Rinku Jha
Sunday, January 17, 2016
वेटेज सिस्टम को सीबीएसइ ने किया खत्म, हर विषय में होगा लागू
- किसी भी चैप्टर से कितने ही मार्क्स के पूछे जा सकते है प्रश्न
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ के 12वीं की बोर्ड परीक्षा में वेटेज सिस्टम को खत्म कर दिया गया है. इसे सीबीएसइ ने साइंस के साथ आर्ट्स और कॉमर्स में भी लागू किया है. इस बार 12वीं में वेटेज सिस्टम से प्रश्न नहीं पूछे जायेंगे. इससे स्टूडेंट्स को अब सेलेक्टिव चैप्टर पढ़ कर एग्जाम की तैयारी नहीं कर पायेंगे. अब किसी भी विषय के सारे चैप्टर को एक जैसा महत्व देना होगा. क्योंकि किसी भी चैप्टर से कितने भी अंक के प्रश्न आ सकते है. इसकी जानकारी सीबीएसइ ने अपने स्तर से तमाम स्कूलों को दे दिया है.
- प्री बोर्ड में भी कई स्कूलों ने किया लागू
कई स्कूलों ने सीबीएसइ के इस पैटर्न को 12वीं के प्री बोर्ड में भी लागू किया है. प्री बोर्ड की परीक्षा भी बिना वेटेज सिस्टम का लिया गया है. बोर्ड की ओर से यह निर्देश कई महीनों पहले ही स्कूलों को दिया गया था. अभी जब बोर्ड परीक्षा का समय नजदीक आया है तो फिर एक बार बोर्ड ने इस संबधित जानकारी स्कूलों को अवगत करवाया है. जिन स्कूलों में प्री बोर्ड में ही यह सिस्टम लागू किया गया, वहां ताे ठीक है, लेकिन कई स्कूल में प्री बोर्ड पुराने ही सिस्टम पर लिया गया.
- कई सालों से वेटेज सिस्टम पर लिये जाते थे बोर्ड एग्जाम
12वीं के बोर्ड एग्जाम में हमेशा वेटेज सिस्टम से ही परीक्षा लिया जाता था. संबंधित सब्जेक्ट के टीचर्स को पता होता था कि कौन सा चैप्टर महत्वपूर्ण है और किस चैप्टर से अधिक मार्क्स के प्रश्न आ सकते है. टीचर्स तैयारी करवाने में भी स्टूडेंट को यह गाइड करते थे. सेंट माइकल हाई स्कूल के मैथ के टीचर संजय जोसफ ने बताया कि वेटेज सिस्टम खत्म हो जाने से स्टूडेंट के पास अधिक चैलेंज हो गया है. अब कुछ चैप्टर पढ़ने से काम नहीं चलेगा. हर चैप्टर को बराबर महत्व देना होगा.
- यह है वेटेज सिस्टम
वेटेज सिस्टम में हर चैप्टर के लिए मार्क्स फिक्स होता है. किस चैप्टर से कितने मार्क्स के प्रश्न पूछे जायेंगे, इसकी जानकारी स्टूडेंट को पहले से ही होता है. मार्क्स फिक्स होते है. इससे स्टूडेंट को पता होता है कि किस चैप्टर से कितने प्रश्न और कितने मार्क्स के पूछे जायेंगे. हर प्रश्न का सीबीएसइ ने एक वेटेज दिया होता था. इसी के अनुसार स्टूडेंट अपनी तैयारी करते थे.
कोट
वेटेज सिस्टम हर विषय में लागू किया गया है. अब स्टूडेंट को हर चैप्टर एक जैसा पढ़ना होगा. किसी भी चैप्टर से कितने ही मार्क्स के प्रश्न पूछे जा सकते है. इंजीनियरिंग और मेडिकल की परीक्षा को ध्यान में रख कर ऐसा किया गया है. प्रतियोगिता परीक्षा में किसी भी चैप्टर से प्रश्न पूछा जाता है.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर सीबीएसइ \\B
अभिभावकों पर बोझ : इस साल पंद्रह फीसदी तक बढ़ेगा स्कूल फी
- कई स्कूलों में शुरू हुआ नये सेशन को लेकर बैठकों का दौर
संवाददाता, पटना
अभिभावकों के ऊपर बाेझ डालने की तैयारी फिर एक बार स्कूलों ने शुरू कर दिया है. नये सेशन से प्राइवेट स्कूलों में 10 से 15 फीसदी फी की बढ़ोतरी की जायेगी. वहीं नये नामांकन फी में भी इस बार बढ़ोतरी की जायेगी. कई स्कूलों में नये सेशन को लेकर चल रही बैठकों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार 15 फीसदी तक ट्यूशन फी में बढ़ोतरी की जायेगी. जल्द ही इसकी सूचना अभिभावकों को भी दिया जायेगा. ट्यूशन फी के साथ बस भाड़ा, किताबों, यूनिफार्म पर भी चार्जेज बढ़ जायेंगे.
- न्यू एडमिशन में भी बढ़ेगा चार्ज
इस बार कई प्राइवेट स्कूल नये नामांकन में 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी करेंगे. नर्सरी क्लास में होने वाले इस नामांकन में स्कूल की ओर से पुराने चार्जेज को रिवाइज किया गया है. स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार मंहगाई बढ़ गयी है. नर्सरी क्लास के लिए एकेडमिक संबंधित सारी चीजें स्कूल की आेर से दी जाती है. ऐसे में स्कूल बैग से लेकर बच्चों संबंधित सारी चीजें महंगी हो गयी है. नये नामांकन के तौर पर हर स्कूल अपनी सुविधा के अनुसार फी लेते है. नये नामांकन में भी 14 से 15 फीसदी का बोझ इस बार अभिभावकों को होने वाला है.
- एक अप्रैल से शुरू होगा नया सत्र
वन क्लास से 10वी तक के लिए नया सत्र एक अप्रैल से शुरू होगा. इससे पहले नामांकन संबंधित सारी प्रक्रियाएं स्कूल वाले पूरा करेंगे. फरवरी में प्रैक्टिकल और मार्च में बोर्ड परीक्षा होने के कारण नये सत्र की तैयारी जनवरी में स्कूलों में कर दिया जाता है. फरवरी में स्कूल में फाइनल परीक्षा होने के बाद मार्च में नया नामांकन की प्रक्रिया चलेगी.
- यूनिफाॅर्म और किताबों में भी बढ़ेंगे कई हजार
जिन स्कूल में यूनिफार्म स्कूल कैंपस में दिया जाता है और जो फिक्स दुकान से यूनिफार्म लेते है, दोनों की जगहों पर इस बार अभिभावकों को यूनिफार्म खरीदने में एक हजार से लेकर 15 सौ का अधिक बोझ पड़ने वाला है. इसके अलावा किताबों में भी इस बार दाम बढ़ गये है. स्कूल के सूत्रों की माने तो इस बार किसी भी क्लास के किताबों की खरीदारी में दो हजार से तीन हजार तक का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा.
प्रिंसिपल का पक्ष
न्यू सेशन को लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है. नामांकन की प्रक्रिया चल रही है. फरवरी और मार्च में बोर्ड परीक्षा को लेकर समय का अभाव होता है. इस कारण अभी से तैयारी कर रहे है. महंगाई बढ़ गयी है, इससे फी बढ़ोरी करनी पढ़ती है.
राजीव रंजन, प्रिंसिपल, वाल्डविन एकेडमी
हर साल कुछ ना कुछ परसेंटेज बढ़ाया जाता है. कई तरह के खर्च को मेंटेन करने के लिए कुछ परसेंटेज की बढ़ोतरी हम ट्यूशन फी में करते है. इस बार भी कुछ परसेंटेज की बढ़ाेतरी की जायेगी.
एफ हसन, प्रिंसिपल, इंटरनेशनल स्कूल
अभी बोर्ड परीक्षा की तैयारी में लगे है. नये सेशन को लेकर तैयारी भी चल रही है. जल्द ही बैठक होंगी. फिर नये सेशन में ट्यूशन फी की बढ़ोतरी को लेकर फैसला होगा. समय से पहले अभिभावकों को जानकारी दे दी जायेगी.
मेरी अल्फांसों, प्रिंसिपल, डान बॉस्को एकेडमी
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Friday, January 15, 2016
'आंसर की' की सुविधा देगा बीसीइसीइ
- मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षा होने के सप्ताह भर बाद अभ्यर्थी देख पायेंगे अपना आंसर
संवाददाता, पटना
बिहार मेडिकल और इंजीनयरिंग के तमाम अभ्यर्थी अब अपना आंसर परीक्षा होने के एक सप्ताह के बाद ही कर पायेंगे. अभ्यर्थी अपने एग्जाम का आकलन कर पायेंगे. क्योंकि इस बार बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (बीसीइसीइ) द्वारा आंसर की जारी किया जायेगा. इससे अभ्यर्थी अपना आंसर का मिलान रिजल्ट निकलने के पहले ही कर पायेंगे. ज्ञात हो कि कई सालों से बीसीइसीइ ने आंसर की देना बंद कर दिया था. इसको लेकर 2015 में अभ्यर्थी ने इसका विरोध किया था. मामला हाई कोर्ट तक गया था. इस बार बीसीइसीइ द्वारा आंसर की जारी किया जायेगा.
- अप्रैल के थर्ड वीक में होगा पीटी की परीक्षा
जनवरी के तीसरे सप्ताह में बीसीइसीइ के लिए आवेदन लेना शुरू किया जायेगा. वहीं अप्रैल के तीसरे सप्ताह में बीसीइसीइ बिहार मेडिकल और इंजीनियरिंग की पीटी की परीक्षा लेने का निर्णय लिया है. वहीं मई के तीसरे सप्ताह में बिहार मेडिकल और इंजीनियरिंग की मेेंस की परीक्षा ली जायेगी.
- क्या है आंसर की
आंसर की परीक्षा होने के बाद जारी किया जाता है. आंसर की आब्जेक्टिव वाले परीक्षा की ही जारी किया जा सकता है. किसी प्रश्न का उत्तर क्या होगा, इसकी जानकारी दी जाती है. हर प्रश्न के सही उत्तर की जानकारी आंसर की के माध्यम से अभ्यर्थी को दिया जाता है. परीक्षा में पूछे गये तमाम सेट का उत्तर अलग-अलग दिया जाता है. अपने सेट के अनुसार अभ्यर्थी उत्तर का मिलान कर सकते है. इससे अभ्यर्थी को सही उत्तर का स्कोरिंग का पता चल जायेगा.
कोट
इस बार अभ्यर्थी को आंसर की सुविधा दी जायेगी. इससे अभ्यर्थी अपने आंसर का मिलान कर पायेंगे. पिछले साल अांसर की नहीं निकाला जा सका था. इसकी मांग अभ्यर्थी ने किया था. इस बार आंसर की जारी किया जायेगा.
अनिल कुमार, ओएसडी, बीसीइसीइ
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डीइओ की लापरवाही, झेल रहा बिहार बोर्ड
- समय सीमा पर नहीं करते जिला पदाधिकारी काम, शिक्षा विभाग पत्र लिखने की तैयारी में समिति
संवाददाता, पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के मैट्रिक और इंटरमीडिएट के सारे काम जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के माध्यम से होता है. ऐसे में समय पर जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा सारा काम करके समिति को सौंप देना, काफी महत्वपूर्ण रहता है. लेकिन प्रदेश भर के कई डीइओ के द्वारा समय पर काम नहीं करने के कारण समिति को काफी परेशानी होती है. इसको लेकर अब समिति शिक्षा विभाग को पत्र लिखने की तैयारी कर रहा है.
- नहीं दिया अब तक परीक्षा सेंटर की जानकारी
समिति द्वारा तमाम जिलों से परीक्षा सेंटर की जानकारी मांगी गयी थी. इसके लिए 19 दिसंबर तक का समय समिति ने दिया था. लेकिन इस अवधि में 10 से 15 जिलों से ही परीक्षा सेंटर की सूची बोर्ड को सौंपी. इसके बाद बोर्ड ने तिथि बढ़ा कर 30 दिसंबर किया. इसके बाद भी सभी जिलों से परीक्षा सेंटर की सूची नहीं आयी. अब जनवरी का तीसरा सप्ताह होने जा रहा है. ऐसे में वैशाली और मुजफ्फरपुर से परीक्षा सेंटर की लिस्ट नहीं आयी है. इसके अलावा रजिस्ट्रेशन की चेक लिस्ट भी इन जिलों में फंसा हुआ है.
- रजिस्ट्रेशन से लेकर रिजल्ट तक डीइओ द्वारा
मैट्रिक और इंटर के रजिस्ट्रेशन से लेकर रिजल्ट तक में डीइओ माध्यम बनते है. स्कूल- कॉलेजों और समिति के बीच डीइओ ऑफिस कड़ी का काम करता है. सारे कामों के लिए समिति एक समय सीमा देती है. इस बीच स्कूल कॉलेज से काम संपन्न होकर डीइओ को समिति को सौंप देना होता है.
- साल भर के काम पर दिया जायेगा पुरस्कार
वैसे तो समिति की ओर से हर साल तीन दिसंबर को जिला शिक्षा पदाधिकारी को सम्मानित किया जाता है. मैट्रिक और इंटर की परीक्षा को कदाचार मुक्त करवाने पर डीइओ को तीन दिसंबर को सम्मानित किया जाता है. लेकिन 2015 से समिति एक विशेष पुरस्कार से प्रदेश भर के डीइओ को सम्मानित करने की योजना बना रही है. इसमें उन डीइओ को चुना जायेगा जो समिति के किसी भी काम को समय पर देते है. इसके लिए समिति की ओर से मॉनिटरिंग की जायेगी. साल भर के काम के लेखा जोखा के बाद डीइओ को चुना जायेगा.
कोट
कई जिला कार्यालय से समय पर काम नहीं किया जाता है. इससे समिति को काफी परेशानी उठानी पड़ती है. जिला शिक्षा कार्यालय को समय पर सारा काम करना चाहिए. इस बात को हम अब शिक्षा विभाग की बैठक में रखेंगे.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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स्कूलों में नहीं मिलेगा अब समोसा, पिज्जा व चिप्स
- स्कूलों ने न्यूट्रिशियन को एप्वाइंट करने के लिए स्कूलों को दिया निर्देश
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को एक लेटर लिखा है. लेटर में स्कूल के कैंटीन में समोसा, पिज्जा, चिप्स, नूडल्स आदि को बेचने से मना किया गया है. इसके अलावा बच्चों के लंच बाॅक्स में भी जंक फूड नहीं लाने के लिए अवेयर करने को कहा गया है. स्कूली बच्चे और अभिभावक जंक फूड से दूर रहें, इसके लिए स्कूल में न्यूट्रिशियन को रखने का भी निर्देश दिया गया है. बच्चों में बढ़ रहे मोटापा, डायबिजिट और ब्लड प्रेशर को लेकर सीबीएसइ ने यह निर्देश नये सेशन से लागू करने के लिए तमाम स्कूलों को सकूर्लर जारी किया है.
- लंच आवर और मेनू चार्ट भेजे स्कूल
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों से लंच आवर के डेटेल्स स्कूल के वेबसाइट पर डालने काे कहा है. कौन सा स्कूल कितने देर का लंच आवर दे रहे है, इसकी जानकारी स्कूलों से सीबीएसइ ने मांगा है. ज्ञात हो कि सीबीएसइ ने दो सालो पहले लंच आवर को 40 से 45 मिनट करने का निर्देश दिया था. लेकिन अधिकांश स्कूल अभी भी 20 से 30 मिनट का ही लंच आवर रख रहे है. इसके अलावा हर स्कूलों से मेनू चार्ट को भी भेजने को कहा है.
- बिना मेनू चार्ट के चल रहे है स्कूल
पटना के कुछ स्कूलों को छोड़ दे तो अधिकांश स्कूलों में मेनू चार्ट नहीं है. इससे स्टूडेंट्स अपने मरजी से लंच लेकर आते है. सीबीएसइ ने हर स्कूलों से सोमवार से शनिवार तक का मेनू चार्ट बनाने काे कहा था. इस मेनू चार्ट को हर स्कूल की डायरी में डालना है. इसी मेनू चार्ट के अनुसार स्टूडेंट को लंच लेकर आना है. मेनू चार्ट हर क्लास के लिए अलग-अलग होगा.
स्कूलों को दिया गया ये निर्देश
- स्कूलो में 40 से 45 मिनट का करें याेगा क्लास
- खेलकूद और शारीरिक व्यायाम का पीरियड होना चाहिए - हर स्कूल में हो फिजिकल टीचर्स
- न्यूट्रिशियन और हेल्थ एक्सपर्ट को रखें स्कूल प्रशासन - डाक्टर और मेडिकल अधिकारी के आपातकालीन सेवाओं का नंबर स्कूल में हो डिसप्ले
- स्कूल में प्राथमिक चिकित्सा का पर्याप्त इंतजाम होना चाहिए - प्राथमिक चिकित्सा की ट्रेनिंग स्कूल के टीचर्स को दिया जायें
- स्कूल में खेल गतिविधियों को बढ़ावा दिया जायें - स्कूल के सीढ़ियों की इस्तेमाल बच्चों से अधिक करवाया जायें
- लंच ब्रेक के बाद फिजिकल क्लासेज ना हों
160 रूपये में कैसे होगा प्रैक्टिकल, 12वीं के प्रैक्टिकल में टीचर एक्सटर्नल बनने को तैयार नहीं
155 में 100 टीचर को आया एक्सटर्नल का लेटर, 50 ने ही भरी हामी
संवाददाता, पटना
केस वन
: फिजिक्स के टीचर राहुल कश्यप (बदला हुआ नाम) को एक्सटर्नल बना कर औरंगाबाद सीबीएसइ ने भेजा. आने जाने में राहुल कश्यप को चार हजार रूपये खर्च हुए. लेकिन सीबीएसइ ने उन्हें 160 रूपया दिया. कई सालों से राहुल कश्यप के साथ ऐसा ही हो रहा है. ऐसे में इस बार राहुल कश्यप मेडिकल देकर प्रैक्टिकल से अलग हो गये है.
केस टू
: बायोलॉजी के टीचर रश्मि वर्मा (बदला हुआ नाम) पटना के प्रतिष्ठित स्कूल की टीचर है. रश्मि वर्मा को 2015 में एक्सटर्नल बना कर गया भेज दिया गया. रश्मि वर्मा को आने और जाने में पांच हजार रूपये लगे थे. इसकी रिपोर्ट भी सीबीएसइ को रश्मि वर्मा ने भेजा था. लेकिन सीबीएसइ ने मात्र 160 रूपये ही टीचर को दिया. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) स्कूलों के अधिकांश टीचर्स के साथ यह हाल होता है. बोर्ड की ओर से एक्सटर्नल तो टीचर्स को बना दिया जाता है. दूसरे शहरों के स्कूल में भेज भी दिया जाता है, लेकिन पारिश्रमिक के तौर पर आज भी बस 160 रूपये ही दिये जाते है. कई बार टीचर्स के द्वारा पारिश्रमिक को बढ़ाने के लिए मांग की है. लेकिन सीबीएसइ कई सालों से 160 रूपये ही दे रही है.
- सिस्टम बदला, नहीं बढ़ा पारिश्रमिक
सीबीएसइ स्कूलों में पहले प्रैक्टिकल एग्जाम के लिए लोकल ही टीचर्स को एक्सर्टनल बना कर भेजा जाता था. एक ही शहर के तमाम टीचर्स को उसी शहर के दूसरे स्कूल में एक्सटर्नल बनाया जाता था. लेकिन अब कई सालों से सीबीएसइ ने सिस्टम में बदलाव कर दिया है. प्रैक्टिकल एग्जाम पूरी तरह से कदाचार मुक्त हो, इसके लिए अब टीचर्स दूसरे शहर के स्कूल में जाकर प्रैक्टिकल लेते है. नाम नहीं छापने के शर्त पर एक टीचर ने बताया कि पहले बस स्कूल चेंज होता था. हमें कोई खर्च नहीं होता था. लेकिन अब तो तीन से चार हजार रूपये खर्च हो जाते है, लेकिन बोर्ड पैसे में बढ़ोतरी नहीं किया है.
- 155 में मात्र 55 है एक्सटर्नल बनने को तैयार
एक महीने पहले सीबीएसइ ने प्रैक्टिकल एग्जाम को लेकर निर्देश स्कूलों को भेजा था. लेकिन अभी तक बोर्ड के पास पूरे प्रदेश से 55 टीचर्स ने ही एक्सटर्नल बनने की हामी भरी है. काफी संख्या में टीचर्स ने मेडिकल का बहाना बना कर अपना नाम वापस कर लिया है. ज्ञात हो कि अभी पूरे बिहार में प्लस टू लेवल में 155 टीचर्स है. 155 टीचर्स में सीबीएसइ ने 100 टीचर्स को एक्सटर्नल बनने का लेटर दिया था. लेकिन आधे के टीचर्स जाने को तैयार नहीं है.
- 15 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा प्रैक्टिकल
सीबीएसइ का प्रैक्टिकल एग्जाम 15 जनवरी से 15 फरवरी तक लिया जायेगा. हर स्कूल को प्रैक्टिकल एग्जाम को लेकर डेट शीट बाेर्ड की ओर से भेजा जा रहा है. ज्ञात हो कि प्रैक्टिकल एग्जाम तो अपने ही स्कूल में स्टूडेंट को देना होता है, लेकिन एग्जाम लेने के लिए दूसरे स्कूल से टीचर्स को बुलाया जाता है.
कोट
प्रैक्टिकल एग्जाम 15 जनवरी से शुरू होगा. इसके लिए सीबीएसइ जल्द ही सेट सीट जारी करेगा. एक्सटर्नल जिस टीचर्स को बनाया जायेगा, उसे प्रैक्टिकल एग्जाम में जाना होता है. हर विषय से एक टीचर का रहना अनिवार्य है.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ \\B
वैल्यू बेस्ड प्रश्न को सीबीएसइ ने किया कंपल्सरी, हर विषय में आयेंगे वेल्यू बेस्ड
चार अंक का एक प्रश्न होगा वैल्यू बेस्ड
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने इस बार से वैल्यू बेस्ड प्रश्न को कंपल्सरी कर दिया है. 2016 में होने वाले 12वीं बोर्ड की परीक्षा में वैल्यू बेस्ड प्रश्न पूछा जायेगा. इस प्रश्न का आंसर हर स्टूडेंट को देना अनिवार्य रहेगा. चार अंक के इस प्रश्न की संख्या भी सीबीएसइ ने फिक्स कर दिया है. इससे स्टूडेंट को किसी तरह की दिक्कतें ना हो. 23 नंबर के इस प्रश्न का उत्तर स्टेप वाइज देना होगा.
- हर विषय में जोड़ा गया वैल्यू बेस्ड प्रश्न
वैल्यू बेस्ड प्रश्न पहले साइंस विषय में ही पूछा जाता था. लेकिन इस बार से कॉमर्स और आर्ट्स विषय में भी वैल्यू बेस्ड प्रश्न पूछे जायेंगे. इसकी जानकारी बोर्ड ने प्रश्न पत्र भेजने से पहले ही स्कूलों को दे दिया है. इससे स्टूडेंट को इसकी जानकारी मिल सके. ज्ञात हो कि अभी तक वैल्यू बेस्ड प्रश्न को आप्सनल के रूप में दिया जाता था. लेकिन इस बार से इसे अनिवार्य कर दिया गया है.
- आम जिंदगी से जुड़ी रहेगी प्रश्न
वैल्यू बेस्ड प्रश्न आम जिंदगी से जुड़ा हुआ प्रश्न रहेगा. जिस भी विषय में वैल्यू बेस्ड प्रश्न पूछा जायेगा, उससे संबंधित आम दिनचर्या की किसी घटना को जोड़ कर प्रश्न पुछा जायेगा. बोर्ड के अनुसार इस प्रश्न से जुड़े तीन प्रश्न रहेंगे. इसका उत्तर अलग-अलग देना होगा. इससे जुड़े अगर डाटा हो तो उसे भी स्टूडेंट दे सकते है.
कोट
वैल्यू बेस्ड प्रश्न एकदम नये रूप में स्टूडेंट को दिया जाता है. इसे देखकर तुरंत आंसर देना होता है. इसमें इस चीज का टेस्ट होता है कि कैसे नये प्रश्न को देखकर उसे स्टूडेंट आंसर करते है. प्रश्न को टच करने पर भी मार्क्स मिल जाता है.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ
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एडमिट कार्ड की होगी जांच, परीक्षा हॉल में सीट रहेगा फिक्स
- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने मैट्रिक और इंटर की परीक्षा को लेकर बनाया नियम
संवाददाता, पटना
मैट्रिक और इंटर की परीक्षार्थी के एडमिट कार्ड की इस बार जांच होगी. बिना एडमिट कार्ड के जांच के परीक्षार्थी को परीक्षा हाॅल में प्रवेश नहीं करने दिया जायेगा. एडमिट कार्ड में छात्रों के फोटो से पहचान करवाने के बाद ही परीक्षा देने की अनुमति दी जायेगी. परीक्षा हाॅल में एडमिट कार्ड के साथ पेन, पेंसिल ही साथ में ले जाने की इजाजत है. इसकी जानकारी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से जिला शिक्षा पदाधिकारी को दी गयी है. जिला शिक्षा पदाधिकारी इस निर्देश को तमाम स्कूल और कॉलेजों को देंगे.
- हर परीक्षार्थी का सीट रहेगा एलॉट
इस बार मैट्रिक और इंटर की परीक्षा के लिए परीक्षा हॉल में हर परीक्षार्थी का सीट पहले से ही एलॉट रहेगा. हर परीक्षार्थी को अपने ही सीट पर बैठ कर परीक्ष देनी होगी. पहली बार बिहार बोर्ड की ओर से मैट्रिक और इंटर की परीक्षा में सीट एलॉटमेंट सिस्टम सीबीएसइ के तर्ज पर किया जायेगा. इस बार एक बेंच पर दो या तीन छात्र को ही बैठने की अनुमति दी जायेगी. ज्ञात हो कि अभी तक परीक्षा केंद्रों पर क्लास रूम का एलॉटमेंट ही होता था. क्लास रूम के साइज के अनुसार परीक्षार्थी को रखा जाता था. परीक्षा हाॅल में जिसे जहां इच्छा होती थी, वो वहां बैठ जाते थे. लेकिन इस बार से परीक्षार्थी उनके सीट के अनुसार ही बैठना होगा.
कोट
कदाचार मुक्त परीक्षा के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे है. इस बार परीक्षा सेंटर पर हर छात्र-छात्राओं के एडमिट कार्ड की जांच होगी. इसके अलावा सीट भी परीक्षा हॉल में एलॉट रहेगा.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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विज्ञप्ति निकाल अभिभावक को गुमराह करना बंद करें स्कूल
- सीबीएसइ ने कई स्कूलों को दिया नोटिस
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ ने जिन स्कूलों को डि-एफिलिएटेड कर दिया है, उन स्कूलों को सीबीएसइ का नाम अपने नेम प्लेट से हटाना होगा. सीबीएसइ के नाम का गलत यूज कर ऐसे स्कूल अभिभावकों को गुमराह कर रहे है. सीबीएसइ के नाम पर अभिभावकों को गुमराह करना बंद करें स्कूल नहीं तो स्कूल पर कार्रवाई की जायेगी. सीबीएसइ के नाम पर अभिभावकों को गुमराह कर रहे ऐसे स्कूलों को सीबीएसइ ने नोटिस दिया है. इन स्कूलों से सीबीएसइ ने कारण बताओ जवाब भी मांगा है.
- डि-एफिलिएटेड स्कूल लेते है सीबीएसइ के नाम पर नामांकन
अभी नये नामांकन का दौर हर स्कूलों में चल रहा है. ऐसे में अभिभावक सीबीएसइ के मान्यता प्राप्त स्कूल में नामांकन को प्राथमिकता देते है. ऐसे में डि-एफिलिएटेड स्कूल सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त बता कर नये नामांकन के लिए अभिभावकों को आकर्षित करते है. कई स्कूलों को तो सीबीएसइ कई सालों पहले ही मान्यता खत्म कर दिया है. फिर भी सीबीएसइ के नाम पर ये स्कूल अभिभावकों को गुमराह करते है.
- अभिभावकों के पत्र पर सीबीएसइ ने लिया एक्शन
नये नामांकन को लेकर अभिभावक स्कूल की इंक्वायरी कर रहे है. ऐसे में कुछ स्कूलों की लिस्ट अभिभावकों ने सीबीएसइ को भेजा है. इसमें न्यूज पेपर में छपी उन विज्ञप्ति की कटिंग भी अभिभावकों ने सीबीएसइ को भेजा है, जिसे सीबीएसइ ने मान्यता खत्म कर चुका है. अभिभावको ने सीबीएसइ से पत्र लिख कर पूछा है कि क्या इन स्कूलों को दूबारा मान्यता दे दी गयी है. अभिभावकों के इस इंक्वायरी पर सीबीएसइ ने स्कूलों के विरूद्ध एक्शन लिया है.
कोट
जिन स्कूलों को सीबीएसइ ने एफिलिएशन समाप्त कर दिया है. उन्हें सीबीएसइ का नाम यूज नहीं करना है. ऐसे में अगर कोई स्कूल नये नामांकन को लेकर अभिभावकों को गुमराह करते है तो यह गलत है.
आरआर मीणा, रीजनल ऑफिसर, सीबीएसइ पटना
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75 फीसदी एटेंडेंस पूरा नहीं, फिर भी 10वीं और 12वीं बोर्ड दे पायेंगे सीबीएसइ स्टूडेट
- सीबीएसइ ने किसी स्टूडेंट के प्राब्लम सॉल्व, मेडिकल रिजन बताने पर मिलेगी अनुमति
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने 10वीं और 12वीं के उन स्टूडेंट्स को राहत दिया है जिनका रेगूलर होते हुए 75 फीसदी एटेंडेंस पूरा नहीं हो पाया है. और वो 2016 में बोर्ड परीक्षा नहीं दे पा रहे है. रेगूलर स्टूडेंट के रूप में 75 फीसदी एटेंडेंस पूरा नहीं होने के कारण उन्हें परीक्षा फार्म नहीं भरने दिया गया है. जिन स्टूडेंट का रेगूलर होते हुए 75 फीसदी एटेंडेंस पूरा नहीं हो पाया है, उनके लिए सीबीएसइ ने स्पेशल परीक्षा फार्म भरने की तिथि निकाला है. सीबीएसइ के ऐसा करने से स्टूडेंट का साल बर्बाद होने से बच जायेगा.
- मेडिकल रिजन होगा बताना
यह सुविधा उन स्टूडेंट के लिए रखा गया है जो मेडिकल रिजन से स्कूल में रेगूलर क्लास नहीं कर पाये. ऐसे स्टूडेंट सीधे सीबीएसइ से जुड़ कर बोर्ड परीक्षा के लिए आवेदन भर सकते है. ऐसे स्टूडेंट काे सीबीएसइ प्राइवेट कैंडिडेंट के रूप में परीक्षा देने की अनुमति देगी. सीबीएसइ के अनुसार ऐसे कैंडिडेंट के अगर 10 फीसदी ही क्लास किया होगा फिर भी बोर्ड परीक्षा में शामिल हो पायेंगे. परीक्षा फार्म भरने से कैंडिडेंट को मेडिकल रिजन बताना होगा, जिसके कारण वो स्कूल में रेगूलर क्लास नहीं कर पायें.
- सैकड़ों स्टूडेंट नहीं दे पाते थे बोर्ड एग्जाम
हर साल बीमार होने के कारण रेगूलर क्लास नहीं करने से स्टूडेंट बोर्ड एग्जाम नहीं दे पाते थे. क्योंकि रेगूलर स्टूडेंट होते हुए 60 फीसदी एटेंडेंस जरूरी होता है. इसमें मेडिकल रिजन के तौर पर मात्र 15 फीसदी ही छूट बोर्ड की ओर से दिया जाता था. लेकिन अगर कोई स्टूडेंट लंबे समय के लिए बीमार हो गया तो ऐसे में उनके परीक्षा देने के लिए कोई प्रावधान नहीं था.
- भर सकते है आवेदन
सीबीएसइ ने परीक्षा फार्म भरने की तिथि निकाल दी है. ऐसे स्टूडेंट प्राइवेट कैंडिडेंट के रूप में परीक्षा फार्म भर पायेंगे. फार्म भरने में स्टूडेंट से कई जानकारी ली जायेगी. जैसे स्टूडेंट के स्कूल का नाम, सीबीएसइ के किस रिजन से स्टूडेंट आता है, स्टूडेंट का नाम आदि जानकारी,मेडिकल रिजन आदि के बाद ही परीक्षा फार्म स्टूडेंट भर पायेंगे.
कोट
सीबीएसइ के इस सुविधा देने से स्टूडेंट को काफी राहत मिलेगी. मेडिकल रिजन के कारण स्टूडेंट परीक्षा नहीं दे पाते थे. कई स्टूडेंट का साल बर्बाद हो जाता था. लेकिन इस सुविधा के बाद अब स्टूडेंट परीक्षा दे पायेंगे.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ
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कदाचार किया तो बिहार बोर्ड लगायेगी बीस हजार रुपये तक जुर्माना
एक साल से लेकर तीन साल तक के लिए परीक्षा से हो जायेंगे छात्र निष्कासित
संवाददाता, पटना
मैट्रिक और इंटर के परीक्षार्थियों को इस बार परीक्षा में कदाचार करना काफी महंगा पड़ सकता है. कदाचार करते पकड़े जाने पर उनसे दो हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जायेगा. इतना ही नहीं स्टैटिक मजिस्ट्रेट, उड़नदस्ता या बिहार बोर्ड के अध्यक्ष के निरीक्षण में चोरी पकड़े जाने वाले परीक्षार्थियों पर बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम 1981 के तहत कठोर कार्रवाई होगी. कदाचार पाये जाने पर इस बार परीक्षार्थी से लेकर वीक्षक, केंद्राधीक्षक व अभिभावकों पर भी गाज गिरेगी. 11 जनवरी को मुख्य सचिव स्तर पर कदाचार रोकने के लिए हुई बैठक में ही बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम 1981 को पूरी तरह से लागू करने का निर्देश दिया गया है.
- धारा-144 तोड़ा तो अभिभावक जायेंगे जेल
मैट्रिक और इंटर की परीक्षा केंद्र पर धारा-144 लगाया जायेगा. धारा-144 का इंप्लीमेंट सही से हो रहा है या नहीं, इसके लिए प्रत्येक सेंटर के मुख्य द्वार पर सीसी टीवी कैमरा लगाया जायेगा. अगर कोई अभिभावक धारा-144 को तोड़ने की कोशिश करेंगे या तोड़ेंगे तो ऐसे अभिभावक इस बार जेल चले जायेगे. ऐसे अभिभावक कम से कम पांच महीने और अधिक से अधिक छह महीने तक के लिए जेल जा सकते है. इसके अलावा दो हजार रूपये का जुर्माना भी अभिभावको पर लगाया जायेगा.
- एक साल से लेकर तीन साल तक के लिए हाेंगे निष्कासित
अभी तक कोई छात्र कदाचार करते हुए पकड़ में आने पर एक साल के लिए परीक्षा से निष्कासित होते रहे है. लेकिन इस बार निष्कासन की अवधि को बढ़ा दिया गया है. समिति की माने तो परीक्षा के दौरान कदाचार करते हुए छात्र पकड़े गये तो एक साल से तीन साल तक के लिए निष्कासित किये जा सकते है. अगर छात्र बदतमीजी करेंगे तो यह अवधि तीन साल तक किया जा सकता है.
- एक बेंच पर दो अधिक छात्र को बैठाया तो केंद्रधीक्षक पर होगी कार्रवाई
बोर्ड अध्यक्ष ने इस बार तमाम परीक्षा केंद्रों पर छात्र के बैठने के लिए भी नोटिस जारी किया है. बड़े बेंच पर तीन छात्र से अधिक परीक्षार्थी को नहीं बैठाया जा सकता है. वहीं छोटे साइज के बेंच पर दो छात्र की बैठेंगे. अगर निरीक्षण के दौरान बेंच पर अधिक छात्र बैठे हुए पाये गये तो ऐसे में केंद्राधीक्षक पर कार्रवाई की जायेगी.
- मामले की छानबीन करेंगे डीएसपी
अधिनियम के तहत किसी भी परीक्षा केंद्र पर किसी तरह की घटना होगी तो इसका छानबीन डीएसपी करेंगे. अधिनियम 1981 के तहत इस अधिनियम के धारा 10 के अधीन दोष सिद्धि के विरूद्ध जिला एंव सत्र न्यायाधीश के पास ही मामला जायेगा.
बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम 1981 के तहत ये है गलत
- परीक्षा में कदाचार करने में संलिप्त होना
- परीक्षा के दौरान कदाचार या चोरी में मदद या सहायता करने पर - प्रश्न पत्र को परीक्षा के दौरान बाहर भेजना
- परीक्षा कार्य संपन्न होने के पहले कोई बात लीक कर देना - परीक्षा केंद्र के नजदीक मटरगस्ती आदि के नियम को तोड़ना
- परीक्षा के दौरान कोई भी कागज या अन्य सामग्री का वितरण करना
यह लिये गये हैं निर्णय :-
- सामान्य, संवेदनशील व अति संवेदनशील ग्रेड में बांटे जायेंगे परीक्षा केंद्र- इसी ग्रेड के अनुसार केंद्रों पर पुलिस फोर्स की होगी तैनाती
- सीसीटीवी कैमरा लगाये जाने के साथ ही होगी वीडियोग्राफी- अभिभावकों को मुख्य द्वार से काफी दूर रखा जायेगा.
- जिले के किसी भी परीक्षा केंद्र पर कदाचार की सूचना मिलने पर उस केंद्र की परीक्षा रद्द होगी- शहर के फोटो स्टेट दुकानों खास कर परीक्षा केंद्रों के आस पास की दुकानों पर रहेगी विशेष नजर
कोट
कदाचार रोकने के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे. बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम 1981 को पूरी तरह से लागू किया जायेगा. अगर कोई छात्र कदाचार करेंगे और रंगे हाथ पकड़े गये तो उनके उपर बीस हजार रूपये तक का जुर्माना लग सकता है. इस कारण हम एक बार फिर तमाम छात्रों से अपील करते है कि कदाचार से दूर रहें.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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Tuesday, January 12, 2016
स्कूली बसों की सुरक्षा की होती है बस बातें, ना स्कूली बस सेफ और ना ही बच्चे
- सड़क सुरक्षा सप्ताह में भी स्कूली बच्चे नहीं है सेफ
संवाददाता, पटनाइन दिनों सड़क सुरक्षा सप्ताह चल रहा है. हर तरफ अवेयरनेस की बातें हो रही है. जिला प्रशासन से लेकर ट्रैफिक पुलिस तक स्कूली बच्चों के सुरक्षा को लेकर अभियान चलाये जा रहे है. पंपलेट बांटे जा रहे है. पंपलेट के माध्यम से स्कूली बच्चों को बस में बैठने के तरीके बताये जा रहे है. सुरक्षा की बस बातें हो रही है, हकीकत कुछ और है. पंपलेट में जितनी भी बातों के प्रति अवेयर किया जा रहा है, वो सारे के सारे बस कागजों तक ही सीमित है. ना तो उसका पालन पहले कभी हुआ और ना ही अभी सड़क सुरक्षा के दौरान हो रहा है.
अवेयर - स्कूल बस में बैठने में जल्दबाजी ना करें
हकीकत - स्कूल की बस स्कूल कैंपस के बाद सरकती रहती है. सरकती हुई बस में स्कूली बस में बच्चे बैठते है
अवेयर - एक कतार में रहकर बस में प्रवेश करें
हकीकत - कंडक्टर बच्चे को कतार में लगने देंगे तभी तो. जल्दी-जल्दी बच्चों को पकड़ कर बस में बैठाया जाता है
अवेयर - रेलिंग पकड़कर बस में प्रवेश करें
हकीकत - बस में रेलिंग रहती कहां है. दरवाजा पकड़ कर ही बच्चे बस में प्रवेश करते है
अवेयर - देख ले कि आपका बैग या कपड़े आदि कहीं भी ना फंसे
हकीकत - स्कूली बस में जगह-जगह जंग लगा रहता है. ऐसे में आये दिन बच्चे के बैग और यूनिफार्म फट जाते है. कई बार तो हाथ या पैर में भी लोहे से कट जाता है
अवेयर - सीधे अपनी सीट पर जाकर बैठ जायें
हकीकत - सीट मिले तभी ना बैठेंगे. आधे से अधिक बच्चे तो बस में खड़े ही रहते है
अवेयर - बस में चेहरा सामने की ओर रखें
हकीकत - बच्चे बस के अंदर क्या कर रहे है, उन्हें देखने वाला कोई नहीं होता है. अधिकांश स्कूली बसों मे बच्चों का हाथ खिड़की के बाहर निकला हुआ रहता है
अवेयर - बस से उतरते समय बस के रूकने का इंतजार करें
हकीकत - बस स्टॉपेज के अलावा भी बस बार-बार रूकती है. बस के रूकने के पहले ही बच्चे को गेट पर आने को कहा जाता है. इससे अचानक ब्रेक लगाने से बच्चे कई बार गिर भी जाते है
'आंसर की' की सुविधा देगा बीसीइसीइ
मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षा होने के सप्ताह भर बाद अभ्यर्थी देख पायेंगे अपना आंसर
संवाददाता, पटना
बिहार मेडिकल और इंजीनयरिंग के तमाम अभ्यर्थी अब अपना आंसर परीक्षा होने के एक सप्ताह के बाद ही कर पायेंगे. अभ्यर्थी अपने एग्जाम का आकलन कर पायेंगे. क्योंकि इस बार बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (बीसीइसीइ) द्वारा आंसर की जारी किया जायेगा. इससे अभ्यर्थी अपना आंसर का मिलान रिजल्ट निकलने के पहले ही कर पायेंगे. ज्ञात हो कि कई सालों से बीसीइसीइ ने आंसर की देना बंद कर दिया था. इसको लेकर 2015 में अभ्यर्थी ने इसका विरोध किया था. मामला हाई कोर्ट तक गया था. इस बार बीसीइसीइ द्वारा आंसर की जारी किया जायेगा.
- अप्रैल के थर्ड वीक में होगा पीटी की परीक्षा
जनवरी के तीसरे सप्ताह में बीसीइसीइ के लिए आवेदन लेना शुरू किया जायेगा. वहीं अप्रैल के तीसरे सप्ताह में बीसीइसीइ बिहार मेडिकल और इंजीनियरिंग की पीटी की परीक्षा लेने का निर्णय लिया है. वहीं मई के तीसरे सप्ताह में बिहार मेडिकल और इंजीनियरिंग की मेेंस की परीक्षा ली जायेगी.
- क्या है आंसर की
आंसर की परीक्षा होने के बाद जारी किया जाता है. आंसर की आब्जेक्टिव वाले परीक्षा की ही जारी किया जा सकता है. किसी प्रश्न का उत्तर क्या होगा, इसकी जानकारी दी जाती है. हर प्रश्न के सही उत्तर की जानकारी आंसर की के माध्यम से अभ्यर्थी को दिया जाता है. परीक्षा में पूछे गये तमाम सेट का उत्तर अलग-अलग दिया जाता है. अपने सेट के अनुसार अभ्यर्थी उत्तर का मिलान कर सकते है. इससे अभ्यर्थी को सही उत्तर का स्कोरिंग का पता चल जायेगा.
कोट
इस बार अभ्यर्थी को आंसर की सुविधा दी जायेगी. इससे अभ्यर्थी अपने आंसर का मिलान कर पायेंगे. पिछले साल अांसर की नहीं निकाला जा सका था. इसकी मांग अभ्यर्थी ने किया था. इस बार आंसर की जारी किया जायेगा.
अनिल कुमार, ओएसडी, बीसीइसीइ
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परीक्षा फार्म की अंतिम तिथि आज, तीन हजार छात्र को नहीं मिला स्क्रूटनी का रिजल्ट
- 2013-15 सत्र के तीन हजार छात्रों को पता नहीं कि उनका स्क्रूटनी हुआ या नहीं
संवाददाता, पटना
इंटर काउंसिल के तीन हजार छात्रों को पता ही नहीं है कि उनका इंटर में रिजल्ट क्या है. 2013-15 सत्र के यह छात्र अभी तक उधेरबुन है. पास है कि फेल है, यह जानने के लिए हर दिन ये छात्र इंटर काउंसिल में आते है, बिहार बोर्ड के वेबसाइट चेक करते है, लेकिन उन्हें अपने रिजल्ट की जानकारी नहीं मिली है. इस उधेरबुन के कारण छात्र 2016 में होने वाले इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए परीक्षा फार्म भी नहीं भर पा रहे है. यह मामला किसी और का नहीं बल्कि स्क्रूटनी में फंसे तीन हजार छात्रों का है. ये छात्र स्क्रूटनी के लिए आवेदन तो दिये लेकिन अभी तक उन्हें रिजल्ट नहीं मिला. स्क्रूटनी का रिजल्ट नहीं मिलने से अब दूसरा साल भी बर्बाद चला जायेगा. क्योंकि 2016 की इंटर की परीक्षा का अंतिम तिथि 12 जनवरी है, ऐसे में अगर छात्र विलंब दंड के साथ 15 जनवरी तक इंटर का परीक्षा फार्म नहीं भरेंगे तो वो इस साल भी इंटर की परीक्षा में नहीं बैठ पायेंगे.
- स्क्रूटनी हो गया, बस डाला नहीं गया वेबसाइट पर
स्क्रूटनी के रिजल्ट के इंतजार में साइंस के पांच सौ छात्र है तो वहीं आर्ट्स में दो हजार और काॅमर्स में पांच सौ छात्र का मामला फंसा हुआ है. इन छात्राें के स्क्रूटनी का काम संपन्न हो चुका है. सब्जेक्ट के एक्सपर्ट ने स्क्रूटनी करके दो महीने पहले ही सौंप दिया. स्क्रूटनी के बाद रिजल्ट भी तैयार हो चुका है. बस बोर्ड अध्यक्ष और सचिव के साइन के बाद उसे प्रोसेसर के पास भेजा जाना बांकी है. प्रोसेसर के पास से ही रिजल्ट में संशोधन किया जायेगा. संशाेधन करके उसे वेबसाइट पर डाल दिया जायेगा. जिससे छात्र अपना संशोधित रिजल्ट देख कर डाउनलोड कर सकते है.
- आठ महीने से चल रहा स्क्रूटनी का काम
20 मई 2015 को इंटर साइंस का रिजल्ट आया. इसके एक सप्ताह के बाद आर्ट्स और कॉमर्स का रिजल्ट आया. जून के पहले सप्ताह में स्क्रूटनी के लिए अावेदन लिया गया. 70 हजार आवेदन लिये गये थे. स्क्रूटनी का काम शुरू हुआ. लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी स्क्रूटनी का काम पूरा नहीं हो पाया.
कोट
स्क्रूटनी में जो भी छात्र काे रिजल्ट नही मिला है, उन्हें जल्द से जल्द दिया जायेगा. अगर रिजल्ट में फेल होंगे तो उन्हें परीक्षा फार्म भरने का समय दिया जायेगा. हम इसे गंभीरता से लेंगे. छात्र का साल नहीं बर्बाद होगा.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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Sunday, January 10, 2016
सीबीएसइ के खेल कैलेंडर में अब कबड्डी और बॉक्सिंग भी शामिल
खेल को लेकर सीबीसइ ने बजट किया तीन गुणा
रिंकू झा, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन की ओर से 2015-16 सत्र में खेल कैलेंडर के फाॅर्मेट को चेंज कर दिया गया है. नया खेल कैंलेंडर स्कूलों को जल्द भेजा जायेगा. पहले जहां सीबीएसइ स्कूलों में ब्वॉयज और गर्ल्स के इवेंट एक ही जगह होते थे, अब ये इवेंट्स अलग-अलग जगहों पर होंगे. 2014-15 के शैक्षणिक सत्र में सीबीएसइ स्कूलों में 172 वेन्यू पर गेम्स करवाये गये थे. लेकिन इस बार 2015-16 सत्र में 340 गेम्स सीबीएसइ स्कूलों में करवाये जायेंगे.
- कबड्डी और बॉक्सिंग भी जुड़ा खेल में
सीबीएसइ स्कूलों में अब बॉक्सिंग और कबड्डी भी खेला जायेगा. 2015-16 सत्र से सीबीएसइ इन दोनों गेम को खेल कैलेंडर में शामिल किया है. नये सत्र से फिटनेस टेस्ट के फार्मेट को भी चेंज कर दिया गया है. अब तक स्कूल अपने नियम के अनुसार स्टूडेंट का फिटनेस टेस्ट लेता रहा है. लेकिन सीबीएसइ के फिटनेस टेस्ट में शामिल होने के बाद ही स्टूडेंट खेल में शामिल हो पायेंगे.
- तीन गुणा हुआ खेल बजट
गेम्स की संख्या बढ़ने के साथ सीबीएसइ ने इस सत्र से खेल पर बजट भी बढ़ा दिया है. स्कूल के सारे गेम्स के बजट पर तीन गुणा कर दिया गया है. अभी तक सीबीएसइ हर साल खेल पर तीन करोड़ रूपये खर्च करता रहा है. लेकिन इस सत्र से तीन करोड़ से तीन गुणा गेम्स पर खर्च होगा. सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों से लिस्ट मांगी है.
- कॉमन यूनिक आइडी होगा शुरू
नये शैक्षणिक सत्र से स्टूडेंट के लिए कॉमन यूनीक आइडी भी शुरू किया जायेगा. अभी तक सीबीएसइ हर एक बच्चे का एक आइडी देता रहा है, जिसमें उसका पूरा रिकार्ड रहता था. खेल के लिए स्टूडेंट को अलग से एक आइडी दिया जाता था. अब इन स्टूडेंट की आइडी और खेल वाला आइडी दोनों को मिला कर एक काॅमर्स यूनिक आइडी बनाया जायेगा. इस कॉमन यूनिक आइडी के माध्यम से स्टूडेंट की शैक्षणिक और खेल दोनों का रिकार्ड रखा जायेगा. इसे ऑन लाइन भी देखा जा सकेगा.
कोट
खेल कैलेंडर कई सालो के बाद चेंज किया गया है. इससे खेल के प्रति जागरूकता बढ़ेगी. फिटनेस टेस्ट को भी अलग कर दिया गया है. अब फिटनेस टेस्ट में पास होने के बाद ही खेल में बच्चे शामिल हो पायेंगे.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ
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डिजिटल बुक से हाेगी अब स्कूलों में पढ़ाई
- नये सेशन से होगा लागू, सीबीएसइ ने डिजिटल बुक को डाला वेबसाइट पर
संवाददाता, पटना
नये सेशन से ना तो स्कूल को और ना स्टूडेंट को बुक खरीदने की चिंता रहेगी. क्योंकि इस बार से डिजिटल फार्मेट में सीबीएसइ बुक उपलब्ध करवा रहा है. बोर्ड ने डिजिटल फार्मेट बुक को वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है. इस आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है. स्कूलों में भी इसी फार्मेट से अब पढ़ाई होगी. नये सेशन से सीबीएसइ ने तमाम स्कूलों को इसे लागू करने का निर्देश दिया है. डिजिटल फार्मेट की पढ़ाई के लिए स्कूलों में प्रोजेक्टर पर पढ़ाई होगी. डिजिटल फार्मेट की पढ़ाई के लिए स्कूलों को बुक को डाउनलोड करने का भी निर्देश बोर्ड की तरफ से दिया गया है.
- नये सिलेबस पर आधारित है डिजिटल फार्मेट
डिजिटल फार्मेट काे पूरी तरह से नये सिलेबस पर तैयार किया गया है. नये सेशन से जो भी विषय के सिलेबस में चेंजेज किये गये, उन सारे टाॅपिक को डिजिटल फार्मेट में डाला गया है. सीबीएसइ की माने तो नये सेशन से नया सिलेबस लागू किया जायेगा. डिजिटल फार्मेट वाले नये सिलेबस से ही स्कूलों में पढ़ाई होगी.
- हर क्लास के लिए है डिजिटल फार्मेट
सीबीएसइ ने हर क्लास के लिए अलग-अलग बुक का डिजिटल फार्मेट डाला है. बुक फ्रर्ट पेज के अलावा सारे पेज को डाला गया है. डिजिटल फार्मेट के बुक पढ़ने में भी सुविधा होगी. बुक को खोलना और पढ़ना भी बहुत आसान है. हर क्लास के हर विषय का किताब डाला गया है.
- डिजिटल फार्मेट वाले बुक ही होंगे लागू
सीबीएसइ ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि जिन बुक को डिजिटल फार्मेट में डाला गया है, वहीं सिलेबस है. स्कूल अपने तरफ से कोई दूसरी प्राइवेट पब्लिशर्स के बुक लागू नहीं करेगा. सीबीएसइ स्कूलों में केवल एनसीइआरटी के बुक ही लागू होंगे. इसका फार्मेट डिजिटल रूप में वेबसाइट पर डाल दिया गया है. बोर्ड द्वारा जिन बुक्स की सूची वेबसाइट पर डाला गया है, उन्हीं बुक्स को स्कूल में लागू करना है. बोर्ड ने स्कूलों को आदेश दिया है कि किसी भी क्लास में एनसीइआरटी के अलावा कोई भी बुक लागू नहीं किया जायेगा.
- बुक खरीदने की नहीं रहेगा टेंशन
अब स्टूडेंट और पैरेंट्स को बुक खरीदने का टेंशन नहीं होगा. पटना में नये सेशन शुरू होने के बाद एनसीइआरटी बुक की किल्लत हो जाती थी. बुक नहीं मिलने के कारण स्टूडेंट्स को काफी दिक्कतें होती थी. कई विषय के किताबों की यह स्थिति होती थी कि कई-कई महीनों तक बुक नहीं मिल पाती है. ऐसे में डिजिटल फार्मेट में बुक होने से स्टूडेंट को राहत मिलेगी. अब डाउनलोड करके स्टूडेंट अपनी पढ़ाई कर पायेंगे.
आंसर कॉपी पर लिया जायेगा परीक्षार्थी का सिग्नेचर
- सीबीएसइ 10वीं बोर्ड की परीक्षा में पहली बार होगा लागू
संवाददाता,पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) अब 10वीं बोर्ड देने वाले परीक्षार्थियों से आंसर काॅपी का सिग्नेचर लेगा. 2016 में 10वीं बोर्ड देने वाले तमाम परीक्षार्थी से उनके आंसर कॉपी पर सिग्नेचर लिया जायेगा. एक सिग्नेचर फर्स्ट पेज पर जहां पर रॉल नंबर और बांकी डिटेल्स देना होता है. वहीं दूसरा सिग्नेचर अंतिम आंसर लिखने के बाद वहीं पर करेंगे. अंतिम आंसर लिखने के बाद स्टूडेंट अपना सिग्नेचर करेंगे, उसके बाद ही अांसर कॉपी जमा किया जायेगा. इस संबंधित सारी जानकारी जल्द ही सेंटर सुप्रीडेंटेंट को भेजा जायेगा.
- बिना सिग्नेचर नहीं लेना है आंसर काॅपी
अभी तक सीबीएसइ की परीक्षा में केवल स्टूडेंट को अपना नाम और सब्जेक्ट के नाम ही लिखने होते थे. पहली बार बोर्ड की तरफ से यह व्यवस्था की गयी है. बोर्ड की ओर से तमाम सेंटर सुप्रीडेंटेट को यह निर्देश दिया जायेगा कि बिना सिग्नेचर के आंसर कॉपी स्टूडेंट से नहीं लेंगे. हर स्टूडेंट से सिग्नेचर करवाना एग्जामिनेशन हॉल में मौजूद टीचर की ड्यूटी होगी. आंसर कॉपी पर हर स्टूडेंट का सिग्नेचर होना मस्ट है.
- स्कूल और बोर्ड बेस्ड दोनों में होगा लागू
सीबीएसइ का यह नियम 10वीं के स्कूल बोर्ड और बोर्ड बेस्ड दोनों में ही लागू किया जायेगा. स्कूल बेस्ड बोर्ड के लिए होम सेंटर ही बनाया जाता है. आंसर कॉपी में किसी तरह की फेर बदल ना हो, इसके लिए 10वीं बोर्ड की परीक्षा में इसे लागू किया जायेगा. इस सिस्टम के लागू होने से आंसर काॅपी के साथ किसी तरह का छेड़छाड़ नहीं किया जा सकेगा. बोर्ड सूत्रों की माने तो पिछले कई सालों में बोर्ड के पास ऐसे केसेज आयें है जिसमें अांसर कॉपी बदल देने की शिकायत अभिभावकों ने किया है. इस सिस्टम से इन सारी शिकायताें को दूर किया जायेगा.
कोट
आंसर कॉपी पर स्टूडेंट का सिग्नेचर पहली बार बोर्ड की ओर से लिया जायेगा. पैरेंट्स और स्टूडेंट को यह विश्वास होगा कि उनके आंसर काॅपी को बदला नहीं जा सकेगा. दोनों की बोर्ड बेस्ड में इसे लागू किया जायेगा.
सीबी सिंह, सचिव, पाटलिपुत्र सहोदया
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Saturday, January 9, 2016
दो स्कूल से कराया इंटर परीक्षा का रजिस्ट्रेशन, तो दोनों जगह फॉर्म भरने से होंगे वंचित
- इलेक्ट्रॉनिक डाटा बेस से जांच के दौरान पकड़ में आ रही गड़बड़ी
- ऐसे करीब 200 छात्रों की सूची हुई तैयार, फॉर्म भरने से किया गया वंचित
संवाददाता, पटना
मसौढ़ी के छात्र राेहित कुमार ने वर्ष 2016 में इंटर परीक्षा देने के लिए मसौढ़ी के ज्योति कुंवर से रजिस्ट्रेशन कराया. यही नहीं, इस छात्र ने गर्दनीबाग स्थित बीडी इवनिंग कॉलेज से भी रजिस्ट्रेशन करा रखा था. इसका खुलासा तब हुआ जब इंटर काउंसिल के इलेक्ट्रॉनिक डाटा बेस में सभी छात्रों का मिलान किया गया. जांच में एक ही छात्र के दो जगह से फॉर्म भरे जाने का मामला पता चलते ही इस छात्र के फॉर्म भरे जाने पर रोक लगा दी गयी है. यही नहीं, रोहित की तरह पूरे बिहार से करीब 200 ऐसे छात्र पकड़ में आये हैं, जिन्होंने दो जगह से रजिस्ट्रेशन करा रखा था. बिहार बोर्ड ने ऐसे तमाम छात्रों की सूची बना कर संबंधित स्कूलों को भेज दी है और उनके फॉर्म भरने पर रोक लगा दी है.
- दो जगह से रजिस्ट्रेशन कराने वालों पर बिहार बोर्ड सख्त
इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए दो जगह से रजिस्ट्रेशन कराने वालों पर बिहार बोर्ड इस बार काफी सख्त है. समिति कार्यालय के कंप्यूटर डिपार्टमेंट को तुरंत इस बात की जानकारी मिल जा रही है. दो कॉलेज या दो स्कूलों से परीक्षा फार्म भरने वाले छात्रों के नाम, माता पिता का नाम, सब्जेक्ट आदि का मिलान होता है. ऐसे छात्रों को कंप्यूटर के माध्यम से तुरंत पकड़ा जा रहा है.
- नहीं पकड़ में आ पाते थे छात्र
पहले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया मैनुअल होता था. इस कारण छात्रों के दो जगहों से रजिस्ट्रेशन करवाने की जानकारी इंटर काउंसिल को नहीं होता था. परीक्षा फार्म भी ऐसे छात्र भर लेते थे. एडमिट कार्ड भी आ जाता था. ऐसे छात्र एडमिट कार्ड देखकर वैसे सेंटर पर परीक्षा देने जाते थे जहां पर वो कदाचार आसानी से कर लेते थे. लेकिन अब कंप्यूटराइज रजिस्ट्रेशन होने से दो जगहों से रजिस्ट्रेशन करवाने वाले छात्रों को आसानी से पकड़ जा रहा है.
कोट
दो जगहों से रजिस्ट्रेशन करवाने वाले छात्रों के रजिस्ट्रेशन को ही रिजेक्ट कर दिया जायेगा. ऐसे छात्र किसी भी कॉलेज से परीक्षा फार्म नहीं भर पायेंगे. कई छात्र पकड़ में आयें है. इसकी सूचना संबंधित कॉलेज या स्कूल को दी जा रही है. ऐसे छात्र के परीक्षा फार्म नहीं भराने की जानकारी स्कूलों को भेज दी गयी है.
हरिहर नाथ झा, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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स्कूल नहीं देता कैंपस, कॉपरेटिव की जमीन नहीं होती तो कहां लगती दो हजार स्कूली बस और वैन
- पाटलिपुत्र कॉपरेटिव की जमीन पर लगती है नॉट्रेडम एकेडमी की सारी स्कूली गाड़यां
संवाददाता, पटना
समय - 1.45 बजे. स्कूल के सामने ऑटो और स्कूली वैन लगनी शुरू हो गयी.
समय - 2 बजे. प्राइवेट बड़ी-बड़ी गाड़ियां आने लगी समय - 2.15 बजे. अभिभावक गाड़ियों में आने लगे. स्कूल के गेट के पास उतर कर वहीं खड़े होने लगे
समय - 2.30 बजे. अब तक स्कूल के सामने दो हजार लगभग गाड़ियां खड़ी हो गयी. वहीं स्कूल के मेन गेट पर अभिभावक. स्कूल की छुट्टी हुई. एक साथ लगभग पांच हजार स्टूडेंट्स एक साथ निकले. शुक्र है पाटलिपुत्र कॉपरेटिव की जमीन है. अगर यह पार्क की जमीन नॉट्रेडम एकेडमी स्कूल के सामने नहीं होती तो स्कूली बस, ऑटो और वैन के लिए केवल सड़क ही बचती. स्कूल का अपना लंबा कैंपस है, लेकिन स्कूल कैंपस में गाड़ियां लगाने की अनुमति नहीं है. ऐसे में दो हजार गाड़ियां कॉपरेटिव की जमीन पर और बांकी सड़क पर लगी रहती है. छुट्टी के बाद चार हजार स्कूली गर्ल्स और पांच सौ के लगभग अभिभावकों की भीड़, स्कूल जाम की स्थिति बनाने के लिए काफी है. प्रभात खबर के स्कूल कैंपस में लगे स्कूल कंवियेंस अभियान के तहत बुधवार को स्कूल की छुट्टी के बाद लाइव नजारा देखा गया. अगर स्कूल कैंपस में स्कूली कंवियेंस के लिए जगह दिया जायें तो ना तो जाम की समस्या होगी और ही स्टूडेंट के सुरक्षा को लेकर अभिभावक परेशान होंगे.
- कैंपस में लगे गाड़ियां तो अभिभावक रहेंगे निश्चित
नॉट्रेडम एकेडमी का अपना कोई कंवियेंस नहीं है. ऐसे में 90 फीसदी अभिभावक खुद की गाड़ी से बच्चे को लेने आते है. ऑटो या स्कूली वैन पर उन्हें विश्वास नहीं है. इसके अलावा ऑटो या वैन को स्कूल के अंदर जाने की अनुमति नहीं है. कई बार ऑटो या वैन वाले स्टूडेंट को स्कूल से काफी पहले ही छोड़ देते है और छुट्टी के बाद काफी दूर में गाड़ियां खड़ी करते है. अगर कैंपस में प्राइवेट स्कूली ऑटो, वैन अौर स्कूली बस को लगाने की इजाजत मिल जायें तो काफी हद तक अभिभावकों का जमावड़ा स्कूल के गेट नहीं होगा.
- पांच हजार स्टूडेंट के लिए दो हजार है गाड़ियां
नॉट्रडेम एकेडमी में लगभग पांच हजार स्टूडेंट्स पढ़ती है. इन स्टूडेंट को लेने के लिए हर दिन दो हजार गाड़ियां आती है. इसमें प्राइवेट गाड़ियों की संख्या अधिक होती है. अधिकांश अभिभावक खुद ही स्टूडेंट को लेने के लिए स्कूल आते है. स्कूल से मिली जानकारी के अनुसार एक बच्चे को लेने के लिए एक गाड़ी आती है. इससे गाड़ियों की संख्या काफी बढ़ जाती है. दो हजार गाड़ियों में 25 से 30 स्कूली ऑटो, 100 के लगभग स्कूली वैन, 20 से 25 छोटे साइज वाला सिटी राइड बस है, इसके अलावा लगभग आठ सौ के लगभग केवल प्राइवेट गाड़ियों से स्टूडेंट स्कूल आती है.
- परिवहन मित्र की मिलती है मदद
हाल में स्कूल की ओर से एक परिवहन मित्र की टीम बनायी गयी है. 19 लोगों की इस टीम में ऑटो वाले को शामिल किया गया है. स्कूल की छुट्टी के समय गाड़ियों को करेंज से लगवाना और छुट्टी के बाद स्टूडेंट को गाड़ियों में बैठाने का काम यह टीम करती है. लेकिन इस टीम की ड्यूटी केवल स्कूल के बाहर ही है. अगर इस टीम को स्कूल कैंपस में सवारी के साथ जाने की इजाजत मिल जायें तो बाहर एरेंज करने की जरूरत नहीं होगी. परिवहन मित्र के अध्यक्ष विनय कुमार ने बताया कि जब से हम लोग यहां की ट्रैफिक संभाल रहे है, उसके बाद थोड़ी स्थिति बेहतर हुई है. पहले तो दो घंटा स्कूल के गेट से निकलने में लग जाता था.
कोट
कॉपरेटिव की जमीन पर प्राइवेट ऑटो और वैन लगते है. अब यह एरिया म्यूनिसपल कॉपोरशन का होने वाला है. इसके बाद हम म्यूनिसपल कॉपोरेशन से यहां पर गाड़ियों की पार्किंग के लिए आवेदन देंगे. काफी संख्या में अभिभावक बड़ी-बड़ी गाड़ियां लेकर बच्चे को लेने आते है. इससे जाम अधिक लगता है. पार्किंग की जमीन मिल जायेगी, तो समस्या दूर होगी.
सिस्टर जेस्सी, प्रिंसिपल, नॉट्रेडम एकेडमी
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सावधानी हटी, दुर्घटना घटी.... सड़क क्राॅस करने में बच्चे नहीं देखते है दूसरी सवारी
- स्कूल की छुट्टी के साथ शुरू होता है आपाधापी
संवाददाता, पटना
समय - 1:30 बजे. स्कूल के बाहर अभिभावकों की गाड़ियां लगनी शुरू हो जाती है
समय - 1:45 बजे. अभिभावक बच्चे को लेने के लिए गेट के पास खड़े है. वहीं कुमचा वाले भी अपनी जगह बना चुके हैसमय - 2 बजे. स्कूल की छुट्टी के साथ बच्चे बाहर निकलना शुरू करते है. कुछ बच्चे अभिभावक के साथ तो कुछ अकेले होते है. सड़क के दूसरी ओर लगी स्कूली बस, ऑटो और वैन की ओर बच्चे जाते है. स्कूल के दो टीचर बच्चे को सड़क क्रास करवाने के लिए वहां मौजूद रहते है
- समय - 2.20 बजे. जो बच्चे स्कूली बस से जाते है, वो अभी भी अपने बस का इंतजार स्कूल के बाहर कर रहे है. ऐसे बच्चे के लिए ना तो स्कूल प्रशासन होता है और ना ही अभिभावक स्कूल ने इंतजाम कर रखा है. छुट्टी के समय स्कूल के कुछ टीचर सड़क पर आकर खड़े भी होते है. ट्रैफिक पुलिस भी रहती है. लेकिन जिस तरह से इंतजाम होता है और एक साथ स्कूली बच्चे, अभिभावक, आम लोग और सवारियां रहती है, उसे देख कर बस इतना ही कहा जा सकता है कि थोड़ी सी भी लापरवाही होने से कभी भी घटना घट सकती है. सावधानी हटी,दुर्घटना घटी.... कुछ ऐसी ही हालत होते है सेंट जेवियर हाई स्कूल की छुट्टी के समय. स्कूल की छुट्टी होते ही बच्चे दौड़ लगाना शुरू करते है. सड़क क्रास कर अपनी सवारी की तरफ जाते है. आधे घंटे का यह समय बच्चों की सुरक्षा को लेकर काफी टफ होता है. स्कूल कैंपस में ही लगे स्कूली सवारी की आज की कड़ी में प्रभात खबर की ओर से सेंट जेवियर हाई स्कूल की छुट्टी के समय के हालात को देखा गया. स्कूल कैंपस में जगह नहीं देने की खामियाजा स्कूल प्रशासन के साथ आम लोग और ट्रैफिक पुलिस भुगत रही है. अगर स्कूल कैंपस में इन गाड़ियों को लगाने की जगह दे दी जायें तो छुट्टी के समय इस तरह ही आपाधापी नहीं होगी.
- तीन हजार स्टूडेंट एक साथ होते है सड़क
पर स्कूल का अपना कंवियेंस नहीं होने के कारण बच्चे प्राइवेट बस, ऑटो, वैन, रिक्शा आदि से स्कूल आते है. ये सारी कंवियेंस सड़क के दूसरी तरफ गांधी मैदान के वाउंड्री वाल की तरफ खड़ा होता है. दो तरफ की व्यस्त सड़क को क्रास करके स्टूडेंट को दूसरी ओर जाना होता है. एक साथ स्कूल से तीन हजार स्टूडेंट निकलते है. कोई इधर तो कोई उधर की ओर भागते रहते है. ऐसे में इंतजाम होने के बावजूद कभी भी कोई घटना घट सकती है.
- चलती बस में बैठते है बच्चे
जो बच्चे प्राइवेट स्कूल बस से घर जाते है. वो स्कूल के गेट के पास खड़े होते है. ऐसे में छोटे सवारी वाले बच्चे चले जाते है तो दूसरे साइड से स्कूल के गेट के पास प्राइवेट बस आकर रूकती है. ट्रैफिक जाम ना हो, इस कारण बस धीरे-धीरे चलती रहती है और उसी में बच्चे चढ़ते है. ऐसे में वहां पर खड़ी ट्रैफिक पुलिस भी कुछ नहीं कर पाती है. स्कूल की छुट्टी के आधे घंटे तक ये बच्चे अपने बस का इंतजार सड़क किनारे खड़े होकर करते है.
कोटहमारे लिए बहुत ही टफ होता है. बच्चों की सुरक्षा को लेकर हम इंतजाम करते है. हमारे कैंपस में जगह नहीं है, कहां इतना गाड़ियों को लगाया जायेगा. प्ले स्कूल के बच्चों की गाड़ियां केवल स्कूल कैंपस में लगता है. अभिभावको से हम बार-बार कहते है घर से नजदीक वाले स्कूल में ही बच्चे का नामांकन करवाये. लेकिन ऐसा नहीं होता है.
फादर जैकब, प्रिंसिपल, सेंट जेवियर हाई स्कूल, गाधी मैदान \\B
चार जिलों की लापरवाही ने रोक रखा है मैट्रिक के परीक्षा फाॅर्म घाेषित करने की तिथि
दो बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी नहीं दिया अब तक सेंटर की लिस्ट
संवाददाता, पटना
मैट्रिक का रजिस्ट्रेशन हो चुका है. चेक लिस्ट तैयार नहीं हुआ है. अभी तक मात्र 18 जिलों ने ही बिहार विद्यालय परीक्षा को चेक लिस्ट भेजा है. बांकी जिलों से चेक लिस्ट नहीं आया है. वहीं चार जिलो ने अभी तक सेंटर का भी निर्धारण की लिस्ट समिति काे नहीं भेजा है. जिलाें के इस लापरवाही के कारण समिति का सारा काम पेंडिंग पड़ा हुआ है. सेंटर लिस्ट नहीं होने से परीक्षा संबंधित योजनाएं ठप पड़ी है.
- दो बार मांगा जा चुका है लिस्ट
वैशाली, छपरा, दरभंगा और शिवहर ऐसे जिलें है जहां से समिति के पास सेंटर की लिस्ट नहीं आयी है. सेंटर की लिस्ट आने के बाद समिति तमाम सेंटर की जानकारी लेती है. किस सेंटर पर कितने छात्र है. किस सेंटर पर कौन-कौन से विषयों की परीक्षा होगी. किस दिन की परीक्षा में कितने छात्र शामिल होंगे. इस पूरे काम में महीना भर लग जाता है. समिति के अनुसार 15 दिसंबर तक ही सेंटर की लिस्ट जिलों को भेजने का समय दिया गया था. इसके बाद 29 दिसंबर तक तिथि बढ़ाई गयी. लेकिन अभी भी चार जिलो ने सेंटर की लिस्ट नहीं भेजी है.
- चेक लिस्ट आने के बाद ही निकलेगा परीक्षा फार्म की तिथि
चेक लिस्ट के लिए तमाम जिलों को एक महीने का समय दिया गया था. दिसंबर बीत गया, लेकिन केवल 18 जिलो ने ही चेक लिस्ट की प्रक्रिया पूरी कर समिति कार्यालय भेजा है. बांकी जिलों से चेक लिस्ट नहीं आया है. जब तक चेक लिस्ट नहीं आयेगा, तब तक परीक्षा फार्म की तिथि घोषित नहीं हो पायेगी. परीक्षा सेंटर की जानकारी होने के बाद समिति कार्यालय से आंसर काॅपी का वितरण संबंधित योजनाएं शुरू की जाती है.
कोट
जिलाें को कई बार रिमाइंडर भेजा गया है. अभी तक चार जिलों ने परीक्षा सेंटर की लिस्ट हमें नहीं भेजी है. इस कारण समिति को काफी परेशानी हो रही है. फरवरी में इंटर की परीक्षा है अभी तक सेंटर का निर्धारण नहीं हो पाया है. सेंटर के निर्धारण होने के बाद ही उत्तर पुस्तिका संबंधित काम होता है.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति\\B
पुलिस संरक्षण में होगी इस बार की मैट्रिक-इंटर की परीक्षा
- 11 जनवरी को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी राज्यस्तरीय बैठक
- सुरक्षा व विधि-व्यवस्था के मुद्दे पर होगी चर्चा
संवाददाता, पटना
मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा में इस बार भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की जायेगी. हर सेंटर पर परीक्षार्थी की संख्या के अनुसार पुलिस बल को लगाया जायेगा. इसको लेकर 11 जनवरी को मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलायी गयी है. इस बैठक में शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव डीएस गंगवार, डीजीपी पीके ठाकुर और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह सहित संबंधित कई अधिकारी शामिल होंगे. बैठक में पुलिस बल की संख्या और ड्यूटी का निर्धारण होगा. ज्ञात हो कि अभी तक मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा में होमगार्ड को तैनात किया जाता रहा है. लेकिन कदाचार मुक्त परीक्षा लेने के लिए इस बार जिला पुलिस बल को लगाया जायेगा.
- सेंटर के चारों ओर होगी पुलिस की नियुक्ति
हर सेेंटर पर मुख्य द्वार के अलावा सेंटर के आगे और पीछे भी पुलिस बल को लगाया जायेगा. जिससे कहीं से भी कदाचार की कोई गुंजाइश न बन सके. इस बार सेंटर के आसपास से अभिभावकों को भी दूर रखा जायेगा. परीक्षा शुरू होने के बाद आस पास से अभिभावकों को भी हटा दिया जायेगा. तमाम अभिभावक सेंटर से 50 फीट दूर ही खड़े हो सकेंगे. इसके लिए सेंटर के चारों ओर पुलिस बल को लगाया जायेगा.
- केंद्राधीक्षक पर होगी कार्रवाई
किसी सेंटर पर अगर कदाचार या चोरी करते हुए परीक्षार्थी पकड़े गये तो केंद्राधीक्षक इसके लिए दोषी माने जायेंगे. अभी तक केवल परीक्षार्थी को ही कदाचार के लिए एक्सपेल्ड किया जाता रहा है. लेकिन इस बार केंद्राधीक्षक पर भी कार्रवाई की जायेगी. कार्रवाई के तौर पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है. इसके अलावा अगर किसी सेंटर पर कमरे विशेष में चोरी हो रही होगी तो ऐसे में वीक्षक पर भी कार्रवाई होगी. ऐसे शिक्षक की नौकरी भी जा सकती है.
कोट
इस बार कदाचार मुक्त परीक्षा को लेकर हम अभी से सतर्कता बरत रहे है. छात्र और अभिभावक के अलावा इस बार केंदाधीक्षक और वीक्षक पर भी कार्रवाई होगी. हर सेंटर पर पुलिस बस लगाये जायेंगे.
हरिहर नाथ झा, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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इस साल इंटर में दो लाख अधिक बच्चों का हो सकेगा नामांकन
- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने 101 विद्यालयों को दी संबद्धता
रिंकू झा, पटना
इस साल मैट्रिक की परीक्षा में पास करने वाले दो लाख अधिक बच्चे इंटर में नामांकन ले सकेंगे. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने इसके लिए राज्य के विभिन्न जिलों में 101 विद्यालयों काे संबंद्धता प्रदान कर दी है. शेष विद्यालयों के संबद्धता की जांच चल रही है. फिलहाल इंटर में करीब आठ लाख छात्रों का नामांकन संभव हो पाता है, जिसकी संख्या बढ़ कर अब दस लाख तक हो जायेगी. हालांकि हर साल मैट्रिक परीक्षा पास करने वाले छात्रों की तुलना में यह आंकड़ा फिर भी काफी कम होगा. जांच की प्रक्रिया पूरी होने पर कुछ और भी विद्यालयों को संबंद्धता दी जायेगी.
- दो लाख बढ़ जायेंगे 2016 में परीक्षार्थी
2016 की मैट्रिक परीक्षा में इस साल दो लाख अधिक छात्र बैठेंगे. 2015 में जहां 14 लाख के लगभग मैट्रिक में परीक्षार्थी थे, वहीं 2016 में सीधे करीब 16 लाख परीक्षार्थी शामिल होंगे. इसके अलावा 2015 में लगभग तीन लाख छात्र फेल कर गये थे. ये परीक्षार्थी भी इस बार मैट्रिक परीक्षा में शामिल होंगे. समिति की माने तो हर साल छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है.
- 360 सीटों के लिए मिली मान्यता
हर विद्यालयों को कम से कम 360 सीटों के लिए संबंद्धता दी गयी है. संबंद्धता साइंस, आर्ट्स और कामर्स तीनों स्टीम के लिए दिया गया है. हर स्टीम के 120 सीटों (एक सेक्शन में 40 छात्र को मिला है) के लिए दिया गया है. जिन विद्यालयों का इंफ्रास्ट्रक्चर समिति के शर्ताे को पूरा किया है, उन्हें तीन सेक्शन मान्यता दी गयी है. इन विद्यालयों में 2016 से छात्र नामांकन ले पायेंगे. इंटर स्तर तक के विद्यालयों की संख्या हर जिलों में बढ़ाया गया है. संबंद्धता के लिए हर जिलों के विद्यालयों को फोकस किया गया है.
- जांच के बाद मिलती है संबद्धता
विद्यालयों को जांच के बाद ही संबद्धता दी जाती है. इसके लिए पहले विद्यालयों को समिति के पास अप्लाई करना होता है. विद्यालयों द्वारा अप्लाई करने के बाद समिति की ओर से जांच की जाती है. एक तरफ जहां समिति प्राइवेट एजेंसी से जांच करवाती है वहीं दूसरी ओर संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी से स्कूल की रिपोर्ट मांगी जाती है. एजेंसी और जिला शिक्षा पदाधिकारी के रिपोर्ट का मिलान होता है. इसके बाद संबंधित विद्यालय प्रभारी को बुलाया जाता है. इसके बाद सारी बिंदुओं पर जांच के बाद ही संबद्धता की प्रक्रिया पूरी होती है. नवंबर से दिसंबर के बीच अभी तक चार बैठकें हुयी है. चारों बैठक में 101 विद्यालयों को संबंद्धता दी गयी है.
- हर साल बढ़ रहा छात्रों की संख्या
हर साल मैट्रिक में छात्रों की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में मैट्रिक करने के बाद इंटर में नामांकन लेने में छात्रों को काफी परेशानी होती है. इंटर कॉलेज और स्कूलों की संख्या कम होने के कारण नामांकन नहीं हो पाता है. हर साल मैट्रिक में दो लाख के लगभग अधिक छात्र शामिल होते है. ऐसे में इंटर में नामांकन लेने में भी छात्रों की संख्या बढ़ जाती है.
ऐसे होती है संबद्धता की प्रक्रिया
- विद्यालय को पहले आवेदन करना होता है
- जिन विषयों के लिए संबंद्धता चाहिए, इसकी जानकारी विद्यालयों को आवेदन के साथ ही देना होता है- विद्यालय में संकायवार शिक्षकों की संख्या बताना होता है
- विद्यालयों में कमरों की संख्या कितनी है- क्लास रूम क्षेत्रफल वर्गमीटर में बताना होगा
- विद्यालय में पठन पाठन का कार्य विस्तृत बताना होगा - प्रयोगशाला में एक साथ कितने छात्र-छात्राओं के बैठने की व्यवस्था है
- वर्तमान में विद्यालय में कितनी संकायवार सीटें है
पिछले तीन सालों में बढ़ गये मैट्रिक में छात्र
2013 में शामिल परीक्षार्थी की कुल संख्या - 11, 30, 4562014 में शामिल परीक्षार्थी की कुल संख्या - 13, 37, 899
2015 में शामिल परीक्षार्थी की कुल संख्या - 14, 67,6532016 में शामिल होने वाले परीक्षार्थी की लगभग संख्या - 16 लाख
कोट
हर साल मैट्रिक में छात्रों की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में इंटर में नामांकन के लिए सीटों को बढ़ाया गया है. इससे मैट्रिक के बाद छात्रों को दिक्कतें नहीं होगी. छात्रों की संख्या की वृद्धि होने के साथ-साथ विद्यालय की संख्या और सीटों में वृद्धि जरूरी है.
लालकेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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दो फरवरी से डाउनलोड होगा 10वीं और 12वीं का एडमिट कार्ड
- 21 जनवरी तक चेक लिस्ट की होगी जांच
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ ने 10वीं और 12वीं के एडमिट कार्ड बोर्ड परीक्षा के एक महीने पहले ही स्कूलों को भेज देगा. स्कूल डाउनलोड करके परीक्षार्थी कों देंगे. इसकी सूचना बोर्ड ने तमाम स्कूलों को भेज दिया है. सीबीएसइ के अनुसार 10वीं और 12वीं बोर्ड के एडमिट कार्ड 5 फरवरी से डाउनलोड किया जा सकेगा. वहीं स्कूलों को परीक्षा संबंधित मेटेरियल भी पांच फरवरी तक भेज दिया जायेगा. सीबीएसइ के अनुसार सेंटर वाइज कैंडिडेंट्स की लिस्ट भी फरवरी में ही स्कूलों के पास आ जायेगा.
- चेक लिस्ट भेजा गया स्कूलों में
सीबीएसइ ने तमाम स्कूलो को एलओसी लिस्ट भेजा है. तमाम स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि एलओसी की लिस्ट की जांच करके 21 जनवरी तक वापस बोर्ड को भेज दे. चेक लिस्ट में स्टूडेंट का नाम, सब्जेक्ट, डेट ऑफ बर्थ आदि की जांच स्कूलों को करनी है. इसके अलावा इंटर्नल ग्रेड को भी 13 मार्च तक स्कूलों को भेज देना है.
704 विद्यालयों में 471 चल रहे बस कागजों पर
- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने स्कूलों की कमी को डाला वेबसाइट पर
संवाददाता, पटना
किसी के पास खाता नहीं तो कोई बिना प्रबंध समिति के चल रहा है. कहीं पर अभी तक स्कूल की कमिटी नहीं बनी तो वहीं कई स्कूलों के पास उपयोगिता प्रपत्र तक तैयार नहीं किया गया है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के काफी स्कूल बस कागजों पर ही चल रहे है. यह जानकारी समिति को अनुदान की राशि के वितरण में पता चला है. ऐसे विद्यालयों की लिस्ट समिति ने बिहार बोर्ड के वेबसाइट पर डाला है. समिति के पास अनुदान की राशि के लिए 704 विद्यालयों ने पूरे प्रदेश से आवेदन किया था. जांच के बाद पता चला है कि 471 विद्यालयों के केवल कागजों पर चल रहे है.
- समिति के पास जमा नहीं कर पायें कागजात
अनुदान की राशि लेने के लिए समिति ने कुछ कागजात देने के लिए विद्यालयों से कहा था. जिन विद्यालयों ने कागजात जमा किया, उन्हेें अनुदान की राशि दी गयी. जो विद्यालय कागजात नहीं जमा कर पायें, उनके अनुदान की राशि पर समिति ने रोक लगा दी है. पूरे प्रदेश से 471 विद्यालय ऐसे जो समिति के पास कागजात नहीं जमा कर पायें. जब तक ये विद्यालय समिति के सारी शर्ते पूरी नहीं कर पायेंगे, उन्हें अनुदान की राशि नहीं दी जायेगी.
- कई जिलों में एक भी विद्यालय नहीं
अनुदानित विद्यालयों का प्रदेश में यह हाल है कि कई जिलों में तो एक भी विद्यालयों को अनुदान की राशि नहीं दी गयी है. बांका, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार ऐसे जिले है जहां से लगभग 50 विद्यालयों ने अनुदान की राशि के लिए समिति के पास अावेदन दिया था, लेकिन ये सारे के सारे विद्यालय बस कागजों पर ही है. ऐसे में 50 में से एक भी विद्यालय को अनुदान की राशि नहीं दिया गया है.
कोट
अनुदान उन्हीं विद्यालयों को दिया गया है जो बिहार बोर्ड के अनुदान की राशि के सारी शर्तेां को पूरा करते है. जिन विद्यालयों में कमी है, उन्हें अनुदान की राशि नहीं दिया गया है. ऐसे तमाम विद्यालयों की लिस्ट समिति के वेबसाइट पर डाल दिया गया है.
हरिहर नाथ झा, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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अगले सेशन से 9वीं-10वीं में लागू होगा सेमेस्टर सिस्टम
- सीबीएसइ और आइसीएइ बोर्ड ने स्कूलों को भेजा निर्देश, 2017 से होगा लागू
संवाददाता, पटना
अब अगले सेशन से 9वीं और 10वीं क्लास में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जायेगा. इसकी रूपरेखा जल्द ही स्कूलों में शुरू हो जायेगा. छह महीने का सेमेस्टर सिस्टम में स्टूडेंट्स को साल में दो बार परीक्षा देना होगा. सिलेबस भी छह महीने का ही होगा. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड की तरफ से जल्द ही इसकी जानकारी स्कूलों को भेजी जायेगी. मानव संसाधन मंत्रालय के द्वारा बनाया जा रहा नयी शिक्षा नीति के तहत इसे लागू किया जायेगा. सेमेस्टर सिस्टम के लागू होने के बाद 9वीं और 10वीं के सिलेबस भी चेंज हो जायेगा.
- एनसीइआरटी तैयार कर रहा नया सिलेबस
सेमेस्टर सिस्टम के लागू होेने के बाद छह महीने का सिलेबस तैयार किया जायेगा. इसको लेकर एनसीइआरटी ने भी सिलेबस का रूपरेखा तैयार करना शुरू कर दिया है. सीबीएसइ की माने तो 2017 से स्कूली शिक्षा में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जायेगा. ज्ञात हो कि अभी कोई भी सिलेबस साल भर के लिए बनाया जाता है, लेकिन सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के बाद सिलेबस बस छह महीने के लिए बनाया जायेगा.
- हाई स्कूल से लेकर हायर एजुकेशन तक सेमेस्टर
2017 में 9वीं और 10वीं में सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के बाद इसे प्लस टू में भी लागू किया जायेगा. इसके बाद स्कूल शिक्षा लेकर हायर एजुकेशन तक सेमेस्टर सिस्टम पर ही एजुकेशन व्यवस्था हो जायेगा. यूजीसी के गाइड लाइन के अनुसार हायर एजुकेशन में सभी विवि में सेमेस्टर सिस्टम लागू है. ऐसे में स्टूडेंट को उच्च शिक्षा लेने में कठिनाई होती है. सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के बाद एक जैसी व्यवस्था हो जायेगी.
- 9वीं और 10वीं में सीसीइ है लागू
सीबीएसइ स्कूलों में फिलहाल ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया गया है. 2008 में सीबीएसइ से सीसीइ सिस्टम को अपने यहां लागू किया था. इसी के तहत ग्रेडिंग सिस्टम पर 9वीं और 10वीं बोर्ड के एग्जाम लिये गये थे. इसी दौरान सीबीएइ से बोर्ड परीक्षा को आप्सनल बना दिया था. स्कूल बोर्ड की शुरूआत की गयी थी. सीसीइ सिस्टम के तहत भी 9वीं और 10वीं में साल में दो बार परीक्षा ली जाती है. एसए-वन की परीक्षा जहां सितंबर में वहीं एसए-टू की परीक्षा मार्च में ली जाती है.
कोट
सेमेस्टर सिस्टम बहुत ही अच्छा होता है. हायर एजुकेशन में पहले से ही सेमेस्टर सिस्टम लागू है. बोर्ड लेवल पर सेमेस्टर सिस्टम लागू होने से स्टूडेंट को हायर एजुकेशन में दिक्कतें नहीं होगी.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ
सेमेस्टर सिस्टम से स्टूडेंट को फायदा होगा. छह महीने के सिलेबस होने से स्टूडेंट का पूरा फोकस पढ़ाई पर रहेगा. साल भर के सिलेबस होने से पढ़ाई के प्रति स्टूडेंट का फोकस अधिक नहीं कर पाते है.
एफ हसन, सिटी कोर्डिनेटर, आइसीएसइ
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Tuesday, January 5, 2016
सीबीएसइ देगा अब आस्ट्रेलिया में पढ़ने का मौका
- सीबीएसइ स्टूडेंट्स को सेंट्रल इंस्ट्रीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पर्थ से कर पायेंगे ग्रेजुएशन
संवाददाता, पटना
अभी तक वोकेशनल कोर्स को स्टूडेंट्स सेकेंड्री इंट्रेस्ट के तौर पर देखते रहे है. प्लस टू लेवल पर स्टूडेंट्स साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स को ही प्रधानता देते है. लेकिन सीबीएसइ ने वोकेशनल कोर्स करने वाले स्टूडेंट के कैरियर को आगे बढ़ाने के लिए कई रास्ते खोल दिये है. पहले वोकेशनल कोर्स को यूजीसी से मान्यता दिलवाने के बाद अब आस्ट्रेलिया में वोकेशनल कोर्स वाले स्टूडेंट्स का सीधा नामांकन होने की सुविधा दे रहा है. सीबीएसइ से 12वीं में दो सालों का वोकेशनल कोर्स करने के बाद स्टूडेंट्स का नामांकन सेंट्रल इंस्ट्रीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पर्थ आस्ट्रेलिया में डायरेक्ट हो जायेगा. हाल में हुए सीबीएसइ और सेंट्रल इंस्ट्रीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पर्थ के बीच नामांकन को लेकर करार किया गया है. इसके तहत ही नामांकन की प्रक्रिया इस सत्र से शुरू होगा.
- चार विषयों में किया गया शुरू
वर्तमान में सीबीएसइ की ओर से 40 वोकेशनल कोर्स चलाये जा रहे है. इसमें से अभी चार विषयाें में नामांकन की प्रक्रिया की जायेगी. स्टूडेंट्स का रिस्पांस आने के बाद 2017 से और भी कई नये या पुराने वोकेशनल कोर्स को इसमें शामिल किया जायेगा. सीबीएसइ की माने तो कैरियर के प्वाइंट से इसे बोर्ड द्वारा शुरू किया जा रहा है. स्कील बेस्ड इन कोर्स को प्लस टू के बाद स्टूडेेंट आसानी से कर पायेंगे.
- 2016 से होगा लागू
सीबीएसइ स्टूडेंट्स को यह सुविधा 2016 से मिलने जा रहा है. 2016-18 सत्र के लिए जो भी स्टूडेंट्स प्लस टू में वोकेशनल कोर्स करेंगे, उन्हें यह सुविधा दी जायेगी. प्लस टू करने के बाद ये स्टूडेंट्स आस्ट्रेलिया में संबंधित विषय में नामांकन ले पायेंगे. दो साल प्लस टू करने के बाद उनके विषय को मुख्य विषय के रूप में देखा जायेगा.
- वोकेशनल कोर्स में स्टूडेंट नहीं लेते इंट्रेस्ट
सीबीएसइ के अनुसार वोकेशनल कोर्स कई सालों से चल रहा है. लेकिन अभी भी स्टूडेंट्स वोकेशनल कोर्स नहीं करना चाहते है. चुकी वोकेशनल कोर्स की मान्यता बस प्लस टू लेवल तक है. जिन विषयाें में वोकेशनल कोर्स होता है, उन विषयाें में आगे ग्रेजुएशन करने में स्टूडेंट को कई दिक्कतें होती है.
इन विषयों में नामांकन से आस्ट्रेलिया में मिलेगा पढ़ने का मौका
- ब्यूटी थेरेपी
- म्यूजिक प्रोडक्शन - बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन
- डिजाइन टू बॉड बेस दी स्ट्रक्चर
कोट
वोकेशनल कोर्स के प्रति स्टूडेट्स का रूझान हो, इस कारण इसे 2016 से शुरू किया जा रहा है. स्कील बेस्ड कोर्स को करने के बाद इन कोर्स में दूसरे देश में भी उन्हें हायर एजुकेशन करने का मौका मिल जायेगा. इससे कैरियर संबंधित आप्सन भी आसानी से मिल सकेगा.
वाइएसके सेशु कुमार, चेयरमैन, सीबीएसइ
\\B
जिस सब्जेक्ट की देंगे परीक्षा, आंसर कॉपी पर उस सब्जेक्ट का नाम होगा दर्ज
संवाददाता, पटना
आइसीएसइ 10वीं और आइएससी 12वीं की बोर्ड परीक्षा में इस बार स्टूडेंट को सब्जेक्ट के नाम के साथ आंसर काॅपी मिलेगा. जिस सब्जेक्ट के जो स्टूडेंट होेंगे, उन्हें वहीं आंसर काॅपी दी जायेगी. अब स्टूडेंट को खुद ही अपने सब्जेक्ट का नाम नहीं लिखना पड़ेगा. इसके अलावा 2016 की बोर्ड परीक्षा में स्टूडेंट के फोटोग्राफ भी लगे होंगे. आंसर काॅपी के टॉप सीट पर ही सब्जेक्ट के नाम और स्टूडेंट के फोटोग्राफ लगें होंगे. इसकाे लेकर बोर्ड की ओर से सूचना स्कूलों को भेज दिया गया है.
- हर स्टूडेंट का बुकलेट होगा अलग
इस बार से आइसीएस बोर्ड की ओर से स्टूडेंट्स वाइज बुकलेट बनाये जा रहे है. हर सब्जेक्ट के लिए अलग-अलग बुकलेट होंगे. हर स्टूडेंट को उनके बुकलेट के अनुसार ही प्रश्न पत्र और आंसर काॅपी दिया जायेगा. ज्ञात हो कि 2015 तक पांच सौ स्टूडेंट का एक साथ बुकलेट का बंडल बनाया जाता था. एग्जामिनेशन हॉल में सीरियली स्टूडेंट्स के बीच बुकलेट को बांटा जाता रहा है. लेकिन इस बार हर स्टूडेंट का अलग-अलग बुकलेट का बंडल होगा.
- कदाचार और मूल्यांकन पर होगी रोक
बोर्ड के इस सिस्टम से एग्जामिनेशन हॉल में कदाचार पर रोक लगेेगी. स्टूडेंट आपस में अांसर काॅपी चेंज कर नहीं लिख पायेंगे. वहीं मूल्यांकन के समय होने वाली गड़बड़ी नहीं हो पायेगी. स्टूडेंट के फोटोग्राफ और सब्जेक्ट का नाम होने से कॉपी की अदला बदली पर भी रोक लग सकेगा.
कोट
पिछले साल यूआइडी की मार्किंग आंसर काॅपी पर शुरू किया गया था. इस बार से आंसर काॅपी पर फोटोग्राफ अौर सब्जेक्ट का नाम दर्ज रहेगा. इससे इवैल्यूएशन अच्छे से हो पायेगी.
एफ हसन, काेर्डिनेटर, आइसीएसइ बोर्ड
\\B
आइएससी में अब 70 की थ्योरी, 30 का प्रैक्टिकल
- आइसीएसइ बोर्ड के प्लस टू में परीक्षा पैटर्न को किया गया चेंज, 2016 की परीक्षा से ही होगा लागू
रिंकू झा, पटना
काउंसिल फाॅर दी इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एक्जामिनेशन (आइसीएसइ) के आइएससी (प्लस टू) के परीक्षा पैटर्न में चेंज किया गया है. बदला हुआ पैटर्न 2016 के प्लस टू की परीक्षा से ही लागू किया जा रहा है. बदले हुए पैटर्न के अनुसार 12वीं में अब 70 अंक का अब थ्योरी पेपर होगा. वहीं प्रैक्टिकल अब 30 अंक का होगा. बोर्ड ने जहां थ्योरी पेपर का अंक बढ़ा दिया है वहीं प्रैक्टिकल के अंक को कम कर दिया है. ज्ञात हो कि 2015 तक आइएससी की परीक्षा में 50 अंक का थ्योरी और 50 अंक का प्रैक्टिकल पूछा जाता रहा है. लेकिन इस बार सेे इसमें बोर्ड ने चेंज कर दिया है.
- सीबीएसइ के पैटर्न को अपना रहा आइसीएसइ
सीबीएसइ में 70 फीसदी की थ्योरी और 30 फीसदी अंक का प्रैक्टिकल लिया जाता है. सीबीएसइ के इस पैटर्न को अब आइसीएसइ बोर्ड ने भी अपने यहां लागू कर लिया है. प्लस टू का प्रैक्टिकल एग्जाम 8 फरवरी से 20 फरवरी तक चलेगा. इसी में इसे लागू किया जायेगा. इससे मार्क्स परसेंटेज स्टूडेंट का बढ़ेगा. इससे अब आइसीएसइ बोर्ड के प्लस टू के स्टूडेंट के मार्क्स परसेंटेज बढ़ेगा.
- ग्रेजुएशन में नामांकन में नहीं होगी प्राब्लम
बदले हुए परीक्षा पैटर्न होने से स्टूडेंट्स को काफी राहत मिलेगी. अब ग्रेजुएशन में नामांकन लेने में भी दिक्कतें नहीं होगी. बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार 2015 में दिल्ली यूनिवर्सिटी और कई यूनिवर्सिटी में नामांकन में स्टूडेंट को काफी प्राब्लम फेस करना पड़ा. क्योंकि यूनिवर्सिटी थ्योरी में 70 फीसदी अंकों को अच्छी वेटेज दे रहे थे. ऐसे में आइएससी पास आउट स्टूडेंट को एडमिशन लेने में पीछे कर दिया गया. 50 फीसदी अंक में ही वेटेज का नुकसान आइएससी स्टूडेंट को उठाना पड़ा. इस कारण बोर्ड ने इस बार पैटर्न चेंज कर दिया है.
कोट
बोर्ड ने प्लस टू के परीक्षा पैटर्न में चेंज कर दिया गया है. इस बार से 70 अंक का थ्योरी और 30 अंक का प्रैक्टिकल कर दिया गया है. इससे प्रैक्टिकल में थोड़ी राहत मिलेगी.
एफ हसन, सिटी कोर्डिनेटर, आइसीएसइ बोर्ड
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प्लस टू की परीक्षा जल्दी होंगे समाप्त, जेइइ मेन के लिए मिलेगा 15 दिनों का समय
- सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने 15 दिन और बिहार बोर्ड ने दिया 30 दिनों का समय
संवाददाता, पटना
प्लस टू की परीक्षा खत्म हुई नहीं कि सिर पर जेइइ मेन का टेंशन शुरू हो जाता है. ऐसे में प्लस टू के एपियरिंग कैंडिडेंट्स के लिए टाइम मैनेजमेंट करना मुश्किल हो जाता है. लेकिन इस बार 2016 में प्लस टू और उसके बाद जेइइ मेन की परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स को राहत मिलेगी. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड दोनों ने ही लगभग 15 दिनों का समय दिया है. वहीं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने पूरा एक महीने यानी 30 दिन जेइइ मेन की तैयारी के लिए छात्रों को दिया है.
- साइंस के सारे मुख्य पेपर दस दिनों में खत्म
सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने प्लस टू का शेड्यूल जारी कर दिया है. सीबीएसइ जहां 5 मार्च को फिजिक्स, 9 मार्च को केमेस्ट्री और 14 मार्च को मैथेमेटिक्स की परीक्षा लेकर जेइइ मेन देने के लिए स्टूडेंट को 15 दिनों का समय तैयारी करने को देगा. वहीं आइसीएसइ बोर्ड 15 मार्च को साइंस के सारे विषयों की परीक्षा समाप्त कर देगा. बिहार बोर्ड के सारे विषयों की परीक्षा 5 मार्च को समाप्त कर दिया जायेगा.
- दो बार ही दे सकते है जेइइ मेन
जेइइ मेन की नयी व्यवस्था के तहत अब केवल एक स्टूडेंट दो बार ही जेइइ मेन दे सकते है. एक बार प्लस टू देने के साथ एपियरिंग कैंडिडेंट्स के तौर पर और उसके अगले साल दे सकते है. ऐसे में स्टूडेंट के पास काफी कम समय होता है. 2016 में जेइइ मेन देने वाले स्टूडेंट 2016 और 2017 में ही केवल जेइइ मेन देंगे. इसको देखते हुए सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड ने स्टूडेंट को समय देने का निर्णय लिया है.
- 11वीं और 12वीं के सिलेबस से आते है प्रश्न
प्लस टू में केवल 12वीं से ही प्रश्न आते है. 12वीं के सिलेबस से ही प्लस टू की परीक्षा स्टूडेंट देते है. लेकिन जेइइ मेन में 11वीं और 12वीं दोनों के सिलेबस से परीक्षा ली जाती है. ऐसे में स्टूडेंट के पास जब समय होगा, तभी वो 11वीं का सिलेबस रिवाइज कर पायेंगे. दोनों की परीक्षा की तैयारी में भी अंतर होता है. बोर्ड के इस निर्णय से स्टूडेंट को काफी राहत है.
- 3 अप्रैल को ऑफ लाइन होगा जेइइ मेन
जेइइ मेन की परीक्षा ऑन लाइन और ऑफ लाइन दोनो ही तरह से लिया जाता है. ऑफ लाइन जहां एक दिन तो वहीं ऑन लाइन दो दिन लिया जायेगा. ऑफ लाइन जेइइ मेन तीन अप्रैल को लिया जायेगा. वहीं जेइइ मेन की ऑन लाइन 9 और 10 अप्रैल को लिया जायेगा.
दो स्कूल से कराया इंटर परीक्षा का रजिस्ट्रेशन, तो दोनों जगह फॉर्म भरने से होंगे वंचित
इलेक्ट्रॉनिक डाटा बेस से जांच के दौरान पकड़ में आ रही गड़बड़ी
- ऐसे करीब 200 छात्रों की सूची हुई तैयार, फॉर्म भरने से किया गया वंचित
संवाददाता, पटना
मसौढ़ी के छात्र राेहित कुमार ने वर्ष 2016 में इंटर परीक्षा देने के लिए मसौढ़ी के ज्योति कुंवर से रजिस्ट्रेशन कराया. यही नहीं, इस छात्र ने गर्दनीबाग स्थित बीडी इवनिंग कॉलेज से भी रजिस्ट्रेशन करा रखा था. इसका खुलासा तब हुआ जब इंटर काउंसिल के इलेक्ट्रॉनिक डाटा बेस में सभी छात्रों का मिलान किया गया. जांच में एक ही छात्र के दो जगह से फॉर्म भरे जाने का मामला पता चलते ही इस छात्र के फॉर्म भरे जाने पर रोक लगा दी गयी है. यही नहीं, रोहित की तरह पूरे बिहार से करीब 200 ऐसे छात्र पकड़ में आये हैं, जिन्होंने दो जगह से रजिस्ट्रेशन करा रखा था. बिहार बोर्ड ने ऐसे तमाम छात्रों की सूची बना कर संबंधित स्कूलों को भेज दी है और उनके फॉर्म भरने पर रोक लगा दी है.
- दो जगह से रजिस्ट्रेशन कराने वालों पर बिहार बोर्ड सख्त
इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए दो जगह से रजिस्ट्रेशन कराने वालों पर बिहार बोर्ड इस बार काफी सख्त है. समिति कार्यालय के कंप्यूटर डिपार्टमेंट को तुरंत इस बात की जानकारी मिल जा रही है. दो कॉलेज या दो स्कूलों से परीक्षा फार्म भरने वाले छात्रों के नाम, माता पिता का नाम, सब्जेक्ट आदि का मिलान होता है. ऐसे छात्रों को कंप्यूटर के माध्यम से तुरंत पकड़ा जा रहा है.
- नहीं पकड़ में आ पाते थे छात्र
पहले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया मैनुअल होता था. इस कारण छात्रों के दो जगहों से रजिस्ट्रेशन करवाने की जानकारी इंटर काउंसिल को नहीं होता था. परीक्षा फार्म भी ऐसे छात्र भर लेते थे. एडमिट कार्ड भी आ जाता था. ऐसे छात्र एडमिट कार्ड देखकर वैसे सेंटर पर परीक्षा देने जाते थे जहां पर वो कदाचार आसानी से कर लेते थे. लेकिन अब कंप्यूटराइज रजिस्ट्रेशन होने से दो जगहों से रजिस्ट्रेशन करवाने वाले छात्रों को आसानी से पकड़ जा रहा है.
कोट
दो जगहों से रजिस्ट्रेशन करवाने वाले छात्रों के रजिस्ट्रेशन को ही रिजेक्ट कर दिया जायेगा. ऐसे छात्र किसी भी कॉलेज से परीक्षा फार्म नहीं भर पायेंगे. कई छात्र पकड़ में आयें है. इसकी सूचना संबंधित कॉलेज या स्कूल को दी जा रही है. ऐसे छात्र के परीक्षा फार्म नहीं भराने की जानकारी स्कूलों को भेज दी गयी है.
हरिहर नाथ झा, सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
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स्कूल की छुट्टी के साथ ही ठप हो जाती है सेंट जोसफ कांवेंट स्कूल के सामने की सड़क
छुट्टी होने के साथ 35 सौ बच्चे एक साथ निकलते सड़क पर
संवाददाता, पटना
समय - 1 बजे.
स्कूल के सामने गाड़ियां लगनी शुरू हो जाती है. समय - 1.30 बजे. स्कूल के सामने सड़क के दोनों तरफ स्कूली बस, स्कूली वैन और ऑटो का कब्जा हो गया. समय - 1.55 बजे. स्कूल के मेन गेट पर अभिभावकों को जमावड़ा लग चुका है. बाइक और छोटे साइज के ऑटो मेन गेट पर खड़ी है. ऐसे में सिविल कोर्ट, अशोक राजपथ की ओर से आने जाने वाले प्राइवेट गाड़ियां वहां आकर ठहर सी जाती है. ना पीछे जाने का रास्ता और ना ही आगे बढ़ने का रास्ता ही बचा है. यह नजारा हर दिन सेंट जोसफ कांवेंट हाई स्कूल के छुट्टी के आधे घंटे पहले और छुट्टी के आधे घंटे बाद तक रहता है. इस स्कूल के छुट्टी के समय अगर कोई फंसा तो मानो घंटे भर तक इस इलाके से निकलना संभव नहीं है.
- 35 सौ बच्चे एक साथ होते हैं सड़क पर
स्कूल के छुट्टी के पहले सड़क पर स्कूली बस और ऑटो का जमावड़ा और छुट्टी के बाद एक साथ 35 सौ बच्चे स्कूल से बाहर निकलते है. ऐसे में अपने-अपने बस में बैठना हर बच्चे के लिए काफी टफ होता है. अगर खोज कर बस में बैठ भी गये तो उन्हें आधे घंटे तक बस में ही बैठना पड़ता है. क्योंकि जब तक जाम हटेगा नहीं तब तक बस खुलेगी नहीं. स्कूल के पास का यह नजारा एक दिन नहीं बल्कि हर दिन का होता है.
- अपने बस को खोजते रहते है बच्चे
जिन बसों को स्कूल के आस पास जगह नहीं मिलता तो ऐसे बस सिविल कोर्ट के पास या बीएन कॉलेज के पास वाले गली में भी लगे होते है. ऐसे में गर्ल्स स्टूडेंट्स पैदल वहां तक जाकर अपने बस में बैठतीं है. ऐसे में कभी-कभी बस को खोजने में भी समय लगता है. कई बार तो बस के मालिक को ढूढ़ कर बस कहां लगी है, इसके बारे में जानकारी लेतीं है.
- 24 गाड़ियां है ऑथोराइज्ड प्राप्त, फिर भी लगता है बाहर
स्कूल ने 24 बसों को अॉथोराइज किया हुआ है. स्कूल कैंपस में इन 24 बसों के नंबर तो लगे है, लेकिन इन बसों को स्कूल कैंपस में लगाने की अनुमति नहीं है. इसके अलावा 10 और छोटे स्कूल वैन को भी स्कूल से ऑथोराइज किया हुआ है. इसके अलावा लगभग 40 से 50 ऑटो और वैन से बच्चे स्कूल आते और जाते है. अगर स्कूल में ऑथोराइज बस और वैन को ही जगह मिल जाये तो काफी हद तक जाम की समस्या कम हो जायेगी.
- बॉडी गार्ड और बड़ी गाड़ियों में आते हैं बच्चे
इस स्कूल में कई राजनीतिज्ञ और आइएएस के बच्चे भी पढ़ते है. ऐसे में उन बच्चों को स्कूल से लेने के लिए बड़ी-बड़ी गाड़ियां आती है. इन गाड़ियों में कई बॉडी गार्ड होते है. एेसे में ये बड़ी गाड़ियां के कारण भी जाम लगता है. ये गाड़ियां स्कूल की छुट्टी के पहले से ही स्कूल के पास आकर खड़े हो जाते है. इसके अलावा काफी संख्या में प्राइवेट गाड़ियों से अभिभावक बच्चों को लेने भी आते है. ये सारी की सारी स्कूल के बाहर लगे होते है.
कोट
स्कूल की आेर से 24 बसों को अॉथोराइज्ड किया गया है. इसके अलावा जो भी स्कूल वैन और ऑटो है सारे के सारे अन ऑथोराइज है. स्कूल को उनसे कोई मतलब नहीं है. कई बार इसको लेकर अभिभावकों को नोटिस दिया गया है कि ऑथोराइज बस से बच्चों को स्कूल भेजे, लेकिन अभिभावक फिर भी प्राइवेट ऑटो और वैन से बच्चों भेजते है. जरूरत से ज्यादा सवारी स्कूल के सामने लग जाता है, इससे जाम की स्थिति बन जाती है.
सिस्टर लूसिना, प्रिंसिपल, सेंट जोसफ कांवेंट हाई स्कूल, अशोक राजपथ
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Saturday, January 2, 2016
सीबीएसइ के तीन कोर्स को यूजीसी ने दिया मान्यता
प्लस टू करने के बाद सीधा नामांकन हो पायेगा कॉलेजों में
संवाददाता, पटना
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) के तीन कोर्स को यूजीसी ने मान्यता दे दी है. अब इन तीनों कोर्स में नामांकन सीधे कॉलेजों में हो पायेगा. ये कोर्स कंप्यूटर साइंस, इंफार्मेटिक्स प्रैक्टिस, मल्टीमीडिया और वेब टेक्नोलॉजी है. 11वीं और 12वीं में दो साल की पढ़ाई के बाद ये कोर्स काॅलेजों में मुख्य विषय के रूप में लिये जा सकेंगे. कॉलेजों में ये विषय वैकल्पिक विषय के रूप में नहीं बल्कि मुख्य विषय के रूप में पढ़े जा सकेंगे.
- मेन सब्जेक्ट में किया जायें शामिल
इन कोर्स को लेकर सीबीएसइ ने कुछ दिनों पहले यूजीसी को एक पत्र लिख कर इन कोर्सो को मेन सब्जेक्ट के रूप में शामिल करने को कहा था. इसके बाद यूजीसी ने इन कोर्स को कॉलेजों में नामांकन के लिए मान्यता दे दिया है. अब इन कोर्स से प्लस टू करने के बाद स्टूडेंट्स नामांकन ले पायेंगे. इन कोर्स में नामांकन लेते समय इसके अंक को यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा में जोड़ा जायेगा.
- विवि और कॉलेजों को लिखा गया लेटर
इसको लेकर यूजीसी ने तमाम विश्वविद्यालय और कॉलेजों को पत्र जारी कर दिया है. पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सीबीएसइ के इन नये सब्जेक्ट को अहमियत दिया जायें. इन कोर्स को वोकेशनल के रूप में कोई स्टूडेट अप्लाई करें तो उनके अंक का वेटेज दिया जायेगा.
- सितंबर में शुरू किया था सीबीएसइ ने इन कोर्स को
इन तीनों कोर्स को प्लस टू लेवल पर सीबीएसइ ने 2015 सितंबर से ही शुरू किया था. पहले इन कोर्स की पढ़ाई सीबीएसइ स्कूलों में 9वीं और 10वीं में होता था. इन कोर्स को 10वीं लेवल पर भी वोकेशनल कोर्स के रूप में ही पढ़ाई होती थी. इसके बाद इसे प्लस टू में शुरू किया गया. लेकिन इससे फायदा स्टूडेंट्स को नहीं हो पा रहा था. वोकेशनल होने के कारण इसे स्टूडेंट पढ़ना भी नहीं चाहते थे.
कोट
इन कोर्स को मुख्य विषय के रूप में यूजीसी की मान्यता मिलने से प्लस टू लेवल पर इन कोर्स में नामांकन बढ़ेगा. अब स्टूडेंट का रूझान इन कोर्स की ओर बढ़ेगा. अब स्कूल भी इन कोर्स को शुरू करेंगे. इससे अधिक से अधिक स्टूडेंट इन कोर्स में नामांकन ले पायेंगे.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ
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दो डीएवी को मिली नोटिस, बाकी की हो रही जांच
सीबीएसइ के विजिलेंस डिपार्टमेंट ने डीएवी प्रशासन को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा
संवाददाता, पटना
फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट मामले में सीबीएसइ विजिलेंस डिपार्टमेंट के आदेश पर डीएवी प्रशासन ने दो असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर (एआरडी) को नोटिस दिया है. डीएवी कॉलेज मैनेजमेंट कमिटी ने गोला रोड डीएवी के असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर इंद्रजीत राय और मुजुफ्फरपुर डीएवी के असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर एसके झा को नोटिस दिया है. इन दोनों एआरडी पर फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट देने का आरोप है. इसके बाद बीएड की डिग्री लेने के बाद फिर डीएवी में टीचर के पद पर नियुक्त भी कर दिया. दोनो एआरडी से डीएवी प्रशासन ने फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट देने का कारण बताने को कहा है.
- पूरे बिहार के डीएवी पर है सीबीएसइ की नजर
सीबीएसइ सूत्रों की माने तो पूरे बिहार के डीएवी की मिली भगत से फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट का मामला चल रहा था. इस कारण पूरे बिहार के डीएवी प्रशासन पर इसकी जांच होगी. इसकी जांच डीएवी कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी की ओर से की जा रही है. अभी तक लगभग दस डीएवी जांच के घेरे में है. सीबीएसइ विजिलेंस की ओर से कुछ डीएवी की लिस्ट डीएवी प्रशासन को उपलब्ध करवाया गया है. इन डीएवी की जांच की जा रही है.
इन डीएवी पर चल रहा जांच
- एके जेना, प्रिंसिपल और असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर, रोटरी कैंपस, गया
- केके सिन्हा, प्रिंसिपल और असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर, भागलपुर डीएवी - मीरा श्रीवास्तव, प्रिंसिपल, डीएवी, धनुपरा, आरा
- एसी जैन, प्रिंसिपल, डीएवी खगौल
नोट - इन सभी के उपर फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट निर्गत करने का आरोप है
- विभा मिश्रा, डीएवी नवादाडीएवी नवादा को सीबीएसइ की मान्यता नहीं है, लेकिन मान्यता प्राप्त लिख कर फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट निर्गत किया गया.
कोट
डीएवी में फर्जी एक्सपेरियेंस सर्टिफिकेट लेकर बीएड करने के बाद टीचर बनने का कई मामला है. फर्जी रूप से टीचर के पद पर लगभग सभी डीएवी में मामला है. सीबीएसइ विजिलेंस की जांच के बाद अब सामने यह आ रहा है.
निखिल कुमार, महासचिव, डीएवी टीचर्स एसोसिएशन
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हाइटेक होगा बिहार बोर्ड, ऑनलाइन मिलेगा एडमिट कार्ड
संवाददाता, पटना
नया वर्ष, नयी उम्मीद लेकर आता है. बिहार बोर्ड भी पुरानी गलतियों से सबक लेते हुए नये साल में छात्र-छात्राओं को नयी सुविधाएं मुहैया करायेगा. पुरानी फाइल सिस्टम को खत्म करते हुए बिहार बोर्ड नये साल में ऑनलाइन सिस्टम लागू करेगा. इससे कर्मचारियों को सुविधा मिलेगी ही, वहीं छात्रों को अब लंबी-लंबी लाइन नहीं लगना पड़ेगा. एडमिट कार्ड से लेकर रजिस्ट्रेशन व स्क्रूटनी की व्यवस्था ऑनलाइन रहेगी.
- मैट्रिक छात्रों को ऑनलाइन एडमिट कार्ड
2016 में मैट्रिक के छात्रों को एडमिट कार्ड ऑन लाइन मिलेगा. 2017 से यह इंटर में लागू किया जायेगा. ऑन लाइन एडमिट कार्ड बिहार बोर्ड के वेबसाइट पर उपलब्ध होगा. छात्रों को स्क्रूटनी के लिए बोर्ड का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. स्क्रूटनी का आवेदन छात्र अपने जिले में ही कर पायेंगे. स्कूल के माध्यम से ही स्क्रूटनी का सारा काम होगा. स्क्रूटनी की सारी प्रक्रिया ऑन लाइन किया जायेगा. स्क्रूटनी का ऑन लाइन आवेदन करने के बाद दस दिनों के अंदर स्क्रूटनी का काम पूरा कर रिजल्ट छात्रों को वेबसाइट पर उपलब्ध हो जायेगा.
- नौ प्रमंडल में खुलेगा समिति का क्षेत्रीय कार्यालय
कई सालों से पेंडिंग पड़े प्रमंडल वाइज क्षेत्रीय कार्यालय भी खोलने की योजना 2016 में पूरा किया जायेगा. समिति की ओर से बिहार के नौ प्रमंडल में समिति का क्षेत्रीय कार्यालय खोला जायेगा. इससे छात्रों को पटना आने की जरूरत नहीं होगी. छात्रों का काम स्थानीय स्तर पर ही हो जायेगा.
- ऑन लाइन होगा रजिस्ट्रेशन
2016 से 9वीं का रजिस्ट्रेशन और 10वीं का परीक्षा फार्म भी ऑन लाइन भरवाये जायेंगे. आॅन लाइन के माध्यम से ही छात्रों की सारी प्रक्रिया की जायेगी. ऑन लाइन होने से काम जल्दी होगा. छात्र अपना रजिस्ट्रेशन संबंधित सारी जानकारी भी ऑन लाइन देख पायेंगे. ऑन लाइन सारे स्कूलों को जोड़ा जायेगा. ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन के लिए स्कूलों को एक कोड दिया जायेगा. इसी के माध्यम से ऑन लाइन आवेदन छात्र स्कूल के माध्यम से कर पायेगे.
ये सारे काम भी होगा पूरा
- समिति कार्यालय के हर जिलों के सारे काम को कंप्यूटराइज किया जायेगा
- 30 मई से पहले इंटर और मैट्रिक का रिजल्ट घोषित किया जायेगा - जेइइ मेन में सफल छात्रों के मार्क्स की सीडी उपलब्ध करवायी जायेगी
- 2016 में लगभग 30 लाख मैट्रिक और इंटर के परीक्षार्थी है.- मार्कशीट व सर्टिफिकेट सुधार का काम भी ऑनलाइन किया जायेगा
- सोलर सिस्टम से काम करेगा बिहार बोर्ड का मैट्रिक कार्यालय - इंटर काउंसिल भवन में आठ नये काउंटर बनाये जायेंगे
पर्सनल ई-मेल पर सीबीएसइ भेजेगा एडमिट कार्ड
एलओसी में शामिल स्टूडेंट को ही जायेगा ई-मेल पर एडमिट कार्ड
संवाददाता, पटना
10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षार्थी को इस बार ई-मेल से एडमिट कार्ड भेजा जायेगा. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) ने बाेर्ड परीक्षार्थी के पर्सनल ई-मेल पर भी एडमिट कार्ड भेजने का निर्णय लिया है. इसको लेकर जल्द ही स्कूलों को सूचना भी दी जायेगी. सीबीएसइ की माने तो इस बार एक परीक्षार्थी का एडमिट कार्ड दो जगहाें पर भेजा जायेगा. एक तो स्कूल के पास और दूसरा स्टूडेंट के पर्सनल ई-मेल पर भेजा जायेगा.
- यूजर आइडी और मिलेगा पासवर्ड
एडमिट कार्ड निकालने के लिए स्टूडेंट को सीबीएसइ की ओर से यूजर आइडी दिया जायेगा. यूजर आइडी मिलने के बाद स्टूडेंट खुद एक पासवर्ड क्रियेट करेंगे. इस पासवर्ड के माध्यम से स्टूडेंट अपना एडमिट कार्ड निकाल पायेंगे. सीबीएसइ ने तमाम स्टूडेंट को आगाह भी किया है कि जो पासवर्ड स्टू्डेंट बनायेंगे, उसे चेंज नहीं कर पायेगे. इस कारण इस पासवर्ड को भूलने से स्टूडेंट अपना एडमिट कार्ड नहीं निकाल पायेंगे.
- मार्क्स सीट आयेगा ई-मेल पर
सीबीएसइ की ओर से इस बार 10वीं और 12वीं के रिजल्ट के बाद मार्क्स सीट भी ई-मेल पर भेजा जायेगा. रिजल्ट निकलने के एक सप्ताह के बाद मार्क्स सीट को भेजा जायेगा. इसके लिए भी स्टूडेंट को अपना यूजर आइडी और पासवर्ड के माध्यम से ही मार्क्स सीट ले पायेंगे.
- स्कूल नहीं कर पायेगा फर्जीगिरी
एडमिट कार्ड स्टूडेंट के ई-मेल आइडी पर आने से स्कूल की फर्जीगिरी नहीं चलेगा. जो स्कूल पैसे लेकर एडमिट कार्ड देते है, उन चीजों पर लगाम लगेगा. सीबीएसइ ने इस बार सारे स्कूलों से एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेंट्स) मंगवाया है. इस एलओसी के अाधार पर ही एडमिट कार्ड बनाया जायेगा. ऐसे में मान्यता प्राप्त स्कूल को ही एडमिड कार्ड मिल पायेगा.
कोट
स्कूल के उपर लगाम लगाने के लिए यह शुरू किया गया है. इससे स्टूडेंट को सुविधा मिलेगी. ई-मेल पर सॉफ्ट कॉपी भेजा जायेगा. वहीं स्कूल में डाउन लोड करके स्टूडेट को एडमिट कार्ड वितरण किया जायेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी काेर्डिनेटर, सीबीएसइ
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सीबीएसइ देगा अब आस्ट्रेलिया में पढ़ने का मौका
- सीबीएसइ स्टूडेंट्स को सेंट्रल इंस्ट्रीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पर्थ से कर पायेंगे ग्रेजुएशन
संवाददाता, पटना
अभी तक वोकेशनल कोर्स को स्टूडेंट्स सेकेंड्री इंट्रेस्ट के तौर पर देखते रहे है. प्लस टू लेवल पर स्टूडेंट्स साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स को ही प्रधानता देते है. लेकिन सीबीएसइ ने वोकेशनल कोर्स करने वाले स्टूडेंट के कैरियर को आगे बढ़ाने के लिए कई रास्ते खोल दिये है. पहले वोकेशनल कोर्स को यूजीसी से मान्यता दिलवाने के बाद अब आस्ट्रेलिया में वोकेशनल कोर्स वाले स्टूडेंट्स का सीधा नामांकन होने की सुविधा दे रहा है. सीबीएसइ से 12वीं में दो सालों का वोकेशनल कोर्स करने के बाद स्टूडेंट्स का नामांकन सेंट्रल इंस्ट्रीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पर्थ आस्ट्रेलिया में डायरेक्ट हो जायेगा. हाल में हुए सीबीएसइ और सेंट्रल इंस्ट्रीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पर्थ के बीच नामांकन को लेकर करार किया गया है. इसके तहत ही नामांकन की प्रक्रिया इस सत्र से शुरू होगा.
- चार विषयों में किया गया शुरू
वर्तमान में सीबीएसइ की ओर से 40 वोकेशनल कोर्स चलाये जा रहे है. इसमें से अभी चार विषयाें में नामांकन की प्रक्रिया की जायेगी. स्टूडेंट्स का रिस्पांस आने के बाद 2017 से और भी कई नये या पुराने वोकेशनल कोर्स को इसमें शामिल किया जायेगा. सीबीएसइ की माने तो कैरियर के प्वाइंट से इसे बोर्ड द्वारा शुरू किया जा रहा है. स्कील बेस्ड इन कोर्स को प्लस टू के बाद स्टूडेेंट आसानी से कर पायेंगे.
- 2016 से होगा लागू
सीबीएसइ स्टूडेंट्स को यह सुविधा 2016 से मिलने जा रहा है. 2016-18 सत्र के लिए जो भी स्टूडेंट्स प्लस टू में वोकेशनल कोर्स करेंगे, उन्हें यह सुविधा दी जायेगी. प्लस टू करने के बाद ये स्टूडेंट्स आस्ट्रेलिया में संबंधित विषय में नामांकन ले पायेंगे. दो साल प्लस टू करने के बाद उनके विषय को मुख्य विषय के रूप में देखा जायेगा.
- वोकेशनल कोर्स में स्टूडेंट नहीं लेते इंट्रेस्ट
सीबीएसइ के अनुसार वोकेशनल कोर्स कई सालों से चल रहा है. लेकिन अभी भी स्टूडेंट्स वोकेशनल कोर्स नहीं करना चाहते है. चुकी वोकेशनल कोर्स की मान्यता बस प्लस टू लेवल तक है. जिन विषयाें में वोकेशनल कोर्स होता है, उन विषयाें में आगे ग्रेजुएशन करने में स्टूडेंट को कई दिक्कतें होती है.
इन विषयों में नामांकन से आस्ट्रेलिया में मिलेगा पढ़ने का मौका
- ब्यूटी थेरेपी
- म्यूजिक प्रोडक्शन - बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन
- डिजाइन टू बॉड बेस दी स्ट्रक्चर
कोट
वोकेशनल कोर्स के प्रति स्टूडेट्स का रूझान हो, इस कारण इसे 2016 से शुरू किया जा रहा है. स्कील बेस्ड कोर्स को करने के बाद इन कोर्स में दूसरे देश में भी उन्हें हायर एजुकेशन करने का मौका मिल जायेगा. इससे कैरियर संबंधित आप्सन भी आसानी से मिल सकेगा.
वाइएसके सेशु कुमार, चेयरमैन, सीबीएसइ
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जिस सब्जेक्ट की देंगे परीक्षा, आंसर कॉपी पर उस सब्जेक्ट का नाम होगा दर्ज
संवाददाता, पटना
आइसीएसइ 10वीं और आइएससी 12वीं की बोर्ड परीक्षा में इस बार स्टूडेंट को सब्जेक्ट के नाम के साथ आंसर काॅपी मिलेगा. जिस सब्जेक्ट के जो स्टूडेंट होेंगे, उन्हें वहीं आंसर काॅपी दी जायेगी. अब स्टूडेंट को खुद ही अपने सब्जेक्ट का नाम नहीं लिखना पड़ेगा. इसके अलावा 2016 की बोर्ड परीक्षा में स्टूडेंट के फोटोग्राफ भी लगे होंगे. आंसर काॅपी के टॉप सीट पर ही सब्जेक्ट के नाम और स्टूडेंट के फोटोग्राफ लगें होंगे. इसकाे लेकर बोर्ड की ओर से सूचना स्कूलों को भेज दिया गया है.
- हर स्टूडेंट का बुकलेट होगा अलग
इस बार से आइसीएस बोर्ड की ओर से स्टूडेंट्स वाइज बुकलेट बनाये जा रहे है. हर सब्जेक्ट के लिए अलग-अलग बुकलेट होंगे. हर स्टूडेंट को उनके बुकलेट के अनुसार ही प्रश्न पत्र और आंसर काॅपी दिया जायेगा. ज्ञात हो कि 2015 तक पांच सौ स्टूडेंट का एक साथ बुकलेट का बंडल बनाया जाता था. एग्जामिनेशन हॉल में सीरियली स्टूडेंट्स के बीच बुकलेट को बांटा जाता रहा है. लेकिन इस बार हर स्टूडेंट का अलग-अलग बुकलेट का बंडल होगा.
- कदाचार और मूल्यांकन पर होगी रोक
बोर्ड के इस सिस्टम से एग्जामिनेशन हॉल में कदाचार पर रोक लगेेगी. स्टूडेंट आपस में अांसर काॅपी चेंज कर नहीं लिख पायेंगे. वहीं मूल्यांकन के समय होने वाली गड़बड़ी नहीं हो पायेगी. स्टूडेंट के फोटोग्राफ और सब्जेक्ट का नाम होने से कॉपी की अदला बदली पर भी रोक लग सकेगा.
कोट
पिछले साल यूआइडी की मार्किंग आंसर काॅपी पर शुरू किया गया था. इस बार से आंसर काॅपी पर फोटोग्राफ अौर सब्जेक्ट का नाम दर्ज रहेगा. इससे इवैल्यूएशन अच्छे से हो पायेगी.
एफ हसन, काेर्डिनेटर, आइसीएसइ बोर्ड
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