Rinku Jha
Monday, August 8, 2016
आरटीइ आंकड़ों में फेर बदल किया स्कूलों ने, जांच के बाद कार्रवाई तय
- कई जिलों में संबंधित जिला शिक्षा कार्यालय और शिक्षा विभाग को भेजे डाटा में काफी अंतर
संवाददाता, पटना
शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लें या ना लें, लेकिन सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान की राशि निजी स्कूल छोड़ना नहीं चाहता है. अधिक से अधिक अनुदान की राशि मिले, इसके लिये प्राइवेट स्कूल नामांकित बच्चों की संख्या में फेर बदल करते है. नामांकन की संख्या कुछ भी हो, लेकिन उसे दोगुना तिगुना करके सरकार को भेजते है. सूचना के अधिकार के तहत कई जिलों का ऐसा मामला सामने आया है. इसमें देखा गया है कि स्कूल ने दो तरह के आंकड़े सरकार को भेजा. संबंधित जिलों के जिला शिक्षा कार्यालय में नामांकन की संख्या कुछ और दिया और शिक्षा विभाग के पास नामांकन की संख्या कुछ और ही भेजा. इन संख्या में एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों का अंतर है. जिलों के अनुसार ऐसे स्कूलों को चिन्हित किया जायेगा. जिन स्कूलों ने नामांकन में गड़बड़ी की है, उसके ऊपर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.
- डीइओ को अधिक संख्या दिखा लेते है अनुदान की राशि
अधिकांश जिलों के स्कूल डीइओ के पास आरटीइ के नामांकन की संख्या अधिक करके भेजते है. चुकी आरटीइ के तहत मिलने वाले अनुदान की राशि डीइओ के माध्यम से ही मिलती है. इस कारण निजी विद्यालय डीइओ के पास बच्चों की संख्या अधिक बताते है. वहीं शिक्षा विभाग की ओर से कोई इंक्वायरी नहीं हो जायें, इससे नामांकित बच्चों की संख्या कम कर देते है. यह हाल कोई एक स्कूल का नहीं बल्कि सैकड़ों स्कूलों का है. कई जिलों में तो आंकड़े में काफी अंतर है.
- कई जिले हर साल कर रहे गड़बड़ी
प्रदेश भर में कई जिले हर साल आंकड़े में गड़बड़ी कर रहे है. जितना नामांकन लेते नहीं है, उससे अधिक बता रहे है. मधेपुरा जिला ने 2015-16 में दो आंकड़ा बनाया. मधेपुरा जिला शिक्षा कार्यालय को 1658 बच्चों के नामांकन लेने का आंकड़ा दिया वहीं शिक्षा विभाग के पास मधेपुरा से मात्र 753 बच्चों का नामांकन ही लिया गया. कुछ ऐसा ही हाल सीतामढ़ी जिला का है. सीतामढ़ी जिला के डीइओ के पास 2015-16 में नामांकन की संख्या 1800 सौ है. वहीं शिक्षा विभाग के पास सीतामढ़ी जिला में 1378 बच्चों का नामांकन आरटीइ के तहत हुआ है. ऐसे कई जिले है जो हर साल इस तरह की गड़बड़ी नामांकन में कर रहे है.
इन जिलों में हुई है नामांकन लेने मेंं गड़बड़ी
बेगूसराय
2012-13 में डीइओ को भेजा - 204
शिक्षा विभाग को भेजा - 68 2013-14 में
डीइओ को भेजा - 887शिक्षा विभाग को भेजा - 62
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 2695
शिक्षा विभाग को भेजा - 796
शेखपुरा
2012-13 में डीइओ को भेजा - 47
शिक्षा विभाग को भेजा - 66 2013-14 में
डीइओ को भेजा - 150शिक्षा विभाग को भेजा - 54
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 00
शिक्षा विभाग को भेजा - 85
मधेपुरा
2012-13 में डीइओ को भेजा - 101
शिक्षा विभाग को भेजा - 1132013-14 में
डीइओ को भेजा - 199शिक्षा विभाग को भेजा - 191
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 534
शिक्षा विभाग को भेजा - 344
कटिहार
2012-13 में डीइओ को भेजा - 39
शिक्षा विभाग को भेजा - 402013-14 में
डीइओ को भेजा - 30शिक्षा विभाग को भेजा - 30
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 577
शिक्षा विभाग को भेजा - 695
बांका में
2012-13 में डीइओ को भेजा - 23
शिक्षा विभाग को भेजा - 902013-14 में
डीइओ को भेजा - 152शिक्षा विभाग को भेजा - 195
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 643
शिक्षा विभाग को भेजा - 387
जमुई में
2012-13 में डीइओ को भेजा - 81
शिक्षा विभाग को भेजा - 812013-14 में
डीइओ को भेजा - 272शिक्षा विभाग को भेजा - 230
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 529
शिक्षा विभाग को भेजा - 422
सीवान में
2012-13 में डीइओ को भेजा - 40
शिक्षा विभाग को भेजा - 752013-14 में
डीइओ को भेजा - 153शिक्षा विभाग को भेजा - 106
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 2654
शिक्षा विभाग को भेजा - 2150
कोट
डीइओ और शिक्षा विभाग से मांगे गये नामांकन की लिस्ट में अंतर है. कई जिलों से नामांकन की संख्या कुछ है, वहीं उसी जिले का शिक्षा विभाग द्वारा दिया गया नामांकन की संख्या कुछ और ही है. कौन सा संख्या सही है यह तो स्कूल वाला ही जाने.
अजय कुमार चौरसिया, आरटीआइ एक्टिविस्ट
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