Rinku Jha
Wednesday, August 24, 2016
विज्ञान, गणित और अंग्रेजी का अब एक ही सिलेबस
- सीबीएसइ, आइसीएसइ और बिहार बोर्ड में एक ही सिलेबस से होगी पढ़ाई
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ हो या आइसीएसइ बोर्ड हो या बिहार बोर्ड के छात्र हो, अब एक ही किताब से पढ़ाई होगी. सभी बोर्ड में विज्ञान, गणित और अंग्रेजी की एक ही सिलेबस को लागू किया जायेगा. इससे अभी तक सिलेबस की असामनता को समाप्त किया जा सकेगा. नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2016 के तहत यह किया जा रहा है. काउंसिल ऑफ बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन इन इंडिया (कोबसे) ने इसे एप्रूव कर दिया है. कोबसे के अनुसार 2017 के नये सेशन से इसे लागू कर दिया जायेगा. इसकी जानकारी जल्द ही तमाम स्टेट बोर्ड को दिया जायेगा.
- 9वीं से 12वीं तक होगा लागू
समान सिलेबस की शुरुआत कई चरणों में किया जायेगा. पहले चरण में इसे 9वीं से 12वीं तक में लागू किया जायेगा. इसके बाद दूसरे क्लास में एक सिलेबस काे लागू किया जायेगा. कोबसे के अनुसार अभी देश भर में 59 अधिकृत शिक्षा बोर्ड कोबसे के सदस्य हैं. इन सबका सिलेबस अलग-अलग है. सिलेबस एक नहीं होने से पढ़ाई में असमानता बनी रहती है. इसका असर क्वालिटी एजुकेशन पर पड़ रहा है.
- प्रतियोगी परीक्षा में मिलेगी सुविधा
सीबीएसइ को छोड़ तमाम बोर्ड के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिये अलग से सीबीएसइ का सिलेबस पढ़ाना होता था. चूंकि सीबीएसइ में एनसीइआरटी को ही फोकस किया जा रहा है. इस कारण दूसरे बोर्ड के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिये अपना बोर्ड के सिलेबस के अलावा एनसीइआरटी भी अलग से पढ़ना होता है. एक सिलेबस होने से छात्र एक ही सिलेबस को पढ़ेंगे.
- आइसीएसइ बोर्ड ने सीबीएसइ के अनुसार बनाया अपना सिलेबस
वहीं दूसरी ओर आइसीएसइ बोर्ड ने 9वीं से 12वीं तक के सिलेबस में परिवर्तन कर दिया है. जहां अभी तक आइसीएसइ बोर्ड में अपना सिलेबस होता था, वहीं अब सीबीएसइ के सिलेबस की पढ़ाई होगी. बोर्ड इसे 2017 से लागू भी करने जा रहा है. हाल में बोर्ड ने इसकी सूचना तमाम स्कूलों को दे दिया है.
कोट
यह काफी अच्छा प्रयास है. एक सिलेबस होने से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में काफी मदद मिलेगी. इसके अलावा अलग-अलग बुक पढ़ने की आवश्यकता स्टूडेंट्स को नहीं होगा. आइसीएसइ बोर्ड ने तो इसे समर्थन भी दे दिया है.
एफ हसन, सिटी कोर्डिनेटर, आइसीएसइ बोर्ड
समान शिक्षा तो सबसे बढ़िया है. इसे जल्द से जल्द लागू किया जायें. साइंस और मैथ का एक सिलेबस होने से स्टूडेंट्स को काफी फायदा मिलेगा. एक ही स्टूडेंट्स जहां अपडेट सिलेबस पढ़ते थे, वहीं दूसरे बोर्ड में ऐसा लागू नहीं था, इससे असमानता हो रही थी. अब उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ
समान शिक्षा होने से बच्चों के पठन पाठन एक तरीके का होगा. इससे पढ़ाई का स्तर एक जैसा बढ़ेगा. इससे स्टूडेंट्स में आत्मविश्वास बढ़ेगा अौर सफलता का ग्राफ भी अच्छा होगा.
डा. शंकर कुमार, शिक्षाविद्
\\B
पोता, पोती, नाती और नतनी को मिलेगा शिक्षक नियोजन में आरक्षण, 24 अगस्त से जमा करें आवेदन
- आरक्षित सीटों के लिये 23 सितंबर तक लिये जायेंगे दुबारा आवेदन
संवाददाता, पटना
शिक्षक नियोजन में पाेता, पोती के साथ नाती और नतनी का फायदा मिलेगा. लेकिन इसके लिये आपके दादा-दादी या नाना-नानी को स्वतंत्रता सेनानी होना आवश्यक है. इसके साथ नियोजन कार्यालय के पास स्वतंत्रता सेनानी के पोता-पोती और नाती-नतनी है, इसे साबित करना होगा. यह जानकारी उन तमाम अभ्यर्थी को दिया जा रहा है जो स्वतंत्रता सेनानी के खानदान से खुद को बता रहे है. इन दिनों शिक्षक नियोजन कार्यालय में ऐसे अभ्यर्थी की लाइन लगी हुई है जिनके दादा-दादी या नाना-नानी स्वतंत्रता सेनानी रह चुके है. अब वो शिक्षक बनने के लिये इसका फायदा उठाना चाहते है. ज्ञात हो कि बिहार सरकार ने शिक्षक नियोजन में दो फीसदी स्वतंत्रता सेनानी के लिये आरक्षण दिया है. यह आरक्षण हर केटेगरी के लिये दिया गया है.
- आरक्षित सीटों के लिये 24 से लिये जायेंगे आवेदन
जिला परिषद और नगर निगम में शिक्षक नियोजन को लेकर महिलाओं के 35 फीसदी सीटों पर आरक्षण और दो फीसदी स्वतंत्रता सेनानी को आरक्षण दिया गया है. आरक्षित सीटों के लिये दुबारा आवेदन लिया जायेगा. इसके लिये 24 अगस्त से आवेदन मिलना शुरू हो जायेगा. आवेदन के साथ आरक्षण संबंधित कागजात भी जमा करना होगा. तभी अारक्षण का लाभ मिलेगा. आवेदन जमा करने के लिये 23 सितंबर तक का समय अभ्यर्थी को दिया जायेगा.
- हर केटेगरी की महिलाओं को मिलेगा 35 फीसदी आरक्षण का लाभ
वहीं 35 फीसदी महिलाओं के आरक्षण पर हर केटेगरी की महिलाओं को लाभ मिलेगा. इसमें सामान्य, बीसी, एससी, एसटी, इबीसी और आरएफ केटेगरी की महिलाएं शामिल है. हर केटेगरी के लिये रोस्टर तैयार कर लिया गया है. इसे बिहार शिक्षा विभाग के वेबसाइट पर डाल दिया गया है. रोस्टर के अनुसार ही आरक्षण का लाभ महिलाओं को मिलेगा. ज्ञात हो कि जिला परिषद और नगर निगम के शिक्षक नियोजन के लिये पहले आयें आवेदन में भी महिलाओं को यह लाभ मिलेगा. इसके अलावा दुबारा फिर महिला अभ्यर्थी से आवेदन मांगे गये है.
मान्यता घोटाला: 43 कॉलेजों का काला चिठ्ठा तैयार, बोर्ड सौपेंगा एसआइटी काे मोटी फाइल
- पांच लोगों की टीम कर रही जिलों में जाकर इन कॉलेजों की जांच
संवाददाता, पटना
कागजों पर कॉलेजों को मान्यता देने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है. पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह के फर्जी कॉलेजों को मान्यता देने की कहानी का पोल खुलना शुरू हो गया है. जहां बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से अपने स्तर पर कॉलेजों की जांच की जा रही है, वहीं एसआइटी भी अपने स्तर से जांच कर रही है. इसी कड़ी में एसआइटी ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से 43 कॉलेजों का मूल फाइल मांगा है. ये तमाम कॉलेज 208 कॉलेजों में शामिल है. इन कॉलेजो का मूल फाइल के साथ तमाम डिटेल्स बिहार बोर्ड की ओर से एसआइटी को उपलब्ध करवाया जा रहा है. एक दो दिनों में एसआइटी के पास 43 कॉलेजों के सारे मूल फाइल को सौंप दिया जायेगा.
- सारे कॉलेज नहीं करते है संबंद्धता मानक को पूरा
बिहार बोर्ड की माने तो 208 कॉलेजों में 43 कॉलेज संबंद्धता के मानक को पूरा नहीं कर रहा है. इसमें कई कॉलेज तो ऐसे है जो संबंद्धता की बैठक में शामिल तो हुए, लेकिन इनके संबंद्धता के लिये किसी तरह का जांच नहीं किया गया. कई कॉलेजों की तो पूर्व अध्यक्ष ने जांच भी नहीं करवायी थी. बोर्ड कर्मचारियों की माने तो कई जिलों के डीइओ ने जांच में कॉलेज के बारे में निगेटिव रिपोर्ट बिहार बोर्ड को सौंपा था, लेकिन पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद ने उसे भी संबंद्धता दे दिया.
- पांच लोगों की बनायी गयी जांच टीम
इन 43 कॉलेजों की जांच बिहार बोर्ड की ओर से किया जा रहा है. ये कॉलेज जिन जिलों में है, टीम वहां पर जाकर कॉलेज की जांच कर रही है. बोर्ड कर्मचारियों ने बताया कि जुलाई के दूसरे सप्ताह से जांच चल रही है. जांच टीम में संबंधित जिला के डीइओ, बिहार बोर्ड की ओर से एक कर्मचारी, संबंधित जिले के डीएम की ओर से दो अधिकारी और संबंधित जिले के एसपी की ओर से एक अधिकारी को शामिल किया गया है.
इन 43 कॉलेजों की मूल फाइल एसआइटी ने मांगा है
इन महाविद्यालयों को 29 और 30 अप्रैल 2016 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- गौरी रामदेव राय उच्च महाविद्यालय, सरमस्तपुर, वैशाली - मंजूर आलम उच्च विद्यालय, आंती, गया
- मखदूम बख्श मेमोरियल उच्च महाविद्यालय, उत्तरवाहिनी, चनपटिया, पश्चिम चंपारण - डा. वहाब मेमोरियल इंटर कॉलेज, रामपुरवा, गौनाहा, पश्चिम चंपारण
इन महाविद्यालयों को 11 से 25 नवंबर 2015 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- महात्मा गांधी इंटर कॉलेज, जहानाबाद
- भगवान सिंह उच्च माध्यमििक विद्यालय, विक्रमगंज, रोहतास - हरिनंदन चंद्रवंशी उच्च माध्यमिक विद्यालय, विक्रमगंज, रोहतास
- एमडी सैफ उच्च माध्यमिक विद्यालय, विक्रमगंज, रोहतास - जेएमडी उच्च माध्यमिक विद्यालय, विक्रमगंज, रोहतास
- मेहीं सेवी शिव शाही उच्च माध्यमिक विद्यालय, मधेपुरा - प्रगति उच्च माध्यमिक विद्यालय, बिहिया, भोजपुर
- सर्वविद्या उच्च स्तरीय प्लस टू विद्यालय, चांदी, भोजपुर
इन महाविद्यालयों को 8 से 12 दिसंबर 2015 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- एनएएच उच्च माध्यमिक विद्यालय, रेडिया, विक्रमगंज, रोहतास - संघमित्रा 10 प्लस टू उच्च माध्यमिक विद्यालय, महावीरगंज, दिनारा, रोहतास
- डा. रजा इमाम इंटरनेशनल कॉलेज, फुलवारीशरीफ, पटना - जनार्दन उच्च माध्यमिक विद्यालय, मुसहरदा, नरकटियागंज, पश्चिम चंपारण
- संतोष उच्च माध्यमिक प्लस टू विद्यालय, गुरारू, गया
इन महाविद्यालयों को 17 सितंबर, 21 सितंबर और 23 सितंबर 2014 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- स्कॉलर उच्च माध्यमिक विद्यालय, छपरा, सारण - डा. कमल किशोर प्रसाद राय युगल किशोर झा उच्च माध्यमिक विद्यालय हसनपुर, महनार, वैशाली
- महिला महाविद्यालय, झाझा, जमुई - केशव बिदेंश्वरी उच्च माध्यमिक विद्यालय, अरवल
- दीपा उच्च माध्यमिक विद्यालय, वैदराबाद, अरवल - मेगासॉफट फाउंडेशन उच्च माध्यमिक विद्यालय, एमजी रोड, औरंगाबाद
- सचिया अमृत उच्च माध्यमिक विद्यालय, सुपौल, अकबरपुर, नवादा - लखराजो देवी जमुना मिश्रा उच्च माध्यमिक विद्यालय, इंद्रार्थ, खुर्द, रोहतास
इन महाविद्यालयों को 20 और 21 मार्च 2016 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- श्री भगवान रमुना प्लस टू विद्यालय, प्रसादी इंगलिश, अरवल
- उदयनाचार्य विद्याकर कवि इंटर महाविद्यालय कडमा, आलमगंज, मधेपुरा - महाकाली रविनाथ मेमोरियल विद्यापीठ उच्च माध्यमिक विद्यालय, मकरंदा, मनिगाछी, दरभंगा
- पुनिदा सतन उच्च माध्यमिक विद्यालय, कालीचक, पहाड़पुर, गया - मां पानापति जतन उच्च माध्यमिक विद्यालय , माणिकपुर, बड़हिया, अरवल
इन महाविद्यालयों को 20 और 21 मई 2016 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- डा. रामानंद सिंह भगवान बुद्ध कॉलेज, हाजीपुर, वैशाली
- आचार्य नलिन उच्च माध्यमिक विद्यालय, कोष्डीहारा, गया - डी एन राय सहकारी महाविद्यालय, चकसिकंदर, बाकरपुर, वैशाली
- जगधर राय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बखरी बड़ाई, राजापाकड़, वैशाली - उषारविंद माध्यमिक सह उच्च माध्यमिक विद्यालय, अशोकनगर, जलालपुर, सारण
इन महाविद्यालयों को 17 अक्टूबर, 21 अक्टूबर और 23 अक्टूबर 2014 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- रमावती देवी बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, जतरा, सारण
- चंद्रजाति महाविद्यालय, सुतविहार, सारण - आशा बिहार मेमोरियल महाविद्यालय, जीतापुर, सारण
- राजेंद्र श्रीकंत महाविद्यालय, जलालपुर, सारण - राज आमी आरती बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, हिरताड़, समस्तीपुर
- महात्मा गांधी बालिका विद्यालय, पूर्वी चंपारण - गुमतका इंटर महाविद्यालय, पश्चिम चंपारण
- दीननारायण उच्च माध्यमिक, मधेपुरा
Monday, August 8, 2016
आरटीइ को किया अनदेखा : ना लिया नामांकन, ना दिया जुर्माना,
- शिक्षा के अधिकार के तहत 32 स्कूलों ने नहीं लिया अब तक एक भी नामांकन
- छह महीने पहले जारी हुआ स्कूलों के उपर नहीं लगा अब तक कोई जुर्माना
संवाददाता, पटना
शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लेने का मन करेगा तो करेंगे और नहीं मन करेगा तो नहीं करेंगे. कुछ इसी फॉर्मूला को पटना के स्कूल फॉलो करते है. बिहार में 2011 से ही शिक्षा का अधिकार कानून लागू है, लेकिन छह साल बीत जाने के बाद स्कूलों तक पहुंच नहीं सका है. अगर हम बात राजधानी की करें तो, राजधानी में ही अभी भी 32 ऐसे स्कूल है जिन्हाेंने एक भी नामांकन शिक्षा के अधिकार के तहत नहीं लिया है. स्कूल अपनी मरजी से काम करते है. नामांकन नहीं लेने के कारण इन स्कूलों पर जुर्माना भी लगाया गया, लेकिन इन स्कूलों ने ना तो अभी तक जुर्माना दिया है और ना ही नामांकन ही लिया है.
- एक लाख रूपये का लगाया गया था जुर्माना
शिक्षा के अधिकार के तहत इन 32 स्कूलों पर एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया गया था. इन स्कूलों से नामांकन नहीं लेने का पहले स्पष्टीकरण पूछा गया था. लेकिन इन स्कूलों ने इसकी कोई जानकारी नहीं दिया. नामांकन नहीं लेने के कारण शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12 (एक) (सी) के तहत ऐसे निजी विद्यालयों पर आरटीइ के तहत कार्रवाई की जायेगी. कार्रवाई के तौर पर एक लाख रूपये का जुर्माना स्कूलों पर लगाया जायेगा. अगर यह जुर्माना स्कूल जमा नहीं करता है तो 10 हजार प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना लिया जायेगा. लेकिन अभी तक स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं किया गया है.
- पहुंचा राज्य सूचना आयोग
स्कूलों द्वारा आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेने का मामला अब राज्य सूचना आयोग पहुंच गया है. इसको लेकर 3 अगस्त को राज्य सूचना आयुक्त वीके वर्मा के पास सुनवाई भी हुआ. वाद संख्या - 99613/13-14 के तहत आयोग ने प्राथमिक शिक्षा से जल्द से जल्द स्कूल पर कार्रवाई करने को कहा है. आरटीआइ एक्टिविस्ट अजय कुमार ने बताया कि छह महीने पहले ही प्राथमिक शिक्षा विभाग के बाद स्कूलों की लिस्ट भेजी गयी है. लेकिन किसी भी स्कूल पर जुर्माना नहीं लगाया गया है.
कोट
शिक्षा के अधिकार के तहत 32 स्कूलों ने अभी तक नामांकन नहीं लिया है. ऐसे स्कूलों की सूची तैयार कर विभाग को फरवरी में ही भेजा गया. अभी तक स्कूल पर कार्रवाई नहीं किया गया है.
राम सागर प्रसाद सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान
\\B
आरटीइ आंकड़ों में फेर बदल किया स्कूलों ने, जांच के बाद कार्रवाई तय
- कई जिलों में संबंधित जिला शिक्षा कार्यालय और शिक्षा विभाग को भेजे डाटा में काफी अंतर
संवाददाता, पटना
शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लें या ना लें, लेकिन सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान की राशि निजी स्कूल छोड़ना नहीं चाहता है. अधिक से अधिक अनुदान की राशि मिले, इसके लिये प्राइवेट स्कूल नामांकित बच्चों की संख्या में फेर बदल करते है. नामांकन की संख्या कुछ भी हो, लेकिन उसे दोगुना तिगुना करके सरकार को भेजते है. सूचना के अधिकार के तहत कई जिलों का ऐसा मामला सामने आया है. इसमें देखा गया है कि स्कूल ने दो तरह के आंकड़े सरकार को भेजा. संबंधित जिलों के जिला शिक्षा कार्यालय में नामांकन की संख्या कुछ और दिया और शिक्षा विभाग के पास नामांकन की संख्या कुछ और ही भेजा. इन संख्या में एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों का अंतर है. जिलों के अनुसार ऐसे स्कूलों को चिन्हित किया जायेगा. जिन स्कूलों ने नामांकन में गड़बड़ी की है, उसके ऊपर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.
- डीइओ को अधिक संख्या दिखा लेते है अनुदान की राशि
अधिकांश जिलों के स्कूल डीइओ के पास आरटीइ के नामांकन की संख्या अधिक करके भेजते है. चुकी आरटीइ के तहत मिलने वाले अनुदान की राशि डीइओ के माध्यम से ही मिलती है. इस कारण निजी विद्यालय डीइओ के पास बच्चों की संख्या अधिक बताते है. वहीं शिक्षा विभाग की ओर से कोई इंक्वायरी नहीं हो जायें, इससे नामांकित बच्चों की संख्या कम कर देते है. यह हाल कोई एक स्कूल का नहीं बल्कि सैकड़ों स्कूलों का है. कई जिलों में तो आंकड़े में काफी अंतर है.
- कई जिले हर साल कर रहे गड़बड़ी
प्रदेश भर में कई जिले हर साल आंकड़े में गड़बड़ी कर रहे है. जितना नामांकन लेते नहीं है, उससे अधिक बता रहे है. मधेपुरा जिला ने 2015-16 में दो आंकड़ा बनाया. मधेपुरा जिला शिक्षा कार्यालय को 1658 बच्चों के नामांकन लेने का आंकड़ा दिया वहीं शिक्षा विभाग के पास मधेपुरा से मात्र 753 बच्चों का नामांकन ही लिया गया. कुछ ऐसा ही हाल सीतामढ़ी जिला का है. सीतामढ़ी जिला के डीइओ के पास 2015-16 में नामांकन की संख्या 1800 सौ है. वहीं शिक्षा विभाग के पास सीतामढ़ी जिला में 1378 बच्चों का नामांकन आरटीइ के तहत हुआ है. ऐसे कई जिले है जो हर साल इस तरह की गड़बड़ी नामांकन में कर रहे है.
इन जिलों में हुई है नामांकन लेने मेंं गड़बड़ी
बेगूसराय
2012-13 में डीइओ को भेजा - 204
शिक्षा विभाग को भेजा - 68 2013-14 में
डीइओ को भेजा - 887शिक्षा विभाग को भेजा - 62
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 2695
शिक्षा विभाग को भेजा - 796
शेखपुरा
2012-13 में डीइओ को भेजा - 47
शिक्षा विभाग को भेजा - 66 2013-14 में
डीइओ को भेजा - 150शिक्षा विभाग को भेजा - 54
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 00
शिक्षा विभाग को भेजा - 85
मधेपुरा
2012-13 में डीइओ को भेजा - 101
शिक्षा विभाग को भेजा - 1132013-14 में
डीइओ को भेजा - 199शिक्षा विभाग को भेजा - 191
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 534
शिक्षा विभाग को भेजा - 344
कटिहार
2012-13 में डीइओ को भेजा - 39
शिक्षा विभाग को भेजा - 402013-14 में
डीइओ को भेजा - 30शिक्षा विभाग को भेजा - 30
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 577
शिक्षा विभाग को भेजा - 695
बांका में
2012-13 में डीइओ को भेजा - 23
शिक्षा विभाग को भेजा - 902013-14 में
डीइओ को भेजा - 152शिक्षा विभाग को भेजा - 195
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 643
शिक्षा विभाग को भेजा - 387
जमुई में
2012-13 में डीइओ को भेजा - 81
शिक्षा विभाग को भेजा - 812013-14 में
डीइओ को भेजा - 272शिक्षा विभाग को भेजा - 230
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 529
शिक्षा विभाग को भेजा - 422
सीवान में
2012-13 में डीइओ को भेजा - 40
शिक्षा विभाग को भेजा - 752013-14 में
डीइओ को भेजा - 153शिक्षा विभाग को भेजा - 106
2014-15 मेंडीइओ को भेजा - 2654
शिक्षा विभाग को भेजा - 2150
कोट
डीइओ और शिक्षा विभाग से मांगे गये नामांकन की लिस्ट में अंतर है. कई जिलों से नामांकन की संख्या कुछ है, वहीं उसी जिले का शिक्षा विभाग द्वारा दिया गया नामांकन की संख्या कुछ और ही है. कौन सा संख्या सही है यह तो स्कूल वाला ही जाने.
अजय कुमार चौरसिया, आरटीआइ एक्टिविस्ट
\\B
इंजीनियरिंग और मेडिकल की तरह 10वीं और 12वीं की देश भर में एक परीक्षा
- हर स्टेट बोर्ड से मांगा गया सुझाव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पास भेजा गया लेटर
संवाददाता, पटना
इंजीनियरिंग और मेडिकल की तरह ही 10वीं और 12वीं की एक परीक्षा लिये जाने की तैयारी चल रही है. देश भर में तमाम नेशनल और स्टेट बोर्ड के 10वीं और 12वीं का एक सिलेबस और एक ही प्रश्न पत्र होगा. एक ही साथ परीक्षा होगी. एक ही साथ रिजल्ट भी निकलेगा. 10वीं और 12वीं के कॉमन क्वेशचन पेपर और सिलेबस को लेकर तमाम स्टेट बोर्ड को लेटर भेजा गया है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को भी लेटर भेजा गया है. स्टेट बोर्ड से कॉमर्स क्वेश्चन पेपर और सिलेबस को एक करने पर सुझाव मांगा गया है. सुझाव का जवाब देने के लिये स्टेट बोर्ड को एक महीने का समय दिया गया है. स्टेट बोर्ड से जवाब आने के बाद इसको लेकर अक्तूबर में फैसला लिया जायेगा.
- साझा कमेटी तैयार करेगी सिलेबस
सीबीएसइ, आइसीएसइ बोर्ड के साथ तमाम स्टेट का अब एक जैसा सिलेबस और परीक्षा पैटर्न एक जैसा हो, इसके लिए साझा कमेटी बनायी गयी है. यह साझा कमेटी पाठ्यक्रम और प्रश्न पत्र का एक जैसा खाका तैयार करेगी. इसमें न तो किसी बोर्ड में नंबरों में असमानता होगी और ना ही किसी बोर्ड का रिजल्ट खराब होगा. एक ही नियम पर देश भर में 10वीं और 12वीं की परीक्षा ली जायेगी.
- कदाचार या नकल पर होगी नकेल
कई राज्य में कदाचार या नकल आदि पर रोक नहीं लग पा रहा है. परीक्षा से लेकर मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने में कई तरह की गड़बड़ी हो रही है. कॉमन क्वेशचन सिस्टम में इन गड़बड़ियों पर नकेल कसा जा सकेगा. सीबीएसइ सूत्रों की माने तो सीबीएसइ ने इसकी हामी भर दी है. इसके अलावा आधे से अधिक स्टेट बोर्ड ने भी कॉमन सिलेबस और प्रश्न पत्र करने को तैयार है.
कोट
हमें भी इसकी सूचना मिली है. हमारे पास अभी लिखित कोई सलाह नहीं मांगी गयी है. सलाह मांगी जायेगी तो उसे हम सरकार के पास भेजेंगे. सरकार का हो फैसला होगा, वहीं हमें मान्य होगा.
अानंद किशोर, अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति
\\B
मैट्रिक से पहले ही पास कर ली इंटर की परीक्षा
- 500 संगीत एसटीइटी अभ्यर्थियों के नियोजन के दौरान निकला गड़बड़झाला
- दो सालों से लटका है संगीत शिक्षकों के नियुक्ति का मामला
संवाददाता, पटना
अभी तक हम सभी जानते है कि पहले मैट्रिक पास किया जाता है, उसके बाद इंटर और फिर स्नातक की डिग्री मिलती है. लेकिन बिहार बोर्ड की कारनामा देखिये, मैट्रिक के पास करने से पहले ही इंटरमीडिएट पास कर दिया. वहीं कईयो के पास स्नातक की डिग्री पहले है, बाद में मैट्रिक की परीक्षा पास किया. रिजल्ट का यह गड़बड़ झाला कहीं और नहीं बल्कि संगीत एसटीइटी में हुआ है. 2013 में संगीत एसटीइटी की परीक्षा लिया गया था. लगभग 5 सौ अभ्यर्थी एसटीइटी की परीक्षा में सफल भी हुई. शिक्षक नियोजन के समय जब अभ्यर्थी से सर्टिफिकेट जमा करने को कहा गया तो मामला सामने आया. इससे नियोजन प्रक्रिया को रोक दिया गया.
- संदेहास्पद है सारे अभ्यर्थी के रिजल्ट
उर्दू टीइटी में पैसे लेकर फेल को पास करवाया गया, वहीं अब संगीत एसटीइटी में फर्जी सर्टिफिकेट देने का मामला सामने आया है. संगीत एसटीइटी पास अभ्यर्थी ने जो मार्क्स सीट जमा किया है, वो काफी संदेहास्पद है. अधिकांश अभ्यर्थी के मैट्रिक, इंटर के उत्तीर्ण होने वाले वर्ष में उलट फेर है. इससे शिक्षक नियोजन की प्रक्रिया होने के बावजूद नियुक्ति नहीं हो पा रही है.
- मांगा गया है शिक्षा विभाग से दिशा-निर्देश
इसको लेकर जिला शिक्षा नियोजन की ओर एक चिट्ठी शिक्षा विभाग को लिखा गया है. 16 फरवरी 2016 को लिखी गयी इस चिट्ठी में शिक्षा विभाग से शिक्षक नियोजन के अभ्यर्थी के प्रमाण पत्र निर्धारण का दिशा निर्देश मांगा गया है. शिक्षा विभाग की ओर से जब तक दिशा निर्देश नहीं आयेगा, तब तक संगीत शिक्षक नियोजन नहीं किया जायेगा.
- पूर्व अध्यक्ष के सामने का है मामला
संगीत एसटीइटी की नियुक्ति की प्रक्रिया बिहार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह के समय ही हुआ था. संगीत एसटीइटी में अभ्यर्थी सफल तो हो गये, लेकिन उनके पास मैट्रिक या उसके ऊपर का सर्टिफिकेट नहीं था. संगीत की डिग्री के अलावा मैट्रिक, इंटर का सर्टिफिकेट होना आवश्यक होता है. बोर्ड कर्मचारियों ने बताया कि पूर्व अध्यक्ष ने संगीत एसटीइटी पास अभ्यर्थी को फर्जी मैट्रिक और इंटर का सर्टिफिकेट उपलब्ध करवाया.
रिजल्ट की गड़बड़ी पर शिक्षा विभाग से मांगे गये इन प्रश्नों पर दिशा-निर्देश
- एसटीइटी में सफल कई अभ्यर्थी के मैट्रिक और इंटर समान वर्ष में ही उत्तीर्ण किया- सफल कई अभ्यर्थी मैट्रिक उत्तीर्णता वर्ष के अगले वर्ष ही इंटर उत्तीर्ण कर लिया है
- सफल कई अभ्यर्थी मैट्रिक के पूर्व स्नातक की अर्हता प्राप्त किये है - सफल कई अभ्यर्थी मैट्रिक के कई साल पहले इंटर किया, उसके बाद मैट्रिक किया
27 साल से जला रही शिक्षा की दीप... शिक्षिका कम मां के रूप में खड़ी रहती है मीना कुमारी
- संस्कृत की शिक्षिका डा. मीना कुमारी को शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति करेंगे सम्मानित
रिंकू झा, पटना
अपने लिये नहीं दूसरों के लिये ही जीना जिंदगी का सही मायने है. किसी को सही रास्ते पर लाना और सही मार्गदर्शन देना ही एक शिक्षक को सफल बनाता है. कुछ ऐसा ही पिछले 27 सालों से दरोगा प्रसाद राय प्लस टू हाई स्कूल, सरिस्ताबाद की संस्कृत की शिक्षिका डा. मीना कुमारी कर रही है. अपने पढ़ाई के अलग तरीके और समाज के दूसरे कामों में बढ़ चढ़ कर भाग लेने के कारण ही डा. मीना कुमारी को स्कूल के बच्चे शिक्षिका के अलावा मांग के रूप में सम्मान देते है. शिक्षिका डा. मीना कुमारी के इसी गुण ने उन्हें पहले राज्य और अब केंद्र सरकार की नजर पर ला दिया है. डा. मीना कुमारी का चुनाव देश के उन चंद शिक्षकों में हुआ है जिसे राष्ट्रपति द्वारा पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जायेगा.
प्रश्न - आपकी नजर में एक सफल शिक्षक कौन है. क्या स्कूल में पढ़ाना ही सफल शिक्षक की परिभाषा है
उत्तर - मेरी नजर में समाज के हर चीजों में शामिल होना और उसके प्रति बच्चों को जागरूक करना ही एक शिक्षक की सफलता है. मै स्कूल में क्लास लेने के अलावा समाज के अच्छी चीजों के प्रति बच्चों को जागरूक करती हूं. जब तक एक शिक्षक खुद शामिल नहीं होगा तब तक बच्चे जागरूक नहीं होंगे. मैने अभी तक तीन सौ से अधिक पौधे लगाये है. इससे प्रेरित होकर छात्र खुद ही पौधा लगाते है.
प्रश्न - पढ़ाई के अलावा किस तरह से बच्चों की मदद करती है आप
उत्तर - स्कूल में गरीब बच्चे भी है जिनके पास पढ़ाई करने के लिये पैसे नहीं है. ऐसे बच्चों को किताबें, पेन आदि खरीद कर देती हूं. बच्चे अधिक से अधिक स्कूल आयें, इसके लिये गोइंग टू स्कूल आदि कार्यक्रम में शामिल होती हूं. इसके अलावा एनसीसी, स्काउट एंड गाइड आदि कार्यक्रम के प्रति छात्रों को जागरूक करती हूं.
प्रश्न - आम तौर पर संस्कृत से छात्र भागते है, ऐसे में अापने क्या किया जिससे छात्रों की संख्या संस्कृत में बढ़े है
उत्तर - मै संस्कृत को रटवाती नहीं बल्कि उसकी प्रैक्टिस करवाती हूं. संस्कृत हमारी संस्कार देने वाला विषय है. यह ऐसा विषय है जो संस्कृति से हमें जोड़ता है. इस विषय को बस पढ़ाती ही नहीं बल्कि इसको लेकर छात्र को जागरूक भी करती हूं. इससे छात्र अब इस विषय भागते नहीं है. हर साल इसकी संख्या भी बढ़ती है.
प्रश्न - आपके इस सफलता का श्रेय किसे देती है
उत्तर - मेरी इस सफलता का श्रेय सारे शिक्षक समुदाय को जाता है. मेरे स्कूल के छात्रों को जाता है जो मेरी हर बात बहुत ही ध्यान से सुनते है. मेरे परिवार को हमेशा सहयोग रहा.
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Comments (Atom)