बहादुर बेटियां को सीबीएसइ करेगा कोर्स में शामिल
- सीबीएसइ हर जोनल ऑफिस को भेजा है निर्देश
- जोधपुर की बेटी लक्ष्मी द्वारा बाल विवाह पर रोक लगाने की कहानी 9वीं और 10वीं के स्टूडेंट्स पढ़ेंगे
संवाददाता, पटना
अब बेटियों की उपलब्धि घर तक सीमित नहीं रहेगी. अब बेटियां जो करेगी उसे सारा देश जान पायेगा. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से देश भर की बहादुर बेटियों को खोजा जा रहा है. ऐसी हर बेटियों को सीबीएसइ अपने कोर्स में शामिल करेगा जो समाज, राज्य और देश के लिए एक मिसाल कायम करेंगी. ऐसी बहादुर बेटियों को एक उदाहरण के तौर पर हर कोई पढ़े और जाने इसके लिए बोर्ड अब इसे स्कूल के एकेडेमिक सेशन में चलाने का प्लान बना रहा है. बोर्ड द्वारा हियूमन राइट एंड जेंडर स्टडीज के तहत 9वीं और 10वीं क्लास के कोर्स में इसे शामिल किया जायेगा. इसके लिए जल्द ही सीबीएसइ की ओर से सर्कूलर भी जारी किया जायेगा. जिसके तहत बोर्ड ने तमाम सीबीएसइ रीजनल ऑफिस को जोड़ने का प्लान बनाया है. हर रीजनल ऑफिस को यह निर्देश दिया जा रहा है जिसके तहत ऐसी बेटियों को खोजा जायें जो समाज के लिए एक उदाहरण बन रही हों.
- इंटरव्यू के साथ होगी जीवन का सफर
सीबीएसइ स्कूल के 9वीं और 10वीं के स्कूल कोर्स में इन बेटियों को हर साल नये एकेडेमिक सेशन में जोड़ा जायेगा. इसमें जिस लड़की के बारे में जानकारी दी जायेगी, उसमें उसका इंटरव्यू के साथ जीवन संघर्ष भी रहेगा. अगर वो लड़की किसी एनजीओ से जुड़ी होगी तो उस एनजीओ का नाम भी बोर्ड स्कूल के कॉरिकुलम में डालेगा. बोर्ड के अनुसार ऐसे एनजीओ को देश भर में ब्रांच खोलने में मदद मिलेगा. क्योंकि कोई एनजीओ राष्ट्रीय स्तर पर अधिक अच्छा काम कर सकता है. इस कारण एनजीओ को भी जोड़ा जायेगा.
- जोधपुर की लक्ष्मी से हुई है शुरुआत
सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत कर दी है. बोर्ड की ओर से जोधपुर की लक्ष्मी को चुना गया है. जोधपुर की लूनी गांव की इस महिला ने ऑन स्पॉट बाल विवाह होते हुए रोका था. एक 1 साल की लड़की की शादी 3 साल के लड़के के साथ हो रही थी. ऐसे में जब लक्ष्मी को इसकी जानकारी मिली तो पहले तो उन्होंने परिवार वालों को समझाने की कोशिश किया, लेकिन बाद में जब बात नहीं बनी तो इसका विरोध किया. इसके बाद पुलिस प्रशासन की मदद से इस बाल विवाह को रोका. सारथी ट्रस्ट एनजीओ से जुड़ी लक्ष्मी की समाज से जुड़े इस सरोकार के मुददे पर आवाज उठाने के कारण बोर्ड ने लक्ष्मी की कहानी 9वीं और 10वीं के क्लास कोर्स में शामिल करने का फैसला लिया है. सीबीएसइ के अनुसार जोधपुर की लक्ष्मी ने एक बड़ा काम किया है. अब जोधपुर के आस पास के इलाके में बाल विवाह करवाने से लोग
चुनने में इन चीजों पर है सीबीएसइ का फोकस
- बाल विवाह पर रोक
- भ्रूण हत्या पर रोक
- सारक्षरता मिशन पर काम करना
- स्लम बस्ती के अंदर बच्चों में सुधार लाना
- बाल व्यापार पर रोक लगाने के उपर काम करना
- रेड लाइट एरिया में फंसी लड़कियों पर काम करना
कोट
बोर्ड एक अच्छी पहल करने जा रहा है. अगर ऐसी दो चार बेटियां भी समाज के सामने आ जायें तो इसका काफी पोजिटिव असर होगा. इसके लिए हर किसी को सामने आना चाहिए. जो लड़की इस तरह का काम करती है तो उन्हें खुद इसे सीबीएसइ के पास रखना चाहिए. ऐसी लड़कियों को सीबीएसइ सामने लागे का अच्छा प्रयास कर रहा है.
सीबी सिंह, सचिव, सीबीएसइ पाटलिपुत्र सहोदया
7 october 2014 on prabhat khabar patna
- सीबीएसइ हर जोनल ऑफिस को भेजा है निर्देश
- जोधपुर की बेटी लक्ष्मी द्वारा बाल विवाह पर रोक लगाने की कहानी 9वीं और 10वीं के स्टूडेंट्स पढ़ेंगे
संवाददाता, पटना
अब बेटियों की उपलब्धि घर तक सीमित नहीं रहेगी. अब बेटियां जो करेगी उसे सारा देश जान पायेगा. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से देश भर की बहादुर बेटियों को खोजा जा रहा है. ऐसी हर बेटियों को सीबीएसइ अपने कोर्स में शामिल करेगा जो समाज, राज्य और देश के लिए एक मिसाल कायम करेंगी. ऐसी बहादुर बेटियों को एक उदाहरण के तौर पर हर कोई पढ़े और जाने इसके लिए बोर्ड अब इसे स्कूल के एकेडेमिक सेशन में चलाने का प्लान बना रहा है. बोर्ड द्वारा हियूमन राइट एंड जेंडर स्टडीज के तहत 9वीं और 10वीं क्लास के कोर्स में इसे शामिल किया जायेगा. इसके लिए जल्द ही सीबीएसइ की ओर से सर्कूलर भी जारी किया जायेगा. जिसके तहत बोर्ड ने तमाम सीबीएसइ रीजनल ऑफिस को जोड़ने का प्लान बनाया है. हर रीजनल ऑफिस को यह निर्देश दिया जा रहा है जिसके तहत ऐसी बेटियों को खोजा जायें जो समाज के लिए एक उदाहरण बन रही हों.
- इंटरव्यू के साथ होगी जीवन का सफर
सीबीएसइ स्कूल के 9वीं और 10वीं के स्कूल कोर्स में इन बेटियों को हर साल नये एकेडेमिक सेशन में जोड़ा जायेगा. इसमें जिस लड़की के बारे में जानकारी दी जायेगी, उसमें उसका इंटरव्यू के साथ जीवन संघर्ष भी रहेगा. अगर वो लड़की किसी एनजीओ से जुड़ी होगी तो उस एनजीओ का नाम भी बोर्ड स्कूल के कॉरिकुलम में डालेगा. बोर्ड के अनुसार ऐसे एनजीओ को देश भर में ब्रांच खोलने में मदद मिलेगा. क्योंकि कोई एनजीओ राष्ट्रीय स्तर पर अधिक अच्छा काम कर सकता है. इस कारण एनजीओ को भी जोड़ा जायेगा.
- जोधपुर की लक्ष्मी से हुई है शुरुआत
सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत कर दी है. बोर्ड की ओर से जोधपुर की लक्ष्मी को चुना गया है. जोधपुर की लूनी गांव की इस महिला ने ऑन स्पॉट बाल विवाह होते हुए रोका था. एक 1 साल की लड़की की शादी 3 साल के लड़के के साथ हो रही थी. ऐसे में जब लक्ष्मी को इसकी जानकारी मिली तो पहले तो उन्होंने परिवार वालों को समझाने की कोशिश किया, लेकिन बाद में जब बात नहीं बनी तो इसका विरोध किया. इसके बाद पुलिस प्रशासन की मदद से इस बाल विवाह को रोका. सारथी ट्रस्ट एनजीओ से जुड़ी लक्ष्मी की समाज से जुड़े इस सरोकार के मुददे पर आवाज उठाने के कारण बोर्ड ने लक्ष्मी की कहानी 9वीं और 10वीं के क्लास कोर्स में शामिल करने का फैसला लिया है. सीबीएसइ के अनुसार जोधपुर की लक्ष्मी ने एक बड़ा काम किया है. अब जोधपुर के आस पास के इलाके में बाल विवाह करवाने से लोग
चुनने में इन चीजों पर है सीबीएसइ का फोकस
- बाल विवाह पर रोक
- भ्रूण हत्या पर रोक
- सारक्षरता मिशन पर काम करना
- स्लम बस्ती के अंदर बच्चों में सुधार लाना
- बाल व्यापार पर रोक लगाने के उपर काम करना
- रेड लाइट एरिया में फंसी लड़कियों पर काम करना
कोट
बोर्ड एक अच्छी पहल करने जा रहा है. अगर ऐसी दो चार बेटियां भी समाज के सामने आ जायें तो इसका काफी पोजिटिव असर होगा. इसके लिए हर किसी को सामने आना चाहिए. जो लड़की इस तरह का काम करती है तो उन्हें खुद इसे सीबीएसइ के पास रखना चाहिए. ऐसी लड़कियों को सीबीएसइ सामने लागे का अच्छा प्रयास कर रहा है.
सीबी सिंह, सचिव, सीबीएसइ पाटलिपुत्र सहोदया
7 october 2014 on prabhat khabar patna
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