Sunday, March 1, 2015

बिना पैसे कैसे हो पढ़ाई

बिना पैसे कैसे हो पढ़ाई

- राइट टू एजुकेशन के तहत नामांकन तो हुआ, नहीं मिला अब तक पैसे
- कई स्कूलों के चेक हो गये बाउंस
संवाददाता, पटना
शिक्षा का अधिकार के तहत नामांकन तो ले लिया, लेकिन इसके लिए मिलने वाले पैसे अभी तक नहीं मिले. पिछले सात महीने से प्राइवेट स्कूल वाले आरटीइ के तहत मिलने वाले पैसे का इंतजार कर रहे थे. अब जब सितंबर में पैसे मिले तो वो भी उनके किसी काम का नहीं हुआ. क्योंकि विभाग द्वारा चेक पर पहले 3 मार्च 2014 का साइन कर भेज दिया गया. उसके बाद उसी चेक पर पुराने तिथि को काट कर नीचे 8 सितंबर 2014 कर दिया गया. कट किया गया चेक जब सितंबर की तिथि लगा कर स्कूलों को भेजा गया और स्कूल उसे बैंक भेजी तो उसे बैंक ने लौटा दिया. बैंक ने स्कूल वालों को यह कह कर चेक लौटा दिया कि चेक पर सही जानकारी नहीं है. तिथि को कट कर नयी तिथि लिख दी गयी है. अब स्कूल वाले इस चेक को जिला शिक्षा कार्यालय में लौटाने की सोच रहे है.
- अब कैसे करें 25 फीसदी की फी बंदोबस्ती
जिन स्कूलों में 25 फीसदी शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लिया गया है. अब उन स्कूलों के पास मुश्किलें आ रही है इन बच्चों के फी की बंदोबस्ती कैसे होगा. सात महीने तो इंतजार में ही निकल गये. लेकिन अब जब चेक ही काम नहीं कर रहा है तो इसे दुबारा मिलने की उम्मीद ही काफी कम हो गयी है. एक स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि आरटीइ के तहत नामांकन लेने वाले बच्चे को वो सारी सुविधाएं दी जाती है जो अन्य बच्चों को दी जाती हेै. हर बच्चे के उपर स्कूल का अपना खर्च भी होता है. ऐसे में 25 फीसदी बच्चे के उपर पूरा एकेडेमिक खर्च करना स्कूल के लिए संभव नहीं हो पाता है.
- मार्च में नामांकन लेकिन पैसे मिलते कई महीने बाद
आरटीइ के तहत नामांकन तो समय पर हो जाता है, लेकिन इसके पैसे मिलने में कई महीने लग जाते है. इस बीच बच्चे को मुफ्त में ही शिक्षा दी जाती है. एक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार मार्च में कुल 25 फीसदी बच्चे का नामांकन क्लास वन में कर लिया गया. लेकिन अभी तक विभाग की ओर से पैसे निर्गत नहीं किये गये है. इस बीच जिला शिक्षा पदाधिकारी को रिमाइंडर भी भेजा गया है. लेकिन वहां से बस आश्वासन ही मिलता है. हर साल जुलाई और अगस्त तक आरटीइ के तहत पैसे मिल जाते थे. लेकिन इस बार काफी लेट हो गया है. सितंबर अंतिम में स्कूल के पास रुपये के चेक आये है. लेकिन वो काम नहीं कर रहा है. मार्च के ही तिथि पर चेक पर साइन किया गया. अब सितंबर में जब स्कूल को मिला तो उसे बैंक में जमा किया गया. लेकिन वहां से बाउंस कर दिया गया.

प्रिंसिपल की बातें
मै तो पिछले तीन सालों से आरटीइ के तहत 25 फीसदी नामांकन ले रहा हूं. लेकिन अभी तक विभाग की ओर से एक बार भी पैसे नहीं मिले है. पिछले तीन सालों से बस हम आरटीइ के तहत नामांकन ले रहा हूं.
राजीव रंजन सिन्हा, प्रिंसिपल, वाल्डविन एकेडमी

मार्च में नामांकन हुआ लेकिन बच्चों के लिए अभी तक विभाग की ओर से पैसे नहीं मिले है. इस बीच अभिभावक ने स्कूल यूनिफार्म तो बच्चों को खरीद कर दे दिया है. लेकिन स्कूल फी के बिना ही बच्चे की पढ़ाई हो रही है. अभी हाल में चेक मिला है, लेकिन वो बैंक से वापस आ गया.
एफ हसन, प्रिंसिपल, इंटरनेशनल स्कूल

हमारे पास 1 लाख रुपये का कुछ दिनों पहले चेक आया था. हमने उसे बैंक में भेजा लेकिन बैंक से वापस आ गया है. पता चला कि वो चेक अब काम का नहीं है. काफी लेट होने के कारण चेक की वैलिडिटी खत्म हो गयी.
एके नाग, प्रिंसिपल, एसवीएम रेजिडेंसिल स्कूल

हम लोग तो जिला स्तर पर इसे डीइओ को भेज देते है. पैसा तो हर डीइओ को स्कूल के अनुसार भेज दिया गया था. डीइओ स्तर से कुछ हुआ होगा. हम इसे चेक करने के बाद ही कुछ बता पायेंगे.
आर के सिंह, मीडिया प्रभारी, शिक्षा विभाग

13 october 2014 prabhat khabar patna 

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