पांच दिनों की दीपावली धनतेरस से होती है शुरू
- 21 से 25 अक्तूबर तक मनाया जायेगा दीपावली महोत्सव
- इस बार दीपावली पर बन रहा अद्भुत संयोग, तीन बड़े ग्रहों का योग है एक ही राशि में
संवाददाता, पटना
पांच दिनों का पर्व दीपावली मंगलवार से शुरू हो रहा है. धनतेरस से शुरू होकर यह पर्व भैया दूज और चित्रगुप्त भगवान के पूजा के साथ संपन्न होती है. पांच दिनों तक भगवान गणोश और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ अन्य कई भगवान की भी पूजा होती है. इस बार दीपावली महोत्सव 21 से 25 अक्तूबर तक चलेगा. इस बार धनतेरस, महावीर जयंती, गोवर्धन पूजा, भैया दूज और चित्रगुप्त उत्सव मनाया जायेगा. इस पांच दिनों तक हर दिन का अपना महत्व होता है. ज्योतिषों के अनुसार इस बार दीपावली के दिन कई अद्भुत योग बन रहे है . दीपावली पर शनि और गुरू, अपनी-अपनी राशि में स्थित रहेंगे. जबकि सूर्य नीच राशि में स्थित रहेगा. 18 अक्तूबर से सूर्य तुला राशि में है. इसके साथ दीपावली के दिन सूर्य, शनि और गुरु ग्रह एक ही राशि तुला राशि में रहेगा. तीनों ग्रह का यह संयोग 1954 के बाद इस दीपावली के दिन हो रहा है. ऐसा संयोग आगे 2041 में होगा. पंडित कुलानंद झा के अनुसार इस अद्भुत संयोग के कारण दीपावली के दिन सुबह से शुभ मुहरुत रहेगा.
- धनतेरस पर होती है भगवान धनवंतरी की पूजा
दीपावली की शुरुआत भगवान धनवंतरी की पूजा अर्चना से शुरू होती है. दीपावली के दो दिन 21 अक्तूबर को इस बार धनवंतरी (धनतेरस) पूजा होगा. एक मान्यता के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन के बाद भगवान धनवंतरी अमृत कलश निकाला था. इस दिन धन खरीदने का काफी महत्व है. कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन धनतेरस मनाया जाता है. इस दिन बर्तन, सोना आदि की खरीदारी की जाती है. इस दिन आयुर्वेद की पूजा की जाती है. ज्योतिष पंडित विनोद झा के अनुसार आयुर्वेद की उत्पति इसी दिन से मानी गयी है. इस दिन से ही घरों में दीया जलाना शुरू हो जाता है.
- छोटी दीपावली के साथ हनुमान जयंती
धनतेरस के एक दिन बाद और दीपावली से एक दिन पहले छोटी दीपावली मनायी जाती है. छोटी दीपावली के दिन ही भगवान हनुमान की जयंती समारोह भी मनाया जाता है. नरक चतुदर्शी नाम से प्रसिद्ध छोटी दीपावली के दिन शाम में गोधुली वेला के समय घर के बाहर यम दीप जलाया जाता है. गोबर के चौमुख दीये को घर के बाहर जलाने का विशेष महत्व है. इस दिन भी घरों को दीयों से सजाया जाता है. वहीं दूसरी ओर मंदिनों में हनुमान भगवान की जयंती मनायी जाती है. ज्योतिष शंभुनाथ झा ने बताया कि भगवान हनुमान का जन्म मेष लगन में गोधुली वेला में हुआ था. 22 अक्तूबर को छोटी दीपावली के साथ हनुमान जयंती मनाया जाता है.
- तीन मुहरुत में करें भगवान गणोश और मां लक्ष्मी की पूजा
इस बार दीपावली (23 अक्तूबर) के दिन तीन लगन हो रहा है. इस तीनों लगन में भगवान की पूजा का विशेष महत्व है. कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन दीपावली का पहला मुहरुत कुंभ लगन में है. यह लगन दोपहर 2.02 से 3.33 मिनट तक रहेगा. इस बीच दुकानों आदि में पूजा का विशेष महत्व है. दूसरा लगन वृष लगन का समय शाम 6.41 से 8.35 तक रहेगा. इस बीच घरों में पूजा करने का सही समय है. इसके बाद रात के 1.08 से 3.22 तक सिंग लगन हो रहा है. ज्योतिषों की माने तो यह तीनो ही लगन स्थिर होने के कारण सुख और शांति लायेगा. इसके अलावा इस बार गोधुली वेला 5.02 से 6.41 के बीच भी मां लक्ष्मी और भगवान गणोश की पूजा की जायेगी.
- गोवर्धन पूजा के दिन 56 भोग लगता है भगवान को
दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा होता है. इस दिन से शुक्ल पक्ष की भी शुरुआत हो जाती है. गोवर्धन पूजा के साथ अन्नपूर्णा देवी की भी पूजा की जाती है. इस दिन गाय की पूजा की जाती है. मंदिनों में खासकर कृष्ण मंदिरों में भगवान को 56 प्रकार का भोग लगाया जाता है. मथुरा आदि में यह पर्व काफी धुमधाम से मनाया जाता है. 24 अक्तूबर को मनाये जाने वाले इस उत्सव में गाय को भगवान मान कर उसे नये वस्त्र भी पहनाये जाते है.
- भाई को आशीर्वाद के रूप में दी जाती है गाली
दीपावली के तीसरे दिन यानी 25 अक्तूबर को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है. इस दिन भाई को गाली देने का महत्व है. एक मान्यता के अनुसार इस दिन भाई को गाली देना आशीर्वाद के रूप में माना जाता है. कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष द्वितीय तिथि को भाई दूज मनाया जाता है. ज्योतिषो की माने तो इस बार भाई दूज 25 अक्तूबर को पूरे दिन हो रहा है. 24 अक्तूबर के रात 3.26 मिनट से ही द्वितीय तिथि शुरू हो जायेगी. यह तिथि 25 अक्तूबर के रात के 3.21 मिनट तक चलेगा. इसके साथ इस दिन चित्रगुप्त भगवान की पूजा होती है. कलम और दावात की पूजा की जाती है.
19 october 2014 prabhat khabar patna
- 21 से 25 अक्तूबर तक मनाया जायेगा दीपावली महोत्सव
- इस बार दीपावली पर बन रहा अद्भुत संयोग, तीन बड़े ग्रहों का योग है एक ही राशि में
संवाददाता, पटना
पांच दिनों का पर्व दीपावली मंगलवार से शुरू हो रहा है. धनतेरस से शुरू होकर यह पर्व भैया दूज और चित्रगुप्त भगवान के पूजा के साथ संपन्न होती है. पांच दिनों तक भगवान गणोश और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ अन्य कई भगवान की भी पूजा होती है. इस बार दीपावली महोत्सव 21 से 25 अक्तूबर तक चलेगा. इस बार धनतेरस, महावीर जयंती, गोवर्धन पूजा, भैया दूज और चित्रगुप्त उत्सव मनाया जायेगा. इस पांच दिनों तक हर दिन का अपना महत्व होता है. ज्योतिषों के अनुसार इस बार दीपावली के दिन कई अद्भुत योग बन रहे है . दीपावली पर शनि और गुरू, अपनी-अपनी राशि में स्थित रहेंगे. जबकि सूर्य नीच राशि में स्थित रहेगा. 18 अक्तूबर से सूर्य तुला राशि में है. इसके साथ दीपावली के दिन सूर्य, शनि और गुरु ग्रह एक ही राशि तुला राशि में रहेगा. तीनों ग्रह का यह संयोग 1954 के बाद इस दीपावली के दिन हो रहा है. ऐसा संयोग आगे 2041 में होगा. पंडित कुलानंद झा के अनुसार इस अद्भुत संयोग के कारण दीपावली के दिन सुबह से शुभ मुहरुत रहेगा.
- धनतेरस पर होती है भगवान धनवंतरी की पूजा
दीपावली की शुरुआत भगवान धनवंतरी की पूजा अर्चना से शुरू होती है. दीपावली के दो दिन 21 अक्तूबर को इस बार धनवंतरी (धनतेरस) पूजा होगा. एक मान्यता के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन के बाद भगवान धनवंतरी अमृत कलश निकाला था. इस दिन धन खरीदने का काफी महत्व है. कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन धनतेरस मनाया जाता है. इस दिन बर्तन, सोना आदि की खरीदारी की जाती है. इस दिन आयुर्वेद की पूजा की जाती है. ज्योतिष पंडित विनोद झा के अनुसार आयुर्वेद की उत्पति इसी दिन से मानी गयी है. इस दिन से ही घरों में दीया जलाना शुरू हो जाता है.
- छोटी दीपावली के साथ हनुमान जयंती
धनतेरस के एक दिन बाद और दीपावली से एक दिन पहले छोटी दीपावली मनायी जाती है. छोटी दीपावली के दिन ही भगवान हनुमान की जयंती समारोह भी मनाया जाता है. नरक चतुदर्शी नाम से प्रसिद्ध छोटी दीपावली के दिन शाम में गोधुली वेला के समय घर के बाहर यम दीप जलाया जाता है. गोबर के चौमुख दीये को घर के बाहर जलाने का विशेष महत्व है. इस दिन भी घरों को दीयों से सजाया जाता है. वहीं दूसरी ओर मंदिनों में हनुमान भगवान की जयंती मनायी जाती है. ज्योतिष शंभुनाथ झा ने बताया कि भगवान हनुमान का जन्म मेष लगन में गोधुली वेला में हुआ था. 22 अक्तूबर को छोटी दीपावली के साथ हनुमान जयंती मनाया जाता है.
- तीन मुहरुत में करें भगवान गणोश और मां लक्ष्मी की पूजा
इस बार दीपावली (23 अक्तूबर) के दिन तीन लगन हो रहा है. इस तीनों लगन में भगवान की पूजा का विशेष महत्व है. कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन दीपावली का पहला मुहरुत कुंभ लगन में है. यह लगन दोपहर 2.02 से 3.33 मिनट तक रहेगा. इस बीच दुकानों आदि में पूजा का विशेष महत्व है. दूसरा लगन वृष लगन का समय शाम 6.41 से 8.35 तक रहेगा. इस बीच घरों में पूजा करने का सही समय है. इसके बाद रात के 1.08 से 3.22 तक सिंग लगन हो रहा है. ज्योतिषों की माने तो यह तीनो ही लगन स्थिर होने के कारण सुख और शांति लायेगा. इसके अलावा इस बार गोधुली वेला 5.02 से 6.41 के बीच भी मां लक्ष्मी और भगवान गणोश की पूजा की जायेगी.
- गोवर्धन पूजा के दिन 56 भोग लगता है भगवान को
दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा होता है. इस दिन से शुक्ल पक्ष की भी शुरुआत हो जाती है. गोवर्धन पूजा के साथ अन्नपूर्णा देवी की भी पूजा की जाती है. इस दिन गाय की पूजा की जाती है. मंदिनों में खासकर कृष्ण मंदिरों में भगवान को 56 प्रकार का भोग लगाया जाता है. मथुरा आदि में यह पर्व काफी धुमधाम से मनाया जाता है. 24 अक्तूबर को मनाये जाने वाले इस उत्सव में गाय को भगवान मान कर उसे नये वस्त्र भी पहनाये जाते है.
- भाई को आशीर्वाद के रूप में दी जाती है गाली
दीपावली के तीसरे दिन यानी 25 अक्तूबर को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है. इस दिन भाई को गाली देने का महत्व है. एक मान्यता के अनुसार इस दिन भाई को गाली देना आशीर्वाद के रूप में माना जाता है. कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष द्वितीय तिथि को भाई दूज मनाया जाता है. ज्योतिषो की माने तो इस बार भाई दूज 25 अक्तूबर को पूरे दिन हो रहा है. 24 अक्तूबर के रात 3.26 मिनट से ही द्वितीय तिथि शुरू हो जायेगी. यह तिथि 25 अक्तूबर के रात के 3.21 मिनट तक चलेगा. इसके साथ इस दिन चित्रगुप्त भगवान की पूजा होती है. कलम और दावात की पूजा की जाती है.
19 october 2014 prabhat khabar patna
No comments:
Post a Comment