Saturday, January 9, 2016

स्कूल नहीं देता कैंपस, कॉपरेटिव की जमीन नहीं होती तो कहां लगती दो हजार स्कूली बस और वैन

- पाटलिपुत्र कॉपरेटिव की जमीन पर लगती है नॉट्रेडम एकेडमी की सारी स्कूली गाड़यां

संवाददाता, पटनासमय - 1.45 बजे. स्कूल के सामने ऑटो और स्कूली वैन लगनी शुरू हो गयी.
समय - 2 बजे. प्राइवेट बड़ी-बड़ी गाड़ियां आने लगी समय - 2.15 बजे. अभिभावक गाड़ियों में आने लगे. स्कूल के गेट के पास उतर कर वहीं खड़े होने लगे
समय - 2.30 बजे. अब तक स्कूल के सामने दो हजार लगभग गाड़ियां खड़ी हो गयी. वहीं स्कूल के मेन गेट पर अभिभावक. स्कूल की छुट्टी हुई. एक साथ लगभग पांच हजार स्टूडेंट्स एक साथ निकले. शुक्र है पाटलिपुत्र कॉपरेटिव की जमीन है. अगर यह पार्क की जमीन नॉट्रेडम एकेडमी स्कूल के सामने नहीं होती तो स्कूली बस, ऑटो और वैन के लिए केवल सड़क ही बचती. स्कूल का अपना लंबा कैंपस है, लेकिन स्कूल कैंपस में गाड़ियां लगाने की अनुमति नहीं है. ऐसे में दो हजार गाड़ियां कॉपरेटिव की जमीन पर और बांकी सड़क पर लगी रहती है. छुट्टी के बाद चार हजार स्कूली गर्ल्स और पांच सौ के लगभग अभिभावकों की भीड़, स्कूल जाम की स्थिति बनाने के लिए काफी है. प्रभात खबर के स्कूल कैंपस में लगे स्कूल कंवियेंस अभियान के तहत बुधवार को स्कूल की छुट्टी के बाद लाइव नजारा देखा गया. अगर स्कूल कैंपस में स्कूली कंवियेंस के लिए जगह दिया जायें तो ना तो जाम की समस्या होगी और ही स्टूडेंट के सुरक्षा को लेकर अभिभावक परेशान होंगे.
- कैंपस में लगे गाड़ियां तो अभिभावक रहेंगे निश्चित नॉट्रेडम एकेडमी का अपना कोई कंवियेंस नहीं है. ऐसे में 90 फीसदी अभिभावक खुद की गाड़ी से बच्चे को लेने आते है. ऑटो या स्कूली वैन पर उन्हें विश्वास नहीं है. इसके अलावा ऑटो या वैन को स्कूल के अंदर जाने की अनुमति नहीं है. कई बार ऑटो या वैन वाले स्टूडेंट को स्कूल से काफी पहले ही छोड़ देते है और छुट्टी के बाद काफी दूर में गाड़ियां खड़ी करते है. अगर कैंपस में प्राइवेट स्कूली ऑटो, वैन अौर स्कूली बस को लगाने की इजाजत मिल जायें तो काफी हद तक अभिभावकों का जमावड़ा स्कूल के गेट नहीं होगा.
- पांच हजार स्टूडेंट के लिए दो हजार है गाड़ियां नॉट्रडेम एकेडमी में लगभग पांच हजार स्टूडेंट्स पढ़ती है. इन स्टूडेंट को लेने के लिए हर दिन दो हजार गाड़ियां आती है. इसमें प्राइवेट गाड़ियों की संख्या अधिक होती है. अधिकांश अभिभावक खुद ही स्टूडेंट को लेने के लिए स्कूल आते है. स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार एक बच्चे को लेने के लिए एक गाड़ी आती है. इससे गाड़ियों की संख्या काफी बढ़ जाती है. दो हजार गाड़ियों में 25 से 30 स्कूली ऑटो, 100 के लगभग स्कूली वैन, 20 से 25 छोटे साइज वाला सिटी राइड बस है, इसके अलावा लगभग आठ सौ के लगभग केवल प्राइवेट गाड़ियों से स्टूडेंट स्कूल आती है.
- परिवहन मित्र की मिलती है मदद हाल में स्कूल की ओर से एक परिवहन मित्र की टीम बनायी गयी है. 19 लोगों की इस टीम में ऑटो वाले को शामिल किया गया है. स्कूल की छुट्टी के समय गाड़ियों को करेंज से लगवाना और छुट्टी के बाद स्टूडेंट को गाड़ियों में बैठाने का काम यह टीम करती है. लेकिन इस टीम की ड्यूटी केवल स्कूल के बाहर ही है. अगर इस टीम को स्कूल कैंपस में सवारी के साथ जाने की इजाजत मिल जायें तो बाहर एरेंज करने की जरूरत नहीं होगी. परिवहन मित्र के अध्यक्ष विनय कुमार ने बताया कि जब से हम लोग यहां की ट्रैफिक संभाल रहे है, उसके बाद थोड़ी स्थिति बेहतर हुई है. पहले तो दो घंटा स्कूल के गेट से निकलने में लग जाता था.
कोटकॉपरेटिव की जमीन पर प्राइवेट ऑटो और वैन लगते है. अब यह एरिया म्यूनिसपल कॉपोरशन का होने वाला है. इसके बाद हम म्यूनिसपल कॉपोरेशन से यहां पर गाड़ियों की पार्किंग के लिए आवेदन देंगे. काफी संख्या में अभिभावक बड़ी-बड़ी गाड़ियां लेकर बच्चे को लेने आते है. इससे जाम अधिक लगता है. पार्किंग की जमीन मिल जायेगी, तो समस्या दूर होगी.
सिस्टर जेस्सी, प्रिंसिपल, नॉट्रेडम एकेडमी \\B

No comments:

Post a Comment