Sunday, July 2, 2017

सांसद कोटे की अनुशंसा से केंद्रीय विद्यालय प्रशासन परेशान, लिखी संगठन को चिट्ठी

सांसद कोटे की अनुशंसा से केंद्रीय विद्यालय प्रशासन परेशान, लिखी संगठन को चिट्ठी


- 40 बैच का मानक, पर अधिक नामांकन के चलते एक कक्षा में पढ़ रहे 60 से 70 बच्चे
- शहर के तमाम केंद्रीय विद्यालय में सांसद कोटे से अब तक हो रहा नामांकन संवाददाता, पटना
साल भर नामांकन चलता है. बीच सत्र में भी नामांकन ली जाती है. अभी तक प्राइवेट स्कूल में ही पैसे कमाने के मकसद से एक सेक्शन में 60 से 70 विद्यार्थी के नामांकन होती रही है, लेकिन अब यह स्थिति केंद्रीय विद्यालय में भी दिखने लगा है. अंतर बस इतना है कि यहां पर विद्यालय नहीं बल्कि सरकार द्वारा नामांकन करवाये जा रहे हैं. जी हां, पिछले दो सालों से केंद्रीय विद्यालय प्रशासन सांसद कोटे के नामांकन से परेशान हैं. आये दिन सांसद कोटे से नामांकन लेने का निर्देश विद्यालय प्रशासन के पास आता है और विद्यालय को नामांकन लेना पड़ता है. यह स्थिति प्रदेश भर के केंद्रीय विद्यालय में है. चूंकि राजधानी होने के कारण पटना के चार केंद्रीय विद्यालय पर इसका अधिक असर है. - केवीएस को दी जा रही जानकारी
कैपेसिटी से अधिक नामांकन होने से विद्यालय पिछले दो साल से परेशान है. इसको लेकर कई केंद्रीय विद्यालय ने केवीएस को इसकी सूचना चिट्ठी लिख कर दिया है. केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड प्रशासन के अनुसार सांसद कोटे से लगातार नामांकन के लिए लोग आ रहे है. लेकिन हमारे पास सीट नहीं है. अब इसकी सूचना केवीएस को भेज दिया गया है. चिट्ठी के माध्यम से सीटें फुल होने की सूचना भी केवीएस को दी गयी है. केवी, दानापुर का भी यही हाल है. - हर सेक्शन में 65 से 70 बच्चे
विद्यालय प्रशासन की माने तो हर क्लास में सांसद कोटे के तहत नामांकन होता है. इससे क्लास में यह स्थिति हो गयी है कि हर सेक्शन में 60 के उपर स्टूडेंट्स है. 65 से 70 तक कई सेक्शन में स्टूडेंट्स हो गये है. इससे पढ़ाई के माहौल पर असर पड़ रहा है. विद्यालय प्रशासन की माने तो क्लास रूम भी 40 छात्र के हिसाब से बनाया गया है. इससे 65 से 70 छात्रों को बैठने में भी दिक्कतें हो रही है. बेंच डेस्क रखने में भी विद्यालय को परेशानी होती है. - 40 स्टूडेंट्स पर हो एक शिक्षक
शिक्षा के अधिकार कानून की बात करें तो 40 स्टूडेंट्स पर एक शिक्षक का होना अनिवार्य है. इससे अधिक क्लास में स्टूडेंट्स नहीं होने चाहिए. इस कानून का उल्लंघन केंद्रीय विद्यालय में हो रहा है. सांसद कोटे में नामांकन की संख्या बढ़ा देने से छात्र और शिक्षक का यह रेसियो अब 40:1 से बढ़ कर 70:1 तक पहुंच गया है. - कई महीनों तक चलता है नामांकन
वैसे तो केंद्रीय विद्यालय में नामांकन की पूरी प्रक्रिया ऑन लाइन कर दी गयी है. 2017 से पूरी तरह से आॅन लाइन ही नामांकन होते है. 11वीं तक के नामांकन को ऑन लाइन कर दिया गया है, लेकिन सांसद कोटे का नामांकन हमेशा चलता रहता है. केंद्रीय विद्यालय में नामांकन मई तक समाप्त हो जाता है. सांसद कोटे का नामांकन अक्तूबर तक चलता रहता है. इससे विद्यालय प्रशासन को कई तरह की मुश्किलें होती है. - 2015 से बढ़ा दी गयी है सांसद कोटा
मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा 2015 में सांसद कोटा को बढ़ा कर 12 कर दिया गया था. पहले यह कोटा दो की संख्या में था. यानी सांसद कोटे के तहत केंद्रीय विद्यालय में नामांकन दो ही करवा सकते है. लेकिन 2015 में इसे बढ़ा कर 12 कर दी गयी. सांसद कोटा तो बढ़ा दी गयी, लेकिन आधार भूत संरचना में कोई परिवर्तन नहीं किया गया. शिक्षकों की संख्या नहीं बढ़ायी गयी और ना ही सेक्शन बढ़ाया गया. इससे एक क्लास में 70 स्टूडेंट्स तक का नामांकन ली जा रही है.
कोटहर क्लास में स्टूडेंट्स की संख्या बहुत ज्यादा हो गया है. इसका असर पढ़ाई पर हो रहा है. क्वालिटी एजुकेशन पर इसका असर दिखेगा. सांसद कोटे की संख्या बढ़ने से स्टूडेंट्स की संख्या हर क्लास में बढ़ती जा रही है.
आर वल्लभ, प्रिंसिपल, केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड सांसद कोटे में नामांकन की संख्या बढ़ने से हर सेक्शन में 65 से 70 तक स्टूडेंट्स हो गये है. इसका असर क्वालिटी एजुकेशन पर पड़ने लगा है. शिक्षक के लिए भी परेशानी हो गया है. एक साथ इतनी संख्या में स्टूडेंट्स पर शिक्षक ध्यान नहीं दे पाते है.
सीवी कुमार, वाइस प्रिंसिपल, केंद्रीय विद्यालय, कंकड़बाग \\\\B

No comments:

Post a Comment