Sunday, March 15, 2015

नया सेशन होगा महंगा, अभिभावक की जेबें होंगी ढ़ीली

नया सेशन होगा महंगा, अभिभावक की जेबें होंगी ढ़ीली

- किताबों के साथ स्टेशनरी होगी 20 फीसदी महंगी
- परीक्षाएं खत्म होने के साथ शुरू हो गयी नये सेशन की तैयारी
संवाददाता, पटना
नये सेशन शुरू होने में अभी पंद्रह दिन के लगभग समय बचा है. स्कूलों में परीक्षाएं खत्म हो चुकी है. नये क्लास में जाने की खुशी जहां बच्चों में अभी से देखी जा रही है वहीं नये सेशन में जेब ढ़ीली होने की परेशानी अभिभावकों पर अभी से आनी शुरू  हो गयी है. किताबों और स्टेशनरी की दुकानों में दामों की जानकारी अभिभावकों ने लेनी शुरू कर दी हैं. इस बार नया सेशन अभिभावकों के उपर भारी पड़ने वाला है. अभी तक हर साल स्टेशनरी और किताबें के दाम में 5 से 10 फीसदी बढ़ायी जाती रही है. लेकिन इस बार 15 से 20 फीसदी बढ़ायी जा रही है. इसको लेकर अभी से अभिभावकों की परेशानी बढ़नी शुरू हो गयी. अभिभावकों ने बच्चों के उपर अलग से बजट रखनी शुरू कर दी गयी हैं.
- ट्रांसपोटेशन फी भी देने को रहें तैयार
किताबों और स्टेशनरी के अलावा इस बार बजट का एक्स्ट्रा बोझ ट्रांसपोटेशन पर भी पड़ने वाला है. हर स्कूल फिर एक बार ट्रांसपोटेशन फी में भी 15 फीसदी की बढ़ोतरी करने जा रही है. जिन स्कूलों का अपना बस सर्विस हैं वहां पर स्कूल वाले और जहां पर प्राइवेट बस एसोसिएशन वाले स्कूल बस की सर्विस देते है. दोनों की बस भाड़ा में 20 से 25 फीसदी बढ़ायेंगे. स्कूल बस एसोसिएशन के मैनेजर मनोज पांडे ने बताया कि नये सत्र के शुरू होने पर पिछले साल भी 10 फीसदी बढ़ाया गया था. इस बार भी सरकार ने सर्विस टैक्स अधिक कर दिया है. इस कारण मुङो बस के हर चीजों पर अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहें है. ऐसे में बस भाड़ा बढ़ाना हमारी मजबूरी है.
- स्कूल फी में 20 से 25 फीसदी की होगी बढ़ोतरी
अभी तक हर साल स्कूलों की फी में 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी होती रही है. कुछ चाज्रेज बढ़ाये जाते रहे है. लेकिन इस बार कई स्कूल ने 25 फीसदी तक फी बढ़ाने की सोच रही है. जिन स्कूलों में अभी मंथली फी प्रायमरी लेवल पर एक बच्चे के लिए अभिभावक को 15 सौ से 18 सौ तक का फी देना होता था. वहीं अब यह फी दो हजार से 23 सौ रुपये तक बढ़ जायेगी. यानी एक अभिभावक पर पांच सौ से छह सौ रुपये का बोझ पड़ने जा रहा हैं. अगर हम बात सेंकेंडरी और हायर सेंकेडरी लेवल की करें तो अभी अभिभावकों को 17 सौ से 2 हजार रूपये देने होते हैं. लेकिन नये सत्र से इसमें 22 सौ से 25 सौ रुपये हो जाने की उम्मीद की जा रही है. कहा जायें तो एडमिशन चार्ज के अलावा मंथली फी में भी अभिभावकों को अपना बजट बढ़ाना होगा.
- रि-एडमिशन और डेवलपमेंट पर भी बढ़ाया गया चार्ज
इस बार कई स्कूलों ने रि-एडमिशन और नये सत्र के साथ लिये जाने वाले डेवलपमेंट चार्ज को भी बढ़ा दिया हैं. इन दोनों पर भी सर्विस टैक्स का असर अभिभावकों को ङोलना होगा. नये सेशन में हर स्कूल में रि-एडमिशन चलता है. नये क्लास में जाने के लिए बच्चों को अपने ही स्कूल में नामांकन लेना होता है. रि-एडमिशन के नाम पर दस हजार से 25 हजार तक ही राशि स्कूल वाले इस बार लेंगे. इसके अलावा डेवलपमेंट चार्ज भी 5 हजार (कई चाज्रेज मिलाकर) के लगभग में स्कूल वाले लेते हैं. इस बार डेवलपमेंट चार्ज एक से दो हजार अधिक होने जा रहा है. एक स्कूल से मिली जानकारी हर चीजों पर सर्विस टैक्स अधिक होने के कारण महंगाई बढ़ गयी है.
- हफ्ते भर बाद मिलेगा स्कूलों से लिस्ट
परीक्षा खत्म होने के एक हफ्ते बाद से स्कूल की ओर से अभिभावकों को लिस्ट दिया जाता है. स्कूल की ओर से दिये गये लिस्ट के अनुसार अभिभावकों को नये सेशन की तैयारी करनी पड़ती हैं. इस लिस्ट में अभिभावको के लिए सारे निर्देश दिये होते है. इन निर्देश का पालन अभिभावकों करना होता है. इसमें रि-एडमिशन से लेकर फी जमा करने और नये सेशन के क्लास की तैयारी संबंधी जानकारी दी गयी रहती है. नये सेशन के लिए हर स्कूल दस दिनों का समय अभिभावकों को देते है.
- किताबों की लिस्ट के साथ होती है दुकानों की जानकारी
हर स्कूल क्लास वाइज किताबों की लिस्ट दुकान वालों के पास भेज देता है. अभिभावक को बस उस दुकान में जाकर स्कूल का नाम कहना पड़ता है. इसके बाद अभिभावक को सारे बुक्स के साथ नोट बुक और स्टेशनरी के समान भी दुकान वाले दे देते है. अभिभावक सीमा कुमारी ने बताया कि उनकी बेटी सेंट कैरेंस में 9वीं में इस बार गयी है. स्कूल की ओर से ज्ञान गंगा भेजा गया है. लेकिन सारे किताबें नहीं मिली है. वहीं डॉन बास्को एकेडमी ने तो पाटलिपुत्र में ही एक छोटे से दुकान मे अपने सारे किताबें एबलेबल करवा दिये है. कई स्कूल अपने ही कैंपस में किताबें और स्टेशनरी की दुकानें लगाते हैं. यहीं से अभिभावकों को खरीदारी करनी होती हैं. ऐसे में अभिभावक दूसरी जगहों से खरीदारी नहीं कर सकते है. कई स्कूलों ने कैंपस में बुक स्टॉल लगाने की तैयारी भी शुरू कर दी हैं. तीन चार दिनों के लिए लगने वाले बुक स्टॉल से अभिभावकों को बुक खरीदना होता है.

- सर्विस टैक्स बढ़ने से पढ़ाई हो जायेगी महंगी
केंद्र सरकार द्वारा सर्विस टैक्स को 14 फीसदी कर देने का असर नये सेशन में बखूबी देखी जा रही है. जहां नये सेशन में किसी भी चीज पर 5 से 12 फीसदी की बढ़ोतरी होती थी. वहीं अब यह 20 से 25 फीसदी तक पहुंच जायेगी. इसका सीधा बोझ अभिभावकों के उपर पड़ने वाला है. इसका असर मंथली भी अभिभावकों को ङोलना पड़ेगा. स्कूल फी से लेकर ट्रांसपोटेशन, किताबें और स्टेशनरी के दामों में भी अच्छी खासी बढ़ोतरी हो जा रही हैं.

क्लास    -   2014 के दाम    - 2015 में देने होंगे
वन      -      15 सौ            -   18 सौ
टू        -       13 सौ           -    17 सौ
थ्री, फोर    -   17 सौ         -   21 सौ
फाइव, सिक्स -   2 हजार   -   25 सौ
7वीं और 8वीं   -  4 हजार   -  45 सौ                
9वीं और 10वीं  -  46 सौ   -  5 हजार

क्लास वन से थ्री के लिए स्टेशनरी  -  5 सौ से 7 सौ
क्लास फोर, फाइव, सिक्स के लिए स्टेशनरी   -   7 सौ से एक हजार
7वीं और 8वीं के लिए स्टेशनरी  -   11 सौ से 12 सौ
9वीं और 100वीं के लिए स्टेशनरी  -   12 सौ से 15 सौ तक

नोट  - ये सारे दाम ज्ञान गंगा बुक्स स्टॉल से लिया गया है. अधिकांश स्कूल के किताबें यहीं से अभिभावकों को उपलब्ध होते है. एनसीइआरटी के अलावा रिफ्रेस बुक्स की भी खरीदारी स्टूडेंट्स और अभिभावक यहां से करते हैं.

बातचीत

मेरी बेटी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ती है. वो इस बार 7वीं क्लास में जायेगी. अभी स्कूल से लिस्ट तो नहीं मिला है. लेकिन दुकानों से पता लगाया है तो पता चला है कि इस बार 5 हजार की किताबें ही आयेगी. इसके बाद स्टेशनरी अलग से लेना पड़ेगा. पिछले साल 5 से 6 हजार के बीच खर्च करना पड़ा था, लेकिन इस बार तो लगता है  दस हजार तक बजट रखना पड़ेगा.
सीमा सिंह, अभिभावक, पुनाइचक

ट्रांसपोटेशन तो सीधे 5 सौ रुपये बढ़ा दिया गया है. स्कूल की ओर से नोटिस दे दिया गया है. किताबों और स्टेशनरी के लिए अभी स्कूल से लिस्ट नहीं मिला है. लेकिन दुकानों से पता चला है कि इस बार किताबो के दाम बढ़ गये है. स्टेशनरी के दामों में भी दुगुना बढ़ोतरी हो गयी है.
रोहित शर्मा, अभिभावक, कंकड़बाग

15 march 2015

Thursday, March 12, 2015

11वीं में मल्टीपल च्वाइस और 12वीं में सबजेक्टिब प्रश्नों के होंगी प्लस टू की परीक्षाएं

11वीं में मल्टीपल च्वाइस और 12वीं में सबजेक्टिब प्रश्नों के होंगी प्लस टू की परीक्षाएं

- प्लस टू लेवल पर पैटर्न को बदलने की चल रही कवायद
- स्कूलों से ली जायेगी फीडबैक
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन की ओर से प्लस टू के परीक्षा पैटर्न में बदलाव होने जा रही हैं. अभी तक प्लस टू लेवल पर 11वीं और 12वीं की परीक्षाएं एक समान होती थी. 11वीं का स्कूल लेवल पर और उसी पैटर्न पर 12वीं का बोर्ड परीक्षा होती थी. लेकिन अब इसमें बदलाव किया जा रहा है. अब 11वीं में स्टूडेंट्स मल्टीपल च्वाइस वाले ही प्रश्नों के उत्तर देंगे. हर विषयों में इसे लागू किया जायेगा. वहीं 12वीं की बोर्ड परीक्षा पूरी तरह से सबजेक्टिव प्रश्नों पर आधारित होगा. सीबीएसइ की ओर से यह परिवर्तन 2016 में 11वीं की परीक्षा देने वाले परीक्षार्थी पर लागू होगा. हाल में सीबीएसइ के एकेडेमिक कमेटी की ओर से बनायी गयी एक्सपर्ट टीम ने यह सलाह बोर्ड को दिया है. बोर्ड अब इसे प्लस टू लेवल पर लागू करने की तैयारी में जुट गया है.
- स्कूल से फीडबैक के बाद लागू होगा पैटर्न
एक्सपर्ट टीम की सलाह के बाद अब सीबीएसइ ने इसे स्कूल से फीडबैक लेने का विचार कर रहा है. जल्द ही इसके लिए एक फार्मेट स्कूलों को भेजा जायेगा. सीबीएसइ के सूत्रों के मुताबिक प्लस टू लेवल पर स्टूडेंट्स की तैयारी प्रतियोगी परीक्षा के लिए स्कूल में ही हो, इसके लिए यह पैटर्न को अपनाया जायेगा. बोर्ड तमाम स्कूलों से फीडबैक लेने के बाद इसे अगले सत्र से लागू कर देगी. इस पैटर्न के होने से प्लस टू के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी स्टूडेंट्स का हो जायेगा.
- नेशनल लेवल प्रतियोगी परीक्षा में मिलेगी मदद
11वीं और 12वीं में अलग-अलग परीक्षा पैटर्न होने से स्टूडेंट्स को काफी मदद मिलेगी. एक्सपर्ट टीम के अनुसार दो सालों में स्टूडेंट्स की तैयारी अलग-अलग तरीके से होगी. इससे स्टूडेंट्स मल्टीपल च्वाइस के साथ 12वीं के लिए सिलेबस की थॉरो जानकारी मिलेगी. वर्तमान में ऐसा नहीं हो पा रहा है. वर्तमान में दो सालों तक स्टूडेंट्स को एक ही पैटर्न पर परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है. इससे नेशनल लेवल प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में दिक्कतें होती है. जेइइ और मेडिकल की परीक्षाएं भी अब दो स्टेज पर होने लगा है. प्रथम स्टेज मल्टीपल च्वाइस और दूसरे स्टेज में सबजेक्टिव प्रश्न पूछे जाते है. ऐसे में प्लस टू में भी 11वीं और 12वीं परीक्षा पैटर्न को अलग- अलग तरीके से किया जायेगा. इससे प्रतियोगी परीक्षा देने में स्टूडेंट्स को काफी मदद मिलेगी.

कोट
प्लस टू का परीक्षा पैटर्न कई साल पुराना है. ऐसे में इस परिवर्तन से स्टूडेंट्स को काफी फायदा होगा. अभी दो सालों में स्टूडेंट्स बस कोर्स की पढ़ाई कर पाते थे. उन्हें प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए अलग से समय देना होता था. लेकिन अब कोर्स की पढ़ाई के साथ-साथ ही ऐसा हो जायेगा. इससे स्टूडेंट्स को काफी मदद मिलेगी.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ

11 march 2015

मौलवी और फोकानियां का सिलेबस होगा चेंज, 12 सौ के बदले अब 8 सौ की होगी परीक्षा

मौलवी  और फोकानियां का सिलेबस होगा चेंज, 12 सौ के बदले अब 8 सौ की होगी परीक्षा

- बिहार बोर्ड और सीबीएसइ के कई चीजों को मदरसा बोर्ड में किया जायेगा लागू
- फोकानियां का 2001 और मौलवी के सिलेबस में 1987 के बाद किया जायेगा परिवर्तन
रिंकू झा, पटना
प्रतियोगी परीक्षा तक छात्रों की पहुंच हो और क्वालिटी एजुकेशन से छात्रों का सीधा जुड़ाव हो, इसके लिए बिहार राज्य मदरसा बोर्ड ने अपने सिलेबस में परिवर्तन करने की सोची हैं. इस सिलेबस को अप्रैल 2015 सत्र से ही लागू कर दिया जायेगा. सिलेबस छात्र के हित के तहत हो, इसकी प्रक्रिया भी बोर्ड ने शुरू कर दी गयी है. बोर्ड सूत्रों की माने तो फोकानियां (मैट्रिक) और मौलवी (इंटर) नया सिलेबस 8 सौ अंक का होगा. इसमें उन सभी टॉपिक आदि पर भी फोकस किया जायेगा जो बिहार विद्यालय परीक्षा समिति और सीबीएसइ के लागू हैं. ज्ञात हो कि अभी मदरसा बोर्ड के फोकानियां और मौलवी के छात्र 12 सौ अंक का सिलेबस चल रहा है. फोकानियां और मौलवी के सिलेबस में यह परिवर्तन कई सालों के बाद किया जा रहा है. फोकानियां के सिलेबस में 2001 और मौलवी के सिलेबस में 1987 के बाद अभी तक परिवर्तन नहीं किया गया है.
- फोकानियां में सीबीएसइ पैटर्न पर साइंस का सिलेबस
अभी तक फोकानिया और मौलवी के सिलेबस में 12 भाषाएं लागू थी. छात्रों को इन भाषाओं में से अपनी मरजी के भाषाओं को चुनना होता था. ऐसे में कई भाषाएं ऐसी है जिसे पढ़ने के बाद छात्रों को कोई खासा मतलब नहीं होता है. ऐसे में अब बोर्ड कुछ भाषाओं की पढ़ाई बंद कर रही है. इससे अब 12 की जगह 10 भाषा की ही पढ़ाई फोकानियां और मौलवी में किया जायेगा. बोर्ड के अनुसार अब उन्हीं भाषाओं का ही मदरसा बोर्ड में पढ़ाई शुरू होगी जिन भाषाओं की पढ़ाई बिहार बोर्ड और सीबीएसइ में लागू है. इससे मदरसा बोर्ड को राष्ट्रीय स्तर पर बोर्ड का दर्जा मिल पायेगा. इस संबंध में बोर्ड के एकेडेमिक इंजार्च और मदरसा निरीक्षक नूर इस्लाम ने बताया कि मदरसा बोर्ड को दूसरे बोर्ड के समानांतर लाने के लिए भाषा स्तर पर ऐसा करना जरूरी है. इसके अलावा बोर्ड की ओर से फोकानियां में साइंस के सिलेबस सीबीएसइ पैटर्न पर लागू किया जायेगा.
- मौलवी में अब साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स की पढ़ाई
मदरसा बोर्ड के मौलवी के छात्र अब अपनी मरजी के विषयों को पढ़ पायेगे. इस सत्र से मौलवी में साइंस के साथ आर्ट्स और कॉमर्स स्ट्रीम की शुरूआत की जा रही है. छात्र अपनी रुचि के अनुसार साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स विषय के पढ़ पायेंगे. इन स्ट्रीम का वहीं सिलेबस रहेगा जो अभी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में लागू है. इसके अलावा सीबीएसइ प्लस टू के सिलेबस से भी कुछ चीजों को मदरसा बोर्ड अपने यहां लागू करेगी. इस संबंध में बोर्ड के एकेडेमिक इंजार्च और मदरसा निरीक्षक नूर इस्लाम ने बताया कि मौलवी में साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स स्ट्रीम की अलग-अलग पढ़ाई होने से मदरसा बोर्ड के छात्र भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयार हो पायेंगे.
- 12 सौ अंक की अंतिम बार होगी परीक्षा
मदरसा बोर्ड के फोकानिया और मौलवी की परीक्षा 6 अप्रैल से शुरू हो रही है. यह परीक्षा पुराने पैटर्न पर ही 12 सौ अंक की होगी. अगले साल से 8 सौ अंक की परीक्षा ली जायेगी. अप्रैल में परीक्षा और मई के पहले सप्ताह में इस बार रिजल्ट की घोषणा हो सकती है. एकेडेमिक इंचार्ज नूर इस्लाम ने बताया कि इस बार रिजल्ट जल्द से जल्द देने की हमारी कोशिश रहेगी. जिससे प्रतियोगी परीक्षा देने वाले छात्रों को परेशानी नहीं हो. इस बार दोनों की परीक्षाओं को मिलाकर डेढ़ लाख परीक्षार्थी शामिल हो रहे है. अप्रैल के प्रथम सप्ताह में परीक्षा और मई के प्रथम सप्ताह में रिजल्ट निकाल दिया जायेगा.

कोट
मदरसा बोर्ड के छात्र भी दूसरे बोर्ड के छात्रों की तरह हर प्रतियोगी परीक्षा में शामिल हो, इसके लिए हमने सिलेबस में परिवर्तन करने की सोची है. अधिक अंक का दबाव अब छात्रों पर से हटाया जायेगा. जिस तरह से बिहार बोर्ड में 5 सौ अंक की परीक्षाएं ली जाती है. उसी तरह से मदरसा बोर्ड में भी फोकानियां और मौलवी की परीक्षाएं में अंकों को कम किया जा रहा है. फिलहाल हम 12 सौ से 8 सौ पर सिलेबस को लायेंगे. नया सिलेबस 2015 सत्र से लागू कर दिया जायेगा.
सैयद मोहिबुल हसन, अध्यक्ष, बिहार राज्य मदरसा बोर्ड

11 march 2015

स्कूल में बनेगा एंटी रैंगिग सेल

स्कूल में बनेगा एंटी रैंगिग सेल

- सीबीएसइ की ओर से स्कूलों के पास आया निर्देश
- हर स्कूल के प्रिंसिपल के साथ सात लोगों की बनेगी टीम
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से नये सेशन की तैयारी शुरू कर दी गयी है. नये सेशन में नये स्कूल में स्टूडेंट्स को पूरी तरह से सुरक्षा मिले, इसके लिए हर सीबीएसइ स्कूलों में एंटी रैंगिग सेल बनाने का निर्देश आया है. सीबीएसइ की ओर से हर स्कूलों के पास एंटी रैंगिग सेल होने का निर्देश दिया गया है. हाल में सीबीएसइ के पास पैरेंट्स की शिकायत आयी है कि उनके बच्चे के साथ बुलिंग और रैंगिग जैसी घटनाएं घटी है. इस कारण तंग आकर पैरेंट्स को अपने बच्चे को स्कूल से निकालना पड़ा. आये दिन इस तरह की घटनाएं को देखकर सीबीएसइ ने इस सेशन से तमाम स्कूलों को एंटी रैंगिग सेल और एंटी बुलिंग सेल का गठन करने को कहा हैं. नया सेशन शुरू होने से पहले इस सेल का गठन कर लेना हैं.
- एक दूसरे के चिढ़ाने पर लगी रोक
किसी भी स्कूल में अब स्टूडेंट्स एक दूसरे को चिढ़ायेंगे नहीं. अगर कोई स्टूडेंट किसी को चिढ़ाते हुए पकड़ में आया तो इस स्टूडेंट पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी. सीबीएसइ की ओर से बुलिंग (किसी के साथ बदमासी करना) करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गयी है. सीबीएसइ की ओर से तमाम स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि स्कूल कैंपस में स्टूडेंट्स डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रूप से किसी तरह का गलत एक्टिविटी नहीं कर सकते है. मजाक में भी अपशब्द कहने वालों पर पाबंदी लगा दी गयी है. यहां तक ही साइबर बुलिंग भी अगर स्टूडेंट्स करते हुए पकड़ में आयेगे तो उनके उपर कार्रवाई हो सकती है.
- टीम करेगी रैंगिग की रिव्यू
अप्रैल में हर स्कूलों में एंटी रैंगिग सेल का गठन कर लेना है. सेशन शुरू होने के साथ स्कूल के टीम की ओर से रैंगिग का रिव्यू किया जायेगा. नये छात्रों को बुलाकर ऑफ द रिकार्ड रैंगिग होने की जानकारी ली जायेगी. अगर किसी स्टूडेंट द्वारा रैंगिग की जानकारी दी जाती है तो पहले उसकी जांच होगी. पकड़ में आने पर स्टूडेंट्स को जुर्माने के साथ स्कूल से भी निकाला जा सकता है. इस बीच शिकायत करने वाले स्टूडेंट का नाम गुप्त रखा जायेगा.
- स्कूल में चलेगा अवेयरनेस प्रोग्राम
एंटी रैंगिग सेल और बुलिंग सेल की ओर हर किसी का ध्यान आकृष्ट हो, इसके लिए हर स्कूलों में अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलाया जायेगा. इस प्रोग्राम में स्कूल के  टीचर्स के अलावा स्टूडेंट, स्कूल स्टाफ, पैंरेंट्स आदि को शामिल करना हैं. किसी तरह की शिकायत होने पर किस तरह का डिसीजन लिया जाना है, इसकी भी जानकारी देनी होगी. प्रोग्राम के माध्यम से इस सेल के क्रियेटिविटी को दिखाया जायेगा. स्कूल की ओर से एंटी रैंगिग सेल के तमाम मेंबर्स के कांटैक्ट नंबर को स्कूल कैंपस में जगह-जगह लगाया जायेगा. जिससे किसी भी तरह की शिकायत करने में स्टूडेंट्स को दिक्कतें ना हो. आसानी से वो अपनी शिकायतें एंटी रैंगिग सेल के पास पहुंचा सके. इसके अलावा स्कूल की ओर से प्ले, नुक्कड़ नाटक, ग्रुप डिस्कशन, डिवेट, स्पेशनल एसेंबली, पोस्टर कंपीटिशन आदि का आयोजन किया जायेगा.
- प्रायमरी से लेकर हायर सेकेंडरी तक होगा लागू
एंटी रैंगिग सेल और बुलिंग सेल के अंतर्गत हर क्लास को शामिल किया गया है. प्रायमरी लेवल के क्लासेज से लेकर मीडिल, सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी लेवल के स्टूडेंट्स पर भी लागू होगा. अगर प्रायमरी लेवल के किसी स्टूडेंट्स के साथ बुलिंग या रैंगिग जैसी घटनाएं होती है तो उस पर भी कार्रवाई की जायेगी. सीबीएसइ की ओर से हर स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि समय समय पर स्कूल के टीचर्स को इस संबंध में ट्रेनिंग भी दिया जायें. बच्चों के क्लासेज पर भी अधिक ध्यान रखा जायें. क्योंकि बुलिंग की अधिकांश केसेज प्रायमरी और मीडिल लेवल के क्लासेज में अधिक देखने को मिल रही है.

ऐसा होगा कार्रवाई की प्रक्रिया
- लिखित और बोलकर वॉर्निग दी जायेगी
- क्लास से सस्पेंड कर दिया जायेगा. या फिर किसी एक स्पेशल क्लास से सस्पेंड कर दिया जायेगा
- रिजल्ट को कैंसिल कर दिया जायेगा
- स्टूडेंट्स पर जुर्माना लगाया जायेगा
- अधिक गंभीर केस पर स्कूल से निकाला जा सकता है
- शिकायत अधिक गंभीर होने पर दूसरे स्कूल में ट्रांसफर पर भी रोक लगायी जा सकती हैं

एंटी रैंगिग सेल में ये लोग रहेंगे मेंबर
- स्कूल के प्रिंसिपल
- वाइस प्रिंसिपल
- एक सीनियर टीचर
- स्कूल के डॉक्टर
- स्कूल के काउंसलर
- पैरेंट्स टीचर एसोसिएशन के अध्यक्ष
- स्कूल मैनेजमेंट रिप्रेजेंटेटिव
- पीयर एजुकेटर

इस तरह की हरकत नहीं कर सकते है स्कूल में स्टूडेंट
- फिजिकली रूप से एक दूसरे को मारना
- मूंह आदि बना कर चिढ़ाना
- मुंह से किसी को अपशब्द कहना
- किसी के एकेडेमिक में गलत इंटरफेयर करना
- अवांछित चीजों की ओर दूसरे स्टूडेंट्स का ध्यान दिलवाना
- किसी स्टूूडेंट्स के बारे में गलत अफवाहें नहीं फैलाना
- साइबर बुलिंग यानी एसएमएस, फोटोग्राफ और इ-मेल पर गलत तरीके से कुछ लिखना या करना

कोट
हाल के कई सालों में हायर सेकेंडरी लेवल के क्लासेज में रैंगिग और बुलिंग जैसी घटनाएं सामने आ रही है. नये स्टूडेंट्स के साथ स्कूल के सीनियर स्टूडेंट्स बदतमीजी करते है. चिढ़ाना और रैंगिग करने की घटनाएं भी सामने आयी है. इस कारण सीबीएसइ की ओर से यह कदम उठाया गया है.
साधना पराशर, एकेडेमिक हेड, सीबीएसइ

12 march 2015

मदरसा बोर्ड का बदला एकेडेमिक कैलेंडर, मौलवी के छात्र शामिल हो पायेंगे जेइइ मेन में

मदरसा बोर्ड का बदला एकेडेमिक कैलेंडर, मौलवी के छात्र शामिल हो पायेंगे जेइइ मेन में

- फरवरी में फोकानिया और मौलवी की परीक्षा, 31 मार्च तक निकलेगा रिजल्ट
- 17 जुलाई से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
संवाददाता, पटना
फोकानिया और मौलवी के सिलेबस में परिवर्तन करने के साथ मदरसा बोर्ड अब अपना एकेडेमिक कैलेंडर को सही करने में जुट गया है. जल्द ही मदरसा बोर्ड का एकेडेमिक कैलेंडर को दुबारा निकाला जायेगा. बोर्ड के अनुसार एकेडेमिक कैलेंडर पूरी तरह से छात्रों को हित में रह कर बनाया जा रहा है. 2016 की जेइइ मेन और मेडिकल की परीक्षाएं में मौलवी के छात्र शामिल हो, इसके लिए 31 मार्च 2016 तक फोकानिया और मौलवी का रिजल्ट दे दिये जाने का फैसला लिया गया हैं. बोर्ड के अनुसार इसके लिए सीबीएसइ तर्ज पर जुलाई 2015 में ही इस बार रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी.
- 20 हजार छात्रों को मिलेगा मौका
जुलाई में रजिस्ट्रेशन होने से मदरसा बोर्ड के मौलवी के छात्र दिसंबर में जेइइ मेन के लिए आवेदन कर पायेंगे. मदरसा बोर्ड से मौलवी की पढ़ाई करने वालें छात्रों की संख्या हर साल बढ़ रही हैं. 2014 सत्र की बात करें तो मौलवी में लगभग 20 हजार छात्र थे जो जेइइ मेन और मेडिकल की परीक्षाएं में शामिल हो सकते थे. लेकिन समय पर रिजल्ट नहीं मिलने के कारण वो इन परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पायें थे. 2015 सत्र के छात्रों के साथ भी ऐसा ही हो रहा है. लेकिन अगले साल 2016 सत्र के छात्रों के साथ ऐसा नहीं होगा. बदले हुए एकेडेमिक कैलेंडर का फायदा छात्रों को होगा. समय पर रिजल्ट मिलने से छात्र अपना कैरियर अपने अनुसार चला पायेंगे. ज्ञात हो कि इस साल भी मौलवी में 20 हजार के लगभग छात्र साइंस की पढ़ाई करते है.
- फरवरी में परीक्षा और मार्च में रिजल्ट
 बोर्ड के संशोधित एकेडेमिक कैलेंडर के अनुसार 2016 सत्र में फोकानिया और मौलवी की परीक्षाएं फरवरी में लिया जायेगा. अगले सत्र में 31 मार्च तक फोकानिया और मौलवी का रिजल्ट घोषित कर दिया जायेगा. इससे फोकानिया के छात्र अच्छे स्कूल और कॉलेज में नामांकन ले पायेंगे. वहीं मौलवी के छात्रों को जेइइ मेन और एआइपीएमटी (मेडिकल) की प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो पायेंगे. ज्ञात हो कि अभी मदरसा बोर्ड को फोकानिया और मौलवी का रिजल्ट निकालने में कई महीने की देरी हो जाती हैं. मई में रिजल्ट और अंक पत्र देरी से मिलने के कारण छात्र कई प्रतियोगी परीक्षा से महरूम रह जाते हैं.

कोट
मदरसा बोर्ड का एकेडेमिक कैंलेंडर को चेंज किया जा रहा है. अभी तक मदरसा बोर्ड की फोकानिया और मौलवी की परीक्षाएं अप्रैल में होती रही है. इससे बोर्ड के परीक्षार्थी प्रतियोगी परीक्षा का लाभ नहीं उठा पा रहे है. लेकिन अब एकेडेमिक कैंलेंडर में परिवर्तन किया जा रहा हैं. इससे जेइइ मेन और मेडिकल की परीक्षाएं में भी बोर्ड के छात्र शामिल हो पायेंगे.
सैयद मोहिब-उल अहमद, अध्यक्ष, बिहार राज्य मदरसा बोर्ड

12 march 2015

Tuesday, March 3, 2015

लेदर सूज स्टूडेंट दिखे तो जायेगी स्कूल की मान्यता

लेदर सूज स्टूडेंट दिखे तो जायेगी स्कूल की मान्यता

- चमड़े के जूता को बंद करने को सीबीएसइ ने स्कूलों को दिया था तीन साल पहले नोटिस
- पटना के किसी भी स्कूल में पूरी तरह से लागू नहीं है यह नियम 
संवाददाता, पटना
पर्यावरण के बचाव में सहयोग देने के लिए तमाम स्कूलों में छात्रों के लेदर सूज पहनने पर पाबंदी लगायी जा रही है. हर स्कूलों को इस नियम का पालन करना होगा. तीन साल पहले सीबीएसइ की ओर से यह निर्देश तमाम स्कूलों को दिया गया था. बीच-बीच में बोर्ड द्वारा इस नियम को फॉलो करने के भी निर्देश स्कूलों को दिया जाता रहा. लेकिन इसके बावजूद अभी तक पूरी तरह से पटना का एक भी स्कूल इसे स्कूल में लागू नहीं कर सका. अब सीबीएसइ द्वारा ऑन स्पॉट चेकिंग की जायेगी. 
- सीबीएसइ ने बनायी टीम
हर स्कूलों में नये सत्र की शुरुआत हो चुकी है. किसी भी स्कूल ने छात्र को सीबीएसइ के निर्देश के बारे में बताया या नहीं, इसको लेकर सीबीएसइ अब ऑन स्पॉट चेकिंग करेगी. इसके लिए बोर्ड की ओर से टीम बनायी गयी है. यह टीम कभी भी किसी भी स्कूल में जा सकती है. ऑन स्पॉट जिस स्कूल में लेदर सूज में एक भी छात्र नजर आयेगा तो टीम इसकी रिपोर्ट बोर्ड को सौंपेगी. देश भर के तमाम सीबीएसइ स्कूलों में यह किया जायेगा. तमाम स्कूलों से रिपोर्ट आने के बाद सीबीएसइ उन स्कूलों पर कार्रवाई करेगी जो इसका पालन नहीं कर रहा है. 
- स्कूल एफिलिएशन से जुड़ा है यह नियम 
सीबीएसइ की ओर से स्कूल कैंपस में लेदर सूज का उपयोग छात्र ना करें, यह नियम स्कूल एफिलिएशन के तहत आता है. सीबीएसइ से मिली जानकारी के अनुसार पर्यावरण को सुरक्षा देने के लिए बोर्ड की ओर से यह फैसला लिया गया. बोर्ड के वेबसाइट पर स्कूल एफिलिएशन में इसकी पूरी जानकारी डाल दी गयी है. इसके अलावा तमाम स्कूलों को भी इसकी जानकारी भेजी गयी है. इसके बावजूद स्कूल इस बात को लेकर अभी तक अवेयर नहीं है. एक्सपर्ट की माने तो लेदर बनाने में जानवरों के चमड़े का यूज किया जाता है. इसके लिए जहर युक्त केमिकल्स का प्रयोग किया जाता है. इससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है.  
- लेदर का स्कूल बैग और पर्स पर भी पाबंदी
लेदर के जूता के साथ सीबीएसइ ने लेदर के स्कूल बैग और लेदर के पर्स लाने पर भी स्कूल में पाबंदी लगा रखी है. तमाम छात्र जहां कपड़े के स्कूल बैग का यूज करें, वहीं टीचर भी लेदर बैग की जगह कपड़े या जूट के बैग का यूज करें. 
- नहीं है स्कूल के वेबसाइट पर जानकारी
हर स्कूल अपने वेबसाइट तक पर इसकी जानकारी अब तक नहीं दिया है. सीबीएसइ के इस निर्देश के बारे में ना तो छात्र को पता है और ना ही अभिभावक इस बात को जानते है. हर सत्र के शुरू होने से पहले स्कूल की ओर से अभिभावकों को एक लिस्ट दिया जाता है. इस लिस्ट में बुक्स, नोट बुक, यूनिफार्म, जूता, स्कूल बैग समेत कई चीजों के बारे में जानकारी होती है जिसे अभिभावकों को सत्र शुरू होने के पहले खरीद लेना होता है. यहां तक कि स्कूल के वेबसाइट पर भी इसकी कोई जानकारी नहीं दिया गया है कि चमड़े के जूता पहनने पर स्कूल की ओर से रोक लगाया जा रहा है. 
- स्पोर्टस डे के अलावा बांकी दिन लेदर सूज 
पटना के तमाम स्कूलों में पीटी के दिन छात्रों को स्पोर्टस सूज पहन कर आना होता है. बांकी दिन लेदर सूज ही तमाम स्कूलों में चलता है. सप्ताह में अलग-अलग दिन हर क्लास के लिए डिसाइड रहता है कि कौन से क्लास के छात्र किस दिन स्पोर्टस सूज या कपड़े का सूज पहन कर आयेंगे. इसके अलावा बांकी हर दिन लेदर सूज ही पहन कर आने को कहा जाता है. कई स्कूल तो कैंपस में ही दुकान लगवा कर स्कूल यूनिफार्म के साथ लेदर सूज भी बेचते है. 
- हर स्कूल का अपना डिजाइन
गल्र्स स्कूल की बात करें या ब्वायज स्कूल की, हर स्कूल के जूतों का डिजाइन अपने स्टाइल में है. इन स्टाइलों के जूते लेने के लिए दुकानें भी निश्चित होती है. पटना रेलवे स्टेशन स्थित अग्रवाल ड्रेस मेटेरियल से मिली जानकारी के अनुसार इस दुकान में तमाम स्कूलों के जूतें मिलते है. पांव का साइज बताकर अभिभावक यहां से जूतों की खरीदारी करते है. वहीं बोरिंग रोड स्थित आकाश गंगा में भी हर स्कूल का जूता मिलता है. 

- पटना में कुल सीबीएसइ स्कूलों की संख्या   - 100 
- पांच से छह स्कूलों में होता है 50 परसेंट ही इस नियम का फॉलो 

इन स्कूलों में होता है 50 परसेंट फॉलो
- नॉट्रेडम एकेडमी  
- रेडियेंट इंटरनेशनल 
- दिल्ली पब्लिक स्कूल 
- इंटरनेशनल स्कूल
- वाल्डविन एकेडमी 

प्रिंसिपल से बात

स्कूल में यह नियम लागू किया गया है. लेकिन अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है. कुछ क्लासेज में शुरू किया गया है. पीटी के क्लासेज में कपड़ों के जूते पहन कर छात्र आते है. बांकी दिन लेदर सूज ही स्कूल में चलता है. 
एफ हसन, प्राचार्य, इंटरनेशनल स्कूल 

कई क्लास में तो कपड़े के जूते पहन कर ही छात्र आते है. लेकिन पूरी तरह से यह लागू नहीं है. अभी भी छात्र लेदर सूज पहन कर आते है. हमारी कोशिश है कि जल्द ही इसे पूरी तरह से लागू कर दिया जायेगा. पर्यावरण की सुरक्षा के लिए यह शुरू किया गया है. 
राधिका, प्रिंसिपल, बिड़ला ओपेन माइंड स्कूल 

कोट
पर्यावरण के सुरक्षा में सहयोग देने के लिए बोर्ड की ओर से यह नियम बनाये गये है. कुछ स्कूलों में इसका पालन होता भी है. लेकिन पूरी तरह से किसी भी स्कूल में इसको फॉलो नहीं किया जाता है. अब हम इस पर ध्यान देकर इसे सही करवायेंगे. 
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया कांप्लेक्स 

2440 की जगह 700 बच्चे को ही मिला शिक्षा का अधिकार

2440 की जगह 700 बच्चे को ही मिला शिक्षा का अधिकार

- शिक्षा के नाम पर बस खानापूर्ति हो रही है प्राइवेट स्कूलों में
- 120 की जगह 8 से 10 बच्चें के एडमिशन पर ही सिमट गया स्कूल
संवाददाता, पटना
सब पढ़े सब बढ़े के तहत आरटीइ लागू किया गया. इसके तहत हर प्राइवेट स्कूलों को नामांकन लेना था. जब राजधानी पटना में प्राइवेट स्कूलों में आरटीइ का पूरा उल्लघंन हो रहा है तो दूसरे जिलों की बात ही क्या करें. पटना शहरी क्षेत्र के स्कूलों की बात करें तो कुल 120 स्कूल बिहार सरकार से रजिस्ट्र्ड है. इसमें अभी तक मात्र 61 स्कूलों ने ही अपने यहां पर आरटीइ के तहत नामांकन लिया है. यह नामांकन बस नाम मात्र का है. बस खानापूर्ति की गयी है. किसी स्कूल में 5 नामांकन तो किसी स्कूल में 10 नामांकन हुए है. कई स्कूल तो ऐसे है जहां पर 2013-14 में जीरो नामांकन किया गया है. सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार 2013-14 सत्र में पटना शहरी क्षेत्र मात्र 7 सौ बच्चे का ही आरटीइ में नामांकन हो पाया.
- हर स्कूल में चलता है तीन सेक्शन
हर प्राइवेट स्कूल में क्लास वन में तीन सेक्शन चलता है . हर सेक्शन में कम से कम 40 बच्चे होते है. ऐसे में क्लास वन में 120 सीट हुआ. जिसमें बच्चों का एडमिशन लिया जाना था. अगर बात आरटीइ के तहत नामांकन लेने की बात हो तो हर स्कूल को 40 बच्चों का नामांकन लेना चाहिए था. लेकिन किसी भी स्कूल ने ऐसा नहीं किया है. आरटीइ के नाम का बस खानापूर्ति किया गया है. अगर बस 61 स्कूलों के नामांकन की बात करें तो यहां पर 2440 बच्चों का नामांकन आरटीइ के तहत लिया जाना चाहिए था. लेकिन हजार का आंकड़ा भी बच्चे छू नहीं पायें. नागरिक अधिकार मंच के शिव प्रकाश राय ने बताया कि आरटीआइ से मिली जानकारी के अनुसार आरटीइ के तहत नामांकन काफी कमजोर है. प्राइवेट स्कूलों में नामांकन नहीं के बराबर है.   एक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार जो बच्चे आरटीइ के तहत हमारे पास आते है तो उनका नामांकन हम लेते है. ऐसे बच्चों के लिए हम अलग से तैयारी करनी पड़ती है.

सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड के स्कूलों में 2013-14 में हुआ आरटीइ के तहत एडमिशन
आरटीइ के तहत इन स्कूलों में रहा जीरो नामांकन  -
 ज्ञान निकेतन,
 डा. जी एल दत्ता डीएवी पब्लिक स्कूल, ट्रांसपोर्ट नगर,
 ज्ञानोदय गुरुकुल, गोला रोड,
एकलव्य एजुकेशन काम्पलेक्स, पलंगा,
शिवम स्कूल, बिहटा

आरटीइ के तहत इन स्कूलों में हुआ 10 से कम नामांकन  -
 डीएवी पब्लिक स्कूल, वाल्मी, फुलवारी ( 8)
रेड कार्पेट, राजेन्द्र नगर (4)
आदर्श ज्ञानोदय विद्यालय, बाढ़ (8)
ब्लू बेल्स एकेडमी,  खगौल रोड, पटना (3)
द अर्थ पब्लिक स्कूल, श्रीपालपुर, पुनपुन  (8)
प्रेमालोक मिशन स्कूल,  बैरिया (7)
एमएस मेमोरियल एकेडमी, बेली रोड (7)
मे फ्लावर स्कूल, दीघाघाट (8)
शिवम विद्या मंदिर, विक्रम (5)
कृष्णा पब्लिक स्कूल, नउरा (7)
सेंट अगस्टिन एकेडमी, लोहानीपुर (1)
कैथेड्रल पब्लिक स्कूल, पंडारक (5)
जीएमजे कांवेंट हाई स्कूल, नूरानी बाग (4)
गायत्री इंटरनेशनल स्कूल, कदमकुआं (8)
जीसरा मेरी कांवेंट, जमाल रोड (7)
प्रभु तारा स्कूल, गुलजारबाग (5)
मॉर्डन पब्लिक स्कूल, विवेकानंद नगर, पटना सिटी (6)

आरटीइ के तहत इन स्कूलों में हुआ 10 नामांकन   -
विद्या निकेतन, दानापुर
 एसवीएम रेजिडेंसियल पब्लिक स्कूल, राजीव नगर
 कृष्णा निकेतन, न्यू वायपास रोड
विद्या निकेतन गल्र्स हाई स्कूल, बैरिया, पटना
बीडी पब्लिक स्कूल, बुद्धा कोलोनी
आरपीएस रेजिडेंसिलय स्कूल, न्यू बेली रोड
डोनी पोला पब्किल स्कूल लक्ष्मणपुर, बिहटा
स्कूल ऑफ क्रिएटिव लर्निग, दानापुर कैंट
एवी पब्लिक स्कूल, बुद्धा कोलोनी
पटना कांवेंट, रामकृष्णा नगर
किड्स प्राइड, कंकड़बाग
लिटिल गार्डेन प्ले स्कूल
मगध पब्लिक स्कूल, भूपतिपुर

आरटीइ के तहत इन स्कूलों में हुआ 10 के उपर नामांकन
सेंट जोसफ हाई स्कूल, भूतनाथ रोड (20)
स्कॉलर एबॉड, जानीपुर (16)
सत्यम इंटरनेशनल स्कूल, बैरिया, पटना (15)
शिवम कांवेंट, कंकड़बाग (15)
 सत्यम इंटरनेशनल, गौरीचक (20)
 एवीएन स्कूल, राजीव नगर (15)
 डा. दुखनराम डीएवी पब्लिक स्कूल, दानापुर (17)
इस्ट एंड वेस्ट हाई स्कूल, बेला (16)
हिमालय पब्लिक स्कूल, बाटागंज (15)
 डीएवी पब्लिक स्कूल, खगौल, पटना   -  18
ओगेगा मिशन स्कूल, दानापुर कैंट (11)
एवीएन इंगलिश स्कूल, पाटलिपुत्र (40)
आधुनिक शिक्षा मध्य विद्यालय, कदमकुआं ( 15)
मनेर सेंट्रल स्कूल, मनेर (18)
आदर्श इंटरनेशनल स्कूल, खेमनीचक (12)
बीडी पांडेय पब्लिक स्कूल, बिहटा (16)
द इंडियन पब्लिक स्कूल, गुलजारबाग (25)
ज्ञानदीप विद्यालय, फुलवारीशरीफ (11)
शारदा विकास मंदिर, पटना सिटी (25)
सरस्वती शिशु मंदिर, पंडारक (25)
मदर टेरेसा हाई स्कूल, सिपारा (24)
राष्ट्रीय पब्लिक स्कूल, विक्रम (15)
फेयरी लैंड पब्लिक स्कूल, कदमकुआं (13)
पाटलिपुत्र पब्लिक स्कूल, फुलवारी (20)

कोट
हर प्राइवेट स्कूलों को 25 फीसदी नामांकन लेना है. इसके लिए हर साल स्कूलों से रिपोर्ट मंगायी जाती है. अगर स्कूल 25 फीसदी से कम एडमिशन लेता है उनके उपर कार्रवाई होती है. इसके लिए हम स्कूलों से नामांकन की सूची मंगवाते है.
कौशल किशोर, कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान

जब आरटीइ लागू हुआ तो सुप्रीम कोर्ट ने तीन सालों तक के लिए स्कूलों आरटीइ लागू करने का समय दिया गया था. लेकिन 2014 से इसे पूरी तरह लागू करना है. हर स्कूलों को 25 फीसदी नामांकन लेना ही होगा. इसके लिए हम जल्द ही समीक्षा बैठक करेंगे.
निशा झा, अध्यक्ष,  बाल अधिकार संरक्षण आयोग

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बजट तीन करोड़, फिर भी नहीं मिलेगा सीबीएसइ सर्टिफिकेट

- आरटीइ के तहत नामांकन लेने वाले अधिकांश स्कूल है सीबीएसइ से नॉन एफिलिएयेटेड
- कई बड़े स्कूल भरते है जुर्माना, नहीं लेते नामांकन
संवाददाता, पटना
हर साल शिक्षा के अधिकार के लिए गवर्नमेंट करोड़ो रुपये खर्च करती है. आरटीइ के तहत नामांकित बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ने के लिए विभाग की ओर से हर महीने तीन सौ रुपये भी छात्र की संख्या के अनुसार स्कूल के एकाउंट में भेजे जा रहे है. प्राइवेट स्कूल में  बच्चे एडमिशन तो ले रहे है, लेकिन ये सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड से 10वीं या मैट्रिक  नहीं कर पायेंगे और इन बोर्ड के सर्टिफिकेट भी इन बच्चों को नहीं मिल पायेगी. क्योंकि अभी पटना जिला के जितने स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन लिया है. उसमें अधिकांश स्कूल सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने मान्यता प्राप्त नहीं है. ऐसे में ये बच्चे बस आठवीं तक ही आरटीइ के तहत प्राइवेट स्कूल में पढ़ पायेंगे. आठवीं के बाद इन्हें सरकारी स्कूल में आना होगा.
- 61 स्कूल में 35 को नहीं है सीबीएसइ की मान्यता
पटना शहरी क्षेत्र के लगभग 61 स्कूल अपने यहां पर आरटीइ के तहत नामांकन ले रहे है. इन स्कूलों में सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड की पढ़ाई होती है. इसमें लगभग 35 स्कूलों को सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की मान्यता नहीं मिली हुई है. ऐसे में नौवीं क्लास के रजिस्ट्रेशन के समय इन छात्रों को स्कूल से निकाल दिया जायेगा. आइसीएसइ बोर्ड के एक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार मान्यता नहीं होने के कारण स्कूल के छात्र किसी दूसरे स्कूल से नौवीं में रजिस्टट्रेशन करवाते है. ऐसे में आरटीइ के तहत नामांकन लिये छात्रों को स्कूल बाहर कर देगा. वहीं सीबीएसइ का एक स्कूल ने बताया कि आठवीं तक ही बच्चों का नामांकन लिया गया है.
- 3070 से बढ़कर 4300 रुपया हो गया
शिक्षा के अधिकार के तहत पहले 3070 रुपये दिये जाते थे. साल भर के लिए दिये जाने वाले इन पैसे से बच्चों को एडमिशन और महीने का चार्ज होता था. लेकिन स्कूलों की ओर से शिकायत करने के बाद 2011-12 सत्र से इस पैसे को बढ़ा कर 4142 रुपया कर दिया गया. लेकिन फिर 2013-14 में इसे बढ़ा कर 4300 रुपया किया गया है.  विभाग से मिली जानकारी के अनुसार हर महीने बच्चों के नाम के अनुसार स्कूल को पैसे भेजे जाते है.
- आठवीं तक ही पढ़ पायेंगे स्टूडेंट्स
जिन स्कूलों को सीबीएसइ की मान्यता नहीं है. वो तमाम स्कूल आठवीं के बाद छट जायेंगे. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड से वो रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पायेंगे. फिर उन्हें बिहार बोर्ड के स्कूलों से ही मैट्रिक की परीक्षा देनी होगी. शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिन स्कूलों को सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की मान्यता नहीं है, लेकिन अगर वो बिहार राज्य से निबंधित है तो ऐसे छात्र को बिहार बोर्ड के स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा दे सकते है.
- नामांकन से अधिक जुर्माना देना पसंद करते है स्कूल
 मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 को लागू तो कर दिया गया, लेकिन अभी भी यह स्कूलों तक पहुंच नहीं पाया है. पटना शहर में कई बड़े स्कूल पिछले कुछ सालों में खुले है. लेकिन इसमें कोई भी स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेता है. दिल्ली पब्लिक स्कूल, बिड़ला स्कूल, त्रिभुवन स्कूल आदि जितने भी स्कूल है, वहां पर अभी तक एक भी नामांकन आरटीइ के तहत नहीं लिया गया है. सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार अधिकांश वहीं स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन ले रहे है जो शहर के छोटे और बिना मान्यता के चलने वाले स्कूल है.

पिछले तीन सालों का आरटीइ के तहत इतने रुपये हो गये खर्च
 2011-12 में खर्च राशि  -  2, 04, 13, 654 करोड़ रुपये
2012-13 में खर्च राशि   -  3,12,05,828 करोड़ रुपये
2013-14 में खर्च राशि  -   4,32,45, 678 करोड़ रुपये


कोट
जो स्कूल सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड से मान्यता प्राप्त है, वो हमारे पास आते ही नहीं है. एक तो अल्पसंख्यक के नाम पर मिसनरी ने खुद को इससे अलग कर रखा है. वहीं जो नामी और बड़े स्कूल है वो जुर्माना देना पसंद करते है, लेकिन जरूरतमंद गरीब बच्चों का नामांकन नहीं लेते है. हर नामी स्कूल हर साल जुर्माना भरने हमारे पास आते है. लेकिन आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेते है.
कौशल किशोर, कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्वशिक्षा अभियान


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स्कूलों की गलती की सजा सुनायेगा सुप्रीम कोर्ट

- आरटीइ में गलती की सजा जायेगी सीधे सुप्रीम कोर्ट के पास
- 2014 से होगी पूरी समीक्षा
- बिहार सरकार ने जारी किया शिकायत निवारण प्रक्रिया
संवाददाता, पटना
तीन साल बीत चुके है. अब अगर स्कूल में सही से शिक्षा का अधिकार कानून लागू नहीं हुआ तो इसकी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट के पास जायेगी. उसके बाद स्कूल का भविष्य सीधे सुप्रीम कोर्ट तय करेगा.  आरटीइ में तीन साल की छूट के बाद अब कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग की ओर से शुरूआत कर दी गयी है.  विभाग की ओर से आरटीइ को कड़ाई से लागू करने के लिए 2014 से प्रक्रिया में तेजी लायी जा रही है. राज्य के बाल अधिकार संरक्षण आयोग के माध्यम से पूरे प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों का आकलन किया जा रहा है. इसके तहत स्कूलों का रिकार्ड देखा जायेगा कि स्कूल में पिछले तीन साल में आरटीइ के तहत कितने नामांकन हुए. इसके अलावा 2014 में नामांकन कुल संख्या का कितना है. 30 जुलाई तक नामांकन का लिस्ट तैयार कर, 15 अगस्त
- 25 फीसदी से कम हुआ तो जुर्माना
2014 से तमाम स्कूलों का रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के पास जायेगा. इसके तहत क्लास वन में छात्र के कुल संख्या का 25 फीसदी नामांकन की प्रक्रिया की पूरी जांच होगी. स्कूल में क्लास वन में जितने छात्र है उसका 25 फीसदी नामांकन लिया गया है या नहीं, यह देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस पर स्कूल पर कार्रवाई कर सकता है. अगर स्कूल 25 फीसदी से कम नामांकन लेते हुए पकड़ में आयेंगे तो स्कूल पर 1 लाख से लेकर 10 लाख तक का जुर्माना लग सकता है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुसार सुप्रीम कोर्ट चाहे तो स्कूल का रजिस्ट्रेशन भी खत्म कर सकता है.
- विभाग ने बनाया शिकायत निवारण प्रक्रिया
बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत बच्चों की शिक्षा के अधिकार के संबंध में शिकायतों के लिए बिहार शिक्षा विभाग की ओर से शिकायत निवारण की शुरूआत की गयी है. इस निवारण के माध्यम से एक प्रक्रिया शुरू की गयी है. अगर कोई स्कूल आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेता है तो इस निवारण प्रक्रिया के माध्यम से अभिभावक विभाग के पास शिकायत कर सकते है. इस शिकायत के बाद स्कूल पर कार्रवाई की जायेगी. इसके लिए विभाग ने 5 स्तर पर प्रक्रिया निभायी जायेगी. इसमें स्थानीय प्राधिकार, शिकायत प्राप्ति स्थल, शिकायत पंजी, शिकायत दाखिल करना एवं निष्पादन की प्रक्रिया और प्रखंड एवं जिला स्तर पर शिक्षा संवाद का आयोजन करना आवश्यक है.
स्थानीय प्राधिकार   - ग्राम पंचायत तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति को तथा नगर निगम, नगर परिषद एवं नगर पंचायत की सशक्त स्थायी समिति को स्थानीय प्राधिकार घोषित किया गया है. ग्राम पंचायत की शिक्षा समिति प्राथमिक विद्यालय तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति मध्य विद्यालय के लिए स्थानीय प्राधिकार घोषित है.
शिकायत प्राप्ति स्थल  - ग्राम पंचायत तथा पंचायत समिति की शिक्षा समिति तथा नगर निकाय की शिक्षा सशक्त स्थायी समिति के कार्यालय स्थल पर शिक्षा के अधिकार संबंधित शिकायत प्राप्त किया जायेगा. इसके लिए स्थानीय प्राधिकार के द्वारा प्राप्तकर्ता का नाम एवं पदनाम घोषित किया जायेगा. स्थानीय प्राधिकार का यह दायित्व होगा कि  इसकी जानकारी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में आम लोगों को दे.
शिकायत पंजी  - स्थानीय प्राधिकार की शिक्षा समिति एवं सशक्त स्थायी समिति के कार्यालय में शिकायत पत्रों की प्राप्ति हेतु एक शिकायत पंजी भेजी जायेगी. इस शिकायत पंजी में दर्ज शिकायत को शिकायत कर्ता के पास तिथि के साथ रसीद दी जायेगी.
शिकायत दाखिल करना एंव निष्पादन की प्रक्रिया - शिकायत दर्ज करने के बाद शिकायतों की एक सूची तैयार की जायेगी. प्रत्येक शिकायत के संबंध में कार्रवाई सक्षम प्राधिकार तथा अपील हेतु अपीलीय प्राधिकार के पास जायेगा. शिकायत प्राप्ति के 7 दिनों के अंदर स्थानीय प्राधिकार द्वारा शिकायत का निष्पादन किया जायेगा. अगर वो निष्पादन नहीं कर पायेगे तो उसे सक्षम प्राधिकार के पास भेज दिया जायेगा. सक्षम प्राधिकार शिकायत को 30 दिनों के अंदर निष्पादन करेंगे.
प्रखंड एवं जिला स्तर पर शिक्षा संवाद का आयोजन - आरटीइ के तहत अब आम लोगों को भी जोड़ने का प्रयास किया जायेगा. प्राप्त शिकायतों के निष्पादन हेतु प्रखंड एवं जिला स्तर पर प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को एक शिक्षा संवाद का आयोजन किया जायेगा. इसमें राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के राज्य इकाई के द्वारा सहयोग दिया जायेगा.

कोट
सुप्रीम कोर्ट के आरटीइ को लागू करने के लिए तीन सालों की सुविधा तमाम प्राइवेट स्कूलों को दिया था. इसके लिए स्कूल तीन सालों में आरटीइ को समझ कर इसे अपने यहां लागू करेंगे. यह तीन साल 2013 में पूरा हो गया है. इस कारण 2014 से इस पर पूरी गंभीरता से हम कार्य कर रहे है. अगस्त में इसे पूरा कर सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट भेंजेंगे.
निशा झा, अध्यक्ष, बाल संरक्षण अधिकार आयोग

Sunday, March 1, 2015

दूसरों के लिए जीना ही तो जीना है

दूसरों के लिए जीना ही तो जीना है

- दोनों पांव से विकलांग प्रो. सतीश, पर शिक्षक की मिसाल कर रहे पेश
- खुद पर डिपेंड प्रो. सतीश बन रहे दूसरों के मददगार
संवाददाता, पटना
भगवान जब भी किसी स्पेशल इंसान को पैदा करता है तो उसके अंदर एक जज्बात और हिम्मत इतना दे देता है कि वो फिर आगे की बढ़ता जाता है. पीछे मुड़ कर नहीं देखता है. कुछ ऐसी ही सोच के है प्रो. सतीश कुमार. पटना विवि के इतिहास विभाग मे लेर के पद पर आसीन प्रो. सतीश कुमार अपने दोनों ही पांव से विकलांग है. बचपन से लेकर अभी तक कभी भी वो किसी पर डिपेंड नहीं रहें. हमेशा खुद आगे बढ़ते गये. कभी किसी की मदद नहीं ली, बस जो सोचा वो किया और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते चले गये. प्रो. सतीश की मजबूरी कभी उनकी सफलता में रूकावट नहीं बना. शिक्षक दिवस पर प्रो.सतीश ने अपनी जिंदगी की कई चीजों को हमने शेयर किया.
- निराशा से नहीं आशा से बढ़ते गये आगे
निराशा कभी उन्हें छू नहीं पायी. हर मुश्किलों का सामना उन्होंने आशावादी बन कर किया. हाई स्कूल तक की पढ़ाई गांव में किया. इंटर से एमए तक की पढ़ाई मुजफ्फरपुर से करने के बाद वो पटना आ गये. प्रो. सतीश ने बताया कि परिवार की स्थिति सही नहीं थी. इस कारण मुङो अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए ट्यूशन करना पड़ा. मै घरों में जाकर ट्यूशन करता था. उससे जो पैसे मिलते थे. उससे अपनी पढ़ाई पूरी करता रहा. सरकार की ओर से विकलांगों को मिलने वाली सुविधाओं से अंजान प्रो. सतीश को कभी भी कोई अधिकार नहीं मिला.
- एक अच्छा इंसान पैदा करने का है मिशन
प्रो. सतीश की इच्छा प्रशासनिक सेवा में जाने का था. उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी भी की थी. लेकिन सफलता नहीं मिली. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. अपना लक्ष्य शिक्षण कार्य की ओर ले कर बढ़े. 10 सालों से पटना विवि में इतिहास के शिक्षक के रूप मे कार्यरत प्रो. सतीश ने बताया कि इस ओर आने का मेरा मकसद अपने हर बैच से अधिक से अधिक अच्छा इंसान पैदा करना है. आज हमारे समाज में सबसे अधिक वैेंकेंसी अच्छे इंसान की है. ऐसे में मेरा मिशन यहीं है कि हर साल अपने बैच से अच्छा इंसान बनाने में मदद करूं.
- दोस्त विगन राम का समर्पण आज भी है याद
मेरी सफलता के पीछे मेरा बचपन का दोस्त विगन राम का विशेष योगदान रहा है. आज मुङो वो बहुत ही याद आ रहा है. मेरा गांव बाढ़ ग्रस्त इलाके में आता है. इससे बरसात के दिनों में मेरा स्कूल जाना मुश्किल हो जाता था. ऐसे में मेरा दोस्त विगन राम मुङो अपनी साइकिल पर बैठा स्कूल ले जाता था. एक दिन बाढ़ का पानी अधिक होने के कारण सड़क कट गया था. ऐसे में साइकिल भी जाने का रास्ता बंद हो गया. हम लोग स्कूल से लौट रहे थे. हम तीन लोग थे. मै साइकिल की पीछे कैरियर पर बैठा था. मैने उनके साइकिल से उतर कर पानी तैर कर पार करने को कहा. लेकिन उन दोंनों से मुङो साइकिल से उतरने नहीं दिया. मेरा दोस्त विगन राम खुाद पीठ के बल लेट गया और उस पर से दूसरा दोस्त साइकिल को पार किया. आज भी मुङो वह दिन याद आता है तो रोंगटे खड़े हो जाते है. यह पल आज भी मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा पल है.
- 9 से 10 घंटे गुजरती है किताबो की बीच
प्रो. सतीश का हर दिन का दिनचर्या सुबह पढ़ाई से शुरू होता है और रात में पढ़ाई से समाप्त होता है. हर दिन प्रो. सतीश 9 से 10 घंटें की पढ़ाई करते है. उन्होंने बताया कि सुबह तीन घंटे मै पढ़ कर ही घर से निकलता हूं. मै बिना पढ़े नहीं रह सकता हूं. इस कारण सुबह, दिन में और रात में भी तीन घंटें की पढ़ाई करता हूं. इसमें इतिहास के साथ साहित्य की पुस्तकें भी शामिल होते है. शिक्षक दिवस को लेकर प्रो. सतीश ने बताया कि आज शिक्षक की महता गिरती जा रही है. समाज में विद्वान शिक्षकों की कमी नहीं है. लेकिन आज इज्जत कम होती जा रही है. मेरा सपना है कि शिक्षकों के इस कमी को पूरा करें.

3 september 2014 prabhat khabar 

2015 की परीक्षा की तैयारी में जुटा सीबीएसइ, टीचर्स की मांगी गयी डाटा बैंक

2015 की परीक्षा की तैयारी में जुटा सीबीएसइ, टीचर्स की मांगी गयी डाटा बैंक

- प्रिंसिपल के साथ तमाम टीचर्स की मांगी गयी तमाम जानकारी
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों से प्रिंसिपल के साथ वाइस प्रिंसिपल और टीचर्स की लिस्ट मांगी है. इस लिस्ट के आधार  बोर्ड की ओर से आंसर कॉपी इवैल्यूशन में टीचर्स को लगाया जायेगा. बोर्ड के अनुसार तमाम स्कूलों को ऑन लाइन ही सारी जानकारी भेजनी है. इसके लिए स्कूल को सीबीएसइ वेबसाइट पर जाकर यूजर आइडी और स्कूल का पासवर्ड देना होगा. उसके बाद वो स्कूल बोर्ड से लॉगिंग हो जायेगा. फिर सारी जानकारी उसमें भरी जायेगी. इसमें वो स्कूल अपने आप छट जायेंगे जिन्हें सीबीएसइ की मान्यता नहीं मिली हुई है. क्योंकि इसमें वहीं स्कूल लॉगिंग हो पायेगा जिनके पास सीबीएसइ का यूजर आइडी और पासवर्ड होगा.
- बोर्ड तैयार करेगा कि कौन टीचर होंगे इवैल्यूएशन में शामिल
सीबीएसइ ने समेटिव असेसमेंट के साथ बोर्ड परीक्षा की भी तैयारी शुरू कर दी है. बेहतर शिक्षक ही आंसर कॉपी इवैल्यूएशन में शामिल हो, इसके लिए बोर्ड ने तमाम स्कूलों से टीचर्स के बारे में तमाम जानकारी मांगी है. इसमें स्कूल के प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल भी शामिल होंगे. बोर्ड के अनुसार इस डाटा बैंक के होने से आंसर कॉपी इवैल्यूएशन में अब बोर्ड की तय करेगा कि कौन टीचर इवैल्यूएशन में शामिल होंगे. अब बोर्ड की ओर से स्कूलों को लिस्ट भेजा जायेगा कि कौन टीचर किस स्कूल में जाकर इवैल्यूएशन में शामिल होंगे. सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों से जल्द से जल्द ऑन लाइन सारी जानकारी भेजने को कहा है.

ये सारी चीजें होगी डाटा बैंक में
- प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल और तमाम टीचर्स का नाम
- टीचर्स का क्वालिफिकेशन
- स्कूल में उनके पद
- कितने साल से वो स्कूल को योगदान दे रहे है
- किस विषय के वो शिक्षक है
- किस क्लास में वो पढ़ाते है
- टीचर का एड्रेस और पर्सनल कॉटैक्ट नंबर

कोट
बोर्ड परीक्षा के कॉपी का इवैल्यूशन सही से हो इसके लिए सीबीएसइ टीचर्स का डाटा बेस तैयार कर रहा है. इस डाटा बेस के आधार पर बोर्ड टीचर्स को उनके योगदान पर अवार्ड भी देता है. इसमें स्कूल को अपने स्तर से तमाम जानकारी बोर्ड को भेजना है.
सीबी सिंह, सचिव,  पाटलिपुत्र सहोदया

3 september 2014 prabhat khabar patna 

पटना के स्कूलों में भी आ रहे रैंगिग के मामले

पटना के स्कूलों में भी आ रहे रैंगिग के मामले

- बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास पहुंचते है अभिभावक
- सीबीएसइ स्कूलों में भी हो कॉलेज की तरह एंटी रैंगिग सेल
संवाददाता, पटना
राहुल पटना के एक फेमस स्कूल में 11वीं में नामांकन लिया. नामांकन के कुछ दिनों के बाद उसके सीनियर उसे तंग करने लगे. कभी पढ़ाई को लेकर परेशान करते तो कभी गाली देकर अपना पर्सनल काम करवाते थे. राहुल स्कूल जाने से कतराने लगा. वो चूपचाप रहने लगा. डर से अभिभावक को कुछ नहीं बताता था. एक दिन स्कूल से आने के बाद राहुल ने दूसरे दिन से स्कूल जाने से साफ मना कर दिया. कई बार पूछे जाने पर उसके अभिभावक को सारी बातें बतायी. सीनियर उसे किस तरह तंग करते है. फिर अभिभावक उसे लेकर बाल अधिकार संरक्षण आयोग पहुंचे. आयोग की ओर से स्कूल को नोटिस गया. फिर मामला शांत हुआ. बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास ऐसे कई स्कूलों के मामले है जहां पर जूनियर को सीनियर तंग करते है. उन्हे गाली देकर बुलाते है. हाल में ग्वालियर में हुई घटना को लेकर बोडिंग स्कूलों के साथ डे स्कूलों में भी एंटी रैंगिग सेल को लेकर चर्चाएं जोरों पर है. कई राज्य के स्कूलों ने अब यह मांग करना शुरू कर दिया है. खासकर प्लस टू लेवल के स्कूलों में चोरी छिपे रैंगिग आदि की घटनाएं घटती है.
- स्कूल के पास नहीं है कोई अधिकार
बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास तो स्टूडेंट्स पहुंच जाते है. उनकी काउंसेलिंग भी हो जाती है. लेकिन उसके आगे स्कूल कुछ नही कर पाता है. क्योंकि स्कूल के पास कोई प्रूव नही होता है. ऐसे में ऐसे छात्र को स्कूल से निकालने का भी पावर अभी स्कूल के पास नहीं है. अगर स्टूडेंट्स के बीच आपसी लड़ाई या मारपीट होती है तो स्कूल कुछ नहीं कर पाता है. एक स्कूल के प्रिसिंपल ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि 11वीं में जो स्टूडेंट्स नामांकन लेते है. उसे सीनियर स्टूडेट्स अधिक तंग करते है. बार-बार उसे बेइज्जत करना. बात-बात पर उसे वेबकुफ बनाने जैसी घटनाएं स्कूल कैंपस में होता है. ऐसे स्टूडेंट्स इतने डरे रहते है कि प्रिंसिपल के पास शिकायत भी नहीं कर पाते है. क्योंकि उन्हें यह भी धमकाया जाता है कि अगर वो प्रिंसिपल से शिकायत करेंगे तो उन्हें स्कूल के बाहर मार पड़ेगी. वहीं एक प्रिंसिपल ने बताया कि न्यू सेशन के समय तो हमें काफी सतर्क रहना पड़ता है. हमें किसी तरह का पावर नहीं है. अगर बोर्ड की ओर से एंटी रैगिग सेल स्कूल में होगा तो ऐसा काम करने से पहले स्टूडेंट्स दस बार सोंचेंगे.

कोट
जूनियर से सीनियर की प्रताड़ना के केस कई बार हमारे पास आये हैं. हम स्टूडेंट्स की काउंसेलिंग कर उसे स्कूल दुबारा भेजते है. उसके बाद स्कूल को इसकी जानकारी भी देते है. लेकिन हम कुछ अधिक नहीं कर पाते. अगर इसके लिए स्कूल के लिए काम करने वाली बॉडी को पहल करनी चाहिए. एंटी रैंगिग सेल हो तो इस तरह की घटना पर लगाम लगेगा.
निशा झा, अध्यक्ष, बाल अधिकार संरक्षण आयोग

हमने सीबीएसइ से मांग की है कि जल्द से जल्द स्कूलों में भी एंटी रैंगिग सेल बनाया जायें. क्योंकि आये दिन स्कूलों में भी छात्रों के आपसी मतभेद क मामले आते है. जूनियर को सीनियर काफी परेशान करते है. स्कूल के नॉलेज मे बात आत ेही उस पर स्कूल कुछ कड़ी कार्रवाई कर सकेगा. ऐसे छात्र को स्कूल से निकाल दिया जायें. इससे बांकी दूसरे छात्रों को डर लगेगा.
डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार पब्लिक पैरेंट्स चिल्ड्रेन एसोसिएशन

हमारे पास अगर कोई केस आये तो हम इस पर विचार कर सकते है. हम भी इस बात को मानते है कि स्कूलों में इस तरह की चीजें होती है. लेकिन जब तक हमारे पास अभिभावक नहीं आयेगे तब तक हम कोई कार्रवाई नहीं कर सकते है. अभिभावक या स्टूडेंट्स को अपनी बातें खुल कर बोलना चाहिए. एंटी रैंगिग सेल अब स्कूलो की जरूरत बनती जा रही है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया

3 septemer 2014 prabhat khabar patna 

पटना के स्कूलों में भी आ रहे रैंगिग के मामले

पटना के स्कूलों में भी आ रहे रैंगिग के मामले

- बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास पहुंचते है अभिभावक
- सीबीएसइ स्कूलों में भी हो कॉलेज की तरह एंटी रैंगिग सेल
संवाददाता, पटना
राहुल पटना के एक फेमस स्कूल में 11वीं में नामांकन लिया. नामांकन के कुछ दिनों के बाद उसके सीनियर उसे तंग करने लगे. कभी पढ़ाई को लेकर परेशान करते तो कभी गाली देकर अपना पर्सनल काम करवाते थे. राहुल स्कूल जाने से कतराने लगा. वो चूपचाप रहने लगा. डर से अभिभावक को कुछ नहीं बताता था. एक दिन स्कूल से आने के बाद राहुल ने दूसरे दिन से स्कूल जाने से साफ मना कर दिया. कई बार पूछे जाने पर उसके अभिभावक को सारी बातें बतायी. सीनियर उसे किस तरह तंग करते है. फिर अभिभावक उसे लेकर बाल अधिकार संरक्षण आयोग पहुंचे. आयोग की ओर से स्कूल को नोटिस गया. फिर मामला शांत हुआ. बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास ऐसे कई स्कूलों के मामले है जहां पर जूनियर को सीनियर तंग करते है. उन्हे गाली देकर बुलाते है. हाल में ग्वालियर में हुई घटना को लेकर बोडिंग स्कूलों के साथ डे स्कूलों में भी एंटी रैंगिग सेल को लेकर चर्चाएं जोरों पर है. कई राज्य के स्कूलों ने अब यह मांग करना शुरू कर दिया है. खासकर प्लस टू लेवल के स्कूलों में चोरी छिपे रैंगिग आदि की घटनाएं घटती है.
- स्कूल के पास नहीं है कोई अधिकार
बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास तो स्टूडेंट्स पहुंच जाते है. उनकी काउंसेलिंग भी हो जाती है. लेकिन उसके आगे स्कूल कुछ नही कर पाता है. क्योंकि स्कूल के पास कोई प्रूव नही होता है. ऐसे में ऐसे छात्र को स्कूल से निकालने का भी पावर अभी स्कूल के पास नहीं है. अगर स्टूडेंट्स के बीच आपसी लड़ाई या मारपीट होती है तो स्कूल कुछ नहीं कर पाता है. एक स्कूल के प्रिसिंपल ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि 11वीं में जो स्टूडेंट्स नामांकन लेते है. उसे सीनियर स्टूडेट्स अधिक तंग करते है. बार-बार उसे बेइज्जत करना. बात-बात पर उसे वेबकुफ बनाने जैसी घटनाएं स्कूल कैंपस में होता है. ऐसे स्टूडेंट्स इतने डरे रहते है कि प्रिंसिपल के पास शिकायत भी नहीं कर पाते है. क्योंकि उन्हें यह भी धमकाया जाता है कि अगर वो प्रिंसिपल से शिकायत करेंगे तो उन्हें स्कूल के बाहर मार पड़ेगी. वहीं एक प्रिंसिपल ने बताया कि न्यू सेशन के समय तो हमें काफी सतर्क रहना पड़ता है. हमें किसी तरह का पावर नहीं है. अगर बोर्ड की ओर से एंटी रैगिग सेल स्कूल में होगा तो ऐसा काम करने से पहले स्टूडेंट्स दस बार सोंचेंगे.

कोट
जूनियर से सीनियर की प्रताड़ना के केस कई बार हमारे पास आये हैं. हम स्टूडेंट्स की काउंसेलिंग कर उसे स्कूल दुबारा भेजते है. उसके बाद स्कूल को इसकी जानकारी भी देते है. लेकिन हम कुछ अधिक नहीं कर पाते. अगर इसके लिए स्कूल के लिए काम करने वाली बॉडी को पहल करनी चाहिए. एंटी रैंगिग सेल हो तो इस तरह की घटना पर लगाम लगेगा.
निशा झा, अध्यक्ष, बाल अधिकार संरक्षण आयोग

हमने सीबीएसइ से मांग की है कि जल्द से जल्द स्कूलों में भी एंटी रैंगिग सेल बनाया जायें. क्योंकि आये दिन स्कूलों में भी छात्रों के आपसी मतभेद क मामले आते है. जूनियर को सीनियर काफी परेशान करते है. स्कूल के नॉलेज मे बात आत ेही उस पर स्कूल कुछ कड़ी कार्रवाई कर सकेगा. ऐसे छात्र को स्कूल से निकाल दिया जायें. इससे बांकी दूसरे छात्रों को डर लगेगा.
डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार पब्लिक पैरेंट्स चिल्ड्रेन एसोसिएशन

हमारे पास अगर कोई केस आये तो हम इस पर विचार कर सकते है. हम भी इस बात को मानते है कि स्कूलों में इस तरह की चीजें होती है. लेकिन जब तक हमारे पास अभिभावक नहीं आयेगे तब तक हम कोई कार्रवाई नहीं कर सकते है. अभिभावक या स्टूडेंट्स को अपनी बातें खुल कर बोलना चाहिए. एंटी रैंगिग सेल अब स्कूलो की जरूरत बनती जा रही है.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया

1 september 2014 prabhat khabar patna 

स्टडी टूर से पहले स्टूडेंट का हो हेल्थ इंश्योरेंस

स्टडी टूर से पहले स्टूडेंट का हो हेल्थ इंश्योरेंस

- सीबीएसइ ने दिया स्कूलों को स्टडी टूर का नयी गाइड लाइन
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ ने एजुकेशन (स्टडी) टूर पर जाने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस को जरूरी कर दिया है. स्टडी टूर पर जाने से पहले स्टूडेंट के हेल्थ का इंश्योरेंस करवाना होगा. इसका एक कॉपी स्कूल को सीबीएसइ के पास भेजना होगा. स्टूडेट्स की सुरक्षा को देखते हुए सीबीएसइ ने एजुकेशन टूर के लिए नयी गाइड लाइन जारी किया है. गाइड लाइन के अनुसार स्टूडेंट्स को अब मस्ती नहीं एजुकेशन टूर पर पढ़ाई करने जाना होगा. सीबीएसइ की ओर से 11 गाइड लाइन जारी किया गया है जिसे तमाम स्कूलो को भेज दिया गया है. सीबीएसइ ने सह गाइड लाइन जून में व्यास नदी में 24 इंजीनियरिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स के बह जाने के कारण किया है. स्टूडेंट्स की सुरक्षा के लिए यह किया गया है.
ये है गाइड लाइन
- एजुकेशन टू स्टूडेंट्स के सिलेबस के अनुसार होगा. प्रिंसिपल यह तय करेंगे कि जिस कोर्स को बच्चे कर रहे है उसी से संबंधित प्रोजेक्ट के लिए टूर पर जायें
- अभिभावक की मंजूरी जरूरी है
- टूर पर जाने से पहले स्टूडेंट, अभिभावक और टीचर्स के लिए  एक ओरिएंटेशन सेशन चलाया जायेगा. जिसमें स्टूडेंट्स को टूर से जुड़ी सारी जानकारी दी जायेगी
- स्टूडेंट्स के साथ उस स्कूल के सीनियर टीचर और गल्र्स स्टूडेंट्स के लिए लेडी टीचर टूर पर जायेंगे
- टूर पर जाने वाले जगह के बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए
- एजूुकेशन टू पर जाने से पहले हर स्टूडेंट्स और सदस्य का हेल्थ इंश्योरेंस होना जरूरी है
- स्टूडेंट्स की सुरक्षा पर स्कूल का पूरा ध्यान होना चाहिए
- टूर पर जाने वले स्टूडेंट् के पास एक सिक्यूरिटी कार्ड होना चाहिए
- टूर पर जाने से पहले स्टूडेंट्स से लिखित आश्वासन लिया जाये कि हर नियम का पालन वो करेंगे
- 10 से ज्यादा मेंबर होने पर वहां के लोकल टूर ऑपरेटर का साथ जाना जरूरी है.
- समुद्री तट आदि पर टूर के लिए जाने पर वहां के डीएम को जानकारी देना होगा

30 october 2014 prabhat khabar patna 

स्कूलों में सीबीएसइ करेगा एफिलिएशन बाइ लॉज की जांच

स्कूलों में सीबीएसइ करेगा एफिलिएशन बाइ लॉज की जांच

- सीबीएसइ ने रेंडमली जांच के लिए बनायी टीम
- छठ बाद किसी भी स्कूल पहुंच सकती है टीम
संवाददाता, पटना
स्कूलों में नामांकन का आधार क्या है. अभी भी स्कूलों में बच्चों को पनिश किया जाता है. विकलांग बच्चों के लिए स्कूल में सुविधाएं क्या सब है. सेक्सुल हैरेसमेंट रोकने के लिए स्कूल ने क्या व्यवस्था कर रखा है. स्कूल में कंप्लेन बाक्स रखा है या नहीं. सीबीएसइ के एफिलिएशन बाइ लॉज के तहत ये सारे नियम होने के बावजूद अभी भी कई ऐसे स्कूल है जो इन चीजों को इग्नोर कर रहे है. फैसिलिटी के नाम पर स्कूल वाले स्टूडेंट से चार्ज तो लेते है, लेकिन सुविधाएं नहीं देते है. अब सीबीएसइ एफिलिएशन बाइलॉज को देखने के लिए उन स्कूलों की जांच करने जा रही है जहां पर बाइलॉज का उल्लंघन हो रहा है.
- छठ बाद शुरू होगी जांच प्रक्रिया
स्कूलों में हाइजिन की प्राब्लम, टॉयलेट की प्राब्लम, सैनिटेशन की सही एरेंजमेंट नहीं, साफ पानी नहीं मिलने से बच्चे का बीमार होना, बेहिसाब ट्यूशन फी, आये दिन कारपोरल पनिशमेंट देना आदि को लेकर सीबीएसइ के पास अभिभावक, स्टूडेंट्स, टीचर्स और लोकल पब्लिक ने लिखित शिकायत की है. इसको देखते हुए सीबीएसइ ने यह दुबारा निर्णय लिया है. इसके लिए बोर्ड की ओर से एक टीम बनायी गयी है. जिसमे सीबीएसइ के कर्मचारी को नियुक्त गया है. छठ बाद यह टीम किसी भी स्कूल में रेंडमली विजिट करेगी. इसमें उन तमाम प्वाइंट पर फोकस होगा जो सीबीएसइ के एफिलिएश बाइलॉज में आता है.
- स्कूलों में चल रहे है कोचिंग इंस्ट्रीच्यूट
स्कूल में 11वी और 12वीं की पढ़ाई को रेगुलर करने के लिए सीबीएसइ ने एक साल पहले ही स्कूलों को नोटिस दिया था कि स्कूल में कोचिंग इंस्ट्रीच्यूट को हटाया जायें. इसके बाद कई स्कूलों में तो कोचिंग हटाये गये, लेकिन अभी भी कई स्कूल है जहां पर कोचिंग चलाये जाते है. जिससे स्टूडेंट्स स्कूल की पढ़ाई कम और कांपिटिशन की तैयारी अधिक करते है. ऐसे में सीबीएसइ अपनी जांच प्रक्रिया में इस पर अधिक फोकस करेगा कि स्टूडेट्स का एटेंडेंस कोचिंग में अधिक है या स्कूल की क्लास करने पर अधिक है. स्कूल की एटेंडेंस बुक से इसकी जानकारी आसानी से मिलेगी.
- एक कैंपस एक स्कूल
सीबीएसइ ने जिस स्कूल को मान्यता दी है, स्कूल को वहीं पर सारे स्टूडेंट्स को शिक्षा देना है. स्कूल एक और कैंपस अनेक नहीं चला सकते है. अगर ऐसा कोई स्कूल करेगा तो उस स्कूल पर कार्रवाई होगी. इसके अलावा स्कूलों को अपना वेबसाइट भी डेवलप करना होगा. एक स्कूल का एक ही वेबसाइट होगा.

सीबीएसइ ने स्कूलों पर उठाये ये सवाल
- सीबीएसइ के बाइलॉज की स्कूल अनदेखी करता है
- कई स्कूल में टीचर को सही पेंमेंट और बाकी सुविधाएं सही नहीं मिलता है
- स्कूल के एडमिशन के समय बच्चों के साथ भेदभाव रखी जाती है
- नामांकन में मोटी रकम डोनेशन के तौर पर मांगी जाती है
- अभी भी स्कूलों में कारपोरल पनिशमेंट दिया जाता है
- विकलांग स्टूडेंट्स के लिए स्कूल में कोई सुविधा नहीं दी जाती है
- स्कूल कैंपस में सेक्सुल हेरेसमेंट के केस को नहीं देखा जाता है. सेक्सुल हेरेसमेंट केस को स्कूल छुपाने की कोशिश करता है
- स्कूल में साफ पानी बच्चों नहीं दिया जाता है
- स्टूडेंट की संख्या के हिसाब से टॉयलेट नहीं है. इसके अलावा सैनिटेशन भी स्कूलो में एक बड़ा प्राब्लम बन रहा है.

सीबीएसइ के कुछ एफिलिएशन बाइलॉज
- डोनेशन फी नहीं लेना
- स्कूल को कामर्शिलय नहीं बनाया जायेगा
- टीचर को कारपोरल पनिशमेंट नहीं देने की जानकारी दी जायें. अगर टीचर ऐसी गलती करें तो उन पर कार्रवाई करें
-  स्कूल को हर क्लास में नामांकन लेना है. हर स्कूल को शिक्षा के अधिकार के तहत 25 फीसदी नामांकन लेना होगा
- टीचर और स्कूल स्टॉफ को सैलरी और सर्विस चार्ज देना है
- सेक्सुल हेरेसमेंट कमिटी हर स्कूलों को बनाना है
- 9वीं से 12वीं तक स्टूडेंट्स की लिस्ट स्कूलों को बोर्ड के पास भेजना है
- स्कूल कैंपस में कोचिंग इंस्ट्रीच्यूट नहीं चल सकता है
-  विकलांग बच्चों की मदद के लिए स्कूल में सुविधा होनी चाहिए
- स्कूल में हेल्थ, सैनिटेशन और फायर सेफ्टी सही हो
- स्कूल में आये दिन टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया जायें
- स्कूल में हेल्थ वेलनेस टीचर होना चाहिए
- बच्चों को एनिमल प्रोटेक्शन एक्ट के प्रति जागरूक करना है

28 october 2014 prabhat khabar patna 

18 स्कूलों को सीबीएसइ ने किया एलओसी से बाहर

18 स्कूलों को सीबीएसइ ने किया एलओसी से बाहर

- 9वीं और 11वीं के रजिस्ट्रेशन से बाहर, 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षा फार्म से भी किया गया अलग
- सीबीएसइ के रीजनल ऑफिस में पहुंच रहे स्कूल वाले
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ ने उन स्कूलों को रजिस्ट्रेशन और बोर्ड परीक्षा के फार्म भरने से अलग कर दिया है जिनका एफिलिएशन एक साल पहले समाप्त कर दिया गया था. उन स्कूलों को बोर्ड की ओर से एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) का लिंक नहीं भेजा गया है. इससे उन स्कूलों के बीच अफरातफरी का माहौल बन गया है. क्योंकि इन स्कूलों में 9वीं और 11वीं के स्टूडेंट्स का ना तो रजिस्ट्रेशन हो पाया है और ना ही 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट 2015 की सीबीएसइ बोर्ड परीक्षा में शामिल हो पायेंगे. बोर्ड की ओर से इस बार पूरी तरह से ऑन लाइन फार्म भरने को कहा गया है. इसके लिए बोर्ड की ओर से हर मानयता प्राप्त स्कूल को एलओसी का लिंक भेजा गया है.  जिससे वो स्कूल खुद से खुद छट गये है जिन्हें सीबीएसइ ने अपने लिस्ट से बाहर कर दिया है. पटना रिजन से 18 स्कूलों की मान्यता तो समाप्त कर दिया गया था. इसमें बिहार से 16 स्कूल और झारखंड से दो स्कूल शामिल है, जिनकी मान्यता समाप्त कर दी गयी है.
- फार्म भराने की तिथि निकल गयी, अब हो रहा जुगाड़
सीबीएसइ की ओर से रजिस्ट्रेशन फार्म और परीक्षा फार्म के लिए 10 अक्तूबर और 15 अक्तूबर तक की तिथि तय की गयी थी. इसके बाद विलंब शुल्क के साथ रजिस्ट्रेशन के लिए 30 अक्तूबर और परीक्षा फार्म के लिए 15 नवंबर तक की तिथि दी गयी है. अब ये स्कूल सीबीएसइ के पास विलंब शुल्क के साथ फार्म भराने की मांग कर रहे है. सीबीएसइ के अनुसार 9वीं और 11वीं के रजिस्ट्रेशन फार्म और 10वीं और 12वीं के परीक्षा फार्म भरने की तिथि बिना विलंब दंड (2 सौ रुपये) के समाप्त हो चुकी है. अब 30 अक्तूबर तक विलंब दंड के साथ रजिस्ट्रेशन करवा सकते है. लेकिन जब तक सीबीएसइ द्वारा उन स्कूलों के लिए एलओसी की लिंक नहीं दी जायेगी तब तक इन स्कूलों के स्टूडेंट्स को फार्म नहीं भरने दिया जायेगा.
- 5 से 6 हजार स्टूडेंट्स का भविष्य अंधेरे में
स्कूलों की गलती की वजह से लगभग 5 से 6 हजार स्टूडेंट का भविष्य अंधेरे में लटक गया है. अब ये स्टूडेंट एक साल बाद ही किसी दूसरे स्कूल से फार्म भर सकेंगे. इन स्कूलों की मान्यता को बोर्ड ने एक साल पहले ही समाप्त कर दिया था. लेकिन इसकी जानकारी बोर्ड ने अभिभावकों को नहीं दिया और ना ही स्कूल ने स्टूडेंटस को दूसरे स्कूल में नामांकन करने की सलाह दी है. अब ये स्टूडेंट बोर्ड परीक्षा के शामिल होने का इंतजार कर रहे है. लेकिन इन्हें बोर्ड की ओर से रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फार्म नहीं भराये दिया जा रहा है. पटना रीजनल ऑफिस के सूत्रों के मुताबिक सीबीएसइ ने बस उन्हीं स्कूलों को फार्म भरने की अनुमति दी है जो सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त है.

ये है एलओसी
एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) के अंतर्गत बोर्ड के रजिस्टर्ड वो तमाम स्टूडेंट्स आयेंगे जो आगे की बोर्ड परीक्षा में शामिल होगा. इस लिस्ट में उसी स्टूडेंट को शामिल किया जाता है जो मान्यता प्राप्त स्कूल के स्टूडेंट होते है. स्कूलों की मनमानी और किस स्कूल में स्टूडेंट्स की संख्या कितनी है, इसे जानने के लिए बोर्ड ने इस 2014 से इसकी शुरुआत की है. बोर्ड की ओर से हर मान्यता प्राप्त स्कूल को एलओसी का लिंक दिया गया है. स्कूल वाले इस लिंक पर 9वीं और 11वीं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करेगा. इसी के आधार पर 10वीं और 12वीं बोर्ड में शामिल होने वाले स्टूडेंट बोर्ड परीक्षा का फार्म भरेंगे. एलओसी लिस्ट के अनुसार ही सीबीएसइ तमाम स्टूडेंट को इस बार से एडमिट कार्ड इश्यू करेंगी.  इसके अलावा एलओसी के माध्यम से बोर्ड स्टूडेंट्स से सीधे संपर्क में भी रहेगा.

पटना के ये सारे है स्कूल, जिनका एफिलिएशन सीबीएसइ ने कर दिया रदद
1. एवीएन इंगलिश स्कूल, नार्थ एसके पुरी, पटना. एफिलिएशन नंबर  - 330095
2. एवीएन स्कूल, राजीव नगर, पटना, एफिलिएशन नंबर  - 330237
3. डेनोबिली मिशन स्कूल, पहाड़ी, एफिलिएशन नंबर  - 330302
4. नेशनल कांवेंट हाई स्कूल, बीएम दास रोड, पटना. एफिलिएशन नंबर  - 330271
5. न्यू दिल्ली पब्लिक स्कूल, नार्थ एसके पुरी. एफिलिएशन नंबर  -  330126
6. पटना मुसलिम हाई स्कूल, बीएम दास रोड, पटना. एफिलिएशन नंबर  - 330067
7. प्लाज्मा पाथवेज स्कूल, परसा, पटना. एफिलिएशन नंबर  - 330387
8.स्कॉलर एवोर्ड स्कूल, फुलवारीसरीफ, पटना. एफिलिएशन नंबर  -  330197
9. शेरॉन पब्लिक स्कूल, रूपसपुर, बेली रोड. एफिलिएशन नंबर  - 330305
10. शेरउड स्कूल, राजीव नगर, पटना. एफिलिएश्न नंबर  -  330135
11. सिद्धू पब्लिक स्कूल, सम्पतचक, पटना. एफिलिएशन नंबर  -  330270
12. टी रजा हाई स्कूल, फुलवारी सरीफ, पटना. एफिलिएशन नंबर  - 330306

अन्य जिलों के भी है स्कूल शामिल
1. आर्य बाल शांति निकेतन, मुंगेर. एफिलिएशन नंबर  - 330229
2. गांधी शिक्षण संस्थान, शुभंकरपुर, दरभंगा. एफिलिएशन नंबर  - 330455
3. रामाश्रय रॉय पब्लिक स्कूल, बलभ्रदपुर, लहेरियासराय, दरभंगा. एफिलिएशन नंबर  - 330205
4. नालंदा विद्या मंदिर, महेश ऑटो सेंटर, नालंदा. एफिलिएशन नंबर  - 330320

झारखंड के ये है स्कूल
1. केंद्रीय विद्यालय, ढकरा, एनके एरिया, रांची. एफिलिएशन नंबर  - 3400009
2. केंद्रीय विद्यालय, भूरकुंडा, हजारीबाग. एफिलिएशन नंबर  -  3400027

कोट
मान्यता समाप्त करने के समय ही बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया था कि जिन स्टूडेंट का रजिस्ट्रेशन हो चुका है. उन्हें ही बस बोर्ड परीक्षा में बैठने का मौका दिया जायेगा. बांकी दूसरे क्लास के स्टूडेंट जब 9वीं में पहुंचेंगे ता उन्हें बोर्ड परीक्षा देने की अनुमति बोर्ड नहीं देगा. इस कारण स्कूल इस बात को अभिभावक को बता दे. जिससे समय रहते स्टूडेंट दूसरे स्कूल में नामांकन करवा ले.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी-कोऑडिनेटर, सीबीएसइ

22 october 2014 prabhat khabar patna 

पांच दिनों की दीपावली धनतेरस से होती है शुरू

पांच दिनों की दीपावली धनतेरस से होती है शुरू

- 21 से 25 अक्तूबर तक मनाया जायेगा दीपावली महोत्सव
- इस बार दीपावली पर बन रहा अद्भुत संयोग, तीन बड़े ग्रहों का योग है एक ही राशि में
संवाददाता, पटना
पांच दिनों का पर्व दीपावली मंगलवार से शुरू हो रहा है. धनतेरस से शुरू होकर यह पर्व भैया दूज और चित्रगुप्त भगवान के पूजा के साथ संपन्न होती है. पांच दिनों तक भगवान गणोश और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ अन्य कई भगवान की भी पूजा होती है. इस बार दीपावली महोत्सव 21 से 25 अक्तूबर तक चलेगा. इस बार धनतेरस, महावीर जयंती, गोवर्धन पूजा, भैया दूज और चित्रगुप्त उत्सव मनाया जायेगा. इस पांच दिनों तक हर दिन का अपना महत्व होता है. ज्योतिषों के अनुसार इस बार दीपावली के दिन कई अद्भुत योग बन रहे है . दीपावली पर शनि और गुरू, अपनी-अपनी राशि में स्थित रहेंगे. जबकि सूर्य नीच राशि में स्थित रहेगा. 18 अक्तूबर से सूर्य तुला राशि में है. इसके साथ दीपावली के दिन सूर्य, शनि और गुरु ग्रह एक ही राशि तुला राशि में रहेगा. तीनों ग्रह का यह संयोग 1954 के बाद इस दीपावली के दिन हो रहा है. ऐसा संयोग आगे 2041 में होगा. पंडित कुलानंद झा के अनुसार इस अद्भुत संयोग के कारण दीपावली के दिन सुबह से शुभ मुहरुत रहेगा.
- धनतेरस पर होती है भगवान धनवंतरी की पूजा
दीपावली की शुरुआत भगवान धनवंतरी की पूजा अर्चना से शुरू होती है. दीपावली के दो दिन 21 अक्तूबर को इस बार धनवंतरी (धनतेरस) पूजा होगा. एक मान्यता के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन के बाद भगवान धनवंतरी अमृत कलश निकाला था. इस दिन धन खरीदने का काफी महत्व है. कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन धनतेरस मनाया जाता है. इस दिन बर्तन, सोना आदि की खरीदारी की जाती है. इस दिन आयुर्वेद की पूजा की जाती है. ज्योतिष पंडित विनोद झा के अनुसार आयुर्वेद की उत्पति इसी दिन से मानी गयी है. इस दिन से ही घरों में दीया जलाना शुरू हो जाता है.
- छोटी दीपावली के साथ हनुमान जयंती
धनतेरस के एक दिन बाद और दीपावली से एक दिन पहले छोटी दीपावली मनायी जाती है. छोटी दीपावली के दिन ही भगवान हनुमान की जयंती समारोह भी मनाया जाता है. नरक चतुदर्शी नाम से प्रसिद्ध छोटी दीपावली के दिन शाम में गोधुली वेला के समय घर के बाहर यम दीप जलाया जाता है. गोबर के चौमुख दीये को घर के बाहर जलाने का विशेष महत्व है. इस दिन भी घरों को दीयों से सजाया जाता है. वहीं दूसरी ओर मंदिनों में हनुमान भगवान की जयंती मनायी जाती है. ज्योतिष शंभुनाथ झा ने बताया कि भगवान हनुमान का जन्म मेष लगन में गोधुली वेला में हुआ था. 22 अक्तूबर को छोटी दीपावली के साथ हनुमान जयंती मनाया जाता है.
- तीन मुहरुत में करें भगवान गणोश और मां लक्ष्मी की पूजा
इस बार दीपावली (23 अक्तूबर) के दिन तीन लगन हो रहा है. इस तीनों लगन में भगवान की पूजा का विशेष महत्व है. कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन दीपावली का पहला मुहरुत कुंभ लगन में है. यह लगन दोपहर 2.02 से 3.33 मिनट तक रहेगा. इस बीच दुकानों आदि में पूजा का विशेष महत्व है. दूसरा लगन वृष लगन का समय शाम 6.41 से 8.35 तक रहेगा. इस बीच घरों में पूजा करने का सही समय है. इसके बाद रात के 1.08 से 3.22 तक सिंग लगन हो रहा है. ज्योतिषों की माने तो यह तीनो ही लगन स्थिर होने के कारण सुख और शांति लायेगा. इसके अलावा इस बार गोधुली वेला 5.02 से 6.41 के बीच भी मां लक्ष्मी और भगवान गणोश की पूजा की जायेगी.
- गोवर्धन पूजा के दिन 56 भोग लगता है भगवान को
दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा होता है. इस दिन से शुक्ल पक्ष की भी शुरुआत हो जाती है. गोवर्धन पूजा के साथ अन्नपूर्णा देवी की भी पूजा की जाती है. इस दिन गाय की पूजा की जाती है. मंदिनों में खासकर कृष्ण मंदिरों में भगवान को 56 प्रकार का भोग लगाया जाता है. मथुरा आदि में यह पर्व काफी धुमधाम से मनाया जाता है. 24 अक्तूबर को मनाये जाने वाले इस उत्सव में गाय को भगवान मान कर उसे नये वस्त्र भी पहनाये जाते है.
- भाई को आशीर्वाद के रूप में दी जाती है गाली
दीपावली के तीसरे दिन यानी 25 अक्तूबर को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है. इस दिन भाई को गाली देने का महत्व है. एक मान्यता के अनुसार इस दिन भाई को गाली देना आशीर्वाद के रूप में माना जाता है. कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष द्वितीय तिथि को भाई दूज मनाया जाता है. ज्योतिषो की माने तो इस बार भाई दूज 25 अक्तूबर को पूरे दिन हो रहा है. 24 अक्तूबर के रात 3.26 मिनट से ही द्वितीय तिथि शुरू हो जायेगी. यह तिथि 25 अक्तूबर के रात के 3.21 मिनट तक चलेगा. इसके साथ इस दिन चित्रगुप्त भगवान की पूजा होती है. कलम और दावात की पूजा की जाती है.

19 october 2014 prabhat khabar patna 

जाति की केटेगरी ना पूछे स्कूल, होगी कार्रवाई

जाति की केटेगरी ना पूछे स्कूल, होगी कार्रवाई

- लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स (एलओसी) तैयार करने के लिए स्कूल पूछ रहे स्टूडेंट्स से जाति
- सीबीएसइ ने पटना के कई स्कूलों को दिया नोटिस और निर्देश
संवाददाता, पटना
किसी भी बच्चे से उसकी जाति नहीं पूछा जा सकता है. बच्चों की कोई जाति नहीं होती. ऐसा कर स्कूल शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन कर रहा है. उन स्कूलों को निर्देश दिया जाता है कि अगर बच्चों से उनकी जाति पूछी जायेगी और इसकी शिकायत दुबारा अभिभावक का बोर्ड के पास आयेगा तो उस स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने दो दिनों पहले पटना के कई स्कूलों को नोटिस दिया है. जिसमें कहा गया है कि स्कूल द्वारा लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स (एलओसी) तैयार करने मे कई तरह की जानकारी मांगी जा रही है. उन जानकारी में बच्चों से उनकी जाति पूछी जाती है. बोर्ड द्वारा एलओसी के निर्देश के अनुसार बच्चों से उनकी एकेडेमिक जानकारी मांग कर भेजने को कहा गया था. बच्चों से उनकी जाति पूछने को नहीं कहा गया था. बोर्ड की ओर से उन स्कूलों को आगाह किया गया है कि अगर वो आगे ऐसा करेंगे तो उनके उपर कार्रवाई की जायेगी. ज्ञात हो कि बोर्ड की ओर से तमाम मान्यता प्राप्त स्कूलों को 9वीं से 12वीं तक के स्टूडेंट्स का एलओसी बनाने को कहा गया था.
- स्कूल की गलती के कारण बढ़ाया गया रजिस्ट्रेशन की तिथि
सारे स्कूलों से एलओसी की लिस्ट समय पर नहीं आने के कारण बोर्ड ने 9वीं और 11वीं के रजिस्ट्रेशन की तिथि भी बढ़ानी पड़ी . पहले 30 सितंबर तक रजिस्ट्रेशन होना था, लेकिन बाद में 10 दिन और इसे बढ़ाया गया. अब जब सारे स्कूलों से एलओसी की लिस्ट बोर्ड के पास आ गया है तो अधिकांश स्कूलों ने बच्चों की जाति की केटेगरी वाइज जानकारी एलओसी में दिया है. बोर्ड ने उन तमाम स्कूलों को नोटिस दिया है और साथ में निर्देश भी दिया है. बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार काफी संख्या में स्कूलों ने एलओसी में स्टूडेंट के जाति और उसके केटेगरी को भी क्लियर कर बोर्ड को भेजा है जो सरासर गलत है. इस कारण निर्देश दिये गये है. साथ में आगे ऐसा ना हो इसके लिए स्कूलों को नोटिस दिया गया है.
- बोर्ड करेगा सीधे स्टूडेंट्स से बात
सीबीएसइ द्वारा तीन महीने पहले तमाम स्कूलों को 9वीं से 12वीं तक के स्टूडेंट्स का लिस्ट तैयार करने को कहा गया था. लिस्ट तैयार करने के बाद उसे बोर्ड के पास हार्ड कॉपी के साथ साफ्ट कॉपी भी भेजना होगा. इस लिस्ट के माध्यम से बोर्ड सीधे स्टूडेंट्स के संपर्क में आयेगा. स्टूडेंट्स संबंधी जानकारी सीधे बोर्ड स्टूडेंट्स को उपलब्ध करवायेगा. इसके अलावा एलओसी के माध्यम से मार्क्‍स सीट, सर्टिफिकेट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट बनवाने में मदद मिलेगी. बोर्ड के पास यह लिस्ट होने से कोई भी दूसरा स्कूल बाहर के स्टूडेंट्स को परीक्षा फार्म नहीं भरवा सकता है. साथ में किस स्कूल से कौन स्टूडेंट परीक्षा के लिए फार्म भरेगा, इसकी पूरी जानकारी बोर्ड के पास उपलब्ध रहेगा.
 एलओसी में देनी है इनकी जानकारी
- स्टूडेंट का नाम
- माता पिता का नाम
- विषय संबंधी

कोट
हर स्कूलों को लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स मांगा गया है. इसमें स्टूडेंट की बेसिक जानकारी देनी थी. इस लिस्ट के माध्यम से स्टूडेंट से बोर्ड सीधे संपर्क कर सकेगा. आने वाले दिनों में कई तरह की जानकारी बोर्ड सीधे स्टूडेंट्स को उपलब्ध करवायेगा. इसके लिए एलओसी तैयार किया जा रहा है.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ
 18 october 2014 prabhat khabar patna 

बिना पैसे कैसे हो पढ़ाई

बिना पैसे कैसे हो पढ़ाई

- राइट टू एजुकेशन के तहत नामांकन तो हुआ, नहीं मिला अब तक पैसे
- कई स्कूलों के चेक हो गये बाउंस
संवाददाता, पटना
शिक्षा का अधिकार के तहत नामांकन तो ले लिया, लेकिन इसके लिए मिलने वाले पैसे अभी तक नहीं मिले. पिछले सात महीने से प्राइवेट स्कूल वाले आरटीइ के तहत मिलने वाले पैसे का इंतजार कर रहे थे. अब जब सितंबर में पैसे मिले तो वो भी उनके किसी काम का नहीं हुआ. क्योंकि विभाग द्वारा चेक पर पहले 3 मार्च 2014 का साइन कर भेज दिया गया. उसके बाद उसी चेक पर पुराने तिथि को काट कर नीचे 8 सितंबर 2014 कर दिया गया. कट किया गया चेक जब सितंबर की तिथि लगा कर स्कूलों को भेजा गया और स्कूल उसे बैंक भेजी तो उसे बैंक ने लौटा दिया. बैंक ने स्कूल वालों को यह कह कर चेक लौटा दिया कि चेक पर सही जानकारी नहीं है. तिथि को कट कर नयी तिथि लिख दी गयी है. अब स्कूल वाले इस चेक को जिला शिक्षा कार्यालय में लौटाने की सोच रहे है.
- अब कैसे करें 25 फीसदी की फी बंदोबस्ती
जिन स्कूलों में 25 फीसदी शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लिया गया है. अब उन स्कूलों के पास मुश्किलें आ रही है इन बच्चों के फी की बंदोबस्ती कैसे होगा. सात महीने तो इंतजार में ही निकल गये. लेकिन अब जब चेक ही काम नहीं कर रहा है तो इसे दुबारा मिलने की उम्मीद ही काफी कम हो गयी है. एक स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि आरटीइ के तहत नामांकन लेने वाले बच्चे को वो सारी सुविधाएं दी जाती है जो अन्य बच्चों को दी जाती हेै. हर बच्चे के उपर स्कूल का अपना खर्च भी होता है. ऐसे में 25 फीसदी बच्चे के उपर पूरा एकेडेमिक खर्च करना स्कूल के लिए संभव नहीं हो पाता है.
- मार्च में नामांकन लेकिन पैसे मिलते कई महीने बाद
आरटीइ के तहत नामांकन तो समय पर हो जाता है, लेकिन इसके पैसे मिलने में कई महीने लग जाते है. इस बीच बच्चे को मुफ्त में ही शिक्षा दी जाती है. एक स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार मार्च में कुल 25 फीसदी बच्चे का नामांकन क्लास वन में कर लिया गया. लेकिन अभी तक विभाग की ओर से पैसे निर्गत नहीं किये गये है. इस बीच जिला शिक्षा पदाधिकारी को रिमाइंडर भी भेजा गया है. लेकिन वहां से बस आश्वासन ही मिलता है. हर साल जुलाई और अगस्त तक आरटीइ के तहत पैसे मिल जाते थे. लेकिन इस बार काफी लेट हो गया है. सितंबर अंतिम में स्कूल के पास रुपये के चेक आये है. लेकिन वो काम नहीं कर रहा है. मार्च के ही तिथि पर चेक पर साइन किया गया. अब सितंबर में जब स्कूल को मिला तो उसे बैंक में जमा किया गया. लेकिन वहां से बाउंस कर दिया गया.

प्रिंसिपल की बातें
मै तो पिछले तीन सालों से आरटीइ के तहत 25 फीसदी नामांकन ले रहा हूं. लेकिन अभी तक विभाग की ओर से एक बार भी पैसे नहीं मिले है. पिछले तीन सालों से बस हम आरटीइ के तहत नामांकन ले रहा हूं.
राजीव रंजन सिन्हा, प्रिंसिपल, वाल्डविन एकेडमी

मार्च में नामांकन हुआ लेकिन बच्चों के लिए अभी तक विभाग की ओर से पैसे नहीं मिले है. इस बीच अभिभावक ने स्कूल यूनिफार्म तो बच्चों को खरीद कर दे दिया है. लेकिन स्कूल फी के बिना ही बच्चे की पढ़ाई हो रही है. अभी हाल में चेक मिला है, लेकिन वो बैंक से वापस आ गया.
एफ हसन, प्रिंसिपल, इंटरनेशनल स्कूल

हमारे पास 1 लाख रुपये का कुछ दिनों पहले चेक आया था. हमने उसे बैंक में भेजा लेकिन बैंक से वापस आ गया है. पता चला कि वो चेक अब काम का नहीं है. काफी लेट होने के कारण चेक की वैलिडिटी खत्म हो गयी.
एके नाग, प्रिंसिपल, एसवीएम रेजिडेंसिल स्कूल

हम लोग तो जिला स्तर पर इसे डीइओ को भेज देते है. पैसा तो हर डीइओ को स्कूल के अनुसार भेज दिया गया था. डीइओ स्तर से कुछ हुआ होगा. हम इसे चेक करने के बाद ही कुछ बता पायेंगे.
आर के सिंह, मीडिया प्रभारी, शिक्षा विभाग

13 october 2014 prabhat khabar patna 

स्कूल की कमिटी करेगी ट्रैफिक कंट्रोल

स्कूल की कमिटी करेगी ट्रैफिक कंट्रोल

- ट्रैफिक पुलिस और डीटीओ के निर्देश पर स्कूल प्रशासन बना रहा है कमिटी
- स्कूली गेट के सामने लगने वाली गाड़ियों पर कसेगा शिकंजा
संवाददाता, पटना
स्कूल की छुट्टी के समय ट्रैफिक जाम, ट्रैफिक से होने वाले परेशानी, स्कूल आने जाने में स्टूडेंट्स की परेशानी, अब इन तमाम चीजों पर नजर स्कूल की कमिटी करेगी. इसके लिए हर स्कूलों को अपनी एक कमिटी बनानी है. अगर स्कूल इस कमी को पूरा नहीं कर पायेगा तो प्रशासन की ओर से अब स्कूल पर ही कार्रवाई की जायेगी. ट्रैफिक पुलिस और डीटीओ के निर्देश पर स्कूल प्रशासन अब ट्रैफिक को लेकर एक कमिटी बना रही है. इस कमिटी के निर्देश पर ही स्कूल के शुरू होने और छुट्टी के समय ट्रैफिक को कंट्रोल किया जायेगा. इसके लिए हर स्कूल को खुद अपने स्तर से सारा कुछ करना होगा. ट्रैफिक पुलिस बस स्कूल की कमिटी की मदद के लिए होगा. लेकिन ट्रैफिक कंट्रोल का सारा इंतजाम स्कूल को खुद करना होगा.
- कई स्कूलों ने भेजा रिपोर्ट
एक महीने पहले स्कूलों को मिले निर्देश के बाद स्कूल अपने स्तर से यह कमिटी बनानी शुरू कर दी है. इसमें हर तरह के स्कूलों को शामिल किया गया है. जिन स्कूलों के पास अपना स्कूल बस या ऑटो या वैन नहीं है, वो भी अपने स्तर से कमिटी का गठन कर रहे है. कई स्कूलों ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर डीटीओ के पास भेज भी दिया है. इंटरनेशनल स्कूल ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि अल्पना मार्केट स्थिति स्कूल के पास कैंपस नहीं होने के कारण ऑटो और वैन को सड़क पर ही रहना होता है, ऐसे में अब पाटलिपुत्र गोलंबर के पास सारे ऑटो को रखा जायेगा. स्कूल के छुट्टी के बाद ही एक-एक कर ऑटो को लाया जायेगा. जिससे जाम की समस्या नहीं हो पायेगी. रिपोर्ट में कई स्कूलों ने बड़ा कैंपस नहीं होने की बात भी रखी है. नॉट्रेडम एकेडमी ने रिपोर्ट में कहा है कि जो भी सवारी है अब स्कूल के बाहर नहीं लगेगी. स्कूल के छुट्टी के पांच मिनट पहले स्कूल के आस पास आयेगी. स्कूल के सामने एक मैदान में सवारी रहेगी और वहीं पर जाकर बच्चे बैठेंगे. वहीं लोयेला स्कूल में भी स्कूल के बाहर ऑटो और वैन को पूरे समय तक लगाने पर रोक लगा दी गयी है.
- एक सप्ताह के बाद स्कूल ओवर लोडिग पर होगी कार्रवाई
पटना डीटीओ ओर ट्रैफिक पुलिस की ओर से एक नोटिस तमाम स्कूलों के पास आया है. जिसमें सख्त हिदायत दी गयी है कि ओवल लोडिंग पर कार्रवाई एक सप्ताह में शुरू की जायेगी. अगर सड़क पर किसी भी स्कूल के यूनिफार्म में बच्चे ऑटो, बस, वैन आदि में ओवर लोडिंग देखा जायेगा तो उस स्कूल पर जुर्माना लगाया जायेगा. एक स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि कई ऑटो वाले पर हमारी मरजी नहीं चलती है. ऐसे में हम तो नियम बना देते है, लेकिन ऑटो वाले स्कूल से थोड़ा हट कर बच्चों को बैठाकर ले जाते है. इस पर भी ट्रैफिक पुलिस को सोचना चाहिए.
- हर दिन जाम में फंसते है बच्चे
स्कूल गेट के पास जाम की स्थिति ऐसी होती है कि एक बार अगर कोई बच्च फंसा तो आधे एक घंटे तो निकलना मुश्किल हो जाता है. कई स्कूल के पास तो कई बार जाम का ऐसा हाल होता है कि आम जनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. बेली रोड स्थित माउंट कार्मेल की बात करें तो यहां पर स्कूल की छुट्टी के समय अभिभावकों और बच्चों की इतनी भीड़ जमा होती है कि उससे निकलना काफी टफ होता है. कुछ ऐसा ही हाल पाटलिपुत्र स्थित इंटरनेशनल स्कूल, नॉट्रेडम एकेडमी, लोयेला हाई स्कूल के पास होता है.
- 2011 के नियम को अब पूरा कर रही स्कूल
स्कूलों के सामने लगने वाली जाम और उसकी चपेट में आने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर 2011 में यह ट्रैफिक पुलिस के द्वारा एक नियम बना कर स्कूलों को दिया गया था. लेकिन इस पर किसी भी स्कूल ने ध्यान नहीं दिया. स्कूल की मनमानी चलती रही. ट्रैफिक पुलिस के द्वारा लगातार स्कूलों को लेटर दिया जाता रहा. कई बार स्कूलों एडमिनिस्ट्रेशन के साथ बैेठकें भी हुई . लेकिन अब यह आखिरी दौर में है. ट्रैफिक और डीटीओ के दबाव के बीच अब स्कूलों ने अब कमिटी बनानी शुरू कर दी है. इसके तहत स्कूल की छुट्टी के समय स्कूल की ओर से यह कमिटी ट्रैफिक को कंट्रोल करेगी.
कमिटी का यह होगा काम
- स्कूल के शुरू होने और बंद होने के समय स्कूल के गेट पर खड़े हो कर ट्रैफिक कंट्रोल करना
- अब स्कूल के मेन गेट के पास सवारियों की भीड़ नहीं होगी जमा
- स्कूल की अपनी गाड़ियां स्कूल कैंपस में आयेगी. जहां पर चढ़ कर ही बच्चे घर जायेंगे
- जो अभिभावक खुद बच्चे को स्कूल पहुंचाते है उन्हें स्कूल से थोड़ा हट कर ही बच्चे को पैदल आकर स्कूल छोड़ना होगा. अब ऐसे प्राइवेट सवारी स्कूल गेट तक नहीं आयेगा
- स्कूल की बस या तो स्कूल कैंपस में जायेगी या फिर आधा किलोमीटर पहले ही रूक जायेगी. इससे स्कूल के मेन गेट पर जाम की स्थिति नहीं बनेगी
- कमिटी स्कूल के मेन गेट को पूरी तरह से क्लियर रखेगा
- स्कूल की अपनी सवारी स्कूल के अंदर जायेगी. बांकी प्राइवेट को बाहर ही रहना होगा

कोट
हमने अपने स्कूल में कमिटी का गठन कर लिया है. स्कूल के शिक्षकों को यह जिम्मेवारी दी गयी है. स्कूल के छुट्टी के समय तमाम सवारी की जांच और उस पर बच्चे के बैठाये जाने की जिम्मेवारी इस कमिटी की है. इस दौरान पूरी तरह से ट्रैफिक जाम नहीं लगने पर ध्यान रखा जाता है. हमने रिपोर्ट डीटीओ के पास भी भेज दिया है. हर स्कूल के बस पर ट्रैफिक पुलिस के नियम के अनुसार जानकारी भी दी गयी है.
राजीव रंजन सिन्हा, प्रिंसिपल, वाल्डविन एकेडमी

तमाम स्कूलों को कमिटी बनाने का निर्देश दिया गया है. अगर किसी भी स्कूल के पास अपना कैंपस नही हो तो गेट से पहले बच्चे को उतारकर फौरन निकल जायेगी. यही ऑटो और वैन के साथ भी लागू होगा. अब एक सप्ताह में स्कूल बस, ऑटो, वैन आदि के ओवल लोडिंग को लेकर भी अभियान हम शुरू करेंगे. जिसमें पकड़ में आने वाले स्कूल पर जुर्माना लगाया जायेगा.
दिनेश कुमार राय, डीटीओ पटना

13 october 2014 prabhat khabar patna 

सीबीएसइ देगा गल्र्स स्टूडेंट्स को पंख की उड़ान

सीबीएसइ देगा गल्र्स स्टूडेंट्स को पंख की उड़ान

- इंजीनियरिंग कॉलेजों तक गल्र्स स्टूडेंट्स को पहुंचाने में सीबीएसइ करेगा मदद
-  27 अक्तूबर तक करें ऑन लाइन अप्लाई
संवाददाता, पटना
 आइआइटी और एनआइटी तक का सफर गल्र्स स्टूडेंट्स के लिए आसान हो, इंजीनियरिंग के प्रति लड़कियों की भागीदारी अधिक से अधिक हो, इसके लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से अब अपने स्तर पर प्रयास किया जायेगा. इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाली देश भर की गर्ल स्टूडेंट्स के लिए सीबीएसइ ने उड़ान नाम के प्रोजेक्ट प्रोग्राम की शुरुआत की है. इस प्रोग्राम में 11वीं और 12वीं क्लास की गल्र्स स्टूडेंट्स शामिल हो सकती है. इसके लिए बोर्ड ने ऑन लाइन आवेदन की तिथि निकाली है. 27 अक्तूबर तक उड़ान प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आवेदन करना है.
- दूसरे बोर्ड की स्टूडेंट्स को भी मिलेगा मौका
यह प्रोग्राम मात्र सीबीएसइ स्टूडेंट्स के लिए नहीं है. बल्कि आइसीएसइ के अलावा देश भर के लिए भी बोर्ड और तमाम स्टेट बोर्ड के गर्ल स्टूडेंट्स के लिए किया गया है. उड़ान प्रोग्राम के तहत सीबीएसइ देश भर से एक हजार स्टूडेंट्स का चुनाव करेगी. जो स्टूडेंट्स सेलेक्ट होंगी, उन्हें सीबीएसइ की ओर से इंजीनियरिंग की तैयारी खासकर आइआइटी जेइइ और एनआइटी की पूरी तरह से फ्री करवाया जायेगा. तैयारी के लिए स्टडी मेटेरियल के साथ समय-समय पर टेस्ट भी लिया जायेगा. जिससे स्टूडेंट्स को अपनी तैयारी का पता चलता रहेगा.

ये स्टूडेंट्स कर सकती है उड़ान प्रोग्राम के लिए ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन
- सीबीएसइ के अलावा आइसीएसइ, कोई भी स्टेट बोर्ड की गल्र्स स्टूडेंट्स उड़ान के लिए आवेदन दे सकती है
- स्टूडेंट्स 11वीं और 12वीं में पीसीएम (फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ) ग्रुप में हो
- स्टूडेंट्स को 10वीं बोर्ड में मिनिमम मार्क्‍स 70 फीसदी होनी चाहिए. साइंस और मैथ में 80 फीसदी अंक होना आवश्यक है. सीबीएसइ के स्टूडेंट्स के लिए सीजीपीए 8 होना चाहिए
- 12वीं बोर्ड में पीसीएम ग्रुप में 75 फीसदी अंक आना जरूरी है
- इकोनॉमिक रूप से कमजोर गर्ल स्टूडेंट्स पर विशेष फोकस किया जायेगा

ऐसे होगा उड़ान के लिए अप्लाई
- इसके लिए ऑन लाइन अप्लाई किया जायेगा. सीबीएसइ के वेबसाइट 666.ूु2ी.ल्ल्रू.्रल्ल 1 666.ूु2ीूंंीि्रेू.्रल्ल  पर ले सकते है.
- सीबीएसइ के सिटी को-ऑडिनेटर से भी संपर्क किया जा सकता है
- फार्म भरने के बाद 27 अक्तूबर तक उसे सीबीएसइ, चौथी मंजिल, शिक्षा सदन, नई दिल्ली के पते पर भेज देना है.

इस प्रोग्राम के तहत ये सारे मिलेंगे फायदे
- देश भर से एक हजार गर्ल स्टूडेंट्स को चुना जायेगा. जिन्हें इंजीनियरिंग कॉलेज तक पहुंचने में पढ़ाई संबंधी मदद की जायेगी
- उड़ान प्रोग्राम में 50 फीसदी सीटें एससी, एसटी और ओबीसी गल्र्स स्टूडेंट्स के लिए रिजर्व रखा गया है
- उड़ान प्रोग्राम के तहत गल्र्स स्टूडेंट्स का सेलेक्शन मेरिट के आधार पर किया जायेगा
- उड़ान के तहत फ्री में इंजीनियरिंग की पढ़ाइ सीबीएसइ द्वारा सेलेक्ट गर्ल स्टूडेंट्स को दिया जायेगा
- पढ़ाई ऑन लाइन और ऑफ लाइन दोनों की तरह से होगा
- आइआइटी जेइइ की तैयारी के लिए तमाम लेर, स्टडी मेटेरियल सीबीएसइ मुहैया करवायेगी
- असेसमेंट के आधार पर स्टूडेंट्स को तैयारी करवायी जायेगी
- स्टूडेंट्स के लिए हेल्प लाइन नंबर भी जारी किया जायेगा
- स्टूडेंट्स और अभिभावक के लिए मोटिवेशन प्रोग्राम आयोजित किया जायेगा

कोट
बोर्ड का उड़ान प्रोग्राम काफी फायदेमंद होगा. इसमें अधिक से अधिक स्टूडेंट्स को शामिल होना चाहिए. अभी भी इंजीनियरिंग की तरफ गल्र्स स्टूडेंट्स की संख्या काफी कम है. इस कारण बोर्ड इस प्रोग्राम को शुरू करने जा रही है. सबसे अच्छी बात है कि इसमें हर बोर्ड की गर्ल स्टूडेंट्स को शामिल किया जायेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी को-ऑडिनेटर, सीबीएसइ

11 october 2014 patna prabhat khabar 

सीबीएसइ की ग्रेडिंग सिस्टम हुई फेल, अप्लाई के बाद भी नहीं हुई मॉनिटरिंग

सीबीएसइ की ग्रेडिंग सिस्टम हुई फेल, अप्लाई के बाद भी नहीं हुई मॉनिटरिंग

- सीबीएसइ ने स्कूल की ग्रेडिंग के लिए शुरू किया था एक साल पहले योजना
- इन्फ्रास्ट्रर और पढ़ाई की होनी थी मॉनिटरिंग
संवाददाता, पटना
स्कूलों में पढ़ाई को लेकर पूरी तरह से इन्फ्रास्ट्रर की सुविधा है या नहीं, किस स्कूल में किस तरह की सुविधा दी जाती है.  सुविधा के अनुसार स्कूल की ग्रेडिंग की जानी थी. इसके लिए सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को शामिल होने के लिए कहा था. अधिकांश स्कूल ने इसके लिए अप्लाई भी किया, लेकिन इसके लिए अब तक कोई प्रक्रिया शुरू नहीं किया गया है. ग्रेडिंग के लिए स्कूलों को अवश्य ही शामिल होना है. इसके लिए भी बोर्ड की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया गया था. पटना से लगभग 23 स्कूलों ने ग्रेडिंग के लिए अप्लाई किया था.
- तीन ग्रेड देने की थी व्यवस्था
सीबीएसइ की ओर से दो साल पहले एक प्रस्ताव तैयार किया गया था कि सभी स्कूलों को ग्रेड दिये जायेंगे. ए, बी और सी ग्रेड में स्कूलों को विभाजित किया जायेगा. जो स्कूल उच्च गुणवत्ता का होगा उसे ए ग्रेड , जो इससे कम होगा उसे बी ग्रेउ और जो सबसे कम होगा, उसे सी ग्रेड दी जायेगी. इस ग्रेड को स्कूल सुधार भी सकते है. इसके लिए भी बोर्ड ने स्कूलों को ऑन लाइन फार्म भरने को कहा था. ग्रेडिंग के लिए हर स्कूल के पास बोर्ड द्वारा टीम को भेजा जाना था.
- इन्फ्रास्ट्रर से लेकर फी तक
ग्रेडिंग स्कूलों के इन्फ्रास्ट्रर से लेकर फी तक को देख कर दी जानी थी. स्कूल बिल्ंिडग कैसी है, बैठने की सुविधा, साफ सफाई, फैकल्टी, रिजल्ट, फी आदि बातों की जांच इसमें की जानी थी. बोर्ड की ओर से एक एजेंसी के माध्यम से यह की जानी थी. एजेंसी ही स्कूल में जाकर जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट बोर्ड को देगी. फिर उस रिपोर्ट के आधार पर स्कूलों को ग्रेडिंग प्रदान की जानी थी. इस ग्रेडिंग में शामिल होना सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य है. इसके लिए हर स्कूल को ऑन लाइन अप्लाई करना था. ग्रेडिंग सिस्टम लागू होने के बाद ऐसे स्कूल पर लगाम लगेगा जहां पर पढ़ाई के नाम पर लूट हो रही है.
- फी पर भी लग सकेगी लगाम
ग्रेडिंग सिस्टम के बाद फी पर भी लगाम लग सकेगी. अभी कई ऐसे स्कूल है जहां सुविधाएं तो सी ग्रेड की दी जाती है, लेकिन फी ए ग्रेड की वसूली जा रही है . अगर ग्रेडिंग करने के बाद स्कूलों की लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड हो जाती तो स्कूलों की मनमानी पर रोक लग सकती थी. स्कूल प्रशासन को ग्रेड के हिसाब से फी निर्धारित करेगी. ऐसे माहौल से स्कूलों के बीच बेहतर होने का कांपिटिशन होगा. इसका फायदा सीधे तौर पर स्टूडेंट्स को मिलेगा.
- तीन साल में होगा रिव्यू
हर तीन साल में ग्रेडिंग का रिव्यू भी होना तय किया गया था. एक बार यदि किसी स्कूल को ए ग्रेड प्रदान हो गयी, लेकिन दोबारा इंस्पैक्शन होने पर वहां पहले जैसी सुविधाएं नहीं मिलती तो स्कूल का ग्रेड घटा दिया जायेगा. इसी तरह यदि किसी स्कूल को पहले सी ग्रेड मिली है, लेकिन स्कूल ने अपनी सुविधाएं पहले से बेहतर कर ली है तो उस स्कूल का ग्रेड उपर भी किया जायेगा. ऐसे में हर स्कूल के साथ बोर्ड पूरी ईमानदारी रखना चाह रहा था.
- देश भर के स्कूलों की ग्रेडिंग ऑन लाइन
सीबीएसइ के वेबसाइट पर सभी स्कूलों की ग्रेडिंग लिस्ट अपलोड होनी थी. इसमें हर शहर के स्कूल की ग्रेडिंग देखी जा सकती थी. ऐसे में उन अभिभावकों को काफी फायदा होता जो अपने बच्चे के नामांकन के लिए अच्छे स्कूल की तलाश कर रहे होते है. स्कूल का चयन करने में अधिक मशक्कत नहीं करनी पड़ती.

कोट
बोर्ड की ओर से एक साल पहले यह नोटिफिकेशन हमें दिया गया था. हमने इसके लिए अप्लाई भी किया था. लेकिन अब तक बोर्ड की ओर से किसी तरह की मॉनिटरिंग नहीं किया गया है. हम तो बस इंतजार कर रहे है.
ब्रदर सतीश, प्रिंसिपल, लोयेला हाई स्कूल

देश भर के स्कूलों ने ग्रेड पाने के लिए अप्लाई किया था. अधिकांश स्कूल बोर्ड का ग्रेड पाना चाह रहे है. लेकिन अभी तक बोर्ड की ओर से ग्रेड की प्रक्रिया शुरू नहीं की गयी है.
सीबी सिंह, सचिव, सहोदया पाटलिपुत्र

8 october 2014 prabhat khabar patna 

बहादुर बेटियां को सीबीएसइ करेगा कोर्स में शामिल

बहादुर बेटियां को सीबीएसइ करेगा कोर्स में शामिल

- सीबीएसइ हर जोनल ऑफिस को भेजा है निर्देश
- जोधपुर की बेटी लक्ष्मी द्वारा बाल विवाह पर रोक लगाने की कहानी 9वीं और 10वीं के स्टूडेंट्स पढ़ेंगे
संवाददाता, पटना
अब बेटियों की उपलब्धि घर तक सीमित नहीं रहेगी. अब बेटियां जो करेगी उसे सारा देश जान पायेगा. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से देश भर की बहादुर बेटियों को खोजा जा रहा है. ऐसी हर बेटियों को सीबीएसइ अपने कोर्स में शामिल करेगा जो समाज, राज्य और देश के लिए एक मिसाल कायम करेंगी. ऐसी बहादुर बेटियों को एक उदाहरण के तौर पर हर कोई पढ़े और जाने इसके लिए बोर्ड अब इसे स्कूल के एकेडेमिक सेशन में चलाने का प्लान बना रहा है.  बोर्ड द्वारा हियूमन राइट एंड जेंडर स्टडीज के तहत 9वीं और 10वीं क्लास के कोर्स में इसे शामिल किया जायेगा. इसके लिए जल्द ही सीबीएसइ की ओर से सर्कूलर भी जारी किया जायेगा. जिसके तहत बोर्ड ने तमाम सीबीएसइ रीजनल ऑफिस को जोड़ने का प्लान बनाया है. हर रीजनल ऑफिस को यह निर्देश दिया जा रहा है जिसके तहत ऐसी बेटियों को खोजा जायें जो समाज के लिए एक उदाहरण बन रही हों.
-  इंटरव्यू के साथ होगी जीवन का सफर
सीबीएसइ स्कूल के 9वीं और 10वीं के स्कूल कोर्स में इन बेटियों को हर साल नये एकेडेमिक सेशन में जोड़ा जायेगा. इसमें जिस लड़की के बारे में जानकारी दी जायेगी, उसमें उसका इंटरव्यू के साथ जीवन संघर्ष भी रहेगा. अगर वो लड़की किसी एनजीओ से जुड़ी होगी तो उस एनजीओ का नाम भी बोर्ड स्कूल के कॉरिकुलम में डालेगा. बोर्ड के अनुसार ऐसे एनजीओ को देश भर में ब्रांच खोलने में मदद मिलेगा. क्योंकि कोई एनजीओ राष्ट्रीय स्तर पर अधिक अच्छा काम कर सकता है. इस कारण एनजीओ को भी जोड़ा जायेगा.
- जोधपुर की लक्ष्मी से हुई है शुरुआत
सीबीएसइ ने इसकी शुरुआत कर दी है. बोर्ड की ओर से जोधपुर की लक्ष्मी को चुना गया है. जोधपुर की लूनी गांव की इस महिला ने ऑन स्पॉट बाल विवाह होते हुए रोका था. एक 1 साल की लड़की की शादी 3 साल के लड़के के साथ हो रही थी. ऐसे में जब लक्ष्मी को इसकी जानकारी मिली तो पहले तो उन्होंने परिवार वालों को समझाने की कोशिश किया, लेकिन बाद में जब बात नहीं बनी तो इसका विरोध किया. इसके बाद पुलिस प्रशासन की मदद से इस बाल विवाह को रोका. सारथी ट्रस्ट एनजीओ से जुड़ी लक्ष्मी की समाज से जुड़े इस सरोकार के मुददे पर आवाज उठाने के कारण बोर्ड ने लक्ष्मी की कहानी 9वीं और 10वीं के क्लास कोर्स में शामिल करने का फैसला लिया है. सीबीएसइ के अनुसार जोधपुर की लक्ष्मी ने एक बड़ा काम किया है. अब जोधपुर के आस पास के इलाके में बाल विवाह करवाने से लोग

चुनने में इन चीजों पर है सीबीएसइ का फोकस
- बाल विवाह पर रोक
- भ्रूण हत्या पर रोक
- सारक्षरता मिशन पर काम करना
- स्लम बस्ती के अंदर बच्चों में सुधार लाना
- बाल व्यापार पर रोक लगाने के उपर काम करना
- रेड लाइट एरिया में फंसी लड़कियों पर काम करना

कोट
बोर्ड एक अच्छी पहल करने जा रहा है. अगर ऐसी दो चार बेटियां भी समाज के सामने आ जायें तो इसका काफी पोजिटिव असर होगा. इसके लिए हर किसी को सामने आना चाहिए. जो लड़की इस तरह का काम करती है तो  उन्हें खुद इसे सीबीएसइ के पास रखना चाहिए. ऐसी लड़कियों को सीबीएसइ सामने लागे का अच्छा प्रयास कर रहा है.
सीबी सिंह, सचिव, सीबीएसइ पाटलिपुत्र सहोदया

7 october 2014 on prabhat khabar patna