Rinku Jha
Tuesday, July 4, 2017
हर दिन एक पीरियड 'गुड टच बैड टच' के लिए
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सीबीएसइ और आइसीएसइ के कई स्कूलों ने शुरू किया क्लास, गर्ल्स स्टूडेंट्स को किया जा रहा अवेयर
संवाददाता, पटना
किसी ने छू लिया. कुछ अजीब से महसूस हुआ. सड़क पर आते जाते लोग ने जानबूझ कर टच कर दिया और सॉरी कह कर चल दिये... अक्सर आयें दिन इन सिच्युएशन का सामना खासकर लड़कियां करती हैं. कई बार वो इसे इग्नोर कर छोड़ देती हैं, तो कई बार मानसिक रूप से उसका असर भी हो जाता है. अभिभावक से शेयर नहीं करती, क्योंकि डरती है कि कहीं अभिभावक उन्हें ही गलत ना समझ बैठे... इस उधेरबुन का असर पढ़ाई पर भी पड़ता है. इसको लेकर अब स्कूल स्तर पर गुड टच, बैड टच की जानकारी दी जा रही है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड द्वारा निर्देश देने के बाद पटना के कई स्कूल में हर दिन एक पीरियड गुड टच बैड टच के लिए दे रहा है.
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जानकारी के साथ छात्राओं को मिल रहा काउंसेलिंग भी
गुड टच बैड टच के अलावा इस पीरियड में छात्राओं के लिए ओपेन सेशन होता है. इस दौरान छात्राएं अपनी बातों को खुल कर टीचर्स से बताती है. स्कूल की ओर से इन पीरियड में साइकोलॉजिस्ट के साथ सोइयोलॉजिस्ट को रखा जाता है. इससे छात्राओं को जानकारी देने के साथ काउंसेलिंग भी की जा सके. ज्ञात हो कि स्कूल में पहले से चल रहे काउंसेलिंग सेंटर पर छात्राओं को अपनी मरजी से जाना होता था, लेकिन गुड टच बैड टच पीरियड में हर छात्राओं को जाना अनिवार्य है.
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दिखाये जायेंगे कोमल मूवी
स्कूलों ने अब कोमल मूवी छात्राओं के बीच दिखाने का भी निर्णय लिया है. कई स्कूलों ने इसकी शुरुआत भी कर दी है. हर शनिवार को यह मूवी दिखाया जा रहा है. आधे घंटे के इस मूवी में परिवार और आस पास के लोग किस तरह से आपके साथ गलत कर सकते है और ऐसी स्थिति में आपको क्या व्यवहार करनी चाहिए, इसकी जानकारी दी गयी है. एक कार्टून कैरेक्टर के रूप में इस मूवी के माध्यम से सारी चीजें बतायी गयी है.
ये सारी बातों से अवेयर होंगी गर्ल्स स्टूडेंट्स
- कौन कैसे और किस मकसद से आपको टच करता है
- स्कूल टीचर के साथ अापके सहपाठी और आपके परिवार वाले भी गलत हो सकते है- कोई टच करें या बुरा व्यवहार करें तो तुरंत अपने अभिभावक से शेयर करें
- कोई अगर बार-बार आपके बॉडी की आेर देखे तो आप इसका तुरंत विरोध करें - सड़क पर चलते हुए हमेशा खुद पर ध्यान रखें. आस पास चलने वाले लोगों पर पूरा फोकस रखें
क्लास के दौरान इस तरह के प्रश्न पूछती है छात्राएं
- मैम, मै जहां ट्यूशन वाले टीचर पढ़ाते समय हाथ छूते रहते है. मै जब कुछ बोलती हूं तो सॉरी गलत से हो गया बोल कर हंस देते है
- मैम संस्कृत सर हमारे कंधे पर हाथ डाल देते है. क्या कहें समझ मे नहीं आता है - मैम, मेरे मौसा जी अक्सर मेरे पीठ को छूते है. कई बार मम्मी से बोली हूं, लेकिन वो बाेतली है प्यार से टच करते है, ध्यान मत दो
- ट्रेन में चढ़ते वक्त कई बार पीछे का व्यक्ति जिसे मै जानती नहीं, वो धक्का देकर उपर चढ़ने में मदद करता है. अच्छा नहीं लगता, पर मै बोल नहीं पाती हूं कोट
लड़कियों का यह नेचर होता है कि वो कोई भी बोलती नहीं है. कई बार स्कूल में हमने यह पकड़ा है. इसका असर उनके पढ़ाई पर होता है. लेकिन जब से गुड टच बैड टच का क्लास शुरू हुआ है, लड़कियां खुश और रिलैक्स रहती है. अपनी बातों को टीचर से शेयर करती है.
शाहिदा, प्रिंसिपल, रजा इंटरनेशनल गर्ल्स स्कूल
स्कूल कोयेड है. इस कारण इसकी जरूरत अधिक है. स्कूल में एकेडेमिक के साथ साइकोलॉजिकल बातों की भी जानकारी दी जाती है. इससे खास कर गर्ल्स स्टूडेंट्स को सामने वाले व्यवहार के बारे में पता चलता है.
ब्रदर सतीश, प्रिंसिपल, लोयेला हाई स्कूल
स्टूडेंट्स को यह बताना बहुत जरूरी है कि उनके लिए क्या अच्छा और क्या बुरा है. कोई अगर उन्हें छूता है तो उसके मनोस्थिति क्या हो सकती है. हर दिन एक पीरियड इसी टॉपिक पर क्लास लिये जाते है. इससे क्लास वन से सातवीं तक के छात्राओं को शामिल किया जाता है.
विशाखा, प्रिंसिपल, सेंट माइकल हाई स्कूल (प्रायमरी)
गुड टच बैड टच की जानकारी स्कूल स्तर पर देने से अलग से साइकोलॉजिस्ट की जरूरत नहीं होगी. क्योंकि कई बार छात्राएं एक दूसरे को देखकर समझती है कि घटनाएं केवल उन्हीं के साथ नहीं हो रहा है. दूसरी लड़कियां भी इससे पीड़ित है. ऐसे में वो खुल कर बातें करती है.
कुमुद श्रीवास्तव, साइकोलॉजिस्ट, सीबीएसइ
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Sunday, July 2, 2017
स्कूल-कॉलेज के स्टूडेंट्स पहुंच रहे नशा विमुक्ति केंद्र, कहते है गांजे की लत से छुटकारा दिलायें
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पटना के कई फेमस स्कूलों के स्टूडेंट्स को लग रही गांजे की लत
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने पकड़ा है अब तक 7884.47 किलो गांजा
रिंकू झा, पटना
जब घर का चिराग का रास्ता की भटक जाये तो उस अभिभावक का क्या होगा... सारी उम्मीदें तो बिखर कर रह जायेंगी... आंख से बहते हुए आंसू पोछते हुए डीपीएस का 9वीं का छात्र अनूप सिंह (काल्पनिक नाम) ने बताया कि दोस्तों के संग रहते हुए आदत लग गयी. मुझे नशे की लत नहीं थी, लेकिन दोस्तों के संग रहते हुए मुझे पहले शराब की लत लगी. जब शराब मिलना बंद हो गया तो गांजा लेने लगा. छात्र अनूप सिंह नशे के लत में पड़ चुका था, लेकिन पैरेंट्स को पता नहीं. जब पता चला तो उसे नशा विमुक्ति केंद्र में भरती करवाया गया. पिछले तीन महीने से अनूप सिंह अपना इलाज करवा रहा है. अनूप सिंह ने बताया कि जब एक बार नशा का लत लग जाता है तो इसका लगातार डिमांड बढ़ता जाता है. अगर इस दौरान गांजा नहीं लिया तो बहुत बेचैनी होती है. आत्मविश्वास डगमगाने लगता है. यह हाल कोई एक अनूप सिंह का नहीं है, बल्कि सैकड़ों युवा नशे के गिरफ्त में आ रहे है. इसमें पटना कई फेमस स्कूल और कॉलेज के छात्र शामिल है. इसमें डीएवी, बीडी पब्लिक स्कूल, सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, सेंट पाल्स हाई स्कूल, लॉ कॉलेज आदि के छात्र शामिल हैं.-
हर महीने 30 से 40 स्टूडेंट्स पहुंचते हैं नशा विमुक्ति केंद्र
शराब के लत से छुटकारा पाने वालों की संख्या अब पांच फीसदी रह गयी है, लेकिन उससे इतर गांजे की लत बुरी तरह से पकड़ रही है. इसमें युवा वर्ग की संख्या सबसे ज्यादा है. हितैशी नशा विमुक्ति केंद्र के डा. विवेक कुमार ने बताया कि हर महीने 30 से 40 पैरेंट्स बच्चे को लेकर पहुंच रहे है. इनकी उम्र 14 से 18 वर्ष तक की है. इसमें अधिकांश गांजे का सेवन कर रहे है. इनकी काउंसेलिंग की जाती है. काउंसेलिंग से बात नहीं बनती तो उन्हें फिर भर्ती किया जाता है.-
गांजे के साथ हेरोइन और स्मैक भी शामिल
पहले शराब का नशा था. जब से शराबबंदी हुई है तो गांजे के साथ हेरोइन, स्मैक, व्हाइटनर आदि को नशे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. इसमें सबसे ज्यादा गांजे की खपत है. स्कूल और कॉलेज के स्टूडेंट्स जो भी आसानी से उपलब्ध हो जाता है, उसका सेवन करते है. नाम नहीं छापने के शर्त पर सुमन गुप्ता (काल्पनिक नाम) बताया कि गांजा को सिगरेट में डाल कर हम पीते है. स्कूल के बाहर हमें पान की दुकान पर मिल जाता है. वैसे हमारे क्लास में एक लड़का है, वो भी लाकर हमें देता है. इसके बदले हम उसे पैसे देते है. -
एक साल में कई गुणा अधिक जब्त किया गया गांजा
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के आंकड़े के मुताबिक एक साल में गांजा की खपत काफी बढ़ गया है. जब से शराबबंदी हुई है, तब से गांजे का सप्लाइ काफी बढ़ गया है. साल 2016 में 496.3 किलो गांजा जब्त हुआ था जबकि साल 2017 अप्रैल तक 7884.47 किलो गांजा जब्त हो चुका है. हर दिन गांजे की सप्लाइ शहर में होती है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की माने तो चुकी यह काफी आसानी से पान की दुकान में उपलब्ध जाता है. कई स्कूल कॉलेज परिसर के बाहर भी छुट्टी के समय बिकता है. इससे इस आेर छात्र अधिक आकर्षित हो रहे हैं. -
पटना में सब्जीबाग और पटना सिटी है मुख्य केंद्र
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की माने तो पटना में सब्जीबाग और पटना सिटी का एरिया गांजे का मुख्य केंद्र है. वही से सभी जगहों पर सप्लाइ होती है. छोटे बच्चे को स्कूल की छुट्टी के समय देकर भेज दिया जाता है. इससे छात्रों को आसानी से उपलब्ध हो जाता है. -
तीन शहरों से आता है गांजा
बिहार में गांजा तीन शहरों से आता है. ओड़िशा के नवरंगपुर, मलकानगिरी जयपुर, ब्रह्मपुर, रामगढ़ से गांजा की सप्लाई होती है. इसके अलावा त्रिपुरा, मणिपुर ओर रायपुर छत्तीसगढ़ से भी गांजा बिहार में आता है.
कोट
गांजे की आवक और खपत दोनों ही बढ़ी है. गांजे के कारोबार से जुड़े लोग अब ज्यादा एक्टिव हो गये है, जिसकी पुष्टि हमारे जब्ती के आंकड़े करते हैं. पिछले एक साल में यह काफी बढ़ा है.
टीएन सिंह, जोनल डायरेक्टर, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो
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सांसद कोटे की अनुशंसा से केंद्रीय विद्यालय प्रशासन परेशान, लिखी संगठन को चिट्ठी
सांसद कोटे की अनुशंसा से केंद्रीय विद्यालय प्रशासन परेशान, लिखी संगठन को चिट्ठी
- 40 बैच का मानक, पर अधिक नामांकन के चलते एक कक्षा में पढ़ रहे 60 से 70 बच्चे
- शहर के तमाम केंद्रीय विद्यालय में सांसद कोटे से अब तक हो रहा नामांकन
संवाददाता, पटना
साल भर नामांकन चलता है. बीच सत्र में भी नामांकन ली जाती है. अभी तक प्राइवेट स्कूल में ही पैसे कमाने के मकसद से एक सेक्शन में 60 से 70 विद्यार्थी के नामांकन होती रही है, लेकिन अब यह स्थिति केंद्रीय विद्यालय में भी दिखने लगा है. अंतर बस इतना है कि यहां पर विद्यालय नहीं बल्कि सरकार द्वारा नामांकन करवाये जा रहे हैं. जी हां, पिछले दो सालों से केंद्रीय विद्यालय प्रशासन सांसद कोटे के नामांकन से परेशान हैं. आये दिन सांसद कोटे से नामांकन लेने का निर्देश विद्यालय प्रशासन के पास आता है और विद्यालय को नामांकन लेना पड़ता है. यह स्थिति प्रदेश भर के केंद्रीय विद्यालय में है. चूंकि राजधानी होने के कारण पटना के चार केंद्रीय विद्यालय पर इसका अधिक असर है. -
केवीएस को दी जा रही जानकारी
कैपेसिटी से अधिक नामांकन होने से विद्यालय पिछले दो साल से परेशान है. इसको लेकर कई केंद्रीय विद्यालय ने केवीएस को इसकी सूचना चिट्ठी लिख कर दिया है. केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड प्रशासन के अनुसार सांसद कोटे से लगातार नामांकन के लिए लोग आ रहे है. लेकिन हमारे पास सीट नहीं है. अब इसकी सूचना केवीएस को भेज दिया गया है. चिट्ठी के माध्यम से सीटें फुल होने की सूचना भी केवीएस को दी गयी है. केवी, दानापुर का भी यही हाल है. -
हर सेक्शन में 65 से 70 बच्चे
विद्यालय प्रशासन की माने तो हर क्लास में सांसद कोटे के तहत नामांकन होता है. इससे क्लास में यह स्थिति हो गयी है कि हर सेक्शन में 60 के उपर स्टूडेंट्स है. 65 से 70 तक कई सेक्शन में स्टूडेंट्स हो गये है. इससे पढ़ाई के माहौल पर असर पड़ रहा है. विद्यालय प्रशासन की माने तो क्लास रूम भी 40 छात्र के हिसाब से बनाया गया है. इससे 65 से 70 छात्रों को बैठने में भी दिक्कतें हो रही है. बेंच डेस्क रखने में भी विद्यालय को परेशानी होती है. -
40 स्टूडेंट्स पर हो एक शिक्षक
शिक्षा के अधिकार कानून की बात करें तो 40 स्टूडेंट्स पर एक शिक्षक का होना अनिवार्य है. इससे अधिक क्लास में स्टूडेंट्स नहीं होने चाहिए. इस कानून का उल्लंघन केंद्रीय विद्यालय में हो रहा है. सांसद कोटे में नामांकन की संख्या बढ़ा देने से छात्र और शिक्षक का यह रेसियो अब 40:1 से बढ़ कर 70:1 तक पहुंच गया है. -
कई महीनों तक चलता है नामांकन
वैसे तो केंद्रीय विद्यालय में नामांकन की पूरी प्रक्रिया ऑन लाइन कर दी गयी है. 2017 से पूरी तरह से आॅन लाइन ही नामांकन होते है. 11वीं तक के नामांकन को ऑन लाइन कर दिया गया है, लेकिन सांसद कोटे का नामांकन हमेशा चलता रहता है. केंद्रीय विद्यालय में नामांकन मई तक समाप्त हो जाता है. सांसद कोटे का नामांकन अक्तूबर तक चलता रहता है. इससे विद्यालय प्रशासन को कई तरह की मुश्किलें होती है. -
2015 से बढ़ा दी गयी है सांसद कोटा
मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा 2015 में सांसद कोटा को बढ़ा कर 12 कर दिया गया था. पहले यह कोटा दो की संख्या में था. यानी सांसद कोटे के तहत केंद्रीय विद्यालय में नामांकन दो ही करवा सकते है. लेकिन 2015 में इसे बढ़ा कर 12 कर दी गयी. सांसद कोटा तो बढ़ा दी गयी, लेकिन आधार भूत संरचना में कोई परिवर्तन नहीं किया गया. शिक्षकों की संख्या नहीं बढ़ायी गयी और ना ही सेक्शन बढ़ाया गया. इससे एक क्लास में 70 स्टूडेंट्स तक का नामांकन ली जा रही है.
कोट
हर क्लास में स्टूडेंट्स की संख्या बहुत ज्यादा हो गया है. इसका असर पढ़ाई पर हो रहा है. क्वालिटी एजुकेशन पर इसका असर दिखेगा. सांसद कोटे की संख्या बढ़ने से स्टूडेंट्स की संख्या हर क्लास में बढ़ती जा रही है.
आर वल्लभ, प्रिंसिपल, केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड
सांसद कोटे में नामांकन की संख्या बढ़ने से हर सेक्शन में 65 से 70 तक स्टूडेंट्स हो गये है. इसका असर क्वालिटी एजुकेशन पर पड़ने लगा है. शिक्षक के लिए भी परेशानी हो गया है. एक साथ इतनी संख्या में स्टूडेंट्स पर शिक्षक ध्यान नहीं दे पाते है.
सीवी कुमार, वाइस प्रिंसिपल, केंद्रीय विद्यालय, कंकड़बाग
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Wednesday, August 24, 2016
विज्ञान, गणित और अंग्रेजी का अब एक ही सिलेबस
- सीबीएसइ, आइसीएसइ और बिहार बोर्ड में एक ही सिलेबस से होगी पढ़ाई
संवाददाता, पटना
सीबीएसइ हो या आइसीएसइ बोर्ड हो या बिहार बोर्ड के छात्र हो, अब एक ही किताब से पढ़ाई होगी. सभी बोर्ड में विज्ञान, गणित और अंग्रेजी की एक ही सिलेबस को लागू किया जायेगा. इससे अभी तक सिलेबस की असामनता को समाप्त किया जा सकेगा. नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2016 के तहत यह किया जा रहा है. काउंसिल ऑफ बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन इन इंडिया (कोबसे) ने इसे एप्रूव कर दिया है. कोबसे के अनुसार 2017 के नये सेशन से इसे लागू कर दिया जायेगा. इसकी जानकारी जल्द ही तमाम स्टेट बोर्ड को दिया जायेगा.
- 9वीं से 12वीं तक होगा लागू
समान सिलेबस की शुरुआत कई चरणों में किया जायेगा. पहले चरण में इसे 9वीं से 12वीं तक में लागू किया जायेगा. इसके बाद दूसरे क्लास में एक सिलेबस काे लागू किया जायेगा. कोबसे के अनुसार अभी देश भर में 59 अधिकृत शिक्षा बोर्ड कोबसे के सदस्य हैं. इन सबका सिलेबस अलग-अलग है. सिलेबस एक नहीं होने से पढ़ाई में असमानता बनी रहती है. इसका असर क्वालिटी एजुकेशन पर पड़ रहा है.
- प्रतियोगी परीक्षा में मिलेगी सुविधा
सीबीएसइ को छोड़ तमाम बोर्ड के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिये अलग से सीबीएसइ का सिलेबस पढ़ाना होता था. चूंकि सीबीएसइ में एनसीइआरटी को ही फोकस किया जा रहा है. इस कारण दूसरे बोर्ड के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिये अपना बोर्ड के सिलेबस के अलावा एनसीइआरटी भी अलग से पढ़ना होता है. एक सिलेबस होने से छात्र एक ही सिलेबस को पढ़ेंगे.
- आइसीएसइ बोर्ड ने सीबीएसइ के अनुसार बनाया अपना सिलेबस
वहीं दूसरी ओर आइसीएसइ बोर्ड ने 9वीं से 12वीं तक के सिलेबस में परिवर्तन कर दिया है. जहां अभी तक आइसीएसइ बोर्ड में अपना सिलेबस होता था, वहीं अब सीबीएसइ के सिलेबस की पढ़ाई होगी. बोर्ड इसे 2017 से लागू भी करने जा रहा है. हाल में बोर्ड ने इसकी सूचना तमाम स्कूलों को दे दिया है.
कोट
यह काफी अच्छा प्रयास है. एक सिलेबस होने से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में काफी मदद मिलेगी. इसके अलावा अलग-अलग बुक पढ़ने की आवश्यकता स्टूडेंट्स को नहीं होगा. आइसीएसइ बोर्ड ने तो इसे समर्थन भी दे दिया है.
एफ हसन, सिटी कोर्डिनेटर, आइसीएसइ बोर्ड
समान शिक्षा तो सबसे बढ़िया है. इसे जल्द से जल्द लागू किया जायें. साइंस और मैथ का एक सिलेबस होने से स्टूडेंट्स को काफी फायदा मिलेगा. एक ही स्टूडेंट्स जहां अपडेट सिलेबस पढ़ते थे, वहीं दूसरे बोर्ड में ऐसा लागू नहीं था, इससे असमानता हो रही थी. अब उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा.
राजीव रंजन सिन्हा, सिटी कोर्डिनेटर, सीबीएसइ
समान शिक्षा होने से बच्चों के पठन पाठन एक तरीके का होगा. इससे पढ़ाई का स्तर एक जैसा बढ़ेगा. इससे स्टूडेंट्स में आत्मविश्वास बढ़ेगा अौर सफलता का ग्राफ भी अच्छा होगा.
डा. शंकर कुमार, शिक्षाविद्
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पोता, पोती, नाती और नतनी को मिलेगा शिक्षक नियोजन में आरक्षण, 24 अगस्त से जमा करें आवेदन
- आरक्षित सीटों के लिये 23 सितंबर तक लिये जायेंगे दुबारा आवेदन
संवाददाता, पटना
शिक्षक नियोजन में पाेता, पोती के साथ नाती और नतनी का फायदा मिलेगा. लेकिन इसके लिये आपके दादा-दादी या नाना-नानी को स्वतंत्रता सेनानी होना आवश्यक है. इसके साथ नियोजन कार्यालय के पास स्वतंत्रता सेनानी के पोता-पोती और नाती-नतनी है, इसे साबित करना होगा. यह जानकारी उन तमाम अभ्यर्थी को दिया जा रहा है जो स्वतंत्रता सेनानी के खानदान से खुद को बता रहे है. इन दिनों शिक्षक नियोजन कार्यालय में ऐसे अभ्यर्थी की लाइन लगी हुई है जिनके दादा-दादी या नाना-नानी स्वतंत्रता सेनानी रह चुके है. अब वो शिक्षक बनने के लिये इसका फायदा उठाना चाहते है. ज्ञात हो कि बिहार सरकार ने शिक्षक नियोजन में दो फीसदी स्वतंत्रता सेनानी के लिये आरक्षण दिया है. यह आरक्षण हर केटेगरी के लिये दिया गया है.
- आरक्षित सीटों के लिये 24 से लिये जायेंगे आवेदन
जिला परिषद और नगर निगम में शिक्षक नियोजन को लेकर महिलाओं के 35 फीसदी सीटों पर आरक्षण और दो फीसदी स्वतंत्रता सेनानी को आरक्षण दिया गया है. आरक्षित सीटों के लिये दुबारा आवेदन लिया जायेगा. इसके लिये 24 अगस्त से आवेदन मिलना शुरू हो जायेगा. आवेदन के साथ आरक्षण संबंधित कागजात भी जमा करना होगा. तभी अारक्षण का लाभ मिलेगा. आवेदन जमा करने के लिये 23 सितंबर तक का समय अभ्यर्थी को दिया जायेगा.
- हर केटेगरी की महिलाओं को मिलेगा 35 फीसदी आरक्षण का लाभ
वहीं 35 फीसदी महिलाओं के आरक्षण पर हर केटेगरी की महिलाओं को लाभ मिलेगा. इसमें सामान्य, बीसी, एससी, एसटी, इबीसी और आरएफ केटेगरी की महिलाएं शामिल है. हर केटेगरी के लिये रोस्टर तैयार कर लिया गया है. इसे बिहार शिक्षा विभाग के वेबसाइट पर डाल दिया गया है. रोस्टर के अनुसार ही आरक्षण का लाभ महिलाओं को मिलेगा. ज्ञात हो कि जिला परिषद और नगर निगम के शिक्षक नियोजन के लिये पहले आयें आवेदन में भी महिलाओं को यह लाभ मिलेगा. इसके अलावा दुबारा फिर महिला अभ्यर्थी से आवेदन मांगे गये है.
मान्यता घोटाला: 43 कॉलेजों का काला चिठ्ठा तैयार, बोर्ड सौपेंगा एसआइटी काे मोटी फाइल
- पांच लोगों की टीम कर रही जिलों में जाकर इन कॉलेजों की जांच
संवाददाता, पटना
कागजों पर कॉलेजों को मान्यता देने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है. पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह के फर्जी कॉलेजों को मान्यता देने की कहानी का पोल खुलना शुरू हो गया है. जहां बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से अपने स्तर पर कॉलेजों की जांच की जा रही है, वहीं एसआइटी भी अपने स्तर से जांच कर रही है. इसी कड़ी में एसआइटी ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से 43 कॉलेजों का मूल फाइल मांगा है. ये तमाम कॉलेज 208 कॉलेजों में शामिल है. इन कॉलेजो का मूल फाइल के साथ तमाम डिटेल्स बिहार बोर्ड की ओर से एसआइटी को उपलब्ध करवाया जा रहा है. एक दो दिनों में एसआइटी के पास 43 कॉलेजों के सारे मूल फाइल को सौंप दिया जायेगा.
- सारे कॉलेज नहीं करते है संबंद्धता मानक को पूरा
बिहार बोर्ड की माने तो 208 कॉलेजों में 43 कॉलेज संबंद्धता के मानक को पूरा नहीं कर रहा है. इसमें कई कॉलेज तो ऐसे है जो संबंद्धता की बैठक में शामिल तो हुए, लेकिन इनके संबंद्धता के लिये किसी तरह का जांच नहीं किया गया. कई कॉलेजों की तो पूर्व अध्यक्ष ने जांच भी नहीं करवायी थी. बोर्ड कर्मचारियों की माने तो कई जिलों के डीइओ ने जांच में कॉलेज के बारे में निगेटिव रिपोर्ट बिहार बोर्ड को सौंपा था, लेकिन पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद ने उसे भी संबंद्धता दे दिया.
- पांच लोगों की बनायी गयी जांच टीम
इन 43 कॉलेजों की जांच बिहार बोर्ड की ओर से किया जा रहा है. ये कॉलेज जिन जिलों में है, टीम वहां पर जाकर कॉलेज की जांच कर रही है. बोर्ड कर्मचारियों ने बताया कि जुलाई के दूसरे सप्ताह से जांच चल रही है. जांच टीम में संबंधित जिला के डीइओ, बिहार बोर्ड की ओर से एक कर्मचारी, संबंधित जिले के डीएम की ओर से दो अधिकारी और संबंधित जिले के एसपी की ओर से एक अधिकारी को शामिल किया गया है.
इन 43 कॉलेजों की मूल फाइल एसआइटी ने मांगा है
इन महाविद्यालयों को 29 और 30 अप्रैल 2016 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- गौरी रामदेव राय उच्च महाविद्यालय, सरमस्तपुर, वैशाली - मंजूर आलम उच्च विद्यालय, आंती, गया
- मखदूम बख्श मेमोरियल उच्च महाविद्यालय, उत्तरवाहिनी, चनपटिया, पश्चिम चंपारण - डा. वहाब मेमोरियल इंटर कॉलेज, रामपुरवा, गौनाहा, पश्चिम चंपारण
इन महाविद्यालयों को 11 से 25 नवंबर 2015 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- महात्मा गांधी इंटर कॉलेज, जहानाबाद
- भगवान सिंह उच्च माध्यमििक विद्यालय, विक्रमगंज, रोहतास - हरिनंदन चंद्रवंशी उच्च माध्यमिक विद्यालय, विक्रमगंज, रोहतास
- एमडी सैफ उच्च माध्यमिक विद्यालय, विक्रमगंज, रोहतास - जेएमडी उच्च माध्यमिक विद्यालय, विक्रमगंज, रोहतास
- मेहीं सेवी शिव शाही उच्च माध्यमिक विद्यालय, मधेपुरा - प्रगति उच्च माध्यमिक विद्यालय, बिहिया, भोजपुर
- सर्वविद्या उच्च स्तरीय प्लस टू विद्यालय, चांदी, भोजपुर
इन महाविद्यालयों को 8 से 12 दिसंबर 2015 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- एनएएच उच्च माध्यमिक विद्यालय, रेडिया, विक्रमगंज, रोहतास - संघमित्रा 10 प्लस टू उच्च माध्यमिक विद्यालय, महावीरगंज, दिनारा, रोहतास
- डा. रजा इमाम इंटरनेशनल कॉलेज, फुलवारीशरीफ, पटना - जनार्दन उच्च माध्यमिक विद्यालय, मुसहरदा, नरकटियागंज, पश्चिम चंपारण
- संतोष उच्च माध्यमिक प्लस टू विद्यालय, गुरारू, गया
इन महाविद्यालयों को 17 सितंबर, 21 सितंबर और 23 सितंबर 2014 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- स्कॉलर उच्च माध्यमिक विद्यालय, छपरा, सारण - डा. कमल किशोर प्रसाद राय युगल किशोर झा उच्च माध्यमिक विद्यालय हसनपुर, महनार, वैशाली
- महिला महाविद्यालय, झाझा, जमुई - केशव बिदेंश्वरी उच्च माध्यमिक विद्यालय, अरवल
- दीपा उच्च माध्यमिक विद्यालय, वैदराबाद, अरवल - मेगासॉफट फाउंडेशन उच्च माध्यमिक विद्यालय, एमजी रोड, औरंगाबाद
- सचिया अमृत उच्च माध्यमिक विद्यालय, सुपौल, अकबरपुर, नवादा - लखराजो देवी जमुना मिश्रा उच्च माध्यमिक विद्यालय, इंद्रार्थ, खुर्द, रोहतास
इन महाविद्यालयों को 20 और 21 मार्च 2016 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- श्री भगवान रमुना प्लस टू विद्यालय, प्रसादी इंगलिश, अरवल
- उदयनाचार्य विद्याकर कवि इंटर महाविद्यालय कडमा, आलमगंज, मधेपुरा - महाकाली रविनाथ मेमोरियल विद्यापीठ उच्च माध्यमिक विद्यालय, मकरंदा, मनिगाछी, दरभंगा
- पुनिदा सतन उच्च माध्यमिक विद्यालय, कालीचक, पहाड़पुर, गया - मां पानापति जतन उच्च माध्यमिक विद्यालय , माणिकपुर, बड़हिया, अरवल
इन महाविद्यालयों को 20 और 21 मई 2016 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- डा. रामानंद सिंह भगवान बुद्ध कॉलेज, हाजीपुर, वैशाली
- आचार्य नलिन उच्च माध्यमिक विद्यालय, कोष्डीहारा, गया - डी एन राय सहकारी महाविद्यालय, चकसिकंदर, बाकरपुर, वैशाली
- जगधर राय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बखरी बड़ाई, राजापाकड़, वैशाली - उषारविंद माध्यमिक सह उच्च माध्यमिक विद्यालय, अशोकनगर, जलालपुर, सारण
इन महाविद्यालयों को 17 अक्टूबर, 21 अक्टूबर और 23 अक्टूबर 2014 की बैठक में संबंद्धता दी गयी
- रमावती देवी बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, जतरा, सारण
- चंद्रजाति महाविद्यालय, सुतविहार, सारण - आशा बिहार मेमोरियल महाविद्यालय, जीतापुर, सारण
- राजेंद्र श्रीकंत महाविद्यालय, जलालपुर, सारण - राज आमी आरती बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, हिरताड़, समस्तीपुर
- महात्मा गांधी बालिका विद्यालय, पूर्वी चंपारण - गुमतका इंटर महाविद्यालय, पश्चिम चंपारण
- दीननारायण उच्च माध्यमिक, मधेपुरा
Monday, August 8, 2016
आरटीइ को किया अनदेखा : ना लिया नामांकन, ना दिया जुर्माना,
- शिक्षा के अधिकार के तहत 32 स्कूलों ने नहीं लिया अब तक एक भी नामांकन
- छह महीने पहले जारी हुआ स्कूलों के उपर नहीं लगा अब तक कोई जुर्माना
संवाददाता, पटना
शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन लेने का मन करेगा तो करेंगे और नहीं मन करेगा तो नहीं करेंगे. कुछ इसी फॉर्मूला को पटना के स्कूल फॉलो करते है. बिहार में 2011 से ही शिक्षा का अधिकार कानून लागू है, लेकिन छह साल बीत जाने के बाद स्कूलों तक पहुंच नहीं सका है. अगर हम बात राजधानी की करें तो, राजधानी में ही अभी भी 32 ऐसे स्कूल है जिन्हाेंने एक भी नामांकन शिक्षा के अधिकार के तहत नहीं लिया है. स्कूल अपनी मरजी से काम करते है. नामांकन नहीं लेने के कारण इन स्कूलों पर जुर्माना भी लगाया गया, लेकिन इन स्कूलों ने ना तो अभी तक जुर्माना दिया है और ना ही नामांकन ही लिया है.
- एक लाख रूपये का लगाया गया था जुर्माना
शिक्षा के अधिकार के तहत इन 32 स्कूलों पर एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया गया था. इन स्कूलों से नामांकन नहीं लेने का पहले स्पष्टीकरण पूछा गया था. लेकिन इन स्कूलों ने इसकी कोई जानकारी नहीं दिया. नामांकन नहीं लेने के कारण शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12 (एक) (सी) के तहत ऐसे निजी विद्यालयों पर आरटीइ के तहत कार्रवाई की जायेगी. कार्रवाई के तौर पर एक लाख रूपये का जुर्माना स्कूलों पर लगाया जायेगा. अगर यह जुर्माना स्कूल जमा नहीं करता है तो 10 हजार प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना लिया जायेगा. लेकिन अभी तक स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं किया गया है.
- पहुंचा राज्य सूचना आयोग
स्कूलों द्वारा आरटीइ के तहत नामांकन नहीं लेने का मामला अब राज्य सूचना आयोग पहुंच गया है. इसको लेकर 3 अगस्त को राज्य सूचना आयुक्त वीके वर्मा के पास सुनवाई भी हुआ. वाद संख्या - 99613/13-14 के तहत आयोग ने प्राथमिक शिक्षा से जल्द से जल्द स्कूल पर कार्रवाई करने को कहा है. आरटीआइ एक्टिविस्ट अजय कुमार ने बताया कि छह महीने पहले ही प्राथमिक शिक्षा विभाग के बाद स्कूलों की लिस्ट भेजी गयी है. लेकिन किसी भी स्कूल पर जुर्माना नहीं लगाया गया है.
कोट
शिक्षा के अधिकार के तहत 32 स्कूलों ने अभी तक नामांकन नहीं लिया है. ऐसे स्कूलों की सूची तैयार कर विभाग को फरवरी में ही भेजा गया. अभी तक स्कूल पर कार्रवाई नहीं किया गया है.
राम सागर प्रसाद सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान
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