Monday, August 8, 2016

27 साल से जला रही शिक्षा की दीप... शिक्षिका कम मां के रूप में खड़ी रहती है मीना कुमारी

- संस्कृत की शिक्षिका डा. मीना कुमारी को शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति करेंगे सम्मानित

रिंकू झा, पटना अपने लिये नहीं दूसरों के लिये ही जीना जिंदगी का सही मायने है. किसी को सही रास्ते पर लाना और सही मार्गदर्शन देना ही एक शिक्षक को सफल बनाता है. कुछ ऐसा ही पिछले 27 सालों से दरोगा प्रसाद राय प्लस टू हाई स्कूल, सरिस्ताबाद की संस्कृत की शिक्षिका डा. मीना कुमारी कर रही है. अपने पढ़ाई के अलग तरीके और समाज के दूसरे कामों में बढ़ चढ़ कर भाग लेने के कारण ही डा. मीना कुमारी को स्कूल के बच्चे शिक्षिका के अलावा मांग के रूप में सम्मान देते है. शिक्षिका डा. मीना कुमारी के इसी गुण ने उन्हें पहले राज्य और अब केंद्र सरकार की नजर पर ला दिया है. डा. मीना कुमारी का चुनाव देश के उन चंद शिक्षकों में हुआ है जिसे राष्ट्रपति द्वारा पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जायेगा.
प्रश्न - आपकी नजर में एक सफल शिक्षक कौन है. क्या स्कूल में पढ़ाना ही सफल शिक्षक की परिभाषा है उत्तर - मेरी नजर में समाज के हर चीजों में शामिल होना और उसके प्रति बच्चों को जागरूक करना ही एक शिक्षक की सफलता है. मै स्कूल में क्लास लेने के अलावा समाज के अच्छी चीजों के प्रति बच्चों को जागरूक करती हूं. जब तक एक शिक्षक खुद शामिल नहीं होगा तब तक बच्चे जागरूक नहीं होंगे. मैने अभी तक तीन सौ से अधिक पौधे लगाये है. इससे प्रेरित होकर छात्र खुद ही पौधा लगाते है.
प्रश्न - पढ़ाई के अलावा किस तरह से बच्चों की मदद करती है आप उत्तर - स्कूल में गरीब बच्चे भी है जिनके पास पढ़ाई करने के लिये पैसे नहीं है. ऐसे बच्चों को किताबें, पेन आदि खरीद कर देती हूं. बच्चे अधिक से अधिक स्कूल आयें, इसके लिये गोइंग टू स्कूल आदि कार्यक्रम में शामिल होती हूं. इसके अलावा एनसीसी, स्काउट एंड गाइड आदि कार्यक्रम के प्रति छात्रों को जागरूक करती हूं.

प्रश्न - आम तौर पर संस्कृत से छात्र भागते है, ऐसे में अापने क्या किया जिससे छात्रों की संख्या संस्कृत में बढ़े है उत्तर - मै संस्कृत को रटवाती नहीं बल्कि उसकी प्रैक्टिस करवाती हूं. संस्कृत हमारी संस्कार देने वाला विषय है. यह ऐसा विषय है जो संस्कृति से हमें जोड़ता है. इस विषय को बस पढ़ाती ही नहीं बल्कि इसको लेकर छात्र को जागरूक भी करती हूं. इससे छात्र अब इस विषय भागते नहीं है. हर साल इसकी संख्या भी बढ़ती है.
प्रश्न - आपके इस सफलता का श्रेय किसे देती है उत्तर - मेरी इस सफलता का श्रेय सारे शिक्षक समुदाय को जाता है. मेरे स्कूल के छात्रों को जाता है जो मेरी हर बात बहुत ही ध्यान से सुनते है. मेरे परिवार को हमेशा सहयोग रहा.  

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