारण मलाला की जीवनी को अभी कोर्स में शामिल किया गया हैं.
कोट
नोबेल पुरस्कार विजेताओं को सीबीएसइ के कोर्स में शामिल किया जाता है. मलाला का जिस तरह से काम होता हैं, उसमें इसे अगर कोर्स में शामिल किया जायेगा तो यह बहुत ही अच्छा होगा. इससे स्टूडेंट्स में संघर्ष करने की शक्
ि
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया
23 साल से सात वोकेशनल कोर्स कर रहा मान्यता का इंतजार, अब बंद करने की तैयारी
- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में सात वोकेशनल कोर्स चलते है बिना मान्यता के
- मान्यता नहीं होने से पड़ रहा नामांकन पर असर
संवाददाता, पटना
वोकेशनल कोर्स करने से सेल्फ इंप्लाइमेंट का रास्ता साफ होता है. प्लस टू लेवल पर जो भी रिक्तियां केंद्र या राज्य सरकार की ओर से संबंधित पद के लिए निकलता है तो आसानी से उसमें नौकरी भी लग जाती है. लेकिन जब सर्टिफिकेट को संबंधित संस्थान मान्यता ही नहीं देगा तो ऐसे कोर्स करने का फायदा ही क्या होगा. कुछ ऐसा ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के छात्रों के साथ हो रहा है. छात्र वोकेशनल कोर्स तो करते है, लेकिन नौकरी के समय उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है. समिति की ओर से वर्तमान में 25 वोकेशनल कोर्स चलाये जा रहे है . इसमें इंजीनियरिंग और मेडिकल से संबंधित सात वोकेशनल कोर्स को संबंधित संस्थान से मान्यता नहीं मिला हुआ है. इस कारण इन कोर्स को छात्र करते भी है तो उन्हें नौकरी के साथ सेल्फ इंप्लाइमेंट में भी दिक्कतें हो रही है. इसको लेकर आये दिन इंटर काउंसिल में भी छात्र पहुंच रहे है. लेकिन अभी तक इसका कोई समाधान नहीं हुआ है.
- सात कोर्स में पांच नामांकन
इन सात वोकेशनल कोर्स में मात्र पांच नामांकन ही हो पायें. 2015-17 सत्र के लिए इन सातों वोकेशनल कोर्स में नामांकन काफी कम रहा. समिति सूत्रों की माने तो पूरे प्रदेश से सात वोकेशनल कोर्स में मात्र पांच ही नामांकन हो पाया हैं. इन कोर्स के प्रति छात्रों का रूझान अब खत्म हो गया हैं. क्योंकि कोर्स के बावजूद इसकी मान्यता विश्व विद्यालय की ओर से नहीं दिया जाता हैं. इससे छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं. 2015-17 सत्र के लिए प्रदेश भर के 91 स्कूलों में मात्र 15 सौ ही नामांकन हुआ हैं. इसमें इन सात कोर्स में नामांकन नहीं के बराबर हैं.
- बंद करना पड़ सकता हैं ये कोर्स
समिति सूत्रों की माने तो अगर नामांकन की यहीं स्थिति रही तो इन सात वोकेशनल कोर्स को बंद करना पड़ जायेगा. सात वोकेशनल कोर्स की मान्यता के लिए समिति की ओर प्रयास भी किया गया. लेकिन इंफ्रास्ट्रर की कमी के कारण अभी तक मान्यता नहीं मिल पायी. अब समिति के पास समस्या है आ रही हैं इन कोर्स को चलाने के लिए पैसे भी खर्च हो रहें है. इन विषयों के परीक्षा लेने में भी खर्च आता हैं. सारी तैयारी करनी पड़ती हैं. लेकिन इसका फायदा छात्रों को नहीं हो रहा हैं. इस कारण अगर यहीं स्थिति रही तो 2016 में इन कोर्स को बंद कर दिया जायेगा.
- 25 में सात वोकेशनल कोर्स बिना मान्यता के
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के तहत 1988 से वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई शुरू की गयी. शुरुआत में 16 कोर्स वोकेशनल के तहत चलाये जाते थे. लेकिन बाद में 1991 के बाद कुछ और कोर्स को शामिल किया गया, जिसके बाद समिति में 25 वोकेशनल कोर्स हो गये. बिहार और झारखंड जब एक साथ था तो 148 प्लस टू स्कूलों में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई होती थी. झारखंड के अलग होने के बाद वर्तमान में बिहार 91 प्लस टू स्कूलों में वोकेशनल कोर्स चलता है. 22 साल से चल रहे सात वोकेशनल कोर्स को अभी तक मान्यता नहीं दिया गया है.
- एनसीवीटी और नर्सिग काउंसिल से लेनी होगी मान्यता
बिहार बोर्ड के तहत जो इंजीनियरिंग के कोर्स होते है, उन्हें एनसीवीटी (नेशनल काउंसिल ऑफ कंवोकेशन ट्रेनिंग, नयी दिल्ली) से मान्यता लेनी होती है. एनसीवीटी के मापदंड के अनुसार वोकेशनल की पढ़ाई नहीं होने के कारण एनसीवीटी मान्यता नहीं देता है. वहीं हाल मेडिकल संबंधित वोकेशनल कोर्स का है. इन कोर्स को नर्सिग काउंसिल ऑफ बिहार से मान्यता लेनी होती है. तभी बिहार स्तर पर किसी तरह की रिक्तियां निकलने पर छात्रों को नियुक्त किया जायेगा. लेकिन मेडिकल कोर्स भी नर्सिग काउंसिल के मापदंड के अनुसार नहीं चलने के कारण मान्यता से दूर है.
- बस मिलता है ग्रेजुएशन में नामांकन
बिहार बोर्ड से वोकेशनल कोर्स करने के बाद बस छात्रों को ग्रेजुएशन में नामांकन मिलता है. छात्र निहारिका ने बताया कि उसने नर्सिग का कोर्स दो साल पहले किया है. लेकिन अभी तक नौकरी नहीं मिली है. प्राइवेट में कहीं नौकरी मांगने जाती है तो सर्टिफिकेट पर नर्सिंग काउंसिल ऑफ बिहार से मान्यता नहीं होने से लौटा दिया जाता है. कुछ ऐसा ही हाल ऑटो मोबाइल का कोर्स कर चुका प्रदीप सिंह का है. प्रदीप सिंह के अनुसार कोई भी कंपनी सर्टिफिकेट में एनसीवीटी की मान्यता को देखता है.
इन वोकेशनल कोर्स को नहीं है मान्यता
इंजीनियरिंग संबंधित
- लैब टेक्निशियन
- इलेक्ट्रॉनिक
- इलेक्ट्रिकल
- ऑटो मोबाइल
- मेकेनिक सर्विस
मेडिकल संबंधित
- नर्सिग
- हेल्थ वर्कर
- लैब टेक्निशियन
कोर्ट
हमारे पास छात्र अपनी दिक्कतें ले कर आते है. वो दो साल का वोकेशनल कोर्स तो कर लेते है, लेकिन जब नौकरी के लिए जाते है तो उन्हें नहीं मिलती है. क्योंकि बिहार बोर्ड के सर्टिफिकेट पर संबंधित संस्थान की मान्यता नहीं मिली रहती है. इसका नतीजा अब ऐसा हो गया है कि इन कोर्स में छात्र अब नामांकन ही नहीं लेते है. काफी संख्या में छात्र है जो कोर्स करने के बाद ऐसे ही बैठे है.
एसएन सिंह, इंचाजर्, वोकेशनल कोर्स, शास्त्रीनगर गल्र्स हाई स्कूल
कई वोकेशनल कोर्स में इस बार एक भी नामांकन नहीं हुआ हैं. वहीं कई कोर्स में मात्र एक दो ही नामांकन हुआ. वोकेशनल कोर्स के प्रचार प्रसार की जरूरत हैं. जिन सात वोकेशनल कोर्स को मान्यता नहीं मिली हैं, उसके लिए हम प्रयास कर रहें है, लेकिन अगर नहीं मिलेगा तो बाद में इसे बंद करने के अलावा मेरे पास कोई चारा नहीं रहेगा.
श्रीनिवास चंद्र तिवारी, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
- मान्यता नहीं होने से पड़ रहा नामांकन पर असर
संवाददाता, पटना
वोकेशनल कोर्स करने से सेल्फ इंप्लाइमेंट का रास्ता साफ होता है. प्लस टू लेवल पर जो भी रिक्तियां केंद्र या राज्य सरकार की ओर से संबंधित पद के लिए निकलता है तो आसानी से उसमें नौकरी भी लग जाती है. लेकिन जब सर्टिफिकेट को संबंधित संस्थान मान्यता ही नहीं देगा तो ऐसे कोर्स करने का फायदा ही क्या होगा. कुछ ऐसा ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के छात्रों के साथ हो रहा है. छात्र वोकेशनल कोर्स तो करते है, लेकिन नौकरी के समय उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है. समिति की ओर से वर्तमान में 25 वोकेशनल कोर्स चलाये जा रहे है . इसमें इंजीनियरिंग और मेडिकल से संबंधित सात वोकेशनल कोर्स को संबंधित संस्थान से मान्यता नहीं मिला हुआ है. इस कारण इन कोर्स को छात्र करते भी है तो उन्हें नौकरी के साथ सेल्फ इंप्लाइमेंट में भी दिक्कतें हो रही है. इसको लेकर आये दिन इंटर काउंसिल में भी छात्र पहुंच रहे है. लेकिन अभी तक इसका कोई समाधान नहीं हुआ है.
- सात कोर्स में पांच नामांकन
इन सात वोकेशनल कोर्स में मात्र पांच नामांकन ही हो पायें. 2015-17 सत्र के लिए इन सातों वोकेशनल कोर्स में नामांकन काफी कम रहा. समिति सूत्रों की माने तो पूरे प्रदेश से सात वोकेशनल कोर्स में मात्र पांच ही नामांकन हो पाया हैं. इन कोर्स के प्रति छात्रों का रूझान अब खत्म हो गया हैं. क्योंकि कोर्स के बावजूद इसकी मान्यता विश्व विद्यालय की ओर से नहीं दिया जाता हैं. इससे छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं. 2015-17 सत्र के लिए प्रदेश भर के 91 स्कूलों में मात्र 15 सौ ही नामांकन हुआ हैं. इसमें इन सात कोर्स में नामांकन नहीं के बराबर हैं.
- बंद करना पड़ सकता हैं ये कोर्स
समिति सूत्रों की माने तो अगर नामांकन की यहीं स्थिति रही तो इन सात वोकेशनल कोर्स को बंद करना पड़ जायेगा. सात वोकेशनल कोर्स की मान्यता के लिए समिति की ओर प्रयास भी किया गया. लेकिन इंफ्रास्ट्रर की कमी के कारण अभी तक मान्यता नहीं मिल पायी. अब समिति के पास समस्या है आ रही हैं इन कोर्स को चलाने के लिए पैसे भी खर्च हो रहें है. इन विषयों के परीक्षा लेने में भी खर्च आता हैं. सारी तैयारी करनी पड़ती हैं. लेकिन इसका फायदा छात्रों को नहीं हो रहा हैं. इस कारण अगर यहीं स्थिति रही तो 2016 में इन कोर्स को बंद कर दिया जायेगा.
- 25 में सात वोकेशनल कोर्स बिना मान्यता के
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के तहत 1988 से वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई शुरू की गयी. शुरुआत में 16 कोर्स वोकेशनल के तहत चलाये जाते थे. लेकिन बाद में 1991 के बाद कुछ और कोर्स को शामिल किया गया, जिसके बाद समिति में 25 वोकेशनल कोर्स हो गये. बिहार और झारखंड जब एक साथ था तो 148 प्लस टू स्कूलों में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई होती थी. झारखंड के अलग होने के बाद वर्तमान में बिहार 91 प्लस टू स्कूलों में वोकेशनल कोर्स चलता है. 22 साल से चल रहे सात वोकेशनल कोर्स को अभी तक मान्यता नहीं दिया गया है.
- एनसीवीटी और नर्सिग काउंसिल से लेनी होगी मान्यता
बिहार बोर्ड के तहत जो इंजीनियरिंग के कोर्स होते है, उन्हें एनसीवीटी (नेशनल काउंसिल ऑफ कंवोकेशन ट्रेनिंग, नयी दिल्ली) से मान्यता लेनी होती है. एनसीवीटी के मापदंड के अनुसार वोकेशनल की पढ़ाई नहीं होने के कारण एनसीवीटी मान्यता नहीं देता है. वहीं हाल मेडिकल संबंधित वोकेशनल कोर्स का है. इन कोर्स को नर्सिग काउंसिल ऑफ बिहार से मान्यता लेनी होती है. तभी बिहार स्तर पर किसी तरह की रिक्तियां निकलने पर छात्रों को नियुक्त किया जायेगा. लेकिन मेडिकल कोर्स भी नर्सिग काउंसिल के मापदंड के अनुसार नहीं चलने के कारण मान्यता से दूर है.
- बस मिलता है ग्रेजुएशन में नामांकन
बिहार बोर्ड से वोकेशनल कोर्स करने के बाद बस छात्रों को ग्रेजुएशन में नामांकन मिलता है. छात्र निहारिका ने बताया कि उसने नर्सिग का कोर्स दो साल पहले किया है. लेकिन अभी तक नौकरी नहीं मिली है. प्राइवेट में कहीं नौकरी मांगने जाती है तो सर्टिफिकेट पर नर्सिंग काउंसिल ऑफ बिहार से मान्यता नहीं होने से लौटा दिया जाता है. कुछ ऐसा ही हाल ऑटो मोबाइल का कोर्स कर चुका प्रदीप सिंह का है. प्रदीप सिंह के अनुसार कोई भी कंपनी सर्टिफिकेट में एनसीवीटी की मान्यता को देखता है.
इन वोकेशनल कोर्स को नहीं है मान्यता
इंजीनियरिंग संबंधित
- लैब टेक्निशियन
- इलेक्ट्रॉनिक
- इलेक्ट्रिकल
- ऑटो मोबाइल
- मेकेनिक सर्विस
मेडिकल संबंधित
- नर्सिग
- हेल्थ वर्कर
- लैब टेक्निशियन
कोर्ट
हमारे पास छात्र अपनी दिक्कतें ले कर आते है. वो दो साल का वोकेशनल कोर्स तो कर लेते है, लेकिन जब नौकरी के लिए जाते है तो उन्हें नहीं मिलती है. क्योंकि बिहार बोर्ड के सर्टिफिकेट पर संबंधित संस्थान की मान्यता नहीं मिली रहती है. इसका नतीजा अब ऐसा हो गया है कि इन कोर्स में छात्र अब नामांकन ही नहीं लेते है. काफी संख्या में छात्र है जो कोर्स करने के बाद ऐसे ही बैठे है.
एसएन सिंह, इंचाजर्, वोकेशनल कोर्स, शास्त्रीनगर गल्र्स हाई स्कूल
कई वोकेशनल कोर्स में इस बार एक भी नामांकन नहीं हुआ हैं. वहीं कई कोर्स में मात्र एक दो ही नामांकन हुआ. वोकेशनल कोर्स के प्रचार प्रसार की जरूरत हैं. जिन सात वोकेशनल कोर्स को मान्यता नहीं मिली हैं, उसके लिए हम प्रयास कर रहें है, लेकिन अगर नहीं मिलेगा तो बाद में इसे बंद करने के अलावा मेरे पास कोई चारा नहीं रहेगा.
श्रीनिवास चंद्र तिवारी, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
वोकेशनल कोर्स के सिलेबस तो बने, किताबें गायब
- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने वोकेशनल कोर्स के सिलेबस को नहीं दे सका किताबों का रूप
संवाददाता, पटना
स्कील डेवलपमेंट और सेल्फ इंप्लायमेंट को लेकर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने वोकेशनल कोर्स चालू तो कर दिया. इसके लिए सिलेबस भी तैयार कर लिये गये, लेकिन इसका किताबें निकालना ही भूल गया. पिछले 24 सालों बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के इंटर काउंसिल में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई हो रही हैं, लेकिन बिना किताबों के. बोर्ड ने सिलेबस तो हर ट्रेड का बना दिया. इन सिलेबस को समय-समय पर अपडेट भी किया जाता है. लेकिन इस सिलेबस को अभी तक किताबें प्रिंट नहीं हो पाया हैं.
- बिना किताबें की हो रही पढ़ाई
कुछ ट्रेड में कुछ टीचर्स ने अपनी ओर से किताबें लिखी है. ऐसे में थोड़ी बहुत मदद उन छात्रों को मिल जाती हैं. लेकिन जिन ट्रेड के लिए टीचर्स ने कोई किताबें नहीं लिखी है, उन छात्रों को काफी परेशानी हो रही है. ज्ञात हो कि समिति की ओर से इंटर की पढ़ाई के लिए कुछ ट्रेड 1988 में चालू किया गया. इसके बाद 1991 में कुछ ट्रेड शुरू किया गया. इससे ट्रेड की संख्या 25 हो गयी. इन तमाम ट्रेड के सिलेबस तो निकाली जा रही हैं. अभी हाल में 2013 में तात्कालिन बोर्ड अध्यक्ष राजमणि प्रसाद की अध्यक्षता में तमाम वोकेशनल कोर्स के ट्रेड को अपडेट किया गया, लेकिन भी तक उसे लागू नहीं किया जा सका है.
- एनसीइआरटी का चलता है सिलेबस
सीबीएसइ के वोकेशनल कोर्स की तरह बिहार बोर्ड के वोकेशनल कोर्स में भी एनसीइआरटी के ही सिलेबस चलाये जाते है. हर ट्रेड में सिलेबस को एनसीइआरटी के पैटर्न पर ही रखा गया है. इससे हर ट्रेड की पूरी जानकारी अच्छे से छात्रों को मिल सके. वोकेशनल कोर्स के टीचर्स राम कुमार ने बताया कि सिलेबस काफी ही बढ़िया है. हर ट्रेड में हर टॉपिक के बारे में जानकारी दी गयी हैं. इससे छात्रों को हर टॉपिक का अच्छी जानकारी हो जाती हैं.
कोट
सिंलेबस तो बना हैं, लेकिन किताबें नहीं हैं. ऐसे में जो भी ट्रेड की पढ़ाई होती है तो बस सिलेबस के पिंट आउट निकाल कर ही किया जाता है. छात्रों को मार्केट में भी किताबें उपलब्ध नहीं हैं. टीचर्स ने जो नोट बना कर दे दिया, बस उसी से पढ़ाई की जाती हैं.
एसएन सिंह, इंचाजर्, वोकेशनल कोर्स, शास्त्रीनगर गल्र्स हाई स्कूल
किताबों को लेकर छात्रो को काफी परेशानी होती हैं. जब से वोकेशनल कोर्स शुरू हुआ, अभी तक एक भी किताबें नहीं प्रिंट हुई है. छात्र बिना किताब के ही कोर्स कर जाते हैं. सिलेबस भी हाल में अपडेट हुआ, लेकिन लागू अभी तक नहीं किया गया है.
वरूण कुमार सिंह, प्रधान महासचिव, बिहार प्रदेश प्लस टू व्यावसायिक शिक्षा संघ
संवाददाता, पटना
स्कील डेवलपमेंट और सेल्फ इंप्लायमेंट को लेकर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने वोकेशनल कोर्स चालू तो कर दिया. इसके लिए सिलेबस भी तैयार कर लिये गये, लेकिन इसका किताबें निकालना ही भूल गया. पिछले 24 सालों बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के इंटर काउंसिल में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई हो रही हैं, लेकिन बिना किताबों के. बोर्ड ने सिलेबस तो हर ट्रेड का बना दिया. इन सिलेबस को समय-समय पर अपडेट भी किया जाता है. लेकिन इस सिलेबस को अभी तक किताबें प्रिंट नहीं हो पाया हैं.
- बिना किताबें की हो रही पढ़ाई
कुछ ट्रेड में कुछ टीचर्स ने अपनी ओर से किताबें लिखी है. ऐसे में थोड़ी बहुत मदद उन छात्रों को मिल जाती हैं. लेकिन जिन ट्रेड के लिए टीचर्स ने कोई किताबें नहीं लिखी है, उन छात्रों को काफी परेशानी हो रही है. ज्ञात हो कि समिति की ओर से इंटर की पढ़ाई के लिए कुछ ट्रेड 1988 में चालू किया गया. इसके बाद 1991 में कुछ ट्रेड शुरू किया गया. इससे ट्रेड की संख्या 25 हो गयी. इन तमाम ट्रेड के सिलेबस तो निकाली जा रही हैं. अभी हाल में 2013 में तात्कालिन बोर्ड अध्यक्ष राजमणि प्रसाद की अध्यक्षता में तमाम वोकेशनल कोर्स के ट्रेड को अपडेट किया गया, लेकिन भी तक उसे लागू नहीं किया जा सका है.
- एनसीइआरटी का चलता है सिलेबस
सीबीएसइ के वोकेशनल कोर्स की तरह बिहार बोर्ड के वोकेशनल कोर्स में भी एनसीइआरटी के ही सिलेबस चलाये जाते है. हर ट्रेड में सिलेबस को एनसीइआरटी के पैटर्न पर ही रखा गया है. इससे हर ट्रेड की पूरी जानकारी अच्छे से छात्रों को मिल सके. वोकेशनल कोर्स के टीचर्स राम कुमार ने बताया कि सिलेबस काफी ही बढ़िया है. हर ट्रेड में हर टॉपिक के बारे में जानकारी दी गयी हैं. इससे छात्रों को हर टॉपिक का अच्छी जानकारी हो जाती हैं.
कोट
सिंलेबस तो बना हैं, लेकिन किताबें नहीं हैं. ऐसे में जो भी ट्रेड की पढ़ाई होती है तो बस सिलेबस के पिंट आउट निकाल कर ही किया जाता है. छात्रों को मार्केट में भी किताबें उपलब्ध नहीं हैं. टीचर्स ने जो नोट बना कर दे दिया, बस उसी से पढ़ाई की जाती हैं.
एसएन सिंह, इंचाजर्, वोकेशनल कोर्स, शास्त्रीनगर गल्र्स हाई स्कूल
किताबों को लेकर छात्रो को काफी परेशानी होती हैं. जब से वोकेशनल कोर्स शुरू हुआ, अभी तक एक भी किताबें नहीं प्रिंट हुई है. छात्र बिना किताब के ही कोर्स कर जाते हैं. सिलेबस भी हाल में अपडेट हुआ, लेकिन लागू अभी तक नहीं किया गया है.
वरूण कुमार सिंह, प्रधान महासचिव, बिहार प्रदेश प्लस टू व्यावसायिक शिक्षा संघ
संस्कृत शिक्षा बोर्ड का बना वेबसाइट, 2016 में रिजल्ट दिखेगा वेबसाइट पर
- 2016 में ऑन लाइन परीक्षा फार्म भरने की बोर्ड कर रहा तैयारी
संवाददाता, पटना
जहां संस्कृत शिक्षा बोर्ड कार्यालय में कंप्यूटर का अभाव था. हर काम मैनुअली किया जा रहा था. वहीं अब ऑन लाइन परीक्षा फार्म भराने की तैयारी बोर्ड की ओर से किया जायेगा. इसकी पहली कड़ी की शुरुआत सोमवार को बोर्ड के वेबसाइट लांच करने के साथ हुआ. राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, काजीपुर परिसर में एक सम्मेलन के दौरान बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डा. दुर्गेश कुमार राय द्वारा वेबसाइट 666.ु22ुस्रं3.ूे लांच किया गया. वेबसाइट बनने के साथ अब बोर्ड संबंधित सारे कार्य कंप्यूटर से ही किये जायेगे. बोर्ड के वेबसाइट बनने से 2016 का रिजल्ट भी अब बोर्ड वेबसाइट पर ही जारी करेगा. इसके साथ ही बोर्ड संबंधित सारे कार्यो की जानकारी भी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जायेगा. छात्रों को हर सूचना वेबसाइट के माध्यम से ही दिया जायेगा. सम्मेलन में प्रदेश भर के विद्यालयों के प्राचार्य शामिल हुए.
प्राचार्य से लिये गये सुझाव
संस्कृत विद्यालयों में पठन पाठन, वर्ग संचालन, छात्रों की उपस्थिति, नामांकन आदि के बढ़ावा देने के लिए प्राचार्य से सुझाव मांगे गये. सम्मेलन के दौरान बोर्ड के अध्यक्ष डा. दुर्गेश कुमार राय ने प्राचार्यो से कहा कि अब विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति को 75 फीसदी किया जायेगा. इसके अलावा स्कूल में नियमित रूप क्लास किया जायेगा.
ऑन लाइन भरे जायेंगे परीक्षा फार्म
2016 की मध्यमा की परीक्षा के लिए पहले छात्रों का रजिस्ट्रेशन किया जायेगा. जिन छात्रों का रजिस्ट्रेशन होगा, उन्हीं छात्रों को परीक्षा फार्म भराये जायेंगे. इसके अलावा बोर्ड अब ऑन लाइन परीक्षा फार्म भराने की तैयारी कर रहा हैं. इस संबंध में बोर्ड के सचिव मिलिंद कुमार ने बताया कि 2016 के लिए हम तैयारी कर रहे है . ऑन लाइन ही परीक्षा फार्म भराने की तैयारी किया जा रहा हैं.
26 अगस्त से मनेगा संस्कृत सप्ताह
सीबीएसइ की तर्ज पर अब बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने भी संस्कृत सप्ताह मनाने का निर्णय लिया हैं. बोर्ड के अनुसार 26 अगस्त से एक सप्ताह तक प्रदेश भर के संस्कृत विद्यालयों में संस्कृत सप्ताह मनाने का निर्णय लिया गया है. इस बीच तमाम विद्यालयों में संस्कृत वाद विवाद प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया जायेगा. इसके अलावा आम लोगों के बीच संस्कृत के प्रचार प्रसार भी किया जायेगा. इसकी जानकारी तमाम विद्यालयों को बोर्ड की ओर से दे दिया गया है.
संवाददाता, पटना
जहां संस्कृत शिक्षा बोर्ड कार्यालय में कंप्यूटर का अभाव था. हर काम मैनुअली किया जा रहा था. वहीं अब ऑन लाइन परीक्षा फार्म भराने की तैयारी बोर्ड की ओर से किया जायेगा. इसकी पहली कड़ी की शुरुआत सोमवार को बोर्ड के वेबसाइट लांच करने के साथ हुआ. राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, काजीपुर परिसर में एक सम्मेलन के दौरान बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डा. दुर्गेश कुमार राय द्वारा वेबसाइट 666.ु22ुस्रं3.ूे लांच किया गया. वेबसाइट बनने के साथ अब बोर्ड संबंधित सारे कार्य कंप्यूटर से ही किये जायेगे. बोर्ड के वेबसाइट बनने से 2016 का रिजल्ट भी अब बोर्ड वेबसाइट पर ही जारी करेगा. इसके साथ ही बोर्ड संबंधित सारे कार्यो की जानकारी भी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जायेगा. छात्रों को हर सूचना वेबसाइट के माध्यम से ही दिया जायेगा. सम्मेलन में प्रदेश भर के विद्यालयों के प्राचार्य शामिल हुए.
प्राचार्य से लिये गये सुझाव
संस्कृत विद्यालयों में पठन पाठन, वर्ग संचालन, छात्रों की उपस्थिति, नामांकन आदि के बढ़ावा देने के लिए प्राचार्य से सुझाव मांगे गये. सम्मेलन के दौरान बोर्ड के अध्यक्ष डा. दुर्गेश कुमार राय ने प्राचार्यो से कहा कि अब विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति को 75 फीसदी किया जायेगा. इसके अलावा स्कूल में नियमित रूप क्लास किया जायेगा.
ऑन लाइन भरे जायेंगे परीक्षा फार्म
2016 की मध्यमा की परीक्षा के लिए पहले छात्रों का रजिस्ट्रेशन किया जायेगा. जिन छात्रों का रजिस्ट्रेशन होगा, उन्हीं छात्रों को परीक्षा फार्म भराये जायेंगे. इसके अलावा बोर्ड अब ऑन लाइन परीक्षा फार्म भराने की तैयारी कर रहा हैं. इस संबंध में बोर्ड के सचिव मिलिंद कुमार ने बताया कि 2016 के लिए हम तैयारी कर रहे है . ऑन लाइन ही परीक्षा फार्म भराने की तैयारी किया जा रहा हैं.
26 अगस्त से मनेगा संस्कृत सप्ताह
सीबीएसइ की तर्ज पर अब बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने भी संस्कृत सप्ताह मनाने का निर्णय लिया हैं. बोर्ड के अनुसार 26 अगस्त से एक सप्ताह तक प्रदेश भर के संस्कृत विद्यालयों में संस्कृत सप्ताह मनाने का निर्णय लिया गया है. इस बीच तमाम विद्यालयों में संस्कृत वाद विवाद प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया जायेगा. इसके अलावा आम लोगों के बीच संस्कृत के प्रचार प्रसार भी किया जायेगा. इसकी जानकारी तमाम विद्यालयों को बोर्ड की ओर से दे दिया गया है.
तंबाकू और गुटखा की पढ़ाई अब सीबीएसइ स्कूलों में
- सीबीएसइ ने एनसीइआरटी को दिया निर्देश
- नये चैप्टर में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के नियम की होगी जानकारी
संवाददाता, पटना
सिगरेट आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता हैं. तंबाकू खाने से कैंसर हो सकता हैं. गुटखा खाने से मुंह का कैंसर होता हैं. अभी तक ये नसीहत विज्ञापन और डॉक्टरों से ही मिला करता था. लेकिन अब इन तमाम बातों की जानकारी स्कूलों में भी मिलेगा. अब पढ़ाई के साथ तंबाकू, सिगरेट, गुटखा आदि नशे की चीजों से होने वाले नुकसान को भी सीबीएसइ स्कूलों में पढ़ाया जायेगा. इसके लिए एक नये चैप्टर शुरू करने की कवायद अभी से शुरू कर दिया गया हैं. सीबीएसइ की माने तो फिलहाल 7वीं से लेकर 10वीं तक के सिलेबस में इसे डाला जायेगा. इसके लिए बोर्ड ने एनसीइआरटी से संपर्क किया हैं. एनसीइआरटी को सोशल स्टडी में एक नये चैप्टर के रूप में तंबाकू निर्मित सामग्री के बारे में विस्तृत जानकारी दी जायेगी. साथ में केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से तंबाकू संबंधित जो भी नियम बनाये गये है, उसके बारे में भी जानकारी होगी.
- बढ़े रहे यूथ में तंबाकू खाने की लत
सीबीएसइ ने यह निर्णय यूथ में बढ़ रहे तंबाकू सेवन के कारण लेना पड़ा है. सीबीएसइ के एक सर्वे रिपोर्ट में पता चला है कि 40 से 50 फीसदी स्कूली स्टूडेंट्स में तंबाकू की लत हैं. इसका सबसे मुख्य कारण आपसी संगत का अधिक हैं. कम उम्र के कारण आसानी से तंबाकू की लत में स्कूल स्टूडेंट्स फंस जाते हैं. ग्रुप में एक दूसरे को देखकर तंबाकू का सेवन करने लगते हैं. स्कूल स्तर पर ही अगर अवेयर किया जायें तो इस पर कंट्रोल किया जा सकता हैं. स्टूडेंट्स को पहले ही तंबाकू के खतरनाक परिणाम के बारे में पता चल जायेगा तो वो हमेशा उससे दूरी बना कर रखेंगे.
- कई राज्य सरकार ने सीबीएसइ को लिखा लेटर
सीबीएसइ के पास हाल में कई राज्य सरकार ने लेटर लिख कर इन चीजों के लिए एक नया चैप्टर देने का आग्रह किया था. इसमें दिल्ली सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, राजस्थान सरकार, कर्नाटका सरकार आदि ने सीबीएसइ को लेटर लिखा हैं. जिसमें सभी ने नया चैप्टर शुरू करने की बात सीबीएसइ से कहीं हैं. सीबीएसइ के अनुसार कई राज्य सरकार के अनुरोध पर इसे शुरू किया जायेगा. 2016 से नये चैप्टर के रूप में तंबाकू, गुटखा आदि को पढ़ा जा सकेगा.
चैप्टर में इन चीजों पर रखा गया हैं फोकस
- तंबाकू खाने से होने वाली बीमारियों की जानकारी
- विश्व, देश और लोकल स्तर पर तंबाकू खाने से होने वाले नुकसान का सर्वे रिपोर्ट
- किस तरह थोड़ा सा भी तंबाकू खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता हैं
- स्कूल आदि शिक्षक संस्थान के आस पास तंबाकू की प्रतिबंधित एरिया के बारे में जानकारी
- तंबाकू आदि के लत से कैसे बचा जा सकता हैं
- तंबाकू की श्रेणी में आने वाले दूसरी चीजों के बारे में जानकारी
कोट
जिस तरह से यूथ में तंबाकू का लत लगता जा रहा हैं, उसमें इसपर चैप्टर देने से काफी फायदा होगा. स्टूडेंट्स के बीच इस तरह के अवेयरनेस का यह सबसे बड़ा माध्यम होगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोडॉनिटेर, सीबीएसइ
- नये चैप्टर में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के नियम की होगी जानकारी
संवाददाता, पटना
सिगरेट आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता हैं. तंबाकू खाने से कैंसर हो सकता हैं. गुटखा खाने से मुंह का कैंसर होता हैं. अभी तक ये नसीहत विज्ञापन और डॉक्टरों से ही मिला करता था. लेकिन अब इन तमाम बातों की जानकारी स्कूलों में भी मिलेगा. अब पढ़ाई के साथ तंबाकू, सिगरेट, गुटखा आदि नशे की चीजों से होने वाले नुकसान को भी सीबीएसइ स्कूलों में पढ़ाया जायेगा. इसके लिए एक नये चैप्टर शुरू करने की कवायद अभी से शुरू कर दिया गया हैं. सीबीएसइ की माने तो फिलहाल 7वीं से लेकर 10वीं तक के सिलेबस में इसे डाला जायेगा. इसके लिए बोर्ड ने एनसीइआरटी से संपर्क किया हैं. एनसीइआरटी को सोशल स्टडी में एक नये चैप्टर के रूप में तंबाकू निर्मित सामग्री के बारे में विस्तृत जानकारी दी जायेगी. साथ में केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से तंबाकू संबंधित जो भी नियम बनाये गये है, उसके बारे में भी जानकारी होगी.
- बढ़े रहे यूथ में तंबाकू खाने की लत
सीबीएसइ ने यह निर्णय यूथ में बढ़ रहे तंबाकू सेवन के कारण लेना पड़ा है. सीबीएसइ के एक सर्वे रिपोर्ट में पता चला है कि 40 से 50 फीसदी स्कूली स्टूडेंट्स में तंबाकू की लत हैं. इसका सबसे मुख्य कारण आपसी संगत का अधिक हैं. कम उम्र के कारण आसानी से तंबाकू की लत में स्कूल स्टूडेंट्स फंस जाते हैं. ग्रुप में एक दूसरे को देखकर तंबाकू का सेवन करने लगते हैं. स्कूल स्तर पर ही अगर अवेयर किया जायें तो इस पर कंट्रोल किया जा सकता हैं. स्टूडेंट्स को पहले ही तंबाकू के खतरनाक परिणाम के बारे में पता चल जायेगा तो वो हमेशा उससे दूरी बना कर रखेंगे.
- कई राज्य सरकार ने सीबीएसइ को लिखा लेटर
सीबीएसइ के पास हाल में कई राज्य सरकार ने लेटर लिख कर इन चीजों के लिए एक नया चैप्टर देने का आग्रह किया था. इसमें दिल्ली सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, राजस्थान सरकार, कर्नाटका सरकार आदि ने सीबीएसइ को लेटर लिखा हैं. जिसमें सभी ने नया चैप्टर शुरू करने की बात सीबीएसइ से कहीं हैं. सीबीएसइ के अनुसार कई राज्य सरकार के अनुरोध पर इसे शुरू किया जायेगा. 2016 से नये चैप्टर के रूप में तंबाकू, गुटखा आदि को पढ़ा जा सकेगा.
चैप्टर में इन चीजों पर रखा गया हैं फोकस
- तंबाकू खाने से होने वाली बीमारियों की जानकारी
- विश्व, देश और लोकल स्तर पर तंबाकू खाने से होने वाले नुकसान का सर्वे रिपोर्ट
- किस तरह थोड़ा सा भी तंबाकू खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता हैं
- स्कूल आदि शिक्षक संस्थान के आस पास तंबाकू की प्रतिबंधित एरिया के बारे में जानकारी
- तंबाकू आदि के लत से कैसे बचा जा सकता हैं
- तंबाकू की श्रेणी में आने वाले दूसरी चीजों के बारे में जानकारी
कोट
जिस तरह से यूथ में तंबाकू का लत लगता जा रहा हैं, उसमें इसपर चैप्टर देने से काफी फायदा होगा. स्टूडेंट्स के बीच इस तरह के अवेयरनेस का यह सबसे बड़ा माध्यम होगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोडॉनिटेर, सीबीएसइ
ेउड़ान का सिलेबस अब मिलेगा यू-टयूब पर
- सीबीएसइ वेबसाइट से भी देखना होगा आसान
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑॅफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने उड़ान प्रोजेक्ट का सिलेबस यू-ट्यूब पर अपलोड कर दिया है. इसे स्टूडेंट्स यू-ट्यूब पर देख सकते हैं. इसका लिंक सीबीएसइ की वेबसाइट .. पर भी डाला गया हैं. सीबीएसइ के वेबसाइट से भी इस लिंक पर जाया जा सकता हैं. उड़ान प्रोजेक्ट के बारे में अब सारी जानकारी यू-ट्यूब पर भी लिया जा सकता हैं. सीबीएसइ की ओर से शुरू की गयी यह स्कीम गल्र्स स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग के लिए फ्री कोचिंग देना हैं. इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा गल्र्स स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग के फील्ड में लाना हैं.
- 8 अगस्त तक ही आवेदन की अंतिम तिथि
सीबीएसइ के उड़ान प्रोजेक्ट का पार्ट बनने के लिए गल्र्स कैंडिडेंट्स 8 अगस्त तक ही आवेदन कर सकतीं हैं. आवेदन ऑन लाइन ही करने का सिस्टम रखा गया हैं. इस प्रोजेक्ट के तहत सीबीएसइ, आइसीएसइ, नवोदय स्कूल्स, केंद्रीय विद्यालय, स्टेट बोर्ड में पढ़ने वालीं गर्ल स्टूडेंट्स आइआइटी में पहुंचने के लिए ऑन लाइन कोचिंग ले सकेंगी. यह ऑन लाइन क्लासेज स्टूडेंट्स के लिए फ्री रहता हैं. सीबीएसइ की ओर से इसकी तमाम जानकारी बोर्ड के वेबसाइट पर डाल दिया गया हैं.
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑॅफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने उड़ान प्रोजेक्ट का सिलेबस यू-ट्यूब पर अपलोड कर दिया है. इसे स्टूडेंट्स यू-ट्यूब पर देख सकते हैं. इसका लिंक सीबीएसइ की वेबसाइट .. पर भी डाला गया हैं. सीबीएसइ के वेबसाइट से भी इस लिंक पर जाया जा सकता हैं. उड़ान प्रोजेक्ट के बारे में अब सारी जानकारी यू-ट्यूब पर भी लिया जा सकता हैं. सीबीएसइ की ओर से शुरू की गयी यह स्कीम गल्र्स स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग के लिए फ्री कोचिंग देना हैं. इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा गल्र्स स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग के फील्ड में लाना हैं.
- 8 अगस्त तक ही आवेदन की अंतिम तिथि
सीबीएसइ के उड़ान प्रोजेक्ट का पार्ट बनने के लिए गल्र्स कैंडिडेंट्स 8 अगस्त तक ही आवेदन कर सकतीं हैं. आवेदन ऑन लाइन ही करने का सिस्टम रखा गया हैं. इस प्रोजेक्ट के तहत सीबीएसइ, आइसीएसइ, नवोदय स्कूल्स, केंद्रीय विद्यालय, स्टेट बोर्ड में पढ़ने वालीं गर्ल स्टूडेंट्स आइआइटी में पहुंचने के लिए ऑन लाइन कोचिंग ले सकेंगी. यह ऑन लाइन क्लासेज स्टूडेंट्स के लिए फ्री रहता हैं. सीबीएसइ की ओर से इसकी तमाम जानकारी बोर्ड के वेबसाइट पर डाल दिया गया हैं.
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