Sunday, March 1, 2015

पटना के स्कूलों में भी आ रहे रैंगिग के मामले

पटना के स्कूलों में भी आ रहे रैंगिग के मामले

- बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास पहुंचते है अभिभावक
- सीबीएसइ स्कूलों में भी हो कॉलेज की तरह एंटी रैंगिग सेल
संवाददाता, पटना
राहुल पटना के एक फेमस स्कूल में 11वीं में नामांकन लिया. नामांकन के कुछ दिनों के बाद उसके सीनियर उसे तंग करने लगे. कभी पढ़ाई को लेकर परेशान करते तो कभी गाली देकर अपना पर्सनल काम करवाते थे. राहुल स्कूल जाने से कतराने लगा. वो चूपचाप रहने लगा. डर से अभिभावक को कुछ नहीं बताता था. एक दिन स्कूल से आने के बाद राहुल ने दूसरे दिन से स्कूल जाने से साफ मना कर दिया. कई बार पूछे जाने पर उसके अभिभावक को सारी बातें बतायी. सीनियर उसे किस तरह तंग करते है. फिर अभिभावक उसे लेकर बाल अधिकार संरक्षण आयोग पहुंचे. आयोग की ओर से स्कूल को नोटिस गया. फिर मामला शांत हुआ. बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास ऐसे कई स्कूलों के मामले है जहां पर जूनियर को सीनियर तंग करते है. उन्हे गाली देकर बुलाते है. हाल में ग्वालियर में हुई घटना को लेकर बोडिंग स्कूलों के साथ डे स्कूलों में भी एंटी रैंगिग सेल को लेकर चर्चाएं जोरों पर है. कई राज्य के स्कूलों ने अब यह मांग करना शुरू कर दिया है. खासकर प्लस टू लेवल के स्कूलों में चोरी छिपे रैंगिग आदि की घटनाएं घटती है.
- स्कूल के पास नहीं है कोई अधिकार
बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास तो स्टूडेंट्स पहुंच जाते है. उनकी काउंसेलिंग भी हो जाती है. लेकिन उसके आगे स्कूल कुछ नही कर पाता है. क्योंकि स्कूल के पास कोई प्रूव नही होता है. ऐसे में ऐसे छात्र को स्कूल से निकालने का भी पावर अभी स्कूल के पास नहीं है. अगर स्टूडेंट्स के बीच आपसी लड़ाई या मारपीट होती है तो स्कूल कुछ नहीं कर पाता है. एक स्कूल के प्रिसिंपल ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि 11वीं में जो स्टूडेंट्स नामांकन लेते है. उसे सीनियर स्टूडेट्स अधिक तंग करते है. बार-बार उसे बेइज्जत करना. बात-बात पर उसे वेबकुफ बनाने जैसी घटनाएं स्कूल कैंपस में होता है. ऐसे स्टूडेंट्स इतने डरे रहते है कि प्रिंसिपल के पास शिकायत भी नहीं कर पाते है. क्योंकि उन्हें यह भी धमकाया जाता है कि अगर वो प्रिंसिपल से शिकायत करेंगे तो उन्हें स्कूल के बाहर मार पड़ेगी. वहीं एक प्रिंसिपल ने बताया कि न्यू सेशन के समय तो हमें काफी सतर्क रहना पड़ता है. हमें किसी तरह का पावर नहीं है. अगर बोर्ड की ओर से एंटी रैगिग सेल स्कूल में होगा तो ऐसा काम करने से पहले स्टूडेंट्स दस बार सोंचेंगे.

कोट
जूनियर से सीनियर की प्रताड़ना के केस कई बार हमारे पास आये हैं. हम स्टूडेंट्स की काउंसेलिंग कर उसे स्कूल दुबारा भेजते है. उसके बाद स्कूल को इसकी जानकारी भी देते है. लेकिन हम कुछ अधिक नहीं कर पाते. अगर इसके लिए स्कूल के लिए काम करने वाली बॉडी को पहल करनी चाहिए. एंटी रैंगिग सेल हो तो इस तरह की घटना पर लगाम लगेगा.
निशा झा, अध्यक्ष, बाल अधिकार संरक्षण आयोग

हमने सीबीएसइ से मांग की है कि जल्द से जल्द स्कूलों में भी एंटी रैंगिग सेल बनाया जायें. क्योंकि आये दिन स्कूलों में भी छात्रों के आपसी मतभेद क मामले आते है. जूनियर को सीनियर काफी परेशान करते है. स्कूल के नॉलेज मे बात आत ेही उस पर स्कूल कुछ कड़ी कार्रवाई कर सकेगा. ऐसे छात्र को स्कूल से निकाल दिया जायें. इससे बांकी दूसरे छात्रों को डर लगेगा.
डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार पब्लिक पैरेंट्स चिल्ड्रेन एसोसिएशन

हमारे पास अगर कोई केस आये तो हम इस पर विचार कर सकते है. हम भी इस बात को मानते है कि स्कूलों में इस तरह की चीजें होती है. लेकिन जब तक हमारे पास अभिभावक नहीं आयेगे तब तक हम कोई कार्रवाई नहीं कर सकते है. अभिभावक या स्टूडेंट्स को अपनी बातें खुल कर बोलना चाहिए. एंटी रैंगिग सेल अब स्कूलो की जरूरत बनती जा रही है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया

3 septemer 2014 prabhat khabar patna 

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