Tuesday, March 3, 2015

2440 की जगह 700 बच्चे को ही मिला शिक्षा का अधिकार

2440 की जगह 700 बच्चे को ही मिला शिक्षा का अधिकार

- शिक्षा के नाम पर बस खानापूर्ति हो रही है प्राइवेट स्कूलों में
- 120 की जगह 8 से 10 बच्चें के एडमिशन पर ही सिमट गया स्कूल
संवाददाता, पटना
सब पढ़े सब बढ़े के तहत आरटीइ लागू किया गया. इसके तहत हर प्राइवेट स्कूलों को नामांकन लेना था. जब राजधानी पटना में प्राइवेट स्कूलों में आरटीइ का पूरा उल्लघंन हो रहा है तो दूसरे जिलों की बात ही क्या करें. पटना शहरी क्षेत्र के स्कूलों की बात करें तो कुल 120 स्कूल बिहार सरकार से रजिस्ट्र्ड है. इसमें अभी तक मात्र 61 स्कूलों ने ही अपने यहां पर आरटीइ के तहत नामांकन लिया है. यह नामांकन बस नाम मात्र का है. बस खानापूर्ति की गयी है. किसी स्कूल में 5 नामांकन तो किसी स्कूल में 10 नामांकन हुए है. कई स्कूल तो ऐसे है जहां पर 2013-14 में जीरो नामांकन किया गया है. सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार 2013-14 सत्र में पटना शहरी क्षेत्र मात्र 7 सौ बच्चे का ही आरटीइ में नामांकन हो पाया.
- हर स्कूल में चलता है तीन सेक्शन
हर प्राइवेट स्कूल में क्लास वन में तीन सेक्शन चलता है . हर सेक्शन में कम से कम 40 बच्चे होते है. ऐसे में क्लास वन में 120 सीट हुआ. जिसमें बच्चों का एडमिशन लिया जाना था. अगर बात आरटीइ के तहत नामांकन लेने की बात हो तो हर स्कूल को 40 बच्चों का नामांकन लेना चाहिए था. लेकिन किसी भी स्कूल ने ऐसा नहीं किया है. आरटीइ के नाम का बस खानापूर्ति किया गया है. अगर बस 61 स्कूलों के नामांकन की बात करें तो यहां पर 2440 बच्चों का नामांकन आरटीइ के तहत लिया जाना चाहिए था. लेकिन हजार का आंकड़ा भी बच्चे छू नहीं पायें. नागरिक अधिकार मंच के शिव प्रकाश राय ने बताया कि आरटीआइ से मिली जानकारी के अनुसार आरटीइ के तहत नामांकन काफी कमजोर है. प्राइवेट स्कूलों में नामांकन नहीं के बराबर है.   एक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार जो बच्चे आरटीइ के तहत हमारे पास आते है तो उनका नामांकन हम लेते है. ऐसे बच्चों के लिए हम अलग से तैयारी करनी पड़ती है.

सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के स्कूलों में 2013-14 में हुआ आरटीइ के तहत एडमिशन
आरटीइ के तहत इन स्कूलों में रहा जीरो नामांकन  -
 ज्ञान निकेतन,
 डा. जी एल दत्ता डीएवी पब्लिक स्कूल, ट्रांसपोर्ट नगर,
 ज्ञानोदय गुरुकुल, गोला रोड,
एकलव्य एजुकेशन काम्पलेक्स, पलंगा,
शिवम स्कूल, बिहटा

आरटीइ के तहत इन स्कूलों में हुआ 10 से कम नामांकन  -
 डीएवी पब्लिक स्कूल, वाल्मी, फुलवारी ( 8)
रेड कार्पेट, राजेन्द्र नगर (4)
आदर्श ज्ञानोदय विद्यालय, बाढ़ (8)
ब्लू बेल्स एकेडमी,  खगौल रोड, पटना (3)
द अर्थ पब्लिक स्कूल, श्रीपालपुर, पुनपुन  (8)
प्रेमालोक मिशन स्कूल,  बैरिया (7)
एमएस मेमोरियल एकेडमी, बेली रोड (7)
मे फ्लावर स्कूल, दीघाघाट (8)
शिवम विद्या मंदिर, विक्रम (5)
कृष्णा पब्लिक स्कूल, नउरा (7)
सेंट अगस्टिन एकेडमी, लोहानीपुर (1)
कैथेड्रल पब्लिक स्कूल, पंडारक (5)
जीएमजे कांवेंट हाई स्कूल, नूरानी बाग (4)
गायत्री इंटरनेशनल स्कूल, कदमकुआं (8)
जीसरा मेरी कांवेंट, जमाल रोड (7)
प्रभु तारा स्कूल, गुलजारबाग (5)
मॉर्डन पब्लिक स्कूल, विवेकानंद नगर, पटना सिटी (6)

आरटीइ के तहत इन स्कूलों में हुआ 10 नामांकन   -
विद्या निकेतन, दानापुर
 एसवीएम रेजिडेंसियल पब्लिक स्कूल, राजीव नगर
 कृष्णा निकेतन, न्यू वायपास रोड
विद्या निकेतन गल्र्स हाई स्कूल, बैरिया, पटना
बीडी पब्लिक स्कूल, बुद्धा कोलोनी
आरपीएस रेजिडेंसिलय स्कूल, न्यू बेली रोड
डोनी पोला पब्किल स्कूल लक्ष्मणपुर, बिहटा
स्कूल ऑफ क्रिएटिव लर्निग, दानापुर कैंट
एवी पब्लिक स्कूल, बुद्धा कोलोनी
पटना कांवेंट, रामकृष्णा नगर
किड्स प्राइड, कंकड़बाग
लिटिल गार्डेन प्ले स्कूल
मगध पब्लिक स्कूल, भूपतिपुर

आरटीइ के तहत इन स्कूलों में हुआ 10 के उपर नामांकन
सेंट जोसफ हाई स्कूल, भूतनाथ रोड (20)
स्कॉलर एबॉड, जानीपुर (16)
सत्यम इंटरनेशनल स्कूल, बैरिया, पटना (15)
शिवम कांवेंट, कंकड़बाग (15)
 सत्यम इंटरनेशनल, गौरीचक (20)
 एवीएन स्कूल, राजीव नगर (15)
 डा. दुखनराम डीएवी पब्लिक स्कूल, दानापुर (17)
इस्ट एंड वेस्ट हाई स्कूल, बेला (16)
हिमालय पब्लिक स्कूल, बाटागंज (15)
 डीएवी पब्लिक स्कूल, खगौल, पटना   -  18
ओगेगा मिशन स्कूल, दानापुर कैंट (11)
एवीएन इंगलिश स्कूल, पाटलिपुत्र (40)
आधुनिक शिक्षा मध्य विद्यालय, कदमकुआं ( 15)
मनेर सेंट्रल स्कूल, मनेर (18)
आदर्श इंटरनेशनल स्कूल, खेमनीचक (12)
बीडी पांडेय पब्लिक स्कूल, बिहटा (16)
द इंडियन पब्लिक स्कूल, गुलजारबाग (25)
ज्ञानदीप विद्यालय, फुलवारीशरीफ (11)
शारदा विकास मंदिर, पटना सिटी (25)
सरस्वती शिशु मंदिर, पंडारक (25)
मदर टेरेसा हाई स्कूल, सिपारा (24)
राष्ट्रीय पब्लिक स्कूल, विक्रम (15)
फेयरी लैंड पब्लिक स्कूल, कदमकुआं (13)
पाटलिपुत्र पब्लिक स्कूल, फुलवारी (20)

कोट
हर प्राइवेट स्कूलों को 25 फीसदी नामांकन लेना है. इसके लिए हर साल स्कूलों से रिपोर्ट मंगायी जाती है. अगर स्कूल 25 फीसदी से कम एडमिशन लेता है उनके उपर कार्रवाई होती है. इसके लिए हम स्कूलों से नामांकन की सूची मंगवाते है.
कौशल किशोर, कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान

जब आरटीइ लागू हुआ तो सुप्रीम कोर्ट ने तीन सालों तक के लिए स्कूलों आरटीइ लागू करने का समय दिया गया था. लेकिन 2014 से इसे पूरी तरह लागू करना है. हर स्कूलों को 25 फीसदी नामांकन लेना ही होगा. इसके लिए हम जल्द ही समीक्षा बैठक करेंगे.
निशा झा, अध्यक्ष,  बाल अधिकार संरक्षण आयोग

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बजट तीन करोड़, फिर भी नहीं मिलेगा सीबीएसइ सर्टिफिकेट

- आरटीइ के तहत नामांकन लेने वाले अधिकांश स्कूल है सीबीएसइ से नॉन एफिलिएयेटेड
- कई बड़े स्कूल भरते है जुर्माना, नहीं लेते नामांकन
संवाददाता, पटना
हर साल शिक्षा के अधिकार के लिए गवर्नमेंट करोड़ो रुपये खर्च करती है. आरटीइ के तहत नामांकित बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ने के लिए विभाग की ओर से हर महीने तीन सौ रुपये भी छात्र की संख्या के अनुसार स्कूल के एकाउंट में भेजे जा रहे है. प्राइवेट स्कूल में  बच्चे एडमिशन तो ले रहे है, लेकिन ये सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड से 10वीं या मैट्रिक  नहीं कर पायेंगे और इन बोर्ड के सर्टिफिकेट भी इन बच्चों को नहीं मिल पायेगी. क्योंकि अभी पटना जिला के जितने स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन लिया है. उसमें अधिकांश स्कूल सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने मान्यता प्राप्त नहीं है. ऐसे में ये बच्चे बस आठवीं तक ही आरटीइ के तहत प्राइवेट स्कूल में पढ़ पायेंगे. आठवीं के बाद इन्हें सरकारी स्कूल में आना होगा.
- 61 स्कूल में 35 को नहीं है सीबीएसइ की मान्यता
पटना शहरी क्षेत्र के लगभग 61 स्कूल अपने यहां पर आरटीइ के तहत नामांकन ले रहे है. इन स्कूलों में सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड की पढ़ाई होती है. इसमें लगभग 35 स्कूलों को सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की मान्यता नहीं मिली हुई है. ऐसे में नौवीं क्लास के रजिस्ट्रेशन के समय इन छात्रों को स्कूल से निकाल दिया जायेगा. आइसीएसइ बोर्ड के एक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार मान्यता नहीं होने के कारण स्कूल के छात्र किसी दूसरे स्कूल से नौवीं में रजिस्टट्रेशन करवाते है. ऐसे में आरटीइ के तहत नामांकन लिये छात्रों को स्कूल बाहर कर देगा. वहीं सीबीएसइ का एक स्कूल ने बताया कि आठवीं तक ही बच्चों का नामांकन लिया गया है.
- 3070 से बढ़कर 4300 रुपया हो गया
शिक्षा के अधिकार के तहत पहले 3070 रुपये दिये जाते थे. साल भर के लिए दिये जाने वाले इन पैसे से बच्चों को एडमिशन और महीने का चार्ज होता था. लेकिन स्कूलों की ओर से शिकायत करने के बाद 2011-12 सत्र से इस पैसे को बढ़ा कर 4142 रुपया कर दिया गया. लेकिन फिर 2013-14 में इसे बढ़ा कर 4300 रुपया किया गया है.  विभाग से मिली जानकारी के अनुसार हर महीने बच्चों के नाम के अनुसार स्कूल को पैसे भेजे जाते है.
- आठवीं तक ही पढ़ पायेंगे स्टूडेंट्स
जिन स्कूलों को सीबीएसइ की मान्यता नहीं है. वो तमाम स्कूल आठवीं के बाद छट जायेंगे. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड से वो रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पायेंगे. फिर उन्हें बिहार बोर्ड के स्कूलों से ही मैट्रिक की परीक्षा देनी होगी. शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिन स्कूलों को सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की मान्यता नहीं है, लेकिन अगर वो बिहार राज्य से निबंधित है तो ऐसे छात्र को बिहार बोर्ड के स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा दे सकते है.
- नामांकन से अधिक जुर्माना देना पसंद करते है स्कूल
 मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 को लागू तो कर दिया गया, लेकिन अभी भी यह स्कूलों तक पहुंच नहीं पाया है. पटना शहर में कई बड़े स्कूल पिछले कुछ सालों में खुले है. लेकिन इसमें कोई भी स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेता है. दिल्ली पब्लिक स्कूल, बिड़ला स्कूल, त्रिभुवन स्कूल आदि जितने भी स्कूल है, वहां पर अभी तक एक भी नामांकन आरटीइ के तहत नहीं लिया गया है. सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार अधिकांश वहीं स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन ले रहे है जो शहर के छोटे और बिना मान्यता के चलने वाले स्कूल है.

पिछले तीन सालों का आरटीइ के तहत इतने रुपये हो गये खर्च
 2011-12 में खर्च राशि  -  2, 04, 13, 654 करोड़ रुपये
2012-13 में खर्च राशि   -  3,12,05,828 करोड़ रुपये
2013-14 में खर्च राशि  -   4,32,45, 678 करोड़ रुपये


कोट
जो स्कूल सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त है, वो हमारे पास आते ही नहीं है. एक तो अल्पसंख्यक के नाम पर मिसनरी ने खुद को इससे अलग कर रखा है. वहीं जो नामी और बड़े स्कूल है वो जुर्माना देना पसंद करते है, लेकिन जरूरतमंद गरीब बच्चों का नामांकन नहीं लेते है. हर नामी स्कूल हर साल जुर्माना भरने हमारे पास आते है. लेकिन आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेते है.
कौशल किशोर, कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्वशिक्षा अभियान


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स्कूलों की गलती की सजा सुनायेगा सुप्रीम कोर्ट

- आरटीइ में गलती की सजा जायेगी सीधे सुप्रीम कोर्ट के पास
- 2014 से होगी पूरी समीक्षा
- बिहार सरकार ने जारी किया शिकायत निवारण प्रक्रिया
संवाददाता, पटना
तीन साल बीत चुके है. अब अगर स्कूल में सही से शिक्षा का अधिकार कानून लागू नहीं हुआ तो इसकी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट के पास जायेगी. उसके बाद स्कूल का भविष्य सीधे सुप्रीम कोर्ट तय करेगा.  आरटीइ में तीन साल की छूट के बाद अब कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग की ओर से शुरूआत कर दी गयी है.  विभाग की ओर से आरटीइ को कड़ाई से लागू करने के लिए 2014 से प्रक्रिया में तेजी लायी जा रही है. राज्य के बाल अधिकार संरक्षण आयोग के माध्यम से पूरे प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों का आकलन किया जा रहा है. इसके तहत स्कूलों का रिकार्ड देखा जायेगा कि स्कूल में पिछले तीन साल में आरटीइ के तहत कितने नामांकन हुए. इसके अलावा 2014 में नामांकन कुल संख्या का कितना है. 30 जुलाई तक नामांकन का लिस्ट तैयार कर, 15 अगस्त
- 25 फीसदी से कम हुआ तो जुर्माना
2014 से तमाम स्कूलों का रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के पास जायेगा. इसके तहत क्लास वन में छात्र के कुल संख्या का 25 फीसदी नामांकन की प्रक्रिया की पूरी जांच होगी. स्कूल में क्लास वन में जितने छात्र है उसका 25 फीसदी नामांकन लिया गया है या नहीं, यह देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस पर स्कूल पर कार्रवाई कर सकता है. अगर स्कूल 25 फीसदी से कम नामांकन लेते हुए पकड़ में आयेंगे तो स्कूल पर 1 लाख से लेकर 10 लाख तक का जुर्माना लग सकता है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुसार सुप्रीम कोर्ट चाहे तो स्कूल का रजिस्ट्रेशन भी खत्म कर सकता है.
- विभाग ने बनाया शिकायत निवारण प्रक्रिया
बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत बच्चों की शिक्षा के अधिकार के संबंध में शिकायतों के लिए बिहार शिक्षा विभाग की ओर से शिकायत निवारण की शुरूआत की गयी है. इस निवारण के माध्यम से एक प्रक्रिया शुरू की गयी है. अगर कोई स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेता है तो इस निवारण प्रक्रिया के माध्यम से अभिभावक विभाग के पास शिकायत कर सकते है. इस शिकायत के बाद स्कूल पर कार्रवाई की जायेगी. इसके लिए विभाग ने 5 स्तर पर प्रक्रिया निभायी जायेगी. इसमें स्थानीय प्राधिकार, शिकायत प्राप्ति स्थल, शिकायत पंजी, शिकायत दाखिल करना एवं निष्पादन की प्रक्रिया और प्रखंड एवं जिला स्तर पर शिक्षा संवाद का आयोजन करना आवश्यक है.
स्थानीय प्राधिकार   - ग्राम पंचायत तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति को तथा नगर निगम, नगर परिषद एवं नगर पंचायत की सशक्त स्थायी समिति को स्थानीय प्राधिकार घोषित किया गया है. ग्राम पंचायत की शिक्षा समिति प्राथमिक विद्यालय तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति मध्य विद्यालय के लिए स्थानीय प्राधिकार घोषित है.
शिकायत प्राप्ति स्थल  - ग्राम पंचायत तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति तथा नगर निकाय की शिक्षा सशक्त स्थायी समिति के कार्यालय स्थल पर शिक्षा के अधिकार संबंधित शिकायत प्राप्त किया जायेगा. इसके लिए स्थानीय प्राधिकार के द्वारा प्राप्तकर्ता का नाम एवं पदनाम घोषित किया जायेगा. स्थानीय प्राधिकार का यह दायित्व होगा कि  इसकी जानकारी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में आम लोगों को दे.
शिकायत पंजी  - स्थानीय प्राधिकार की शिक्षा समिति एवं सशक्त स्थायी समिति के कार्यालय में शिकायत पत्रों की प्राप्ति हेतु एक शिकायत पंजी भेजी जायेगी. इस शिकायत पंजी में दर्ज शिकायत को शिकायत कर्ता के पास तिथि के साथ रसीद दी जायेगी.
शिकायत दाखिल करना एंव निष्पादन की प्रक्रिया - शिकायत दर्ज करने के बाद शिकायतों की एक सूची तैयार की जायेगी. प्रत्येक शिकायत के संबंध में कार्रवाई सक्षम प्राधिकार तथा अपील हेतु अपीलीय प्राधिकार के पास जायेगा. शिकायत प्राप्ति के 7 दिनों के अंदर स्थानीय प्राधिकार द्वारा शिकायत का निष्पादन किया जायेगा. अगर वो निष्पादन नहीं कर पायेगे तो उसे सक्षम प्राधिकार के पास भेज दिया जायेगा. सक्षम प्राधिकार शिकायत को 30 दिनों के अंदर निष्पादन करेंगे.
प्रखंड एवं जिला स्तर पर शिक्षा संवाद का आयोजन - आरटीइ के तहत अब आम लोगों को भी जोड़ने का प्रयास किया जायेगा. प्राप्त शिकायतों के निष्पादन हेतु प्रखंड एवं जिला स्तर पर प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को एक शिक्षा संवाद का आयोजन किया जायेगा. इसमें राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के राज्य इकाई के द्वारा सहयोग दिया जायेगा.

कोट
सुप्रीम कोर्ट के आरटीइ को लागू करने के लिए तीन सालों की सुविधा तमाम प्राइवेट स्कूलों को दिया था. इसके लिए स्कूल तीन सालों में आरटीइ को समझ कर इसे अपने यहां लागू करेंगे. यह तीन साल 2013 में पूरा हो गया है. इस कारण 2014 से इस पर पूरी गंभीरता से हम कार्य कर रहे है. अगस्त में इसे पूरा कर सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट भेंजेंगे.
निशा झा, अध्यक्ष, बाल संरक्षण अधिकार आयोग

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