Rinku Jha
Sunday, July 2, 2017
स्कूल-कॉलेज के स्टूडेंट्स पहुंच रहे नशा विमुक्ति केंद्र, कहते है गांजे की लत से छुटकारा दिलायें
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पटना के कई फेमस स्कूलों के स्टूडेंट्स को लग रही गांजे की लत
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने पकड़ा है अब तक 7884.47 किलो गांजा
रिंकू झा, पटना
जब घर का चिराग का रास्ता की भटक जाये तो उस अभिभावक का क्या होगा... सारी उम्मीदें तो बिखर कर रह जायेंगी... आंख से बहते हुए आंसू पोछते हुए डीपीएस का 9वीं का छात्र अनूप सिंह (काल्पनिक नाम) ने बताया कि दोस्तों के संग रहते हुए आदत लग गयी. मुझे नशे की लत नहीं थी, लेकिन दोस्तों के संग रहते हुए मुझे पहले शराब की लत लगी. जब शराब मिलना बंद हो गया तो गांजा लेने लगा. छात्र अनूप सिंह नशे के लत में पड़ चुका था, लेकिन पैरेंट्स को पता नहीं. जब पता चला तो उसे नशा विमुक्ति केंद्र में भरती करवाया गया. पिछले तीन महीने से अनूप सिंह अपना इलाज करवा रहा है. अनूप सिंह ने बताया कि जब एक बार नशा का लत लग जाता है तो इसका लगातार डिमांड बढ़ता जाता है. अगर इस दौरान गांजा नहीं लिया तो बहुत बेचैनी होती है. आत्मविश्वास डगमगाने लगता है. यह हाल कोई एक अनूप सिंह का नहीं है, बल्कि सैकड़ों युवा नशे के गिरफ्त में आ रहे है. इसमें पटना कई फेमस स्कूल और कॉलेज के छात्र शामिल है. इसमें डीएवी, बीडी पब्लिक स्कूल, सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, सेंट पाल्स हाई स्कूल, लॉ कॉलेज आदि के छात्र शामिल हैं.-
हर महीने 30 से 40 स्टूडेंट्स पहुंचते हैं नशा विमुक्ति केंद्र
शराब के लत से छुटकारा पाने वालों की संख्या अब पांच फीसदी रह गयी है, लेकिन उससे इतर गांजे की लत बुरी तरह से पकड़ रही है. इसमें युवा वर्ग की संख्या सबसे ज्यादा है. हितैशी नशा विमुक्ति केंद्र के डा. विवेक कुमार ने बताया कि हर महीने 30 से 40 पैरेंट्स बच्चे को लेकर पहुंच रहे है. इनकी उम्र 14 से 18 वर्ष तक की है. इसमें अधिकांश गांजे का सेवन कर रहे है. इनकी काउंसेलिंग की जाती है. काउंसेलिंग से बात नहीं बनती तो उन्हें फिर भर्ती किया जाता है.-
गांजे के साथ हेरोइन और स्मैक भी शामिल
पहले शराब का नशा था. जब से शराबबंदी हुई है तो गांजे के साथ हेरोइन, स्मैक, व्हाइटनर आदि को नशे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. इसमें सबसे ज्यादा गांजे की खपत है. स्कूल और कॉलेज के स्टूडेंट्स जो भी आसानी से उपलब्ध हो जाता है, उसका सेवन करते है. नाम नहीं छापने के शर्त पर सुमन गुप्ता (काल्पनिक नाम) बताया कि गांजा को सिगरेट में डाल कर हम पीते है. स्कूल के बाहर हमें पान की दुकान पर मिल जाता है. वैसे हमारे क्लास में एक लड़का है, वो भी लाकर हमें देता है. इसके बदले हम उसे पैसे देते है. -
एक साल में कई गुणा अधिक जब्त किया गया गांजा
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के आंकड़े के मुताबिक एक साल में गांजा की खपत काफी बढ़ गया है. जब से शराबबंदी हुई है, तब से गांजे का सप्लाइ काफी बढ़ गया है. साल 2016 में 496.3 किलो गांजा जब्त हुआ था जबकि साल 2017 अप्रैल तक 7884.47 किलो गांजा जब्त हो चुका है. हर दिन गांजे की सप्लाइ शहर में होती है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की माने तो चुकी यह काफी आसानी से पान की दुकान में उपलब्ध जाता है. कई स्कूल कॉलेज परिसर के बाहर भी छुट्टी के समय बिकता है. इससे इस आेर छात्र अधिक आकर्षित हो रहे हैं. -
पटना में सब्जीबाग और पटना सिटी है मुख्य केंद्र
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की माने तो पटना में सब्जीबाग और पटना सिटी का एरिया गांजे का मुख्य केंद्र है. वही से सभी जगहों पर सप्लाइ होती है. छोटे बच्चे को स्कूल की छुट्टी के समय देकर भेज दिया जाता है. इससे छात्रों को आसानी से उपलब्ध हो जाता है. -
तीन शहरों से आता है गांजा
बिहार में गांजा तीन शहरों से आता है. ओड़िशा के नवरंगपुर, मलकानगिरी जयपुर, ब्रह्मपुर, रामगढ़ से गांजा की सप्लाई होती है. इसके अलावा त्रिपुरा, मणिपुर ओर रायपुर छत्तीसगढ़ से भी गांजा बिहार में आता है.
कोट
गांजे की आवक और खपत दोनों ही बढ़ी है. गांजे के कारोबार से जुड़े लोग अब ज्यादा एक्टिव हो गये है, जिसकी पुष्टि हमारे जब्ती के आंकड़े करते हैं. पिछले एक साल में यह काफी बढ़ा है.
टीएन सिंह, जोनल डायरेक्टर, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो
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