Sunday, March 1, 2015

सीबीएसइ की ग्रेडिंग सिस्टम हुई फेल, अप्लाई के बाद भी नहीं हुई मॉनिटरिंग

सीबीएसइ की ग्रेडिंग सिस्टम हुई फेल, अप्लाई के बाद भी नहीं हुई मॉनिटरिंग

- सीबीएसइ ने स्कूल की ग्रेडिंग के लिए शुरू किया था एक साल पहले योजना
- इन्फ्रास्ट्रर और पढ़ाई की होनी थी मॉनिटरिंग
संवाददाता, पटना
स्कूलों में पढ़ाई को लेकर पूरी तरह से इन्फ्रास्ट्रर की सुविधा है या नहीं, किस स्कूल में किस तरह की सुविधा दी जाती है.  सुविधा के अनुसार स्कूल की ग्रेडिंग की जानी थी. इसके लिए सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को शामिल होने के लिए कहा था. अधिकांश स्कूल ने इसके लिए अप्लाई भी किया, लेकिन इसके लिए अब तक कोई प्रक्रिया शुरू नहीं किया गया है. ग्रेडिंग के लिए स्कूलों को अवश्य ही शामिल होना है. इसके लिए भी बोर्ड की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया गया था. पटना से लगभग 23 स्कूलों ने ग्रेडिंग के लिए अप्लाई किया था.
- तीन ग्रेड देने की थी व्यवस्था
सीबीएसइ की ओर से दो साल पहले एक प्रस्ताव तैयार किया गया था कि सभी स्कूलों को ग्रेड दिये जायेंगे. ए, बी और सी ग्रेड में स्कूलों को विभाजित किया जायेगा. जो स्कूल उच्च गुणवत्ता का होगा उसे ए ग्रेड , जो इससे कम होगा उसे बी ग्रेउ और जो सबसे कम होगा, उसे सी ग्रेड दी जायेगी. इस ग्रेड को स्कूल सुधार भी सकते है. इसके लिए भी बोर्ड ने स्कूलों को ऑन लाइन फार्म भरने को कहा था. ग्रेडिंग के लिए हर स्कूल के पास बोर्ड द्वारा टीम को भेजा जाना था.
- इन्फ्रास्ट्रर से लेकर फी तक
ग्रेडिंग स्कूलों के इन्फ्रास्ट्रर से लेकर फी तक को देख कर दी जानी थी. स्कूल बिल्ंिडग कैसी है, बैठने की सुविधा, साफ सफाई, फैकल्टी, रिजल्ट, फी आदि बातों की जांच इसमें की जानी थी. बोर्ड की ओर से एक एजेंसी के माध्यम से यह की जानी थी. एजेंसी ही स्कूल में जाकर जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट बोर्ड को देगी. फिर उस रिपोर्ट के आधार पर स्कूलों को ग्रेडिंग प्रदान की जानी थी. इस ग्रेडिंग में शामिल होना सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य है. इसके लिए हर स्कूल को ऑन लाइन अप्लाई करना था. ग्रेडिंग सिस्टम लागू होने के बाद ऐसे स्कूल पर लगाम लगेगा जहां पर पढ़ाई के नाम पर लूट हो रही है.
- फी पर भी लग सकेगी लगाम
ग्रेडिंग सिस्टम के बाद फी पर भी लगाम लग सकेगी. अभी कई ऐसे स्कूल है जहां सुविधाएं तो सी ग्रेड की दी जाती है, लेकिन फी ए ग्रेड की वसूली जा रही है . अगर ग्रेडिंग करने के बाद स्कूलों की लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड हो जाती तो स्कूलों की मनमानी पर रोक लग सकती थी. स्कूल प्रशासन को ग्रेड के हिसाब से फी निर्धारित करेगी. ऐसे माहौल से स्कूलों के बीच बेहतर होने का कांपिटिशन होगा. इसका फायदा सीधे तौर पर स्टूडेंट्स को मिलेगा.
- तीन साल में होगा रिव्यू
हर तीन साल में ग्रेडिंग का रिव्यू भी होना तय किया गया था. एक बार यदि किसी स्कूल को ए ग्रेड प्रदान हो गयी, लेकिन दोबारा इंस्पैक्शन होने पर वहां पहले जैसी सुविधाएं नहीं मिलती तो स्कूल का ग्रेड घटा दिया जायेगा. इसी तरह यदि किसी स्कूल को पहले सी ग्रेड मिली है, लेकिन स्कूल ने अपनी सुविधाएं पहले से बेहतर कर ली है तो उस स्कूल का ग्रेड उपर भी किया जायेगा. ऐसे में हर स्कूल के साथ बोर्ड पूरी ईमानदारी रखना चाह रहा था.
- देश भर के स्कूलों की ग्रेडिंग ऑन लाइन
सीबीएसइ के वेबसाइट पर सभी स्कूलों की ग्रेडिंग लिस्ट अपलोड होनी थी. इसमें हर शहर के स्कूल की ग्रेडिंग देखी जा सकती थी. ऐसे में उन अभिभावकों को काफी फायदा होता जो अपने बच्चे के नामांकन के लिए अच्छे स्कूल की तलाश कर रहे होते है. स्कूल का चयन करने में अधिक मशक्कत नहीं करनी पड़ती.

कोट
बोर्ड की ओर से एक साल पहले यह नोटिफिकेशन हमें दिया गया था. हमने इसके लिए अप्लाई भी किया था. लेकिन अब तक बोर्ड की ओर से किसी तरह की मॉनिटरिंग नहीं किया गया है. हम तो बस इंतजार कर रहे है.
ब्रदर सतीश, प्रिंसिपल, लोयेला हाई स्कूल

देश भर के स्कूलों ने ग्रेड पाने के लिए अप्लाई किया था. अधिकांश स्कूल बोर्ड का ग्रेड पाना चाह रहे है. लेकिन अभी तक बोर्ड की ओर से ग्रेड की प्रक्रिया शुरू नहीं की गयी है.
सीबी सिंह, सचिव, सहोदया पाटलिपुत्र

8 october 2014 prabhat khabar patna 

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