Tuesday, July 4, 2017

हर दिन एक पीरियड 'गुड टच बैड टच' के लिए



- सीबीएसइ और आइसीएसइ के कई स्कूलों ने शुरू किया क्लास, गर्ल्स स्टूडेंट्स को किया जा रहा अवेयर
संवाददाता, पटना किसी ने छू लिया. कुछ अजीब से महसूस हुआ. सड़क पर आते जाते लोग ने जानबूझ कर टच कर दिया और सॉरी कह कर चल दिये... अक्सर आयें दिन इन सिच्युएशन का सामना खासकर लड़कियां करती हैं. कई बार वो इसे इग्नोर कर छोड़ देती हैं, तो कई बार मानसिक रूप से उसका असर भी हो जाता है. अभिभावक से शेयर नहीं करती, क्योंकि डरती है कि कहीं अभिभावक उन्हें ही गलत ना समझ बैठे... इस उधेरबुन का असर पढ़ाई पर भी पड़ता है. इसको लेकर अब स्कूल स्तर पर गुड टच, बैड टच की जानकारी दी जा रही है. सीबीएसइ और आइसीएसइ बोर्ड द्वारा निर्देश देने के बाद पटना के कई स्कूल में हर दिन एक पीरियड गुड टच बैड टच के लिए दे रहा है.
- जानकारी के साथ छात्राओं को मिल रहा काउंसेलिंग भी गुड टच बैड टच के अलावा इस पीरियड में छात्राओं के लिए ओपेन सेशन होता है. इस दौरान छात्राएं अपनी बातों को खुल कर टीचर्स से बताती है. स्कूल की ओर से इन पीरियड में साइकोलॉजिस्ट के साथ सोइयोलॉजिस्ट को रखा जाता है. इससे छात्राओं को जानकारी देने के साथ काउंसेलिंग भी की जा सके. ज्ञात हो कि स्कूल में पहले से चल रहे काउंसेलिंग सेंटर पर छात्राओं को अपनी मरजी से जाना होता था, लेकिन गुड टच बैड टच पीरियड में हर छात्राओं को जाना अनिवार्य है.
- दिखाये जायेंगे कोमल मूवी स्कूलों ने अब कोमल मूवी छात्राओं के बीच दिखाने का भी निर्णय लिया है. कई स्कूलों ने इसकी शुरुआत भी कर दी है. हर शनिवार को यह मूवी दिखाया जा रहा है. आधे घंटे के इस मूवी में परिवार और आस पास के लोग किस तरह से आपके साथ गलत कर सकते है और ऐसी स्थिति में आपको क्या व्यवहार करनी चाहिए, इसकी जानकारी दी गयी है. एक कार्टून कैरेक्टर के रूप में इस मूवी के माध्यम से सारी चीजें बतायी गयी है.
ये सारी बातों से अवेयर होंगी गर्ल्स स्टूडेंट्स - कौन कैसे और किस मकसद से आपको टच करता है
- स्कूल टीचर के साथ अापके सहपाठी और आपके परिवार वाले भी गलत हो सकते है- कोई टच करें या बुरा व्यवहार करें तो तुरंत अपने अभिभावक से शेयर करें
- कोई अगर बार-बार आपके बॉडी की आेर देखे तो आप इसका तुरंत विरोध करें - सड़क पर चलते हुए हमेशा खुद पर ध्यान रखें. आस पास चलने वाले लोगों पर पूरा फोकस रखें
क्लास के दौरान इस तरह के प्रश्न पूछती है छात्राएं - मैम, मै जहां ट्यूशन वाले टीचर पढ़ाते समय हाथ छूते रहते है. मै जब कुछ बोलती हूं तो सॉरी गलत से हो गया बोल कर हंस देते है
- मैम संस्कृत सर हमारे कंधे पर हाथ डाल देते है. क्या कहें समझ मे नहीं आता है - मैम, मेरे मौसा जी अक्सर मेरे पीठ को छूते है. कई बार मम्मी से बोली हूं, लेकिन वो बाेतली है प्यार से टच करते है, ध्यान मत दो
- ट्रेन में चढ़ते वक्त कई बार पीछे का व्यक्ति जिसे मै जानती नहीं, वो धक्का देकर उपर चढ़ने में मदद करता है. अच्छा नहीं लगता, पर मै बोल नहीं पाती हूं कोट
लड़कियों का यह नेचर होता है कि वो कोई भी बोलती नहीं है. कई बार स्कूल में हमने यह पकड़ा है. इसका असर उनके पढ़ाई पर होता है. लेकिन जब से गुड टच बैड टच का क्लास शुरू हुआ है, लड़कियां खुश और रिलैक्स रहती है. अपनी बातों को टीचर से शेयर करती है. शाहिदा, प्रिंसिपल, रजा इंटरनेशनल गर्ल्स स्कूल
स्कूल कोयेड है. इस कारण इसकी जरूरत अधिक है. स्कूल में एकेडेमिक के साथ साइकोलॉजिकल बातों की भी जानकारी दी जाती है. इससे खास कर गर्ल्स स्टूडेंट्स को सामने वाले व्यवहार के बारे में पता चलता है. ब्रदर सतीश, प्रिंसिपल, लोयेला हाई स्कूल
स्टूडेंट्स को यह बताना बहुत जरूरी है कि उनके लिए क्या अच्छा और क्या बुरा है. कोई अगर उन्हें छूता है तो उसके मनोस्थिति क्या हो सकती है. हर दिन एक पीरियड इसी टॉपिक पर क्लास लिये जाते है. इससे क्लास वन से सातवीं तक के छात्राओं को शामिल किया जाता है. विशाखा, प्रिंसिपल, सेंट माइकल हाई स्कूल (प्रायमरी)
गुड टच बैड टच की जानकारी स्कूल स्तर पर देने से अलग से साइकोलॉजिस्ट की जरूरत नहीं होगी. क्योंकि कई बार छात्राएं एक दूसरे को देखकर समझती है कि घटनाएं केवल उन्हीं के साथ नहीं हो रहा है. दूसरी लड़कियां भी इससे पीड़ित है. ऐसे में वो खुल कर बातें करती है. कुमुद श्रीवास्तव, साइकोलॉजिस्ट, सीबीएसइ
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