Tuesday, January 5, 2016

स्कूल की छुट्टी के साथ ही ठप हो जाती है सेंट जोसफ कांवेंट स्कूल के सामने की सड़क

 छुट्टी होने के साथ 35 सौ बच्चे एक साथ निकलते सड़क पर

संवाददाता, पटनासमय - 1 बजे. स्कूल के सामने गाड़ियां लगनी शुरू हो जाती है. समय - 1.30 बजे. स्कूल के सामने सड़क के दोनों तरफ स्कूली बस, स्कूली वैन और ऑटो का कब्जा हो गया. समय - 1.55 बजे. स्कूल के मेन गेट पर अभिभावकों को जमावड़ा लग चुका है. बाइक और छोटे साइज के ऑटो मेन गेट पर खड़ी है. ऐसे में सिविल कोर्ट, अशोक राजपथ की ओर से आने जाने वाले प्राइवेट गाड़ियां वहां आकर ठहर सी जाती है. ना पीछे जाने का रास्ता और ना ही आगे बढ़ने का रास्ता ही बचा है. यह नजारा हर दिन सेंट जोसफ कांवेंट हाई स्कूल के छुट्टी के आधे घंटे पहले और छुट्टी के आधे घंटे बाद तक रहता है. इस स्कूल के छुट्टी के समय अगर कोई फंसा तो मानो घंटे भर तक इस इलाके से निकलना संभव नहीं है.
- 35 सौ बच्चे एक साथ होते हैं सड़क पर स्कूल के छुट्टी के पहले सड़क पर स्कूली बस और ऑटो का जमावड़ा और छुट्टी के बाद एक साथ 35 सौ बच्चे स्कूल से बाहर निकलते है. ऐसे में अपने-अपने बस में बैठना हर बच्चे के लिए काफी टफ होता है. अगर खोज कर बस में बैठ भी गये तो उन्हें आधे घंटे तक बस में ही बैठना पड़ता है. क्योंकि जब तक जाम हटेगा नहीं तब तक बस खुलेगी नहीं. स्कूल के पास का यह नजारा एक दिन नहीं बल्कि हर दिन का होता है.
- अपने बस को खोजते रहते है बच्चे जिन बसों को स्कूल के आस पास जगह नहीं मिलता तो ऐसे बस सिविल कोर्ट के पास या बीएन कॉलेज के पास वाले गली में भी लगे होते है. ऐसे में गर्ल्स स्टूडेंट्स पैदल वहां तक जाकर अपने बस में बैठतीं है. ऐसे में कभी-कभी बस को खोजने में भी समय लगता है. कई बार तो बस के मालिक को ढूढ़ कर बस कहां लगी है, इसके बारे में जानकारी लेतीं है.
- 24 गाड़ियां है ऑथोराइज्ड प्राप्त, फिर भी लगता है बाहर स्कूल ने 24 बसों को अॉथोराइज किया हुआ है. स्कूल कैंपस में इन 24 बसों के नंबर तो लगे है, लेकिन इन बसों को स्कूल कैंपस में लगाने की अनुमति नहीं है. इसके अलावा 10 और छोटे स्कूल वैन को भी स्कूल से ऑथोराइज किया हुआ है. इसके अलावा लगभग 40 से 50 ऑटो और वैन से बच्चे स्कूल आते और जाते है. अगर स्कूल में ऑथोराइज बस और वैन को ही जगह मिल जाये तो काफी हद तक जाम की समस्या कम हो जायेगी.
- बॉडी गार्ड और बड़ी गाड़ियों में आते हैं बच्चे इस स्कूल में कई राजनीतिज्ञ और आइएएस के बच्चे भी पढ़ते है. ऐसे में उन बच्चों को स्कूल से लेने के लिए बड़ी-बड़ी गाड़ियां आती है. इन गाड़ियों में कई बॉडी गार्ड होते है. एेसे में ये बड़ी गाड़ियां के कारण भी जाम लगता है. ये गाड़ियां स्कूल की छुट्टी के पहले से ही स्कूल के पास आकर खड़े हो जाते है. इसके अलावा काफी संख्या में प्राइवेट गाड़ियों से अभिभावक बच्चों को लेने भी आते है. ये सारी की सारी स्कूल के बाहर लगे होते है.
कोटस्कूल की आेर से 24 बसों को अॉथोराइज्ड किया गया है. इसके अलावा जो भी स्कूल वैन और ऑटो है सारे के सारे अन ऑथोराइज है. स्कूल को उनसे कोई मतलब नहीं है. कई बार इसको लेकर अभिभावकों को नोटिस दिया गया है कि ऑथोराइज बस से बच्चों को स्कूल भेजे, लेकिन अभिभावक फिर भी प्राइवेट ऑटो और वैन से बच्चों भेजते है. जरूरत से ज्यादा सवारी स्कूल के सामने लग जाता है, इससे जाम की स्थिति बन जाती है.
सिस्टर लूसिना, प्रिंसिपल, सेंट जोसफ कांवेंट हाई स्कूल, अशोक राजपथ \\B

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