Tuesday, March 3, 2015

लेदर सूज स्टूडेंट दिखे तो जायेगी स्कूल की मान्यता

लेदर सूज स्टूडेंट दिखे तो जायेगी स्कूल की मान्यता

- चमड़े के जूता को बंद करने को सीबीएसइ ने स्कूलों को दिया था तीन साल पहले नोटिस
- पटना के किसी भी स्कूल में पूरी तरह से लागू नहीं है यह नियम 
संवाददाता, पटना
पर्यावरण के बचाव में सहयोग देने के लिए तमाम स्कूलों में छात्रों के लेदर सूज पहनने पर पाबंदी लगायी जा रही है. हर स्कूलों को इस नियम का पालन करना होगा. तीन साल पहले सीबीएसइ की ओर से यह निर्देश तमाम स्कूलों को दिया गया था. बीच-बीच में बोर्ड द्वारा इस नियम को फॉलो करने के भी निर्देश स्कूलों को दिया जाता रहा. लेकिन इसके बावजूद अभी तक पूरी तरह से पटना का एक भी स्कूल इसे स्कूल में लागू नहीं कर सका. अब सीबीएसइ द्वारा ऑन स्पॉट चेकिंग की जायेगी. 
- सीबीएसइ ने बनायी टीम
हर स्कूलों में नये सत्र की शुरुआत हो चुकी है. किसी भी स्कूल ने छात्र को सीबीएसइ के निर्देश के बारे में बताया या नहीं, इसको लेकर सीबीएसइ अब ऑन स्पॉट चेकिंग करेगी. इसके लिए बोर्ड की ओर से टीम बनायी गयी है. यह टीम कभी भी किसी भी स्कूल में जा सकती है. ऑन स्पॉट जिस स्कूल में लेदर सूज में एक भी छात्र नजर आयेगा तो टीम इसकी रिपोर्ट बोर्ड को सौंपेगी. देश भर के तमाम सीबीएसइ स्कूलों में यह किया जायेगा. तमाम स्कूलों से रिपोर्ट आने के बाद सीबीएसइ उन स्कूलों पर कार्रवाई करेगी जो इसका पालन नहीं कर रहा है. 
- स्कूल एफिलिएशन से जुड़ा है यह नियम 
सीबीएसइ की ओर से स्कूल कैंपस में लेदर सूज का उपयोग छात्र ना करें, यह नियम स्कूल एफिलिएशन के तहत आता है. सीबीएसइ से मिली जानकारी के अनुसार पर्यावरण को सुरक्षा देने के लिए बोर्ड की ओर से यह फैसला लिया गया. बोर्ड के वेबसाइट पर स्कूल एफिलिएशन में इसकी पूरी जानकारी डाल दी गयी है. इसके अलावा तमाम स्कूलों को भी इसकी जानकारी भेजी गयी है. इसके बावजूद स्कूल इस बात को लेकर अभी तक अवेयर नहीं है. एक्सपर्ट की माने तो लेदर बनाने में जानवरों के चमड़े का यूज किया जाता है. इसके लिए जहर युक्त केमिकल्स का प्रयोग किया जाता है. इससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है.  
- लेदर का स्कूल बैग और पर्स पर भी पाबंदी
लेदर के जूता के साथ सीबीएसइ ने लेदर के स्कूल बैग और लेदर के पर्स लाने पर भी स्कूल में पाबंदी लगा रखी है. तमाम छात्र जहां कपड़े के स्कूल बैग का यूज करें, वहीं टीचर भी लेदर बैग की जगह कपड़े या जूट के बैग का यूज करें. 
- नहीं है स्कूल के वेबसाइट पर जानकारी
हर स्कूल अपने वेबसाइट तक पर इसकी जानकारी अब तक नहीं दिया है. सीबीएसइ के इस निर्देश के बारे में ना तो छात्र को पता है और ना ही अभिभावक इस बात को जानते है. हर सत्र के शुरू होने से पहले स्कूल की ओर से अभिभावकों को एक लिस्ट दिया जाता है. इस लिस्ट में बुक्स, नोट बुक, यूनिफार्म, जूता, स्कूल बैग समेत कई चीजों के बारे में जानकारी होती है जिसे अभिभावकों को सत्र शुरू होने के पहले खरीद लेना होता है. यहां तक कि स्कूल के वेबसाइट पर भी इसकी कोई जानकारी नहीं दिया गया है कि चमड़े के जूता पहनने पर स्कूल की ओर से रोक लगाया जा रहा है. 
- स्पोर्टस डे के अलावा बांकी दिन लेदर सूज 
पटना के तमाम स्कूलों में पीटी के दिन छात्रों को स्पोर्टस सूज पहन कर आना होता है. बांकी दिन लेदर सूज ही तमाम स्कूलों में चलता है. सप्ताह में अलग-अलग दिन हर क्लास के लिए डिसाइड रहता है कि कौन से क्लास के छात्र किस दिन स्पोर्टस सूज या कपड़े का सूज पहन कर आयेंगे. इसके अलावा बांकी हर दिन लेदर सूज ही पहन कर आने को कहा जाता है. कई स्कूल तो कैंपस में ही दुकान लगवा कर स्कूल यूनिफार्म के साथ लेदर सूज भी बेचते है. 
- हर स्कूल का अपना डिजाइन
गल्र्स स्कूल की बात करें या ब्वायज स्कूल की, हर स्कूल के जूतों का डिजाइन अपने स्टाइल में है. इन स्टाइलों के जूते लेने के लिए दुकानें भी निश्चित होती है. पटना रेलवे स्टेशन स्थित अग्रवाल ड्रेस मेटेरियल से मिली जानकारी के अनुसार इस दुकान में तमाम स्कूलों के जूतें मिलते है. पांव का साइज बताकर अभिभावक यहां से जूतों की खरीदारी करते है. वहीं बोरिंग रोड स्थित आकाश गंगा में भी हर स्कूल का जूता मिलता है. 

- पटना में कुल सीबीएसइ स्कूलों की संख्या   - 100 
- पांच से छह स्कूलों में होता है 50 परसेंट ही इस नियम का फॉलो 

इन स्कूलों में होता है 50 परसेंट फॉलो
- नॉट्रेडम एकेडमी  
- रेडियेंट इंटरनेशनल 
- दिल्ली पब्लिक स्कूल 
- इंटरनेशनल स्कूल
- वाल्डविन एकेडमी 

प्रिंसिपल से बात

स्कूल में यह नियम लागू किया गया है. लेकिन अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है. कुछ क्लासेज में शुरू किया गया है. पीटी के क्लासेज में कपड़ों के जूते पहन कर छात्र आते है. बांकी दिन लेदर सूज ही स्कूल में चलता है. 
एफ हसन, प्राचार्य, इंटरनेशनल स्कूल 

कई क्लास में तो कपड़े के जूते पहन कर ही छात्र आते है. लेकिन पूरी तरह से यह लागू नहीं है. अभी भी छात्र लेदर सूज पहन कर आते है. हमारी कोशिश है कि जल्द ही इसे पूरी तरह से लागू कर दिया जायेगा. पर्यावरण की सुरक्षा के लिए यह शुरू किया गया है. 
राधिका, प्रिंसिपल, बिड़ला ओपेन माइंड स्कूल 

कोट
पर्यावरण के सुरक्षा में सहयोग देने के लिए बोर्ड की ओर से यह नियम बनाये गये है. कुछ स्कूलों में इसका पालन होता भी है. लेकिन पूरी तरह से किसी भी स्कूल में इसको फॉलो नहीं किया जाता है. अब हम इस पर ध्यान देकर इसे सही करवायेंगे. 
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया कांप्लेक्स 

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